‘जनसत्ता’ न्यूज पोर्टल को मिला नया मैनेजिंग एडिटर...

इंडियन एक्सप्रेस समूह की अपने हिंदी न्यूज पोर्टल ‘जनसत्ता’ के लिए...

Last Modified:
Saturday, 08 September, 2018
jansatta

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

अपने हिंदी न्यूज पोर्टल ‘जनसत्ता डॉट कॉम’ के लिए इंडियन एक्सप्रेस समूह की अब मैनेजिंग एडिटर की तलाश पूरी हो गई है। केशव धर दुबे के रूप में जनसत्ता न्यूज पोर्टल को नया मैनेजिंग एडिटर मिल गया है। 7 सितंबर को मैनेजिंग एडिटर के रूप में केशव दुबे ने अपना कार्यभार संभाल लिया।  

बताया जा रहा है कि जनसत्ता में केशव को मैनेजमेंट वेबसाइट के विस्तार की खातिर लाया गया है। वहीं  यह उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही जनसत्ता के पाठकों को अब यह वेबसाइट नए कलेवर में देखने को मिलेगी।

बता दें इसके पहले तक केशव 'आजतक डॉट इन' में करीब दो साल डे एडिटर की भूमिका निभा चुके हैं। वे दिसंबर, 2016 से आजतक के साथ थे। आजतक में बतौर डे एडिटर वेबसाइट का एजेंडा देखते थे। उन्होंने नए सेक्शन और एक शानदार टीम बनाने में अहम भूमिका अदा की। इसका फायदा ये हुआ कि सालभर में आजतक की रैंकिंग में बड़ा उछाल देखने को मिला था। 

कोलकाता में पढ़ाई और पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले केशव के पास प्रिंट और डिजिटल का कुल 12 साल का अनुभव है। दैनिक विश्वामित्र, सन्मार्ग और दैनिक जागरण के साथ उनके पास अमर उजाला के सेंट्रल डेस्क पर काम करने का तजुर्बा है। डेस्क के अलावा केशव कोलकाता, सिलीगुड़ी, नॉर्थ बंगाल, दार्जिलिंग में रिपोर्टिंग कर चुके हैं।   

'आजतक' के पहले करीब दो साल की पारी उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ के साथ भी खेली। वे जनवरी, 2015 से दिसंबर, 2016 तक डेप्युटी न्यूज एडिटर के तौर पर यहां रहे। अक्टूबर, 2013 से लेकर जनवरी, 2015 तक वे ‘अमर उजाला’ में बतौर सेंट्रल डेस्क के तौर पर भी कार्यरत रहे।वहीं मार्च, 2011 से अक्टूबर, 2013 तक वे ‘दैनिक जागरण’ के साथ रहे, जहां सिलिगुड़ी में जनरल डेस्क के तौर पर कार्यरत थे। कुछ महीनों तक उन्होंने कोलकाता में रहते हुए ‘सन्मार्ग’ के साथ भी काम किया।

केशव दुबे की गिनती डिजिटल में तेजी से उभरने वाले ऐसे पत्रकारों में होती है जिनकी पकड़ न सिर्फ हार्ड न्यूज पर मजबूत है बल्कि वेबसाइट के नंबर गेम में भी महारत हासिल है।


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पत्रिका समूह: कोठारी परिवार में शोक

देश के बड़े मीडिया हाउस में शुमार पत्रिका समूह में आज शोक की लहर है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
Patrika


देश के बड़े मीडिया हाउस में शुमार पत्रिका समूह में आज शोक की लहर है। समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के छोटे भाई मिलाप कोठारी का आकस्मिक निधन हो गया है। वे 69 वर्ष के थे। उन्होंने मंगलवार की सुबह अंतिम सांस ली। 

1960 में जन्मे मिलाप पत्रिका समूह के निदेशक और संपादक के पद पर कार्य कर चुके हैं। उनकी शवयात्रा निवास ‘स्वस्ति, 11, हॉस्पिटल मार्ग, सी स्कीम’ से रवाना होगी। उनका अंतिम संस्कार शाम सवा पांच बजे आदर्श नगर में किया जाएगा। 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर स्व.कोठारी के निधन पर गहरा शोक जताया है। 
 

