पढ़िए, अपने इस्तीफे पर क्या बोले फेसबुक के CEO मार्क जुकरबर्ग

पद छोड़ देने के लिए लगातार बढ़ते दबाव के बीच फेसबुक के चेयरमैन मार्क जुकरबर्ग ने...

Last Modified:
Wednesday, 21 November, 2018
Zuckerberg

समाचार4मीडिया ब्यूरो  ।।

पद छोड़ देने के लिए लगातार बढ़ते दबाव के बीच फेसबुक के सीईओ (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने यह साफ कर दिया है कि इस्तीफा देने का उनका कोई इरादा नहीं है। अमेरिकी न्यूज चैनल ‘सीएनएन’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने मंगलवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए ‘फेसबुक’ छोड़ देने का समय नहीं है।   

गौरतलब है कि डेटा लीक समेत दूसरे विवादों की वजह से जुकरबर्ग पर निवेशकों की ओर से चेयरमैन का पद छोड़ने का दबाव बढ़ा है। सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक इन दिनों डेटा स्कैंडलों के चलते गहन जांच का सामना कर रही है।

पिछले बुधवार को न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) की रिपोर्ट में कहा गया था कि फेसबुक ने प्रतिद्वंदी कंपनियों के खिलाफ लिखने के लिए पीआर फर्म ‘डिफायनर्स’ को हायर किया था। इसके बाद जुकरबर्ग ने गुरुवार को ऐलान किया कि फेसबुक ने ‘डिफायनर्स’ से नाता तोड़ लिया है। इसके साथ फेसबुक के काम के बारे में उन्हें पता ही नहीं था।

ब्रिटिश अखबार ‘गॉर्जियन’ ने शनिवार को एक रिपोर्ट में जानकारी दी कि पीआर फर्म से जुड़े विवाद के बाद ‘फेसबुक’ के निवेशकों ने जकरबर्ग पर चेयरमैन पद छोड़ने का दबाव बढ़ा दिया है। फेसबुक के विवादों की वजह से कंपनी के शेयरधारकों को नुकसान हुआ है। पिछले 6 हफ्ते में शेयर 40% गिर गए हैं।

जुकरबर्ग ने इंटरव्यू में कहा, ‘मैं कंपनी चलाता हूं। यहां जो कुछ भी होता है, उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं। मुझे नहीं लगता, यह किसी खास पीआर कंपनी के बारे में है, बल्कि यह इस बारे में है कि हम कैसे काम करते हैं।’

हालांकि इस विवादों के चलते कंपनी की सीओओ शेरिल सैंडबर्ग के इस्तीफे की अटकलें भी लगाई जा रही थीं। लेकिन, जुकरबर्ग ने इंयरव्यू में शेरिल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 'शेरिल फेसबुक के लिए अहम हैं। वो कई बड़े मामलों को डील कर रही हैं। मुझे उम्मीद है कि हम अगले कई दशक तक साथ काम करते रहेंगे।'

अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने सोमवार को जानकारी दी थी कि इस साल मार्च में कैंब्रिज एनालिटिका (डेटा लीक) विवाद सामने आने के बाद जुकरबर्ग सीओओ शेरिल सैंडबर्ग से नाराज थे। उन्होंने कंपनी के विवादों और उनके सही तरीके से निपटारा नहीं करने के लिए शेरिल को जिम्मेदार ठहराया था। उसके बाद शेरिल को नौकरी की चिंता सताने लगी थी।

 

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'जागरण प्रकाशन' को मिली एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर

13 नवंबर 2019 से प्रभावी होगा कार्यकाल। पांच साल के लिए की गई है नियुक्ति

Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Jagran Prakashan

‘जागरण प्रकाशन लिमिटेड’ (Jagran Prakashan Limited) ने दिव्या रूपचंद करणी (Divya Rupchand Karani) को कंपनी की अतिरिक्त महिला स्वतंत्र निदेशक (additional woman independent director) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 13 नवंबर 2019 से प्रभावी होगी और पांच साल के लिए होगी। 27 सितंबर 2019 को कंपनी की 43वीं सालाना आम बैठक में अनीता नैय्यर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद करणी को यह पद दिया गया है। बताया जाता है कि करणी ने पदभार ग्रहण कर लिया है।  

