अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर BW मैगजीन ने कुछ यूं किया नारी शक्ति का सम्मान

आज सारी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। दरअसल, हर साल आठ मार्च को...

Last Modified:
Friday, 08 March, 2019
women

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

आज सारी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। दरअसल, हर साल आठ मार्च को दुनिया के हर क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सम्मान और प्रशंसा प्रकट करते हुए उनकी हर क्षेत्र में स्थापित उपलब्धियों को याद किया जाता है।

इस मौके पर बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) ने महिलाओं को सम्मान देने के लिए देश की प्रभावशाली महिलाओं (Most Influential Women Leaders) की लिस्ट जारी की है। इन महिलाओं ने अपनी प्रतिभा के बल पर एक खास मुकाम हासिल किया है और दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। गौरतलब है कि ‘बिजनेसवर्ल्ड’ मैगजीन ने ‘डिकोड’ (Decode) के साथ मिलकर एक राष्ट्रव्यापी और औद्योगिक जगत का सर्वे किया है और लिस्ट तैयार की है।

नीचे देखें प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट-

Women's Day 2019

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नेशनल हेराल्ड पर पिघला अनिल अंबानी का 'दिल'

राफेल लड़ाकू विमान के बारे में प्रकाशित एक लेख के खिलाफ दर्ज कराया गया था पांच हजार करोड़ की मानहानि का दावा

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
National Herald

कांग्रेस नेताओं और नेशनल हेराल्ड  के लिए यह काफी राहत भरी खबर है। खबर ये है कि उद्योगपति अनिल अंबानी का रिलांयस समूह इन दोनों के खिलाफ दर्ज मानहानि का मुकदमा वापस लेने जा रहा है। दरअसल, अनिल अंबानी की रिलायंस समूह की कंपनियों ने अहमदाबाद की एक अदालत में पिछले साल 26 अगस्त को कांग्रेस के स्वामित्व वाले अखबार नेशनल हेराल्ड पर 5,000 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दायर किया था। समूह का दावा था कि राफेल लड़ाकू विमान के बारे में अखबार में छपा एक लेख उसके लिए 'अपमानजनक और मानहानिकारक' है।

रिलायंस डिफेंस, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर ने दीवानी मानहानि का मुकदमा नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड, उसके प्रभारी संपादक जफर आगा और खबर लिखने वाले पत्रकार विश्वदीपक के खिलाफ दायर किया था। ये कंपनियां अनिल अंबानी नीत रिलायंस समूह से जुड़ी हैं। रिलायंस समूह की कंपनियों का आरोप था कि अखबार में 'अनिल अंबानी फ्लोटेड रिलायंस डिफेंस 10 डेज बिफोर मोदी अनाउंस्ड राफेल डील' शीर्षक से प्रकाशित लेख से उसकी 'नकारात्मक छवि' बनी है और रिलायंस समूह और उसके चेयरमैन अंबानी के बारे में जन धारणा पर विपरीत असर पड़ा है। इससे आम जनता में संदेश गया है कि सरकार ने उन्हें कारोबार में गलत ढंग से फायदा पहुंचाने का कार्य किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस के वकील रशेष पारिख ने कहा है कि वो यह मुकदमा वापस लेने जा रहे हैं और इस बारे में उन्होंने नेशनल हेराल्ड के वकील पी एस चंपानेरी को बता दिया है। चंपानेरी ने कहा कि केस को वापस लेने की औपचारिक प्रक्रिया, गर्मी की छुट्टी के बाद अदालत में फिर से शुरू की जाएगी। बता दें कि जिन कांग्रेस नेताओं पर अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली Reliance Group ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था, उनमें रणदीप सिंह सुरजेवाला, सुनील जाखड़,ओमान चेंडी, अशोक चह्वाण, अभिषेक मनु सिंघवी, संजय निरूपम और शक्तिसिंह गोहिल शामिल थे। 

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रवीश बोले- कुछ एंकर्स को मंत्री बना दो, रोहित सरदाना ने याद दिलाया वो 'काला इतिहास'

लोकसभा चुनाव को लेकर मीडिया में दिखाए एग्जिट पोल को लेकर शुरू हो गया है चर्चाओं का दौर

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
Ravish Rohit

लोकसभा चुनाव के लगभग सभी एग्जिट पोल में भाजपा को बहुमत मिलता दिख रहा है। यानी ‘एक बार फिर मोदी सरकार’ और ‘आएगा तो मोदी ही’ जैसे नारे सही साबित होते नज़र आ रहे हैं। परिणामों से पहले के इस ‘परिणाम’ को लेकर मंथन और चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कोई इसे गलत करार दे रहा है, तो कोई जनमत का फैसला।

