PTI: निकाले गए कर्मियों पर हाई कोर्ट ने दिया ये आदेश...

देश की प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) से निकाले गए...

Last Modified:
Tuesday, 27 November, 2018
pti

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

देश की प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) में छंटनी का शिकार हुए 297 कर्मियों के लिए मंगलवार का दिन काफी राहत भरी खबर लेकर आया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने पीटीआई मैनेजमेंट द्वारा 29 सितंबर को दिए गए इन कर्मचारियों की छंटनी के आदेश पर स्टे लगा दिया है। अगले आदेश तक यह स्टे प्रभावी रहेगा। ऐसे में छंटनी के शिकार हुए कर्मचारी एक-दो दिन में काम पर वापस आ सकते हैं।  

गौरतलब है कि पीटीआई कर्मचारी संघ (Federation of PTI Employees Union) ने इस कार्रवाई को अवैध और गैरकानूनी करार देते हुए नौ अक्टूबर को इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस फेडरेशन की रिट पिटीशन संख्या 10605/2018 पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सी. हरि शंकर ने मंगलवार को इस मामले में स्टे ऑर्डर जारी किया है।  

अब पीटीआई कर्मचारी संघ ने पीटीआई मैनेजमेंट को पत्र देकर कहा है कि छंटनी के शिकार इन कर्मचारियों को ड्यूटी पर वापस लिया जाए, अन्यथा यह माननीय न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन होगा। वहीं, बृहन्मुंबई यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (BUJ) ने दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश को पीटीआई कर्मचारी संघ की जीत बताया है।

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दीपक चौरसिया के समर्थन में उतरे वरिष्ठ पत्रकार, यूं साधा हमलावरों पर ‘निशाना’

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे धरना प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे वरिष्ठ टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया व उनकी टीम के साथ की गई थी बदसलूकी

Last Modified:
Saturday, 25 January, 2020
Deepak Chaurasia

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन इसे लेकर हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। यहां तक कि मीडिया को भी प्रदर्शनकारी अपना निशाना बना रहे हैं। शाहीन बाग में करीब एक महीने से प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारी भी शुक्रवार को हिंसा पर उतर आए और वहां चल रहे विरोध प्रदर्शन की कवरेज करने गए वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया के साथ बदसलूकी कर दी। यही नहीं उन्होंने न्यूज नेशन के कैमरामैन का कैमरा भी तोड़ दिया।

दीपक चौरसिया से मारपीट और कैमरे छीनने के मामले में कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि आईपीसी की धारा 394 (लूट के दौरान चोट पहुंचाने) के तहत FIR दर्ज की गई है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कवरेज के दौरान मीडिया पर इस तरह के हमले काफी चिंता का विषय हैं।

दीपक चौरसिया पर हुए हमले के बाद कई वरिष्ठ पत्रकारों ने दीपक चौरसिया के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है और इस घटना का विरोध किया है।

वरिष्ठ पत्रकार और ‘जी न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने शाहीन बाग में दीपक चौरसिया पर हुए हमले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है, 'यह असहिष्णुता अस्वीकार्य है। शाहीनबाग उनका (हमलावरों का) नहीं है। यह अभी भी लोकतांत्रिक भारत का एक हिस्सा है। मैं सभी संपादकों और प्राइम टाइम एंकरों से आग्रह करता हूं कि वे शाहीन बाग से अपने न्यूज शो करें।'

एक अन्य ट्वीट में उनका यह भी कहना है, 'शाहीन बाग किसी के बाप का नहीं।एक पत्रकार के साथ ऐसी गुंडागर्दी करके प्रदर्शनकारियों ने बता दिया कि वो कितने असहनशील हैं और अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ उनके लिए है। पूरे देश को इस घटना का विरोध करना चाहिए।'

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने भी एक ट्वीट में इस घटना की निंदा की है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है, ‘शाहीन बाग में वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ हुई बदसलूकी की घटना काफी निंदाजनक है। यदि आपको (प्रदर्शनकारियों को) मीडिया से कोई दिक्कत है तो वह अपना चैनल बंद कर दें। कैमरों को तोड़ना और पत्रकारों के साथ मारपीट करना गुंडागर्दी है। दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’

