चौथी दुनिया ने बताया, मोदी सरकार का खतरनाक नसबंदी अभियान...

जनसंख्या वृद्धि रोकने के लिए केंद्र सरकार देश की...

Last Modified:
Wednesday, 10 January, 2018

मोदी सरकार के ताकतवर और हठी स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा ने जुलाई 2017 में मिशन परिवार विकासके नाम पर मिशन परिवार विनाशअभियान की शुरुआत कर दी। नड्‌डा ने खुलेआम कहा कि इसके जरिए वे 2025 तक देश की जनसंख्या को काबू में ले आएंगे। कैसे काबू में लाएंगे, अब तक तो आप इसे समझ ही चुके होंगे।चौथी दुनिया में छपी अपने एक रिपोर्ट में ये कहा वरिष्ठ पत्रकार प्रभात रंजन ने। उनकी पूरी रिपोर्ट आप यहां पढ़ सकते हैं। ये रिपोर्ट चौथी दुनिया की है और समाचार4मीडिया इसके लिए किसी तरह का उत्तरदायी नहीं है...

मोदी सरकार का खतरनाक नसबंदी अभियान

जनसंख्या वृद्धि रोकने के लिए केंद्र सरकार देश की मांओं को बांझ बनाने की दवा चुभो रही है। राष्ट्रधर्मी मोदी सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ मिल कर महिलाओं में वह जहर इंजेक्ट कर रहा है जो खूंखार यौन अपराधियों को ‘केमिकल कैस्ट्रेशन’ की सजा के तहत ठोका जाता है। बलात्कारियों और यौन अपराधियों की यौन-ग्रंथी नष्ट करने के लिए दी जाने वाली दवा ‘मिशन परिवार विकास’ के नाम पर महिलाओं में अनिवार्य रूप से इंजेक्ट की जा रही हैताकि देश की जनसंख्या कम की जा सके। यह ‘मिशन परिवार विनाश’ अभियान है जो विदेशी कुचक्र और धन के कंधे पर चढ़ कर भारत के सात राज्यों के 145 जिलों में दाखिल हो चुका है। इनमें उत्तर प्रदेश के 57 जिले शामिल हैं। मोदी सरकार के ‘मिशन परिवार विनाश’ कार्यक्रम के लिए भाजपा शासित सात राज्य चुने गए हैंजिससे धन और षडयंत्र का खेल निर्बाध रूप से खेला जा सके। उत्तर प्रदेश समेत बिहारझारखंडअसम,मध्यप्रदेशछत्तीसगढ़ और राजस्थान के 145 जिलों के जिला अस्पतालोंसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए महिलाओं को ‘डिपो मेडरॉक्सी प्रोजेस्टेरोन एक्सीटेट’ (डीएमपीए) इंजेक्शन अनिवार्य रूप से दिया जा रहा है। यही दवा कई देशों में खूंखार यौन अपराधियों की यौन-ग्रंथी नष्ट करने के लिए सजा के बतौर इंजेक्ट की जाती है।

अधिक जनसंख्या वाले सात भाजपा शासित राज्यों के अधिक से अधिक जिलों में ‘मिशन परिवार विनाश’ का धंधा फैलाने के लिए जेपी नड्‌डा के नेतृत्व वाले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आधिकारिक आंकड़ों का सुनियोजित ‘फ्रॉड’ किया। आंकड़ों का फर्जीवाड़ा करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का वर्ष 2010-11 का पुराना डाटा उठा लिया और नेशनल टोटल फर्टिलिटी रेट 3.दिखा कर अधिक से अधिक जिलों को अपनी चपेट में लेने का कुचक्र रचा। केंद्रीय सत्ता के इस नियोजित ‘फ्रॉड’ में यूपी का फर्टिलिटी रेट 5 दिखाया गया और इस आधार पर यूपी के 57 जिलों में धंधा फैला लिया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) का ताजा आंकड़ा 2015-16 का हैजो यह बताता है कि देश का टोटल फर्टिलिटी रेट घट कर 2.पर आ चुका है। ताजा आंकड़े के मुताबिक उत्तर प्रदेश का फर्टिलिटी रेट 2.पर आ गया है। अगर स्वास्थ्य मंत्रालय इस अद्यतन (करेंट) आंकड़े को आधार बनाता तो इंजेक्शन का कुचक्र बहुत कम जिलों में फैल पाता। लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानबूझ कर पुराने आंकड़े (एनएफएचएस-3) को आधार बनाया और अधिकाधिक जिलों का चयन कर लिया। ताजा आंकड़ों के आधार पर मिशन परिवार विकास का दायरा कम जिलों में ही केंद्रित होतालेकिन अधिक स्थानों पर घुसने के लिए सरकार और गेट्स फाउंडेशन ने बढ़ा हुआ टीएफआर दिखा कर देशभर के 145 जिलों और यूपी के 57 जिलों में घुसपैठ बना ली। सुनियोजित फर्जीवाड़े की जमीन तैयार कर मांओं में जहर निरूपित करने और देश को बांझ बनाने का धंधा चल रहा है। यौन अपराधियों को सजा के बतौर दिया जाने वाला इंजेक्शन डीएमपीए सात राज्यों के 145 जिला अस्पतालों तक पहुंच चुका है और बड़ी तेजी से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने वाला है। जिलासामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मददगार विभागों और संस्थाओं को बाकायदा यह टार्गेट दिया गया है कि वे अधिकाधिक संख्या में महिलाओं में डीएमपीए दवा इंजेक्ट करें।