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर हुए ज्यादा मतदान का हवाला देते हुए एग्जिट पोल को कठघरे में खड़ा किया है। उनका यह ‘प्राइम टाइम’ सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है, इसके अलावा रवीश का एक और विडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। इस विडियो में ‘आजतक’ के एडिटर रोहित सरदाना को रवीश के सवाल का जवाब देते दिखाया गया है। हालांकि, ये सवाल-जवाब आमने-सामने के नहीं हैं।

रवीश ने अपने स्टूडियो में बैठकर भाजपा की इस अनुमानित प्रचंड जीत के लिए मीडिया एवं पत्रकारों पर कटाक्ष किया, जबकि रोहित ने एक अन्य विडियो में इसका जवाब दिया। सोशल मीडिया पर दोनों की विडियो क्लिपिंग को एक रूप देकर चलाया जा रहा है, जिसका शीर्षक है ‘रोहित सरदाना ने रवीश को धो दिया।’

रवीश कुमार पहले से ही मीडिया के एक वर्ग पर हमलावर रहे हैं। उनका मानना है कि कुछ पत्रकार सरकार के कर्ताधर्ताओं से तीखे सवाल पूछने से कतराते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू को लेकर भी उन्होंने संबंधित पत्रकारों पर निशाना साधा था। लोकसभा चुनाव के वक़्त जिस तरह से मोदी मीडिया में छाए रहे, इससे भी रवीश नाराज़ हैं। अपने इस विडियो में रवीश कहते नज़र आ रहे हैं कि ‘यह चुनाव बहुत खतरनाक है। चुनाव आयोग की तो मैं बात करना नहीं चाहता। जिस तरह से मीडिया ने चुनाव में मेहनत की है, मुझे लगता है कि कुछ न्यूज़ एंकर को भी मंत्री बनाना चाहिए...कुछ मालिकों को भी मंत्री बनाना चाहिए। उन्हें कैबिनेट और न्यूज़ एंकर को राज्य मंत्री का दर्जा देना चाहिए।’ रवीश ने भले ही किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा उन्हीं पत्रकारों और न्यूज़ चैनलों की तरफ था जिन्होंने पीएम मोदी को ज्यादा कवरेज दी।

रवीश कुमार का यह विडियो सामने आने के बाद रोहित सरदाना ने भी उन्हें अपने ही अंदाज़ में जवाब दिया। विडियो में रोहित किसी से बात करते हुए कहते दिखाई दे रहे हैं। इसमें जब किसी ने पूछा, ‘रोहित भाई आपके एग्जिट पोल से काली स्क्रीन वाले पत्रकार बहुत गुस्से में हैं।‘ इस पर रोहित जवाब देते हैं, ‘भाई साहब ऐसा है कि वो तो हमेशा ही गुस्से में रहते हैं। आज वो कह रहे हैं कि कुछ न्यूज़ एंकर और मीडिया मालिकों को मंत्री बना दिया जाना चाहिए, क्यों? उस दिन तो वो मंत्री नहीं बने थे, जिस दिन अपने स्टूडियो में बैठकर वो मंत्री डिसाइड करते थे।’ इसके बाद रोहित बाकायदा एक्टिंग करते हुए आगे कहते हैं, भाई साहब कुछ लोगों के साथ दिक्कत है, उन पर कमेंट करने का मतलब है कि आप अपना समय व्यर्थ गँवा रहे हैं।’

सोशल मीडिया पर दोनों पत्रकारों के विडियो को एक रूप देकर वायरल किया जा रहा है। चुनावी मौसम में इस तीखी चुनावी बयानबाजी को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। बाला नामक यूजर ने ट्विटर पर यह विडियो शेयर किया है। अब तक इसे 11 हजार के आसपास लाइक मिले हैं और 5 हजार से ज्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है। इस पोस्ट पर रविश और रोहित के समर्थन और विरोध में 400 से ज्यादा कमेंट भी आ चुके हैं।

इस विडियो को आप यहां देख सकते हैं-

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जानें, क्यों ये साल रहा NDTV समूह के लिए शानदार