'आजतक' के संपादक  सुप्रिय प्रसाद ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा है, 'आप किसी पत्रकार को अपना काम करने से इस तरह नहीं रोक सकते हैं। मैं इस तरह की घटना की घोर भर्त्सना करता हूं।'

‘न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिश देवगन ने भी दीपक चौरसिया पर हुए हमले को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने अपने ट्वीट में इस घटना को शर्मनाक बताया है।

‘एबीपी न्यूज’ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत ने भी दीपक चौरसिया पर हमला करने वालों को आड़े हाथ लिया है।

बता दें कि पिछले दिनों इस कानून के विरोध में जेएनयू में गुस्साए छात्रों ने भी मीडिया पर हमला कर दिया था। छात्रों के हमले में कई मीडियाकर्मी घायल हुए थे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मीडियाकर्मियों के कैमरों को भी तोड़ दिया था। इसके अलावा हाल ही में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के कैंपस में भी प्रदर्शन को कवर करने पहुंचीं ‘रिपब्लिक टीवी’ की टीम पर प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था और 7 रिपोर्टर्स के साथ धक्का मुक्की की थी। इतना ही नहीं, हमलावरों ने ‘रिपब्लिक टीवी’ की टीम का कैमरा छीनने और जबरदस्ती फुटेज डिलीट करने की भी कोशिश की थी।

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#MeToo के आरोपों में घिरे न्यूज चैनल के संपादक ने लिया बड़ा फैसला

वरिष्ठ पत्रकार और ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के पूर्व कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने एक दिन पूर्व ही #MeToo मामले का सनसनीखेज खुलासा किया था

Last Modified:
Friday, 24 January, 2020
Journalist

#MeToo के आरोपों में घिरे न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के वरिष्ठ संपादक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन पर संस्थान की ही दो महिला पत्रकारों ने यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के पूर्व कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने एक दिन पूर्व ही ट्वीट के जरिये #MeToo मामले का सनसनीखेज खुलासा किया था। हालांकि, अपने ट्वीट में उन्होंने किसी चैनल का नाम नहीं लिया था।

यह भी पढ़ें: मीडिया में #MeToo ने फिर दी दस्तक, अजीत अंजुम ने किया ये सनसनीखेज खुलासा

अब मामला तूल पकड़ने और चैनल का नाम सामने आने के बाद ‘टीवी9 भारतवर्ष’ ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं। इन ट्वीट में चैनल ने इस मामले में की गई कार्रवाई के बारे में बताया है।

अपने इन ट्वीट्स में चैनल का कहना है, ‘टीवी9 भारतवर्ष की दो पत्रकारों ने एक वरिष्‍ठ संपादक के खिलाफ यौन शोषण की अलग-अलग शिकायत की है। कार्यस्‍थल पर महिलाओं के यौन अपराध (रोकथाम,  प्रतिबंध और निवारण) अधिनियम, 2013 के अनुसार, मामले को तुरंत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास भेजा गया। शिकायतों और गवाहों को सुनने के बाद मैनेजमेंट ने संपादक को नोटिस भेजा। इसके फौरन बाद ही ICC ने पूरी जांच शुरू कर दी। प्रबंधन ने जांच पूरी होने तक संपादक को छुट्टी पर भेज दिया, जिसके बाद संपादक ने इस्तीफ़ा दे दिया है। प्रबन्धन ने इस्तीफ़ा तुरन्त प्रभाव से मंज़ूर कर लिया।‘

एक अन्य ट्वीट में चैनल का कहना है, ‘कार्यस्‍थल पर यौन शोषण के प्रति टीवी9 नेटवर्क जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है। संस्‍थान कार्य स्थल पर महिला कर्मचारियों को सुरक्षित और बराबरी का माहौल मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं, #MeToo का मामला सामने आने के बाद ‘समाचार प्लस चैनल’ के पूर्व आउटपुट हेड असित नाथ तिवारी ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखी है। इस मामले में फंसे ‘टीवी9 भारत वर्ष’ के आउटपुट हेड अजय आजाद के नाम लिखे इस खुले पत्र में असित नाथ तिवारी ने इन आरोपों को मीडियाकर्मियों के लिए काफी चिंता का विषय बताया है। इसके साथ ही उन्होंने अजय आजाद से उन लड़कियों से निजी तौर पर मिलकर माफी मांगने के लिए भी कहा है।

