India TV को अलविदा कह नए सफर पर निकले पत्रकार विशाल राज मिश्रा

पत्रकार विशाल राज मिश्रा ने ‘इंडिया टीवी’ (INDIA TV) में अपनी करीब दो साल पुरानी पारी को विराम दे दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 02 September, 2021
Last Modified:
Thursday, 02 September, 2021
Vishal Raj Mishra

पत्रकार विशाल राज मिश्रा ने ‘इंडिया टीवी’ (INDIA TV) में अपनी करीब दो साल पुरानी पारी को विराम दे दिया है। उन्होंने अपनी नई पारी अब ‘इंडिया टुडे’ (India Today) ग्रुप के साथ शुरू की है।

13 साल से ज्यादा के अपने करियर में विशाल कई मीडिया संस्थानों में जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ‘इंडिया टीवी’ से पहले वह ‘न्यूज18’ (news18) में सीनियर विडियो एडिटर के पद पर कार्यरत थे। वह रायपुर से संचालित ‘INH news’ में एडिटर हेड भी रह चुके हैं और उन्हें ग्लोबल सीमांचल एक्सीलेंस अवॉर्ड 2020 (global seemanchal excellence award 2020) से सम्मानित किया जा चुका है।

बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले विशाल ने सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से मीडिया और एंटरटेनमेंट में एमबीए की पढ़ाई की है। उन्हें बेस्ट VT editor के अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। समाचार4मीडिया की ओर से विशाल को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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ZEE ने इनवेस्को के खिलाफ खोला नया ‘मोर्चा’, लगाया ये आरोप

स्टॉक एक्सचेंज को दिए गए स्टेटमेंट में 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ का कहना है, ‘जी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गोयनका ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 13 October, 2021
Last Modified:
Wednesday, 13 October, 2021
Zee Entertainment

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) और ‘इनवेस्को डेवलपिंग मार्केट फंड्स’ (Invesco Developing Market Funds) वाले मामले में नया मोड़ आया है। दरअसल, स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ ने कहा है कि ‘इनवेस्को डेवलपिंग मार्केट फंड्स’ ने पहले उन्हें एक बड़े भारतीय समूह के साथ कंपनी का विलय करने की पेशकश की थी।

स्टॉक एक्सचेंज को दिए गए इस स्टेटमेंट में 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ का कहना है, ‘जी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गोयनका ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इनवेस्को के प्रतिनिधि के तौर पर अरुण बलानी और भवतोष वाजपेयी की ओर से पुनीत गोयनका के सामने फरवरी 2021 में एक डील पेश की गई थी, जिसमें कंपनी और एक बड़े भारतीय समूह के स्वामित्व वाली कुछ संस्थाओं का विलय शामिल था।’  

इस स्टेटमेंट के अनुसार, 'इस डील में पेशकश की गई थी कि उपरोक्त विलय के पूरा होने पर रणनीतिक समूह के पास विलय की गई इकाई में बहुमत हिस्सेदारी होगी और पुनीत गोयनका को एमडी और सीईओ के रूप में नियुक्त किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें चार प्रतिशत हिस्सेदारी देने की पेशकश भी की गई थी।'

'जी' के अनुसार, 'इनवेस्को ने गोयनका के रणनीतिक समूह के साथ कथित विलय प्रस्ताव के विरोध के बारे में कहा था कि यह डील उनके साथ या उनके बिना पूरा की जाएगी। इनवेस्को ने बार-बार गोयनका को कहा कि अगर उन्होंने डील को आगे बढ़ाने से इनकार किया तो उन्हें और उनके परिवार को नुकसान होगा।'

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KOO से जुड़े गौरव खेतान, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

‘कू’ से पहले गौरव खेतान ‘स्टार स्पोर्ट्स’ (Star Sports) में वाइस प्रेजिडेंट (Rights Acquisitions & Strategy) के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 13 October, 2021
Last Modified:
Wednesday, 13 October, 2021
Gaurav Khetan

