गजल प्रेमियों ने दुष्यंत कुमार को कुछ यूं किया याद...

दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर का गुलमोहर ऑडिटोरियम बुधवार की शाम क़रीब ढाई घंटे...

Last Modified:
Thursday, 06 December, 2018
rajesh badal

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग,  रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही

हमने तमाम उम्र अकेले सफ़र किया, हम पर किसी ख़ुदा की इनायत नहीं रही

दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर का गुलमोहर ऑडिटोरियम बुधवार की शाम क़रीब ढाई घंटे एक ख़ास ख़ुशबू से महकता रहा। इस सुगंध का आनंद दिल्ली के अफ़सानानिगार, कवि, शायर, सांस्कृतिक सितारों और गंगा जमुनी तहज़ीब पसंद लोगों ने लिया।

दरअसल, भारतीय ज्ञानपीठ ने हिंदी ग़ज़ल के राजकुमार दुष्यंत कुमार को याद करने के लिए सभी ग़ज़ल प्रेमियों को दावत दी थी। ज्ञानपीठ के नए निदेशक और जाने माने पत्रकार-संपादक मधुसूदन आनंद के निमंत्रण पर पहुंचे तमाम शब्द शिल्पियों ने इस मौक़े पर दुष्यंत कुमार की पहली बॉयोपिक भी देखी। यह फ़िल्म वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने करीब पांच बरस पहले राज्य सभा टेलिविजन के साथ अपने कार्यकाल के दौरान बनाई थी। इस फ़िल्म में दुष्यंत कुमार की पत्नी राजेश्वरी त्यागी, बेटे आलोक, पुत्रवधू, दोस्त डॉ. धनंजय वर्मा, दुष्यंत के समग्र लेखन को चार ग्रंथों में समेटने वाले विजय बहादुर सिंह, भोपाल में दुष्यंत की याद को एक आंदोलन की शक़्ल देने वाले राजुरकर राज के दिलचस्प साक्षात्कारों को शामिल किया गया है।


कार्यक्रम में उर्दू के मशहूर शायर और विद्वान शमीम हनफ़ी ने ग़ज़ल के सफ़र और उससे दुष्यंत के रिश्ते को रेखांकित करने वाली तक़रीर पेश की। उन्होंने कहा कि दुष्यंत की ग़ज़ल आज के हिन्दुस्तान में अवाम का वास्तविक स्वर है। एक नमूना भी उन्होंने दिया-‘कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए, मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिन्दुस्तान है।‘ उनका मानना था कि मौजूदा समाज की तक़लीफें और पीड़ाएं अब कम नहीं होने वाली हैं। व्यवस्था के प्रति कड़वाहट भी कम नहीं होगी। इस कारण दुष्यंत और शिद्दत से याद आते हैं और हमेशा याद आते रहेंगे। इस दौरान उनकी गजल 'कैसे कैसे मंजर सामने आने लगे हैं, गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं/अब तो इस तालाब का पानी बदल दो, ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं/अब नई तहज़ीब के पेशे नज़र हम,आदमी को भूनकर खाने लगे हैं।' की भी चर्चा हुई।

इस शानदार शाम को और भी अविस्मरणीय ज्ञानपीठ के पूर्व निदेशक लीलाधर मंडलोई, दिल्ली के सांस्कृतिक राजदूत डॉ. हरीश भल्ला, पत्रकार-कवि और संपादक विष्णु नागर, समंदर पार हिन्दुस्तान की शान बने शिक्षाविद कैप्टन एलएस बहल, बीएसएफ के एडीजी रहे मनोहर बॉथम, ऑल इंडिया रेडियो के एडीजी राजीव शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री आलोक मेहता,एम्स के विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद खेतान, भारत की पहली सौर ऊर्जा से चलने वाली रेल की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ अधिकारी और सांस्कृतिक समन्वयक श्रीवास्तव दंपति समेत तमाम लोग दुष्यंत की यादों के साझीदार बने।


कार्यक्रम का समापन दुष्यंत की इस ग़ज़ल के साथ के साथ हुआ।

चल भई! गंगाराम भजन कर

सूखे ताल भरी दोपहरी/प्यासी मारी फिरे टिटहरी/गरमी गहरी से भी गहरी/सहनी है चुपचाप सहन कर/

घर के दरवाज़ों पर पहरा/जलसों पर नारों पर पहरा/सारे अखबारों पर पहरा/ख़बरें आती हैं छन छन कर/

अपनी कलम उठाकर रख दे/या फिर इसको इसका हक़ दे/तनिक सचाई की न झलक दे/सिर्फ़ उजालों का वर्णन कर/

पथ ऐसे सुनसान पड़े हैं/जैसे लोग यहां लंगड़े हैं/कुछ जो राहें रोक खड़े हैं/हाथ जोड़कर इन्हें नमन कर/

वे जो प्रतिभावान बड़े हैं/उनके साथ बड़े लफड़े हैं/ अंतिम निर्णय का अवसर है/इन प्रश्नों पर आज मनन कर/

हर भूखे को मिले निवाले/बीत गए वे दुर्दिन काले/इन अफवाहों को अपना ले/उन अफवाहों का खंडन कर/चल भई गंगाराम भजन कर।
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देश के चीफ जस्टिस बोले, ‘आप टीवी पर डिबेट शो में जाते ही क्यों हैं?