बता दें कि करणी को साउथ ईस्ट एशिया, लदंन और एशिया पैसिफिक में विभिन्न एजेंसियों, मार्केटर्स और मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। इस दौरान वह ‘Trikaya Grey’, ‘O&M’, ‘MediaCom’, ‘Bates Asia’, Media Edge(TME) और MEC(Singapore) जैसी एजेंसियों के साथ काम कर चुकी हैं।

एक मार्केटर के रुप में उन्होंने चेयरमैन ऑफिस के मीडिया एडवाइजर के तौर पर ‘रिलायंस एडीए ग्रुप’ में जॉइन किया था और वहां से वर्ष 2009 में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में बिजनेस हेड (वेस्ट) की जिम्मेदारी संभाली थी। ‘डेट्सू इंडिया’ को जॉइन करने से पहले वह स्वतंत्र सलाहकार के रूप में मीडिया एजेंसियों और मीडिया बिजनेस से जुड़े दिग्गजों को परामर्श देने का काम कर रही थीं।

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नेटवर्क18 में इस बड़े पद से संगीता अय्यर का इस्तीफा

19 साल से ज्यादा के करियर में वह रेडियो, रिटेल और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं

Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Sangeetha Aiyer

देश के बड़े मीडिया समूहों में शामिल ‘नेटवर्क18’ (Network18) से संगीता अय्यर (Sangeetha Aiyer) ने इस्तीफा दे दिया है। यहां वह करीब दस साल से जुड़ी हुई थीं। इन दिनों वह ‘नेटवर्क18’ के डिजिटल बिजनेस की मार्केटिंग हेड के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं। ‘नेटवर्क18’ के डिजिटल ब्रैंड जैसे-‘फर्स्टपोस्ट’, ‘मनीकंट्रोल’, ‘सीएनबीसीटीवी18’ आदि की मार्केटिंग से जुड़े सभी कामों की कमान उन्हीं के पास थी।

संगीता अय्यर के अगले कदम के बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल सकी है। बता दें कि संगीता को 19 साल से ज्यादा का अनुभव है। इस दौरान वह रेडियो, रिटेल और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। पूर्व में वह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘रिलायंस मीडिया नेटवर्क’ और ‘स्टार नेटवर्क’ जैसे संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।

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सर्वे में सामने आई पत्रकारों की सेक्स लाइफ से जुड़ी ये ‘सच्चाई’

अच्छी सेक्स लाइफ के लिए साफ हवा, स्वच्छ भोजन और अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ खेतीबाड़ी भी अच्छा विकल्प हो सकता है

Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Sex Life

लंदन में पिछले दिनों हुए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि यदि आप अच्छी सेक्स लाइफ को एंजॉय करना चाहते हैं तो उसके लिए साफ हवा, स्वच्छ भोजन और अच्छे स्वास्थ्य के अलावा खेतीबाड़ी भी अच्छा विकल्प हो सकता है। सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि किसी अन्य प्रोफेशन से जुड़े लोगों की तुलना में किसान अपनी सेक्स लाइफ को ज्यादा बेहतर तरीके से एंजॉय करते हैं।

दूसरी ओर पत्रकारिता से जुड़े लोग इस मामले में सबसे पीछे हैं। इस सर्वे के अनुसार, अधिकांश पत्रकारों का कहना था कि वे महीने में सिर्फ एक बार सेक्स लाइफ को एंजॉय करते हैं। सर्वे में शामिल वकीलों ने भी अपनी बेडरूम लाइफ को ज्यादा बेहतर नहीं बताया, लेकिन वे इस लिस्ट में पत्रकारों से आगे हैं।