इंडियन माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘कू’ (Koo) ने गौरव खेतान को वाइस प्रेजिडेंट (बिजनेस) के पद पर नियुक्त किया है। खेतान के लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने सितंबर में यहां जॉइन कर लिया है। ‘कू’ से पहले गौरव खेतान ‘स्टार स्पोर्ट्स’ (Star Sports) में वाइस प्रेजिडेंट (Rights Acquisitions & Strategy) के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

बता दें कि ‘कू’ ने हाल ही में टाइगर ग्लोबल के नेतृत्व में सीरीज बी फंडिंग के जरिये तीन करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 218 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस फंडिंग में मौजूदा निवेशकों एक्सेल पार्टनर्स, कलारी कैपिटल, ब्लूम वेंचर्स और ड्रीम इनक्यूबेटर ने भी हिस्सा लिया है। इसके अलावा नए निवेशकों के तौर पर आईआईएफएल और मिराए एसेट्स भी इसमें शामिल हुए हैं।

‘स्टार स्पोर्ट्स’ में नौ साल से ज्यादा के अपने कार्यकाल में गौरव खेतान ने तमाम विभागों में अपनी जिम्मेदारी निभाई। वाइस प्रेजिडेंट (Rights Acquisitions & Strategy) से पहले वह यहां प्रॉडक्ट हेड (Emerging Sports, driving programming for Football, Badminton, Hockey & Others) के तौर पर कार्यरत थे।

इसके अलावा वह मार्केटिंग हेड (Pro Kabaddi league and Kabaddi World Cup) के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इससे पहले वह ‘स्टार स्पोर्ट्स’ के सभी चैनल्स की प्रोग्रामिंग स्ट्रैटेजी को लीड कर रहे थे। ‘स्टार स्पोर्ट्स’ से पहले वह करीब चार साल तक बतौर बिजनेस कंसल्टेंट ‘PwC’ में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

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युवा पत्रकार आशुतोष दीक्षित ने थामा अब इस मीडिया समूह का दामन

युवा पत्रकार आशुतोष दीक्षित ने दैनिक जागरण, कानपुर में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब चार साल से इस अखबार में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 October, 2021
Last Modified:
Tuesday, 12 October, 2021
Ashutosh Dixit

युवा पत्रकार आशुतोष दीक्षित ने दैनिक जागरण, कानपुर में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब चार साल से इस अखबार में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। आशुतोष दीक्षित ने अब इंडिया टुडे समूह के साथ अपने नए सफर की शुरुआत की है।

मूल रूप से प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) के रहने वाले आशुतोष को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब दस साल का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत ‘समाचार प्लस‘ चैनल से की थी। पूर्व में वह फ्रीलॉन्सिंग के साथ-साथ ‘दैनिक भास्कर‘ में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो आशुतोष ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। उन्होंने एलएलबी करने के साथ ही जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री ली है। समाचार4मीडिया की ओर से आशुतोष दीक्षित को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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प्रसार भारती ने कहा, कुछ मीडिया संस्थान ने फैलायी इस तरह की भ्रामक खबरें

सार्वजनिक प्रसारक संस्थान प्रसार भारती ने आधुनिक तकनीक की ओर कदम बढ़ा दिए हैं और वह पुरानी पड़ चुकी एनलॉग टेक्नालॉजी की जगह डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रयोग बढ़ा रही है।

Last Modified:
Monday, 11 October, 2021
Prasar Bharati

सार्वजनिक प्रसारक संस्थान प्रसार भारती ने आधुनिक तकनीक की ओर कदम बढ़ा दिए हैं और वह पुरानी पड़ चुकी एनलॉग टेक्नालॉजी की जगह डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रयोग बढ़ा रही है। इस कड़ी में अभी तक सभी एनालॉग ट्रांसमीटरों में से लगभग 70% को चरणबद्ध तरीके से बाहर कर दिया गया है। बाकी को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। वहीं, कर्मचारियों की पुन: तैनाती के लिए उचित उपाय सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

