enba 2018: 'आज तक' व India Today बने बेस्ट न्यूज चैनल, देखें पूरी लिस्ट यहां

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्संचेंज4मीडिया न्यूमज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 16 फरवरी को नोएडा के...

Last Modified:
Monday, 18 February, 2019
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समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 16 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित एक समारोह में दिए गए। इनबा का यह 11वां एडिशन था।

समारोह में ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ABP News Network) के सीईओ अविनाश पांडे को प्रतिष्ठित ‘न्यूज टेलिविजन सीईओ ऑफ द ईयर’ और ‘मिरर नाउ’ (Mirror Now) कr फे डिसूजा को ‘न्यूज टेलिविजन एडिटर-इन-चीफ ऑफ द ईयर’ (अंग्रेजी) के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वहीं, हिंदी में ‘आजतक’ (Aaj Tak) के एडिटर-इन-चीफ सुप्रिय प्रसाद को ‘न्यूज टेलिविजन एडिटर-इन-चीफ ऑफ द ईयर’ के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

न्यूज चैनलों की बात करें तो इंग्लिश कैटेगरी में ‘इंडिया टुडे टीवी’ (India Today TV) को ‘न्यूज चैनल ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड दिया गया, जबकि इसी कैटेगरी में जूरी चॉइस विजेता ‘मिरर नाउ’ (Mirror Now) रहा। हिंदी कैटेगरी में ‘आजतक’ (AajTak) ने ‘न्यूज चैनल ऑफ द ईयर’ का अवॉर्ड अपने नाम किया, जबकि इसी कैटेगरी में जूरी चॉइस अवॉर्ड ‘एनडीटीवी इंडिया’ (NDTV India)  और ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) को दिया गया।

गौरतलब है कि वर्ष 2008 में अपनी शुरुआत के बाद से ही यह अवॉर्ड मीडिया में कार्यरत उन शख्सियतों को दिया जाता है, जिन्‍होंने देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को एक नई दिशा दी है और इस इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

विजेताओं की पूरी लिस्ट को आप यहां देख सकते हैं-

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TV इंडस्ट्री ने 2018-19 में चली ऐसी ‘चाल’, रिपोर्ट में आया ये ‘हाल’

‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है

Last Modified:
Friday, 17 January, 2020
TV CHANNELS

‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018-19 में देश में टेलिविजन इंडस्ट्री की ग्रोथ में 12.12 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वर्ष 2017-18 में 66000 करोड़ रुपए से बढ़कर यह इंडस्ट्री वर्ष 2018-19 में 74000 करोड़ रुपए की हो गई है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूरी इंडस्ट्री के रेवेन्यू में सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू का शेयर 58.7 प्रतिशत है, जबकि बाकी का रेवेन्यू एडवर्टाइजिंग से आया है।  

अब सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू की बात करें तो इसमें भी 10.69 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2017-18 के दौरान जहां सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू 39300 करोड़ रुपए था, वह वर्ष 2018-19 में बढ़कर 43500 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, इस अवधि के दौरान एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू भी 14.23 प्रतिशत की दर से बढ़कर 30,500 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि वर्ष 2017-18 के दौरान यह 26700 करोड़ रुपए था।

इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2018 तक देश के 298 मिलियन घरों में से करीब 197 मिलियन घरों में टेलिविजन सेट है। इन 197 मिलियन घरों में दूरदर्शन के टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (terrestrial network) के साथ ही केबल टीवी सर्विस, डीटीएच सर्विस आदि के द्वारा सेवाएं दी जा रही हैं। दूरदर्शन के टेरेस्ट्रियल नेटवर्क की पहुंच देश में सबसे ज्यादा है और टेरेस्ट्रियल ट्रांसमीटर्स के काफी बड़े नेटवर्क के द्वारा देश की करीब 92 प्रतिशत आबादी तक इसकी पहुंच बनी हुई है। करीब 103 मिलियन घरों में केबल टीवी लगा हुआ है, 72.44 मिलियन घरों में डीटीएच के माध्यम से टीवी देखा जाता है। टेलिविजन ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर की बात करें तो इसमें 350 ब्रॉडकास्टर्स शामिल हैं और इनमें से 39 ब्रॉडकास्टर्स पे चैनल्स (pay channels) का प्रसारण कर रहे हैं।

