लॉन्चिंग की शुरुआत में ही अरनब गोस्वामी के चैनल को मिली ‘अच्छी खबर’

वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी का हिंदी न्यूज चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ दो फरवरी को अपनी लॉन्चिंग...

Last Modified:
Friday, 15 February, 2019
Arnab Goswami

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी का हिंदी न्यूज चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ (republic bharat) दो फरवरी को अपनी लॉन्चिंग के बाद से ही मार्केट में छाया हुआ है। चैनल की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले हफ्ते में ही इस चैनल के खाते में 73 मिलियन इंप्रेशंस दर्ज किए गए हैं। चैनल के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी का शाम सात बजे आने वाला शो ‘पूछता है भारत’ (Poochta Hai Bharat) इस जॉनर में सबसे आगे पहुंच गया है और लोग इसे काफी पसंद कर रहे हैं।

अपनी लॉन्चिंग के बाद से ‘रिपब्लिक भारत’ ने ममता बनर्जी-सीबीआई के बीच टकराव (#MamtaBlocksCBI) और शारदा चिटफंड (#ShardaStings) जैसी बड़ी स्टोरी पर फोकस किया है। इस वजह से चैनल को न सिर्फ सोशल मीडिया पर इंप्रेशंस मिले हैं, बल्कि यह पश्चिम बंगाल में नंबर दो की पोजीशन पर पहुंच गया है। अरनब गोस्वामी का कहना है, ‘यह एक बहुत ही शानदार शुरुआत है। अपनी लॉन्चिंग के पहले हफ्ते में ही रिपब्लिक भारत सात करोड़ से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बना चुका है।’

इस बारे में ‘आईपीजी मीडिया ब्रैंड्स’ (IPG Mediabrands) के सीईओ शशि सिन्‍हा का कहना है, ‘लॉन्चिंग के पहले ही हफ्ते में 73 मिलियन लोगों तक पहुंच बनाने के लिए रिपब्लिक की टीम ने काफी कड़ी मेहनत की है। यह काफी अच्छी शुरुआत है और चूंकि चुनाव आने वाले हैं, ऐसे मे चैनल को अपनी पहुंच बढ़ाने और मार्केट शेयर बढ़ाने का अच्छा अवसर मिलेगा। हिंदी जॉनर में छह साल के गैप के बाद किसी मजबूत ब्रैंड की एंट्री हुई है।’

वहीं, ‘रिपब्लिक नेटवर्क’ के सीईओ विकास खनचंदानी का कहना है, ‘हम इस बात से बहुत खुश हैं कि रिपब्लिक भारत ने शुरुआती हफ्ते में 73 मिलियन लोगों तक अपनी पहुंच बना ली है। हमारी डिस्टीब्यूशन और कंटेंट टीम ने इसके लिए कड़ी मेहनत की है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस तरह की शुरुआत हमारी उम्मीद से ज्यादा तेजी से चैनल को टॉप स्लॉट में ले जाएगी। हिंदी न्यूज कैटेगरी में इतना सपोर्ट करने के लिए मैं दर्शकों के साथ ही अपने पार्टनर्स का तहे दिल से शुक्रगुजार हूं।’

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फेक न्यूज पर लग सकती है लगाम, जब इन बातों का रखेंगे ध्यान

सिर्फ भारत में ही यह समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी इससे जूझ रहे हैं

Last Modified:
Thursday, 21 November, 2019
Fake News

फेक न्यूज के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। सिर्फ भारत में ही यह समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी इससे जूझ रहे हैं। फेक न्यूज से निपटने के लिए तमाम स्तर पर कवायद भी हो रही है, लेकिन यह समस्या काबू में नहीं आ रही है।

फेक न्यूज पर रिसर्च कर रहे अमेरिका की पेन्सिलेवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अब सात तरह की फेक न्यूज की पहचान की है। इस रिसर्च का उद्देश्य फेक न्यूज को बेहतर तरीके से पहचानना और इस तरह की तकनीक बनाना है, जो अपने आप इस तरह के कंटेंट को पहचान ले। शोधकर्ताओं ने फेक न्यूज को सात श्रेणियों- गलत समाचार (false news), ध्रुवीकृत कंटेंट (polarized content), गलत रिपोर्टिंग (misreporting), व्यंग्य (satire), टिप्पणी (commentary), दबाव देनी वाली सूचना (persuasive information) और नागरिक पत्रकारिता (citizen journalism) में बांटा है।

