मीडिया एजुकेशन पर केजी सुरेश ने HRD मिनिस्टर को लिखा लेटर, सुझाए ये 12 पॉइंट्स

इन सुझावों को कई पत्रकारों और शिक्षाविदों से सलाह के बाद तैयार किया गया है। इनमें से अधिकांश सुझाव नोएडा के प्रेरणा संस्थान में 28 जुलाई को हुए राउंड टेबल डिस्कशन में सामने आए हैं

पंकज शर्मा by
Published - Wednesday, 31 July, 2019
Last Modified:
Wednesday, 31 July, 2019
KG Suresh

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश ने मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने प्रस्तावित नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन एजुकेशन को लेकर 12 पॉइंट्स सुझाए हैं।

वर्तमान में दिल्ली के एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन और मध्य प्रदेश की जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी स्थित जागरण स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की फैकल्टी में बतौर एमरेटस प्रोफेसर (Emeritus Professor) कार्यरत केजी सुरेश ने नई एजुकेशन पॉलिसी को लेकर राष्ट्रव्यापी डिबेट कराए जाने को लेकर भी पोखरियाल को बधाई दी है।

डॉ. पोखरियाल को लिखे अपने पत्र में केजी सुरेश ने कहा है, ‘पिछले तीन दशक से मीडिया एजुकेटर और पत्रकार के रूप में मैं आपके समक्ष नई एजुकेशन पॉलिसी, खासकर जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन एजुकेशन को लेकर कुछ सुझाव रखना चाहता हूं। इन सुझावों को कई पत्रकारों और शिक्षाविदों से सलाह के बाद तैयार किया गया है। इनमें से अधिकांश सुझाव नोएडा के प्रेरणा संस्थान में 28 जुलाई को हुए राउंड टेबल डिस्कशन में सामने निकलकर आए हैं।’

इस पत्र में केजी सुरेश ने कहा है कि इन सुझावों को प्रस्तावित नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) में शामिल किया जा सकता है। इस पत्र में यह भी कहा गया है, ‘ इनमें से कुछ पॉइंट्स सीधे प्रस्तावित नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के दायरे में नहीं आ सकते हैं, लेकिन फिर भी बड़े पैमाने पर शिक्षा से संबंधित हैं। मुझे विश्वास है कि नई पॉलिसी को अंतिम रूप देते समय आप निश्चित रूप से उपरोक्त 12 पॉइंट्स पर विचार करेंगे। यह न केवल मीडिया और मीडिया एजुकेशन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि शासन और समाज के लिए भी इनका अलग महत्व है।’

केजी सुरेश द्वारा सुझाए गए इन 12 पॉइंट्स को आप यहां देख सकते हैं।

1. Introduce Media Literacy Programmes (MLP) from at least the middle school as the students are getting exposed to media in a manner unprecedented in human history.

2. Introduce Communication as an integral part of all programmes at secondary and senior secondary level, particularly in the stream of Science and Humanities.

3. Introduce Mass Communication as an optional subject right from standard IX in schools.

4. Establish a National Communications University on the lines of similar institutions in countries such as China, which would nurture indigenous research and publication in the field.

5. Include Mass Communication as an optional subject in the civil services examinations conducted by UPSC.

6. Recognition of Mass Communication as an independent discipline which would ensure that instead of English and Hindi departments teaching the subject at colleges in institutions like Delhi University, there would be Department of Mass Communication in every college.

7. There should be standardization of media education to ensure that teaching shops do not deprive the students of quality curricula and infrastructure.

8. Government should establish Media Labs in all higher secondary schools to nurture an informed society and promote Citizen Journalism.

9. A Media Council of India be established to give recognition to Media Schools for conducting Diploma/UG/PG/Doctoral programmes, on the lines of the Medical/Bar Councils of India.

10. An all India Common Test for Communication (CTC) be conducted for Mass Communication programmes, based on reasoning, linguistic skills and General Knowledge, so that the best students are able to get admission in leading media educational institutions, on the lines of NEET, JEE etc

11. Bring all media related educational institutions including IIMC, FTII, Pune & SRFTI, Kolkata under the HRD/Education Ministry to ensure that students/faculty get the same facilities at par with other universities.

12. The management of educational institutions, media related or otherwise, should be in the hands of media persons, academicians or educationists and not career bureaucrats.