वहीं, टेलिविजन डिस्ट्रीब्यूशन का रुख करें तो सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) में 1469 मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs), करीब 60,000 केबल ऑपरेटर्स, दो हिट्स (HITS) ऑपरेटर्स, पांच पे डीटीएच ऑपरेटर्स और कुछ ‘आईपीटीवी ऑपरेटर्स’ (IPTV operators) रजिस्टर्ड हैं। इसके अलावा पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘दूरदर्शन’ भी देश में फ्री-टू-एयर डीटीएच सर्विस उपलब्ध कराता है। 31 मार्च 2019 तक सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 902 प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनल्स को मंजूरी दे रखी थी। इनमें से 229 स्टैंडर्ड डेफिनेशन (SD) और 99 हाई डेफिनेशन (HD) पे टीवी चैनल्स हैं।

देश में वर्ष 2010 में सूचना प्रसारण मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त चैनल्स की संख्या 524 थी, जो वर्ष 2019 में बढ़कर 902 हो गई है। वहीं, स्टैंडर्ड डेफिनेशन (SD) पे चैनल्स की संख्या वर्ष 2010 में 147 के मुकाबले अब बढ़कर वर्ष 2019 में 229 हो गई। ट्राई ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि पिछले दस वर्षों में ब्रॉडकास्टर्स द्वारा बड़ी संख्या में हाई डेफिनेशन (HD) पे टीवी चैनल्स लॉन्च किए गए हैं और अब देश में कुल 99 हाई डेफिनेशन (HD) पे टीवी चैनल्स संचालित हो रहे हैं।

ट्राई की इस रिपोर्ट में ‘फ्रीक्वेंसी मॉडुलेशन’ (FM) रेडियो ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर का भी जिक्र किया गया है, जिसमें प्रभावी ग्रोथ दर्ज की गई है। रेडियो इंडस्ट्री पूरी तरह एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर निर्भर करती है और वर्ष 2018-19 के दौरान इसमें 9.74 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है। एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और वर्ष 2017-18 में 2381.51 करोड़ एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू के मुकाबले वर्ष 2018-19 में बढ़कर यह 2517.56 करोड़ रुपए हो गया है।

ट्राई की इस वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2019 तक पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) के टेरेस्ट्रियल रेडियो नेटवर्क (terrestrial radio network) के अलावा देश में 356 प्राइवेट एफएम रेडियो स्टेशन संचालित थे।

‘ऑल इंडिया रेडियो’ की सर्विस देश के 99.20 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र के साथ करीब 99019 प्रतिशत आबादी को कवर करती हैं। जहां तक कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की बात है तो मार्च 2019 के आखिर तक देश में 215 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन चालू हो गए थे।

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महिला पत्रकार के ऐसा करने पर कांग्रेस पार्षद का फूटा गुस्सा, फिर कर दी ये हरकत

पीड़ित पत्रकार का नाम तबस्सुम है और वह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के लिए काम करती हैं। तबस्सुम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर घटना के बारे में विस्तार से बताया है।

Last Modified:
Friday, 17 January, 2020
congress

सत्ता का नशा जब सिर पर चढ़ जाए तो फिर कुछ समझ नहीं आता। महाराष्ट्र में एक कांग्रेस पार्षद ने मेट्रो स्टेशन पर महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। पत्रकार का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने रेल कर्मचारियों पर गुस्सा निकालने से पार्षद को रोकने का प्रयास किया था। इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पीड़ित पत्रकार का नाम तबस्सुम (Tabassum Barnagarwala) है और वह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के लिए काम करती हैं। तबस्सुम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर घटना के बारे में विस्तार से बताया है। उनके मुताबिक, जब वह मेट्रो स्टेशन में दाखिल हुईं, तो ठाने से कांग्रेस पार्षद विक्रांत चव्हाण को रेल कर्मचारियों पर चिल्लाते पाया। उन्होंने कर्मचारियों से चव्हाण के गुस्से की वजह जाननी चाही, तो जवाब मिला कि वह कॉर्पोरेटर हैं, इसीलिए चिल्ला रहे हैं, कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं।’ कुछ देर तक तबस्सुम सबकुछ देखती रहीं, लेकिन जब कर्मचारियों के लाख समझाने के बावजूद पार्षद साहब शांत नहीं हुए, तो उन्होंने बीच-बचाव करने का फैसला लिया।