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दैनिक जागरण को अलविदा कह पत्रकार सुशील मिश्रा ने शुरू की नई पारी

देश के नंबर वन अखबार दैनिक जागरण के मेरठ एडिशन से खबर है कि

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019


देश के नंबर वन अखबार दैनिक जागरण के मेरठ एडिशन से खबर है कि वहां कार्यरत आउटपुट हेड सुशील मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। सुशील ने जागरण के साथ एक दशक से भी अधिक समय तक काम किया है। उन्होंने वहां सिटी डेस्क, इसपुट डेस्क व यूपी डेस्क के इंजार्च के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी है। सुशील मूल तौर पर उत्तर प्रदेश के ही निवासी है। 

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाले सुशील ने अब अपनी नई पारी अमर उजाला के मेरठ संस्करण के साथ शुरू की है। वहां उनकी नियुक्ति डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हुई है।


 

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राष्ट्रीय सहारा के कानपुर एडिशन को मिला नया रेजिडेंट एडिटर

जेश मिश्रा पहले से ही कानपुर यूनिट में कार्यरत हैं और ये पद उन्हें प्रमोशन के तौर पर मिला है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
Rastriya Sahara


सहारा मीडिया से आ रही खबर के मुताबिक अखबार के कानपुर संस्करण के नए रेजिडेंट एडिटर के तौर पर ब्रजेश मिश्रा को नियुक्त किया गया है। ब्रजेश मिश्रा पहले से ही कानपुर यूनिट में कार्यरत हैं और ये पद उन्हें प्रमोशन के तौर पर मिला है।  इस बावत राष्ट्रीय सहारा के समूह संपादक मनोज तोमन ने पत्र जारी किया है, जो हम आपके साथ नीचे शेयर कर रहे हैं।


 

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इस पत्रकार की तारीफ तो बनती ही है

असली पत्रकार स्थिति और उसकी गंभीरता को पल भर में समझ लेता है और टीवी9 के पत्रकार ने भी तुरंत भाप लिया

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019

नियम-कानून क्या केवल आम जनता के लिए है, यह सवाल अक्सर पूछा जाता है? और जब इस सवाल का कारण सामने मौजूद हो तो फिर एक पत्रकार को दूसरा अहम् सवाल दागने में देर नहीं करनी चाहिए। टीवी9 भारतवर्ष के मुजफ्फरपुर के पत्रकार रूपेश कुमार ने भी कुछ ऐसा ही किया। जब उन्होंने नेताजी को नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाते हुए देखा तो उनके रुतबे को दरकिनार करते हुए पूछ ही लिया कि ‘आप नियम से बड़े कैसे हो गए’?

मामला बिहार के मुजफ्फरपुर का है। यहां एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है। ऐसे में नेताओं से लेकर प्रशासन और मीडिया सभी व्यस्त हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन भी स्थिति का जायजा लेने मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल पहुंचे। उनके साथ-साथ नेताओं-कार्यकर्ताओं की भीड़ भी वहां पहुँच गई। कुछ देर के लिए अस्पताल, अस्पताल कम कोई सरकारी कार्यालय नज़र आने लगा। इस बीच टीवी9 भारतवर्ष के पत्रकार की नज़रें वहां मौजूद एक नेताजी पर गईं। दरअसल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन अस्पताल के जिस हिस्से में मरीजों से मिल रहे थे, वहां मीडिया के जाने पर पाबंदी लगाई गई थी। इसलिए रिपोर्टर ने जब कोई दूसरी खबर तलाशना शुरू किया, तो आईसीयू में बैठे नेताजी नज़र आ गए।