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कोविड से जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिजनों को CM ने दिए 10 लाख रुपये के चेक

चेक वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा भी मौजूद थे।

Last Modified:
Saturday, 31 July, 2021
CM YOGI

कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। लखनऊ के लोक भवन ऑडिटोरियम में शनिवार की दोपहर 12:00 बजे आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों को आर्थिक सहायता के चेक प्रदान किए।

चेक वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा भी मौजूद थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘पत्रकारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और उन्हें प्रोत्साहित करना जारी रखेगी।’

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ ने हिंदी पत्रकारिता दिवस (30) पर कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद प्रदेश का सूचना विभाग कोविड-19 की वजह से जान गंवाने वाले पत्रकारों का ब्यौरा जुटाने में लग गया था, ताकि उनके परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके। इसके लिए पीड़ित परिवारों से प्रार्थना पत्र मांगे गए थे।

बता दें कि कोरोना काल में कवरेज के दौरान कई पत्रकार कोरोना से संक्रमित हो गए थे, जिनमें कई का निधन हो गया है। ऐसे में उनके परिजनों के सामने भरण-पोषण की मुश्किल आ गई है। इसे देखते हुए ही योगी सरकार ने यह फैसला किया है। वहीं, अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल का कहना है कि कुछ प्रार्थना पत्र देरी से मिले हैं, लेकिन उन पीड़ित परिवारों को भी सहायता राशि दी जाएगी।

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प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार के राज्यसभा पहुंचने का रास्ता हुआ साफ!

पूर्व नौकरशाह और ‘प्रसार भारती’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे जवाहर सरकार को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है।

Last Modified:
Friday, 30 July, 2021
jawahar Sircar

पूर्व नौकरशाह और ‘प्रसार भारती’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे जवाहर सरकार को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उन्हें पार्टी की ओर से नॉमिनेट किया है। इस बारे में तृणमूल कांग्रेस की ओर से एक ट्वीट भी किया गया है।

इस ट्वीट में कहा गया है, ‘हमें संसद के उच्च सदन में जवाहर सरकार को मनोनीत करते हुए प्रसन्नता हो रही है। सरकार ने लगभग 42 साल सार्वजनिक सेवा में बिताए और प्रसार भारती के सीईओ भी रह चुके हैं। सार्वजनिक सेवा में उनका अमूल्य योगदान हमें अपने देश की और भी बेहतर सेवा करने में मदद करेगा।’

यह सीट तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद दिनेश त्रिवेदी द्वारा खाली की गई है। बता दें कि फरवरी में राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले त्रिवेदी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। जवाहर सरकार ने कोलकाता में विधानसभा में नामांकन-पत्र दाखिल कर दिया है।

इधर, भारतीय जनता पार्टी ने  गुरुवार को घोषणा की कि वह पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं करेगी। बीजेपी इस फैसले के बाद जवाहर सरकार के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया है। सोमवार को इसकी घोषणा की जाएगी। 

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बीजेपी राज्यसभा के लिए किसी भी उम्मीदवार को नामित नहीं करेगी। नंदीग्राम से बीजेपी विधायक अधिकारी ने ट्विटर पर कहा, ‘आज पश्चिम बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव के नामांकन के लिए आखिरी तारीख है। बीजेपी इस सीट के लिए कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं कर रही है। चुनाव का नतीजा हम सभी को पता है...इस अविवेकशील सरकार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।’

दरअसल, शुक्रवार को विधानसभा सचिवालय में नामांकन पत्र की जांच की गई। राज्य सभा उपचुनाव के अधिकारियों ने नामांकन पत्र को वैध पाया। चूंकि किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है, लिहाजा इस वजह से जवाहर सरकार का निर्विरोध चुना जाना तय है। सोमवार को तीन बजे नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि है। उसके बाद उन्हें निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में जवाहर सरकार का कहना है,’ मैं एक नौकरशाह था। मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन, मैं लोगों के विकास के लिए काम करूंगा और जनता से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाउंगा।’

69 वर्षीय जवाहर सरकार कोलकाता के रहने वाले हैं। जवाहर सरकार ने राजनीति शास्त्र में ऑनर्स के साथ स्नातक, समाज शास्त्र में एक एम.ए और इतिहास में और एक एम.ए किया है। वह यूनाइटेड किंगडम के कैंब्रिज तथा ससेक्स विश्वविद्यालयों से प्रशिक्षित होने के अलावा न्यूयार्क विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं।

