मीडिया एजुकेशन पर केजी सुरेश ने HRD मिनिस्टर को लिखा लेटर, सुझाए ये 12 पॉइंट्स

इन सुझावों को कई पत्रकारों और शिक्षाविदों से सलाह के बाद तैयार किया गया है। इनमें से अधिकांश सुझाव नोएडा के प्रेरणा संस्थान में 28 जुलाई को हुए राउंड टेबल डिस्कशन में सामने आए हैं

पंकज शर्मा by
Published - Wednesday, 31 July, 2019
Last Modified:
Wednesday, 31 July, 2019
KG Suresh

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश ने मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने प्रस्तावित नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन एजुकेशन को लेकर 12 पॉइंट्स सुझाए हैं।

वर्तमान में दिल्ली के एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन और मध्य प्रदेश की जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी स्थित जागरण स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की फैकल्टी में बतौर एमरेटस प्रोफेसर (Emeritus Professor) कार्यरत केजी सुरेश ने नई एजुकेशन पॉलिसी को लेकर राष्ट्रव्यापी डिबेट कराए जाने को लेकर भी पोखरियाल को बधाई दी है।

डॉ. पोखरियाल को लिखे अपने पत्र में केजी सुरेश ने कहा है, ‘पिछले तीन दशक से मीडिया एजुकेटर और पत्रकार के रूप में मैं आपके समक्ष नई एजुकेशन पॉलिसी, खासकर जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन एजुकेशन को लेकर कुछ सुझाव रखना चाहता हूं। इन सुझावों को कई पत्रकारों और शिक्षाविदों से सलाह के बाद तैयार किया गया है। इनमें से अधिकांश सुझाव नोएडा के प्रेरणा संस्थान में 28 जुलाई को हुए राउंड टेबल डिस्कशन में सामने निकलकर आए हैं।’

इस पत्र में केजी सुरेश ने कहा है कि इन सुझावों को प्रस्तावित नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) में शामिल किया जा सकता है। इस पत्र में यह भी कहा गया है, ‘ इनमें से कुछ पॉइंट्स सीधे प्रस्तावित नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के दायरे में नहीं आ सकते हैं, लेकिन फिर भी बड़े पैमाने पर शिक्षा से संबंधित हैं। मुझे विश्वास है कि नई पॉलिसी को अंतिम रूप देते समय आप निश्चित रूप से उपरोक्त 12 पॉइंट्स पर विचार करेंगे। यह न केवल मीडिया और मीडिया एजुकेशन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि शासन और समाज के लिए भी इनका अलग महत्व है।’

केजी सुरेश द्वारा सुझाए गए इन 12 पॉइंट्स को आप यहां देख सकते हैं।

1. Introduce Media Literacy Programmes (MLP) from at least the middle school as the students are getting exposed to media in a manner unprecedented in human history.

2. Introduce Communication as an integral part of all programmes at secondary and senior secondary level, particularly in the stream of Science and Humanities.

3. Introduce Mass Communication as an optional subject right from standard IX in schools.

4. Establish a National Communications University on the lines of similar institutions in countries such as China, which would nurture indigenous research and publication in the field.

5. Include Mass Communication as an optional subject in the civil services examinations conducted by UPSC.

6. Recognition of Mass Communication as an independent discipline which would ensure that instead of English and Hindi departments teaching the subject at colleges in institutions like Delhi University, there would be Department of Mass Communication in every college.

7. There should be standardization of media education to ensure that teaching shops do not deprive the students of quality curricula and infrastructure.

8. Government should establish Media Labs in all higher secondary schools to nurture an informed society and promote Citizen Journalism.

9. A Media Council of India be established to give recognition to Media Schools for conducting Diploma/UG/PG/Doctoral programmes, on the lines of the Medical/Bar Councils of India.

10. An all India Common Test for Communication (CTC) be conducted for Mass Communication programmes, based on reasoning, linguistic skills and General Knowledge, so that the best students are able to get admission in leading media educational institutions, on the lines of NEET, JEE etc

11. Bring all media related educational institutions including IIMC, FTII, Pune & SRFTI, Kolkata under the HRD/Education Ministry to ensure that students/faculty get the same facilities at par with other universities.