पत्रकार होने के नाते तबस्सुम ने जब पार्षद विक्रांत चव्हाण से सवाल-जवाब किए, तो वह एकदम से नाराज हो गए। उन्होंने तबस्सुम से वहां से निकल जाने के लिए कहा, इस पर पत्रकार ने अपने मोबाइल से विडियो बनाना शुरू कर दिया। कैमरा देखते ही चव्हाण इस कदर बौखला गए कि तबस्सुम का हाथ झटक दिया। हालांकि तब तक यह पूरा वाकया कैमरे में कैद हो चुका था। मामला बढ़ता देख कांग्रेस पार्षद विक्रांत चव्हाण स्टेशन से निकलते बने, इसके बाद महिला पत्रकार ने सोशल मीडिया पर पार्षद की करतूत से सबको अवगत कराया। तबस्सुम ने चव्हाण के खिलाफ किसी तरह की शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

उन्होंने इस संबंध में ट्वीट कर कहा है ‘इस घटना के बाद मुझे काफी कॉल आये, आप सभी का धन्यवाद। मेरा उद्देश्य केवल सत्ता के दुरुपयोग को सामने लाना था। न मैं पीड़ित हूं और न ही मुझे कोई चोट आई है। चव्हाण ने विडियो रोकने के लिए मुझ पर हमला किया था, मैं कोई पुलिस कंप्लेंट नहीं चाहती।’ मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पार्षद विक्रांत चव्हाण की जमकर आलोचना हो रही है।

घटना का विडियो आप नीचे दिए ट्वीट में देख सकते हैं: 

 

 

 

 

 

 

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जानिए, किस बात पर भड़के पूर्व डीजीपी, पत्रकार से कहा- ‘नशे में हो क्या?’

केरल के पूर्व डीजीपी टीपी सेनकुमार द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान पत्रकार के साथ न केवल धक्का-मुक्की बल्कि मारपीट भी की गई।

Last Modified:
Friday, 17 January, 2020
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केरल के पूर्व डीजीपी टीपी सेनकुमार द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान पत्रकार के साथ न केवल धक्का-मुक्की बल्कि मारपीट भी की गई, जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य पत्रकारों ने भी इसका विरोध किया। हालांकि पीड़ित पत्रकार ने पूर्व डीजीपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

दरअसल, यह वाकया गुरुवार को उस समय हुआ, जब त्रिवेंदम क्लब में पूर्व डीजीपी श्री नारायण धर्म परिपालन योगम केस को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान पत्रकार कदाविल राशिद ने वहां खड़े होकर पूर्व डीजीपी से एक सवाल पूछ लिया। केरल में नेता प्रतिपक्ष रमेश चेनिथला ने हाल ही में बयान दिया था कि टीपी सेनकुमार की डीजीपी के रूप में नियुक्ति बड़ी गलती थी। सवाल इसी से जुड़ा था, लिहाजा सवाल सुनकर पूर्व डीजीपी भड़क गए और पत्रकार से कहा, ‘क्या आप नशे में हैं? आप जिस तरह से बात और व्यवहार कर रहे हैं, उसके लगता है कि आप नशे में हैं?’

हालांकि इसके बाद पूर्व डीजीपी पत्रकार को कमरे से बाहर जाने को कहते हैं। इसके बाद पूर्व डीजीपी के सहयगियों ने पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की की और उसे कमरे से बाहर निकालने लगे। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अन्य पत्रकार भी समर्थन में खड़े हो गए और पूर्व डीजीपी के सहयोगियों का बदसलूकी के लिए विरोध किया।

वहीं वर्किंग जनर्लिस्ट की केरल यूनिट ने टीपी सेनकुमार से माफी की मांग की है। दूसरी तरफ, पीड़ित पत्रकार ने भी पूर्व डीजीपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। घटना का विडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है।   

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सहारा में वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय की कामयाबी को लगे 'नए पंख'

उपेंद्र राय ने कुछ माह पूर्व ही सहारा समूह की मास मीडिया कंपनी से मेनस्ट्रीम मीडिया में वापसी की है