सार्वजनिक प्रसारक ने कहा कि सामरिक महत्त्व के स्थानों में लगभग 50 एनालॉग टेरेस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटरों को छोड़कर प्रसार भारती 31 मार्च 2022 तक शेष अप्रचलित एनालॉग ट्रांसमीटरों को बाहर कर देगा। इसी क्रम में 2017-18 में 306, 2018-19 में 468, 2019-20 में 6 और 2020-21 में 46 टेरिस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटर हटाये गए हैं।

प्रसार भारती ने साफ किया है कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कुछ क्षेत्रों को छोड़कर बाकी जगहों से अब एनालॉग तकनीकी पर आधारित टेरिस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटर को हटाया जा रहा है।

प्रसार भारती ने उल्लेख किया कि एनालॉग टेरेस्ट्रियल टीवी (एटीटी) एक अप्रचलित तकनीक है और इसे चरणबद्ध रूप से हटाना सार्वजनिक और राष्ट्रीय हित दोनों में है, क्योंकि यह बिजली पर होने वाले व्यर्थ खर्च को कम करने के अलावा 5जी जैसी नई व उभरती टेक्नोलॉजी के लिए मूल्यवान स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराता है। एटीटी के चरणबद्ध तरीके से हटाने के चलते कई मेगाहर्ट्स के सेपेक्ट्रम मुक्त होंगे, साथ ही  परिचालन खर्च में 100 करोड़ रुपए सालाना तक की बचत होने की उम्मीद है। साथ ही इससे आधुनिक प्रौद्योगिकियों और नए अवसरों की दिशा खुलेगी।

पिछले कुछ वर्षों में दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो में प्रसारण सुधारों को लागू करते हुए, प्रसार भारती एनालॉग टेरेस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटर जैसी अप्रचलित प्रसारण तकनीकों को तेजी से समाप्त कर रहा है, जिससे उभरती प्रौद्योगिकियों और नए कंटेंट के अवसरों में बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

प्रसार भारती ने साफ किया कि कुछ स्थानों पर इस संबंध में गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है कि दूरदर्शन से जुड़ा कोई केन्द्र बंद होने जा रहा है। प्रसार भारती ने स्पष्ट किया कि अप्रचलित एनालॉग टेरेस्ट्रियल टीवी ट्रांसमीटरों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए प्रसारण सुधार कदमों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। हाल ही में ‘डीडी सिलचर’, ‘डीडी कलबुर्गी’ आदि के बारे में ऐसी झूठी खबरें सामने आई हैं।

प्रसार भारती ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये डीडी केंद्र यूट्यूब और सोशल मीडिया सहित डिजिटल मीडिया पर अपनी उपस्थिति बनाए रखने के अलावा अपने-अपने राज्यों को समर्पित दूरदर्शन के सभी सैटेलाइट चैनल प्रसारण के लिए कार्यक्रम कंटेंट तैयार करना जारी रखेंगे। उदाहरण के लिए ‘डीडी सिलचर’ और ‘डीडी कलबुर्गी’ द्वारा बनाये गए कार्यक्रम अब क्रमशः ‘डीडी असम’ और ‘डीडी चंदना’ पर प्रसारित किए जायेंगे।

प्रसार भारती ने साफ किया कि वह अन्य फ्री टू एयर निजी चैनल सहित दूरदर्शन के सभी चैनल डीडी फ्री डिश और डीटीएच के माध्यम से उपलब्ध करा रहा है। डीडी फ्री डिश डीटीएच चैनलों को ‘फ्री टू एयर मोड’ में प्राप्त करने के लिए सेट-टॉप बॉक्स बाजार से एकमुश्त निवेश के रूप में खरीदे जा सकते हैं और इसके माध्यम से कई शैक्षिक चैनलों के साथ-साथ आकाशवाणी के 40 से अधिक सैटेलाइट रेडियो चैनलों सहित 120 से अधिक फ्री-टू-एयर टीवी चैनल देखे जा सकते हैं।

प्रसार भारती ने यह भी जानकारी दी कि 5जी ब्रॉडकास्ट जैसे उभरते मानकों के अनुरूप डिजिटल टेरेस्ट्रियल ब्रॉडकास्टिंग के लिए नेक्स्ट जेन ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन/रोडमैप विकसित करने के लिए प्रसार भारती ने आईआईटी कानपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि डायरेक्ट टू मोबाइल ब्रॉडकास्टिंग जैसे नए एप्लिकेशन को सक्षम बनाया जा सके और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम के इस्तेमाल के जरिए नए कंटेंट के अवसर पैदा किए जा सकें।