12. The management of educational institutions, media related or otherwise, should be in the hands of media persons, academicians or educationists and not career bureaucrats.

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फर्जी TRP मामले में गिरफ्तार इस चैनल के मालिक को मिली जमानत

कथित फर्जी टीआरपी मामले में गिरफ्तार किए गए ‘फक्त मराठी’ चैनल के मालिक शिरीष पट्टनशेट्टी को मुंबई के दिंडोशी सेशन कोर्ट ने गुरुवार को जमानत दे दी

Last Modified:
Friday, 30 October, 2020
TRP

कथित फर्जी टीआरपी मामले में गिरफ्तार किए गए ‘फक्त मराठी’ चैनल के मालिक शिरीष पट्टनशेट्टी को मुंबई के दिंडोशी सेशन कोर्ट ने गुरुवार को जमानत दे दी।

44 वर्षीय पट्टनशेट्टी को 8 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। पट्टनशेट्टी के वकील अनिकेत निकम ने बताया कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी आर सित्रे ने उन्हें 50,000 रुपए के मुचलके पर जमानत दी है।

निकम ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल ने टेलीविजन रेटिंग पॉइंट (टीआरपी) से किसी तरह की हेराफेरी नहीं की और न ही ‘फक्त मराठी’ चैनल की टीआरपी बढ़ी।

उन्होंने कहा कि संबंधित अवधि के दौरान चैनल के रेवेन्यूज में भी बढ़ोतरी नहीं हुई और आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को ‘प्रतिशोध’ की भावना से फंसाया गया है।

निकम ने कहा कि पट्टनशेट्टी से हिरासत में पूछताछ से कुछ हासिल नहीं हुआ और आगे उन्हें हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होने वाला। पट्टनशेट्टी को पिछले दिनों गिरफ्तार किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रॉडकास्ट आडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) ने हंसा रिसर्च ग्रुप के जरिए मुंबई पुलिस के समक्ष शिकायत देकर आरोप लगाया था कि कुछ चैनल विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करने के लिए टीआरपी के साथ हेराफेरी कर रहे हैं। आरोप लगाया गया कि जिन लोगों के यहां दर्शक संख्या का आंकड़ा जुटाने के लिए मीटर लगे हुए हैं उन्हें संबंधित चैनल देखने के लिए पैसे दिए गए। मामले में अब तक कम से कम 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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अपनी वर्तमान भूमिका से निकलकर आगे बढ़ेंगे MRUCI के CEO राधेश उचिल

मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के सीईओ राधेश उचिल ने अपनी वर्तमान भूमिका से निकलकर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2020
RADHESH

मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के सीईओ राधेश उचिल ने अपनी वर्तमान भूमिका से निकलकर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है।

2015 में MRUC इंडिया में शामिल होने के बाद, उचिल ने बोर्ड (Board) और टेककॉम (TechComm) के साथ मिलकर IRS स्टडी के दो दौर का सफल क्रियान्वयन करने और उसके डेटा को रिलीज करने में एक महत्वपूर्ण लीडरशिप की भूमिका निभाई। वे काउंसिल के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए अन्य उद्योग निकायों के साथ नए अवसरों की खोज में सक्रिय रूप से शामिल थे।

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पवन सोनी ने नेशनल जियोग्राफिक को बोला बाय

‘नेशनल जियोग्राफिक’ में वाइस प्रेजिडेंट, प्रोग्रामिंग और मार्केटिंग हेड पवन सोनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Pawan Soni

‘द वॉल्ट डिज्नी’ (The Walt Disney) और ‘नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी’ (National Geographic Society)  के जाइंट वेंचर ‘नेशनल जियोग्राफिक’ (National Geographic) में वाइस प्रेजिडेंट, प्रोग्रामिंग और मार्केटिंग हेड पवन सोनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ‘नेशनल जियोग्राफिक’ की AVP (मार्केटिंग और ब्रैंड स्ट्रैटेजी) मिली कपूर ने भी यहां से अलविदा कह दिया है। बताया जा रहा है कि वह फिलहाल नोटिस पीरियड पर काम कर रही हैं। हालांकि, इस संबंध में न तो स्टार इंडिया और न ही पवन सोनी व मिली कपूर से इस पर कोई प्रतिक्रिया मिल पाई है।