 ‘Mirror.co.uk’ की रिपोर्ट के अनुसार, लाइफ स्टाइल कंपनी ‘Lelo UK’ द्वारा 2000 महिला-पुरुषों के बीच कराए गए इस सर्वे में खुलासा हुआ कि किसानों ने सबसे ज्यादा सेक्स लाइफ को एंजॉय किया है। 33 प्रतिशत से ज्यादा किसानों ने दिन में कम से कम एक बार सेक्स लाइफ एंजॉय करने का दावा किया।

सबसे ज्यादा सेक्स लाइफ को एंजॉय करने वालों की लिस्ट में जहां किसान सबसे आगे थे, वहीं 21 प्रतिशत आर्किटेक्ट और 17 प्रतिशत हेयर ड्रेसर्स ने भी रोजाना सेक्स लाइफ एंजॉय करने का दावा किया। पत्रकारों की बात करें तो उन्होंने सबसे कम सेक्स लाइफ एंजॉय करने की बात कही।

‘Lelo UK’ से जुड़ीं एक्सपर्ट केट मोयले (Kate Moyle) का कहना है, ‘हमारी नौकरी किस तरह की है और काम करने के घंटे कैसे हैं, कार्यस्थल का माहौल कैसा है, इसका प्रभाव न सिर्फ हमारी सेक्स लाइफ बल्कि हमारे पूरे जीवन पर पड़ता है। हमारी दिनचर्या कैसी है, इसका प्रभाव भी हमारी फिटनेस और एनर्जी पर पड़ता है।’

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550वें प्रकाश पर्व पर दर्शकों को पीटीसी नेटवर्क का बड़ा तोहफा

‘जियो टीवी’ और ‘पीटीसी प्ले एप’ पर इस सुविधा के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा

Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
PTC Network

गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर ‘पीटीसी नेटवर्क’ (PTC Network) ने दर्शकों को बड़ा तोहफा दिया है। दरअसल, सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब से सुबह-शाम गुरबाणी का सीधा प्रसारण दिखा रहे नेटवर्क ने 'वर्चुअल रिएलटी 360 डिग्री लाइव टेलिकास्ट’ की शुरुआत की है। शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल और पीटीसी नेटवर्क के मैनेजिंग डायरेक्टर रबिन्दर नारायण ने इसका शुभारंभ सुल्तानपुर लोधी में किया।

रबिन्द्र नारायण ने बताया कि यह दुनिया का पहला रोजाना ‘वर्चुअल रिएलटी 360 डिग्री लाइव टेलिकास्ट’ है। इस तकनीक का फायदा यह है कि श्री दरबार साहिब से गुरबाणी का लाइव प्रसारण देखने वालों को ऐसा लगेगा कि वह वास्तव में श्री दरबार साहिब के अंदर बैठकर गुरबाणी का आनंद ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ‘जियो टीवी’ और ‘पीटीसी प्ले एप’ पर इस सुविधा के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। इस तकनीक का लाभ लेने के लिए दर्शकों को अपनी आंखों पर ‘वीआर गेअर’ नामक उपकरण पहनने के बाद मोबाइल पर यह सर्विस शुरू करनी पड़ेगी। इसके बाद ऐसा लगेगा कि सच में ही मौके पर मौजूद रहकर गुरबाणी सुन रहे हैं।

रबिन्द्र नारायण का कहना था कि हालांकि दर्शक कई दशकों से पीटीसी नेटवर्क के माध्यम से दरबार साहिब से गुरबाणी के लाइव टेलिकास्ट का आनंद लेते आ रहे हैं, लेकिन इस तकनीक के माध्यम से उन्हें ऐसा लगेगा कि वह कहीं दूर नहीं हैं, बल्कि वहीं बैठे हैं।