असित नाथ तिवारी द्वारा अजय आजाद के नाम लिखे इस खुले पत्र को आप यहां हूबहू पढ़ सकते हैं।

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मीडिया में #MeToo ने फिर दी दस्तक, अजीत अंजुम ने किया ये सनसनीखेज खुलासा

पूर्व में तमाम सुर्खियां बटोर चुके #MeToo कैंपेन ने एक बार फिर दस्तक दी है। दरअसल, मीडिया में #MeToo के कुछ नए मामलों का खुलासा हो सकता है

Last Modified:
Thursday, 23 January, 2020
METOO

पूर्व में तमाम सुर्खियां बटोर चुके #MeToo कैंपेन ने एक बार फिर दस्तक दी है। दरअसल, मीडिया में #MeToo के कुछ नए मामलों का खुलासा हो सकता है। एक चैनल से जुड़ी कुछ ट्रेनी पत्रकारों ने अपने सीनियर्स पर संगीन आरोप लगाये हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में पीड़ित महिला पत्रकारों ने कुछ सबूत भी प्रबंधन को सौंपे हैं। हालांकि आरोपितों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इसका खुलासा वरिष्ठ पत्रकार और ‘इंडिया टीवी’ के पूर्व मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम ने किया है। उन्होंने ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘एक चैनल के #NEWSROOM में 'बलात्कारी मानसिकता' वाले सीनियर के खिलाफ सबूतों के साथ कुछ लड़कियों ने संगीन आरोप लगाए हैं। ट्रेनी लड़कियों को शिकार समझने वाले ऐसे सीनियर्स के चेहरे से हर हाल में नकाब उतारना चाहिए। हैरत की बात ये है कि सबूतों के बाद भी अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।’ चैनल और आरोपितों के नाम के बारे में अजीत अंजुम ने कुछ नहीं बताया है। सोशल मीडिया पर यूजर उनसे नाम सामने लाने की मांग कर रहे हैं।

अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा है ‘बतौर टीम लीडर मैंने हमेशा लड़कियों को कहा कि अगर #NEWSROOM में कोई भी आपके साथ ऐसी नीच हरकत करे तो तुरंत बताओ। वो चाहे किसी पद पर हो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, लेकिन शिकायत तो करनी होगी। करियर खराब होने के डर से न जाने कितनी लड़कियां बहुत कुछ सहकर तूल देने से बचती है। मैं हमेशा ऐसे मामलों में Zero tolerance का पक्षधर रहा हूं। मीडिया में विकृत मानसिकता वाले ऐसे बहुत से सीनियर्स हैं , जो जूनियर लड़कियों को सिर्फ शिकार समझते हैं। हर हाल में ऐसे लोगों को एक्सपोज किया जाना चाहिए।’

गौरतलब है कि #MeToo में पहले भी कुछ पत्रकारों का नाम सामने आ चुका है। लिहाजा अजीत अंजुम के इस खुलासे ने कई लोगों की नींद उड़ा दी होगी। हालांकि, अब देखने वाली बात यह है कि क्या वरिष्ठ पत्रकार संबंधित चैनल और आरोपितों का नाम उजागर करते हैं?

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इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड से नवाजे जाएंगे The Hindu ग्रुप के चेयरमैन एन.राम

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिलेगा यह अवॉर्ड। इसके तहत एक लाख रुपए, एक प्रशस्ति पत्र और एक स्मृति चिह्न प्रदान किया जाता है

Last Modified:
Thursday, 23 January, 2020
N RAM

दिग्गज पत्रकार और ‘द हिन्दू ग्रुप’ (THG) ऑफ पब्लिकेशंस के चेयरमैन एन.राम को ‘केरल मीडिया अकादमी’ (Kerala Media Academy) के नेशनल मीडिया अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। केरल मीडिया अकादमी के चेयरमैन आरएस बाबू के अनुसार, मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एन. राम को इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है।