बता दें कि सोनी करीब दो साल से यहां कार्यरत थे। उन्होंने वर्ष 2018 में ‘नेशनल जियोग्राफिक’ को जॉइन किया था। इससे पहले वह ‘फॉक्स नेटवर्क ग्रुप एशिया’ (Fox Network Group Asia) में बतौर कॉमर्शियल हेड और ‘फॉक्स इंटरनेशनल चैनल्स’ (Fox International Channels) में AVP (मार्केटिंग और ब्रैंड सॉल्यूशंस) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

‘फॉक्स इंटरनेशनल चैनल्स’ को जॉइन करने से पहले वह ‘नेशनल जियोग्राफिक चैनल्स’ में मैनेजर और सीनियर मैनेजर (मार्केटिंग/ट्रेड) के पद पर कार्यरत थे। पूर्व में वह ‘J Walter Thompson Worldwide’ और ‘Promodome Communications’ के साथ भी काम कर चुके हैं। वहीं, कपूर ने वर्ष 2019 में ‘नेशनल जियोग्राफिक’ को जॉइन किया था। यहां वह ‘National Geographic Channel’ और ‘Nat Geo Wild’ के सभी पहलुओं का मैनेजमेंट संभाल रही थीं।

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CM पर आरोपों को लेकर पत्रकार के खिलाफ दर्ज FIR रद्द, HC ने दिया ये आदेश

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Court

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लाभ पहुंचाने के लिए नोटबंदी के बाद एक दंपती के बैंक खाते में धन जमा कराये जाने संबंधी सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही आरोप लगाने वाले पत्रकार उमेश शर्मा के खिलाफ इस संबंध में दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी है।

न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने शर्मा के खिलाफ देहरादून के एक थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का आदेश देते हुए याचिकाकर्ता से बुधवार दोपहर बाद तक इस मामले के सभी दस्तावेज अदालत में जमा कराने के भी निर्देश दिए। शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अदालत से अपने खिलाफ देहरादून में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की प्रार्थना की थी।

दरअसल, उमेश शर्मा ने 24 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी। इस पोस्ट में उन्होंने दावा किया था कि झारखंड के अमृतेश चौहान ने नोटबंदी के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को निजी लाभ पहुंचाने के लिए सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत और उनकी पत्नी डॉ. सविता रावत के खाते में पैसे जमा कराए थे।

दावे के समर्थन में बैंक खाते में हुए लेन-देन का विवरण भी पोस्ट में डाला गया था। इस पर हरेंद्र सिंह रावत ने इन आरोपों को झूठा और आधारहीन बताते हुए शर्मा पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था और 31 जुलाई को देहरादून में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने शर्मा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करते हुए उनके द्वारा लगाए आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए।

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डीडी न्यूज में अशोक श्रीवास्तव का हुआ प्रमोशन, अब निभाएंगे यह जिम्मेदारी

दूरदर्शन में करीब 18 साल से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Ashok Srivastav

‘डीडी न्यूज़’ के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव को प्रमोट किया गया है। उन्हें अब यहां सीनियर कंसल्टिंग एडिटर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह यहां पर सीनियर न्यूज एंकर कम करेसपॉन्डेंट के पद पर अपनी भूमिका निभा रहे थे।

मूल रूप से बनारस के रहने वाले अशोक श्रीवास्तव की पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में हुई है। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का 28-29 साल का अनुभव है। दूरदर्शन में वह करीब 18 साल से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

समाचार4मीडिया के साथ बातचीत में अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि शुरुआत में वह ‘नवभारत टाइम्स’, ‘जनसत्ता’, ‘पांचजन्य’ और ‘संडे मेल’ के साथ बतौर फ्रीलॉन्सर जुड़े रहे। इसके बाद वह वरिष्ठ पत्रकार नलिनी सिंह के ‘आंखों देखी’ कार्यक्रम के साथ जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने ‘सूर्या टीवी’ होते हुए ‘दूरदर्शन’ का रुख किया और तब से यहां अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