 

  

 

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SonyLIV में सीनियर मार्केटिंग मैनेजर रहे मनीष वी. धनवानी ने जॉइन किया MX प्लेयर

सोनीलिव (SonyLIV) में सीनियर मार्केटिंग मैनेजर रहे मनीष वी. धनवानी ने अब MX प्लेयर जॉइन किया है।

Last Modified:
Friday, 08 October, 2021
sonyliv6565

सोनीलिव (SonyLIV) में सीनियर मार्केटिंग मैनेजर रहे मनीष वी. धनवानी ने अब MX प्लेयर जॉइन किया है। उन्हें यहां एसवीओडी (SVOD) का एसोसिएट डायरेक्टर बनाया गया है।

अपनी नई भूमिका में, वह अपने अनुभव का उपयोग एमएक्स प्लेयर में एसवीओडी (SVOD) वर्टिकल को और आगे ले जाने के लिए करेंगे।

अपने 13 साल से भी अधिक लंबे करियर में धनवानी ने टाइम्स ऑफ मनी (Times of Money), बुकमाईशो (BookMyShow), मैककैन (McCann) और पब्लिसिस (Publicis) जैसे ब्रैंड्स के साथ काम किया है।  

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सरकार ने 'प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया' का किया पुनर्गठन, शामिल किए ये 22 नाम

‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने ‘भारतीय प्रेस परिषद’ (Press Council of India) के 14वें कार्यकाल के पुनर्गठन के लिए छह अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर दी है।

Last Modified:
Friday, 08 October, 2021
Press Council of India

‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने ‘भारतीय प्रेस परिषद’ (Press Council of India)  के 14वें कार्यकाल के पुनर्गठन के लिए छह अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रालय ने भारतीय प्रेस परिषद में 22 नए सदस्यों को नामित किया है। इनमें श्रमजीवी पत्रकारों व संपादकों को शामिल किया गया है। बताया जाता है कि ये नियुक्तियां तीन वर्ष के लिए मान्य होंगी।

भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य के रूप में जिन्हें नामित किया गया है, उनमें ‘दैनिक भास्कर’ के समूह संपादक प्रकाश दुबे, ‘पीटीआई‘ के जी सुधाकर नायर, ‘मुजफ्फरपुर बुलेटिन‘ के अंकुर दुआ, ‘एक्सप्रेस न्यूज‘ के समूह संपादक डॉ बलदेव राज गुप्ता,  ह्यूयेन लानपाओ के निवासी संपादक डॉ खेदेम अथौबा मीतेई, ‘जनमोर्चा‘ की संपादक डॉ सुमन गुप्ता, ‘द कारवां‘ के कार्यकारी संपादक विनोद के जोस, ‘आज कल‘ के पत्रकार अंशु चक्रवर्ती, ‘देशबंधु‘ के संवाददाता जय शंकर गुप्ता और ‘संगबाद प्रतिदिन‘ के किंगशुक प्रमाणिक के नाम शामिल हैं।

इनके अलावा ‘आनंद बाजार पत्रिका‘ के प्रजनानंद चौधरी, ‘उत्कल मेल‘ के विनोद कोहली, ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस‘ के गुरबीर सिंह, ‘इंडस वैली टाइम्स‘ के प्रसन्ना मोहंती, ‘भारतीय पर्यवेक्षक‘ के गुरिंदर सिंह, ‘आकाशदीप‘ के एल सी भारतीय, ‘जय प्रदेश‘ की आरती त्रिपाठी, ‘जन सामना‘ के श्याम सिंह पंवार, ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग‘ की ओर से प्रो. जे.एस राजपूत, ‘भारतीय विधिज्ञ परिषद‘ की ओर से शैलेन्द्र दुबे, ‘साहित्य अकादमी‘ की ओर से माधव कौशिक और राज्यसभा सदस्य डॉ. के केशव राव को भी बतौर सदस्य इसमें नामित किया गया है।