इस अवॉर्ड के तहत एक लाख रुपए नकद, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न दिया जाता है। उन्होंने बताया कि अकादमी के 40वें वार्षिक समारोह में निडर और सराहनीय पत्रकारिता के लिए इस अवॉर्ड को स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन मार्च में होने वाले मीडिया कॉन्क्लेव में यह अवॉर्ड प्रदान करेंगे।      

इस अवॉर्ड लिए एन. राम का चयन एक जूरी ने किया है, जिसमें पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री एमए बेबी, वरिष्ठ पत्रकार थॉमस जैकब, जनरल एजुकेशन डिपार्टमेंट के सचिव ए. शाहजहां, मीडिया विश्लेषक सेबस्टियन पॉल, एशियानेट के एडिटर एमजी राधाकृष्णन और प्लानिंग बोर्ड की मेंबर मृदुल इयापेन (Mridul Eapen) शामिल थे।

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अब नए अंदाज में खबरों से रूबरू कराएंगी वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा

व्युअर्स को कम से कम समय में तथ्यों के साथ पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है यह पहल

Last Modified:
Thursday, 23 January, 2020
Faye D'souza

वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा अब लोगों को नए अंदाज में खबरों से रूबरू कराएंगी। सिलिकन वैली (Silicon Valley) के  शॉर्ट विडियो नेटवर्क ‘फायरवर्क’ (Firework) के साथ अपनी नई पारी के दौरान फे डिसूजा देश भर की खास खबरों को 30 सेकेंड के विडियो में दिखाएंगी।

इस बारे में ‘फायरवर्क’ के सीईओ सुनील नायर का कहना है, ‘शॉर्ट फॉर्मेट विडियो कैटेगरी में फे डिसूजा के साथ यह शो गेमचेंजर साबित होगा। इस तरह के न्यूज फॉर्मेट को 18 से 25 साल के युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मेरा मानना है कि इस उम्र के युवा बड़े-बड़े टेलिविजन डिबेट शो देखने के बजाय तेजी से और शॉर्ट में न्यूज चाहते हैं। आज की पीढ़ी ऐसे कई चेहरों को नहीं पहचानती है, जो टीवी चैनल्स पर लंबे समय से हैं। फे इस बात को समझती हैं और वह दर्शकों को इस तरह से खबरें पेश करती हैं, जिससे न्यूज को आसानी से और तेजी से समझा जा सके।’  

बताया जाता है कि शुरुआत में फे डिसूजा सप्ताह के सामान्य दिनों (weekdays) में चार न्यूज सेगमेंट पोस्ट करेंगी और सप्ताहांत (weekends) में एक न्यूज सेगमेंट पोस्ट किया जाएगा। प्रत्येक न्यूज सेगमेंट 30 सेकेंड की क्लिप होगी और इसे ‘Facts First with Faye’ शीर्षक से पोस्ट किया जाएगा।  

डिसूजा का कहना है, ‘आज न्यूज की कोई कमी नहीं है, बस वह स्पष्ट होनी चाहिए। देश का युवा काफी समझदार और वैचारिक है। युवा वर्ग ऐसी न्यूज चाहता है जो तथ्यों के साथ निष्पक्ष और शॉर्ट फॉर्मेट में हो। यह शो इसी तरह की न्यूज उपलब्ध कराएगा।’

बता दें कि इससे पहले सितंबर 2019 तक डिसूजा टाइम्स नेटवर्क के अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘मिरर नाउ’ (Mirror Now) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर काम कर रही थीं। ‘मिरर नाउ’ के शो ‘द अर्बन डिबेट’ (The Urban Debate) की एंकरिंग के दौरान उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली थी। इस शो में वह भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक हिंसा और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को उठाती थीं। फे डिसूजा को वर्ष 2018 में 'जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर' के लिए रेडइंक अवॉर्ड दिया जा चुका है।

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सरकार को नहीं भायी पत्रकार की ये ‘गुस्ताखी’, लिया हिरासत में

पाकिस्तान में सरकार और सेना के खिलाफ आवाज उठाने की पत्रकारों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है

Last Modified:
Wednesday, 22 January, 2020
Journalist

पाकिस्तान में सरकार और सेना के खिलाफ आवाज उठाने की पत्रकारों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। अजहर उल वाहिद अपनी फेसबुक पोस्ट के लिए पिछले छह दिनों से पुलिस की हिरासत में हैं। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का अनुभव रखने वाले वाहिद ने सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ एक के बाद एक कई पोस्ट किए थे। उन्होंने अपने हालिया पोस्ट में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की फांसी पर रोक लगाने के अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह लोकतंत्र का मजाक है।