Last Modified:
Thursday, 16 January, 2020
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‘सहारा इंडिया मीडिया’ (Sahara India Media) के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय की जिम्मेदारियों में और इजाफा किया गया है। उन्हें अब ‘सहारा वन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट’ की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसकी घोषणा सहाराश्री ने एक सर्कुलर के जरिए की है।

बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय ने कुछ माह पूर्व ही सहारा समूह की मास मीडिया कंपनी से मेनस्ट्रीम मीडिया में वापसी की है। उस दौरान उन्हें कंपनी में बतौर सीनियर एडवाइजर नियुक्त किया गया था। इसके बाद कंपनी ने उपेंद्र राय की जिम्मेदारी में परिवर्तन करते हुए उन्हें ‘सहारा इंडिया मीडिया’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी सौंपी थी।  

गौरतलब है कि उपेन्द्र राय पूर्व में 'तहलका' (Tehelka) समूह और सहारा समूह में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह 'बिजनेस वर्ल्ड' मैगजीन (Businessworld Magazine) के साथ भी एडिटोरियल एडवाइजर के तौर पर जुड़े रह चुके हैं। राय ने अपने करियर की शुरुआत 1 जून, 2000 को लखनऊ में ‘राष्ट्रीय सहारा’ से की थी। उन्होंने यहां विभिन्न पदों पर काम किया और वे यहां सबसे कम उम्र के ब्यूरो चीफ बनकर मुंबई पहुंचे।

इसके बाद वे साल 2002 में ‘स्टार न्यूज’ की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। वहां उन्हें दो साल से भी कम समय में वरिष्ठ संवाददाता बनने का मौका मिला। वहीं से 'सीएनबीसी टीवी18' (CNBC TV18) में 10 अक्टूबर, 2004 को प्रमुख संवाददाता के रूप में जॉइन किया।

बतौर विशेष संवाददाता अक्टूबर 2005 में 'स्टार न्यूज' (अब 'एबीपी न्यूज') में वापसी की और दो वर्षो के अंदर एक और पदोन्नति मिली और चैनल में सबसे युवा असोसिएट एडिटर बन गए। फिर जनवरी 2010 से दिसंबर 2014 तक 'सहारा न्यूज नेटवर्क' में एडिटर और न्यूज डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाली। साथ ही वे इस दौरान प्रिंटर और पब्लिशर की भूमिका में भी रहे।

उपेंद्र राय की जिम्मेदारी में इजाफे को लेकर सहाराश्री द्वारा जारी किए गए सर्कुलर को आप यहां देख सकते हैं।

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मीडिया के बारे में कही गई इस बात से PCI खफा, CM को भेजा नोटिस

केंद्र और राज्यों की सत्ता पर काबिज होने वालीं कई सियासी पार्टियों द्वारा मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशें वक्त-वक्त पर की जाती रहती हैं

Last Modified:
Thursday, 16 January, 2020
PCI

केंद्र और राज्यों की सत्ता पर काबिज होने वालीं कई सियासी पार्टियों द्वारा मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशें वक्त-वक्त पर की जाती रहती हैं। इसके लिए विज्ञापन को सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यानी बात मानने वाले को ‘विज्ञापन’ और नहीं मानने वाले को ‘इंतजार’। इसी तरह का ‘प्रयास’ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले साल किया था, जिसके कारण अब उन्हें नोटिस का सामना करना पड़ा है।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने गहलोत को नोटिस भेजकर दो हफ्ते में जवाब मांगा है। इसके आलावा, सोशल मीडिया पर अपने इस अलोकतांत्रिक ‘प्रयास’ के लिए उनकी आलोचना भी हो रही है। वहीं, विपक्ष में बैठी भाजपा भी एकदम से आक्रामक हो गई है। दरअसल, सरकार के एक साल पूरा होने के मौके पर 16 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बातों-बातों में यह कह डाला था कि विज्ञापन चाहिए तो हमारी खबर दिखानी होगी। पत्रकारों से मुखातिब होते हुए गहलोत ने कहा था ‘मीडिया संस्थान करोड़ों के विज्ञापन लेते हैं, लेकिन सरकार की योजनाओं का कोई प्रचार-प्रसार नहीं करते। इसके लिए मीडिया वालों को फोन करके अनुरोध करना पड़ता है. हम नज़र रखे हुए हैं, विज्ञापन चाहिए तो हमारी खबर दिखानी होगी।’   