मर्यादाओं की तिलांजलि का ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा हुआ है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Debate

डिबेट शो आजकल न्यूज़ चैनलों पर आने वाले कार्यक्रमों में सबसे ख़ास माने जाते हैं। ख़ास इस लिहाज से की इनकी टीआरपी अन्य प्रोग्रामों के मुकाबले अच्छी रहती है। चैनल चाहे छोटा हो या बड़ा डिबेट शो उसका अभिन्न अंग है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह अंग सड़ा-गला नज़र आने लगा है। हालांकि, इसकी वजह न्यूज़ चैनल नहीं बल्कि शो में शिरकत करने वाले अधिकांश अतिथि हैं। पहले बहस में शाब्दिक गहमागहमी होती थी, लेकिन अब मर्यादाओं के सारे बंधन तोड़ दिए गए हैं। कभी कोई एंकर नेता पर हाथ उठा देता है, तो कभी नेता ही आपस में उलझ पड़ते हैं।

मर्यादाओं की तिलांजलि का ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा हुआ है। यह मामला करीब सात साल पुराना है और स्मृति ईरानी एवं कांग्रेस नेता संजय निरुपम से जुड़ा हुआ है। शीर्ष अदालत ने निरुपम की याचिका पर ईरानी को नोटिस भेजा है। स्मृति ईरानी द्वारा दर्ज कराये गए केस के आधार पर पटियाला हाउस कोर्ट ने संजय निरुपम को समन भेजा था, जिसे रद्द करवाने वो हाईकोर्ट पहुंचे लेकिन राहत न मिलने पर अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

पूरे मामले को लेकर सर्वोच्च अदालत का रुख क्या होगा, ये तो आने वाले वक़्त में ही पता चलेगा, लेकिन चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने इसे लेकर जो टिप्पणी की है, उस पर वाकई नेताओं को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा है ‘आप टीवी डिबेट में जाते ही क्यों हैं, जब लड़ाई के बाद कोर्ट जाना पड़ता है’।

‘न्यूज़24’ के विशेष संवाददाता प्रभाकर मिश्रा ने अपने ट्वीट में चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की टिप्पणी का उल्लेख किया है। मिश्रा ने अपने ट्वीट में बताया कि ‘स्मृति ईरानी ने निरुपम के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है जिसपर कोर्ट ने सम्मन जारी किया है। HC ने सम्मन रद्द करने से मना कर दिया था उसके बाद निरूपम ने SC का दरवाजा खटखटाया है। #CJI की टिप्पणी - आप टीवी डिबेट में जाते ही क्यों हैं, जब लड़ाई के बाद कोर्ट जाना पड़ता है’।


आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राहत देते हुए संजय निरुपम द्वारा उन पर दर्ज कराए गए मानहानि के केस को खत्म कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि निरुपम ने लाइव टीवी डिबेट के दौरान जिस तरह से स्मृति ईरानी पर व्यक्तिगत हमले करते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया उससे उनके ऊपर मानहानि का केस बनता है। अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी जिस पर हाईकोर्ट ने फैसला स्मृति ईरानी के पक्ष में सुनाया। इससे पहले हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को समझौता करने का मौका दिया था लेकिन इसके लिए ना तो स्मृति ईरानी तैयार थीं और ना ही संजय निरुपम। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

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पत्रकारों के ट्वीट के बाद ‘एयर विस्तारा’ ने उठाया ये कदम, हो रही खूब आलोचना

‘सर्फ एक्सेल’ के खिलाफ चले अभियान के बाद अब सोशल मीडिया पर ‘एयर विस्तारा’ के बहिष्कार को लेकर अभियान छिड़ा हुआ है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Vistara