ग्रुप की ऑपरेटिंग कॉस्ट में भी पिछले साल के मुकाबले दर्ज की गई है कमी

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
NDTV

‘एनडीटीवी ग्रुप’ (NDTV Group) के लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 (FY 2018-19) काफी फायदेमंद रहा है। ग्रुप ने इस अवधि के लिए 90.2 करोड़ रुपए का टर्नअराउंड घोषित किया है, जबकि 10.2 करोड़ रुपए का प्रॉफिट घोषित किया गया है। इसके अलावा पिछले साल के मुकाबले ग्रुप की परिचालन लागत (operating costs) में भी 113.1 करोड़ रुपए की कमी आई है।

ग्रुप का यह प्रदर्शन अब तक के बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक है। पिछले वित्तीय वर्ष में ग्रुप को 80 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इस बार ग्रुप की ब्रॉडकास्ट कंपनी ‘एनडीटीवी लिमिटेड’ (NDTV Limited) ने 13.3 करोड़ रुपए के प्रॉफिट की घोषणा की है। कंपनी को पिछले 14 सालों में इस बार सबसे ज्यादा प्रॉफिट हुआ है। पिछले साल कंपनी को 61.4 करोड़ रुपए का लॉस हुआ था। वहीं, डिजिटल की बात करें तो ग्रुप की डिजिटल कंपनी ‘एनडीटीवी कंवर्जेंस’ (NDTV Convergence) ने चौथी तिमाही की अब तक की सबसे बेहतरीन कमाई की है।

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अब आपकी टीवी स्क्रीन पर नहीं दिखाई देगा NaMo TV, ये है वजह

31 मार्च को लॉन्चिंग के बाद से ही शुरू हो गया था इस चैनल को लेकर विवाद

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
Namo TV

लोकसभा चुनाव से पहले 31 मार्च को अपनी लॉन्चिंग के साथ ही विवादों में घिरा नमो (नरेंद्र मोदी) टीवी चैनल आखिर बंद हो गया है। जितनी खामोशी के साथ यह चैनल शुरू हुआ था, उतनी ही खामोशी के साथ यह चैनल टीवी स्क्रीन पर दिखाई देना बंद हो गया है। बताया जाता है कि 17 मई से इस चैनल को ऑफ एयर कर दिया गया है। डीटीएच ऑपरेटर्स जैसे कि विडियोकॉन, डिश टीवी और टाटा स्काई  ने इस टीवी चैनल को फ्री टू एयर (FTA) करार दिया था। ऐसे में इस चैनल को देखने के लिए उपभोक्ताओं को पैसा नहीं देना पड़ रहा था। ये चैनल पूरे देश में दिख रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस चैनल को लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के प्रचार अभियान के माध्यम के रूप में शुरू किया गया था। अब चूंकि लोकसभा चुनाव खत्म हो गया है, इसलिए अब जरूरत न होने पर इस चैनल को बंद कर दिया गया है।

गौरतलब है कि इस चैनल पर सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने भाषण और भारतीय जनता पार्टी से संबंधित सामग्री दिखाई जाती थी। इसको लेकर चैनल पर विपक्षा पार्टियों ने कई सवालिया निशान लगाए थे और चुनाव आयोग से शिकायत की थी। इस शिकायत में कहा गया था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान आचार संहिता लागू होने के दौरान एक राजनीतिक दल को कैसे चैनल चलाने की इजाजत दी जा सकती है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि अगर चुनाव आयोग द्वारा चैनल को अनुमति नहीं प्रदान की गई है तो इस पर कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।

विपक्षी पार्टियों द्वारा की गई शिकायत के बाद इसकी लॉन्चिंग को लेकर चुनाव आयोग ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) को पत्र लिखकर जवाब मांगा था। तब सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने चुनाव आयोग को बताया था कि ‘नमो टीवी’ कोई लाइसेंसशुदा चैनल नहीं, बल्कि विज्ञापन प्लेटफॉर्म है, इसलिए इसे किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं है।

इसके बाद चुनाव आयोग ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति द्वारा ‘नमो टीवी’ के कंटेंट को प्रमाणित करने के लिए लिखा था। कहा गया था कि ‘नमो टीवी’ पर आने वाले सभी विज्ञापनों को इस कमेटी से होकर गुजरना होगा। 

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पत्रकार प्रिया रमानी मामले में एमजे अकबर ने कोर्ट में इस बात से किया इनकार

दिल्ली की अदालत में पेश हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
Priya-Akbar

पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ दर्ज कराए गए मानहानि के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। सवाल-जवाब के दौरान एमजे अकबर ने इस बात से इनकार किया कि वे वर्ष 1993 में एक नौकरी के इंटरव्यू के सिलसिले में मुंबई के ओबेराय होटल में प्रिया रमानी से मिले थे। इसके अलावा एमजे अकबर ने इस बात से भी इनकार किया कि उन्होंने होटल के कमरे में प्रिया रमानी को शराब ऑफर की थी और उन दोनों के बीच बातचीत प्रोफेशनल से ज्यादा पर्सनल थी। एमजे अकबर का कहना था, ‘जब प्रिया रमानी से उनकी मुलाकात ही नहीं हुई तो यह कहना गलत है कि उन्होंने रमानी से उनके लेखन कौशल, उनके करंट अफेयर्स ज्ञान आदि के बारे में सवाल पूछे थे।’

बचाव पक्ष ने करीब तीन घंटे तक एमजे अकबर से सवाल किए। इस बीच एमजे अकबर की वकील गीता लूथरा व प्रिया रमानी की वकील रेवेका जॉन के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई। इस दौरान कोर्ट रूम में महिला अधिवक्ता समेत बड़ी संख्या में महिला पत्रकार मौजूद थीं। इस मामले में अभी जिरह पूरी नहीं हुई है। कोर्ट ने मामले में अगली तारीख छह जुलाई की दी है।

गौरतलब है कि #MeToo कैंपेन के तहत प्रिया रमानी ने अकबर पर 20 साल पहले उनके साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। हालांकि अकबर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद अकबर ने प्रिया रमानी के खिलाफ दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था। अकबर ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद पिछले वर्ष 17 अक्टूबर को विदेश राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

पिछले दिनों इस मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि के आरोप तय कर दिए थे। वहीं, प्रिया रमानी ने इस मामले में अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि वह सुनवाई का सामना करेंगी। इस मामले में सोमवार को एमजे अकबर से जिरह हुई।

बता दें कि प्रिया रमानी बतौर पत्रकार एमजे अकबर के साथ काम कर चुकी हैं। सोशल मीडिया पर प्रिया रमानी के इस आरोप के बाद तो एमजे अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों की जैसे बाढ़ सी आ गई थी। यह मामला सामने आने के बाद संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर और तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की सदस्यता निलंबित कर दी थी।

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वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बोले, इस 'खेल' में बहुत अमीर होने वाले हैं कुछ लोग

मीडिया में दिखाए गए एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर उठाए कई सवाल

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
Abhisar Sharma

क्या वास्तव में भाजपा को इतनी सीटें मिलने जा रही हैं? क्या नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे? ये कुछ सवाल हैं, जो एग्जिट पोल सामने आने के बाद पूछे जा रहे हैं। लगभग सभी एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए को बहुमत मिलने की बात कही है। लिहाजा, ऐसे में इन पोल का विश्लेषण भी ज़रूरी हो जाता है। वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने यही करने का प्रयास किया है। साथ ही उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया है कि मीडिया संस्थानों पर ‘मनमाफिक’ एग्जिट पोल तैयार करने का कितना दबाव था। यानी एक तरह से अभिसार ने एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं।

यूट्यूब चैनल ‘न्यूज़ क्लिक’ के लिए अपने विडियो में अभिसार ने खुलासा किया कि एग्जिट पोल के सर्वेक्षण के काम में लगीं दो एजेंसियां भाजपा के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करती हैं। इसके अलावा, एक एजेंसी जिसने भाजपा को 300 सीटों पर जीत दिखाई थी, उसके सर्वे में सट्टा बाज़ार का पैसा लगा है। लिहाजा, इन एजेंसियों से निष्पक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इतना ही नहीं, अभिसार ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रत्येक एग्जिट पोल एजेंसी पर दबाव डाला गया कि विपक्ष की सीटों को कम करने दिखाया जाये। यानी विपक्ष कितनी सीटें जीत सकता है, यह आंकड़ा जानबूझकर कम किया जाये।

अभिसार शर्मा के मुताबिक, उन्हें यह भी पता चला है कि एक न्यूज़ चैनल, जिसने भाजपा को एग्जिट पोल में 180 सीटें दी थीं, उस पर इतना दबाव डाला गया कि बाद में उसने सीटें बढ़ाकर 250 कर दीं। अभिसार का तो यहाँ तक कहना है कि एग्जिट पोल का यह खेल सट्टा बाज़ार के लिए रचा गया है। इस खेल में कई लोग बहुत अमीर होने वाले हैं। गौरतलब है कि एग्जिट पोल के नतीजे सामने आने के बाद शेयर बाज़ार में एकदम से उछाल देखने को मिला था।