‘अमेरिकन बिहेवेरियल साइंटिस्ट’ (American Behavioral Scientist) मैगजीन में छपे एक रिसर्च में इन फेक न्यूज की असली न्यूज के साथ तुलना की गई है। इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि असली समाचार में कई विशेषताएं होती है, जो इसे फेक न्यूज की इन श्रेणियों से अलग बनाती हैं। जैसे-असली समाचार में पत्रकारिता की शैली का पालन किया जाता है। इसमें व्याकरण और तथ्यों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, जबकि फेक न्यूज में ऐसा नहीं होता है। वहीं, फेक न्यूज की हेडलाइन भ्रामक होती है और इसमें भावनात्मक रूप से प्रेरित बातों पर ज्यादा जोर रहता है। फेक न्यूज का सोर्स और इनके इस्तेमाल के तरीके भी अलग होते हैं।

इस रिसर्च में यह भी पाया गया कि फेक न्यूज में जिस वेब एड्रेस का इस्तेमाल किया जाता है, वह मानक के अनुरूप नहीं होता है। इसके साथ ही इसमें कॉंटेक्ट करने के लिए निजी ईमेल आईडी दिए जाते हैं। सोशल मीडिया पर इस तरह की फेक न्यूज ज्यादा देखने को मिलती हैं। मैगजीन में छपे इस रिसर्च पेपर में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन न्यूज के मैसेज को देखकर, उसका स्रोत किया है और उसके लिए किस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया है, इसकी पहचान कर फेक न्यूज को पहचाना जा सकता है।

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नेटवर्क18 में अब बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे ये दो प्रफेशनल्स

समूह ने ऑडियंस में तेजी से हो रही बढ़ोतरी और डिजिटल के बढ़ते रेवेन्यू के कारण मार्केट से तालमेल बिठाने के लिए यह निर्णय लिया है

Last Modified:
Thursday, 21 November, 2019
Network18

देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘नेटवर्क18’ (Network 18) ने ‘News18.com’ की लीडरशिप टीम की जिम्मेदारियों में कुछ बढ़ोतरी की है। इसके तहत अजीम ललानी (Azim Lalani) को सीओओ (ब्रैंड सॉल्यूशंस और कंवर्जेंस) बनाया गया है, वहीं मितुल संगानी (Mitul Sangani) को सीओओ (जनरल न्यूज) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऑडियंस में तेजी से हो रही बढ़ोतरी और डिजिटल के बढ़ते रेवेन्यू के कारण मार्केट से तालमेल बिठाने के लिए समूह द्वारा यह निर्णय लिया गया है  

ललानी इससे पूर्व बिजनेस हेड (इंग्लिश न्यूज क्लस्टर) के पद पर काम कर रहे थे। वहीं, मितुल संगानी इससे पूर्व न्यूज18 के बिजनेस हेड (भारतीय भाषाएं) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब नई भूमिका में वह पीएंडएल (P&L), मुद्रीकरण (monetization), ऑडियंस ग्रोथ (संपादकीय टीम के साथ), News18 English, News18 Languages और उनमें शामिल सभी वर्टिकल्स के प्रॉडक्ट और मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे। अपनी नई भूमिका में अजीम ललानी और मितुल संगानी पहले की तरह नेटवर्क18 (डिजिटल) के प्रेजिडेंट पुनीत सिंघवी को रिपोर्ट करना जारी रखेंगे।

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ZEE समूह की हिस्सेदारी बेचने के मामले में अब हो रही ये तैयारी