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इन अखबारों-चैनलों के खिलाफ मानहानि के 90 मामलों को CM ने लिया वापस

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को एक बड़ा फैसले लेते हुए पत्रकारों, अखबारों और टेलीविजन चैनलों के खिलाफ दायर मानहानि के 90 मामलों को वापस लेने का निर्देश दिया है।

Last Modified:
Friday, 30 July, 2021
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को एक बड़ा फैसले लेते हुए पत्रकारों, अखबारों और टेलीविजन चैनलों के खिलाफ दायर मानहानि के 90 मामलों को वापस लेने का निर्देश दिया है। बता दें कि इसमें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के खिलाफ दर्ज पांच मामले और ‘इकनॉमिक टाइम्स’ के खिलाफ एक मामला शामिल है।

2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में डीएमके ने मीडिया घरानों के खिलाफ दर्ज ऐसे सभी मानहानि के मामलों को वापस लेने का वादा किया था।

आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि ‘प्रतिशोध की भावना से पत्रकारों के खिलाफ दायर मानहानि से जुड़े सभी मामलों’ को वापस लेने के द्रमुक के चुनावी वायदे को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री ने 90 मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है।

बता दें कि ये मामले 2012 और फरवरी 2021 के बीच संपादकों, प्रकाशकों और टेलीविजन चैनलों के खिलाफ दायर किए गए थे, जब अन्नाद्रमुक सत्ता में थी।

अंग्रेजी दैनिक अखबार ‘द हिंदू’, ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘द इकनॉमिक टाइम्स’, वहीं, तमिल अखबार ‘दिनामलार’, द्रमुक से जुड़े अखबार ‘मुरासोली’, ‘दिनाकरन’ और तमिल पत्रिका ‘आनंदा विकातन’, ‘जूनियर विकातन’ और ‘नक्कीरन’ ने इस तरह के मामलों का सामना किया।

वहीं, टेलीविजन चैनलों में ‘पुथिया थलाईमुराई’, ‘न्यूज 7’, ‘कलैगनार थोलाईकाची’, ‘साथियाम’, ‘कैप्टन’, ‘एनडीटीवी’ और ‘टाइम्स नाउ’ ने इस तरह के मामलों का सामना किया।

बता दें कि 2011 और 2016 के बीच, तत्कालीन तमिलनाडु सरकार ने पूर्व सीएम जे. जयललिता की आलोचना करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ 213 मानहानि के मुकदमे दर्ज किए थे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्कालीन अन्नाद्रमुक सरकार द्वारा दायर मानहानि के मामलों की जांच के बाद 2016 में सरकार की ओर से मानहानि मामले की प्रक्रिया के दौरान 213 मामलों की सूची सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई थी।

वहीं, 2019 में, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ए.के. पलनिस्वामी ने तहलका के पूर्व मैनेजिंग एडिटर सैमुअल मैथ्यू और छह अन्य पर कथित तौर पर 2017 कोडनाड डकैती में पलनिस्वामी का नाम जोड़ने वाली एक वीडियो क्लिप प्रसारित करने के लिए मुकदमा दायर किया था। उन्होंने हर्जाने में 1.10 करोड़ रुपए की भी मांग की थी।

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शिल्पा शेट्टी का फूटा गुस्सा, कई मीडिया घरानों पर किया केस

पोर्नोग्राफी केस में राज कुंद्रा की गिरफ्तारी और मुंबई क्राइम ब्रांच की तरफ पूछताछ का सामना करने के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने सारा ठीकरा मीडिया पर फोड़ दिया है।

Last Modified:
Friday, 30 July, 2021
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पोर्नोग्राफी केस में राज कुंद्रा की गिरफ्तारी और मुंबई क्राइम ब्रांच की तरफ पूछताछ का सामना करने के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने सारा ठीकरा मीडिया पर फोड़ दिया है। दरअसल, शिल्पा शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए मीडिया पर अपनी छवि को बदनाम करने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिल्पा शेट्टी ने 29 मीडियाकर्मियों और मीडिया घरानों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में मानहानि मुकदमा दायर किया है। अभिनेत्री ने राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी मामले में उनके बारे में गलत रिपोर्टिंग और उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। इस मामले पर कोर्ट में शुक्रवार यानी आज सुनवाई होगी।    