ये ‘अंतरा’ खतरनाक है

अंतरा’ के नाम से दिया जाने वाला इंजेक्शन डिपो मेडरॉक्सी प्रोजेस्टेरोन एक्सीटेट’ (डीएमपीए) महिलाओं को भीषण रोग की सुरंग में धकेल रहा है। इस दवा के इस्तेमाल के कुछ ही दिनों बाद महिलाएं फिर मां बनने लायक नहीं रह जातीं। अगर बनती भी हैं तो बच्चे इतने कमजोर होते हैं कि शीघ्र मौत के शिकार हो जाते हैंजो बच जाते हैं वे विकलांग और पंगु होकर रह जाते हैं। विश्व के कई देशों में खतरनाक यौन अपराधियों की यौन ग्रंथि को रासायनिक विधि से नष्ट करने (केमिकल कैस्ट्रेशन) के लिए डेपो-प्रोवेरा (डीएमपीए) इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता रहा है। फार्माकोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि डीएमपीए के इस्तेमाल से स्थायी तौर पर शारीरिक परिवर्तन हो जाता है और हडि्‌डयां गलने लगती हैं। पुरुषों में इसका इस्तेमाल करने से उन्हें हृदयाघात और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा रहता है। पुरुषों की छाती महिलाओं की तरह फूलने लगती है। इसका इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का शारीरिक विन्यास विद्रूप हो जाता हैहड्‌डी के घनत्व (बोन-मास) में गलन और संकुचन होने लगता हैहोठ का रंग बदलने लगता हैबाल झड़ने लगते हैं और मांसपेशियों का घनत्व भी गलने लगता है। डीएमपीए इंजेक्शन ऑस्टियोपोरोसिस और स्तन कैंसर होने में योगदान देता है और इसके इस्तेमाल से कालांतर में गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है। यह एचआईवी के संक्रमण का आसान मददगार बन जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञ कहते हैं कि डीएमपीए के मामले में स्थिति अत्यंत जटिल है। विडंबना है कि देश की मांओं में डीएमपीए दवा इंजेक्ट करने के लिए सरकार प्रायोजित ‘फ्रॉड’ तो हुआलेकिन इस खतरनाक दवा के कारण महिलाओं में होने वाले ऑस्टियोपोरोसिस और स्तन कैंसर जैसे तमाम जानलेवा रोगों को लेकर कोई सरकार प्रायोजित शोध नहीं हुआ। डीएमपीए इंजेक्शन का इस्तेमाल करने के एक वर्ष के अंदर 55 प्रतिशत महिलाओं के मासिक धर्म में अप्रत्याशित बदलाव देखा गया है और दो वर्ष के अंदर इस अप्रत्याशित घातक बदलाव ने 68प्रतिशत महिलाओं को अपने घेरे में ले लिया।

इसका इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में एचआईवी और यौन संक्रमण (क्लैमाइडिया इन्फेक्शन) का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। डीएमपीए इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाली महिलाएं बाद में जब गर्भधारण करना चाहती हैं तब पैदा होने वाला उनका बच्चा अत्यंत कम वजन का होता है और अधिकतर मामलों में ऐसे बच्चों की साल भर के अंदर मौत हो जाती है। दवा का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं के कालांतर में गर्भधारण करने के बाद होने वाले बच्चों के यौन संक्रमित होने का खतरा अत्यधिक रहता है। इसका इस्तेमाल करने वाली महिलाओं के मस्तिष्क तंत्र पर भी बुरा असर पड़ता है। इस दवा से ब्रेस्ट कैंसर के अलावा सर्वाइकल (रीढ़ की हड्‌डी) का कैंसर होने का भी बड़ा खतरा रहता है। वर्ष 2006 का एक अध्ययन बताता है कि दवा के दो साल के प्रयोग से ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना प्रबल हो जाती है। वर्ष 2012 के एक अध्ययन में यह पता चला कि 12 महीने या उससे अधिक समय तक डीएमपीए के उपयोग से आक्रामक स्तन कैंसर होने के कई केस सामने आए। डीएमपीए इंजेक्ट करने के पहले सम्बन्धित महिला को आगाह (कॉशन) करना जरूरी होता है। साथ ही डॉक्टर का यह दायित्व भी होता है कि वह इंजेक्शन लेने वाली महिला को डीएमपीए से होने वाले नुकसान के बारे में पहले ही बता दे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। ‘अंतरा’ के पैकेट्स पर भी हिदायत या जोखिम की चर्चा नहीं हैयहां तक कि दवा निर्माता कंपनी का नाम भी दर्ज नहीं है। सामान्य तौर पर बच्चों को दिए जाने वाले टीके में भी चार हिदायतों के साथ टीका लगाया जाता हैलेकिन डिम्पा इंजेक्शन लगाने के पहले कोई हिदायत नहीं दी जा रही है। दिहाड़ी मजदूर मुकेशचंद्र की पत्नी का नाम महज एक उदाहरण के बतौर पेश किया जा रहा हैजिसे डिम्पा इंजेक्शन लगाया गया और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। इंजेक्शन के पहले मुकेश की पत्नी पूरी तरह से स्वस्थ थीलेकिन कुछ ही दिनों बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी। 20 दिन में ही इतना रक्तस्राव हुआ कि एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डिम्पा इंजेक्शन लगाने वालों का कुछ पता नहीं चला। महिला की हालत गंभीर हुई तो महिला के पहले से ही बीमार होने का तोहमत मढ़ दिया गया। मुकेश की पत्नी की तरह के दर्जनों उदाहरण सामने आ चुके हैंजो इंजेक्शन का नतीजा अपने शरीर और अपनी सीमित आर्थिक क्षमता पर भुगत रहे हैं। डीएमपीए इंजेक्शन महिलाओं को रोगग्रस्त कर भावी नस्लों को खराब करने की साजिश साबित हो रहा है।

केंद्र सरकार का यह अभियान देश के निम्न वर्गीयनिम्न मध्यम वर्गीय ग्रामीण और गांव आधारित अशिक्षितअर्ध-शिक्षित कस्बाई आबादी को टार्गेट कर रहा है। जिला स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए ‘अंतरा’ के नाम से डीएमपीए दवा का इंजेक्शन महिलाओं में ठोका जा रहा है। जिला स्वास्थ्य केंद्रोंसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक कौन सी महिलाएं जाती हैं और वे किस वर्ग से आती हैं,इसके बारे में सबको पता है। स्वास्थ्य केंद्रों को अधिकाधिक इंजेक्शन लगाने का लक्ष्य दिया गया है। इन स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डॉक्टरों को यह भी नहीं कहा गया है कि इंजेक्शन देने के पहले वे सम्बन्धित महिला का हारमोनल-असेसमेंट करें उसे डीएमपीए इंजेक्शन के खतरों के प्रति आगाह करें। इंजेक्शन के स्टरलाइजेशन और उसके रख-रखाव को लेकर कोई हिदायत नहीं है। यहां तक कि महिलाओं को खुद ही इंजेक्शन ले लेने की सलाह दी जा रही है। इंजेक्शन देने के पहले सम्बद्ध महिला से सहमति लेने की औपचारिकता केवल कागज पर पूरी की जा रही है। महिलाओं से बिना पूछे धड़ल्ले से इंजेक्शन ठोका जा रहा है। जिस वर्ग से महिलाएं आती हैंउनकी जागरूकता का स्तर उन्हें इस काबिल ही नहीं बनाता कि वे लगने वाले इंजेक्शन के खतरों और जोखिम के बारे में कुछ जान पाएं। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन दवा बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘फाइज़र’ और चिल्ड्रेन्स इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन के साथ मिल कर कई गरीब देशों में डीएमपीए को ही ‘सायाना-प्रेस’ नाम से बेच रहा है। डीएमपीए इंजेक्शन सिरिंज के जरिए दिया जाता है जबकि ‘सायाना-प्रेस’ के पाउच में सुई लगी होती है। सुई को शरीर में चुभोकर पाउच का सिरा दबा देने से दवा शरीर के अंदर इंजेक्ट हो जाती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि भारत में भीसायाना-प्रेस’ को सीधे महिलाओं को देने की तैयारी चल रही है।