इस बारे में डील लगभग हो चुकी है और यह रकम कर्जदाताओं को चुकाई जाएगी

Last Modified:
Thursday, 21 November, 2019
Zee Group

‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) अपनी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी 'जी ऐंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज’ (ZEE) की 16.5 प्रतिशत हिस्सेदारी वित्तीय निवेशकों को बेचने की योजना बना रहा है। इनमें से 2.3 प्रतिशत हिस्सेदारी ‘OFI Global China Fund’ और 'LLC’ अथवा इसकी सहयोगी कंपनियों को बेचने की योजना है।

माना जा रहा है कि यह बिक्री अगले कुछ दिनों में हो सकती है और इससे कंपनी के प्रमोटर्स को 4500-5000 करोड़ रुपए की वसूली में मदद मिलेगी। बताया जाता है कि इस बारे में डील लगभग हो चुकी है और 16.5 हिस्सेदारी बेचने के बाद कर्जदाताओं को यह रकम चुकाई जाएगी। इस डील के बाद प्रमोटर्स की इस कंपनी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी और पुनीत गोयनका एमडी व सीईओ के तौर पर काम करते रहेंगे।  

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सरकार के इस फैसले से सूचना सलाहकारों की हुई बल्ले-बल्ले

शलभमणि त्रिपाठी और रहीस सिंह को हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने बनाया है सूचना सलाहकार

Last Modified:
Wednesday, 20 November, 2019
Rahees Singh Shalabhmani Tripathi

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सूचना सलाहकारों के वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी पर अपनी मुहर लगा दी है। सूचना सलाहकारों के वेतन-भत्तों में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी। इस बैठक में अन्य फैसलों के साथ सूचना सलाहकारों के वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी किए जाने पर भी मुहर लगा दी गई। पहले सूचना सलाहकार का वेतन जहां 40 हजार रुपए और आवास भत्ता दस हजार रुपए था, वहीं अब इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए वेतन और 25 हजार रुपए आवास भत्ता कर दिया गया है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी और लखनऊ के पत्रकार रहीस सिंह को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले महीने ही सूचना विभाग में सलाहकार के पद पर नियुक्त किया था। शलभमणि त्रिपाठी के पास इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जिम्मा है, वहीं रहीस सिंह को प्रिंट मीडिया की जिम्मेदारी दी गई है।

शलभमणि त्रिपाठी ने वर्ष 2016 में पत्रकारिता छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली थी। इससे पहले वे देश के बड़े न्यूज चैनल आईबीएन7 के लखनऊ ब्यूरो चीफ रह चुके हैं। बीजेपी जॉइन करने के बाद उन्हें पार्टी में प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी थी। वहीं रहीस सिंह लखनऊ की पत्रकारिता का जाना-माना नाम हैं। वह लेखन के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय हैं। हाल ही में वे कर्मयोगी संन्यासी योगी आदित्यनाथ के नाम से एक किताब लिखकर भी चर्चा में आए थे।

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भारतीय मार्केट में पैठ बढ़ाने का BBC ने बनाया ये 'मेगा प्लान'

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में बताई रूपरेखा, अगला आयोजन मुंबई में किया जाएगा

Last Modified:
Wednesday, 20 November, 2019
BBC EVENT

‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ (BBC Global News) अगले साल ‘बीबीसी डॉट कॉम’ (BBC.com) पर दो नए प्रीमियम कलेक्शंस लॉन्च करने जा रही है। ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ की ओर से दिल्ली में मंगलवार को पहली बार ‘Upfront’ इवेंट आयोजित किया गया, वहीं मुंबई इवेंट गुरुवार को किया जाएगा। बता दें कि ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ (BBC World News) और ‘बीबीसी डॉट कॉम’ का स्वामित्व ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ के पास है और यही इनका संचालन करती है।   

इस इवेंट की थीम ‘The Power of an Authentic Voice’ रखी गई और इसका उद्देश्य भारतीय मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्रीज को एक मंच पर लाना है। इसमें ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ की ओर से अपने आगामी कंटेंट के साथ ही पार्टनरशिप और आगामी योजनाओं के बारे में चर्चा की जा रही है।

‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ द्वारा जिन दो नए प्रीमियम कलेक्शंस की लॉन्चिंग की बात हो रही है, उनके नाम ‘बीबीसी फ्यूचर यू’ (BBC Future You) और ‘बीबीसी फ्यूचर प्लैनेट’ (BBC Future Planet) हैं। ‘बीबीसी फ्यूचर यू’ जहां लोगों के स्वास्थ्य (wellness) पर केंद्रित होगी, वहीं ‘बीबीसी फ्यूचर प्लैनेट’ में स्थायित्व (sustainability) पर फोकस किया जाएगा। दोनों का उद्देश्य अपने ऑडियंस तक ब्रैंड्स की पहुंच को सुगम बनाना है।

 ‘Upfronts’ के द्वारा कार्यक्रम में मौजूद लोगों को ‘Audio: Activated’ - BBC Global News’ के बारे में जानने-समझने का मौका मिला। यह एक नई रिसर्च है कि लोग किस तरह से ब्रैंडेंड ‘पोडकास्ट’ (ऑन डिमांड टॉक रेडियो) से जुडते हैं और भारतीय मार्केट में यह कैसे लागू होती है। इस रिसर्च से पता चला है कि ब्रैंडेड पोडकास्ट विज्ञापन का एक प्रभावी माध्यम है।

इस पहल के तहत ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ और ‘बीबीसी डॉट कॉम’ के आगामी कंटेंट पर भी प्रकाश डाला जाएगा। इसमें अभिनेता शाहरुख खान के साथ टॉकिंग मूवी ‘बॉलिवुड स्पेशल’ से लेकर ‘इंडियन स्पोर्ट्स वुमैन ऑफ द ईयर’ के साथ ही तीन पार्ट्स में भारतीय संगीत के सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ी श्रंखला भी शामिल होगी।

इस बारे में ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ के सेल्स डायरेक्टर (दक्षिण एशिया) विशाल भटनागर का कहना है, ‘इन पहल के साथ बीबीसी का नाम जुड़ा हुआ है, जो दुनियाभर का जाना-माना नाम है, ऐसे में आप प्रामाणिक आवाज के मामले में इन पर भरोसा कर सकते हैं। ऑडियो के क्षेत्र में हम करीब सौ सालों से सबसे आगे हैं और ये प्रोजेक्ट भारत के प्रति हमारी लगातार प्रतिबद्धता के साथ ही ऑडियंस और बिजनेस पार्टनर्स के मामले में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ न्यूज संस्थान बनने की हमारी महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं।

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देश में मीडिया की आजादी को किस तरह लग रहा पलीता, सामने आई ये रिपोर्ट

‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया’ और ‘द विजन फाउंडेशन’ द्वारा तीन नवंबर से 14 नवंबर के बीच कराया गया सर्वे

Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Press

पत्रकारों को अपना काम करने के दौरान तमाम तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। पिछले दिनों गैर लाभकारी संगठन ‘द विजन फाउंडेशन’ और देश में पत्रकारों के प्रमुख संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया (एनयूजे-आई)’  द्वारा कराए गए सर्वे में भी इसी तरह की बातें सामने आई हैं।

पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया समूहों के लिए सुरक्षा प्रावधानों पर देशभर के पत्रकारों के बीच तीन नवंबर से 14 नवंबर के बीच यह सर्वे किया गया। इस सर्वे का उद्देश्य पत्रकारों पर हमलों अथवा प्रताड़ना के मामलों को समझना और इस बारे में समय रहते प्रभावी कार्ययोजना बनाना है।

सर्वे के दौरान यह बात सामने आई कि देश में करीब 61 प्रतिशत पत्रकारों को अपनी खबरों के कारण कभी-न-कभी धमकी अथवा अन्य प्रकार के दबाव का सामना करना पड़ता है। सर्वे के अनुसार, पत्रकारों पर हमले की बढ़ती घटनाओं के कारण अभिव्यक्ति की आजादी का खतरा भी बढ़ रहा है। इस सर्वे में देशभर के करीब 823 पत्रकारों ने भाग लिया, जिनमें 21 प्रतिशत महिला पत्रकार शामिल रहीं। सर्वे में 266 पत्रकार प्रिंट मीडिया के, 263 पत्रकार ऑनलाइन मीडिया के और 98 पत्रकार टेलिविजन से संबद्ध रहे।