गौरतलब है कि अशोक श्रीवास्तव पिछले काफी समय से डीडी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं और उनका शो ‘दो टूक’ काफी लोकप्रिय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘नरेंद्र मोदी सेंसर्ड’नामक किताब भी लिखी है। समाचार4मीडिया की ओर से अशोक श्रीवास्तव को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं।

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वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार ने कुछ समय के लिए न्यूजरूम से बनाई दूरी, जानें वजह

कोरोना की चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं तमाम लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Navika Kumar

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस वायरस की चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं तमाम लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं।

कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे तमाम मीडियाकर्मी भी इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिनमें अब ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) की ग्रुप एडिटर (Politics) नविका कुमार भी शामिल हो गई हैं। उन्होंने ट्वीट कर खुद इसकी जानकारी दी है।

अपने ट्वीट में नविका कुमार ने लिखा है, ‘मेरा कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आया है। मैंने खुद को आइसोलेट कर लिया है और कुछ समय तक आप सबसे दूर रहूंगी। उम्मीद है कि जल्द ही वापसी होगी।’ नविका कुमार द्वारा किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

 

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वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने बताया, पत्रकारिता का सबसे बड़ा संकट

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में 26 अक्टूबर से नवागत विद्यार्थियों के आत्मीय प्रबोधन और करियर मार्गदर्शन के लिए ‘संत्रारंभ 2020’ का आयोजन किया जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2020
AlokMehta

देश के विख्यात माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में 26 अक्टूबर से नवागत विद्यार्थियों के आत्मीय प्रबोधन और करियर मार्गदर्शन के लिए ‘संत्रारंभ 2020’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन 27 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से साढ़े 12 बजे के बीच उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा, ‘आज भी पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धातों में कोई अंतर नहीं आया है। अंतर सिर्फ तकनीकी और माध्यम में आया है। उन्होंने कहा कि न्यू मीडिया और डिजिटल मीडिया ने सूचना और समाचारों का लोकतांत्रिकरण एवं विकेंद्रीकरण किया है। प्रो. सुरेश ने कहा कि पत्रकार न विपक्ष का होता है और न ही सत्ता पक्ष का। उसका मात्र एक ही पक्ष होता है और वह है, जनपक्ष।’

वहीं, कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री से अलंकृत व वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि यह कहना सही नहीं कि आज पत्रकारिता के सामने अधिक कठिनाई है। वास्तविकता यह है कि पत्रकारिता में हर युग में चुनौतियां रही हैं। यदि लक्ष्मणरेखा को ध्यान में रखें तभी हम पत्रकारिता में खतरे उठा सकते हैं। आज पत्रकारिता इसलिए सुरक्षित है क्योंकि हमारे प्रारंभिक पत्रकारों एवं संपादकों ने लक्ष्मणरेखा नहीं लांघी।

‘पत्रकारिता की लक्ष्मणरेखा’ पर अपने विचार रखते हुए आलोक मेहता ने कहा कि सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का है। पत्रकारों को विश्वसनीयता बचाए रखने के प्रयास करने चाहिए। उसे किसी का पक्षकार बनने से बचना चाहिए। जब कोई भरोसा करके आपको सूचना या समाचार देता है, तब उसे लीक नहीं करना चाहिए, उसकी जांच करके प्रकाशित करना चाहिए। पत्रकारों को अपनी पाचनशक्ति को मजबूत रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को भ्रम फैलाने वाली खबरों के प्रसारण से बचना चाहिए।

बढ़ गई है डिजिटल मीडिया की खपत :