अभिसार शर्मा का यह विडियो आप यहां देख सकते हैं-

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जानें, UC Web कंपनी में क्यों छापा मारने पहुंची दो राज्यों की पुलिस

छापे के दौरान पुलिस टीम को नहीं मिली अपने मकसद में सफलता

Last Modified:
Monday, 20 May, 2019
UC Web

चीन के अलीबाबा समूह की अग्रणी मोबाइल इंटरनेट कंपनी UC Web (UC Broswer/UC News) के खिलाफ पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। दरअसल, आपराधिक मानहानि के मामले में कंपनी के दो अधिकारियों के कोर्ट में पेश न होने पर पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए गुरुग्राम स्थित अलीबाबा ग्रुप के ऑफिस समेत कई ठिकानों पर 17 मई को छापा मारा, लेकिन दोनों ही पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े।

गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र सिंह परमार द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मानहानि के मामले में पिछले दिनों ही गाजियाबाद की एक अदालत ने इस कंपनी के इंडिया हेड और जनरल मैनेजर ‘Damon Xi’  व एक अन्य कर्मचारी ‘Steven Shi’ के खिलाफ दूसरा गैरजमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इससे पहले अप्रैल में भी उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया गया था। इसके बावजूद कोर्ट में पेश न होने पर ये दूसरा वारंट जारी किया गया था। बताया जाता है कि कोर्ट ने दोनों आरोपियों को इससे पहले 24 दिसंबर 2018 को गाजियाबाद की अदालत में पेश होने के आदेश दिए थे, लेकिन आदेश का पालन न होने पर अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

गुरुग्राम पुलिस के साथ ही यूपी की पुलिस भी दोनों को तलाश रही है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ दो बार गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं। इसके बावजूद दोनों पुलिस और कोर्ट को चकमा देते हुए अदालत में हाजिर नहीं हो रहे हैं। 17 मई को छापे की कार्रवाई के तहत गुरुग्राम और यूपी पुलिस की संयुक्त टीम ने गुरुग्राम स्थित ‘टाइम टॉवर’ (Time Tower) बिल्डिंग में कंपनी के ऑफिस और ‘एस्सेल टॉवर’ (Essel Tower) के कई फ्लैट्स पर छापा मारा,  लेकिन दोनों ही आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े।

बताया जाता है कि कंपनी दोनों को अपना कर्मचारी मानने को ही तैयार नहीं है, जबकि खुद कंपनी ने ही Damon Xi को दुनियाभर में अलीबाबा मोबाइल बिजनेस ग्रुप के जनरल मैनेजर के तौर पर न सिर्फ पेश किया, बल्कि मीडिया को कई इंटरव्यू भी दिए। कंपनी की एचआर हेड (इंडिया) यामिनी सिम्हा ने पुलिस को लिखित बयान भी दिया है, जिसे पुलिस द्वारा 28 मई को गाजियाबाद कोर्ट में होने वाली सुनवाई में पेश किया जाएगा।

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फोटो जर्नलिस्ट की पिटाई मामले में चुनाव आयोग ने लिया ये एक्शन

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप आए थे मतदान करने

Last Modified:
Monday, 20 May, 2019
Photo Journalist

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बड़े बेटे और विधायक तेजप्रताप यादव के बॉडीगार्ड्स द्वारा रविवार को फोटो जर्नलिस्ट रंजन राही के साथ मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में तेजप्रताप यादव ने रंजन राही के खिलाफ हवाई अड्डा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, वहीं निर्वाचन आयोग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए पटना के डीएम रवि कुमार से जानकारी मांगी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एचएन श्रीनिवास का कहना है कि डीएम की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि रविवार को यह मारपीट उस समय की गई, जब रंजन राही के साथी का पैर तेजप्रताप की कार के नीचे आ गया। इस दौरान रंजन राही ने कथित रूप से तेजप्रताप के वाहन का शीशा तोड़ दिया। तेजप्रताप वेटेरिनरी कॉलेज में लगे मतदान केँद्र पर मतदान करने आए थे। इसके बाद तेजप्रताप के बॉडीगार्ड्स ने रंजन के साथ मारपीट कर दी। बाद में मीडिया से बातचीत में तेजप्रताप ने इस मामले में बॉडीगार्ड्स का बचाव करते हुए कहा था कि पत्रकारों को पीछे हट जाना चाहिए था। तेजप्रताप के बॉडीगार्ड्स द्वारा फोटो जर्नलिस्ट के साथ मारपीट और तेजप्रताप के इस तरह के बयान की पत्रकारों से जुड़ी कई संस्थाओं ने निंदा की है। उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बेटे से माफी की मांग की है।

