NDTV पर छापे को तमाम वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा आपातकाल जैसी स्थिति

एनडीटीवी पर सीबीआई के छापों और प्रेस की आजादी की रक्षा के लिए शुक्रवार को प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया ने एक बैठक का आयोजन किया...

Last Modified:
Saturday, 10 June, 2017
Samachar4media

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

एनडीटीवी पर सीबीआई के छापों और प्रेस की आजादी की रक्षा के लिए शुक्रवार को प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया ने एक बैठक का आयोजन किया, जिसमें विभिन्‍न मीडिया संगठनों के तमाम पत्रकार एकत्रित हुए। यह बैठक नई दिल्ली के प्रेस क्‍लब में आयोजित की गई।

इस दौरान देश के जाने-माने पत्रकारों ने एक सुर में एनडीटीवी पर छापे की कड़ी भर्तसना करते हुए इसे प्रेस की आजादीपर हमला और लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बताया और कहा कि सरकार की यह कार्रवाई आपातकाल के दिनों की याद दिलाती है, इसलिए मीडिया बिरादरी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लामबंद होने की जरूरत है।


इस बैठक में वयोवृद्ध पत्रकार एस। निहाल सिंह, कुलदीप नैय्यरहिन्दुस्तान टाइम्स के पूर्व संपादक एच.के. दुआ, पूर्व केंद्रीय मंत्री व जाने-माने पत्रकार अरुण शौरी, इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व संपादक शेखर गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के प्रमुख राज चेंगप्पा, चर्चित पत्रकार टीएन नाइनन और जनसत्ता के पूर्व संपादक ओम थानवी समेत कई बड़े पत्रकार शामिल रहे, साथ ही प्रख्यात विधिवेत्ता व राज्यसभा के पूर्व सदस्य फली नरीमन समेत कई कानूनविद भी इस चर्चा का हिस्‍सा बने।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्‍ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा, 'मुझे लगता है कि वर्तमान माहौल में चुप रहना कोई विकल्‍प नहीं है। यह वो क्षण है जब हमें इतिहास में सही किनारे पर खड़ा होना होगा।

वरिष्‍ठ पत्रकार एचके दुआ ने कहा, 'पिछली दफा प्रेस के ज्‍यादातर लोग खड़े नहीं हुए थे और जैसा कि आडवाणी ने कहा था, वो रेंग रहे थे। उसके बाद अवमानना विधेयक आया। हम इकट्ठा हुए हैं, यह एक राष्‍ट्रीय आंदोलन बन जाएगा। राजीव गांधी बात करना चाहते थे, लेकिन हमने इनकार कर दिया। प्रेस की एकता ने लड़ाई जीत ली थी। विधेयक वापस लेना पड़ा, क्‍योंकि लोग उसके खिलाफ थे। वैसे ही संकेत अब भी दिख रहे हैं। अगर हम एकजुट हों तो हम फिर से उसे दोहरा सकते हैं।

इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटर इन चीफ अरुण पुरी ने कहा, मेरा दृढ़तापूर्वक कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता को छीना नहीं जा सकता। उन्‍होंने कहा कि ऐसा कदम बोलने की आजादी के सिद्धांत को भी कमजोर करता है।

वरिष्‍ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने कहा, आपातकाल के दौरान किसी को किसी से ये नहीं कहना पड़ता था कि क्‍या करना है। सभी जानते थे कि क्‍या करना है। तब इंडियन एक्‍सप्रेस एक प्रतीक बन गया था। आज, जब हम कमोबेश वैसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं, हालांकि उस स्‍तर का नहीं, हम सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हम किसी को भी बोलने की आजादी छीनने ना दें।

पूर्व केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ पत्रकार अरुण शौरी ने कहा, 'मैं नरेंद्र मोदी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। उन्‍होंने इतने सारे मित्रों को साथ ला दिया। मेरे पास उनके लिए एक दोहा है: वो जो आपसे पहले इस सिंहासन पर बैठा था, उसे भी यही यकीन था कि वह खुदा है। पहले उन्‍होंने विज्ञापनों जैसे प्रोत्‍साहन दिए, फिर डर का ये माहौल। और अब वो दबाव डालने के लिए तीसरे साधन का उपयोग कर रहे हैं। उन्‍होंने एनडीटीवी को एक उदाहरण बना दिया है।

उन्होंने कहा कि हुकूमत की प्र‍कृति की वजह से यह आने वाले महीनों में और भी ज्‍यादा उग्र होगा। मौजूदा सरकार सर्वसत्तावादी है। जिस किसी ने भी भारत में प्रेस पर हाथ डालने की कोशिश की, वो अपने हाथ जला बैठा। उन्होंने आगे कहा कि एनडीटीवी द्वारा दिए गए तथ्‍यों का सीबीआई जवाब तक नहीं दे पा रही है।


