ABP के अविनाश पांडे बोले, फ्री टू एयर नहीं होने चाहिए न्यूज चैनल

चुनावी दौर में न्यूज चैनलों की व्युअरशिप और रेवेन्यू में काफी बढ़ोतरी...

Last Modified:
Friday, 07 December, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

चुनावी दौर में न्यूज चैनलों की व्युअरशिप और रेवेन्यू में काफी बढ़ोतरी हो जाती है। ऐसे में आगामी चुनाव को देखते हुए विभिन्न चैनल अपनी स्ट्रेटजी तैयार करने में जुटे हैं। ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के सीओओ अविनाश पांडे का कहना है,‘चुनावी शो जैसे- ‘देश का मूड’, ‘सियासत का सेंसेक्स’  और ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ से चैनल ने अपनी प्रोग्रामिंग को रफ्तार दी है। यदि पिछले आम चुनावों या यूपी के चुनावों की बात करें तो किसी भी न्यूज चैनल की व्युअरशिप जनरल ऐंटरटेनमेंट चैनलों से ज्यादा थी। वैसे भी चुनाव के दौरान रेटिंग बहुत ज्यादा हो जाती है और यह बात सिर्फ टीवी नहीं, बल्कि डिजिटल पर भी लागू होती है।‘

उनका कहना है, ‘हिंदी टीवी न्यूज की बात करें तो यह मार्केट काफी अव्यवस्थित है और अधिकांश प्लेयर्स बिजनेस की अलग-अलग स्टेज पर हैं। ऐसे में यह कहना बहुत मुश्किल है कि इंडस्ट्री के रूप में हमें क्या करना चाहिए। लेकिन नई शुरुआत करने वालों के लिए कहूंगा कि न्यूज चैनल फ्री टू एयर नहीं होने चाहिए। न्यूज चैनलों को अपने रेट में सुधार करने की जरूरत है। सभी मार्केट लीडर्स को कीमतों में बढ़ोतरी के लिए आवाज उठानी चाहिए।’

अविनाश पांडे के अनुसार, ‘करीब छह साल पहले इस चैनल के नाम से स्टार शब्द हट गया था। इसके बाद यह ‘एबीपी न्यूज’ हो गया था। उस समय यह सवाल उठता था कि आनंद बाजार पत्रिका (एबीपी) टीवी न्यूज के बिजनेस में खुद को कैसे स्थापित करेगी और क्या यह दर्शकों को बांधे रखने में अच्छा काम कर सकती है। समय के साथ एबीपी न्यूज पहले के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में है। 31 मार्च 2018 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के नतीजों की बात करें तो हिंदी और बंगाली न्यूज चैनल, ‘एबीपी न्यूज’ और ‘एबीपी आनंद’ के दमदार प्रदर्शन के चलते ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के शुद्ध लाभ में 61 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।‘  

अविनाश पांडे के अनुसार,‘आजतक’ के सिवा हम ही ऐसे चैनल है, जिसकी पहुंच 100 मिलियन से ज्यादा लोगों तक है और हम दो नंबर के निकट हैं। लेकिन जहां तक इस अंतर को पाटने की बात है तो कई ऐसे चैनल हैं, जो खुद के नंबर वन होने का दावा करते हैं लेकिन मेरी नजर में 'आजतक' सबसे आगे बना हुआ है। हम भी इस दौड़ में शामिल हैं और इस दिशा में आगे बढ़ना चाहेंगे।

हमसे उलट, हमारे कुछ प्रतिद्वंद्वी रात को आठ, नौ और दस बजे विज्ञापन न चलाकर रेटिंग ले रहे हैं लेकिन जिस दिन वे विज्ञापन चलाना शुरू करेंगे, रेटिंग गिर जाएगी। इन चैनलों को देखने के लिए सबस्क्राइबर्स भुगतान नहीं कर रहे हैं और टॉप शो के दौरान विज्ञापन भी नहीं दिखाए जा रहे हैं। यह कैसा बिजनेस मॉडल है, मैं नहीं समझ पाता हूं।‘  

उनका कहना है, ‘यदि एबीपी न्यूज की बात करें तो हम काफी संतुलित चैनल है और प्राइम टाइम  और दूसरे टाइम स्लॉट में समान रूप से विज्ञापन भी दिखाते हैं। ऐसा करने से हमें विज्ञापन देने वालों को भी फायदा होता है। जब वे हमारे कार्यक्रमों के बीच में अपने विज्ञापन दिखाते हैं, तो उन्हें हमारी रेटिंग का भी कुछ शेयर मिल जाता है। चूंकि एबीपी न्यूज फ्री टू एयर (FTA) चैनल है, इसलिए यह रेवेन्यू के लिए विज्ञापन पर निर्भर रहता है।‘  

अविनाश पांडे का कहना है, ‘नए-नए प्रोग्रामिंग आइडिया की बात करें तो एबीपी न्यूज हमेशा सबसे आगे रहता है। हमारे चैनल ने ही सबसे पहले न्यूजरूम से बाहर निकलकर कोई न्यूज प्रोग्राम किया था। इसके अलावा विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न विधायकों के बीच सबसे पहले प्रेजिडेंशियल स्टाइल में हमने ही डिबेट कराई थी। सबसे पहले हमने ही अपराध की घटनाओं पर आधारित कार्यक्रम सनसनी शुरू किया था। इसके अलावा ‘सास बहू और साजिश’ शो से टेलिविजन धारावाहिकों के बीच में कमेंटरी की शुरुआत भी हमारे चैनल ने ही की थी। आज के दौर में तो विभिन्न चैनल हमारी नकल ही कर रहे हैं।’  

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