रजत शर्मा की इस टीम से तीन लोगों ने दिया इस्तीफा...

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष रजत शर्मा द्वारा नियुक्त की गई...

Last Modified:
Tuesday, 18 September, 2018
rajat sharma

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष रजत शर्मा द्वारा नियुक्त की गई क्रिकेट कमेटी से तीन लोगों ने अपना इस्तीफा दे दिया है, जिसमें टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के साथ-साथ पूर्व भारतीय खिलाड़ी आकाश चोपड़ा और राहुल सांघवी का नाम शामिल है। सहवाग क्रिकेट कमेटी में एडवाइजर के तौर पर शामिल थे, जबकि अन्य दो इसके सदस्य के तौर पर कार्यरत थे।

वीरेंद्र सहवाग ने सोमवार को कहा कि उन्होंने डीडीसीए के सर्वश्रेष्ठ हितों को ध्यान में रखते हुए संस्था की क्रिकेट समिति से इस्तीफा दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है क्योंकि राज्य संस्था को अगले दो दिन में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नया संविधान सौंपना है जिसके बाद नई समितियों के गठन की जरूरत होगी।

रिपोर्ट की मानें तो, सहवाग, चोपड़ा और सांघवी के लिए पहला काम विभिन्न चयन समितियों और कोचों का सेलेक्शन करना था। इसी काम को करते हुए सहवाग ने समिति के अन्य सदस्यों आकाश चोपड़ा और राहुल सांघवी के साथ मिलकर मनोज प्रभाकर को बतौर गेंदबाजी कोच दिल्ली की टीम के साथ बनाए रखने की सिफारिश की थी, लेकिन इसे स्वीकृति नहीं मिली। इसके बाद इन तीनों ही पूर्व खिलाड़ियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि क्या यही सहवाग के इस्तीफा देने का कारण था।   

हालांकि, जब सहवाग से यह पूछा गया कि क्या प्रभाकर की नियुक्त नहीं होने के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया तो इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कहा, ‘हम सब एक साथ आए और अपना समय और प्रयास दिया जिससे कि क्रिकेट समिति के रूप में अपनी भूमिका के दायरे में दिल्ली क्रिकेट के सुधार में मदद और योगदान दे सकें। हालांकि दिल्ली क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ हित में हम आपको बताना चाहते हैं कि हम तीनों अपने दैनिक जीवन के व्यस्त कार्यक्रम के कारण डीडीसीए की क्रिकेट समिति के काम को आगे जारी नहीं रख पाएंगे।’

जब वीरेंद्र सहवाग से पूछा गया कि क्या उन्होंने मनोज प्रभाकर को कोच न चुने की वजह से इस्तीफा दिया है? इस पर वीरू ने कहा कि हमने एक साथ मिलकर डीडीसीए में क्रिकेट के सुधार के लिए अपना समय और योगदान देते हुए प्रयास किए। दिल्ली क्रिकेट के सर्वोत्तम हित को देखते हुए, हम तीनों हमारे व्यस्त कार्यक्रम के कारण डीडीसीए की क्रिकेट कमेटी के कार्य को जारी रखने में सक्षम नहीं होंगे।

वहीं चर्चाएं ये भी हैं कि कप्तान गौतम गंभीर प्रभाकर की नियुक्ति के खिलाफ थे क्योंकि उनका नाम साल 2000 के मैच फिक्सिंग मामले में आया था। मीडिया  रिपोर्ट के  मुताबिक, डीडीसीए के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया, ‘गौतम ने हमेशा ही नियमों का पालन किया है और वह नहीं चाहते कि ऐसा कोई भी व्यक्ति दिल्ली के ड्रेसिंग रूम का हिस्सा बनें, जो मैच फिक्सिंग या किसी अन्य तरह से गलत काम से जुड़ा रहा हो।’अधिकारी ने यह भी कहा, ‘यह कहना गलत होगा कि सहवाग और गंभीर के बीच इस मुद्दे को लेकर मतभेद थे क्योंकि कप्तान पैनल के विशेष आमंत्रित सदस्य थे।’ अधिकारी ने कहा, ‘नए संविधान को स्वीकार किए जाने के बाद सहवाग हितों के टकराव नियम के दायरे में आ जाते क्योंकि वह डीडीसीए अध्यक्ष के चैनल में विशेषज्ञ हैं। इसी तरह सिंघवी मुंबई इंडियंस से जुड़े हैं। इसलिए उन्हें पता था कि उन्हें जाना पड़ेगा।’

जब यह पूछा गया कि 2007-08 सत्र में जब प्रभाकर गेंदबाजी कोच थे और दिल्ली ने रणजी ट्रॉफी जीती और फिर पिछले साल उन्होंने विरोध क्यों नहीं किया तो गंभीर के करीबी माने जाने वाले इस अधिकारी ने कहा, ‘दोनों ही मामलों में किसी ने गंभीर की नहीं सुनी। अगर आप 2016 सत्र को देखें तो अजय जडेजा को कोच नियुक्त किया गया और कप्तान के रूप में उसे पीछे हटना पड़ा। वह किसी ऐसे ड्रेसिंग रूम का हिस्सा नहीं रहे जिसमें कथित मैच फिक्सर शामिल रहा हो।’

 

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