वहीं एनडीटीवी के सह संस्‍थापक डॉ. प्रणय रॉय ने कहा, मुझे ये करना बिल्‍कुल भी अच्‍छा नहीं लग रहा। हम आज इन महानुभावों की मेहबानी से हैं। हम इनकी छाया में बढ़ते हैं। एक बार मैं चीन गया, वहां मुझसे पूछा गया क्‍या आपको हमारी गगनचुंबी इमारतें (स्‍काइस्‍क्रैपर्स) देखकर थोड़ी जलन नहीं होती? मैंने कहा, हमारे पास सर्वश्रेष्‍ठ स्‍काइस्‍क्रैपर्स हैं- आजाद माहौल। यह खोखला मामला केवल एनडीटीवी के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह हम सब के लिए एक संकेत है। 'हम आपको दबा सकते हैं, भले ही आपने कुछ न किया हो।' प्रेस की आजादी भारत के लिए सर्वश्रेष्‍ठ बात है। उनका संदेश है, 'घुटनों के बल चलो या फिर हम तुम्‍हें झुका देंगे। मैं कहता हूं- उनके सामने खड़े हो जाओ, और वो कभी ऐसा नहीं कर पाएंगे।'

उन्होंने कहा कि हम किसी एजेंसी के खिलाफ नहीं लड़ रहे। वो भारत की संस्‍थाएं हैं, लेकिन हम उन नेताओं के खिलाफ हैं जो इनका गलत इस्‍तेमाल कर रहे हैं।

जीई मनी लाउंड्रिंग मामले पर बोलते हुए उन्‍होंने कहा, 'मैं शर्मिंदा हूं कि हमारे नेता ऐसा आरोप लगा सकते हैं।' हम सभी आरोपों का जवाब देंगे। हम बस इतना चाहते हैं कि समयसीमा तय हो। तीन साल में सरकार ने 21 बार स्‍थगन की मांग की। उन्‍होंने कहा, 'मैंने या राधिका ने एक रुपया भी काला पैसा नहीं रखा है। हमने कभी किसी को रिश्‍वत नहीं दी है।'

जाने-माने संविधान विशेषज्ञ फली एस. नरीमन ने एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय रॉय के आवास की तलाशी लेने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की निंदा की। नरीमन ने आयोजित पत्रकारों की बैठक में कहा कि अपराध के लिए किसी पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन इस मामले में सीबीआई ने जो कारण बताया है, उससे उन्हें पूरा विश्वास हो गया है कि यह प्रेस और मीडिया की आजादी पर हमला है।

उन्होंने कहा कि सीबीआई ने दो जून को एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें 2008-09 के दौरान घटी किसी घटना को लेकर रॉय, उनकी पत्नी राधिका, एनडीटीवी, आईसीआईसीआई के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया है और वह भी बिना किसी जांच के और केवल संजय दत्त नाम के एक शख्‍स द्वारा दी गई सूचना के आधार पर। उन्होंने कहा कि शिकायत में यह नहीं लिखा गया इस मामले को पहले सामने क्‍यों नहीं लाया गया। सीबीआई ने भी यह जानने की कोशिश नहीं की। पहली चीज जो सीबीआई को करनी चाहिए थी, जब ऐसा कोई मामला दायर किया गया, तो एनडीटीवी की प्रतिक्रिया लेनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

उन्होंने बताया कि जब कोई सरकारी एजेंसी किसी मीडिया कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज करती है, तो यह जरूरी है कि छापे मारने से पहले यह जाना जाए कि कंपनी के मालिकों का इस बारे में क्‍या कहना है। यह कोई समर्थन और कृपा का मामला नहीं है बल्कि संवैधानिक कर्तव्‍य का मामला है। उन्‍होंने कहा, 'छापे की कार्रवाई से पहले की घटनाओं पर ध्‍यान देना भी जरूरी है। 1 जून को जब संजय हजारिका एनडीटीवी के शो में बोल रहे थे, तब संबित पात्रा ने बीच में टोकते और कहा: मैं केवल एनडीटीवी पर लोगों को टोकता हूं और ऐसा मैं इसलिए करता हूं क्‍योंकि एनडीटीवी का एक एजेंडा है। पात्रा के आरोप लगाए जाने के बाद ही एनडीटीवी के दफ्तर और एनडीटीवी के सह संस्‍थापक डॉ. प्रणय रॉय आवास पर छापे पड़े। इंदिरा गांधी के समय भी मीडिया पर ऐसे ही हमले हुए थे, तब इंडियन एक्‍सप्रेस के खिलाफ रिटर्न नहीं फाइल करने के 120 मामले दर्ज कराए गए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अंतत: हमारी जीत हुई।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्‍ठ पत्रकार शेखर गुप्‍ता ने कहा, 'यह वो समय है जब हमें अपने संगठनात्मक और संस्थागत संबद्धता को भूलना होगा। आजाद प्रेस का यह वो मुद्दा है जो हमारे सभी संस्‍थानों से जुड़ा है। यह प्रेस की आजादी पर हमला है। कृपया खुद को कोड़े मारना बंद कीजिए। सोशल मीडिया ने हम सबको गुमराह कर दिया है। अन्‍य पेशों की तुलना में पत्रकारिता में कहीं बेहतर लोग हें। कोई भी प्रेस्टिट्यूट नहीं है। दुर्व्‍यवहार के तूफान से न डरें।'