असली पत्रकार स्थिति और उसकी गंभीरता को पल भर में समझ लेता है और टीवी9 के पत्रकार ने भी तुरंत भाप लिया कि यह खबर वायरल हो सकती है। भाजपा के उक्त नेता आईसीयू के केबिन में नर्स की कुर्सी पर बैठे थे और नर्स पास में खड़ी हुई थी। इतना ही नहीं जहां मीडियाकर्मियों को अंदर जाने की मनाही थी वहां नेताजी जूतों के साथ बड़े इत्मिनान से आराम फरमा रहे थे। जबकि आईसीयू में दाखिल होने से पहले जूते-चप्पल बाहर ही उतारने होते हैं। रिपोर्टर ने अपने कैमरामैन को पीछे लिए और यह बोलते हुए सीधे नेताजी के सामने पहुंच गए कि ‘मीडिया को जहाँ अनुमति नहीं है, वहां नेताजी की पहुंच देखिये। यहां से जो जाता है वो जूते उतारकर जाता है, लेकिन नेताजी जूते पहनकर बैठे हैं।’ एकदम से कैमरा देखकर नेताजी सकपका गए। उन्हें समझ ही नहीं आया कि बोलना क्या है। जब रिपोर्टर ने पूछा कि मीडिया को यहाँ आने की मनाही है, तो आप यहाँ कैसे बैठे हैं, इस पर नेताजी ने कहा ‘मरीज देखने आये हैं।’ रिपोर्टर ने तुरंत दूसरा सवाल दागते हुए कहा कहा कि कौन है आपका मरीज, कितने नंबर पर है? नेताजी इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। इसके बाद जब उन्होंने देखा कि रिपोर्टर के सवाल ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं, तो उन्होंने सच्चाई स्वीकारते हुए कहा कि ‘हमारे नेता, अभिभावक यहां आये हुए हैं।’

सवाल-जवाब का सिलसिला यहीं नहीं रुका, टीवी9 भारतवर्ष के पत्रकार ने इस पर कहा ‘आपके नेता हर्षवर्द्धन जी यहां आये हुए हैं तो आप आईसीयू में जूते पहनकर बैठेंगे? नेताजी फिर निरुत्तर हो गए। हालांकि उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि ये आईसीयू नहीं है, बाहर है। इसके बाद वह सीधे दरवाजे तक पहुंचे और अपने जूते उतार दिए। रिपोर्टर ने वहां मौजूद अस्पताल कर्मी से भी बात की कि आखिर नेताजी को ऐसे कैसे प्रवेश करने दिया गया, लेकिन कोई सही जवाब नहीं मिल सका। जायज है, नेताओं के आगे भला क्या किसी की चल पाई है। वैसे, इस बेवाकी के लिए टीवी9 भारतवर्ष के पत्रकार की जितनी तारीफ की जाये कम है, क्योंकि आजकल पत्रकार भी नेताओं से सीधे लड़ाई मोल नहीं लेते।

आप इस पूरे घटनाक्रम का विडियो नीचे देख सकते हैं...

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जेल से नहीं छूट पाए नोएडा से गिरफ्तार ये 3 पत्रकार

एक न्यूज चैनल से गिरफ्तार तीन पत्रकारों की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
crime

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर विवादित शो का प्रसारण के करने के बाद नोएडा के एक न्यूज चैनल से गिरफ्तार तीन पत्रकारों की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है। 

उल्लेखनीय है कि न्यूज चैनल नेशन लाइव की एमडी इशिका सिहं, एमडी अनुज शुक्ला, और एंकर अंशुल ने जमानत के लिए अर्जी दी थी, पर शुक्रवार को कोर्ट में इस मसले की सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने अगली डेट मुकर्रर कर दी है। अब इन सबकी जमानत पर 18 जून यानी मंगलवार को सुनवाई की जाएगी। 

इस बावत बचाव पक्ष के वकील के.के.सिंह ने कहा कि जिला जज के अवकाश पर होने के चलते ये मामला एडीजे प्रथम के कोर्ट में भेजा गया था, पर वहां केसों की ज्यादा संख्या के चलते इस मामले को 18 जून की तारीख दी गई है। वैसे इस मामले में चैनल हेड अजय शाह अभी फरार चल रहे हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। 
 

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देश के इस राज्य में पत्रकारों पर हुए सबसे ज्यादा हमले, देखें आंकड़े

जिस तरह लगातार पत्रकारों के साथ मारपीट, सरकारी और पुलिसिया उत्पीड़न की खबरें आ रही है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
Journalist