मुख्यमंत्री की इस तरह खुलेआम ‘धमकी’ को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने गंभीरता से लिया है। पीसीआई अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने नोटिस जारी करते हुए अशोक गहलोत से प्रेस काउंसिल एक्ट 1979 की धारा 13 के तहत दो हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इस नोटिस पर मुख्यमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं दी है, लेकिन भाजपा को उन्हें निशाने पर लेने का मौका जरूर मिल गया है। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है कि ‘अशोक गहलोत देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनसे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने नोटिस भेजा है, इससे साबित होता है कि मौजूदा सरकार मीडिया की आजादी के लिए खतरा है। 

बता दें कि 1966 में अस्तित्व में आई प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) एक अर्द्ध न्यायिक और स्वायत्त संगठन है। पीसीआई के पास दो स्पष्ट अधिकार हैं। पहला प्रेस और पत्रकारों की आजादी की रक्षा करना और दूसरा पत्रकारिता में नैतिकता की निगरानी और इसके ऊंचे मानकों को बरकरार रखना।

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केबल टीवी ऑपरेटर्स को अब कुछ यूं भारी पड़ सकती है नियमों की अनदेखी

‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ ने प्रस्तावित केबल टेलिविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) संशोधन विधेयक 2020 को लेकर आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव/फीडबैक मांगे हैं

Last Modified:
Thursday, 16 January, 2020
Cable

‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने प्रस्तावित केबल टेलिविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) संशोधन विधेयक 2020 को लेकर आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव/फीडबैक मांगे हैं। ‘एमआईबी’ का कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों को लेकर कोई भी व्यक्ति अथवा स्टेकहोल्डर अपने विचार, कमेंट्स और सुझाव 17 फरवरी 2020 तक भेज सकता है।  

केबल टेलिविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) विधेयक 1995 में जो संशोधित प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, उनमें जुर्माना राशि बढ़ा दी गई है। इसके अलावा प्रोग्राम कोड और एडवर्टाइजिंग कोड का उल्लंघन करने पर दंड को लेकर एक नया सबसेक्शन शामिल किया गया है। इसके तहत पहली बार अपराध करने पर दो साल तक की कैद अथवा दस हजार रुपए का जुर्माना अथवा दोनों सजा दी जा सकती हैं। वहीं, इसके बाद प्रत्येक बार किए गए इस तरह के अपराध के लिए पांच साल तक की कैद और पचास हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।   

प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, केंद्र सरकार दूरदर्शन के चैनल्स अथवा संसद की ओर से संचालित किए जा रहे चैनल्स के नाम तय कर सकती है, जिन्हें केबल ऑपरेटर्स द्वारा अपनी केबल सर्विस में शामिल करना होगा और उनका प्रसारण करना होगा। इस प्रस्तावित संशोधन में मौजूदा सेक्शन 4ए के सबसेक्शन (1) को खत्म कर दिया गया है। इस प्रावधान के तहत केबल ऑपरेटर को दूरदर्शन के दो टेरेस्ट्रियल चैनल्स (terrestrial channels) और जिस राज्य में वह केबल सर्विस चला रहा है, वहां की प्रादेशिक भाषा के एक चैनल को शामिल करने की सीमा थी। इसके अलावा ब्रॉडबैंड इंटरनेट के उचित इस्तेमाल के साथ ही डाटा मेंटीनेंस को मैनुअल से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से किए जाने समेत कई प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।

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जानिए, क्यों चैनल के खिलाफ महिला आयोग पहुंची ये छात्रा

जेएनयू परिसर में कथित तौर पर नकाब पहनकर हमला करने वाली दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा कोमल शर्मा ने एक नेशनल न्यूज चैनल के डायरेक्टर और रिपोर्टर के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।