उन्‍होंने कहा, 'जब इंडियन एक्‍सप्रेस के खिलाफ बड़ी संख्‍या में केस दर्ज किए गए थे तब रामनाथ गोयनका की उन मामलों को लेकर प्रतिक्रिया थी, 'इससे क्‍या फर्क पड़ता है? हमने कत्‍ल के अलावा सारे कानून तोड़े हैं।' उन्‍होंने कहा, 'मुझे उम्‍मीद है कि एनडीटीवी वही करता रहेगा जो वो कर रहा है। हमारा काम है सत्ता से सच बोलना है। हममें से कई लोग सत्ता के मेगाफोन बन गए हैं।'

यहां देखें विडियो-


समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।

TAGS 0
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

विवादित ट्वीट के बाद बड़े अखबार ने महिला पत्रकार के खिलाफ लिया कड़ा एक्शन

विवादित ट्वीट को लेकर एक महिला पत्रकार विवादों में घिर गईं, जिसके बाद संस्थान ने उन्हें निलंबित कर दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 28 January, 2020
fired

बास्केटबॉल स्टार अमेरिका के कोबे ब्रायंट की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में रविवार को मौत हो गई, जिसके बाद पूरी दुनिया में शोक की लहर है। लेकिन इस बीच उनके निधन पर विवादित ट्वीट को लेकर एक महिला पत्रकार विवादों में घिर गईं, जिसके बाद संस्थान ने उन्हें निलंबित कर दिया है।   

दरअसल, अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार 'द वॉशिंगटन पोस्ट' (The Washington Post) ने अपनी पत्रकार फेलिसिया सोमेज (Felicia Sonmez) के खिलाफ यह फैसला लिया है। कोबे ब्रायंट के निधन के बाद विवादित ट्वीट पर संस्थान ने पत्रकार को निलंबित कर दिया है।

फेलिसिया सोमेज ने 2016 की ‘डेली बीस्ट’ (Daily Beast) की एक रिपोर्ट के शीर्षक (Kobe Bryant's Disturbing Rape Case: The DNA Evidence, the Accuser's Story, and the Half-Confession) को अपनी पोस्ट में डालते हुए विवादित टिप्पणी की। दरअसल 2016 में एक दुष्कर्म मामले में कोबे का नाम आया था।

हालांकि आलोचनाओं के बाद पत्रकार फेलिसिया सोमेज को यह ट्वीट हटाना पड़ा। उन्होंने एक मीडिया वेबसाइट को बताया कि 10 हजार से ज्यादा लोगों ने उनकी पोस्ट पर आलोचनात्मक टिप्पणी की। उन्हें गलियों भरे मेल भेजे गए और जान मारने की धमकी भी दी गई।

वहीं दूसरी तरफ, वॉशिंगटन पोस्ट को भी पत्रकार फेलिसिया सोमेज को निलंबित करने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद वॉशिंगटन पोस्ट की मैनेजिंग एडिटर ट्रेसी ग्रांट को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि फेलिसिया सोमेज को जांच हो पूरी हो जाने तक फिलहाल छुट्टी पर भेजा गया है और ये पता लगाया जा रहा है कि क्या उनके ट्वीट ‘न्यूजरूम की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन’ तो नहीं है।

फिलहाल इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स दो ग्रुप्स में बंटे नजर आ रहे हैं। एक ग्रुप का मानना है कि फेलिसिया सोमेज न केवल निलंबित किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें संस्थान से निकाल दिया जाना चाहिए। वहीं कुछ लोग वॉशिंगटन पोस्ट के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना ​​है कि यह कदम एक खतरनाक नज़ीर पेश करता है।

गौरतलब है कि रविवार को हेलिकॉप्टर हादसे में कोबे ब्रायंट और उनकी बेटी गियाना मारिया (13) समेत कुल नौ लोगों की मौत हो गई थी। कोबे अपने निजी हेलिकॉप्टर में थे। इस दुखद घटना के कुछ घंटों बाद ही फेलिसिया ने यह ट्वीट किया था।

 

 

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जानिए, क्यों दीपक चौरसिया को लेकर दो खेमों में बंटे पत्रकार

आमतौर पर ऐसे मामलों में मीडियाकर्मी एक सुर में आवाज बुलंद करते हैं, मगर यहां वह अलग-अलग खेमों में विभाजित नजर आ रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
deepak

वरिष्ठ पत्रकार व न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया पर दिल्ली के शाहीनबाग में हुए हमले को भले ही दो दिन गुजर चुके हों, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा अभी भी गर्माया हुआ है। कुछ पत्रकारों ने जहां इस घटना की निंदा की है, वहीं कुछ इसके लिए दीपक चौरसिया को ही जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में मीडियाकर्मी एक सुर में आवाज बुलंद करते हैं, मगर यहां वह अलग-अलग खेमों में विभाजित नजर आ रहे हैं। दरअसल, चौरसिया को ऐसे पत्रकार के रूप में देखा जाता है जो मोदी सरकार की नीतियों पर प्रहार नहीं करते, इसलिए जब नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में उन्हें निशाना बनाया गया, तो कई लोगों ने इसे साजिश की तरह से देखा, जिसमें कुछ पत्रकार भी शामिल हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर पत्रकार भी पक्ष-विपक्ष की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