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GroupM में हिमांशु शेखर को मिली ये अतिरिक्त जिम्मेदारी

वह कंपनी में इंडोनेशिया मार्केट के सीईओ के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 07 October, 2021
Last Modified:
Thursday, 07 October, 2021
Himanshu Shekhar

जानी-मानी मीडिया एडवर्टाइजिंग कंपनी ‘ग्रुपएम’ (GroupM)  ने हिमांशु शेखर को वियतनाम के मार्केट की अतिरिक्त कमान सौंपी है। वह कंपनी में इंडोनेशिया मार्केट के सीईओ के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। उन्हें वियतनाम मार्केट में नील हार्डविक (Neil Hardwick) की जगह यह जिम्मेदारी दी गई है।  

बता दें कि हिमांशु शेखर लंबे समय से ग्रुपएम के साथ जुड़े हुए हैं और उन्हें वर्ष 2018 में प्रमोट कर ग्रुपएम इंडोनेशिया में सीईओ बनाया गया था।

शेखर मार्च 2010 से इंडोनेशिया में हैं, जब वे ‘माइंडशेयर’ (Mindshare) के बिजनेस में मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में शामिल हुए थे। दिसंबर 2011 में उन्हें माइंडशेयर, इंडोनेशिया के सीईओ के पद पर प्रमोट कर दिया गया था।

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ZEE के खिलाफ विदेशी मीडिया और इनवेस्को में हो रही बड़ी साजिश, बोले डॉ. सुभाष चंद्रा

बुधवार को अपने लोकप्रिय शो ‘डीएनए’ (DNA) में ‘जी मीडिया’ के एडिटर-इन-चीफ और सीईओ सुधीर चौधरी ने इस मुद्दे पर ‘एस्सेल ग्रुप’ के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा से विस्तार से बातचीत की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 06 October, 2021
Last Modified:
Wednesday, 06 October, 2021
DNA

‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लि.’ (ZEEL) ने ‘सोनी पिक्चर नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Picture Networks India) के साथ हाल ही में विलय की घोषणा की है। इसके बाद से ही ‘जी’ के सबसे बड़े निवेशक ‘इनवेस्को’ (Invesco) ने जी एंटरटेनमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ पुनीत गोयनका समेत दो अन्य निदेशकों को हटाने और छह नए निदेशकों की नियुक्ति के साथ बोर्ड के पुनर्गठन की मांग शुरू कर दी है। इसी मद्देनजर इनवेस्को की मंशा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि उसके पीछे किसका हाथ है? इस सवाल से इनवेस्को भाग क्यों रहा है? क्या चीन से उसे मदद मिल रही है? चीन ZEEL के खिलाफ साजिश क्यों कर रहा है? क्या किसी कॉरपोरेट घराने के इशारे पर सब हो रहा है? 

इस मुद्दे पर पिछले दिनों Zee ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अनुरोध किया है कि वह ईजीएम बुलाने के इनवेस्को के अनुरोध को गैरकानूनी व अमान्य करार देने पर विचार करे। वहीं, ZEE के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा ने इनवेस्को की नीयत पर सवाल उठाए हैं।

बुधवार को अपने लोकप्रिय शो ‘डीएनए’ (DNA) में ‘जी मीडिया’ (Zee Media) के एडिटर-इन-चीफ और सीईओ सुधीर चौधरी ने इस मुद्दे पर ‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा से विस्तार से बातचीत की। इस दौरान डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा, ‘जब 1992 में ‘जी’ नेटवर्क आया, तब सिर्फ दूरदर्शन था और वह मनोरंजन के क्षेत्र में सक्रिय नहीं था। हमने उस रिक्त स्थान को भरने का काम किया है। आज कोई 10 लाख करोड़ रुपए भी खर्च करे तो ‘जी’ जैसा ब्रैंड नहीं खड़ा कर सकता। हमारे गोदामों में आज भी 1992 से लेकर 1996 के बीच आई 10 करोड़ चिट्ठी पड़ी हैं।’