जिस तरह लगातार पत्रकारों के साथ मारपीट, सरकारी और पुलिसिया उत्पीड़न की खबरें आ रही है। ऐसे में अगर आप देश के राज्यों के क्राइम रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की स्थिति काफी खराब है। 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो क आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि 2013 से लेकर अब तक पत्रकारों पर सबसे ज्यादा हमले उत्तर प्रदेश में ही हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि पत्रकारों पर हमले के 67 मामले यहां दर्ज किए गए हैं, 7 पत्रकारों की हत्या के मामले भी इसमें शामिल है। उत्तर प्रदेश के बाद नंबर आता है मध्य प्रदेश का। वहां पत्रकारों के साथ विवाद को लेकर 50 केस दर्ज है। तीसरे नंबर पर बिहार है, जहां पत्रकारों पर हमले के 22 केस दर्ज है। 

अगर पूरे देश की बात करें तो पत्रकारों पर हमले के 190 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं। उत्तर प्रदेश की बात करें तो 2017 में पत्रकारों पर 13 हमले पुलिसवालों ने किए है, ये भी एक चौंकाने वाला तथ्य है। वैसे 2014 में पत्रकारों पर हमले के 63 मामले दर्ज है। 
 

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PR प्रफेशनल्स, कंटेंट राइटर, विडियो एडिटर्स की नियुक्ति करेगा ये सरकारी विभाग

पब्लिक रिलेशंस के इस दौर में अब सरकारी विभाग भी अपनी छवि को बेहतर बनाने के लिए इस ओर रुख कर रहे हैं

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019

पब्लिक रिलेशंस के इस दौर में अब सरकारी विभाग भी अपनी छवि को बेहतर बनाने के लिए इस ओर रुख कर रहे हैं। बताया गया है कि अब रेलवे विभाग भी पीआर प्रेफेशनल्स के जरिए अपने प्रचार-प्रसार को तेज गति देगा। 

इनकी नियुक्ति के लिए गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है, साथ ही रेलवे मंत्रालय के साथ-साथ जोन स्तर पर भी इनकी नियुक्ति करेगा।  मिली जानकारी के मुताबिक, एक चीफ पीआरओ के साथ करीब सत्तर पीआर प्रफेशनल्स की टीम काम कर रही है। इस कवायद का उद्देश्य है कि रेलवे अपने ग्राहकों को अपनी सुविधाओं और सामाजिक कार्यों की सूचना पहुंचा सके। 

साथ है ये प्रफेशनल्स रेलवे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी मजबूती के साथ पेश करेंगे। रेलवे विभाग हर जोन में 17 ऐसे प्रफेशनल्स को रखेगा जो इस काम को करने में दक्ष हैं। कंटेंट राइटर, विडियो एडिटर, सोशल मीडिया एक्सपर्ट की नियुक्ति के लिए जोनवाइस दो करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। 

फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ये प्रफेशनल्स रेलवे को आम जनता से जोड़ते हुए उन्हें विभाग द्वारा दी जा रही सुविधायों से रोजाना अपडेट कराया करेंगे। हर जोन में एक डैशबोर्ड भी बनाया जाएगा, जिससे रेलवे की नई सुविधाओं और पहल का प्रचार-प्रसार होगा। 

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 हिन्दुस्तान के दिल्ली एडिशन में हुई मेट्रो एडिटर की नियुक्ति

11 साल से हिन्दुस्तान में कार्यरत गौरव को वरिष्ठ स्थानीय संपादक प्रताप सोमवंशी का खास माना जाता है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
HINDUSTAN

हिन्दुस्तान के दिल्ली एडिशन से एक बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के मुताबिक अब गौरव त्यागी को हिन्दुस्तान दिल्ली में मेट्रो एडिटर के पद पर प्रोन्नत किया गया है। 

11 साल से हिन्दुस्तान में कार्यरत गौरव को दिल्ली एडिशन के वरिष्ठ स्थानीय संपादक प्रताप सोमवंशी का खास माना जाता है।  गौरव को हिन्दुस्तान नोएडा का ब्यूरो चीफ रह चुके हैं। उसके बाद वे लंबे समय तक गाजियाबाद में ब्यूरो चीफ भी रहे हैं। बाद में उन्हें हिन्दुस्तान दिल्ली के स्टेट ब्यूरो में भेजा गया था। पर उस वक्त अनुराग मिश्र के इस्तीफे के बाद गौरव को हिन्दुस्तान का दिल्ली स्टेट इंचार्ज बनाया गया। 