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उदय शंकर ने बताई वजह, क्यों करनी पड़ी पहले से आधी सैलरी पर नौकरी

‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्चर’ में बताईं अपने जीवन से जुड़ी कई घटनाएं

Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
Uday Shankar

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ (The Walt Disney Company, Asia Pacific) के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने मुंबई में 11 नवंबर को ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्‍चर’ (AAAI-Subhas Ghosal Memorial Lecture) 2019 को संबोधित किया।  

कार्यक्रम का आयोजन ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI)  और सुभाष घोषाल फाउंडेशन ने मिलकर किया था। मीडिया, एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग की दुनिया की जानी-मानी हस्तियों के बीच उदय शंकर ने मीडिया इंडस्ट्री में अपने करियर के साथ ही बिजनेस चलाने के दौरान सामने आईं चुनौतियों का भी जिक्र किया।

उदय शंकर का कहना था, ‘करीब तीन दशक पहले जब मैंने एक अखबार में बतौर पत्रकार अपना करियर शुरू किया था, तो उस समय मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि किसी दिन मुझे इस मंच पर इतने प्रतिष्ठित लोगों को संबोधित करने का मौका मिलेगा। तब मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मैं आजीविका के लिए सिर्फ यह शुरुआत नहीं कर रहा हूं, बल्कि मैं ऐसे भारत की तलाश शुरू करने जा रहा हूं, जिससे मुझे इस देश को एक नए रूप में जानने का मौका मिलेगा, जो शायद किसी और प्रोफेशन में संभव नहीं होता। करियर के शुरुआती दौर में बतौर पत्रकार और बाद में एक मीडिया प्रोफेशनल के रूप में सक्रिय उदय शंकर ने बताया कि कैसे उन्हें इस देश को गहराई से जानने-समझने का मौका मिला।

इस दौरान उदय शंकर ने यहां तक के सफर में अपने जीवन में घटी कुछ घटनाओं के बारे में भी बताया। एक घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह उन दिनों की बात है, जब उन्हें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को जॉइन किए मुश्किल से कुछ हफ्ते ही हुए थे। एक दिन संपादक ने उनसे सरकार द्वारा चलाई जा रही टीकाकरण योजना का रिव्यू करने के लिए कहा। लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था।  उदय शंकर को इस बात की पड़ताल करनी थी कि सरकार की इस टीकाकरण योजना का आम लोगों की जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।     

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस समय मैंने सोचा था कि पत्रकारिता में करियर के दौरान मुझे बड़े-बड़े लोगों से जुड़ने का मौका मिलेगा, लेकिन यहां तो मेरे संपादक के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।’ शंकर ने बताया कि टीकाकरण अभियान की वास्तविकता जानने के लिए उन्हें बिहार के पूर्णिया में भेजा गया, जहां उन्होंने अत्यधिक गरीबी में रह रहे लोगों के बीच एक हफ्ता गुजारा और वहां उन्होंने जो देखा, उससे दुनिया को देखने का उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल गया।

उन्होंने कहा, ‘वहां मैंने देखा कि दिल्ली में मैंने एक रेस्टोरेंट में खाने के लिए जितना भुगतान किया, उससे कम कीमत में कैसे एक वैक्सीन किसी बच्चे अथवा किसी परिवार का भविष्य बचा सकती है। वहां के लोग बहुत गरीब थे और ऐसे एक-दो परिवार नहीं थे, बल्कि मैंने ऐसे कई गांव देखे। मैंने देखा कि उन ग्रामीणों तक वैक्सीन पहुंचाना कितना मुश्किल था, जिससे किसी की जिंदगी बदल सकती थी। यहां मुझे ऐसे कुछ समर्पित स्वास्थ्य कर्मी भी दिखे, जो निस्वार्थ भाव से काम कर रहे थे। जेएनयू में पढ़ने वाले मेरे जैसे फायरब्रैंड स्टूडेंट और एक्टिविस्ट के लिए यहां के हालात बिल्कुल नई बात थी।’ उदय शंकर ने बताया कि इस अनुभव ने देश को देखने का उनका नजिरया ही बदल दिया।