‘सर्फ एक्सेल’ के खिलाफ चले अभियान के बाद अब सोशल मीडिया पर ‘एयर विस्तारा’ के बहिष्कार को लेकर अभियान छिड़ा हुआ है। हालांकि, इस बार सोशल मीडिया के अधिकांश यूजर के गुस्से को पूरी तरह से गलत करार नहीं दिया जा सकता। दरअसल, इस बहिष्कार की वजह खुद एयरलाइन्स द्वारा उत्पन्न की गई है। विमानन कंपनी एयर विस्तारा ने रविवार को टि्वटर पर एक फोटो पोस्ट की जिसमें मेजर जनरल (रिटा.) जीडी बख्शी के साथ कंपनी के क्रू मेंबर खड़े थे। इसके साथ ही कंपनी ने मेजर जनरल बख्शी की तारीफ में लिखा, ‘कारगिल युद्ध के हीरो जीडी बख्शी को अपने साथ पाकर हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं।’ इस पोस्ट के सामने आते ही कुछ लोगों ने एयर विस्तारा को ट्रोल करना शुरू कर दिया और इसमें पत्रकारों की संख्या भी कम नहीं थी।

वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी, रोहिणी सिंह और रिफत जावेद आदि ने मेजर जनरल (रिटा.) जीडी बख्शी की तारीफ के लिए विस्तारा की निंदा की। इसके अलावा अन्य कई लोगों ने भी कंपनी के पोस्ट पर सवाल खड़े किये। इस अचानक हुए हमले से घबराई ‘विस्तारा’ ने तुरंत अपना ट्वीट डिलीट कर दिया और यहीं से उसकी मुश्किलें और बढ़ गईं। जीडी बख्शी समर्थकों ने एयरलाइन्स ने इस कदम के लिए उसकी कड़ी भत्सर्ना की। जिसके बाद कंपनी को बयान जारी करना पड़ा। हालांकि, इसका कोई असर होता नज़र नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया पर ‘विस्तारा’ के बहिष्कार का अभियान चलाया जा रहा है। कंपनी ने अपनी सफाई में कहा कि ‘यह पोस्ट हटाया जा रहा है क्योंकि उनका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म न तो किसी का अनादर करना चाहता है और न ही किसी को नुकसान पहुंचाना चाहता है।’

इसके बाद भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट किया, 'एंटी आर्मी गैंग के दबाव में एयर विस्तारा ने आदरणीय मेजर जनरल जीडी बख्शी की तस्वीर हटाई। अब मैं एयर विस्तारा में तब तक सफर नहीं करूंगा, जब तक कंपनी दोबारा उनकी फोटो नहीं लगाती और इस कृत्य के लिए माफी नहीं मांगती।’ भाजपा नेता तरुण विजय ने भी इस प्रकरण पर रोष जताया और लिखा 'जीडी बख्शी हमारे हीरो हैं न कि एयर विस्तारा। कंपनी का विरोध करना काफी हल्का संकेत है। हम जीडी बख्शी और अपनी सेना के साथ खड़े हैं न कि किसी कायर एयरलाइन्स के साथ।' इसी तरह मशहूर लोक कलाकार मालिनी अवस्थी ने भी ट्वीट किया, 'सबसे बड़ा ढकोसला यही है कि ये तथाकथित ‘लिबरल’ ही सबसे बड़े असहिष्णु हैं!! इन्हें हर उस बात से आपत्ति है जो भारतीयता से जुड़ी है,फौजी के सम्मान पर किसी को कैसी आपत्ति हो सकती है। यह दुःखद है कि विस्तारा पर दबाव बनाने का सामूहिक षडयंत्र हुआ और वो दबाव में आ गई।’


इससे पहले जीडी बख्शी की तारीफ का विरोध करने वाले पत्रकारों में शामिल स्वाति चतुर्वेदी ने एयर विस्तारा को लिखा, ‘तुम्हें वास्तव में लगता है कि तुम अपने ब्रैंड की मदद कर रहे हो। अधिकांश समझदार लोग अब इंडिगो से यात्रा करेंगे’। ऐसे ही रोहिणी सिंह ने ट्वीट किया ‘प्रिय विस्तारा चेतावनी के लिए धन्यवाद। मैं अब आपके बजाय इंडिगो से यात्रा करना पसंद करुँगी।’ वहीं रिफत जावेद ने लिखा ‘मुझे विस्तारा से यात्रा करना पसंद है, लेकिन एक कट्टर व्यक्ति के प्रति कंपनी के प्रेम को देखते हुए ऐसा लगता है कि या तो कंपनी बख्शी के मुस्लिम विरोधी रवैये से अनजान है या फिर इसकी अनदेखी कर रही है। क्या वो अब साध्वी प्रज्ञा का सम्मान करेगी? विस्तारा से अब और यात्रा नहीं।’

 

 

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अजीत अंजुम के सवालों की तपिश नहीं झेल पा रहे नेता