डॉ. चंद्रा का कहना था, ‘ये चैनल इनवेस्को और मेरा या किसी और का नहीं है। हमारे ढाई लाख शेयर होल्डर्स का चैनल है। विदेशी खतरा तो 1994 में भी आया, जब मुझे 500 मिलियन डॉलर ऑफर किए गए थे, वो भी विदेशी मीडिया ही था। मैंने उस समय भी उनको कहा था कि इंडिया सेल के लिए नहीं है इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि इनवेस्को सिर्फ निवेशक है, मालिक नहीं है।’ डॉ. सुभाष चंद्रा के अनुसार, ‘इनवेस्को का मैं अभी तक समझ नहीं पा रहा कि इनके पीछे किसका हाथ है। लेकिन कोई तो है, जो पुनीत गोयनका को बदलने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, वो लालची हैं और इसको टेकओवर करना चाहते हैं। सीधे रास्ते से वो आ नहीं सकते इसलिए वो इस प्रकार के हथकंडे अपना रहे हैं। एक कंपनी कानून के प्रावधान का इस्तेमाल करके वो इस मीडिया कंपनी को हथियाना चाहते हैं।’

उनका कहना था, ‘आज ZEE के छह बोर्ड मेंबर हैं और उस पर किसी का कंट्रोल नहीं है। सातवां पुनीत है, लेकिन वह भाग नहीं ले सकता है। सभी बोर्ड मेंबर ने कानूनी राय ली है और जितना मुझे मालूम है कि इनवेस्को की मांग कानूनी रूप से बिल्कुल गलत है। इनवेस्को आज का नहीं, बल्कि पुराना निवेशक है। पुनीत की क्षमता पर तो उन्हें पहले भी भरोसा था, लेकिन आज अचानक से कैसे उनकी राय बदल गई, ये बड़ा सवाल है।’

डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है और मेरी ये निजी राय है कि इनवेस्को में कोई बेईमानी कर रहा है और अपने बड़े अधिकारियों को गुमराह कर रहा है। अगर इनवेस्को ने पहले से कोई डील करके रखी है तो वो कानूनी रूप से गलत है और इनसाइडर ट्रेडिंग के दायरे में आती है। इनवेस्को चाहे तो हम AGM  मीटिंग करने को भी तैयार हैं, लेकिन इससे पहले आप ये बताइये कि आपकी सोनी से क्या डील है? उसके बाद हम अपने शेयर धारकों को बताएंगे कि हमारी क्या योजना है।’

इस शो के दौरान डॉ. सुभाष चंद्रा ने यह भी कहा, ‘मैं ये क्लियर करना चाहता हूं कि इनवेस्को सबसे बड़ी निवेशक भले ही हो सकती है लेकिन 18 फीसदी हिस्से का मतलब यह नहीं है कि आप मालिक हो गए हैं। आज मनोरंजन की दुनिया में अगर कोई ऐसा चैनल है, जिसको पूरा परिवार एक साथ बैठकर देख सकता है, तो वो जी के चैनल्स हैं।’

उन्होंने कहा, ‘इस देश का कानून इनवेस्को को इस तरह टेकओवर करने की इजाजत नहीं देता। इनवेस्को पैसे के बल पर कुछ भी कर सकता है। मैं इनवेस्को को साफ कह देना चाहता हूं कि अगर आप गैरकानूनी तौर से हथियाने की सोच रहे हैं तो न तो ये हो सकता है और न ही हम ऐसा होने देने वाले हैं। इनवेस्को आज ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह बर्ताव कर रही है, लेकिन वो भूल गए कि उसी कंपनी को मैं 1995 में खरीद चुका हूं। आज भी वो डील कागज पर है और मेरे ढाई लाख पाउंड वहीं हैं। उस देश के पीएम तक से मेरी बात हुई थी लेकिन टेकओवर के नियम ऐसे थे कि वो कंपनी मेरे हाथ नहीं आई।’