सर्वे में यह भी सामने आया है कि इस साल अपने काम के कारण अब तक चार पत्रकारों की हत्या हो चुकी है, जबकि पिछले साल देश में पांच पत्रकारों की हत्या हुई थी। सर्वे में शामिल 46 प्रतिशत पत्रकारों ने माना कि उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे- ट्विटर और फेसबुक पर धमकी मिली, जबकि 17 प्रतिशत का मानना था कि उन्हें वॉट्सऐप अथवा प्राइवेट मैसेज के माध्यम से धमकी दी गई।

सर्वे में शामिल करीब 74 प्रतिशत पत्रकारों का मानना था कि उनके संस्थान में तथ्यों की सटीकता पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता था जबकि 13 प्रतिशत का मानना था कि उनका संस्थान हमेशा विशेष प्रकार के समाचारों को प्राथमिकता देता है। करीब 33 प्रतिशत पत्रकारों ने 21वीं सदी में पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते हमले को माना, जबकि करीब 21 प्रतिशत पत्रकारों का मानना था कि आने वाले समय में फर्जी और पेड समाचार सबसे बड़ी चुनौती बनेंगे।

करीब 18 प्रतिशत पत्रकारों का कहना था कि इन दिनों न्यूज वेबसाइट की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में अखबार और पारंपरिक मीडिया के उपेक्षा बढ़ने के साथ ही लोगों की समाचारों के प्रति विश्वसनीयता घटी है। यह सबसे बड़ा संकट है।

इस सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 44 प्रतिशत पत्रकारों ने उन्हें मिली धमकी अथवा प्रताड़ना की शिकायत अपने संस्थान से की जबकि इस तरह के मामलों में महज 12 प्रतिशत पत्रकारों ने ही पुलिस अथवा अन्य कानूनी एजेंसियों को इससे अवगत कराया। जिन पत्रकारों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें से करीब 61 प्रतिशत पत्रकारों ने अपने काम की वजह से कभी न कभी हमले अथवा धमकी की बात स्वीकारी, जबकि 76 प्रतिशत पत्रकारों ने माना कि उनके मीडिया संस्थानों में सुरक्षा संबंधी किसी तरह का प्रावधान नहीं हैं। इन पत्रकारों का यह भी मानना था कि उन्हें किसी भी प्रकार के सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं दिया गया है और न ही कोई सुरक्षा प्रोटोकाल है।

सर्वे में यह भी सामने आया है कि क्षेत्रीय अथवा गैर अंग्रेजी पत्रकारों पर होने वाले हमलों की खबर को भी राष्ट्रीय स्तर पर तवज्जो नहीं मिल पाती है। सर्वे में शामिल कई पत्रकारों का मानना है कि इस तरह की स्थिति दूर होनी चाहिए और सरकार को तुरंत एक प्रभावी नियामक बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

इस रिपोर्ट को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं। 

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अब पत्रकारों के सम्मान व सुरक्षा का यूं ध्यान रखेगी पुलिस

उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दखल के बाद आईजी ने अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों को जारी किए दिशा निर्देश

Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Police

पत्रकारों से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस की भूमिका पर आए दिन सवाल उठते रहते हैं। कहीं पुलिस पर पत्रकारों के उत्पीड़न के आरोप लगते हैं तो कहीं ये आरोप लगता है कि पुलिस शिकायत लेकर पहुंचने वाले पत्रकारों की सुनवाई नहीं करती है। इसके अलावा पत्रकारों व उनके परिजनों को झूठे मामलों में फंसाने के मामले भी गाहे-बगाहे सामने आते रहते हैं।  

इस तरह के मामले संज्ञान में आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने अधीनस्थ अधिकारियों को पत्रकारों के हितों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आईजी (कानून-व्यवस्था) प्रवीण कुमार की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को जारी किए गए इन निर्देशों में कहा गया है कि पुलिस के पास यदि कोई पत्रकार पहुंचता है तो उसे समुचित सम्मान दिया जाए। पत्रकारों तथा उनके परिजनों को बेवजह झूठे केसों में न फंसाया जाए।