बता दें कि राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी केस में शिल्पा शेट्टी से भी पूछताछ हो चुकी है। वहीं, राज कुंद्रा अश्लील फिल्में बनाने के आरोप में बुरी तरह फंसते जा रहे हैं। आए दिन मामले में नई कड़ियां जुड़ रही हैं और लगातार उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

इसी बीच बुधवार को मुंबई की एक अदालत ने कथित तौर पर पोर्नोग्राफिक फिल्में बनाने और उन्हें कुछ ऐप्स के जरिए प्रसारित करने से संबंधित मामले में कारोबारी राज कुंद्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। शिल्पा शेट्टी के पति कुंद्रा को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने 19 जुलाई को गिरफ्तार किया था। उन पर भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मंगलवार को यहां एक मजिस्ट्रेट अदालत ने कुंद्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कुंद्रा ने जमानत याचिका दायर की थी लेकिन अदालत ने बुधवार को उसे खारिज कर दिया। बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उन्हें कोई तत्काल अस्थायी राहत देने से भी इनकार कर दिया था।

वहीं, पुलिस ने दावा किया कि मामले की जांच के दौरान यह पाया गया कि कुंद्रा ने आर्म्सप्राइम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड बनायी, जिसने लंदन की केनरिन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो अपलोड करने के लिए हॉटशॉट्स ऐप खरीदी। उसने यह भी आरोप लगाया कि कुंद्रा ने हॉटशॉट्स के जरिए पिछले साल अगस्त से दिसंबर के बीच 1.17 करोड़ रुपए से अधिक की कमायी की। पुलिस ने आरोपी के कार्यालय पर छापों के दौरान 51 आपत्तिजनक वीडियो पाए जाने का भी दावा किया।

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संपादक अतुल अग्रवाल ने ट्रोलर्स पर किया पलटवार, कुछ यूं साधा ‘निशाना’

‘हिन्दी खबर’ न्यूज चैनल के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि कई वेबसाइट्स उनके बारे में भ्रामक बातें फैला रही हैं।

Last Modified:
Friday, 30 July, 2021
Atul Agrawal

‘हिन्दी खबर’ न्यूज चैनल के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि कई वेबसाइट्स उनके बारे में भ्रामक बातें फैला रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पत्नी और बच्चे के बारे में भी अमर्यादित और अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अपने और अपनी पत्नी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र टिप्पणी करने के मामले में उन्होंने दो वेबसाइट सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ नोएडा के सेक्टर-36 स्थित साइबर थाने में मामला दर्ज कराया है।

अब अपने ट्विटर हैंडल पर अतुल अग्रवाल ने इस बारे में कई ट्वीट किए हैं। इनमें से एक ट्वीट में उनका कहना है, ‘टुच्चे_ट्रोलर्स सुन लो, मैं तुम लोगों से नहीं डरता. गाली-गलौज, अश्लील, अपमानजनक, आपराधिक भाषा, ऊट-पटांग झूठे तथ्य और मॉर्फ्ड फोटो पोस्ट करने वाले मुझे ना तो झुका सकते हैं और ना ही डरा सकते हैं। साइबर अपराध शाखा में FIR दर्ज है. पुलिस की गहन विवेचना जारी है।’

इसके साथ ही एक अन्य ट्वीट में अतुल अग्रवाल ने लिखा है, ‘मूल विषय से हट कर, निजी जिंदगी में तांक-झांक करने पर आमादा लोगों के मन की शांति के लिए बता दूं कि 19 जून 2021 की शाम सवा 7 बजे, सेक्टर-45 नोएडा में, 3 मुस्लिम बहनों के घर पर मैं डिनर के लिए गया था। साल 2007 से ही ये हमारी छोटी बहनें हैं। इन्हे 'महिला मित्र' बताने वालों पर लानत है।’

यही नहीं, अतुल अग्रवाल ने एक और ट्वीट में सीसीटीवी की फुटेज शेयर करते हुए लिखा है, ‘अनुकंपा स्वरूप, विलंब से मिले #OYO होटल के इस CCTV वीडियो को गौर से देखिए और खोजिए कोई महिला मित्र दिखी क्या? हाईटेक पुलिस के बड़े साहेबानों के पास भी ये मौजूद था मगर अनुकूल सत्य बताने-फैलाने के फेर में ये पीछे छूट गया था। ये सर्वमान्य तथ्य है कि #चरित्र_हत्या सबसे सरल है।’

उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता ने कुछ दिन पहले खुद के साथ लूट होने की शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए लूट की घटना को गलत बताया था। इसी मामले को लेकर उनके और परिवार के खिलाफ भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया गया है।

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ABP में अतिदेब सरकार को मिली अब ये बड़ी जिम्मेदारी

‘एबीपी प्राइवेट लिमिटेड’ (ABP Pvt Ltd) ने अतिदेब सरकार (ATIDEB SARKAR) को चीफ एडिटर और पब्लिशर के पद पर नियुक्त किया है।

Last Modified:
Thursday, 29 July, 2021
ABP

‘एबीपी प्राइवेट लिमिटेड’ (ABP Pvt Ltd)  ने अतिदेब सरकार (ATIDEB SARKAR) को चीफ एडिटर और पब्लिशर के पद पर नियुक्त किया है। उनकी यह नियुक्ति तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। ‘एबीपी प्राइवेट लिमिटेड’ की ओर से जारी सूचना के अनुसार, अरुप सरकार (ARUP SARKAR) अब नेस्टर (Nestor) की भूमिका निभाएंगे।

अतिदेब सरकार ने वर्ष 2010 में ’द टेलीग्राफ’ के साथ न्यूज डेस्क ट्रेनी के रूप में एबीपी के साथ अपने सफर की शुरुआत की थी। पिछले एक दशक में वह बोर्ड में तमाम भूमिकाओं जैसे- फाइनेंस मैनेजर, जनरल मैनेजर (स्ट्रैटेजी), एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट (स्ट्रैटेजी) के साथ ही वर्ष 2015 से एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

वर्ष 2016 में अवीक सरकार के एबीपी पब्लिकेशंस, द टेलिग्राफ और आनंद बाजार पत्रिका के चीफ एडिटर के पद से इस्तीफा देने के बाद उनके भाई अरुप सरकार को एबीपी न्यूज नेटवर्क का चीफ एडिटर बनाया गया था। अब यह जिम्मेदारी उनके बेटे अतिदेब सरकार को मिली है। 

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CM ने दी बड़ी सौगात, पत्रकारों ने यूं जताया ‘आभार’

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को बड़ी सौगात दी है।

Last Modified:
Thursday, 29 July, 2021
Journalists

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को बड़ी सौगात दी है। दरअसल मुख्यमंत्री ने सूबे के इन पत्रकारों को सरकारी कर्मचारियों के समान स्वास्थ्य बीमा सुविधा (Health Insurance Scheme) का लाभ प्रदान करने का फैसला लिया है।

खट्टर ने सोमवार को आयुष्मान भारत बीमा योजना एवं अन्य स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की समीक्षा बैठक की इस दौरान कर्मचारियों और पेंशनधारकों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना में कैशलेस सुविधा प्रदान करने के निर्णय को भी हरी झंडी दी।

समीक्षा बैठक के दौरान हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज वीसी के माध्यम से जुड़े। बैठक में आजाद हिंद फौज के सेनानियों, आपातकाल के दौरान जेल में रहे लोगों, हिंदी आंदोलन में शामिल रहे लोगों और द्वितीय विश्व युद्ध के बंदियों एवं उनके आश्रितों को भी सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विमुक्त घुमंतु जाति, मुख्यमंत्री परिवार समृद्वि योजना के लाभार्थियों और निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को भी आयुष्मान भारत बीमा योजना में कवर किया जाएगा। इसके साथ ही नंबरदारों, चौकीदारों, आंगनवाड़ी वर्कर, आशा वर्कर, मनरेगा मजदूरों, स्ट्रीट वेंडरों, रिक्शा चालक, ऑटो चालक के परिवारों को भी आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया जाएगा, बशर्ते उनकी पारिवारिक वार्षिक आय 1.80 लाख रुपए तक हो और पांच एकड़ से अधिक भूमि न हो। योजना के तहत सभी पात्रों को कार्ड जारी किए जाएंगे, जिसे दिखाकर निर्धारित अस्पताल में इलाज कराया जा सकेगा।