‘इंडिया टुडे’ समूह के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने दीपक चौरसिया पर सवाल खड़े करने के लिए ‘द वायर’ की आरफा खानम शेरवानी को आड़े हाथों लिया है। आरफा ने शाहीनबाग की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा था, ‘दीपक चौरसिया के साथ जो कुछ हुआ वह निंदनीय है, लेकिन यह पत्रकार या पत्रकारिता पर हमला नहीं है। सरकार के समक्ष नतमस्तक हो जाना पत्रकारिता नहीं होती। उत्पीड़ित समुदायों का गलत चित्रण पत्रकारिता नहीं कहलाती। एक पत्रकार के विशेषाधिकारों का दावा न करें, क्योंकि आप पत्रकार नहीं हैं’।

इसके जवाब में राहुल ने कहा, ‘बकवास तर्क। दीपक चौरसिया जैसी चाहें, वैसी पत्रकारिता रखने का अधिकार रखते हैं। यदि आपको पसंद नहीं तो न देखें। लेकिन एक पत्रकार पर सिर्फ इसलिए हमला करना क्योंकि आप उसकी बात को पसंद नहीं करते, पूरी तरह से अस्वीकार्य है। यह प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग की असहिष्णुता को दर्शाता है’।    

     

इसी तरह महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार निखिल वाघले ने जहां घटना के लिए चौरसिया को कठघरे में खड़ा किया है, वहीं ‘डीडी न्यूज’ के एंकर अशोक श्रीवास्तव उनके पक्ष में उतर आये हैं। उन्होंने वाघले के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसमें लिखा है ‘दीपक चौरसिया पत्रकार नहीं हैं। इस बात की जांच होनी चाहिए कि वह शाहीनबाग किसी खास मिशन पर गए थे या नहीं’।

अशोक श्रीवास्तव ने इसे लेकर वाघले पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अपने जवाबी ट्वीट में कहा है ‘ये आदमी खुद को पत्रकार कहता है। आजकल सर्टिफिकेट बांट रहा है कि कौन पत्रकार है, कौन नहीं। मुझे इसने ब्लॉक कर दिया है, आप लोग पूछ लें कि कब सड़क पर नंगे होकर दौड़ लगाएंगे ये। 2019 के चुनावों से पहले इसने ट्वीट किया था कि मोदी जीते तो नंगा होकर सड़क पर दौडूंगा’।

इसके साथ ही श्रीवास्तव ने ‘द प्रिंट’ की पत्रकार जानिब सिकंदर को भी निशाना बनाते हुए लिखा है ‘ये @print से जुड़ीं पत्रकार हैं, जिसके आका @ShekharGupta हैं। इन्हें लगता है कि #ShaheenBagh में पत्रकारों की जो पिटाई "polite" तरीके से हुई। ये वो जमात है जो चाहती है कि इनके पक्ष में जो न बोले उसे लिंच कर दो, मार दो। ये बाबरी मानसिकता वाले पत्रकार हैं’। कई अन्य पत्रकार भी इस मुद्दे पर अलग-अलग सोच प्रदर्शित करते सोशल मीडिया पर नजर आ रहे हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पद्म पुरस्कार विजेताओं की लिस्ट में इन वरिष्ठ पत्रकारों ने भी बनाई अपनी जगह

हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर की जाती है विभिन्न श्रेणियों में दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों की घोषणा

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
Padma awards

पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा कर दी गई है। देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ के लिए चुने गए दिग्गजों की लिस्ट में तीन पत्रकारों का नाम भी शामिल है। इसके तहत कर्नाटक में मैसूर से निकलने वाले संस्कृत के एकमात्र अखबार ‘सुधर्मा’ (Sudharma) के संपादक-प्रकाशक केवी संपत कुमार, उनकी पत्नी जयलक्ष्मी के अलावा मिजोरम के वरिष्ठ पत्रकार लालबियाक्थंगा पचुआऊ को इस सम्मान के लिए चुना गया है। केवी संपत कुमार, उनकी पत्नी जयलक्ष्मी को संयुक्त रूप से इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है। 

संस्कृत के विद्वान पंडित वरदराज आयंगर (Pandit Varadaraja Iyengar) ने संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए 15 जुलाई 1970 को सुधर्मा की शुरुआत की थी। अब उनके पुत्र केवी संपत कुमार और उनकी पत्नी जयलक्ष्मी इस अखबार को बचाए रखने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। A-3 आकार में छपने वाले इस अखबार के करीब 3000 सबस्क्राइबर्स हैं, जिनमें से अधिकांशतः विभिन्न संस्थान अथवा लाइब्रेरी हैं, जिन्हें यह अखबार डाक के द्वारा भेजा जाता है। इस अखबार के ई-वर्जन के करीब एक लाख पाठक हैं।