‘न्यू मीडिया : अवसर और चुनौतियां’ विषय पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के मीडिया निदेशक एवं अध्यक्ष उमेश उपाध्याय ने कहा कि कोरोना काल में डिजिटल मीडिया की उपयोगिता सामने आई और उसका दायरा भी बढ़ा। इस दौरान न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण भारत में भी डिजिटल कंटेंट देखे जाने की प्रवृत्ति बहुत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भारत में चीन के मुकाबले प्रति व्यक्ति डेटा की खपत अधिक है। भारत में प्रति व्यक्ति 12 जीबी डेटा की खपत है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को डेटा और उसके विश्लेषण की विधि को समझना चाहिए। आज समाचारों की दुनिया मोबाइल फोन में सिमट गई है। दुनिया में 91 प्रतिशत डेटा मोबाइल के माध्यम से उपयोग हो रहा है।

प्रयोगों में कंटेंट नहीं दबना चाहिए :

‘टेलीविजन समाचारों के बदलते प्रतिमान’ विषय पर डीडी न्यूज के सलाहकार संपादक अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि तीन दशक में टेलीविजन पत्रकारिता और उसके समाचारों के प्रस्तुतिकरण में व्यापक बदलाव आया है। हर दौर में टेलीविजन में बदलाव आया है और उन बदलावों का विरोध हुआ है। समाचार प्रस्तुतिकरण में होने वाले प्रयोगों से दिक्कत नहीं होनी चाहिए, तकलीफ इस बात की होती है कि इन प्रयोगों में कई बार कंटेंट दब जाता है। उन्होंने कहा कि टीआरपी की व्यवस्था न्यूज चैनल्स के लिए ठीक नहीं है, इसे बंद कर देना चाहिए।

संचार के तरीकों को सरल बनाना है जनसंपर्क :

‘कोविड उपरांत व्यवसाय के लिए जनसंपर्क वैक्सीन’ पर अपनी बात रखते हुए ग्रे मैटर्स कम्युनिकेशन्स के संस्थापक डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि जनसंपर्क विधा में हम ब्रांड की छवि और उसके प्रति बनी अवधारणा का प्रबंधन करते हैं। अच्छे जनसंपर्क अधिकारी की विशेषता होती है कि वे संचार के तरीकों को सरल बनाते हैं। जनसंपर्क के क्षेत्र में हम संकट के समय में लोगों का उत्साह बढ़ाते हैं, उनको प्रेरित करते हैं। कोरोना के कारण व्यावसायिक क्षेत्र में अनेक प्रकार के संकट आए हैं, जिनसे बाहर निकलने में पीआर बहुत उपयोगी साबित होगा।

वहीं कार्यक्रम के तीसरे दिन 28 अक्टूबर को सुबह 10:00 बजे ‘मीडिया मैनेजमेंट’ विषय पर बिजनेस वर्ल्ड  व एक्सचेंज4मीडिया के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा, सुबह 11:30 बजे ‘कम्प्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में संभावनाएं’ विषय पर स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस यूपीएस, देहरादून के डीन डॉ. मनीष प्रतीक और दोपहर 2:00 बजे ‘ब्रॉडकास्ट का भविष्य’ विषय पर प्रख्यात आरजे सिमरन कोहली विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगी। समापन सत्र में अपराह्न 3:30 बजे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतीहारी (बिहार) के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा बतौर मुख्य अतिथि एवं वक्ता उपस्थित रहेंगे। समापन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. केजी सुरेश करेंगे।

सभी व्याख्यान का प्रसारण विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर होगा-

https://www.facebook.com/mcnujc91

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राष्ट्रपति का ये इंटरव्यू बना चर्चा का विषय, सवालों से परेशान होकर बीच में छोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका एक इंटरव्यू चर्चा का विषय बना हुआ है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2020
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका एक इंटरव्यू चर्चा का विषय बना हुआ है। CBS न्यूज के साथ चल रहे इंटरव्यू को बीच में छोड़कर चले जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की आलोचना हो रही है।

दरअसल, कुछ दिनों पहले '60 मिनट' के कार्यक्रम के लिए उन्हें पत्रकार लेस्ली स्टाल के साथ इंटरव्यू करना था। व्हाइट हाउस में नेटवर्क के क्रू ने कैमरा के साथ पूरी तैयारी कर ली थी। डोनाल्ड ट्रंप ने भी सभी सवालों के जवाब देने का संकेत दिया था।

इंटरव्यू शुरू हुआ तो मेजबान लेस्ली स्टाल के साथ ट्रंप करीब 45 मिनट बैठे। इंटरव्यू के दौरान ट्रंप एंकर के एक सवाल पर नाराज हो गए।

पत्रकार लेस्ली ने राष्ट्रपति से पूछा- 'क्या आपके ट्वीट्स और नाम लेकर बात कहने से लोगों का मोह भंग हो रहा है?'