खट्टर ने कहा कि पात्र परिवारों को पहले ही आयुषमान भारत योजना के तहत पाच लाख रुपए तक का निशुल्क स्वास्थ्य बीमा लाभ दिया जा रहा है। अभी तक प्रदेश में इस योजना के तहत 15.5 लाख परिवार पात्र हैं। उन्होंने इस योजना में राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा योजना के पात्र परिवारों को शामिल करने को भी मंजूरी दे दी। इस योजना के लागू होने के बाद हरियाणा में 27 लाख परिवार इसके तहत लाभान्वित होंगे। सभी को परिवार पहचान पत्र के साथ लिंक करने के बाद कार्ड जारी किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा उद्देश्य व्यवस्था में निरंतर सुधार करते हुए पात्र व्यक्तियों को लाभ पहुंचाना है, इसलिए इस योजना के सभी पात्रों का डेटा परिवार पहचान पत्र के साथ लिंक किया जाएगा ताकि सही और पात्र को ही लाभ मिले। उन्होंने कहा कि इसके लिए निरंतर निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।

वहीं दूसरी तरफ, पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराने पर वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर का धन्यवाद ज्ञापित किया। नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में आयोजित ‘आपका आभार’ कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आभार व्यक्त किया गया। हरियाणा के मुख्यमंत्री के साथ उनके मीडिया सलाहकार अमित आर्य भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम के दौरान शाल ओढ़ाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष अनूप चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री की यह कदम अन्य प्रदेशों के लिए एक उदाहरण है। राष्ट्रीय महासचिव नरेंद्र भंडारी ने मुख्यमंत्री से गैरमान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए भी ऐसे कदम उठाने का आग्रह किया। गौरतलब है कि वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया ने प्रदेशो के मुख्य मंत्रियों को पत्रकारों के सुविध हेतु हाल के दिनों में ज्ञापन दिया था। इस पहल से पत्रकार जगत में उत्साह का माहौल है।  

इस दौरान जनता टीवी एग्जिक्यूटिव एडिटर प्रदीप डबास, इंडिया न्यूज हरियाणा के एग्जिक्यूटिव एडिटर राजन अग्रवाल, दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ ब्रजेंद्र बंसल, हरियाणा एक्सप्रेस के एडिटर-इन-चीफ मुकेश राजपूत और न्यूज18 हरियाणा के ब्यूरो चीफ धर्मवीर शर्मा समेत कई अन्य पत्रकारगण मौजूद रहे।

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ZEE5 में इस बड़े पद से अलग होकर रेली रेबेल्लो ने शुरू किया नया सफर

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लि. (ZEEL) के स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) के मार्केटिंग हेड (SVOD & Music) रेली रेबेल्लो (Reilly Rebello) ने यहां से बाय बोल दिया है।

Last Modified:
Thursday, 29 July, 2021
Reilly Rebello

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लि. (ZEEL) के स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) के मार्केटिंग हेड (SVOD & Music) रेली रेबेल्लो (Reilly Rebello) ने यहां से बाय बोल दिया है। उन्होंने ‘Zoey's All Natural’ में बतौर को-फाउंडर नई पारी शुरू की है। रेबेल्लो ने ZEE5 को अलविदा कहने की घोषणा एक लिंक्डइन पोस्ट में की है।

उन्होंने लिखा है, ‘मैं Zoey's All Natural में सह-संस्थापक के रूप में शामिल हुआ हूं और लोगों को प्राकृतिक और पौष्टिक खाने की आदत डालने और उन्हें इस बारे में जागरूक करने की दिशा में काम करूंगा। इसके अलावा मैं योग के अभ्यास के माध्यम से लोगों को खुशी खोजने में मदद करके योग सिखाने के अपने जुनून को भी आगे बढ़ाऊंगा।’

रेबेल्लो ने जनवरी 2019 में ZEE5 जॉइन किया था। इससे पहले वह आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। बता दें कि रेबेल्लो को 18 साल का पेशेवर अनुभव है, जिसमें से 14 साल उन्होंने मेनलाइन और डिजिटल एडवर्टाइजिंग में काम किया है। इसके अलावा वह एक प्रमुख ई-कॉमर्स वेंचर के सह-संस्थापक भी रहे हैं।  

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पवन खेड़ा ने बीजेपी पर साधा निशाना, कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर कही ये बात

गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी।

Last Modified:
Thursday, 29 July, 2021
Governance Now

भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा का कहना है कि पार्टी आरएसएस के ‘रिमोट कंट्रोल’ से चलती है। आरएसएस ही यह तय करता है कि देश का पीएम कौन होगा, फिर भी उनसे कोई सवाल नहीं पूछा जाता है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया, ‘अमित शाह, जेपी नड्डा और एलके आडवाणी किस तरह से बीजेपी के प्रेजिडेंट चुने गए? अमित शाह को किसने चुना? क्या वो वोटिंग के द्वारा पार्टी प्रेजिडेंट चुने गए? यदि आप अमित शाह को छोड़ भी दें तो क्या आरएसएस प्रमुख चुने गए या मोहन भागवत चुने गए?’

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में पवन खेड़ा का कहना है, ’बीजेपी का रिमोट कंट्रोल नागपुर में अपंजीकृत आरएसएस के हाथों में है, जो यह तय करता है कि देश का नेतृत्व कौन करेगा और उनसे किसी तरह का सवाल नहीं पूछा जाता है। लेकिन वे लोग 135 साल पुरानी लोकतांत्रिक पॉलिटिकल पार्टी पर सवाल उठाते हैं, जिसका अपना एक इतिहास है।’

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान कांग्रेस में नेतृत्व संकट को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में खेड़ा ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व का कोई संकट नहीं है। राहुल गांधी देश के एकमात्र नेता हैं जो मोदी से आमने-सामने बात कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने 2019 के चुनावों में हार की जिम्मेदारी लेने और पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का साहस दिखाया, जबकि यह सभी की सामूहिक जिम्मेदारी थी।

इस बातचीत के दौरान खेड़ा का यह भी कहना था कि कांग्रेस बहुत ही व्यवस्थित और अनुशासित पार्टी है। पार्टी में राज्यों के प्रभारी महासचिव और संगठन के प्रभारी महासचिव होते हैं। उन्होंने कहा कि बिना सिस्टम के कांग्रेस इतने सालों में न तो चुनाव जीत पाती और न ही सत्ता में होती।

भारत की विदेश नीति के बारे में खेड़ा का कहना था, ‘पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और कुछ नहीं बल्कि प्रचार कार्यक्रम  (diaspora events) हैं। आप इवेंट मैनेजमेंट के साथ विदेश नीति नहीं बना सकते। मोदी को मेगा इवेंट पसंद हैं। अगर इस तरह के कार्यक्रमों से मदद मिलती, तो क्या चीन हमारे देश में घुसपैठ करता? प्रधानमंत्री ने घुसपैठ की बात से इनकार किया। चीन से क्यों डरते हैं मोदी? वह चीन को क्लीन चिट देते हैं और कहते हैं कि उसने कोई घुसपैठ नहीं की।‘

खेड़ा ने कहा कि क्योंकि मोदी चीन से डरते हैं,  इसलिए उन्होंने पिछले साल दलाई लामा को उनके जन्मदिन पर बधाई भी नहीं दी थी और उससे एक साल पहले, उनकी सरकार ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता को सम्मानित करने के लिए दिल्ली में एक कार्यक्रम रद्द कर दिया था।

इसके साथ ही खेड़ा ने यह भी कहा कि चाहे कोई भी सरकार सत्ता में हो, विदेश नीति एक सतत प्रक्रिया है और घरेलू राजनीति में बदलाव से प्रभावित नहीं होती है। अगर एक प्रधानमंत्री ने कई देशों का दौरा करने, वहां कार्यक्रम करने और अपनी विदेश यात्राओं से घरेलू राजनीति को प्रभावित करने का फैसला किया, तो यह उनकी शैली है। खेड़ा का यह भी कहना था कि लोगों को अब मोदी की बयानबाजी की जरूरत नहीं है। भारत को अब बदलाव की जरूरत है।

यह पूछे जाने पर कि क्या भारत दिसंबर 2021 तक अपनी टीकाकरण की समय सीमा को पूरा कर लेगा? खेड़ा ने कहा, ‘इस समय सीमा में टीकाकरण पूरा करने के लिए सरकार को प्रतिदिन 86,50,000 टीकाकरण सुनिश्चित करना होगा और हर महीने 35 करोड़ टीके खरीदने होंगे। चूंकि फिलहाल हम इस आंकड़े की बराबरी करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए यह संभावना नहीं है कि सरकार इस समय सीमा में टीकाकरण पूरा कर लेगी।