समूह संपादक शशि शेखर की गुडलिस्ट में शामिल गौरव को अब मेट्रो एडिटर की जिम्मेदारी दी गई है।
 

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मोबाइल की दुनिया में क्यों जरूरी है सीधा संवाद, जानें एक्सपर्ट्स की राय

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े दिग्गजों ने रखे अपने विचार

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Dr. Anurag Batra

आजकल स्मार्टफोन का जमाना है। ऐसे में लोगों का एक-दूसरे से संवाद करने का तरीका भी बदल गया है। लोग अब फेस टू फेस बातचीत करने के बजाय वॉट्सऐप और ईमेल पर ज्यादा संवाद करते हैं। ज्यादा से ज्यादा वे फोन कॉल कर लेते हैं। व्यवहार में इस तरह का व्यवहार कार्यस्थल के साथ ही निजी जिंदगी में भी असर डाल रहा है। इन्हीं तमाम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को दिल्ली के ‘द ललित’ (The Lalit) होटल में शुक्रवार को ‘WIYLD’ की ओर से 'Real Conversations in Digital Age' पर एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर भी चर्चा की गई कि फेस टू फेस संवाद न करने का कितना विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

इस मौके पर कॉरपोरेट जगत के साथ ही वरिष्ठ पत्रकार, मनोवैज्ञानिक, ब्रैंड्स और मार्केटिंग से जुड़े दिग्गजों ने इस बारे में अपने-अपने विचार रखे। सभी का कहना था कि आज के समय में सोशल मीडिया एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है, लेकिन किसी व्यक्ति से मिलकर बातचीत करने का अपना महत्व है। इससे उन व्यक्तियों के बीच मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनता है जो वॉट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर मुश्किल है।

इस मौके पर ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था कि लगातार संवाद की वजह से ही उन्हें मजबूत निजी और बिजनेस रिलेशनशिप बनाने में मदद मिली है। उनका कहना था कि वह आगे बढ़कर लोगों से संवाद शुरू करने में किसी तरह की झिझक महसूस नहीं करते हैं, फिर चाहे वह मॉल हो, रेस्तरां हो अथवा फ्लाइट हो। युवाओं को सलाह देते हुए डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था, ‘किसी भी तरह की झिझक छोड़ दें और अजनबियों के साथ बातचीत करने की अपनी स्टाइल डेवलप करें। आपको तब काफी आश्चर्य होगा और अच्छा लगेगा, जब सामने वाले से भी आपको काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी।’

जानी-मानी मनोवैज्ञानिक डॉ. रोमा कुमार का कहना था, ‘रिसर्च से पता चलता है कि दुनियाभर में अच्छी इनकम वाली 75 प्रतिशत नौकरियां सोशल कनेक्ट्स के द्वारा मिलती हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल कनेक्शन होना बहुत जरूरी है। इससे आप तमाम तरह की बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं।’ डॉ. रोमा कुमार ने समाज में डिप्रेशन के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंन कहा कि लोगों में संवाद की कमी बढ़ने से अकेलेपन के मामले भी बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान ‘WIYLD’ के सीईओ और को-फाउंडर रितु कुमार ओझा का कहना था, ‘स्मार्ट फोन से विभिन्न उम्र के लोगों का व्यवहार बदल रहा है। सोशल मीडिया हमें बनावटी चेहरे दिखाता है, जिसमें व्यक्ति को अपने आसपास की सभी चीजें अच्छी लगती है। ऐसे में लोग वास्तविक दुनिया में संवाद करने से दूर होने लगते हैं, क्योंकि आपको नहीं पता होता है कि सोशल मीडिया के बाहर क्या हो रहा है और कैसे वहां पर आपको तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना है।’

संवाद के दौरान स्टोरीटैलिंग के इस्तेमाल पर जोर देते हुए बीजेपी प्रवक्ता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की सलाहकार श्वेता शालिनी का कहना था, ‘हमें स्टोरीटैलिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जब मैं छोटी थी तो मेरे पिताजी विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुझे ईमानदारी और देशसेवा की बात बताया करते थे और अपने बच्चों को भी मैं इसी तरीके से समझाती हूं।’