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मीडिया की ‘गैरजिम्मेदार’ रिपोर्टिंग पर सरकार कुछ यूं लगाएगी लगाम

कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी बोले, अच्छी स्टोरी नहीं है तो बंद कर देना चाहिए चैनल

Last Modified:
Monday, 20 May, 2019
Media-Covera

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी सरकार मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर लगाम लगाने के लिए एक कानून बनाने पर विचार कर रही है, ताकि इसकी गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर लगाम लग सके।

मैसूर जिला कन्नड़ साहित्य परिषद की ओर से रविवार को आयोजित एक बुक लॉन्चिंग के मौके पर कुमारस्वामी का कहना था कि मीडिया की इस तरह की गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग को देखते हुए उन्होंने पिछले एक महीने से मीडिया से बात करना बंद कर दिया है।

कुमारस्वामी का यह भी कहना था, ‘हालांकि पूर्व मंत्री और जेडी (एस) चीफ एएच विश्वनाथ ने अपने भाषण में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मीडिया को संबोधित करने से डरते हैं, लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं है। मीडिया के साथ मेरे काफी अच्छे रिश्ते रहे हैं, लेकिन अब चूंकि मीडिया गैरजिम्मेदार रिपोर्टिंग कर रही है, खासकर नेताओं को जोकर्स की तरह दिखाया जाता है, मैं अब मीडिया से उतनी बात नहीं करता हूं।’

कुमारस्वामी ने कहा, ’यदि किसी टीवी चैनल के मुखिया के पास पर्याप्त अच्छी स्टोरी नहीं हैं तो उसे चैनल को बंद कर अपने घर चले जाना चाहिए, लेकिन गलत रिपोर्टंग नहीं करनी चाहिए। इस तरह की फर्जी खबरें और बेकार की डिबेट न तो समाज और न ही लोगों के किसी काम की हैं। पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में नैतिकता होती थी, लेकिन अब अधिकांश चैनल नैतिकता का पालन नहीं करते हैं। मीडिया को यह समझना चाहिए कि मैं उनकी रिपोर्टिंग के कारण नहीं, बल्कि राज्य की 6.6 करोड़ जनता के कारण अपने पद पर बना हुआ हूं।

मीडिया से अपनी नाराजगी जताते हुए कुमारस्वामी का यह भी कहना था कि मीडिया ने उनके अच्छे कामों की बजाय गलत और झूठी रिपोर्ट्स पर फोकस किया है। उन्होंने कहा, ‘लोग मेरे पास रोजाना विभिन्न परेशानियां लेकर आते हैं और मैं उनकी मदद करने की कोशिश करता हूं लेकिन मीडिया सूखे समेत लोगों की परेशानियों को हाईलाइट नहीं करना चाहता है, बल्कि उसका पूरा ध्यान सनसनीखेज अथवा झूठी खबरों पर रहता है।’

आखिर में उन्होंने कहा, ‘क्या आपको लगता है कि सरकार चुप बैठी रहेगी। सरकार एक ऐसा कानून बनाने पर विचार कर रही है, जिससे इस तरह की गैरजिम्मेदार रिपोर्टिंग पर लगाम लगाई जा सके।’

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Republic TV की महिला पत्रकार के उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस ने उठाया ये कदम

पिछले साल दिल्ली में जिग्नेश मेवानी की रैली के दौरान का है मामला

Last Modified:
Saturday, 18 May, 2019
Republic TV

‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) की पत्रकार के साथ बदसलूकी करने और उन्हें परेशान करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने दलित नेता जिग्नेश मेवानी के सहयोगी अपूर्व सिंह के खिलाफ शुक्रवार को चार्जशीट दायर कर दी है। उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी अपूर्व सिंह पर आईपीसी की धारा 509, 506, 341 और 34 के तहत पटियाला हाउस कोर्ट में मेट्रोपॉलिटन मजिस्‍ट्रेट प्रीति परेवा के समक्ष चार्जशीट दायर की गई है।

इस मामले में पिछले साल अक्टूबर में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस मामले की जांच कर रही थी। अब जाकर चार्जशीट दाखिल की गई है। पत्रकार ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2018 में दिल्ली में जिग्नेश मेवानी की हुंकार रैली को कवर करते समय भीड़ ने उन्हें घेर लिया था और अपूर्व सिंह ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था।

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