पुलिस ने वाहिद के फेसबुक अकाउंट पर सरकार के खिलाफ अपमानजनक सामग्री का हवाला देते हुए उन्हें पिछले गुरुवार को पूर्वी लाहौर से हिरासत में लिया था, तब से वह अब तक बाहर नहीं आ सके हैं। वहीं, वाहिद के वकील ने पुलिस की इस कार्रवाई को प्रेस की आजादी पर हमला करार दिया है। साथ ही उनका कहना है कि अदालत को वाहिद की जमानत पर जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के एशिया-पैसिफिक प्रमुख डैनियल बास्टर्ड ने भी वाहिद के खिलाफ की गई कार्रवाई को गलत बताते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है। बास्टर्ड ने कहा, ‘यह निश्चित तौर पर पत्रकारों को डराने का प्रयास है। पाकिस्तानी अदालत को वाहिद पर लगाये गए आरोपों को खारिज करके उन्हें आजाद करना चाहिए।’

गौरतलब है कि पाकिस्तान लंबे समय से पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक स्थानों में से एक रहा है। इमरान सरकार भले ही मीडिया की आजादी की बात करती है, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है। पत्रकार द्वारा सैन्य प्रतिष्ठान की तरफ से बढ़ते दबाव की शिकायतें अब आम हो गई हैं। 2018 में कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट ने पाया था कि पाक सेना ने ‘चुपचाप लेकिन प्रभावी रूप से’ सामान्य समाचार रिपोर्टिंग के दायरे में सख्त सीमाएं लागू की हैं।

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इन पत्रकारों के सिर सजा प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड का ताज

दिल्ली में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कई कैटेगरी में विजेताओं को किया सम्मानित, द क्विंट के चार पत्रकारों को मिला अवॉर्ड

Last Modified:
Tuesday, 21 January, 2020
Awards

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से नवाजा गया। दिल्ली में सोमवार को आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने साल 2018 में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में बेहतरीन काम करने वाले पत्रकारों को यह पुरस्कार प्रदान किया।

राष्ट्रपति ने प्रिंट कैटेगरी में ‘गांव कनेक्शन’ की दिति बाजपेई और ब्रॉडकास्ट में ‘द क्विंट.कॉम’ के पत्रकार शादाब मोइजी को पुरस्कृत किया। ‘द क्विंट.कॉम’ की ही पूनम अग्रवाल को भी इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। रिपोर्टिंग फ्रॉम कनफ्लिक्टिंग जोन कैटेगरी में इंडियन एक्सप्रेस के दीपांकर घोष(प्रिंट/डिजिटल), ब्रॉडकास्ट में दूरदर्शन के धीरज कुमार, दूरदर्शन के ही दिवंगत पत्रकार अच्युतानंद साहू, मोरमुकट साहू को पुरस्कृत किया गया।

वहीं, रीजनल कैटेगरी में अल समय (प्रिंट/डिजिटल) की अन्वेषा बैनर्जी और ब्रॉडकास्ट में मनोरमा न्यूज के सनीश टीके को यह अवॉर्ड दिया गया। पर्यावरण और विज्ञान कैटेगरी में स्क्रॉल.इन की मृदुला चारी और विनिता गोविंदराजन, जबकि ब्रॉडकास्ट में बीबीसी हिंदी सर्विस की सर्वप्रिया सांगवान को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। अनकवरिंग इंडिया इनविजिबल कैटेगरी (प्रिंट/डिजिटल) में इंडियन एक्सप्रेस की हिना रोहतकी, ब्रॉडकास्ट में दक्विंट.कॉम की अस्मिता नंदी और दक्विंट.कॉम के ही मेघनाद बोस को पुरस्कृत किया गया।