अंजुम शाम सात बजे प्रसारित होने वाले शो ‘राष्ट्रीय बहस’ होस्ट करते हैं। इस शो में वो अतिथियों से तीखे सवाल पूछते हैं

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Ajit Anjum

टीवी चैनलों पर होने वाली बहस में शरीक होने के लिए नेता सहर्ष तैयार हो जाते हैं। क्योंकि इसके दो फायदे हैं, एक तो उन्हें अपने विचारों से लोगों को रूबरू कराने का मौका मिल जाता है और दूसरा पार्टी को भी यह संदेश पहुँच जाता है कि मीडिया में उनकी पूछपरख कायम है। लेकिन जब हॉट सीट पर बैठकर उनका सामना सुलगते सवालों से होता है, तो कुछ मर्यादाओं को तार-तार कर बैठते हैं और कुछ बीच में ही उठकर चले जाते हैं। ऐसा ही कुछ भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के साथ भी हुआ। प्रज्ञा से ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने ऐसे सवाल पूछे कि उन्हें बहस अधूरी छोड़कर जाने के अलावा कुछ नहीं सूझा। हाल ही में लॉन्च हुए टीवी9 समूह के हिंदी न्यूज़ चैनल ‘भारतवर्ष’ ने अच्छी शुरुआत की है। चैनल ने बीते दिनों अपने एक स्टिंग ऑपरेशन से भी सबको हिला दिया था और अब उसके संपादक अजीत अंजुम अपने सवालों से राजनेताओं को हिलाने में लगे हैं।

अंजुम शाम सात बजे प्रसारित होने वाले शो ‘राष्ट्रीय बहस’ होस्ट करते हैं। इस शो में वो अतिथियों से तीखे सवाल पूछते हैं, कई बखूबी उनका जवाब दे जाते हैं, जबकि कई बीच में जाना ही बेहतर समझते हैं। प्रज्ञा ठाकुर ने मुंबई हमले के दौरान शहीद हुए मुंबई एटीएस चीफ हेमंत करकरे पर आपत्तिजनक बयान दिया था। जिसके बाद से उनकी आलोचना हो रही है। जब प्रज्ञा ‘राष्ट्रीय बहस’ का हिस्सा बनीं, तो अजीत अंजुम ने इसी विषय पर उनसे प्रश्न किए। प्रश्न के साथ ही साध्वी के हावभाव बदलना शुरू हो गए थे और एक मोड़ पर आकर उन्होंने माइक निकालकर किनारे रखा और शो बीच में छोड़कर चली गईं। दरअसल, अजीत अंजुम ने प्रज्ञा ठाकुर ने तीन सवाल किये। पहले दो सवाल का तो जवाब प्रज्ञा ने दिया लेकिन तीसरे सवाल पर वो वहां से चली गईं। पहला सवाल था “हेमंत करकरे को पूरा देश शहीद के तौर पर जानता है। उन्हें अशोक चक्र मिला, उन हेमंत करकरे के लिए आपने जिस तरह के शब्द का इस्तेमाल किया, ये सब एक शहीद के लिए कहना लगता नहीं कि शर्मिंदगी वाला बयान है?” इस पर साध्वी ने कहा, “ऐसा है कि किसी को भी द्विपक्षीय बातें नहीं करनी चाहिए। मैं एक ही बात कहूंगी कि जिस व्यक्ति को मैंने प्रत्यक्ष झेला है, उसके बारे यदि मैंने कहा है, तो उसकी सत्यता पता करनी चाहिए. दूसरी बात मेरा ये कहना है कि जो भी देशभक्ति का दमन करेगा, आतंकवाद से मरेगा।”

दूसरा सवाल था  “वो देशभक्त थे। उन्होंने देश के लिए गोलियां खायीं। जिस शख्स को देश ने एक जांबाज के तौर पर देखा, उसे आप देशद्रोही कहती हैं, उन्हें हिंदू विरोधी कहती हैं और साथ में खुद को देशभक्त कहती हैं। आपने ऐसा क्या किया कि आप देशभक्त हो गईं और जो देश के लिए शहीद हुआ, वो हिंदू विरोधी हो गया? देशद्रोही हो गया और उसका सर्वनाश हो गया?” जिस पर भाजपा उम्मीदवार ने कहा “आप मुझसे ये प्रश्न न करें। मैंने जो कहा है, वह मैंने झेला है। जो व्यक्ति झेलता है, उससे अच्छा कोई नहीं जानता है। कानून के अंतर्गत गैरकानूनी काम करने वाला वो था, ये मैंने स्वंय झेला है। इससे ज्यादा मैं और क्या कहूं। इतनी गंदी गालियां देता था वो मुझे, मैं कैमरे के सामने नहीं बोल सकती। क्या कहोगे आप इसको? ये क्या कानून था कि मुझे 13 दिनों तक गैरकानूनी तरीके से रखा गया। ये कानून का रक्षक है क्या? किस प्रकार की बात करते हैं? हमारी संवेदना, संवेदना नहीं होती? कौन सी संवेदना, संवेदना होती है? ऑम्ले जब शहीद हुआ तो क्यों उसे पुरस्कार नहीं दिया गया? अगर ऑम्ले नहीं नहीं होता तो कसाब पकड़ा नहीं गया होता और दिग्विजय सिंह जैसे लोग हमें आतंकी सिद्ध कर देते। इसलिए प्रश्न समाज से करिए। प्रश्न कांग्रेसियों से करिए। ये समाज, ये देश उनको उत्तर देगा।”