एक और घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह बात करीब 20 साल पुरानी है, जब वह ‘आजतक’ में थे। उदय शंकर के अनुसार, ‘हमने नोएडा में एक स्कूल बस के एक्सीडेंट के बारे में न्यूज ब्रेक की थी। यह जानकारी थोड़ी सही थी। दरअसल, एक्सीडेंट की बात तो सही थी, लेकिन हमने जिस स्कूल का जिक्र किया था, उसकी कई ब्रांच थीं और हमने गलत ब्रांच का जिक्र कर दिया था। हमने अपनी गलती पकड़ भी ली और इसे 20-30 मिनट में ठीक कर दिया। इस पूरे दिन मुझे एक महिला के फोन आते रहे। मेरी सहायक ने मुझे बताया कि वह महिला मुझसे बात करने के लिए काफी इच्छुक थी। कई घंटे बाद मैंने उस महिला की कॉल का जवाब दिया। उसने मुझे धन्यवाद दिया और काफी अच्छे से बात की।

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस महिला ने मुझे जो बात बताई, वह मुझे अभी भी परेशान करती है। वह महिला एक सैनिक की विधवा थी, जिसके दोनों बच्चे उसी स्कूल में पढ़ते थे, जिसकी बस के एक्सीडेंट के बारे में हमसे गलती हुई थी। वह एक्सीडेंट उस महिला के घर के पास ही हुआ था। महिला ने मुझे बताया कि कारगिल में पति की शहादत के बाद से उसे हमेशा कहीं न कहीं कुछ ऐसा घटित होने का डर लगा रहता था, जिससे उसकी बची हुई दुनिया छिन सकती थी। उसने बताया कि वह अपने घर पर हमेशा ‘आजतक’ चैनल को चलाकर रखती थी, क्योंकि उसका मानना था कि कहीं भी कुछ होने पर  चैनल के माध्यम से उसे हमेशा जानकारी मिलती रहेगी।’

उदय शंकर का कहना था, ‘महिला ने मुझे बताया कि एक पल के लिए उसे लगा कि आजतक ने उसकी दुनिया उजाड़ दी है। कुछ मिनट के लिए उसे लगा कि इस दुनिया में जिस चैनल पर वह सबसे ज्यादा भरोसा करती है, उसी ने उसकी दुनिया को खराब कर दिया। महिला का यह भी कहना था कि उसे लगा था कि यह चैनल हमेशा भरोसेमंद और सही जानकारी देने वाला है, लेकिन इस गलती से हमने उसका यह भरोसा तोड़ दिया और वह दोबारा हम पर कभी भरोसा नहीं कर सकेगी। थोड़ी देर के लिए तो मुझे लगा कि वह महिला ओवररिएक्ट कर रही है, आखिर हम भी तो इंसान हैं, हमसे भी तो गलती हो सकती है, लेकिन फिर मेरी समझ में आ गया कि आखिर उसके कहने का क्या मतलब था।‘

‘उस महिला ने मुझे अपने बिजनेस में विश्वास और क्रेडिबिलिटी के बारे में एक बहुमूल्य सबक दे दिया था। हालांकि, वह न्यूज के बारे में बात कर रही थी, लेकिन एंटरटेनमेंट और एडवर्टाइजिंग के साथ-साथ हमारे बिजनेस का कोई अन्य पार्ट भी इससे अलग नहीं है। पिछले बीस सालों से उसके शब्द आज भी मेरे कानों में गूंज रहे हैं और आज भी उसकी आवाज मुझे सतर्क करती रहती है। मुझे लगता है कि क्या मैं अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने अथवा अपने निजी हित के लिए किसी के भरोसे को तोड़ रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि मैं उसे दोबारा निराश नहीं करूंगा।‘   