डीएमपीए इंजेक्शन और बिल एंड मेलिंडा गेट्‌स फाउंडेशन 

डीएमपीए का इस्तेमाल 1993-94 में कुछ खास प्राइवेट सेक्टर में हो रहा था। कई सामाजिक संस्थाएं इस इंजेक्शन के इस्तेमाल पर बैन लगाने की सुप्रीमकोर्ट से मांग कर रही थीं। 1995 में ड्रग्स टेक्निकल एडवाइज़री बोर्ड (डीटीएबी) और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑरगेनाइजेशन ने खास तौर पर राष्ट्रीय परिवार नियोजन अभियान में डीएमपीए के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया था। बोर्ड ने कहा था कि विशेष स्थिति में यह इंजेक्शन उसी महिला को लगाया जाएगा, जो इसके खतरों और जोखिम के बारे में जानकारी के साथ बाकायदा सूचित रहेंगी। वर्ष 2001 में कई दवाएं प्रतिबंधित हुईलेकिन डीएमपीए को प्रमोट करने वाली लॉबी इतनी सशक्त थी कि वह बैन नहीं हुईबस उसे प्राइवेट सेक्टर में सीमित इस्तेमाल की मंजूरी मिलीइस हिदायत के साथ कि इंजेक्शन का इस्तेमाल उन्हीं महिलाओं पर किया जाएगा जिनकी पहले काउंसलिंग होगी और उन्हें खतरों के बारे में आगाह कर उनकी औपचारिक सहमति ली जाएगी।

डीएमपीए इंजेक्शन के इस्तेमाल को लेकर हो रही कानूनी और व्यापारिक खींचतान में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के कूद पड़ने से डीएमपीए लॉबी मजबूत हो गई। फाउंडेशन ने पहले तो वर्ष 2012 में ब्रिटिश सरकार को साधा और फिर विश्व के विकासशील और गरीब देशों में जनसंख्या नियंत्रण में सहयोग देने के बहाने अपना रास्ता साफ कर लिया। फाउंडेशन ने मोदी सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को साधा और स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘सधते’ हुए परिवार कल्याण विभाग के जरिए ड्रग्स टेक्निकल एडवाइज़री बोर्ड (डीटीएबी) के पास प्रस्ताव भिजवाया कि डीएमपीए इंजेक्शन के इस्तेमाल पर लगी पाबंदी हटाई जाए। डीटीएबी ने उस समय इस प्रस्ताव को टाल दिया और कहा कि इंजेक्शन का कुप्रभाव और गहरा गया है। इसका इस्तेमाल करने वाली महिलाओं पर ओस्टिपोयोरोटिक-कुप्रभाव भीषण पड़ रहा है। लिहाजाडीटीएबी ने परिवार कल्याण विभाग को यह सलाह दी कि डीएमपीए इंजेक्शन के इस्तेमाल के बारे में देश के नामी स्त्री रोग विशेषज्ञों (गायनाकोलॉजिस्ट) से राय ली जाए और इसकी गहन पड़ताल कराई जाए। डीटीएबी ने अमेरिका के फूड और ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा डीएमपीए को ‘ब्लैक-बॉक्स’ में रखे जाने का हवाला भी दिया। लेकिन लोकतांत्रिक मोदी सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस सलाह पर कोई ध्यान नहीं दियाउल्टा चारों तरफ से दबाव बढ़ा दिया गया और सम्बद्ध महकमों पर सरकार का घेरा कस गया।

·   महिलाओं में इंजेक्ट कर रहे हैं यौन-अपराधियों को सजा में दी जाने वाली दवा

·   बिल गेट्स फाउंडेशन से साठगांठ कर स्वास्थ्य मंत्रालय कर रहा घिनौना कारनामा

·   जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर यूपी-बिहार समेत 7 राज्यों में शुरू हुआ गंदा खेल

·   देश की निम्न वर्गीय और निम्न-मध्यम वर्गीय माताओं को बांझ बनाने का कुचक्र

·   आंकड़ों का ‘फ्रॉड’ कर स्वास्थ्य मंत्रालय ने 145 जिलों में पहुंचाया डीएमपीए जहर

·   स्वास्थ्य केंद्रों को दिया टार्गेटअधिक से अधिक महिलाओं को दें डिम्पा इंजेक्शन

·   मिशन परिवार विनाश’ साबित हो रहा है भारत सरकार का ‘मिशन परिवार विकास

मंत्रालय के निर्देश पर परिवार कल्याण विभाग ने 24 जुलाई 2015 को विशेषज्ञों का सम्मेलन बुलाया और इस मसले पर विशेषज्ञों से सलाह-सुझाव लेने का प्रायोजित-प्रहसन खेला। इस सम्मेलन में उन संस्थाओंविशेषज्ञों और समाजसेवियों को बुलाया ही नहीं गयाजो डीएमपीए जैसी खतरनाक दवा के इस्तेमाल पर लगातार विरोध दर्ज कराते रहे और कानूनी लड़ाई लड़ते रहे हैं। एक हजार से अधिक संगठनों की साझा संस्था जन स्वास्थ्य अभियानसहेलीसामा जैसी तमाम संस्थाओं को इस सम्मेलन में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इस सम्मेलन ने यह तय भी कर लिया कि प्राइवेट सेक्टर में डीएमपीए इंजेक्शन का इस्तेमाल पहले से हो रहा हैइसलिए इसकी अलग से जांच कराने की कोई जरूरत नहीं है और अब इसे सार्वजनिक क्षेत्र में भी आजमाना चाहिए। दिलचस्प मोड़ यह आया कि अब तक विरोध दर्ज करते आ रहे ड्रग्स टेक्निकल एडवाइज़री बोर्ड ने सामुदायिक स्वास्थ्य प्रणाली (पब्लिक हेल्थ सिस्टम) में डीएमपीए इंजेक्शन का इस्तेमाल किए जाने की 18 अगस्त 2015 को मंजूरी दे दी। इस तरह मोदी सरकार ने देश की मांओं को बांझ बनाने वाली और भावी नस्ल को पंगु और विकलांग पैदा करने वाली दवा के अराजक इस्तेमाल की भूमिका मजबूत कर दी। डीएमपीए जैसी खतरनाक दवा के इस्तेमाल का विरोध करने वाले लोगों का मुंह बंद करा दिया गया और मीडिया के मुंह पर ‘ढक्कन’ पहना दिया गयाताकि कोई शोर न मचेकोई वितंडा न खड़ा हो।

