इन वजहों से बढ़ रहे हैं पत्रकारों पर हमले!

देशभर में पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही...

Last Modified:
Friday, 09 November, 2018
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रुहैल अमीन ।।

देशभर में पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले कुछ समय की ही बात करें तो इस तरह की कई घटनाएं हमें पढ़ने को मिली हैं। अक्टूबर की शुरुआत में ही सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की इस्तांबुल में हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ दिन बाद ही छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने दूरदर्शन की टीम पर हमला कर दिया था। इस हमले में दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत हो गई थी।

ये तो सिर्फ चंद उदाहरण हैं, नहीं तो ऐसे पत्रकारों की लंबी फेहरिस्त हैं, जो ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं। अपना देश भी तेजी से पत्रकारों के लिए असुरक्षित बनता जा रहा है। हाल ही में जारी हुई ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (Reporters Without Borders) की ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स’ (World Press Freedom Index) के अनुसार, पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देशों की लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल है और यह 138वें नंबर पर है।     

पत्रकार संगठन ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) द्वारा जारी 'ग्लोबल इम्प्युनिटी इंडेक्स' में भी भारत 14वें नंबर पर है। इस इंडेक्स में उन देशों को शामिल किया जाता है, जहां पत्रकारों पर हमलों के लिए अपराधियों को सजा नहीं मिलती है। पिछले एक दशक में पत्रकारों की हत्या के 18 ऐसे मामले भारत से सामने आए हैं, जो सुलझ नहीं पाए हैं।

देश में इस तरह के बढ़ते मामलों और इनकी रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में BAG Network की चेयरपर्सन और एमडी अनुराधा प्रसाद का कहना है, ‘पत्रकारों, खासकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा हम सभी के लिए एक बड़ा मुद्दा है। मैं ये तो नहीं कहूंगी कि पत्रकारों के लिए भारत असुरक्षित है, लेकिन पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं और वे भीड़ व उपद्रवियों के लिए  आसान टार्गेट बन रहे हैं। मुझे लगता है कि महिला पत्रकार ज्यादा चपेट में आ रही हैं और इस तरह के हमलावरों को सामने लाने के लिए मीडिया को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।’

वहीं, अंग्रेजी न्‍यूज चैनल 'CNN-News18' के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे का मानना है, ‘अपने देश में पत्रकारों को लगातार धमकियां मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर पत्रकारों के लिए तमाम तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि टकराव वाले क्षेत्रों में जाते समय पत्रकारों को पूरी तरह सावधानी बरतनी चाहिए। हमारा समाज ऐसा बनता जा रहा है, जहां पर लोग जरा सी बात पर आपा खो दे रहे हैं और इसका सबसे अधिक शिकार पत्रकार बन रहे हैं।’        

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता का कहना है, ‘पत्रकारों के लिए भारत असुरक्षित नहीं है। पत्रकारिता में ज्यादा रिस्क और चुनौतियां हैं। इसके अलावा पत्रकारों को हमेशा निष्पक्ष रहना चाहिए और किसी भी तरह से चरमपंथियों और उनकी विचारधारा का सपोर्ट नहीं करना चाहिए। इससे भी ज्यादा जरूरी है कि राजनीतिक दलों और संस्थानों को मीडिया के प्रति दुर्भावना को बढ़ावा नहीं देना चाहिए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।’

इस बारे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइजर रहे और ‘GoNews’ के एडिटर-इन-चीफ पंकज पचौरी का कहना है, ‘यदि हम देखें तो खतरनाक क्षेत्रों को कवर करने वाले पत्रकारों की संख्या नए प्लेटफॉर्म्स आने के साथ ही बढ़ी है। अब पत्रकार न्यूज कवर करने के लिए इराक भी जा रहे हैं। ऐसे में पत्रकारों के लिए जोखिम बढ़ गया है और इसके साथ ही अप्रिय घटनाओं के आंकड़ों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। ऐसी जगहों पर चाहे सुरक्षा बल हों अथवा उपद्रवी, वे पत्रकारों को खतरे के रूप में देखते हैं। ऐसे में पत्रकारों को दोनों तरफ से खतरा रहता है।

पंकज पचौरी के अनुसार, ‘यदि मैं अपने अनुभव की बात करूं तो ऐसा मेरे साथ कश्मीर में हो चुका है, जहां पर सुरक्षाकर्मी नहीं चाहते कि मैं ये बात जानूं कि वे क्या कर रहे हैं और आतंकियों का सोचना है कि मैं सुरक्षा बलों के साथ हूं। एेसे में दोनों तरफ से खतरा रहता है। पूरी दुनिया में यही हो रहा है।’ पचौरी का यह भी कहना है कि सरकार को पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे पूर्वाग्रह से दूर रहकर अपने काम के प्रति सच्चे रहें।

उनका ये भी कहना है कि इन चीजों पर सरकार को भी सख्त होना होगा और बताना होगा कि वे पत्रकारों की स्वतंत्रता के लिए उनके साथ खड़े हैं। दूसरी बात पत्रकारिता पर पेड न्यूज और राजनीतिक दलों का पक्ष लेने के आरोप लगने के कारण यह बदनाम हो गई है। जब पत्रकार पक्षपाती हो जाता है तो उसकी सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है।

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