इसके बाद अंजुम ने तीसरा सवाल दागा, उन्होंने पूछा ‘यदि आपके साथ टार्चर हुआ तो आपको अदालत में जाना चाहिए था। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र सरकार आपकी शुभचिंतक है, आप इन तमाम दरवाज़ों को खटखटातीं, लेकिन आज चुनाव के वक़्त यदि आप ऐसी कहानियां सुना रही हैं और करकरे को देशद्रोही कह रहीं हैं। आपको यदि कांग्रेस से शिकायत थी तो आप कहिये, आपको हक़ है। लेकिन इसके आधार पर आप यदि हेमंत करकरे के लिए कुछ कह रहीं हैं तो आपको सोचना चाहिए। आप अपने चुनावी फायदे के लिए देश की जनता की भावनाओं का भी इस्तेमाल कर रही हैं।’ इतना सुनते ही प्रज्ञा ठाकुर ने अपना माइक निकाला और उठकर वहां से चली गईं।


वैसे ये कोई पहला मौका नहीं है जब अजित अंजुम के तीखे सवालों ने किसी नेता को विचलित किया है, कुछ वक़्त पहले केन्द्रीय मंत्री रविशंकर भी ऐसे ही बीच में उठकर चले गए थे। दरअसल, भाजपा के घोषणापत्र को लेकर अजीत अंजुम ने रविशंकर प्रसाद से एक सवाल पूछा था, जिससे वो इतने नाराज़ हुए कि उठकर चले गए। जाने से पहले उन्होंने कहा था ‘हमारे इतने बड़े घोषणापत्र से अब तक आपने भारत की बुनियाद का एक सवाल भी नहीं पूछा। मैं आपके कार्यक्रम में आया हूँ और खाली आप एक बात पर ही अड़े हुए हैं। मैं क्यों रहूँ आपके कार्यक्रम में, नहीं रहूँगा।’ केन्द्रीय मंत्री इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा ‘यदि आप मुझसे तरीके से सवाल करेंगे, तो मैं सभी का जवाब दूंगा। आप सीनियर संपादक हैं तो मैं भी देश का सीनियर नेता हूँ। आप हल्की बात करेंगे तो मुझे आपसे नमस्ते करना पड़ेगा। धन्यवाद’। इतना कहते ही रविशंकर प्रसाद कुर्सी से उठे और शो बीच में छोड़कर चले गए। अजीत अंजुम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने उसे अनदेखा कर दिया।

आप ये शो नीचे विडियो पर क्लिक कर भी देख सकते हैं...

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टीवी शो के कॉमेडियन को मिली देश की कमान, चुने गए राष्ट्रपति

टीवी शो में बड़ा किरदार निभाने वाले कॉमेडियन की अब उसी पद पर ताजपोशी हो सकती है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
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कॉमेडियन का किरदार निभाते-निभाते एक टीवी शो में गलती से राष्ट्रपति बन जाने वाले एक्टर ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वे सचमुच में राष्ट्रपति चुने जा सकते हैं। हालांकि, शो का किरदार तो गलती से राष्ट्रपति चुना जाता है, लेकिन कॉमेडियन ने बाकायदा इसके लिए चुनाव लड़ा है और एग्जिट पोल के नतीजों में उन्हें जीत मिलती दिखाई दे रही है।

दरअसल, यूक्रेन में राष्ट्रपति पद के लिए 31 मार्च और 21 अप्रैल को हुए चुनाव में कॉमेडियन वोलोदीमीर ज़ेलिंस्की को भारी जीत मिलती दिख रही है। इन एक्जिट पोल के अनुसार नए-नए राजनीति में उतरे ज़ेलिंस्की को देश के 70 प्रतिशत से ज्यादा लोगों का समर्थन मिला है। ज़ेलिंस्की के सामने चुनौती के तौर पर निवर्तमान राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेंको थे, जिन्होंने अपनी हार मान ली है। हालांकि आधिकारिक तौर पर ज़ेलिंस्की अभी राष्ट्रपति नहीं बने हैं, लेकिन इस बात की बहुत ज्यादा संभावना दिखाई दे रही है।