मोदी सरकार के ताकतवर और हठी स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा ने जुलाई 2017 में ‘मिशन परिवार विकास’ के नाम पर ‘मिशन परिवार विनाश’ अभियान की शुरुआत कर दी। नड्‌डा ने खुलेआम कहा कि इसके जरिए वे 2025 तक देश की जनसंख्या को काबू में ले आएंगे। कैसे काबू में लाएंगेअब तक तो आप इसे समझ ही चुके होंगे। नड्‌डा ने यह भी दावा किया था कि इस परियोजना की पहल उन्होंने ही की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव सीके मिश्रा ने इस परियोजना के पक्ष में लंदन से अपना संदेश दिया। इस पर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की सह अध्यक्ष मेलिंडा गेट्स ने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए यह काम किया जा रहा है। मिशन परिवार विकास लॉन्च करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा ने दावा किया कि इस अभियान के जरिए वर्ष 2025 तक टोटल फर्टिलिटी रेट को 2.1 पर ले आया जाएगा। जबकि सच्चाई यह है कि देश का टोटल फर्टिलिटी रेट 2015-16 के सर्वेक्षण में ही 2.1 दर्ज किया जा चुका है। स्पष्ट है कि आधिकारिक आंकड़ों के फर्जीवाड़े में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा की सीधी मिलीभगत है। 

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के फंड पर चलने वाले इस अभियान की मॉनिटरिंग गेट्स फाउंडेशन का इंडिया हेल्थ एक्शन ट्रस्ट कर रहा है। इस सिलसिले में बिल गेट्स और उनकी पत्नी मेलिंडा गेट्स केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डायूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अन्य सम्बद्ध राज्यों के मुख्यमंत्रियों से लगातार सम्पर्क में हैं। उनकी सौहार्द मुलाकातें भी लगातार हो रही हैं। मिशन की फंडिंग का ब्यौरा क्या हैमिशन के ऑपरेशन का खर्च कहां से आ रहा हैदवा कहां से आ रही हैइसकी कीमत क्या हैइस पर रहस्य बना कर रखा जा रहा हैकोई पारदर्शिता नहीं है। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के आगे-पीछे सरकारें नाच रही हैं। फाउंडेशन के आगे विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था भी नतमस्तक रहती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन को फाउंडेशन ने 40 अरब डॉलर का फंड दे रखा है। इसके अलावा बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन विश्व स्वास्थ्य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ ऑरगेनाइजेशन) को हर साल तीन अरब डॉलर देता हैजो संगठन के सालाना बजट का 10 प्रतिशत होता है। पूरी दुनिया के स्वास्थ्य-अर्थशास्त्र पर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और उसके ‘सिंडिकेट’ का बोलबाला हैफिर मोदी सरकारयोगी सरकारनीतीश सरकाररघुबर सरकारसिंधिया सरकाररमन सरकार, शिवराज सरकार और सोनोवाल सरकार क्या बला है..!

 

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गांधी परिवार इस ‘चाणक्य’ से लेने जा रहा है गुरुमंत्र

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करना पड़ा है करारी हार का सामना

Last Modified:
Friday, 24 May, 2019
Gandhi Family

लोकसभा चुनावों में बुरी तरह मात खाने के बाद गांधी परिवार काफी पसोपेश में है। ऐसे में कांग्रेस की अगली रणनीति क्या होनी चाहिए, इसे लेकर आज देरशाम सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अपने सबसे विश्वसनीय नेता प्रणब मुखर्जी से मिलने जा रहे हैं। ये जानकारी वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय ने अपने एक विडियो पोस्ट के जरिये दी है। संतोष भारतीय ने बताया है कि वर्तमान परिस्थिति में गांधी परिवार ने प्रणब मुखर्जी के अनुभव का लाभ लेने का मन बनाया है।

देखें विडियो-

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मोदी की जीत पर मराठी अखबार लोकमत ने किया अनूठा प्रयोग

चुनावी कवरेज को लेकर अखबार के नए प्रयोग की हो रही है काफी चर्चा

Last Modified:
Friday, 24 May, 2019
Lokmat

लोकसभा चुनाव के परिणामों को सभी अखबारों ने अपने-अपने अंदाज में कवर किया है। सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की शानदार जीत को फ्रंट पेज पर रखते हुए कई नए प्रयोग किए हैं। इन सबके बीच मराठी अखबार ‘लोकमत’ (Lokmat) ने भी इस कवरेज को लेकर बहुत ही शानदार प्रयोग किया है। इस प्रयोग की काफी चर्चा हो रही है।

अखबार ने चुनाव परिणाम पर 24 मई को एक स्पेशल इश्यू ‘नमो नमः’ (NAMO NAMAH) निकाला है। अखबार का यह इश्यू काफी प्रभावशाली है, जिसमें फ्रंट पेज पर मोदी की नमस्कार की मुद्रा में बड़ी फोटो ली गई है और उसके नीचे प्रमुख पॉलिटिकल पार्टियों को मिलीं सीटों की संख्या दी गई है। इसके अलावा अंदर के पेजों पर भी इंफोग्राफ और इलस्ट्रेशन के माध्यम से आंकड़ों को दिखाया गया है, ताकि पाठकों को समझने में आसानी रहे। वहीं, इस स्पेशल इश्यू में चुनाव को लेकर विशेषज्ञों के विश्लेषण को भी शामिल किया गया है। 

इस पहल के बारे में ‘लोकमत मीडिया’ के वाइस प्रेजिडेंट (क्रिएटिव और कंटेंट स्ट्रैटेजी) संजीव नायर का कहना है, ‘स्पेशल इश्यू से कवरेज को और बेहतर बनाया जाता है। इसमें ग्राफ और इलस्ट्रेशन के द्वारा चुनावी नतीजों को समझने में आसानी होती है। इसके अलावा इसमें गहराई से विश्लेषण भी शामिल होते हैं।’