बुक (नॉन-फिक्शन) कैटेगरी में ज्ञान प्रकाश और फोटो पत्रकारिता कैटेगरी में टाइम्स ऑफ इंडिया के फोटो जर्नलिस्ट सुरेश कुमार को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। बता दें कि वर्ष 2006 में स्थापित रामनाथ गोयनका पुरस्कार उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया के ऐसे पत्रकारों को दिया जाता है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में सही और तथ्यपरक समाचार देते हुए चरित्र और समर्पण की असाधारण शक्ति दिखाई है।

हर श्रेणी में एक लाख रुपए की पुरस्कार राशि के साथ उसके लेखक को सम्मानित किया गया। इस मौके पर राष्ट्रपति का कहना था कि पत्रकारिता बिना किसी डर या पक्षपात के होनी चाहिए। इसकी मूलभूत प्रतिबद्धता सच्चाई को सबसे ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेक न्यूज एक नई बुराई के रूप में सामने आई है, जिनके पैरोकार खुद को पत्रकार बताते हैं और इस महान पेशे को कलंकित करते हैं।

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Fake News के खिलाफ इन दो मीडिया समूहों ने मिलकर छेड़ी 'जंग', यूं करेंगे मुकाबला

आज के दौर में फेक न्यूज की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन फेक न्यूज के मामले सामने आ रहे हैं। भारत ही नहीं, दुनिया के अन्य देश भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 20 January, 2020
Fake News

आज के दौर में फेक न्यूज की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन फेक न्यूज के मामले सामने आ रहे हैं। भारत ही नहीं, दुनिया के अन्य देश भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं। हालांकि, फेक न्यूज से निपटने के लिए कवायद भी की जा रही है, इसके बावजूद इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है।

अब तो यह हाल हो गया है कि जब वॉट्सऐप पर कोई न्यूज मिलती है तो मन में आशंका रहती है कि क्या यह न्यूज सही है? कहीं यह फर्जी तो नहीं? सिर्फ वॉट्सऐप के साथ ही ऐसा नहीं है, सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म्स जैसे-फेसबुक और ट्विटर पर मिलने वाली अधिकतर न्यूज को लेकर भी कई लोग उसके सही अथवा फेक होने की आशंका से घिरे रहते हैं। हालांकि, ऐसे भी कई लोग हैं जो यह जाने बिना कि न्यूज सही है अथवा फेक, उसे आगे फॉरवर्ड कर देते हैं और जाने-अनजाने में कई बार फेक न्यूज को भी बढ़ावा दे देते हैं।

फेक न्यूज से निपटने के लिए अब दो बड़े मीडिया समूह ‘दैनिक भास्कर’ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने मिलकर एक नई पहल शुरू की है। इस पहल को ‘कौन बनेगा, कौन बनाएगा’ नाम दिया गया है। इसके तहत फिल्मों की सीरीज के द्वारा लोगों को फेक न्यूज के दुष्परिणामों के बारे में बताने के साथ ही अखबार पढ़ने के महत्व के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।

दैनिक भास्कर’ में छपी खबर के अनुसार, समूह के प्रमोटर, निदेशक गिरीश अग्रवाल का कहना है कि लोगों को फेक न्यूज के खतरे से बचाने के लिए दोनों मीडिया समूह एक साथ आए हैं। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को देखते हुए इस पहल के तहत लोगों को फेक न्यूज के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। इसके लिए हमें सबसे पहले तो खुद से यह सवाल करना चाहिए कि हम अपनी खबरें कहां से पाते हैं, उनका स्रोत क्या है?

वहीं, ‘बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) के प्रेसिडेंट (रेवेन्यू) शिवकुमार सुंदरम कहते हैं कि गलत मैसेज फॉरवर्ड करने से सामाजिक तानाबाना कमजोर पड़ रहा है। ऐसे में बड़े अखबार समूह के तौर पर हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम पाठकों को सही खबर फॉलो करने के लिए जागरूक करें। उनका कहना था कि कई रिसर्च से साबित हो चुका है कि पाठक उसे ही सच मानता है, जो अखबार में छपा होता है। मोबाइल पर फॉरवर्ड खबर फेक है अथवा सही, इस बारे में जांचने के लिए कई लोग अगली सुबह के अखबार का इंतजार करते हैं।

इस पहल के तहत फेक न्यूज के खिलाफ किस तरह लोगों को जागरूक किया जाएगा, वह आप यहां इस विडियो में देख सकते हैं।