वोलोदीमीर यूक्रेन में लंबे वक्त तक चली एक व्यंग्यात्मक टीवी सीरीज 'सर्वेंट ऑफ द पीपल' में प्रमुख किरदार निभाने वाले एक्टर थे। इस टीवी सीरीज में उनका किरदार गलती से राष्ट्रपति बन जाता है। गलती से राष्ट्रपति बनने से पहले ज़ेलिंस्की का किरदार एक टीचर होता है और उसे राष्ट्रपति इसलिए चुन लिया जाता है, क्योंकि भ्रष्टाचार पर बनाया गया उसका एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है। बाद में ज़ेलिंस्की ने यूक्रेन की एक राजनीतिक पार्टी जॉइन कर ली थी। हालांकि ज़ेलिंस्की के पास पहले से कोई राजनीतिक अनुभव नहीं था। इसके बावजूद पहले दौर के चुनाव में उन्हें 30 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थे, जो उनके प्रतिद्वंद्वी पोरोशेंको को मिले 15.9 प्रतिशत वोटों के मुकाबले बिल्कुल दोगुने थे।

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नेटवर्क18 को बाय बोलने के बाद मनीष माहेश्व‍री ने यहां से शुरू की नई पारी

'नेटवर्क18 डिजिटल' (Network18 Digital) के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर मनीष माहेश्व‍री ने अब नई शुरुआत की है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Manish

'नेटवर्क18 डिजिटल' (Network18 Digital) के पूर्व चीफ एग्जिक्‍यूटिव ऑफिसर मनीष माहेश्‍वरी ने अब नई शुरुआत की है। उन्हें अब ‘ट्विटर इंडिया’ (Twitter India) में मैनेजिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ‘ट्विटर’ की वाइस प्रेजिडेंट (एशिया पैसिफिक) माया हरि ने यह घोषणा की है। अपनी नई भूमिका में मनीष माहेश्वरी (स्ट्रैटेजी और एग्जिक्यूशन) का काम संभालेंगे और देश में यूजर बेस व रेवेन्यू बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।  

मनीष माहेश्‍वरी अपना कामकाज 29 अप्रैल से संभालेंगे और माया हरि को रिपोर्ट करेंगे। बताया जाता है कि माहेश्वरी अपना कामकाज दिल्ली से देखेंगे और यहीं से ‘ट्विटर इंडिया’ की दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की टीम का नेतृत्व करेंगे। वह बालाजी कृष से यह भूमिका लेंगे, जो कुछ महीने से अंतरिम तौर पर यह दायित्व संभाल रहे थे। बालाजी कृष ट्विटर हेडक्वार्टर में ग्लोबल हेड (रेवेन्यू स्ट्रैटेजी और ऑपरेशंस) के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।

बता दें कि मनीष माहेश्वरी ने अप्रैल 2016 में ‘नेटवर्क18’ ग्रुप को जॉइन किया था। उन्होंने इस साल की शुरुआत में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। ‘नेटवर्क18’ में अपनी करीब ढाई साल की पारी के दौरान वह ग्रुप की डिजिटल प्रॉपर्टी जैसे- मनीकंट्रोल, फर्स्टपोस्ट, न्यूज18, सीएनबीसी-टीवी18, क्रिकेटनेक्स्ट और In.com की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ‘नेटवर्क18’ को जॉइन करने से पूर्व मनीष ‘फ्लिपकार्ट’ के साथ काम करते थे। ‘Intuit’ में जनरल मैनेजर और मैनेजिंग डायरेक्टर रहने के साथ-साथ मनीष ‘McKinsey & Company’ और ‘Procter & Gamble’  के साथ भी काम कर चुके हैं। दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक मनीष ने पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के ‘Wharton Business School’ से एमबीए की पढ़ाई की है।

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वरिष्ठ पत्रकार अमर आनंद ने शुरू किया नया सफर, खास अंदाज में लाए ये शो

वरिष्ठ टीवी पत्रकार अमर आनंद ने अपनी नई पारी की शुरुआत की है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
AMAR

वरिष्ठ टीवी पत्रकार अमर आनंद ने अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्होंने यह शुरुआत ‘LIVE 24’ चैनल पर एग्जिक्यूटिव एडिटर (इवेंट्स और प्लानिंग) के रूप में की है। अमर आनंद चैनल पर ‘बड़े भइया, छोटे भइया’ के नाम से एक शो लेकर आए हैं। इस शो में हास्य-व्यंग्य के जरिये सियासी खबरों को दिलचस्प अंदाज में पेश किया जाता है।