इसका जवाब देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'अगर मेरे पास सोशल मीडिया नहीं होता तो मैं यहां नहीं होता। ट्रंप ने कहा कि वे सोशल मीडिया की ताकत के कारण ही राष्ट्रपति बने हैं और वे इसे नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया फेक है। मैं खुलकर कहूं तो अगर मेरे पास सोशल मीडिया नहीं होता, तो मैं लोगों तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाता।'

इंटरव्यू के दौरान लेस्ली ने डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट पर सवाल खड़े किये, साथ ही कहा कि एक राष्ट्रपति के तौर पर उनके ट्वीट सही नहीं हैं। जिस पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वो सोशल मीडिया की ताकत के कारण ही राष्ट्रपति बने हैं और वो इसे नहीं बदलेंगे,जिसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकार को टोका और कहा कि आप जो बिडेन से भी इतने सख्त सवाल क्यों नहीं पूछतीं और वे शो से उठकर चले गये।

इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस भी हो गई। इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ये भी आरोप लगाया कि जो बाइडेन से इतने सख्त सवाल नहीं पूछे जाते जितने सख्त सवाल उनसे पूछे जाते हैं। पत्रकार लेजले ने शुरू में ही उनसे पूछा था कि क्या वे सख्त सवालों के लिए तैयार हैं इस पर ट्रंप ने कहा कि 'ये बात करने का तरीका नहीं है।'

जब पत्रकार ने ट्रंप को ये याद दिलाया कि बाइडेन राष्ट्रपति नहीं थे, बल्कि ट्रंप खुद राष्ट्रपति थे। इस बात पर ट्रंप सेट से उठकर चले गए और फिर टीवी शो की दोबारा शूटिंग के लिए नहीं लौटे। 

बाद में ट्रंप ने ट्विटर पर पत्रकार का एक क्लिप शेयर किया, जिसमें ट्रंप को मास्क पहने देखा गया। हालांकि, पत्रकार व्हाइट हाउस में मास्क नहीं लगाए हुई थीं। ट्रंप वीडियो में पत्रकार पर मास्क नहीं पहनने का आरोप लगा रहे हैं।

ट्रंप ने कहा, ‘मुझे आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि रिपोर्टिंग में सत्यता की खातिर मैं लेस्ली स्टाल के साथ अपने इंटरव्यू को प्रसारण से पहले पोस्ट करने की सोच रहा हूं।’ उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हर शख्स को एक झलक मिल सके कि कैसा फर्जी और पक्षपातपूर्ण इंटरव्यू है।

 

इस बीच टीवी इंटरव्यू (TV Interview) को बीच में ही छोड़कर चले जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया (Social Media) पर इस इंटरव्यू का क्लिप तेजी से वायरल हो रही है। साथ ही बराक ओबामा (Barak Obama) सहित विपक्षी नेता भी ट्रंप की आलोचना कर रहे हैं।  

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, ‘वह पगला गये और 60 मिनट के साक्षात्कार से उठकर चले गये। उन्होंने सोचा कि सवाल बड़े कठिन हैं। यदि वह ‘आप दूसरे कार्यकाल में क्या करना पसंद करेंगे' जैसे कठिन सवाल का जवाब नहीं दे सकते तो हम उन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं दे सकते।

 

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सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के CEO एनपी सिंह ने कुछ यूं समझाया बेहतर कंटेंट का महत्व

विजिनरी टॉक सीरीज के तहत ‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ विशेष बातचीत में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के एमडी और सीईओ एनपी सिंह ने अच्छे कंटेंट समेत तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2020
Visionary Talk