अखबार के स्पेशल इश्यू के फ्रंट पेज को आप यहां देख सकते हैं-

 

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अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं पर उतारी हार की खीझ, लिया ये बड़ा फैसला

समाजवादी पार्टी की ओर से मीडिया को चिट्ठी भेजकर दी गई जानकारी

Last Modified:
Friday, 24 May, 2019
Akhilesh Yadav

उत्तर प्रदेश की राजनीति में महागठबंधन का प्रयोग फेल हो जाने के बाद अब हर किसी के निशाने पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं। ऐसे में अखिलेश यादव ने अपनी खीज पार्टी के प्रवक्ताओं पर निकाली है। उन्होंने अपने सभी प्रवक्ताओं पर त्वरित कार्यवाही करते हुए उनके मनोनयन को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी की ओर से मीडिया चैनल्स के ब्यूरोज को भेजे गए लिखित संदेश में ये जानकारी देते हुए कहा गया है कि सपा का पक्ष रखने के लिए पार्टी के किसी भी पदाधिकारी को आमंत्रित न किया जाए।

पार्टी की ओर से मीडिया को भेजी गई चिट्ठी आप यहां पढ़ सकते हैं-

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आज भी कुछ अलग कर गया ‘द टेलीग्राफ’, देखें अंग्रेजी अखबारों का फ्रंट पेज

लोकसभा चुनाव में मोदी को जीत पर हर अखबार ने दिखाई है अपनी क्रिएटिविटी

Last Modified:
Friday, 24 May, 2019
The Telegraph

देश के भविष्य से जुड़ी सबसे बड़ी खबर को अंग्रेजी अख़बारों ने भी व्यापक स्तर पर प्रकाशित किया है। हर अख़बार ने कुछ अलग करने का प्रयास किया, ताकि ‘मोदी मैजिक’ की तरह उसकी क्रिएटिविटी भी पाठकों को मोहित कर जाए। इस मामले में हर बार की तरह ‘द टेलीग्राफ’ सबसे जुदा रहा। अख़बार ने लोकसभा चुनाव के परिणाम को इस अंदाज़ में पेश किया, जो दूसरों के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

‘द टेलीग्राफ’ के शुक्रवार के फ्रंट पेज पर कोई फोटो, ग्राफ़िक या कैरिकेचर नहीं है, फिर भी अख़बार ने कमाल कर दिया है। हैडर के नीचे परिणाम के आंकड़े लिखे हैं। मसलन, एनडीए 350, यूपीए 91, अन्य 101। इसके बाद बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है ‘HE IS BACK।’ इसके ठीक नीचे दी गई सबहेड कहती है ‘उत्तर, पूर्व और पश्चिम में शानदार बढ़त।’ इसके अलावा पहले पेज पर और कुछ नहीं है। जिसे ज्यादा रंग या कंटेंट देखने की आदत है, उसके लिए यह नीरस फ्रंट पेज हो सकता है, लेकिन रचनात्मकता समझने वालों के लिए इसके बहुत मायने हैं।

दूसरे नंबर पर हिन्दुस्तान टाइम्स रहा। अख़बार ने लगभग आधे पेज का नरेंद्र मोदी का ग्राफ़िक दिया है, जिसमें राष्ट्रवाद और विकास को भी दर्शाया गया है। इसके अलावा हिन्दुस्तान टाइम्स की हैडलाइन ‘NaMoMENT’ भी कुछ हटकर है। अख़बार ने फ्रंट पेज को खुला-खुला रखने के लिए ज्यादा कंटेंट नहीं रखा है। ग्राफ के सहारे यह समझाने की कोशिश की गई है कि भाजपा ने 2019 कैसे जीता? इसके साथ ही प्रमुख विपक्षी नेताओं के बयानों को फ्रंट पेज पर जगह मिली है। वैसे शीर्षक के मामले में टाइम्स ऑफ़ इंडिया भी पीछे नहीं है। अख़बार ने लेआउट से ज्यादा तवज्जो कंटेंट को भले ही दी हो, लेकिन लीड हैडलाइन में सारी क्रिएटिविटी को उड़ेल दिया गया है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया का शीर्षक है ‘चौकीदार का चमत्कार।’ पूरे चुनाव में ‘चौकीदार’ खूब चला है, इसलिए फाइनल रिजल्ट को इससे जोड़कर हैडलाइन बनाने का प्रयोग अच्छा है।

द हिन्दू का फ्रंट पेज ख़ास आकर्षक नहीं है। इसे परंपरागत रूप से डिज़ाइन किया गया है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के छोटे से फोटो के साथ ग्राफ चुनावी कथा बयां कर रहा है। अख़बार के पहले पेज पर कंटेंट की भरमार है। सामान्य मौकों पर इस तरह की प्रस्तुति चलती है, लेकिन इतने बड़े मौकों के लिए द हिन्दू का फ्रंट पेज आइडियल नहीं लग रहा। अख़बार की हैडलाइन ‘इंडिया गिव मोदी ए हाई फाइव’ भी सामान्य ही कही जा सकती है। इसी तरह डेक्कन क्रोनिकल और द इंडियन एक्सप्रेस के फ्रंट पेज भी ज्यादा असरकारक दिखाई नहीं देते। डेक्कन क्रोनिकल ने परंपरागत डिज़ाइन को प्राथमिकता दी है। यानी हैडलाइन, सबहेड, फोटो और उसके चारों ओर कंटेंट। द इंडियन एक्सप्रेस ने ज़रूर मोदी की एक बड़ी फोटो रखकर फ्रंट पेज को अच्छा दिखाने का प्रयास किया है। हालांकि, अख़बार की हैडलाइन थोड़ा उलझाने वाली है। लीड शीर्षक में कहा गया है ‘मोदी 2.024।’ इसके पीछे अख़बार का जो भी लॉजिक हो, लेकिन सामान्य पाठकों के लिए पहली ही नज़र में इसे समझ पाना थोड़ा मुश्किल है।

यहां देखें इन अखबारों का फ्रंट पेज

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मोदी की शानदार उपलब्धि पर ZEE समूह के पुनीत गोयनका ने जताई ये उम्मीद

लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए को मिला है पूर्ण बहुमत

Last Modified:
Friday, 24 May, 2019
Media Industry

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आ चुके हैं और इनमें बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज करते हुए केंद्र की सत्ता में वापसी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएंगे। मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने पहली बार 300 से ज्यादा सीटें जीती हैं। हालांकि एग्जिट पोल में भी मोदी के नेतृत्व में एनडीए को सबसे ज्यादा सीटें दिखाई गई थीं और परिणाम आते ही इस पर मुहर भी लग गई।

बीजेपी की इस बड़ी जीत के बाद केंद्र में बनने वाली नई सरकार को लेकर मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े लोग क्या सोचते हैं और उनकी इस सरकार से क्या अपेक्षाएं हैं? इस बारे में हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने इंडस्ट्री से जुड़े कुछ विशेषज्ञों से बात की।

इस बारे में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Zee Entertainment Enterprises Ltd) के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका का कहना है, ‘मेरे विचार से ट्रांसपैरेंसी और टेक्नोलॉजी दो प्रमुख पहलू हैं, जो मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर को आगे ले जाएंगे। सरकार को भी इस दिशा में अपने प्रयास जारी रखने चाहिए। हमारे देश में प्रतिभाओं और रचनात्मकता की भरमार है, जिसे आगे बढ़ाने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत पर मैं उन्हें बधाई देता हूं। कॉरपोरेट जगत को परिवर्तन के इस युग में शामिल होना चाहिए और राष्ट्र को वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।’

वहीं, ‘मलयाला मनोरमा’ (Malayala Manorma) के वाइस प्रेजिडेंट (सेल्स, मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग) वर्गीस चांडी का कहना है,‘मोदी की जीत को लेकर किसी तरह का आश्चर्य नहीं है, पहले से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि मोदी ही सत्ता में वापसी करेंगे। हां, बीजेपी और एनडीए के लिए इतने बहुमत से जीतना वाकई आश्चर्यजनक है। पार्टी को पूर्ण रूप से बहुमत मिलने पर यह अपने एजेंडे के अनुसार चल पाएगी और मुझे उम्मीद है कि इससे देश का विकास होगा।

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देखें, मोदी की जीत पर हिंदी अखबारों का कैसा रहा फ्रंट पेज

लोकसभा चुनाव 2019 में विपक्ष को करारी शिकस्त देते हुए भाजपा ने दर्ज की है बड़ी जीत

Last Modified:
Friday, 24 May, 2019
Narendra Modi

2014 की मोदी लहर 2019 में सुनामी में तब्दील हो गई। भाजपा ने ऐसा जनादेश हासिल किया, जिसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी। अब जीत इतनी बड़ी होगी, तो कवरेज भी बड़ी मिलना लाज़मी है। शुक्रवार के अख़बार मोदी की प्रचंड जीत और उसके विश्लेषण से पटे रहे। तकरीबन हर पन्ने पर चुनावी परिणाम से जुड़ी खबर थी। ऐसे मौकों पर फ्रंट पेज काफी मायने रखता है, क्योंकि यही तय करता है कि पाठक अख़बार पढ़ेगा या नहीं? लिहाजा सभी अख़बारों ने अपनी रचनात्मकता के घोड़े दौड़ाए और दूसरों से अलग करने का प्रयास किया।

कुछ प्रमुख अख़बारों की बात करें तो हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, पत्रिका और प्रभात खबर का पहला पेज मोदीमय रहा, लेकिन इन सबके बीच पत्रिका और प्रभात खबर, दोनों अख़बारों ने नरेंद्र मोदी की एक जैसी फोटो इस्तेमाल की है, मगर अलग-अलग एंगल से। इसके अलावा, सभी महत्वपूर्ण आंकड़ों को फ्रंट पेज पर चस्पा किया गया है, ताकि पढ़ने वाले को एक ही नज़र में सबकुछ समझ आ जाए। 

प्रभात खबर ने जहां मोदी की हाथ जोड़े फोटो को पूरे फ्रंट पेज पर रखा है, वहीं पत्रिका ने हैडर के साथ-साथ नीचे कुछ जगह छोड़कर सात कॉलम फोटो लगाई है। लेआउट के अलावा दोनों ही अख़बारों का शीर्षक भी सबसे जुदा है। पत्रिका की हैडलाइन है ‘मोदी शहंशाह...’ यहां शहं और शाह को अलग रंगों में रखा गया है। ऐसा करके अख़बार ने मोदी के साथ-साथ अमित शाह को भी शीर्षक में जगह दी है। प्रभात खबर की बात की जाए तो उसकी हैडलाइन है ‘मोदी लड़े, मोदी जीते।’ कहने को तो इसे बेहद सामान्य शीर्षक कहा जा सकता है, लेकिन इसमें बहुत गहराई है। वो इस तरह कि पूरा लोकसभा चुनाव मोदी के नाम पर लड़ा गया। मोदी को हराने के लिए विपक्ष एकजुट हो गया, तो भाजपा महज मोदी के नाम पर वोट मांगती रही। जनता ने भी प्रत्याशियों के गुण-अवगुणों की अनदेखी करते हुए मोदी को वोट दिए। इसी बात को प्रभात खबर ने अपनी हैडलाइन में उठाया है।

इसी तरह दैनिक भास्कर और अमर उजाला ने भी एक ही फोटो इस्तेमाल किया है और इसका एंगल भी एकदम समान है। हैडर के ऊपर से फोटो को थोड़ा नीचे तक लाया गया है। फोटो पर शीर्षक और कुछ टेक्स्ट देने के बाद नीचे पूरी चुनावी कथा दी गई है। मसलन, क्या फैक्टर रहे, कौन हारा-जीता आदि। शीर्षक के मामले में भास्कर की हैडलाइन अपेक्षाकृत अमर उजाला से ज्यादा आकर्षक लगती है। अख़बार ने मोदी के प्रिय शब्द ‘मित्रो’ और चुनाव में खूब चले नारे ‘मोदी है तो मुमकिन है’ से शीर्षक तैयार किया है। यानी ‘मित्रो! मोदी है तो मुमकिन है।’ जबकि अमर उजाला की हैडलाइन सपाट है ‘प्रचंड मोदी।’ राष्ट्रीय सहारा ने भी मोदी की पूरा एक बड़ी फोटो लगाकर उसे अपना फ्रंट पेज बनाया है। साथ ही अखबार ने मोदी के जीत के बाद के भाषण से एक कोट निकालकर उसे फ्रंट पेज का हिस्सा बनाया है। जो फोटो दैनिक भास्कर ने आधी लगाई है, राष्ट्रीय सहारा ने मोदी के वो ही फोटो पूरी लगाई है। वहीं, दैनिक जागरण का फ्रंट पेज हमेशा की तरह सामान्य है। जागरण शुरू से ही लेआउट और प्रस्तुति पर ध्यान देने के बजाय कंटेंट पर जोर देता आया है और उसने इस बार भी यह परंपरा कायम रही। अख़बार ने मोदी-शाह का कमल से निकलते हुए कैरिकेचर इस्तेमाल किया है। जिसमें नीचे ममता, राहुल और प्रियंका को मायूस दिखाया गया है। अख़बार की हैडलाइन ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ में भी कुछ ख़ास नया नहीं है। पूरे चुनाव लोग यह सुनते आ रहे हैं।