अमर आनंद न सिर्फ इस शो को होस्ट करते हैं, बल्कि उसका कंटेंट भी वह खुद तैयार करते हैं। हर शनिवार नौ बजे रात को दिखाए जाने वाले इस शो में अमर आनंद छोटे भइया के रूप में और उनके साथ फिल्म डायरेक्टर और टीवी पत्रकार राजेश्वर चौहान बड़े भइया के रूप में नजर आते हैं। इनमें बड़े भइया यूपी स्टाइल में एंकरिंग करते नज़र आते हैं, जबकि छोटे भइया बिहार स्टाइल में।

हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर और अमर उजाला जैसे अखबारों के बाद इंडिया टीवी, लाइव इंडिया और समाचार प्लस जैसे चैनलों में पत्रकारिता की लंबी पारी खेल चुके अमर आनंद ने समाचार प्लस के बाद देशभक्ति और सामाजिक मुद्दों पर ईवेंट करना शुरू किया था, जिसे वो टीवी शो की शक्ल में अलग-अलग चैनलों के लिए तैयार करते थे। LIVE 24 में जॉइन करने के बाद अमर आनंद अपने नए शो बड़े भइया, छोटे भइया के साथ-साथ दिल्ली और विभिन्न राज्यों की राजधानियों में इवेंट पर आधारित टीवी शो की भी प्लानिंग कर रहे हैं।

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यौन शोषण के आरोपी पत्रकार के खिलाफ कोर्ट ने अपनाया ये रुख

बहुत ही गंभीर आरोपों में घिरे पत्रकार के खिलाफ अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Journalist

बहुत ही गंभीर आरोपों में घिरे पत्रकार के खिलाफ अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। दरअसल, कर्नाटक के इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने पत्रकार चंद्र के हेम्‍मदी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उडुपी जिले में स्ट्रिंगर के रूप में काम करने वाले हेम्‍मदी के खिलाफ 21 नाबालिग बच्‍चों के यौन शोषण का आरोप है। हेम्‍मदी पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला चल रहा है।

आरोप है कि हेम्‍मदी स्‍कूलों की समस्‍याओं के बारे में लिखने के लिए गांवों में जाते थे। वे बच्‍चों के माता-पिता और अध्‍यापकों का विश्‍वास हासिल करते और बच्‍चों के पते ले लेते थे। इसके बाद रास्‍तों की मदद लेने और खबरों के लिए फोटो लेने के बहाने बच्‍चों को अपने साथ ले जाते और उनका यौन शोषण करते थे। पिछले साल दिसंबर में यह मामला सामने आने के बाद बायनदूर थाने में 16, गंगोल्‍ली में तीन और कोल्‍लुरु व कुंडापुरा में एक-एक मामला दर्ज किया गया था। मामला सामने आने के बाद हेम्‍मदी को अखबार से भी हटा दिया गया था। इस मामले में हेम्मदी ने अपने वकील के माध्यम से अदालत के समक्ष जमानत की अर्जी खारिज की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

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नेटवर्क18 लेकर आया नया शो The Firstpost Show, ये होगी खासियत

देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह में शामिल ‘नेटवर्क18’ (Network18) ने एक नया शो शुरू किया है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Network18

देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह में शामिल ‘नेटवर्क18’ (Network18) ने एक नया शो शुरू किया है। ‘द फर्स्टपोस्ट शो’ (The Firstpost Show) के नाम से शुरू इस शो की खासियत यह है कि इसमें टॉप एडिटर्स, एंकर्स और रिपोर्टर्स की टीम एक ही प्लेटफॉर्म पर दिखाई देगी और राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक मुद्दों का विभिन्न दृष्टिकोण से आकलन करेगी। दरअसल, इस शो में ‘नेटवर्क18’ के प्रमुख एंकर्स को एक नए रूप में दिखाया जाएगा, जिसमें वे अपने वर्षों के अनुभव और मुद्दों पर अपनी समझ के साथ व्यापक विश्लेषण करेंगे।

इस शो को ‘सीएनएन न्यूज18’ (CNN-News18) पर प्रत्येक शनिवार और रविवार को शाम छह बजे प्रसारित किया जाएगा, वहीं ‘सीएनबीसी-टीवी18’ (CNBC-TV18) पर यह शो प्रत्येक शनिवार को शाम सात बजे और रविवार को रात साढ़े दस बजे प्रसारित किया जाएगा।