Last Modified:
Thursday, 16 January, 2020
komal

जेएनयू (JNU) परिसर में कथित तौर पर नकाब पहनकर हमला करने वाली दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा कोमल शर्मा ने एक नेशनल न्यूज चैनल के डायरेक्टर और रिपोर्टर के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। 20 वर्षीय छात्रा कोमल का आरोप है कि जेएनयू (JNU) परिसर में 5 जनवरी को नकाब पहनकर हमला करने वाली छात्रा वह नहीं है। चैनल ने उन्हें कथित तौर पर एक आरोपित के रूप में पेश करके बदनाम किया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग के अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि कोमल ने एक नेशनल न्यूज चैनल के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग से शिकायत की है कि जेएनयू में पांच जनवरी की हिंसा के मामले में उनका नाम गलत तरीके से शामिल किया गया है और संबंधित टीवी चैनल ने इस पर प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण के लिए उनसे संपर्क भी नहीं किया। विडियो में नजर आ रही लड़की वह नहीं है। उसने आयोग से इस मामले पर गौर करने का आग्रह किया है। वहीं आयोग ने भी मीडिया के साथ-साथ दिल्ली पुलिस को इस मामले को देखने के लिए पत्र लिखा है।

बता दें कि पुलिस ने कोमल शर्मा की पहचान कथित तौर पर उस नकाबपोश लड़की के रूप में की है जो चेक वाला शर्ट पहने हुए थी और हल्के नीले रंग के स्कार्फ से अपना चेहरा ढके हुए थी। उसके हाथ में एक लाठी भी थी। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी मान लिया है कि कोमल संगठन की सदस्य है। मारपीट का कथित विडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल है। पुलिस ने बताया कि शर्मा का फोन शनिवार की रात से ही बंद है।

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मीडिया मुगल डॉ. अनुराग बत्रा के नाम जुड़ी ये शानदार उपलब्धि

डॉ. अनुराग बत्रा मीडिया जगत में काफी जाना-माना नाम हैं और एक एंटरप्रिन्योर के रूप में अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने खास मुकाम हासिल किया है

Last Modified:
Wednesday, 15 January, 2020
anuragsir

मीडिया मुगल डॉ. अनुराग बत्रा के खाते में एक और शानदार उपलब्धि जुड़ गई है। दरअसल, ‘ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन’(AICTE) ने ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा को मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (MDI), गुरुग्राम के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का मेंबर नियुक्त किया है। यह पहली बार है जब ‘MDI’ ने अपने किसी पूर्व छात्र को बोर्ड में शामिल किया है।  

इस पद पर डॉ. बत्रा की नियुक्ति के बारे में ‘AICTE’ के चेयरमैन प्रो. अनिल. डी सहस्रबुद्धे का कहना है, ‘डॉ. बत्रा की नियुक्ति ‘AICTE’ की उस पहल के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य इंडस्ट्री के दिग्गजों के अनुभव और जानकारी का इस्तेमाल कर बिजनेस शिक्षण संस्थानों को और आगे बढ़ाना है। डॉ. बत्रा मीडिया जगत में काफी जाना-माना नाम हैं और एक एंटरप्रिन्योर के रूप में अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने खास मुकाम हासिल किया है।

डॉ. बत्रा को बोर्ड में शामिल किए जाने पर ‘MDI’ के डायरेक्टर डॉ. पवन कुमार सिंह का कहना है, ‘डॉ. बत्रा इस संस्थान के काफी प्रतिभाशाली छात्र रहे हैं, जिन पर हमारी फैकल्टी और छात्रों को काफी गर्व है। इंस्टीट्यूट के बोर्ड में उनकी नियुक्ति काफी खुशी की बात है। इस पद पर नियुक्ति से हम सभी को उनके अनुभवों का काफी लाभ मिलेगा।’

वहीं, अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. बत्रा का कहना है, ‘इंस्टीट्यूट पहले से ही काफी बेहतर कर रहा है और मैं अपनी तरफ से बोर्ड और डायरेक्टर को पूरी तरह से हर संभव सपोर्ट करूंगा।’

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सनकी आशिक ने LIVE चैनल पर कबूली प्रेमिका की हत्या, बताई वजह

चंडीगढ़ के एक निजी चैनल पर लाइव इंटरव्यू के दौरान एक सनकी आशिक ने अपनी प्रेमिकी की हत्या की बात कबूल की, जिसे सुनकर हर कोई सन्न रह गया।