हिंदुस्तान की बात करें तो उसने भी इस प्रचंड जीत को सामान्य रूप में पेश किया है। अख़बार के फ्रंट पेज पर विज्ञापन है और उसी को ध्यान में रखते हुए नरेंद्र मोदी का एक फोटो लगाया गया है। जिसके चलते फ्रंट पेज खास आकर्षक नहीं लगता। हिंदुस्तान की हैडलाइन भी रचनात्मक दिखाई नहीं देती। अख़बार लिखता है ‘महाविजेता मोदी।’ हालांकि फ्रंट पेज पर दूसरे अख़बारों के मुकाबले हिंदुस्तान ने कंटेंट ज्यादा दिया है। हारने-जीतने वाले दिग्गज नेताओं को पहले पेज पर फोटो के साथ जगह दी गई है। कुल मिलाकर कहा जाए तो कम से कम फ्रंट पेज को आकर्षक बनाने के लिहाज से लोकमत, पत्रिका और प्रभात खबर ने बाकी हिंदी के अख़बारों को पीछे छोड़ दिया है।

यहां देखें इन अखबारों का फ्रंट पेज

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न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने ‘आजतक’ के खिलाफ बुलंद की आवाज, लगाए ये गंभीर आरोप

प्रमुख न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया को लिखा पत्र

Last Modified:
Thursday, 23 May, 2019
News Broadcasters

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ पर ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। ट्राई को लिखे एक लेटर में कुछ प्रमुख न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने आरोप लगाया है कि ‘आजतक’ दो लॉजिकल चैनल नंबर्स (LCNs) पर प्रसारित हो रहा है। आरोप है कि एक तरफ यह अपनी फ्रीक्वेंसी पर और दूसरी तरफ ‘तेज न्यूज’ को आवंटित फ्रीक्वेंसी पर प्रसारित किया जा रहा है।

बताया जाता है कि ये ट्राई के टेलिकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल सर्विसेज) इंटरकनेक्शन (डिजिटल एड्रेसेबल केबल टेलिविजन सिस्टम्स) रेगुलेशंस 2012 का उल्लंघन है। इसके साथ ही यह ‘Listing of TV channels on Electronic Programme Guide’ के बारे में 31 मई 2017 को जारी ट्राई के दिशा निर्देशों का भी उल्लंघन है। इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड (EPG) के तहत टीवी सर्विस प्रोवाइडर्स को अपने चैनल्स को जॉनरवाइज डिस्प्ले करने की अनुमति दी गई है।

ट्राई के वर्तमान नियमों के अनुसार, प्रत्येक ब्रॉडकास्टर को अपने चैनल का जॉनर डिस्प्ले करना आवश्यक है। इसके साथ ही मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) को चैनल को अपने नेटवर्क पर उसी जॉनर में रखना होगा, जो ब्रॉडकास्टर ने चैनल के लिए घोषित किया है।

दरअसल, 31 मई 2017 को ट्राई की ओर से कहा गया था, ‘यह देखा गया है कि कई मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स अपने कुछ चैनल्स को विभिन्न जॉनर के तहत कई लॉजिकल चैनल नंबर्स पर रख रहे हैं।’ इसके बाद ट्राई ने मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स को नियमों का पालन करने और ऐसा न होने पर ट्राई एक्ट-1997 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

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दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार गंगेश मिश्र के बारे में आई ये खबर

नोएडा में सेंट्रल डेस्क इंचार्ज के रूप में संभाल रहे थे जिम्मेदारी

Last Modified:
Thursday, 23 May, 2019
Gangesh Mishra

‘दैनिक जागरण’ में एसोसिएट एडिटर के तौर पर कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार गंगेश मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गंगेश मिश्र नोएडा में सेंट्रल डेस्क इंचार्ज के रूप में काम देख रहे थे। हालांकि, उनके इस्तीफे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है।

गंगेश मिश्र ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी के नेतृत्व में ‘जनसत्ता’ अखबार से वर्ष 1988 में शुरू किया था। यहां करीब आठ साल काम करने के बाद उन्होंने ‘अमर उजाला’ का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ अखबार में समाचार संपादक के तौर पर अपनी पारी शुरू की। दिल्ली में वर्ष 2009 में ‘दैनिक भास्कर’ की रिलांचिंग के दौरान वहाँ वे डिप्टी एडिटर के तौर पर कार्यरत थे।

गंगेश मिश्र वर्ष 2012 में जागरण समूह के साथ जुड़े। उस दौरान उन्हें जागरण के सहयोगी प्रकाशन ‘नई दुनिया’ में इंदौर का स्थानीय संपादक बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2014 में वे ‘नई दुनिया’ से स्थानांतरित होकर ‘दैनिक जागरण’, नोएडा में आए थे।

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Exit Poll में इन चैनलों ने मारी बाजी, लाइव शो में एग्जिट पोल एजेंसी के चेयरमैन रो पड़े

लगभग सभी एजेंसियों ने एग्जिट पोल में एनडीए को स्पष्ट बहुमत की बात कही थी

Last Modified:
Thursday, 23 May, 2019
Exit Poll

लोकसभा चुनाव के परिणाम भले ही कांग्रेस और विपक्षी दलों के लिए कष्टकारी हों, लेकिन एग्जिट पोल करवाने वाली एजेंसियां और मीडिया संस्थान इससे बेहद खुश हैं। इस ख़ुशी से आशय उनके ‘भाजपा’ समर्थक होने से नहीं, बल्कि उनकी भविष्यवाणी सच होने से है। लगभग सभी एजेंसियों ने एग्जिट पोल में एनडीए को स्पष्ट बहुमत की बात कही थी।