यह पूछे जाने पर कि लोग लगातार स्क्रीन पर कैसे दिखते हैं, उन्होंने कहा, ‘किसी भी कंवर्शेसन के दौरान लगातार उस पर ध्यान देना लग्जरी होती जा रही है। सोशल मीडिया पर अगले अपडेट के लिए लगातार अपने फोन को चेक करते रहना हमारे कंवर्शेसन को हमारी आत्मा से काफी दूर ले जाता है।’ कार्यक्रम में मौजूद सभी पैनलिस्ट इस बात से सहमत थे कि सार्थक बातचीत की कमी का बिजनेस पर काफी प्रभाव पड़ रहा है और इस दिशा में बदलाव लाने की जरूरत है।

‘Growthsqapes’ के फाउंडर सात्यकी भट्टाचार्जी का कहना था कि लीडरशिप के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक किसी भी लीडर का लगातार संवाद में शामिल होना होता है। यदि लीडर्स लोगों को प्रेरित करने में और सार्थक बातचीत करने में विफल रहते हैं तो वे अच्छे नेतृत्वकर्ता नहीं बन सकते हैं। वहीं, ‘Ishwa Consulting’ के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर अरविंद पंडित का कहना था कि किसी भी लीडर के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह अपनी टीम से ज्यादा से ज्यादा संवाद करता रहे और उनसे जुड़ा रहे, इससे बिजनेस में बेहतर रिजल्ट्स मिलते हैं।

संवाद के तरीके के महत्व के बारे में सीनियर बिजनेस लीडर शुभ्रांशु नियोगी (Subhrangshu Neogi) ने कहा, ‘लगातार संवाद होते रहना किसी भी संस्थान की आत्मा और उसका दिल है। हमेशा अपने स्टैकहोल्डर्स और कंज्यूमर्स से संवाद बनाए रखें। सकारात्मक संवाद के परिणाम भी अच्छे आते हैं। ऐसे में संवाद को हमेशा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए।’ हार्वर्ड द्वारा लगातार 80 साल तक की गई स्टडी में पाया गया कि पैसे और प्रसिद्धि से ज्यादा रिश्ते लोगों को जीवनभर खुश रखते हैं। पैनल में शामिल विशेषज्ञों का सुझाव था कि सकारात्मक बातचीत से ही रिश्तों को और मजबूत व सार्थक बनाया जा सकता है।

‘माइक्रोसॉफ्ट इंडिया’ (Microsoft India) के पूर्व डायरेक्टर (मार्केटिंग) पुनीत मोदगिल (Punit Modhgil) का कहना है, ‘टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी बदल दी है लेकिन इसका इस्तेमाल संवेदनशील रूप से करने की जरूरत है। मोबाइल ने हमारे संवाद करने के तरीके पर काफी प्रतिकूल प्रभाव डाला है और इसका रिश्तों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आने वाले समय में यह ब्रैंड्स को भी प्रभावित करेगा।’ ‘Deloitte’ कंपनी द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भावनात्मक लगाव रिश्ते को और आगे बढ़ाता है, जबकि तर्कसंगत विचार इन्हें कम महत्वपूर्ण बनाते हैं। किसी भी ब्रैंड के लिए अपने ऑडियंस से भावनात्मक रूप से जुड़ना काफी महत्वपूर्ण होता है। इससे लोगों का उस ब्रैंड में भरोसा बढ़ता है और ब्रैंड को आगे बढ़ने व लोकप्रिय बनने में मदद मिलती है।    

इस मौके पर कॉलेज के एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए ‘सिटी बुक लीडर्स’ (City Book Leaders) के चीफ क्यूरेटर और फाउंडर मोहित गुप्ता ने कहा, ‘मनुष्यों के लिए किताबें हमेशा से सार्थक स्टोरीज और संवाद का एक माध्यम रही हैं। अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ें और उन लोगों को सुनें जो किताबें पढ़ते हैं।

हम लोगों के साथ जो बातचीत करते हैं, उसकी क्वालिटी का हमारे एनर्जी लेवल पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ‘परिवर्तन प्रबंधन और व्यापार स्थिरता’ (change management and business sustainability) के बारे में आईआईएम लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार का कहना है, ‘जब आप क्लास में पढ़ाने के दौरान छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करते हैं तो पूरे दिन पॉजीटिव एनर्जी से भरे रहते हैं। हम ऑनलाइन एजुकेशन प्रोग्राम में इस चीज को काफी मिस करते हैं।’ विद्यार्थियों के व्यवहार में आ रहे बदलावों के बारे में डॉ. सुशील कुमार ने कहा, ‘वर्तमान में विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने के बजाय अच्छे ग्रेड लाने पर ज्यादा फोकस करते हैं।’