पेगासस जासूसी मामले पर खेड़ा का कहना था कि अब तक सरकार ने पेगासस सॉफ्टवेयर के उपयोग से इनकार नहीं किया है। यदि ऐसा नहीं हुआ है तो सरकार को इस आशय का एक बयान देना चाहिए और जांच शुरू करानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों, सीबीआई निदेशक, सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ विपक्षी नेताओं, महिला पत्रकारों, नौकरशाहों के परिवार की महिला सदस्यों और यहां तक ​​​​कि आरएसएस नेताओं के फोन हैक होना एक गंभीर मुद्दा है। सरकार को एक बयान देना चाहिए कि उसने पेगासस को नहीं खरीदा है और राष्ट्रीय हित में इस मामले में जांच शुरू करनी चाहिए। प्रधानमंत्री चीन और इस्राइल के साथ खड़े हैं, लेकिन अपने देश के साथ नहीं। क्यों?’

संसद में हंगामे के बारे में खेड़ा का कहना था कि कांग्रेस 50 सांसदों वाली पार्टी है। सरकार किसानों के मुद्दों, पेगासस जासूसी कांड, कोविड और इससे हुए मौतों जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहती है। उन्होंने कहा, 'अगर वे संसदीय स्थायी समिति के मुद्दों पर चर्चा करने से दूर भागते हैं तो आप उनसे संसद सत्र चलाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? भाजपा संसद सत्र नहीं चलाना चाहती, क्योंकि उन्हें वह आईना दिखाया जाएगा, जिसे वह देखना नहीं चाहती।'

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पेगासस जासूसी मामले में वरिष्ठ पत्रकार ने खटखटाया SC का दरवाजा, किया ये अनुरोध

इजराइली स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल करके सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रतिष्ठित नागरिकों, नेताओं और पत्रकारों की कथित जासूसी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।

Last Modified:
Thursday, 29 July, 2021
SC45

इजराइली स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल करके सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रतिष्ठित नागरिकों, नेताओं और पत्रकारों की कथित जासूसी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दरअसल, वरिष्ठ पत्रकारों एन. राम और शशि कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि जासूसी किए जाने संबंधी खबरों की शीर्ष अदालत के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाशीध से स्वतंत्र जांच कराई जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस याचिका पर आगामी कुछ दिन में सुनवाई हो सकती है। याचिका में इस बात की जांच करने का अनुरोध किया गया है कि क्या पेगासस स्पाइवेयर के जरिये फोन को हैक कर एजेंसियों ने भारत में स्वतंत्र भाषण और असहमति को अभिव्यक्त करने से रोकने का प्रयास किया।

याचिका में केंद्र को यह बताने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि क्या सरकार या उसकी किसी एजेंसी ने पेगासस स्पाइवेयर के लिए लाइसेंस प्राप्त किया है और क्या उन्होंने इसका इस्तेमाल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निगरानी करने के लिए किया है।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि दुनियाभर के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों की जांच में पत्रकारों, वकीलों, मंत्रियों, विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत 142 से अधिक भारतीयों को पेगासस के जरिये निगरानी के संभावित लक्ष्यों के रूप में पहचाना गया है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि 'सिक्योरिटी लैब ऑफ एमनेस्टी इंटरनेशनल' ने निगरानी के लिए लक्ष्य बनाए गए व्यक्तियों के कई मोबाइल फोन के फोरेंसिक विश्लेषण के बाद पेगासस के जरिये सुरक्षा उल्लंघन किए जाने की पुष्टि की है।

याचिका में कहा गया है, सैन्य श्रेणी के स्पाइवेयर का उपयोग करके निगरानी निजता के उस अधिकार का उल्लंघन है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेदों 14 (कानून के समक्ष समानता), 19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 21 (जीवन की सुरक्षा एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के तहत मौलिक अधिकार माना है। इसमें कहा गया है कि पत्रकारों, डॉक्टरों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मंत्रियों और विपक्षी नेताओं के फोन को हैक करना संविधान के अनुच्छेद 19 (एक) (ए) के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन से गंभीर समझौता है।

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