Last Modified:
Wednesday, 15 January, 2020
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चंडीगढ़ के एक निजी चैनल पर लाइव इंटरव्यू के दौरान एक सनकी आशिक ने अपनी प्रेमिकी की हत्या की बात कबूल की, जिसे सुनकर हर कोई सन्न रह गया। आरोपित ने चैनल को बताया कि उसकी प्रेमिका उसे धोखा दे रही थी, जिसके चलते ही उसने उसे मार दिया।

दरअसल, सरबजीत नामक एक नर्स की एक जनवरी को चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 स्थित स्काई होटल में गले में सुआ घोंपकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से ही पुलिस जांच पड़ताल में जुटी हुई थी और उसके प्रेमी की तलाश में जुटी हुई थी। लेकिन, हत्यारोपित प्रेमी मनिंदर सिंह को पुलिस ने उस वक्त दबोच लिया, जब वह एक निजी चैनल पर लाइव इंटरव्यू दे रहा था। इंटरव्यू के दौरान उसने हत्या की बात कबूली। आरोपित ने चैनल को बताया कि सरबजीत उसे धोखा दे रही थी जिसके चलते उसे मार दिया।

बता दें कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित मनिंदर सिंह फरार था। वह पंजाब के अलग-अलग जगहों पर छिप रहा था। मंगलवार दोपहर इंटरव्यू के दौरान पुलिस ने गुप्त सूचना पर उसे दबोच लिया और अब उसके खिलाफ सेक्टर-31 थाने में मामला दर्ज किया है।  

गौरतलब है कि एक एक जनवरी को इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 स्थित स्काई होटल के कमरा नंबर 301 में 29 वर्षीय नर्स सरबजीत कौर का गला कटा शव मिला था। वह भिवानीगढ़ स्थित काकरा गांव की रहने वाली थी।  

पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपित मनिंदर सिंह ने ही 30 दिसंबर की शाम होटल बुक किया था और दोनों को अगले दिन यानी 31 दिसंबर को दोपहर 12 बजे होटल से चेकआउट करना था। यही याद दिलाने जब होटलकर्मी ने जब कमरे का दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। काफी देर इंतजार करने के बाद जब होटल स्टाफ ने मास्टर की से कमरे का दरवाजा खोला, तो सरबजीत का शव बेड पर पड़ा था। पुलिस जब होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला तो आरोपी 30 दिसंबर को 11.56 बजे होटल से बाहर जाते दिखा। इसके बाद से ही आरोपित फरार चल रहा था।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित मनिंदर सिंह इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में प्राइवेट जॉब करता था और तीन महीने पहले उसने अपनी नौकरी छोड़ दी थी। साल 2010 में उसने अपनी पहली प्रेमिका की भी हत्या कर दी थी। सदर करनाल थाना पुलिस ने उस समय मनिंदर को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। करीब साढ़े पांच साल सजा काटने के बाद मनिंदर को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी।

सरबजीत चार भाई-बहन थे, जिनमें वह सबसे छोटी थी। वह मोहाली स्थित एक हॉस्टल में रहकर नौकरी कर रही थी। बीते 26 दिसंबर को पीजीआई में वह तीन महीने के लिए नर्सिंग की ट्रेनिंग पर थी। सरबजीत के परिजनों से पूछताछ में सामने आया था कि वह पिछले दो सालों से मनिंदर सिंह के साथ रिलेशनशिप में थी और दोनों एक-दूसरे से शादी करने चाहते थे। लेकिन सरबजीत के परिजनों को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने इस शादी से इनकार कर दिया था।

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TRAI के फैसले के खिलाफ टीवी ब्रॉडकास्टर्स ने अब उठाया ये कदम

इससे पहले टीवी ब्रॉडकास्टर्स के विरोध को देखते हुए ट्राई ने आगे आकर कही थी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत की बात

Last Modified:
Tuesday, 14 January, 2020
TRAI

‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (ट्राई) द्वारा टैरिफ ऑर्डर में किए गए संशोधन के खिलाफ ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation) ने अब कोर्ट की शरण ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘आईबीएफ’ ने बॉम्बे हाई कोर्ट में ट्राई के खिलाफ याचिका दायर की है। इस मामले में 14 जनवरी को सुनवाई होगी।  