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सिर्फ इतनी सी बात पर अधिकारी ने पत्रकार को जड़ दिए थप्पड़ पर थप्पड़

अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई न होने पर दिल्ली पत्रकार संघ ने केजरीवाल सरकार को दी सड़कों पर उतरने की चेतावनी

Last Modified:
Saturday, 18 January, 2020
Slap

मीडिया में अपने खिलाफ चली खबर से तिलमिलाए दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने पत्रकार से मारपीट कर दी। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग हो रही है। वहीं, दिल्ली पत्रकार संघ ने केजरीवाल सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार कोई कदम नहीं उठाती, तो पत्रकारों को सड़कों पर उतरना होगा। इस बीच, अधिकारी के बचाव में भी दलीलें दी जाने लगी हैं। सोशल मीडिया पर एक विडियो वायरल किया जा रहा है जिसमें उक्त पत्रकार को गालीगलौज करते दिखाया गया है।

यह पूरा मामला ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के दिल्ली संवाददाता मानव यादव से जुड़ा है। मानव का आरोप है कि सूचना और प्रचार निदेशालय (डीआईपी) के निदेशक शमीम अख्तर ने उनके साथ मारपीट की, अख्तर उनके द्वारा चलाई गई एक खबर से नाराज थे।

मानव यादव के मुताबिक, डीआईपी के कार्यालय में कुछ पोस्टर चिपकाए गए थे, जिसकी खबर उन्होंने कवर की थी। जब इस संबंध में उन्होंने डीआईपी अधिकारी शमीम अख्तर से सवाल किया, तो वह भड़क गए और मारपीट कर डाली। मामला सामने आने के बाद पत्रकारों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग मुख्यमंत्री केजरीवाल से की है।

वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम ने घटना का जिक्र करते हुए ट्वीट किया है कि ‘किसी भी सूरत में एक रिपोर्टर पर हाथ उठाने वाले इस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अब तक नहीं हुई है तो हैरानी की बात है। कोई अधिकारी इतना बददिमाग कैसे हो सकता है? और अगर है तो किसके दम पर’?

दिल्ली पत्रकार संघ ने भी एक बयान जारी कर पत्रकार के साथ मारपीट की निंदा करते हुए आरोपित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की है। संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह की तरफ से कहा गया है कि ‘उपराज्यपाल, प्रमुख सचिव और चुनाव आयोग से मारपीट करने वाले अधिकारी को तुरंत बर्खास्त कर उसके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई करने की मांग की जाती है। यदि कार्रवाई नहीं की गई, तो दिल्ली के पत्रकार सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।’

वहीं, सोशल मीडिया पर ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के पत्रकार मानव यादव के खिलाफ भी मुहिम शुरू हो गई है। अरुण अरोरा नामक यूजर ने एक विडियो पोस्ट किया है, जिसमें मानव को पुलिस की मौजूदगी में अधिकारी से गालीगलौच करते दिखाया गया है। हालांकि, इस विषय पर मानव ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने अपने जवाबी ट्वीट में कहा है, ‘हां! निष्पक्षता से खबर चलाने के बदले मिले 3 थप्पड़ों के बाद मैंने उसको गाली दी लेकिन ये विडियो 6 बजे के बाद का है। 5:30 बजे के आसपास इन्होंने मुझे पीटा। 5:50 पर PCR पहुंची। पुलिस ने मुझे उनके केबिन में आकर बैठने को कहा, मैंने विरोध किया। कमरे के अंदर की पूरी recording मेरे पास है’।

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TV इंडस्ट्री ने 2018-19 में चली ऐसी ‘चाल’, रिपोर्ट में आया ये ‘हाल’

‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है

Last Modified:
Friday, 17 January, 2020
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‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018-19 में देश में टेलिविजन इंडस्ट्री की ग्रोथ में 12.12 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वर्ष 2017-18 में 66000 करोड़ रुपए से बढ़कर यह इंडस्ट्री वर्ष 2018-19 में 74000 करोड़ रुपए की हो गई है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूरी इंडस्ट्री के रेवेन्यू में सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू का शेयर 58.7 प्रतिशत है, जबकि बाकी का रेवेन्यू एडवर्टाइजिंग से आया है।  