यही नहीं, इस कार्यक्रम के दौरान उदय शंकर ने उस घटना के बारे में भी बताया, जिसने उनकी जिंदगी ही बदलकर रख दी। उदय शंकर ने बताया, ‘अखबार में रिपोर्टर होने के बाद भी मैं टीवी में काम करने के लिए इच्छुक था। वर्ष 1991 में CNN पर खाड़ी युद्ध का प्रसारण किया जा रहा था। मैं भी टीवी न्यूज के लिए काम करना चाहता था। एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि इस बारे में अवसर मिलने के बारे में सोचने के बजाय मैं इसके लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाता हूं। मैं उस समय अच्छी तरह से सैटल्ड हो चुका था और ‘Down To Earth’  नामक एक पब्लिकेशन में सीनियर एडिटर था, लेकिन मेरी पत्नी के शब्दों ने मुझ पर ऐसा प्रभाव डाला कि अगले दिन मैंने नौकरी छोड़ दी।’

उदय शंकर का यह भी कहना था कि छह महीने तक उन्हें कहीं से रेगुलर इनकम नहीं हुई और पत्नी की कमाई से किसी तरह घर का खर्च चला। काफी भटकने के बाद उन्हें ‘जी’ (Zee)  द्वारा लॉन्च किए जा रहे एक न्यूज बुलेटिन में नौकरी मिली, लेकिन वहां एक अलग तरह की समस्या हो गई। पहले के मुकाबले उनकी सैलरी में आधी से ज्यादा कमी हो गई थी। उदय शंकर के अनुसार, ‘एक पत्रकार की सैलरी वैसे भी ज्यादा नहीं थी, लेकिन पचास प्रतिशत की कटौती तो बेहद कम थी। लेकिन मैंने वहां पर काम किया। इसके बाद करीब पांच साल तक तमाम आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ा। इसके बाद ‘आजतक’ आया और स्थिति में भी काफी सुधार हुआ।

उदय शंकर का कहना था, ‘संघर्ष के इस दौर में मुझे पर्सनल और प्रोफेशनल तौर पर काफी कुछ सीखने को मिला। हालांकि, मैंने जो सबसे अच्छा सबक सीखा, वह है कि हमेशा अपने अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए, अपने दिल की माननी चाहिए और परिणामों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए, जब आपको पता हो कि आप सही कर रहे हैं। मैंने तब से हमेशा इन सबक का पालन किया है और यह मेरे लिए काफी अच्छा भी रहा है।’

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कुछ यूं वरिष्ठ पत्रकारों के चेहरे पर मुस्कान लाएगा जर्नलिस्ट वेलफेयर बोर्ड

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारिता की पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी किया जाएगा सम्मानित

Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
Journalist

‘नेशनल जर्नलिस्ट वेलफेयर बोर्ड’ (National Journalist Welfare Board) इस साल 28 वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन देगा। 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर इन पत्रकारों को पेंशन दी जाएगी। इस मौके पर ओडिशा में भुवनेश्वर स्थित जयदेव भवन में ‘दूरदर्शन’, ‘ऑल इंडिया रेडियो’, ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ और ‘डीएवीपी’ के सहयोग से बोर्ड के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

‘नेशनल जर्नलिस्ट वेलफेयर बोर्ड’ के प्रेजिडेंट प्रदोष पटनायक के अनुसार, इस मौके पर राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार को ‘उत्कल संवादिका रत्न’ (Utkal Sambadika Ratna) और राष्ट्रीय स्तर पर सात अखबारों के संपादकों को ‘राष्ट्रीय संवादिका गौरव’ (Rashtriya Sambadika Gourav) अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।

यही नहीं, पत्रकारिता की पढ़ाई में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने के लिए ‘उत्कल यूनिवर्सिटी’ की एमजे की छात्रा पद्मावती कुंडू को ‘रबि नारायण मोहंती मेमोरियल अवॉर्ड’ (Rabi Naryan Mohanty Memorial Award) प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा ‘‘संस्कृति यूनिवर्सिटी’ की छात्रा कबिता कुमारी दास को ‘गोपाल मिश्रा मेमोरियल अवॉर्ड’ (Gopal Mishra Memorial Award), ‘बरहामपुर यूनिवर्सिटी’ की छात्रा सोहिनी बिस्वाल को ‘बारेंद्र ढल मेमोरियल अवॉर्ड’ (Barendra Dhal Memorial Award), आईआईएमसी (ढेंकानाल) के छात्र आलोक चंद्र बारिक को ‘दिलीप सत्पथी मेमोरियल अवॉर्ड’ (Dilip Satapathy Memorial Award), रावेनशॉ यूनिवर्सिटी की छात्रा बिदुषी रॉय को ‘रामहरी मिश्रा मेमोरियल अवॉर्ड’ (Ramahari Mishra Memorial Award) से सम्मानित किया जाएगा।

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पत्रकार की आंखों में मिर्ची पाउडर झोंका, फिर किया ये काम

दो बदमाशों ने दिया वारदात को अंजाम, पीड़ित पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर शुरू की बदमाशों की तलाश

Last Modified:
Saturday, 09 November, 2019
Crime

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ऑफिस से घर लौट रहे पत्रकार की आंखों में मिर्ची पाउडर डालकर लूटपाट का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि बदमाश पत्रकार का मोबाइल व सामान लेकर फरार हो गए बिरकोना निवासी विनोद श्रीवास शहर के एक अखबार में पत्रकार हैं। गुरुवार की रात करीब 11.45 बजे वह अखबार के दफ्तर से घर लौट रहे थे।

रास्ते में अशोक नगर से 100 मीटर आगे बिरकोना मार्ग पर दो बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और आंखों में मिर्ची पाउडर डाल दिया। दोनों बदमाश इसके बाद विनोद श्रीवास की जेब और बैग में से मोबाइल व अन्य सामान लूटकर फरार हो गए। विनोद ने अगले दिन सुबह पुलिस को अपने साथ हुई लूट की जानकारी दी। विनोद की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है।

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सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार श्रीनाथ रेड्डी को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

चार दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं श्रीनाथ रेड्डी

Last Modified:
Friday, 08 November, 2019
Srinath Reddy

वरिष्ठ पत्रकार श्रीनाथ रेड्डी को ‘आंध्र प्रदेश प्रेस अकादमी’ (APPA) का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इस बारे में आंध्र प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दिए हैं। आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के रहने वाले रेड्डी चार दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

वह जल्द ही अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।  रेड्डी ने वर्ष 1978 में 'आंध्रप्रभा' से पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत की था। इसके बाद उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस और साक्षी अखबार में भी काम किया। कड़पा जिले में कार्य करने के दौरान रायलसीमा के पिछड़ेपन को उजागर करते हुए उनके द्वारा लिखे गए कॉलम 'सेवन रोड जंक्शन'  को काफी लोकप्रिय मिली थी।

रेड्डी आंध्र प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट संघ (एपीयूडब्ल्यूजे) के कड़पा जिले के अध्यक्ष पद पर 24 साल तक अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके बाद वह इसके प्रदेश सचिव बने थे।

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दैनिक भास्कर के पत्रकार व भाई पर बदमाशों का हमला, किया बुरा हाल

ऑफिस के बाहर दिया वारदात को अंजाम, दो हमलावर पकड़े गए, अन्य हमलावरों की तलाश में जुटी है पुलिस