इन दोनों के अलावा, मिजोरम के राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई ने गणतंत्र दिवस पर रविवार को अपने भाषण में कहा कि केंद्र द्वारा पद्मश्री पुरस्कार के लिए शनिवार को घोषित लोगों में पचुआऊ का नाम भी शामिल है। 94 वर्षीय पचुयाऊ ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1953 में छोटे से अखबार जोराम थुपुआन से की थी। वह 1970 से स्थानीय दैनिक अखबार ‘जोराम त्लांगाऊ’ के संपादक हैं। मिजोरम पत्रकार संघ (एमजेए) में पचुआऊ तीन बार अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

बता दें कि मिजोरम सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग तथा मिजोरम पत्रकार संघ (एमजेए) ने अक्टूबर 2016 में पचुआऊ को ‘देश में सबसे उम्रदराज श्रमजीवी पत्रकार’ घोषित किया था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पचुआऊ 1945 में सेना में शामिल होकर कई सैन्य पुरस्कार भी जीत चुके हैं। यही नहीं, 1980 के दशक में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और केंद्र के बीच शांति वार्ता में पचुआऊ अहम प्रतिनिधि थे।

बता दें कि इस साल सात प्रमुख हस्तियों को पद्म विभूषण, 16 शख्सियतों को पद्म भूषण और 118 लोगों को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। पद्म अवॉर्ड के विजेताओं की लिस्ट आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं। 

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मंत्री ने सरकारी कार्यक्रम से काटा वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा का नाम, फिर बोले ये बात

गोवा सरकार ने अपने कार्यक्रम 'डीडी कौशांबी फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' में फे डिसूजा का नाम स्पीकर की सूची से हटा दिया है।

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
Faye D'souza

शॉर्ट विडियो सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ‘फायरवर्क’ (Firework) के साथ हाल ही में अपनी नई पारी शुरू करने वाली वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा सुर्खियों में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोवा सरकार ने अपने कार्यक्रम 'डीडी कौशांबी फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' में फे डिसूजा का नाम स्पीकर की सूची से हटा दिया है। खबरों की मानें तो पत्रकार का प्रोफाइल और स्टैंड देखकर उनका नाम स्पीकर की सूची से हटाया गया है, क्योंकि वे  नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करती रही हैं।

इस मामले में गोवा के कला और संस्कृति मंत्री गोविंद गवाडे ने सफाई भी दी है। उन्होंने कहा, ‘यह सरकार का कार्यक्रम है और आयोजक इसमें किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहते थे इसीलिए यह फैसला लिया गया है।’

बता दें कि 27 से 30 जनवरी को पणजी की कला अकादमी में आयोजित किए गए गोवा सरकार के प्रोग्राम 'डीडी कौशांबी फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' में उन्हें बतौर वक्ता बुलाया गया था। डिसूजा को इस कार्यक्रम में 29 जनवरी को भाषण देना था। यह प्रोग्राम कला और संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित किया गया है।

संस्कृति मंत्री गोविंद गवाडे ने कहा कि उनका (फाये डिसूजा) का नाम शॉर्टलिस्ट था, लेकिन पता चला कि वह संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ बोलने वाली हैं। उन्होंने आगे कहा कि समझने की कोशिश कीजिए। यह कोई छोटा या निजी इवेंट नहीं है। यह सरकारी कार्यक्रम है और हम नहीं चाहते कि इसमें कोई विवाद हो, इसीलिए स्पीकर के तौर पर उनका नाम हटाने का फैसला किया गया।

वहीं समारोह से डिसूजा का नाम हटाने के लिए प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश मिलने की बात का उन्होंने खंडन किया है। गावडे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हमेशा कहा है कि वे सीएए पर किसी भी तरह की बहस करने को तैयार हैं। इसलिए उनकी तरफ से कोई निर्देश आने का सवाल ही नहीं उठता।

दूसरी तरफ, विपक्षी पार्टियां सरकार के इस कदम की आलोचना कर रही है और इसे असंवैधानिक बता रही हैं।

 

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

स्टेकहोल्डर्स के अनुरोध पर TRAI ने फिर बढ़ाई यह तारीख

ट्राई द्वारा 27 नवंबर को Transparency in Publishing of Tariff Offers पर कंसल्टेशन पेपर जारी किए गए थे और स्टेकहोल्डर्स को अपने लिखित कमेंट्स दाखिल करने के लिए 26 दिसंबर 2019 की तारीख दी गई थी

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
TRAI

‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ने ‘Transparency in Publishing of Tariff Offers’ पर कंसल्टेशन पेपर (परामर्श पत्र) के लिए लिखित रूप से अपने कमेंट्स जमा करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर सात फरवरी 2020 कर दी है।

दरअसल, स्टेकहोल्डर्स ने कंसल्टेशन पेपर पर अपने कमेंट्स भेजने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी,जिस पर ट्राई ने इसकी समय सीमा बढ़ाकर सात फरवरी करने का निर्णय लिया है। वहीं, इन कमेंट्स पर जवाबी कमेंट्स जमा करने की तारीख 21 फरवरी 2020 रखी गई है।