आईजी का कहना है कि यदि किसी पत्रकार अथवा उसके परिजनों के खिलाफ कोई मामला सामने आता है तो पहले उस मामले की किसी राजपत्रित अधिकारी से जांच करवाई जाए और इसके बाद ही कोई कार्यवाही की जाए। खबरें जुटाने में पत्रकारों को किसी तरह की परेशानी आड़े न आए, इसके लिए पुलिस अधिकारियों को पूरा सहयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पत्रकारों की समस्याओं का निस्तारण जनपद स्तर पर ही हो सके, इसके लिए आईजी ने सक्षम अधिकारी नामित करने के निर्देश भी दिए हैं।

बता दें कि आईजी ने यह दिशा-निर्देश भारतीय पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिवाकर सिंह की पहल पर दिए हैं। पत्रकारों के खिलाफ उत्पीड़न के बढ़ते मामलों को लेकर दिवाकर सिंह ने पिछले दिनों एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी ओपी सिंह से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताई थीं। उन्होंने इस तरह के मामलों को संज्ञान में लाकर आवश्यक कदम उठाए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने दिवाकर सिंह की बात को गंभीरता से लेते हुए इस बारे में सभी पुलिस अधीक्षकों को कड़े आदेश जारी करने के निर्देश दिए थे।

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दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ पर 1500 रुपये लूटने का मुकदमा!

दस महीने पहले की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उठाया कदम, पत्रकार ने कार्रवाई को मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश बताया

Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Jagran

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में 'दैनिक जागरण' के ब्यूरो चीफ धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ नगर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। धर्मेंद्र मिश्र पर तहसील के अमीन धर्मेंद्र कुमार शुक्ल से लूट व मारपीट करने का आरोप है। मामले की जांच शहर कोतवाल केबी सिंह ने घण्टाघर चौकी प्रभारी अमरेंद्र सिंह को सौंपी है। खास बात यह है कि इस मामले में धर्मेंद्र कुमार शुक्ल ने करीब दस महीने कोतवाली में लिखित शिकायत दी थी, जिस पर अब जाकर पुलिस चेती है और राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर शनिवार को एफआईआर दर्ज की है।

बता दें कि सितंबर 2018 में 'दैनिक जागरण' ने अमेठी जिले के निवासी धर्मेंद्र मिश्र को सुल्तानपुर में ब्यूरो चीफ के पद पर तैनात किया था। दिसंबर 2018 में अमेठी से सुल्तानपुर आते समय उनका सरकारी बस में अपने गांव के पड़ोसी और अमीन धर्मेंद्र कुमार शुक्ल से झगड़ा हो गया था। सुल्तानपुर जिला मुख्यालय पर बस से उतरते वक्त नगर कोतवाली के सामने मारपीट भी हुई थी। इसके बाद धर्मेंद्र कुमार शुक्ल ने धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ ही कार्रवाई की मांग की थी। अपनी शिकायत में उन्होंने धर्मेंद्र मिश्र व उनके साथियों पर मारपीट के साथ ही पैसे छीनने के आरोप भी लगाए थे।

बताया जाता है कि सुल्तानपुर के तत्कालीन एसपी अनुराग वत्स ने किसी तरह मामला रफा-दफा करवा दिया था। लेकिन पुलिस के रवैये से असंतुष्ट धर्मेंद्र कुमार शुक्ल लगातार उच्चाधिकारियों से मामले में कार्रवाई की फरियाद करते रहे। अब अनुराग वत्स का तबादला होने पर यहां एसपी के पद पर हिमांशु कुमार ने जॉइन किया है। इसके बाद पुलिस ने अब धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद धर्मेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाते हुए पुलिस पर कई आरोप लगाए हैं। अपने ट्वीट में धर्मेंद्र मिश्र का कहना है कि सुल्तानपुर एसपी ने सच्चाई की आवाज दबाने के लिए उनके ऊपर लूट का फर्जी मुकदमा दर्ज किया है। धर्मेंद्र मिश्र ने मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। बता दें कि हिमांशु के खिलाफ धर्मेंद्र मिश्र ने अपने अखबार व सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल रखा है।