इन पोल का इतिहास कुछ ख़ास अच्छा नहीं रहा है। 2014 में ज़रूर जैसा बताया गया था, परिणाम उसके आसपास रहे, लेकिन इससे पहले हकीकत और अनुमान के बीच काफी बड़ा फासला था। यही वजह रही कि 2019 के एग्जिट पोल आने के बाद भी लोग चौंकाने वाले परिणामों से इनकार नहीं कर रहे थे। अब जब सभी एग्जिट पोल सही साबित हुए हैं, तो इनमें भरोसा बढ़ेगा और इस काम में लगी एजेंसियों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े नहीं किये जाएंगे। वैसे तो लगभग सभी एग्जिट पोल्स में मोदी लहर का जिक्र था, मगर सबसे सटीक अनुमान ‘आजतक’ का रहा। साथ ही, न्यूज 24 के लिए चाणक्य द्वारा किया गया सर्वे भी कसौटी पर खरा उतरा है। वहीं, एनडीटीवी के पॉलिटिकल एडिटर अखिलेश शर्मा का आंकलन भी सही बैठा है। उन्होने इसे लेकर 19 मई को ट्वीट किया है

 

‘आजतक एक्सिस माई इंडिया’ के एग्जिट पोल में एनडीए को 339-365 सीटें मिलने की बात कही गई थी,जबकि यूपीए को 77-108 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। वहीं उत्तर प्रदेश में भाजपा+को 62-68, सपा-बसपा गठबंधन को 10-16 और अन्य को 59-79 सीटें मिलने का अनुमान था। चुनाव परिणामों में ‘आजतक’ का एग्जिट पोल सबसे सटीक साबित नज़र आ रहा है। शाम 6 बजे तक एनडीए 347 सीटों पर आगे चल रहा है, जबकि यूपीए 86 तक ही सिमटकर रह गया है।  वहीं न्यूज24 के एग्जिट पोल ने बीजेपी को 300 (+-14) और एनडीए को 350(+-14) सीट दी गई थी। ऐसे में न्यूज 24 लगातार सही एग्जिट पोल देने के अपने इतिहास को एक बार फिर दोहरा गया।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के मामले में भी 'आजतक' चैनल का अनुमान लगभग सही रहा। यहां भाजपा 60 सीटें हासिल करती दिखाई दे रही है। हालांकि, सपा-बसपा गठबंधन अनुमानित आंकड़े से कुछ आगे (18) निकल गया है। इसी तरह बिहार और मध्य प्रदेश में भी चैनल ने जो अनुमान लगाया था, वही परिणाम बनकर सामने आये हैं। ‘आजतक एक्सिस माई इंडिया’ के एग्जिट पोल में एनडीए को बिहार में 38-40 और मध्य प्रदेश में 26-28 सीटें मिलने की बात कही गई थी। मौजूदा वक़्त में दोनों ही राज्यों में एनडीए क्रमश: 37,28 तक पहुँच गया है।

लोकसभा चुनाव की वोटिंग ख़त्म होने के बाद 19 मई को एग्जिट पोल जारी हुए थे। इसमें एबीपी-नीलसन ने एनडीए को 277, यूपीए को 130, न्यूज़18 ने एनडीए को 366, यूपीए को 82, न्यूज़ एक्स ने एनडीए को 242, यूपीए को 164, टाइम्स नाउ ने एनडीए को 306, यूपीए को 132, इंडिया टीवी ने एनडीए को 300, यूपीए को 120, रिपब्लिक (सी वोटर) ने एनडीए को 287, यूपीए को 126 और आजतक ने एनडीए को 339-365 यूपीए को 77-108 सीटें मिलने की बात कही थी। ‘आजतक’ असल परिणामों के सबसे ज्यादा नज़दीक रहा है।

अपनी इस सफलता पर जहां चैनल की टीम ख़ुशी से फूली नहीं समा रही है, वहीं सर्वे की ज़िम्मेदारी सँभालने वाले प्रदीप गुप्ता इस मौके पर भावुक हो गए। ‘इलेक्शन ब्रेकिंग’ कार्यक्रम के दौरान जब वरिष्ठ पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने प्रदीप की तारीफ करते हुए कहा, ‘आपने उल्लेखनीय काम किया है’ तो प्रदीप गुप्ता अपनी ख़ुशी को आंसुओं के रूप में सामने आने से नहीं रोक सके। उन्होंने कहा कि ये मेरी टीम की मेहनत का नतीजा है।

प्रदीप गुप्ता का विडियो आप यहां देख सकते हैं-

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ZEE समूह में हेमलता शर्मा को मिली बड़ी जिम्मेदारी

हेमलता शर्मा ने कॉस्मिक सॉफ्टवेयर कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने करियर की शुरुआत की थी

Last Modified:
Thursday, 23 May, 2019
Hemlata Sharma

‘जी समूह’ में हेमलता शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। दरअसल, हेमलता शर्मा को ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) में डिस्ट्रीब्यूशन हेड बनाया गया है। अपनी नई भूमिका में वह ‘ZMCL’ के सभी 14 चैनल्स (ZEE News, ZEE Uttar Pradesh Uttranchal, ZEE Madhya Pradesh Chhattisgarh, ZEE Hindustan, ZEE Salaam, ZEE Punjab Haryana Himachal, ZEE 24 Ganta, ZEE 24 Taas, ZEE Kalak, ZEE Rajasthan, ZEE Bihar Jharkhand, ZEE Orrisa, ZEE Business और WION) के डिस्ट्रीब्यूशन का कामकाज देखेंगी।

हेमलता शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत ‘कॉस्मिक सॉफ्टवेयर’ (Cosmic Software) कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की थी। इसके बाद उन्होंने मार्केटिंग और सेल्स का दामन थाम लिया। हेमलता को 24 साल से ज्यादा का अनुभव है। डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस और मार्केटिंग के साथ ही केबल टीवी, चैनल्स और ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है।

इससे पहले वह ‘सिटी’ (SITI),‘जीटीवी’ (Zee TV),‘जी टर्नर’(Zee Turner),‘रिलायंस’ (Reliance) और ‘भारती एयरटेल’(Bharti Airtel) जैसे ब्रैंड्स के साथ काम कर चुकी हैं। ZMCL में बतौर डिस्ट्रीब्यूशन हेड अपनी भूमिका संभालने से पहले वह ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ ग्रुप की सहयोगी कंपनी ‘ताज टेलिविजन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Taj Television India Pvt Ltd) के साथ काम कर रही थीं। यहां वह सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (डिस्ट्रीब्यूशन) के पद पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

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