बता दें कि ट्राई द्वारा 27 नवंबर को कंसल्टेशन पेपर जारी किए गए थे और स्टेकहोल्डर्स को अपने लिखित कमेंट्स दाखिल करने के लिए 26 दिसंबर 2019 की तारीख दी गई थी, जबकि 9 जनवरी 2020 तक इनके जवाबी कमेंट्स दाखिल किए जा सकते थे।  

बाद में स्टेकहोल्डर्स के अनुरोध पर कमेंट्स जमा करने के लिए अंतिम तारीख बढ़ाकर 23 जनवरी 2020 और इन कमेंट्स के जवाबी कमेंट्स के लिए यह तारीख छह फरवरी कर दी गई थी।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

दीपक चौरसिया के समर्थन में उतरे वरिष्ठ पत्रकार, यूं साधा हमलावरों पर ‘निशाना’

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे धरना प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे वरिष्ठ टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया व उनकी टीम के साथ की गई थी बदसलूकी

Last Modified:
Saturday, 25 January, 2020
Deepak Chaurasia

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन इसे लेकर हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। यहां तक कि मीडिया को भी प्रदर्शनकारी अपना निशाना बना रहे हैं। शाहीन बाग में करीब एक महीने से प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारी भी शुक्रवार को हिंसा पर उतर आए और वहां चल रहे विरोध प्रदर्शन की कवरेज करने गए वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया के साथ बदसलूकी कर दी। यही नहीं उन्होंने न्यूज नेशन के कैमरामैन का कैमरा भी तोड़ दिया।

दीपक चौरसिया से मारपीट और कैमरे छीनने के मामले में कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि आईपीसी की धारा 394 (लूट के दौरान चोट पहुंचाने) के तहत FIR दर्ज की गई है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कवरेज के दौरान मीडिया पर इस तरह के हमले काफी चिंता का विषय हैं।

दीपक चौरसिया पर हुए हमले के बाद कई वरिष्ठ पत्रकारों ने दीपक चौरसिया के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है और इस घटना का विरोध किया है।

वरिष्ठ पत्रकार और ‘जी न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने शाहीन बाग में दीपक चौरसिया पर हुए हमले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है, 'यह असहिष्णुता अस्वीकार्य है। शाहीनबाग उनका (हमलावरों का) नहीं है। यह अभी भी लोकतांत्रिक भारत का एक हिस्सा है। मैं सभी संपादकों और प्राइम टाइम एंकरों से आग्रह करता हूं कि वे शाहीन बाग से अपने न्यूज शो करें।'

एक अन्य ट्वीट में उनका यह भी कहना है, 'शाहीन बाग किसी के बाप का नहीं।एक पत्रकार के साथ ऐसी गुंडागर्दी करके प्रदर्शनकारियों ने बता दिया कि वो कितने असहनशील हैं और अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ उनके लिए है। पूरे देश को इस घटना का विरोध करना चाहिए।'

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने भी एक ट्वीट में इस घटना की निंदा की है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है, ‘शाहीन बाग में वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ हुई बदसलूकी की घटना काफी निंदाजनक है। यदि आपको (प्रदर्शनकारियों को) मीडिया से कोई दिक्कत है तो वह अपना चैनल बंद कर दें। कैमरों को तोड़ना और पत्रकारों के साथ मारपीट करना गुंडागर्दी है। दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’

'आजतक' के संपादक  सुप्रिय प्रसाद ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा है, 'आप किसी पत्रकार को अपना काम करने से इस तरह नहीं रोक सकते हैं। मैं इस तरह की घटना की घोर भर्त्सना करता हूं।'

‘न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिश देवगन ने भी दीपक चौरसिया पर हुए हमले को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने अपने ट्वीट में इस घटना को शर्मनाक बताया है।

‘एबीपी न्यूज’ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत ने भी दीपक चौरसिया पर हमला करने वालों को आड़े हाथ लिया है।

बता दें कि पिछले दिनों इस कानून के विरोध में जेएनयू में गुस्साए छात्रों ने भी मीडिया पर हमला कर दिया था। छात्रों के हमले में कई मीडियाकर्मी घायल हुए थे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मीडियाकर्मियों के कैमरों को भी तोड़ दिया था। इसके अलावा हाल ही में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के कैंपस में भी प्रदर्शन को कवर करने पहुंचीं ‘रिपब्लिक टीवी’ की टीम पर प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था और 7 रिपोर्टर्स के साथ धक्का मुक्की की थी। इतना ही नहीं, हमलावरों ने ‘रिपब्लिक टीवी’ की टीम का कैमरा छीनने और जबरदस्ती फुटेज डिलीट करने की भी कोशिश की थी।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

#MeToo के आरोपों में घिरे न्यूज चैनल के संपादक ने लिया बड़ा फैसला

वरिष्ठ पत्रकार और ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के पूर्व कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने एक दिन पूर्व ही #MeToo मामले का सनसनीखेज खुलासा किया था

Last Modified:
Friday, 24 January, 2020
Journalist

#MeToo के आरोपों में घिरे न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के वरिष्ठ संपादक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन पर संस्थान की ही दो महिला पत्रकारों ने यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के पूर्व कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने एक दिन पूर्व ही ट्वीट के जरिये #MeToo मामले का सनसनीखेज खुलासा किया था। हालांकि, अपने ट्वीट में उन्होंने किसी चैनल का नाम नहीं लिया था।