उनका यह भी कहना था, ‘मुझे इस देश के लोगों पर पूरा भरोसा है कि वो इनवेस्को की मंशा को सफल नहीं होने देंगे। कई लोग यह भी कह रहे होंगे कि सोनी भी विदेशी कंपनी है लेकिन मैं साफ कह दूं कि उन्होंने पूरे पांच साल पुनीत को डायरेक्टर बनाने की हामी भरी है। वो भारत के हिसाब से ही चीजों को बनाना चाहते हैं। मीडिया संस्थान चलाना किसी बैंक को चलाने से कम नहीं है। ये सीधे लोगों के दिल और दिमाग पर असर करता है, इसलिए सरकार ने कानून बनाया हुआ है कि आपको अगर एक डायरेक्टर भी बदलना है तो भी आपको सरकार से इजाजत लेनी होगी। मुझे उम्मीद है कि सरकार भी इस मामले को पूरी तरह से देखेगी।’

इस पूरे शो का वीडियो आप यहां देख सकते हैं।

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लखीमपुर हिंसा: मारे गए पत्रकार को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने रखी ये मांग

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को हुई हिंसा में मारे गए एक स्थानीय पत्रकार की मौत पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने गंभीर शोक प्रकट किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 06 October, 2021
Last Modified:
Wednesday, 06 October, 2021
journalistraman4554

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को हुई हिंसा में मारे गए एक स्थानीय पत्रकार की मौत पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने गंभीर शोक प्रकट किया है। संगठन ने मांग की है कि रमन कश्यप की मौत के मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में गठित एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) से कराई जाए, ताकि पत्रकार के मौत की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

बता दें कि निघासन निवासी पत्रकार रमन कश्यप लखीमपुर खीरी कांड के दिन एक टीवी चैनल के लिए घटना को कवर कर रहे थे, जिसके बाद से ही वे लापता थे। बाद में उनका शव बरामद हुआ। परिजनों ने रमन कश्यप के निधन की पुष्टि की और पोस्टमार्टम हाउस में शव की शिनाख्त की थी।

एडिटर्स गिल्ड ने कहा है कि पत्रकार की मौत के बारे में विभिन्न पक्ष सामने आ रहे हैं। कुछ पक्षों में कहा जा रहा है कि कश्यप की मौत गोली लगने से हुई है तो कुछ लोगों ने उनकी मौत के पीछे अन्य कारणों को जिम्मेदार बताया है। लेकिन गिल्ड की मांग है कि पत्रकार के कैमरे की पूरी फुटेज को भी सुरक्षित रख लिया जाना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी मौत की असलियत को सामने लाने में मदद मिल सकती है।

लखनऊ पत्रकार संघ ने भी रमन कश्यप की मौत को लेकर अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा। पत्र की एक प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजी गई। पत्र में पत्रकार संघ के अध्यक्ष आलोक कुमार त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री से मृतक पत्रकार के परिवार को सरकारी नौकरी के साथ एक करोड़ रुपए की आर्थिक मदद देने का अनुरोध किया। एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि घटना की न्यायिक जांच हो और आरोपी पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए।

वहीं, दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत मंगलवार को करीब चार बजे निघासन पहुंचे, जिसके बाद वह सीधे पत्रकार रमन कश्यप के घर गए और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा सरकार से जो मुआवजा किसानों को मिल रहा है उतना ही मुआवजा रमन के परिवार को दिलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि पत्रकार के दोनों बच्चों की शिक्षा का इंतजाम पलिया स्थित अकाल एकेडमी में निशुल्क कराया जाएगा।  हालांकि इस बयान के बाद बुधवार शाम मृत पत्रकार रमन कश्यप की पत्नी को जिला प्रशासन की तरफ से 45 लाख रुपए का चेक दिया गया। वहीं, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और पंजाब के सीएम चरनजीत चन्नी ने मारे गए चार किसानों और पत्रकार के परिवारों को 50-50 लाख रुपए की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की। 

