भारत बंद को लेकर संपादकों के बोल...

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए एससी-एसटी एक्‍ट में...

Last Modified:
Thursday, 06 September, 2018

समाचार4मीडिया ब्‍यूरो।। 
केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए एससी-एसटी एक्‍ट में संशोधन कर मूलस्वरूप में बहाल करने पर गुरुवार को देशभर में सवर्ण वर्ग ने विरोधस्‍वरूप भारत बंद का आह्वान किया था। देश में कई जगह हिंसक प्रदर्शन भी हुए। इस संवेदनशील मुद्दे पर देश के अनुभवी संपादकों के नजरिए को हमने कुछ यूं जाना...

कानून में बदलाव संसद में बहस के बाद हो :

आलोक मेहता, वरिष्‍ठ पत्रकार

किसी भी मसले पर संसद को कानून बनाने का अधिकार है। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट उसमें आवश्‍यक व्‍यवस्‍था देता है। लेकिन गठबंधन की राजनीति का फायदा उठाने के लिए यदि राजनीतिक दल इसमें किसी तरह का बदलाव करते हैं, तो यह उचित नहीं है।

दरअसल, जातिगत वोटों को लुभाने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा समय-समय पर इस तरह का काम किया जाता है जो बिल्‍कुल गलत है और मेरा मानना है कि राजनीतिक दलों को इस तरह की स्थिति से बचना चाहिए।

किसी भी अहम मसले पर कानून में इस तरह बदलाव नहीं करना चाहिए जिससे समाज में कटुता और वैमनस्‍यता पैदा हो, बल्कि इसके लिए संसद में उचित बहस होनी चाहिए। राजनीतिक दलों को कोई भी निर्णय सामाजिक हित में लेना चाहिए।

रही बात भारत बंद की तो इस दौरान विभिन्‍न जातिगत संगठन उभरकर सामने आए हैं और राजनीतिक दल ही उन्‍हें हवा दे रहे हैं। बंद के दौरान ऐसा माहौल नहीं बनाना चाहिए, जिससे हिंसा को बढ़ावा मिले।

मेरी नजर में विभिन्‍न जरूरी मुद्दों से ध्‍यान भटकाने के लिए अथवा अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए कुछ राजनीतिक दल इस तरह के माहौल को हवा देते हैं, जो बिल्‍कुल ठीक नहीं है।

प्रजातांत्रिक बहस होनी चाहिए, हिंसा नहीं :

अभिज्ञान प्रकाश, कंसल्टिंग एडिटरएनडीटीवी समूह

यह प्रजातंत्र है और इसमें विरोध की पूरी आजादी है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था में बंद की पारंपरिक जगह है और यह अब से नहीं बल्कि पुराने समय से ही चला आ रहा है। लेकिन मेरा मानना है कि बंद के दौरान यह ध्‍यान रखना चाहिए कि किसी भी तरह से सार्वजनिक जीवन बहुत ज्‍यादा प्रभावित न हो। इस दौरान मारपीट न हो, गुंडागर्दी न हो, यानी विरोध और बंद के नाम पर असामाजिक तत्‍वों को अपनी मनमर्जी करने की छूट नहीं मिलनी चाहिए।

रही बात एससी-एसटी मामले को लेकर भारत बंद की तो यह मामला व्‍यवस्‍था से जुड़ा हुआ है। इसके लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। संसद में इस मुद्दे पर प्रजातांत्रिक बहस होनी चाहिए। मैं फिर कहूंगा कि विरोध करना गलत नहीं है लेकिन उसमें हिंसा का समावेश नहीं होना चाहिए।

किसानों का आंदोलन ज्यादा अहम है:

राजेश बादल, वरिष्‍ठ पत्रकार

लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है। चुनावी साल में जो भी राजनीतिक व सार्वजनिक गतिविधियां होती हैं, जिनमें राजनेता अथवा जनप्रतिनिधि शामिल होते हैं, वे सब राजनीति से प्रेरित होती हैं।

यह काफी दुर्भाग्‍यपूर्ण है और यह नहीं होना चाहिए। हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली में इसका असर दिखने लगा है। आज जो यह भारत बंद किया गया है, इसके मुकाबले विभिन्‍न राज्‍यों में चल रहा किसानों और मजदूरों का आंदोलन कमतर नहीं है। मेरी नजर में किसानों और मजदूरों का आंदोलन ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है।

दरअसल, एससी-एसटी मामले से हमारी न्‍यायिक प्रक्रिया भी जुड़ी हुई है। इसमें लंबा समय लग सकता है। सरकार इसमें त्‍वरित निर्णय नहीं ले सकती है। लेकिन यदि किसानों और मजदूरों का आंदोलन लंबा चला तो सरकार को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मेरा मानना है कि सरकार इस समय किसानों और मजदूरों का विरोध मोल लेने की स्थिति में नहीं है। मेरी नजर में यह सरकार के लिए परीक्षा की घड़ी है कि वह इनका विरोध कब तक सहन कर सकती है।  

शाहबानो केस की तरह हुई मिसहैंडलिंग :

विनोद अग्निहोत्री, सलाहकार संपादक, अमर उजाला

आज देश जिस जातिगत ध्रुवीकरण के दौर से गुजर रहा है, वह देश के भविष्‍य के लिए काफी खतरनाक है। जातियों के बीच विभाजन रेखा बनाकर राजनीतिक दल सिर्फ अपना स्‍वार्थ सिद्ध करने में जुटे हुए हैं। इस तरह के प्रदर्शनों से जाति समूह एक तरह से देश की सरकार और व्‍यवस्‍था को अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं।

चाहे आरक्षण का मुद्दा हो या फिर एससी-एसटी एक्‍ट का मुद्दा हो, जरूरत है कि हमारे सभी राजनीतिक दलों के मुखिया आपस में बैठकर कोई सर्वमान्‍य हल निकालें। देश में बढ़ती बेरोजगारी इस तरह के सामाजिक असंतोष को जन्‍म दे रही है। ऐसे में बड़ी गंभीरता के साथ संवेदनशील मुद्दों से निपटना होगा।

जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसकी व्‍याख्‍या हुई, उसके बाद सरकार के एक्‍शन और पब्लिक के रिएक्‍शन का ये परिणाम है। मुझे याद है 1990 की मंडल से लेकर कमंडल वाली राजनीति का दौर, जब देश एक आग में झोंक दिया गया था। उसके बाद 2000 के साथ नई शताब्‍दी शुरू हुई। देश की नई पीढ़ी विकास की राजनीति की बात करने लगी। गुड गवर्नेंस चर्चा का विषय बना और आज फिर देश उसी भयानक मोड़ पर जाता हुआ दिख रहा है।

जिस तरह कांग्रेस सरकार ने शाहबानो केस की मिसहैंडलिंग की, उसी तरह वर्तमान सरकार ने एससी-एसटी एक्‍ट को लेकर बर्ताव किया है।    

भाजपा के दोहरे चरित्र का प्रमाण है ये :

सुभाष गताडे, राजनीतिक जानकार

मेरा मानना है कि यह एक तरह से राजनीतिक किस्‍म का आंदोलन है और मध्‍य प्रदेश व राजस्‍थान के चुनावों को ध्‍यान में रखते हुए ही इसकी रूपरेखा तैयार की गई है, क्‍योंकि अचानक ही इस तरह के आंदोलन की कोई जरूरत ही नहीं थी।

दरअसल, इन दिनों कांग्रेस और बसपा के गठबंधन  की बात चल रही है, जिसकी काट के लिए ही इस तरह का काम किया गया है। रही बात आज के भारत बंद की तो मध्‍य प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्‍सों को छोड़ दें तो देश में कहीं पर भी यह ज्‍यादा प्रभावी नहीं रहा है।

इसके अलावा इस मामले में भाजपा का दोहरा रवैया भी दिखाई देता है। जब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया था तब सरकार ने इसमें ज्‍यादा रुचि नहीं दिखाई और मजबूत पैरवी के लिए वहां न तो अटॉर्नी जनरल को भेजा और न ही सॉलिसिटर जनरल को। इसके विरोध में दो अप्रैल का आंदोलन भी होने दिया। तब सरकार यह दिखाना चाहती थी कि वह सवर्णों के साथ है। अब इस तरह का निर्णय लेकर उसने एससी-एसटी वर्ग को यह दिखाने की कोशिश की है कि सरकार उनके साथ है। मेरा मानना है कि इस तरह का दोहरा चरित्र भाजपा को उल्‍टा भी पड़ सकता है।

नहीं चलने वालीं इस तरह की चालें :

उमेश कुमार, मैनेजिंग डायरेक्‍टर, समाचार प्‍लस

आज का भारत बंद जवाब है उस सरकार को, जिसने इस देश के बहुसंख्‍यक वर्ग को नजरअंदाज करने की हिमाकत की है। आज की पीढ़ी भेदभाव और जातिवाद से दूर है, ऐसे में उन्‍हें जातियों के दलदल में फंसाने की ये कोशिश है। सरकार को समझना होगा कि उसकी इस तरह की चालें 2019 के तख्त तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध नहीं होंगी।

 अगर जनसंख्‍या की बात करें तो सवर्ण वर्ग इस देश में बहुत अहम भूमिका निभाता है, पर जिस हल्‍के तरीके से सरकार उसके साथ व्‍यवहार कर रही है, उसने आज इस वर्ग को सोचने, समझने और आंदोलन करने के लिए मजबूर कर दिया है।   

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राष्ट्रीय सहारा के कानपुर एडिशन को मिला नया रेजिडेंट एडिटर

जेश मिश्रा पहले से ही कानपुर यूनिट में कार्यरत हैं और ये पद उन्हें प्रमोशन के तौर पर मिला है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
Rastriya Sahara


सहारा मीडिया से आ रही खबर के मुताबिक अखबार के कानपुर संस्करण के नए रेजिडेंट एडिटर के तौर पर ब्रजेश मिश्रा को नियुक्त किया गया है। ब्रजेश मिश्रा पहले से ही कानपुर यूनिट में कार्यरत हैं और ये पद उन्हें प्रमोशन के तौर पर मिला है।  इस बावत राष्ट्रीय सहारा के समूह संपादक मनोज तोमन ने पत्र जारी किया है, जो हम आपके साथ नीचे शेयर कर रहे हैं।


 

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इस पत्रकार की तारीफ तो बनती ही है

असली पत्रकार स्थिति और उसकी गंभीरता को पल भर में समझ लेता है और टीवी9 के पत्रकार ने भी तुरंत भाप लिया

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019

नियम-कानून क्या केवल आम जनता के लिए है, यह सवाल अक्सर पूछा जाता है? और जब इस सवाल का कारण सामने मौजूद हो तो फिर एक पत्रकार को दूसरा अहम् सवाल दागने में देर नहीं करनी चाहिए। टीवी9 भारतवर्ष के मुजफ्फरपुर के पत्रकार रूपेश कुमार ने भी कुछ ऐसा ही किया। जब उन्होंने नेताजी को नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाते हुए देखा तो उनके रुतबे को दरकिनार करते हुए पूछ ही लिया कि ‘आप नियम से बड़े कैसे हो गए’?

मामला बिहार के मुजफ्फरपुर का है। यहां एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है। ऐसे में नेताओं से लेकर प्रशासन और मीडिया सभी व्यस्त हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन भी स्थिति का जायजा लेने मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल पहुंचे। उनके साथ-साथ नेताओं-कार्यकर्ताओं की भीड़ भी वहां पहुँच गई। कुछ देर के लिए अस्पताल, अस्पताल कम कोई सरकारी कार्यालय नज़र आने लगा। इस बीच टीवी9 भारतवर्ष के पत्रकार की नज़रें वहां मौजूद एक नेताजी पर गईं। दरअसल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन अस्पताल के जिस हिस्से में मरीजों से मिल रहे थे, वहां मीडिया के जाने पर पाबंदी लगाई गई थी। इसलिए रिपोर्टर ने जब कोई दूसरी खबर तलाशना शुरू किया, तो आईसीयू में बैठे नेताजी नज़र आ गए।

असली पत्रकार स्थिति और उसकी गंभीरता को पल भर में समझ लेता है और टीवी9 के पत्रकार ने भी तुरंत भाप लिया कि यह खबर वायरल हो सकती है। भाजपा के उक्त नेता आईसीयू के केबिन में नर्स की कुर्सी पर बैठे थे और नर्स पास में खड़ी हुई थी। इतना ही नहीं जहां मीडियाकर्मियों को अंदर जाने की मनाही थी वहां नेताजी जूतों के साथ बड़े इत्मिनान से आराम फरमा रहे थे। जबकि आईसीयू में दाखिल होने से पहले जूते-चप्पल बाहर ही उतारने होते हैं। रिपोर्टर ने अपने कैमरामैन को पीछे लिए और यह बोलते हुए सीधे नेताजी के सामने पहुंच गए कि ‘मीडिया को जहाँ अनुमति नहीं है, वहां नेताजी की पहुंच देखिये। यहां से जो जाता है वो जूते उतारकर जाता है, लेकिन नेताजी जूते पहनकर बैठे हैं।’ एकदम से कैमरा देखकर नेताजी सकपका गए। उन्हें समझ ही नहीं आया कि बोलना क्या है। जब रिपोर्टर ने पूछा कि मीडिया को यहाँ आने की मनाही है, तो आप यहाँ कैसे बैठे हैं, इस पर नेताजी ने कहा ‘मरीज देखने आये हैं।’ रिपोर्टर ने तुरंत दूसरा सवाल दागते हुए कहा कहा कि कौन है आपका मरीज, कितने नंबर पर है? नेताजी इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। इसके बाद जब उन्होंने देखा कि रिपोर्टर के सवाल ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं, तो उन्होंने सच्चाई स्वीकारते हुए कहा कि ‘हमारे नेता, अभिभावक यहां आये हुए हैं।’

सवाल-जवाब का सिलसिला यहीं नहीं रुका, टीवी9 भारतवर्ष के पत्रकार ने इस पर कहा ‘आपके नेता हर्षवर्द्धन जी यहां आये हुए हैं तो आप आईसीयू में जूते पहनकर बैठेंगे? नेताजी फिर निरुत्तर हो गए। हालांकि उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि ये आईसीयू नहीं है, बाहर है। इसके बाद वह सीधे दरवाजे तक पहुंचे और अपने जूते उतार दिए। रिपोर्टर ने वहां मौजूद अस्पताल कर्मी से भी बात की कि आखिर नेताजी को ऐसे कैसे प्रवेश करने दिया गया, लेकिन कोई सही जवाब नहीं मिल सका। जायज है, नेताओं के आगे भला क्या किसी की चल पाई है। वैसे, इस बेवाकी के लिए टीवी9 भारतवर्ष के पत्रकार की जितनी तारीफ की जाये कम है, क्योंकि आजकल पत्रकार भी नेताओं से सीधे लड़ाई मोल नहीं लेते।

आप इस पूरे घटनाक्रम का विडियो नीचे देख सकते हैं...

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जेल से नहीं छूट पाए नोएडा से गिरफ्तार ये 3 पत्रकार

एक न्यूज चैनल से गिरफ्तार तीन पत्रकारों की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
crime

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर विवादित शो का प्रसारण के करने के बाद नोएडा के एक न्यूज चैनल से गिरफ्तार तीन पत्रकारों की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है। 

उल्लेखनीय है कि न्यूज चैनल नेशन लाइव की एमडी इशिका सिहं, एमडी अनुज शुक्ला, और एंकर अंशुल ने जमानत के लिए अर्जी दी थी, पर शुक्रवार को कोर्ट में इस मसले की सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने अगली डेट मुकर्रर कर दी है। अब इन सबकी जमानत पर 18 जून यानी मंगलवार को सुनवाई की जाएगी। 

इस बावत बचाव पक्ष के वकील के.के.सिंह ने कहा कि जिला जज के अवकाश पर होने के चलते ये मामला एडीजे प्रथम के कोर्ट में भेजा गया था, पर वहां केसों की ज्यादा संख्या के चलते इस मामले को 18 जून की तारीख दी गई है। वैसे इस मामले में चैनल हेड अजय शाह अभी फरार चल रहे हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। 
 

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देश के इस राज्य में पत्रकारों पर हुए सबसे ज्यादा हमले, देखें आंकड़े

जिस तरह लगातार पत्रकारों के साथ मारपीट, सरकारी और पुलिसिया उत्पीड़न की खबरें आ रही है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
Journalist

जिस तरह लगातार पत्रकारों के साथ मारपीट, सरकारी और पुलिसिया उत्पीड़न की खबरें आ रही है। ऐसे में अगर आप देश के राज्यों के क्राइम रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की स्थिति काफी खराब है। 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो क आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि 2013 से लेकर अब तक पत्रकारों पर सबसे ज्यादा हमले उत्तर प्रदेश में ही हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि पत्रकारों पर हमले के 67 मामले यहां दर्ज किए गए हैं, 7 पत्रकारों की हत्या के मामले भी इसमें शामिल है। उत्तर प्रदेश के बाद नंबर आता है मध्य प्रदेश का। वहां पत्रकारों के साथ विवाद को लेकर 50 केस दर्ज है। तीसरे नंबर पर बिहार है, जहां पत्रकारों पर हमले के 22 केस दर्ज है। 

अगर पूरे देश की बात करें तो पत्रकारों पर हमले के 190 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं। उत्तर प्रदेश की बात करें तो 2017 में पत्रकारों पर 13 हमले पुलिसवालों ने किए है, ये भी एक चौंकाने वाला तथ्य है। वैसे 2014 में पत्रकारों पर हमले के 63 मामले दर्ज है। 
 

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PR प्रफेशनल्स, कंटेंट राइटर, विडियो एडिटर्स की नियुक्ति करेगा ये सरकारी विभाग

पब्लिक रिलेशंस के इस दौर में अब सरकारी विभाग भी अपनी छवि को बेहतर बनाने के लिए इस ओर रुख कर रहे हैं

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019

पब्लिक रिलेशंस के इस दौर में अब सरकारी विभाग भी अपनी छवि को बेहतर बनाने के लिए इस ओर रुख कर रहे हैं। बताया गया है कि अब रेलवे विभाग भी पीआर प्रेफेशनल्स के जरिए अपने प्रचार-प्रसार को तेज गति देगा। 

इनकी नियुक्ति के लिए गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है, साथ ही रेलवे मंत्रालय के साथ-साथ जोन स्तर पर भी इनकी नियुक्ति करेगा।  मिली जानकारी के मुताबिक, एक चीफ पीआरओ के साथ करीब सत्तर पीआर प्रफेशनल्स की टीम काम कर रही है। इस कवायद का उद्देश्य है कि रेलवे अपने ग्राहकों को अपनी सुविधाओं और सामाजिक कार्यों की सूचना पहुंचा सके। 

साथ है ये प्रफेशनल्स रेलवे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी मजबूती के साथ पेश करेंगे। रेलवे विभाग हर जोन में 17 ऐसे प्रफेशनल्स को रखेगा जो इस काम को करने में दक्ष हैं। कंटेंट राइटर, विडियो एडिटर, सोशल मीडिया एक्सपर्ट की नियुक्ति के लिए जोनवाइस दो करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। 

फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ये प्रफेशनल्स रेलवे को आम जनता से जोड़ते हुए उन्हें विभाग द्वारा दी जा रही सुविधायों से रोजाना अपडेट कराया करेंगे। हर जोन में एक डैशबोर्ड भी बनाया जाएगा, जिससे रेलवे की नई सुविधाओं और पहल का प्रचार-प्रसार होगा। 

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 हिन्दुस्तान के दिल्ली एडिशन में हुई मेट्रो एडिटर की नियुक्ति

11 साल से हिन्दुस्तान में कार्यरत गौरव को वरिष्ठ स्थानीय संपादक प्रताप सोमवंशी का खास माना जाता है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
HINDUSTAN

हिन्दुस्तान के दिल्ली एडिशन से एक बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के मुताबिक अब गौरव त्यागी को हिन्दुस्तान दिल्ली में मेट्रो एडिटर के पद पर प्रोन्नत किया गया है। 

11 साल से हिन्दुस्तान में कार्यरत गौरव को दिल्ली एडिशन के वरिष्ठ स्थानीय संपादक प्रताप सोमवंशी का खास माना जाता है।  गौरव को हिन्दुस्तान नोएडा का ब्यूरो चीफ रह चुके हैं। उसके बाद वे लंबे समय तक गाजियाबाद में ब्यूरो चीफ भी रहे हैं। बाद में उन्हें हिन्दुस्तान दिल्ली के स्टेट ब्यूरो में भेजा गया था। पर उस वक्त अनुराग मिश्र के इस्तीफे के बाद गौरव को हिन्दुस्तान का दिल्ली स्टेट इंचार्ज बनाया गया। 

समूह संपादक शशि शेखर की गुडलिस्ट में शामिल गौरव को अब मेट्रो एडिटर की जिम्मेदारी दी गई है।
 

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मोबाइल की दुनिया में क्यों जरूरी है सीधा संवाद, जानें एक्सपर्ट्स की राय

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े दिग्गजों ने रखे अपने विचार

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Dr. Anurag Batra

आजकल स्मार्टफोन का जमाना है। ऐसे में लोगों का एक-दूसरे से संवाद करने का तरीका भी बदल गया है। लोग अब फेस टू फेस बातचीत करने के बजाय वॉट्सऐप और ईमेल पर ज्यादा संवाद करते हैं। ज्यादा से ज्यादा वे फोन कॉल कर लेते हैं। व्यवहार में इस तरह का व्यवहार कार्यस्थल के साथ ही निजी जिंदगी में भी असर डाल रहा है। इन्हीं तमाम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को दिल्ली के ‘द ललित’ (The Lalit) होटल में शुक्रवार को ‘WIYLD’ की ओर से 'Real Conversations in Digital Age' पर एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर भी चर्चा की गई कि फेस टू फेस संवाद न करने का कितना विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

इस मौके पर कॉरपोरेट जगत के साथ ही वरिष्ठ पत्रकार, मनोवैज्ञानिक, ब्रैंड्स और मार्केटिंग से जुड़े दिग्गजों ने इस बारे में अपने-अपने विचार रखे। सभी का कहना था कि आज के समय में सोशल मीडिया एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है, लेकिन किसी व्यक्ति से मिलकर बातचीत करने का अपना महत्व है। इससे उन व्यक्तियों के बीच मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनता है जो वॉट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर मुश्किल है।

इस मौके पर ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था कि लगातार संवाद की वजह से ही उन्हें मजबूत निजी और बिजनेस रिलेशनशिप बनाने में मदद मिली है। उनका कहना था कि वह आगे बढ़कर लोगों से संवाद शुरू करने में किसी तरह की झिझक महसूस नहीं करते हैं, फिर चाहे वह मॉल हो, रेस्तरां हो अथवा फ्लाइट हो। युवाओं को सलाह देते हुए डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था, ‘किसी भी तरह की झिझक छोड़ दें और अजनबियों के साथ बातचीत करने की अपनी स्टाइल डेवलप करें। आपको तब काफी आश्चर्य होगा और अच्छा लगेगा, जब सामने वाले से भी आपको काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी।’

जानी-मानी मनोवैज्ञानिक डॉ. रोमा कुमार का कहना था, ‘रिसर्च से पता चलता है कि दुनियाभर में अच्छी इनकम वाली 75 प्रतिशत नौकरियां सोशल कनेक्ट्स के द्वारा मिलती हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल कनेक्शन होना बहुत जरूरी है। इससे आप तमाम तरह की बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं।’ डॉ. रोमा कुमार ने समाज में डिप्रेशन के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंन कहा कि लोगों में संवाद की कमी बढ़ने से अकेलेपन के मामले भी बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान ‘WIYLD’ के सीईओ और को-फाउंडर रितु कुमार ओझा का कहना था, ‘स्मार्ट फोन से विभिन्न उम्र के लोगों का व्यवहार बदल रहा है। सोशल मीडिया हमें बनावटी चेहरे दिखाता है, जिसमें व्यक्ति को अपने आसपास की सभी चीजें अच्छी लगती है। ऐसे में लोग वास्तविक दुनिया में संवाद करने से दूर होने लगते हैं, क्योंकि आपको नहीं पता होता है कि सोशल मीडिया के बाहर क्या हो रहा है और कैसे वहां पर आपको तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना है।’

संवाद के दौरान स्टोरीटैलिंग के इस्तेमाल पर जोर देते हुए बीजेपी प्रवक्ता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की सलाहकार श्वेता शालिनी का कहना था, ‘हमें स्टोरीटैलिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जब मैं छोटी थी तो मेरे पिताजी विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुझे ईमानदारी और देशसेवा की बात बताया करते थे और अपने बच्चों को भी मैं इसी तरीके से समझाती हूं।’

यह पूछे जाने पर कि लोग लगातार स्क्रीन पर कैसे दिखते हैं, उन्होंने कहा, ‘किसी भी कंवर्शेसन के दौरान लगातार उस पर ध्यान देना लग्जरी होती जा रही है। सोशल मीडिया पर अगले अपडेट के लिए लगातार अपने फोन को चेक करते रहना हमारे कंवर्शेसन को हमारी आत्मा से काफी दूर ले जाता है।’ कार्यक्रम में मौजूद सभी पैनलिस्ट इस बात से सहमत थे कि सार्थक बातचीत की कमी का बिजनेस पर काफी प्रभाव पड़ रहा है और इस दिशा में बदलाव लाने की जरूरत है।

‘Growthsqapes’ के फाउंडर सात्यकी भट्टाचार्जी का कहना था कि लीडरशिप के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक किसी भी लीडर का लगातार संवाद में शामिल होना होता है। यदि लीडर्स लोगों को प्रेरित करने में और सार्थक बातचीत करने में विफल रहते हैं तो वे अच्छे नेतृत्वकर्ता नहीं बन सकते हैं। वहीं, ‘Ishwa Consulting’ के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर अरविंद पंडित का कहना था कि किसी भी लीडर के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह अपनी टीम से ज्यादा से ज्यादा संवाद करता रहे और उनसे जुड़ा रहे, इससे बिजनेस में बेहतर रिजल्ट्स मिलते हैं।

संवाद के तरीके के महत्व के बारे में सीनियर बिजनेस लीडर शुभ्रांशु नियोगी (Subhrangshu Neogi) ने कहा, ‘लगातार संवाद होते रहना किसी भी संस्थान की आत्मा और उसका दिल है। हमेशा अपने स्टैकहोल्डर्स और कंज्यूमर्स से संवाद बनाए रखें। सकारात्मक संवाद के परिणाम भी अच्छे आते हैं। ऐसे में संवाद को हमेशा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए।’ हार्वर्ड द्वारा लगातार 80 साल तक की गई स्टडी में पाया गया कि पैसे और प्रसिद्धि से ज्यादा रिश्ते लोगों को जीवनभर खुश रखते हैं। पैनल में शामिल विशेषज्ञों का सुझाव था कि सकारात्मक बातचीत से ही रिश्तों को और मजबूत व सार्थक बनाया जा सकता है।

‘माइक्रोसॉफ्ट इंडिया’ (Microsoft India) के पूर्व डायरेक्टर (मार्केटिंग) पुनीत मोदगिल (Punit Modhgil) का कहना है, ‘टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी बदल दी है लेकिन इसका इस्तेमाल संवेदनशील रूप से करने की जरूरत है। मोबाइल ने हमारे संवाद करने के तरीके पर काफी प्रतिकूल प्रभाव डाला है और इसका रिश्तों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आने वाले समय में यह ब्रैंड्स को भी प्रभावित करेगा।’ ‘Deloitte’ कंपनी द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भावनात्मक लगाव रिश्ते को और आगे बढ़ाता है, जबकि तर्कसंगत विचार इन्हें कम महत्वपूर्ण बनाते हैं। किसी भी ब्रैंड के लिए अपने ऑडियंस से भावनात्मक रूप से जुड़ना काफी महत्वपूर्ण होता है। इससे लोगों का उस ब्रैंड में भरोसा बढ़ता है और ब्रैंड को आगे बढ़ने व लोकप्रिय बनने में मदद मिलती है।    

इस मौके पर कॉलेज के एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए ‘सिटी बुक लीडर्स’ (City Book Leaders) के चीफ क्यूरेटर और फाउंडर मोहित गुप्ता ने कहा, ‘मनुष्यों के लिए किताबें हमेशा से सार्थक स्टोरीज और संवाद का एक माध्यम रही हैं। अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ें और उन लोगों को सुनें जो किताबें पढ़ते हैं।

हम लोगों के साथ जो बातचीत करते हैं, उसकी क्वालिटी का हमारे एनर्जी लेवल पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ‘परिवर्तन प्रबंधन और व्यापार स्थिरता’ (change management and business sustainability) के बारे में आईआईएम लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार का कहना है, ‘जब आप क्लास में पढ़ाने के दौरान छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करते हैं तो पूरे दिन पॉजीटिव एनर्जी से भरे रहते हैं। हम ऑनलाइन एजुकेशन प्रोग्राम में इस चीज को काफी मिस करते हैं।’ विद्यार्थियों के व्यवहार में आ रहे बदलावों के बारे में डॉ. सुशील कुमार ने कहा, ‘वर्तमान में विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने के बजाय अच्छे ग्रेड लाने पर ज्यादा फोकस करते हैं।’

अमेरिका में पांच हजार लोगों पर हुए एक सर्वे में पाया गया है कि 1985 के बाद से करीबी दोस्त न होने के मामले में अमेरिकियों की संख्या तीन गुना बढ़ चुकी है। जिन लोगों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें से लगभग एक चौथाई ने किसी पर भी अपना भरोसा न होने की बात कही।

 

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टीवी पत्रकार मानक गुप्ता ने सीएम को दी ये नसीहत

बिजली कटौती के खिलाफ विडियो पोस्ट करने को लेकर पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई का ट्वीट कर जताया विरोध

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Manak Gupta

‘न्यूज24’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर और सीनियर एंकर मानक गुप्ता सोशल मीडिया पर चर्चा का सबब बने हुए हैं। इस चर्चा का कारण उनका वह ट्वीट है, जिसमें उन्होंने बिजली कटौती के बारे में सोशल मीडिया पर एक विडियो पोस्ट करने वाले डोंगरगांव निवासी मांगेलाल अग्रवाल नामक व्यक्ति को गिरफ्तार कर उस पर राजद्रोह की कार्रवाई किए जाने को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की कड़ी आलोचना की। अपने इस ट्वीट में मानक गुप्ता का कहना था कि चिलचिलाती गर्मी में सरकार बिजली काट रही है और आम आदमी कराह भी नहीं सकता। अपने इस ट्वीट में उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मांगीलाल को तुरंत रिहा करने की मांग भी उठाई थी।

हालांकि, राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस को इस मुद्दे पर मानक गुप्ता का इस तरह ट्वीट करना रास नहीं आया। छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कहना था कि न्यूज24 चैनल को स्पष्ट करना चाहिए कि यह मानक गुप्ता का विचार है अथवा चैनल का। छत्तीसगढ़ कांग्रेस का यह भी कहना था कि मानक गुप्ता द्वारा फैलाए जा रहे इस झूठ पर चैनल का क्या रुख है।

बात यहीं नहीं थमी, मानक गुप्ता ने छत्तीसगढ़ के इस ट्वीट का जवाब एक और ट्वीट कर दिया। इसमें उन्होंने लिखा, कुछ महीनों में ही जनता का विश्वास क्यों खो दिया...इस पर मंथन करने के बजाय बिजली कटौती से नाराज आम आदमी पर देशद्रोह लगाया...और अब पार्टी के आधिकारिक हैंडल से ट्रोल कर रहे हैं। ऊपर वाला सदबुद्धि दे।

मामला तूल पकड़ते देख मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मांगीलाल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज देशद्रोह की धारा हटाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने की धारा के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। लेकिन मानक गुप्ता ने इसके बाद अपने ट्विटर हैंडल पर एक और ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने सीएम भूपेश बघेल से ये भी कहा है कि पार्टी के हैंडल से मीडिया को ट्रोल करने के बजाय बड़ा दिल दिखाएं और केस रद्द करवाएं। यही नहीं, इसके तुरंत बाद किए और ट्वीट में मानक गुप्ता ने देशद्रोह की धारा का दुरुपयोग करने वाले बिजलीकर्मियों और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।   

गौरतलब है कि राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मुसरा में रहने वाले 53 वर्षीय मांगीलाल अग्रवाल ने एक विडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाया था। मांगीलाल का कहना था, 'एक इन्वर्टर कंपनी के साथ छत्तीसगढ़ सरकार की सेटिंग हो गई है। इसके लिए राज्य सरकार को पैसा दिया गया है। करार के मुताबिक घंटे-दो घंटे में 10 से 15 मिनट के लिए बिजली कटौती होती रहेगी तो इन्वर्टर की बिक्री बढ़ेगी।' बाद में बिजली कंपनी के विधिक सलाहकार एनकेपी सिंह की शिकायत पर पुलिस ने मांगीलाल के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया था।

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जानें, क्यों चर्चा में है दीपक चौरसिया की ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

किर्गिस्तान के विश्केक में बंद दरवाजों के पीछे की खबर भी निकालकर ले आए दीपक चौरसिया