अमेरिका में पांच हजार लोगों पर हुए एक सर्वे में पाया गया है कि 1985 के बाद से करीबी दोस्त न होने के मामले में अमेरिकियों की संख्या तीन गुना बढ़ चुकी है। जिन लोगों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें से लगभग एक चौथाई ने किसी पर भी अपना भरोसा न होने की बात कही।

 

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टीवी पत्रकार मानक गुप्ता ने सीएम को दी ये नसीहत

बिजली कटौती के खिलाफ विडियो पोस्ट करने को लेकर पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई का ट्वीट कर जताया विरोध

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Manak Gupta

‘न्यूज24’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर और सीनियर एंकर मानक गुप्ता सोशल मीडिया पर चर्चा का सबब बने हुए हैं। इस चर्चा का कारण उनका वह ट्वीट है, जिसमें उन्होंने बिजली कटौती के बारे में सोशल मीडिया पर एक विडियो पोस्ट करने वाले डोंगरगांव निवासी मांगेलाल अग्रवाल नामक व्यक्ति को गिरफ्तार कर उस पर राजद्रोह की कार्रवाई किए जाने को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की कड़ी आलोचना की। अपने इस ट्वीट में मानक गुप्ता का कहना था कि चिलचिलाती गर्मी में सरकार बिजली काट रही है और आम आदमी कराह भी नहीं सकता। अपने इस ट्वीट में उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मांगीलाल को तुरंत रिहा करने की मांग भी उठाई थी।

हालांकि, राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस को इस मुद्दे पर मानक गुप्ता का इस तरह ट्वीट करना रास नहीं आया। छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कहना था कि न्यूज24 चैनल को स्पष्ट करना चाहिए कि यह मानक गुप्ता का विचार है अथवा चैनल का। छत्तीसगढ़ कांग्रेस का यह भी कहना था कि मानक गुप्ता द्वारा फैलाए जा रहे इस झूठ पर चैनल का क्या रुख है।

बात यहीं नहीं थमी, मानक गुप्ता ने छत्तीसगढ़ के इस ट्वीट का जवाब एक और ट्वीट कर दिया। इसमें उन्होंने लिखा, कुछ महीनों में ही जनता का विश्वास क्यों खो दिया...इस पर मंथन करने के बजाय बिजली कटौती से नाराज आम आदमी पर देशद्रोह लगाया...और अब पार्टी के आधिकारिक हैंडल से ट्रोल कर रहे हैं। ऊपर वाला सदबुद्धि दे।

मामला तूल पकड़ते देख मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मांगीलाल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज देशद्रोह की धारा हटाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने की धारा के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। लेकिन मानक गुप्ता ने इसके बाद अपने ट्विटर हैंडल पर एक और ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने सीएम भूपेश बघेल से ये भी कहा है कि पार्टी के हैंडल से मीडिया को ट्रोल करने के बजाय बड़ा दिल दिखाएं और केस रद्द करवाएं। यही नहीं, इसके तुरंत बाद किए और ट्वीट में मानक गुप्ता ने देशद्रोह की धारा का दुरुपयोग करने वाले बिजलीकर्मियों और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।   

गौरतलब है कि राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मुसरा में रहने वाले 53 वर्षीय मांगीलाल अग्रवाल ने एक विडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाया था। मांगीलाल का कहना था, 'एक इन्वर्टर कंपनी के साथ छत्तीसगढ़ सरकार की सेटिंग हो गई है। इसके लिए राज्य सरकार को पैसा दिया गया है। करार के मुताबिक घंटे-दो घंटे में 10 से 15 मिनट के लिए बिजली कटौती होती रहेगी तो इन्वर्टर की बिक्री बढ़ेगी।' बाद में बिजली कंपनी के विधिक सलाहकार एनकेपी सिंह की शिकायत पर पुलिस ने मांगीलाल के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया था।

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