धर्मेंद्र मिश्र के इन आरोपों के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 'इंडिया न्यूज' के सीनियर एडिटर/न्यूज एंकर यतेन्द्र शर्मा ने धर्मेंद्र मिश्र के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कई सवाल उठाए हैं। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है कि क्या ये बात हजम हो सकती है कि प्रतिष्ठित अखबार का ब्यूरो चीफ भी किसी से मात्र 1500 रुपए छीनकर भाग सकता है। क्या ऐसे रामराज आयेगा? उन्होंने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री कार्यालय, गृहमंत्री अमित शाह और डीजीपी को भी टैग किया है।

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वरिष्ठ टीवी पत्रकार रजत शर्मा के इस्तीफे को लेकर लोकपाल ने दिया ये आदेश

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के लोकपाल अवकाश प्राप्त न्यायाधीश बीडी अहमद ने निलंबित महासचिव विनोद तिहारा को बहाल किये जाने पर रोक लगा दी है

Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Rajat Sharrma

‘दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ’ (डीडीसीए) के लोकपाल अवकाश प्राप्त न्यायाधीश बीडी अहमद ने वरिष्ठ पत्रकार व ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा को डीडीसीए के अध्यक्ष पद पर बने रहने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने निलंबित महासचिव विनोद तिहारा को दोबारा पद पर बहाल किये जाने पर रोक लगा दी है।

अपने निर्देश में न्यायाधीश बीडी अहमद ने कहा है कि अध्यक्ष की शक्तियां वापस लेने के लिए पारित प्रस्ताव में प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने तिहारा के निलंबन के बारे में कहा है कि यह मामला लोकपाल के पास लंबित है, इसलिए निलंबन वापस नहीं हो सकता है।

गौरतलब है कि रजत शर्मा ने शनिवार को ‘डीडीसीए’ के प्रेजिडेंट पद से इस्तीफा दे दिया था। रजत शर्मा का कहना था, ‘ऐसा लगता है कि ईमानदारी और पारदर्शिता के मेरे उसूलों के साथ ‘डीडीसीए’ में आगे जाना संभव नहीं है। मैं अपने उसूलों के साथ समझौता करने को तैयार नहीं हूं।‘ रजत शर्मा ने सोशल मीडिया पर इस मामले को शेयर करते हुए ‘डीडीसीए’ के सदस्यों के नाम एक लेटर लिखकर सहयोग के लिए धन्यवाद भी अदा किया था।

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राजनैतिक दलों के अखबारों पर VP की बड़ी टिप्पणी

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया को लेकर रखे अपने विचार

Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Venkaiah Naidu

‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस’ (National Press Day) के मौके पर शनिवार को उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायूड ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया को लेकर अपने विचार रखे। उनका कहना था कि आज के दौर में सनसनीखेज खबरों को ज्यादा तवज्जो दी जाती है, लेकिन इन खबरों में संवेदनाएं नहीं होती हैं। उप राष्ट्रपति का यह भी कहना था कि आजकल कुछ बिजनेस समूहों, राजनीतिक दलों अथवा कुछ लोगों द्वारा अपने हितों के लिए चैनल व अखबार स्थापित किए जा रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिका के मूल मूल्य नष्ट हो रहे हैं।  

उपराष्ट्रपति के अनुसार, पहले के दौर में खबर का मतलब सिर्फ खबर होता था। इनमें किसी तरह की मिलावट अथवा गलत व्याख्या नहीं होती थी। अब न्यूज और व्यूज आपस में मिलाए जा रहे हैं, यह सबसे बड़ी समस्या हो गई है। उपराष्ट्रपति का यह भी कहना था, ‘यदि आप मुझसे पूछें कि क्या राजनैतिक दलों को अपना अखबार शुरू करने का अधिकार नहीं है, मेरा मानना है कि उन्हें बिल्कुल यह अधिकार है, लेकिन यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि इस अखबार को किस राजनैतिक दल द्वारा संचालित किया जा रहा है।’

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