यह भी पढ़ें: मीडिया में #MeToo ने फिर दी दस्तक, अजीत अंजुम ने किया ये सनसनीखेज खुलासा

अब मामला तूल पकड़ने और चैनल का नाम सामने आने के बाद ‘टीवी9 भारतवर्ष’ ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं। इन ट्वीट में चैनल ने इस मामले में की गई कार्रवाई के बारे में बताया है।

अपने इन ट्वीट्स में चैनल का कहना है, ‘टीवी9 भारतवर्ष की दो पत्रकारों ने एक वरिष्‍ठ संपादक के खिलाफ यौन शोषण की अलग-अलग शिकायत की है। कार्यस्‍थल पर महिलाओं के यौन अपराध (रोकथाम,  प्रतिबंध और निवारण) अधिनियम, 2013 के अनुसार, मामले को तुरंत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास भेजा गया। शिकायतों और गवाहों को सुनने के बाद मैनेजमेंट ने संपादक को नोटिस भेजा। इसके फौरन बाद ही ICC ने पूरी जांच शुरू कर दी। प्रबंधन ने जांच पूरी होने तक संपादक को छुट्टी पर भेज दिया, जिसके बाद संपादक ने इस्तीफ़ा दे दिया है। प्रबन्धन ने इस्तीफ़ा तुरन्त प्रभाव से मंज़ूर कर लिया।‘

एक अन्य ट्वीट में चैनल का कहना है, ‘कार्यस्‍थल पर यौन शोषण के प्रति टीवी9 नेटवर्क जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है। संस्‍थान कार्य स्थल पर महिला कर्मचारियों को सुरक्षित और बराबरी का माहौल मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं, #MeToo का मामला सामने आने के बाद ‘समाचार प्लस चैनल’ के पूर्व आउटपुट हेड असित नाथ तिवारी ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखी है। इस मामले में फंसे ‘टीवी9 भारत वर्ष’ के आउटपुट हेड अजय आजाद के नाम लिखे इस खुले पत्र में असित नाथ तिवारी ने इन आरोपों को मीडियाकर्मियों के लिए काफी चिंता का विषय बताया है। इसके साथ ही उन्होंने अजय आजाद से उन लड़कियों से निजी तौर पर मिलकर माफी मांगने के लिए भी कहा है।

असित नाथ तिवारी द्वारा अजय आजाद के नाम लिखे इस खुले पत्र को आप यहां हूबहू पढ़ सकते हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया में #MeToo ने फिर दी दस्तक, अजीत अंजुम ने किया ये सनसनीखेज खुलासा

पूर्व में तमाम सुर्खियां बटोर चुके #MeToo कैंपेन ने एक बार फिर दस्तक दी है। दरअसल, मीडिया में #MeToo के कुछ नए मामलों का खुलासा हो सकता है

Last Modified:
Thursday, 23 January, 2020
METOO

पूर्व में तमाम सुर्खियां बटोर चुके #MeToo कैंपेन ने एक बार फिर दस्तक दी है। दरअसल, मीडिया में #MeToo के कुछ नए मामलों का खुलासा हो सकता है। एक चैनल से जुड़ी कुछ ट्रेनी पत्रकारों ने अपने सीनियर्स पर संगीन आरोप लगाये हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में पीड़ित महिला पत्रकारों ने कुछ सबूत भी प्रबंधन को सौंपे हैं। हालांकि आरोपितों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इसका खुलासा वरिष्ठ पत्रकार और ‘इंडिया टीवी’ के पूर्व मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम ने किया है। उन्होंने ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘एक चैनल के #NEWSROOM में 'बलात्कारी मानसिकता' वाले सीनियर के खिलाफ सबूतों के साथ कुछ लड़कियों ने संगीन आरोप लगाए हैं। ट्रेनी लड़कियों को शिकार समझने वाले ऐसे सीनियर्स के चेहरे से हर हाल में नकाब उतारना चाहिए। हैरत की बात ये है कि सबूतों के बाद भी अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।’ चैनल और आरोपितों के नाम के बारे में अजीत अंजुम ने कुछ नहीं बताया है। सोशल मीडिया पर यूजर उनसे नाम सामने लाने की मांग कर रहे हैं।

अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा है ‘बतौर टीम लीडर मैंने हमेशा लड़कियों को कहा कि अगर #NEWSROOM में कोई भी आपके साथ ऐसी नीच हरकत करे तो तुरंत बताओ। वो चाहे किसी पद पर हो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, लेकिन शिकायत तो करनी होगी। करियर खराब होने के डर से न जाने कितनी लड़कियां बहुत कुछ सहकर तूल देने से बचती है। मैं हमेशा ऐसे मामलों में Zero tolerance का पक्षधर रहा हूं। मीडिया में विकृत मानसिकता वाले ऐसे बहुत से सीनियर्स हैं , जो जूनियर लड़कियों को सिर्फ शिकार समझते हैं। हर हाल में ऐसे लोगों को एक्सपोज किया जाना चाहिए।’

गौरतलब है कि #MeToo में पहले भी कुछ पत्रकारों का नाम सामने आ चुका है। लिहाजा अजीत अंजुम के इस खुलासे ने कई लोगों की नींद उड़ा दी होगी। हालांकि, अब देखने वाली बात यह है कि क्या वरिष्ठ पत्रकार संबंधित चैनल और आरोपितों का नाम उजागर करते हैं?