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स’ (Sony Pictures Networks) इंडिया के ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म ‘सोनी लिव’ (SonyLIV) पर नई वेब सीरीज ‘Scam 1992: The Harshad Mehta Story’ की सफलता से उत्साहित सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के एमडी और सीईओ एनपी सिंह का कहना है कि आज के समय में स्क्रिप्ट नया हीरो है।

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में एनपी सिंह ने वेब सीरीज की सफलता का श्रेय इसके कंटेंट को देते हुए कहा कि इसमें नए एक्टर्स होने के बावजूद सोनी लिव का सबस्क्राइबर बेस काफी बढ़ा है और लोगों का फोकस अब दमदार स्टोरीटैलिंग की ओर हो गया है।  

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान एनपी सिंह ने अन्य सफल वेब सीरीज जैसे- ‘अनदेखी’, ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’ और ‘पाताल लोक’ का उदाहरण भी दिया, जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया है और कहा कि नए चेहरों और कंटेंट की ओर लोगों का रुझान बढ़ना शुरू हो गया है।  

एनपी सिंह के अनुसार, ‘अब फोकस स्टोरीटैलिंग की ओर शिफ्ट हो चुका है। मेरे लिए स्क्रिप्ट हीरो है। हम हमेशा अच्छी क्वालिटी के कंटेंट को बेहतर स्टोरीटैलिंग के साथ पेश करेंगे, जो हमारे व्युअर्स को पसंद आएगी। यदि आपके पास अच्छी क्वालिटी का कंटेंट है और आप सच्चे व मूल विचारों के साथ रहते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।’

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ट्रेडमार्क-टैगलाइन के इस्तेमाल को लेकर Times Network की याचिका पर HC ने दिया ये आदेश

वर्ष 2017 में बेनेट कोलमैन कंपनी ने ट्रेडमार्क उल्लंघन के आरोप में एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Times Network

दिल्ली हाई कोर्ट ने अरनब गोस्वामी की कंपनी ‘एआरजी आउटलेयर मीडिया’ (ARG Outlier Media Private Limited) द्वारा ‘NEWS HOUR’ अथवा इसके नाम से मिलते-जुलते किसी भी ट्रेड मार्क का इस्तेमाल किए जाने पर अंतरिम तौर पर रोक लगा दी है।   

बता दें कि वर्ष 2017 में बेनेट कोलमैन/टाइम्स नेटवर्क ने अपने ट्रेडमार्क ‘न्यूज आवर’ (News Hour) और ‘नेशन वॉन्ट्स टू नो’ (Nation Wants to Know) के संरक्षण के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अरनब गोस्वामी की कंपनी एआरजी आउटलेयर मीडिया के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का एक मुकदमा दायर किया था।

वहीं, ‘NATION WANTS TO KNOW’ टैगलाइन के बारे में न्यायमूर्ति जयंत नाथ की एकल पीठ ने कहा कि सभी सबूतों का विस्तृत परीक्षण किए जाने की जरूरत है, इसलिए तब तक एआरजी आउटलियर को किसी भी न्यूज चैनल पर अपने भाषण/प्रजेंटेशन आदि के हिस्से के रूप में इसके इस्तेमाल की अनुमति है।

हालांकि कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड किसी भी संबंध में ट्रेडमार्क के समान इसका इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे इस तरह के इस्तेमाल का हिसाब रखने की जरूरत होगी। इस तरह के हिसाब अथवा खातों को हर छह महीने में एक बार एआरजी के निदेशकों में से एक के हलफनामे पर नियमित रूप से अदालत में दायर किया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने ‘NATION WANTS TO KNOW’ टैगलाइन के मालिकाना हक के मामले में किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं दी और इसे सबूतों के आधार पर निर्णय के लिए छोड़ दिया। इसी तरह वर्ष 2017 में ‘टाइम्स नेटवर्क’  ने दिल्ली हाई कोर्ट में एआरजी आउटलियर के खिलाफ गोपनीयता भंग के लिए एक मुकदमा दायर किया था। इसमें एआरजी ने कोर्ट में यह वचन दिया था कि वह अपने चैनल पर टाइम्स नाउ की प्रोग्रामिंग सामग्री का इस्तेमाल नहीं करेंगे और इसके आधार पर उसे राहत प्रदान की गई थी।

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