इस शो में सप्ताह की बड़ी स्टोरी पर फोकस किया जाएगा। शोरशराबे की डिबेट से दूर इस शो को ‘सीएनएन न्यूज18’ के डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर आनंद नरसिम्हन होस्ट करेंगे। इस शो में भूपेंद्र चौबे, शीरीन भान, किशोर अजवाणी, प्रवीण स्वामी, लता वेंकटेश और अमिश देवगन जैसे वरिष्ठ पत्रकार शामिल होंगे।

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सूचना-प्रसारण मंत्रालय की इस मीटिंग में उठाए जा सकते हैं टीवी चैनलों से जुड़े ये मुद्दे

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) सभी ब्रॉडक्स्ट कंपनियों के साथ एक मीटिंग करने जा रहा है

Last Modified:
Saturday, 20 April, 2019
MIB

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) सभी ब्रॉडक्स्ट कंपनियों के साथ एक मीटिंग करने जा रहा है। इस मीटिंग में देशभर में सैटेलाइट टीवी चैनलों के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। यह बैठक 30 अप्रैल को दिल्ली स्थित शास्त्रीभवन में पांचवे फ्लोर पर कमरा नंबर 552 में सुबह 11 बजे रखी गई है। इस बारे में सभी ब्रॉडकास्ट कंपनियों को एमआईबी की ओर से एक नोटिस भी जारी किया गया है।

मंत्रालय की ओर से जारी नोटिस में यह भी कहा गया है कि जिन कंपनियों के प्रस्ताव मंत्रालय में लंबित पड़े हैं, उन कंपनियों के अधिकृत प्रतिनिधि इस मीटिंग में शामिल हो सकते हैं। ऐसे अधिकृत प्रतिनिधियों के पास कंपनी की ओर से जारी लेटर होना चाहिए। मीटिंग के दौरान कंपनियों द्वारा उठाए जाने वाले प्रस्ताव 24 अप्रैल तक मंत्रालय को amit.katoch@nic.in, usi.inb@nic.in पर ईमेल किए जा सकते हैं।   

सूचना-प्रसारण मंत्रालय की ओर से इस बारे में जारी नोटिस को आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं-
https://mib.gov.in/sites/default/files/Meeting%20on%20pending%20ul%20dl%20issues%20of%20Sattelite%20TV%20Channels%2030.04.2019.pdf

 

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रेडियो वन इंडिया में विनीत सिंह हुक्मानी के बारे में आई बड़ी खबर

'94.3 रेडियो वन इंडिया' के एमडी और सीईओ विनीत सिंह हुक्मानी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है

Last Modified:
Saturday, 20 April, 2019
VINEET

'94.3 रेडियो वन इंडिया' के एमडी और सीईओ विनीत सिंह हुक्मानी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘जैसा कि मीडिया में पहले बताया गया था कि एचटी मीडिया और नेक्स्ट मीडियावर्क्स लिमिटेड (Next Radio Ltd की मूल कंपनी) के बीच एक स्कीम के तहत कवायद चल रही थी और सूचना-प्रसारण व मंत्रालय और सेबी से इसे अप्रूवल मिलनी थी। अप्रूवल मिलने के बाद एचटी मीडिया ने इन इकाइयों में ज्यादा हिस्सेदारी हासिल कर ली है। इसके बाद हुक्मानी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

नेक्स्ट मीडियावर्क्स लिमिटेड के चेयरमैन तारिक अंसारी ने कहा, ‘कंपनी के साथ हुक्मानी के 12 साल के कार्यकाल और एफएम रेडियो बिजनेस में उनके शानदार योगदान की कंपनी सराहना करती है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है।’ वहीं, ‘अपने इस्तीफे के बाद हुक्मानी ने कंपनी के साथियों को अलविदा कहते हुए इसके और आगे बढ़ने की उम्मीद जताई। हालांकि, अपने अगले कदम के बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया और कहा कि उचित समय आने पर वह इस बारे में खुलासा करेंगे।’

बताया जाता है कि हुक्मानी ने सितंबर 2007 में रेडियो वन को जॉइन किया था। रेडियो वन में शामिल होने से पहले उन्होंने करीब 11 साल विभिन्न विज्ञापन एजेंसियों में बिताए और ब्रैंड्स को तैयार करने में अपनी अहम भूमिका निभाई। वह पूर्व में ‘Cheil Communications’, ‘Grey Advertising’, ‘Saatchi & Saatchi’ और ‘Mudra’ के साथ जुड़े रहे हैं। हुक्मानी ने अपने करियर की शुरुआत 1989 में ‘C-Dot’ में बतौर ट्रेनी की थी। उन्होंने इंजीनियरिंग में स्नातक के साथ एमबीए भी किया है।

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