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड से नवाजे जाएंगे The Hindu ग्रुप के चेयरमैन एन.राम

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिलेगा यह अवॉर्ड। इसके तहत एक लाख रुपए, एक प्रशस्ति पत्र और एक स्मृति चिह्न प्रदान किया जाता है

Last Modified:
Thursday, 23 January, 2020
N RAM

दिग्गज पत्रकार और ‘द हिन्दू ग्रुप’ (THG) ऑफ पब्लिकेशंस के चेयरमैन एन.राम को ‘केरल मीडिया अकादमी’ (Kerala Media Academy) के नेशनल मीडिया अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। केरल मीडिया अकादमी के चेयरमैन आरएस बाबू के अनुसार, मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एन. राम को इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है।

इस अवॉर्ड के तहत एक लाख रुपए नकद, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न दिया जाता है। उन्होंने बताया कि अकादमी के 40वें वार्षिक समारोह में निडर और सराहनीय पत्रकारिता के लिए इस अवॉर्ड को स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन मार्च में होने वाले मीडिया कॉन्क्लेव में यह अवॉर्ड प्रदान करेंगे।      

इस अवॉर्ड लिए एन. राम का चयन एक जूरी ने किया है, जिसमें पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री एमए बेबी, वरिष्ठ पत्रकार थॉमस जैकब, जनरल एजुकेशन डिपार्टमेंट के सचिव ए. शाहजहां, मीडिया विश्लेषक सेबस्टियन पॉल, एशियानेट के एडिटर एमजी राधाकृष्णन और प्लानिंग बोर्ड की मेंबर मृदुल इयापेन (Mridul Eapen) शामिल थे।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

अब नए अंदाज में खबरों से रूबरू कराएंगी वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा

व्युअर्स को कम से कम समय में तथ्यों के साथ पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है यह पहल

Last Modified:
Thursday, 23 January, 2020
Faye D'souza

वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा अब लोगों को नए अंदाज में खबरों से रूबरू कराएंगी। सिलिकन वैली (Silicon Valley) के  शॉर्ट विडियो नेटवर्क ‘फायरवर्क’ (Firework) के साथ अपनी नई पारी के दौरान फे डिसूजा देश भर की खास खबरों को 30 सेकेंड के विडियो में दिखाएंगी।

इस बारे में ‘फायरवर्क’ के सीईओ सुनील नायर का कहना है, ‘शॉर्ट फॉर्मेट विडियो कैटेगरी में फे डिसूजा के साथ यह शो गेमचेंजर साबित होगा। इस तरह के न्यूज फॉर्मेट को 18 से 25 साल के युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मेरा मानना है कि इस उम्र के युवा बड़े-बड़े टेलिविजन डिबेट शो देखने के बजाय तेजी से और शॉर्ट में न्यूज चाहते हैं। आज की पीढ़ी ऐसे कई चेहरों को नहीं पहचानती है, जो टीवी चैनल्स पर लंबे समय से हैं। फे इस बात को समझती हैं और वह दर्शकों को इस तरह से खबरें पेश करती हैं, जिससे न्यूज को आसानी से और तेजी से समझा जा सके।’  

बताया जाता है कि शुरुआत में फे डिसूजा सप्ताह के सामान्य दिनों (weekdays) में चार न्यूज सेगमेंट पोस्ट करेंगी और सप्ताहांत (weekends) में एक न्यूज सेगमेंट पोस्ट किया जाएगा। प्रत्येक न्यूज सेगमेंट 30 सेकेंड की क्लिप होगी और इसे ‘Facts First with Faye’ शीर्षक से पोस्ट किया जाएगा।  

डिसूजा का कहना है, ‘आज न्यूज की कोई कमी नहीं है, बस वह स्पष्ट होनी चाहिए। देश का युवा काफी समझदार और वैचारिक है। युवा वर्ग ऐसी न्यूज चाहता है जो तथ्यों के साथ निष्पक्ष और शॉर्ट फॉर्मेट में हो। यह शो इसी तरह की न्यूज उपलब्ध कराएगा।’

बता दें कि इससे पहले सितंबर 2019 तक डिसूजा टाइम्स नेटवर्क के अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘मिरर नाउ’ (Mirror Now) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर काम कर रही थीं। ‘मिरर नाउ’ के शो ‘द अर्बन डिबेट’ (The Urban Debate) की एंकरिंग के दौरान उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली थी। इस शो में वह भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक हिंसा और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को उठाती थीं। फे डिसूजा को वर्ष 2018 में 'जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर' के लिए रेडइंक अवॉर्ड दिया जा चुका है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए