गुलाब कोठारी ने बताया, क्यों मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं है...

सेना को बाहरी शत्रुओं से लड़ना पड़ता है और पत्रकारों को आंतरिक शत्रुओं से...

Last Modified:
Tuesday, 18 September, 2018
gulab kothari

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

'सेना को बाहरी शत्रुओं से लड़ना पड़ता है और पत्रकारों को आंतरिक शत्रुओं से। आंतरिक शत्रुओं को पहचानना बहुत कठिन है।' ये कहा 'राजस्थान पत्रिका' समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने। 'राजस्थान पत्रिका' की तरफ से आयोजित 'कर्पूरचंद्र कुलिश सम्मान समारोह 2018' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र और मीडिया का गंभीर रिश्ता होता है। सत्ता का आदमी मीडिया को देखना नहीं चाहता। सत्ता अब स्वतंत्र मीडिया को नहीं देखना चाहती। मीडिया और सत्ता में समझौता होना खतरनाक है। मीडिया चौथा स्तंभ नहीं है। चौथा स्तंभ मतलब सत्ता का हिस्सा बनना। सत्ता मीडिया का पाया नहीं। लोकतंत्र का सेतु है।'

 पत्रकारों के महत्व, उनकी भूमिका और चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, 'कई मीडिया हाउस सरकार से समझौते के लिए तैयार हैं। ऐसे में जो अखबार सवाल उठाएगा वह अकेला पड़ जाएगा। अब मीडिया के पास आजादी की तरह सपना नहीं। उनके सामने कोई लक्ष्य नहीं है। पत्रकार और जनता के बीच दर्द का रिश्ता होना चाहिए। लोकतंत्र के लिए कलम का सिपाही कहां मिलेगा।'

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी मौजूद थे। इस दौरान कोठारी ने थल सेना अध्यक्ष बिपिन रावत को भरोसा दिलाया कि सेना को कभी लगे कि उन्हें पत्रिका को किसी चीज में सहभागी बनाना है, तो पत्रिका हमेशा तैयार है। 

उन्होंने कहा, 'मीडिया में संवेदना नहीं तो सच्ची पत्रकारिता नहीं होती। शिक्षा पद्धति में संवेदना बहुत जरूरी है। आज की शिक्षा में संवेदना नहीं है। पत्रकारिता में दर्द का रिश्ता खत्म हो रहा है। अब संकल्प कहां? पत्रकारिता कैसे बचेगी? मीडिया मालिक भी समझौते कर रहे हैं। जीवन के हर पहलू में चुनौतियां खड़ी हैं। देश के विकास में हमारी भूमिका होनी चाहिए। राजस्थान पत्रिका ने 62 साल में कभी हार नहीं मानी। कोई हमें डरा नहीं पाया। हम कभी डरेंगे भी नहीं।

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