सरकार की आलोचना का महिला पत्रकार को इस तरह भुगतना पड़ा खामियाजा

सरकार चाहे भारत की हो या अमेरिका की, किसी को पसंद नहीं आता कि कोई उसके खिलाफ...

Last Modified:
Friday, 08 March, 2019
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समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

सरकार चाहे भारत की हो या अमेरिका की, किसी को पसंद नहीं आता कि कोई उसके खिलाफ आवाज़ बुलंद करे। जब कोई ऐसा करता है,  तो उसे इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है।

फ़िनलैंड की पत्रकार जेसिका आरो के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दरअसल, अमेरिकी की डोनाल्ड ट्रम्प सरकार ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में 10 साहसी महिला पत्रकारों को सम्मानित करने का फैसला लिया था। इनमें जेसिका का नाम भी शामिल था, लेकिन आखिरी मौके पर उनका नाम पुरस्कार ग्रहण करने वालों की सूची से हटा दिया गया। अमेरिकी प्रशासन द्वारा अब तर्क दिया जा रहा है कि जेसिका का नाम भूलवश शामिल कर लिया गया था।

स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता रॉबर्ट पल्लडिनो का इस बारे में कहना है, ‘फिनिश खोजी पत्रकार जेसिका आरो को फाइनलिस्ट नहीं चुना गया था, उनका नाम गलती से लिया गया और इसके लिए हमें खेद है’।

जेसिका ने रूस के प्रोपेगंडा ऑपरेशन को उजागर किया था और इसके लिए उन्हें काफी उत्पीड़न का सामना भी करना पड़ा। इसी खोजी रिपोर्ट के आधार पर फ़िनलैंड की राजधानी हेलसिंकी स्थित अमेरिका दूतावास द्वारा ‘इंटरनेशनल वीमेन ऑफ करेज अवार्ड’ के लिए जेसिका के नाम की सिफारिश की गई थी। पहले तो ट्रम्प प्रशासन ने इस सिफारिश को सहर्ष स्वीकार कर लिया और जेसिका को पुरस्कार ग्रहण करने वालीं 10 महिला पत्रकारों की सूची में भी शामिल कर लिया, लेकिन जब जेसिका के सोशल मीडिया अकाउंट खंगाले गए तो सरकार ने अपना फैसला बदल दिया।

फॉरेन पॉलिसी मैगज़ीन ने कुछ अधिकारियों के हवाले से बताया है कि जेसिका के सोशल मीडिया पोस्ट से यह बात सामने आई कि उन्होंने कई मुद्दों को लेकर अमेरिकी सरकार की आलोचना की है, जिसके बाद उनका नाम पुरस्कार पाने वालों से सूची से हटा दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन ऐसे पत्रकार को सम्मानित नहीं करना चाहता, जो राष्ट्रपति ट्रम्प का आलोचक है। वहीं, आरो ने ट्रम्प सरकार के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है ‘यह मेरे साथ हुआ और यह अविश्वसनीय, लेकिन सच है। यह अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है।’

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