Last Modified:
Friday, 08 November, 2019
Attack on Journalist

हरियाणा के पंचकूला में दैनिक भास्कर के पत्रकार अमित शर्मा और उनके चचेरे भाई दीपक शर्मा पर कुछ बदमाशों ने हमला कर दिया। हमलावरों ने गुरुवार को सेक्टर 16 स्थित अखबार के दफ्तर के बाहर इस वारदात को अंजाम दिया। बताया जाता है कि करीब छह की संख्या में आए हमलावरों ने हाथों में डंडे, रॉड, पिस्टल व धारदार हथियार ले रखे थे। हमले में दीपक के गंभीर चोट आई हैं, जबकि अमित के बायें हाथ में फ्रैक्चर हो गया है।

पुलिस के अनुसार, गुरुवार की शाम करीब सात बजे अमित अपने ऑफिस में काम कर रहे थे। तभी दो लोग उनके पास पहुंचे और कुछ बातचीत करने की इच्छा जताई। यह सुनकर अमित जब नीचे आए तो दोनों व्यक्तियों ने उनके साथ किसी मुद्दे पर बहस शुरू कर दी और आक्रामक हो गए।

कुछ अनहोनी की आशंका होने पर अमित ने अपने छोटे चचेरे भाई दीपक को मौके पर बुला लिया। जब दीपक वहां पहुंचा तो उन लोगों ने उसके साथ धक्का-मुक्की कर दी। अमित ने जब दीपक को बचाने का प्रयास किया तो उन लोगों ने पास ही गाड़ी में बैठे अपने चार अन्य साथियों को बुला लिया और मारपीट शुरू कर दी। शोरशराबा सुनकर आसपास मौजूद दुकानदार घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। इस बीच दोनों भाइयों ने दो हमलावरों को दबोच लिया, जबकि अन्य चार अपनी गाड़ी मौके पर छोड़कर फरार हो गए।

दोनों हमलावरों को पुलिस को सौंप दिया गया है। पकड़े गए आरोपितों की पहचान रवि और राम के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि पैसों के किसी मामले को लेकर हमलावर पटियाला से आए थे। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर बाकी फरार चार अन्य हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है।

बता दें कि अमित शर्मा उन तीन पत्रकारों में शामिल हैं, जिन्हें पंचकूला डेरा हिंसा के बाद पुलिस सिक्योरिटी दी गई थी। पहले उनकी सुरक्षा में हरियाणा पुलिस के दो जवान तैनात थे, लेकिन बाद में यह सुरक्षा वापस लेकर एक जवान उनकी सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था। गुरुवार को अमित पर जब यह हमला हुआ, उस समय सुरक्षाकर्मी उनके साथ मौजूद नहीं था।

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पुलिस मुख्यालय के पास महिला पत्रकार के साथ हुई ये वारदात

घटना के दौरान सड़क पार कर पैदल ही अपने ऑफिस जा रही थी यह महिला पत्रकार

Last Modified:
Friday, 08 November, 2019
Crime

दिल्ली में पुलिस मुख्यालय से महज 50 मीटर दूर एक महिला पत्रकार से बाइक सवार दो बदमाशों ने मोबाइल झपट लिया। वारदात के दौरान ‘नवभारत टाइम्स’ की यह पत्रकार अपने ऑफिस जा रही थी। महिला पत्रकार के अनुसार, बाइक सवार दोनों बदमाशों ने जैकेट और हेलमेट पहना हुआ था। शहीदी पार्क के पास पुलिस पिकेट होने के बावजूद वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों बदमाश फरार होने में कामयाब हो गए।

पुलिस को दिए बयान में महिला पत्रकार ने बताया कि सड़क पार करने के बाद वह बहादुर शाह जफर मार्ग पर इंडियन एक्सप्रेस बिल्डिंग स्थित अपने ऑफिस जा रही थी। उसने अपना मोबाइल हाथ में पकड़ा हुआ था, तभी दो बदमाश तेजी से आए और उसका फोन झपटकर ले गए। महिला पत्रकार का कहना था कि उसने यह मोबाइल कुछ दिन पूर्व ही खरीदा था।

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