अब सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू की बात करें तो इसमें भी 10.69 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2017-18 के दौरान जहां सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू 39300 करोड़ रुपए था, वह वर्ष 2018-19 में बढ़कर 43500 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, इस अवधि के दौरान एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू भी 14.23 प्रतिशत की दर से बढ़कर 30,500 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि वर्ष 2017-18 के दौरान यह 26700 करोड़ रुपए था।

इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2018 तक देश के 298 मिलियन घरों में से करीब 197 मिलियन घरों में टेलिविजन सेट है। इन 197 मिलियन घरों में दूरदर्शन के टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (terrestrial network) के साथ ही केबल टीवी सर्विस, डीटीएच सर्विस आदि के द्वारा सेवाएं दी जा रही हैं। दूरदर्शन के टेरेस्ट्रियल नेटवर्क की पहुंच देश में सबसे ज्यादा है और टेरेस्ट्रियल ट्रांसमीटर्स के काफी बड़े नेटवर्क के द्वारा देश की करीब 92 प्रतिशत आबादी तक इसकी पहुंच बनी हुई है। करीब 103 मिलियन घरों में केबल टीवी लगा हुआ है, 72.44 मिलियन घरों में डीटीएच के माध्यम से टीवी देखा जाता है। टेलिविजन ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर की बात करें तो इसमें 350 ब्रॉडकास्टर्स शामिल हैं और इनमें से 39 ब्रॉडकास्टर्स पे चैनल्स (pay channels) का प्रसारण कर रहे हैं।

वहीं, टेलिविजन डिस्ट्रीब्यूशन का रुख करें तो सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) में 1469 मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs), करीब 60,000 केबल ऑपरेटर्स, दो हिट्स (HITS) ऑपरेटर्स, पांच पे डीटीएच ऑपरेटर्स और कुछ ‘आईपीटीवी ऑपरेटर्स’ (IPTV operators) रजिस्टर्ड हैं। इसके अलावा पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘दूरदर्शन’ भी देश में फ्री-टू-एयर डीटीएच सर्विस उपलब्ध कराता है। 31 मार्च 2019 तक सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 902 प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनल्स को मंजूरी दे रखी थी। इनमें से 229 स्टैंडर्ड डेफिनेशन (SD) और 99 हाई डेफिनेशन (HD) पे टीवी चैनल्स हैं।

देश में वर्ष 2010 में सूचना प्रसारण मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त चैनल्स की संख्या 524 थी, जो वर्ष 2019 में बढ़कर 902 हो गई है। वहीं, स्टैंडर्ड डेफिनेशन (SD) पे चैनल्स की संख्या वर्ष 2010 में 147 के मुकाबले अब बढ़कर वर्ष 2019 में 229 हो गई। ट्राई ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि पिछले दस वर्षों में ब्रॉडकास्टर्स द्वारा बड़ी संख्या में हाई डेफिनेशन (HD) पे टीवी चैनल्स लॉन्च किए गए हैं और अब देश में कुल 99 हाई डेफिनेशन (HD) पे टीवी चैनल्स संचालित हो रहे हैं।

ट्राई की इस रिपोर्ट में ‘फ्रीक्वेंसी मॉडुलेशन’ (FM) रेडियो ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर का भी जिक्र किया गया है, जिसमें प्रभावी ग्रोथ दर्ज की गई है। रेडियो इंडस्ट्री पूरी तरह एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर निर्भर करती है और वर्ष 2018-19 के दौरान इसमें 9.74 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है। एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और वर्ष 2017-18 में 2381.51 करोड़ एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू के मुकाबले वर्ष 2018-19 में बढ़कर यह 2517.56 करोड़ रुपए हो गया है।

ट्राई की इस वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2019 तक पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) के टेरेस्ट्रियल रेडियो नेटवर्क (terrestrial radio network) के अलावा देश में 356 प्राइवेट एफएम रेडियो स्टेशन संचालित थे।

‘ऑल इंडिया रेडियो’ की सर्विस देश के 99.20 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र के साथ करीब 99019 प्रतिशत आबादी को कवर करती हैं। जहां तक कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की बात है तो मार्च 2019 के आखिर तक देश में 215 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन चालू हो गए थे।

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