 बता दें कि इस घटना के दौरान 8 लोगों के मारे जाने की खबर थी, जिसमें से चार किसान, तीन बीजेपी कार्यकर्ता और एक पत्रकार शामिल है। एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि घटना में मारे गए किसानों के परिवारजन को सरकार की ओर से 45-45 लाख रुपए की धनराशि व परिवार के एक सदस्य को सरकार नौकरी देगी। वहीं घायलों को 10-10 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जाएंगे। फिलहाल प्रशासन ने 45 लाख रुपए का मुआवजा चेक के जरिए पीड़ित परिवारों को सौंप दिया है।  

  

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लंबे समय से रुकी हुई न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स के मुद्दे पर BARC ने लिखा ईमेल, कही ये बात

देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया ने अपने स्टेकहोल्डर्स में से एक को ईमेल किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 05 October, 2021
Last Modified:
Tuesday, 05 October, 2021
Barc India

देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया ने अपने स्टेकहोल्डर्स में से एक को लिखे गए ईमेल में कहा है कि उसकी टीम ने अब टेक्निकल कमेटी अनुमोदित समाधान के लिए सभी डेवलपमेंट और परीक्षण कार्य समाप्त कर लिए हैं।

इस ईमेल में कहा गया है, ‘अब हम संवर्धित डाटा रिपोर्टिंग मानकों के कार्यान्वयन के लिए अपेक्षित अनुपालन और नियामक प्रक्रियाओं को पूरा करने की दिशा में हैं। यह ईमेल 27 सितंबर को एक न्यूज संगठन के न्यूज जॉनर के लिए टीआरपी डाटा तुरंत जारी करने के अनुरोध के जवाब में भेजा गया था।

इस ईमेल के अनुसार, बार्क ने लिखा है कि वे उनकी चिंताओं को समझते हैं और वे अपने स्टेकहोल्डर्स से मिलने वाले फीडबैक के अनुसार निर्देशित (guided) होते रहेंगे।

लेटर के अनुसार, ‘आप इस बात की भी सराहना करेंगे कि हमें खुद को आपके मेल के उन हिस्सों तक सीमित रखने की आवश्यकता है जो सीधे बार्क इंडिया से संबंधित हैं और तदनुसार हमारे उत्तरों को उनके लिए प्रासंगिक रखा है।’

बार्क ने अपने ईमेल में दोहराया कि रेटिंग रोकने का निर्णय एकतरफा निर्णय नहीं था। बार्क के अनुसार, ‘हमारे निर्णय पूरी तरह से इंडस्ट्री से मिलने वाले गाइडेंस और प्रतिक्रिया द्वारा संचालित होते हैं, जो मुख्य रूप से बोर्ड और टेक्निकल कमेटी के माध्यम से हमारे पास आते हैं। दोनों निकाय हमारे सबस्क्राइबर्स के एक विस्तृत वर्ग का उचित प्रतिनिधित्व करते हैं।’

लेटर में कहा गया है कि न्यूज जॉनर के लिए चैनल स्तर के डाटा को रोकने का निर्णय तकनीकी समिति द्वारा प्रस्तावित किया गया था, जो फीडबैक और ‘अत्यावश्यक परिस्थितियों’ के आधार पर था।

इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि शुरुआत में समीक्षा की अवधि 8-12 सप्ताह के लिए थी, लेकिन टेक्निकल कमेटी के स्टेकहोल्डर्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के विचारों पर परामर्श करने के कारण इसमें अधिक समय लगा है।

हितधारकों को उनके धैर्य के लिए धन्यवाद देते हुए बार्क ने कहा कि उसने टेक्निकल कमेटी अनुमोदित समाधान के लिए सभी विकास और परीक्षण कार्य समाप्त कर लिए हैं। बार्क ने कहा है, ‘अब हम संवर्धित डाटा रिपोर्टिंग मानकों के कार्यान्वयन के लिए अपेक्षित अनुपालन और नियामक प्रक्रियाओं को पूरा करने की दिशा में हैं। निश्चिंत रहें हम अपने सभी सबस्क्राइबर्स को अपने स्टेकहोल्डर्स निकायों के माध्यम से ताजा घटनाक्रम बताते रहेंगे और हम अपने सबस्क्राइबर्स की टीवी व्युअरशिप डाटा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

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