इससे पहले, इस मुद्दे पर टीवी ब्रॉडकास्टर्स के विरोध को देखते हुए ट्राई आगे आया था। ‘ट्राई’ के चेयरमैन आरएस शर्मा ने नए टैरिफ ऑर्डर-2.0 (NTO 2.0) को कंज्यूमर्स के हित में बताते हुए कहा था कि वे इस मुद्दे पर स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) के साथ चर्चा के लिए तैयार हैं। शर्मा का यह भी कहना था, ‘नया टैरिफ ऑर्डर-2.0 (NTO 2.0) सिर्फ पहले ऑर्डर का संशोधित रूप है। पिछले संशोधन में कुछ खामियां थीं, जिन्हें नए टैरिफ ऑर्डर-2.0 में दूर किया गया है। ट्राई किसी भी चैनल बुके के खिलाफ नहीं है।’

शर्मा के अनुसार, नए टैरिफ ऑर्डर कंज्यूमर्स को 130 रुपए में 100 के बजाय 200 चैनल मिलेंगे। पहले 130 रुपए में 100 चैनल दिए गए थे और इनमें प्रसार भारती द्वारा प्रसारित किए जाने वाले अनिवार्य चैनल भी शामिल थे, जबकि अब 130 रुपए में ही कंज्यूमर्स को 200 चैनल मिलेंगे और यह प्रसार भारती के अनिवार्य चैनल्स से अलग होंगे।

बता दें कि ट्राई ने नए साल की शुरुआत में केबल और प्रसारण सेवाओं के लिए नई टैरिफ पॉलिसी पेश की, जिसके तहत ब्रॉडकास्टर्स को निर्देश दिया गया है कि चैनलों के अधिकतम मूल्य को 19 रुपए घटाकर 12 रुपए किया जाए, ताकि केबल टीवी के ग्राहकों को इसका लाभ मिल सके और वे कम कीमत पर अधिक चैनल देख सकें। वहीं 12 रुपए से अधिक कीमत वाले सभी टीवी चैनल किसी भी बुके का हिस्सा नहीं होंगे। इन चैनलों को ग्राहक अलग से ले सकेंगे। वह केबल चैनल जो 12 रुपए या उससे कम की कीमत वाले हैं उनके लिए एक अलग से ग्रुप बनाया जा सकता है।

1 जनवरी को जारी की गई इस नई टैरिफ पॉलिसी में ट्राई ने यह भी साफ कर दिया है कि कोई भी केबल ऑपरेटर अपने एक प्लेटफॉर्म पर सभी फ्री-टू-एयर चैनलों के लिए प्रतिमाह 160 रुपए से ज्यादा नहीं वसूलेगा। ट्राई ने अपनी इस नई पॉलिसी में एक ही घर या फिर ऑफिस में एक से अधिक कनेक्शन लेने पर 40 फीसदी छूट देने की भी बात कही है। अभी दोनों से समान पैसा वसूला जाता है।

वहीं ट्राई ने इसे लागू करने की समय सीमा भी तय कर दी है। ट्राई के मुताबिक ब्रॉडकास्टर्स को 15 जनवरी तक अपने चैनल की दरों में बदलाव करने होंगे और इसे अपनी वेबसाइट पर डालनी होगी। 30 जनवरी तक दोबारा सभी चैनल्स की रेट लिस्ट पब्लिश करनी होगी, ताकि उपभोक्ता को चैनल चुनने में आसानी हो। ट्राई ने 1 मार्च 2020 से ये नई दरें लागू करने की बात कही है।

दरअसल, ट्राई का नई पॉलिसी जारी करने का मकसद न केवल ग्राहकों को लाभ पहुंचाना है, बल्कि उन केबल ऑपरेटर्स की मनमानी को भी रोकना है, जो एक चैनल का नाम लेकर तमाम ऐसे चैनलों का ग्रुप बना देते हैं जिसे ग्राहक देखना नहीं चाहता था। हालांकि ट्राई ने पिछले साल नई टैरिफ व्यवस्था लागू की थी, जिसमें दर्शक केवल उन्हीं चैनल के लिए पैसे देंगे, जिन्हें देखना चाहते हैं। वहीं, टीवी ब्रॉडकास्टर्स द्वारा ट्राई के इस फैसले का विरोध किया जा रहा है।

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