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Deepak Chaurasia

लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली आधिकारिक विदेश यात्रा को कवर करने के लिए यूं तो पत्रकारों की पूरी टीम उनके साथ गई थी, लेकिन वरिष्ठ टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया यहां भी बाजी मारने में सफल रहे। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मोदी के किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुँचने के बाद उनसे और सम्मेलन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर से दर्शकों को रूबरू कराया।

बतौर ‘न्यूज नेशन’ रिपोर्टर के रूप में चौरसिया ने पहले ही साफ कर दिया था कि इस सम्मेलन में पीएम मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की नजरें जरूर मिलेंगी, लेकिन दिल नहीं और हुआ भी ऐसा ही। इतना ही नहीं, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति ने सभी मेहमानों के सम्मान में डिनर दिया था, जिसमें पत्रकारों का प्रवेश वर्जित था, लेकिन चौरसिया बंद दरवाजों के पीछे की खबर भी निकाल लाये। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के मसले पर चीन के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से क्या कहा। इस तरह के अहम मौकों पर अनुभव काफी काम आता है और दीपक चौरसिया के पास इसकी कोई कमी नहीं। वह समय-समय पर खुद को साबित करते रहे हैं।

सम्मलेन में जब सभी राष्ट्राध्यक्ष एक-दूसरे से मुलाकात कर रहे थे, बाहर यह चर्चा चल रही थी कि क्या मोदी ने इमरान से बात की? क्या दोनों नेताओं के बीच संवाद हुआ? चौरसिया ने इस चर्चा पर विराम लगाते हुए सबसे पहले ‘न्यूज नेशन’ के दर्शकों को बता दिया कि दोनों नेताओं ने बस हाथ मिलाया। चौरसिया जानते थे कि पर्दे के पीछे क्या हुआ, इसकी जानकारी वही शख्स दे सकता है जो खुद वहां मौजूद हो, इसलिए उन्होंने मौका मिलते ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से सच जान लिया।

चौरसिया ने कुरैशी को उस वक़्त सवालों के जवाब देने के लिए मना लिया, जब वह होटल गोल्डन ड्रैगन से निकलकर अपनी कार में बैठ रहे थे। इसके अलावा भी दीपक चौरसिया ने सम्मेलन से जुड़ी हर खबर देशवासियों तक पहुंचाई। चौरसिया की खासियत यही है कि वो वहां से भी खबरें खोज लाते हैं, जहाँ संभावना नजर नहीं आती और इसके बाद उनके विश्लेषण से ऐसा पैकेज तैयार करते हैं, जो अपने आप में परिपूर्ण होता है। पीएम मोदी के बिश्केक पहुँचते ही चौरसिया ने सम्मलेन में भारत की भूमिका, पाकिस्तान के हाल और उसके प्रभाव के बारे में वह सबकुछ बता दिया, जिसके बारे में देशवासियों को जानना जरूरी है। कुल मिलाकर कहा जाए तो दीपक चौरसिया ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उन्हें ऐसे ही खबरों का बादशाह नहीं कहा जाता।

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पत्रकार पर लगा ये आरोप, पुलिस ने आधी रात को सोते समय घर से उठाया

स्थानीय अदालत ने बाद में पत्रकार को जमानत पर किया रिहा

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Journalist

देश में पत्रकारों के उत्पीड़न की शिकायतों में लगातार इजाफा हो रहा है। पिछले दिनों ही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में पुलिस ने स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा यूपी के शामली में रिपोर्टिंग के दौरान अमित शर्मा नामक पत्रकार की जीआरपी कर्मियों ने लात-घूंसों से पिटाई की थी। अब इस लिस्ट में छत्तीसगढ़ का नाम भी जुड़ गया है।

नया मामला छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले का है, जहां बिजली बंद को लेकर गलत समाचार छापने के आरोप में पुलिस ने एक स्थानीय पत्रकार दिलीप शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, बाद में अदालत ने दिलीप शर्मा को जमानत पर रिहा कर दिया। बताया जाता है कि वेबमोर्चाडाटकाम के नाम पर वेब पोर्टल चलाने वाले पत्रकार दिलीप शर्मा ने पिछले दिनों अपने वेब पोर्टल पर खबर प्रकाशित की थी कि 48 घंटों के दौरान जिले के 50 गावों में ब्लैकआउट की स्थिति है।

इस खबर को गलत और भ्रामक बताते हुए बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता एसके साहू ने दिलीप शर्मा के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी थी। इस शिकायत के बाद पुलिस ने दिलीप शर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि बाद में दिलीप शर्मा को अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया। वहीं, जमानत पर रिहा होने के बाद दिलीप शर्मा का कहना था कि उन्होंने जो खबर चलाई, वह सही थी। शर्मा का यह भी कहना था कि सच्चाई सामने लाने के कारण उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। दिलीप शर्मा ने आरोप लगाया कि गुरुवार को आधी रात को पुलिस ने उन्हें अपराधी की तरह घर से उठाया और रात भर थाने में रखा। इस दौरान कारण भी नहीं बताया गया।

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