पुलिस की नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस कवर करने वाले ब्यूरोचीफ को ही पुलिस ने बताया 'फरार'

छत्तीसगढ़ के बस्‍तर में पत्रकारों के प्रति पुलिस की दमनकारी नीति एक बार फिर सामने आई है...

Last Modified:
Wednesday, 16 August, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

छत्तीसगढ़ के बस्‍तर में पत्रकारों के प्रति पुलिस की दमनकारी नीति एक बार फिर सामने आई है। इस बार तीन माह पुराने एक आपराधिक मामले में बस्तर पुलिस ने संदिग्ध रूप से हिंदी अखबार देशबंधु के ब्यूरोप्रमुख देवशरण तिवारी का नाम घसीट लिया। छत्तीसगढ़ सरकार के इस मान्यता प्राप्त पत्रकार का नाम पुलिस ने चालान पेश करते समय आरोपियों की लिस्ट में जोड़ दिया गया है।

इतना ही नहीं पुलिस ने जगदलपुर की एक अदालत में तिवारी को फरार भी बताया। लेकिन कोर्ट में पत्रकार ने दलील दी की वे हर रोज अपने कार्यालय में काम करते हैं, जो बस्तर में पुलिस अधीक्षक के कार्यालय से आधा किलोमीटर दूर है।

तिवारी ने कहा, ‘तीन महीने पहले, नागर्नर शहर के पास बस्तर परिवहन संघ के दो समूहों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। इन दोनों ग्रुप में से एक का संबंध कांग्रेस पार्टी से था, जबकि दूसरे का भाजपा से। इस पूरे मामले की उन्होंने लगातार कवरेज भी की। झगड़े के बाद, कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। लेकिन पिछले हफ्ते पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया है, जिसमें आरोपी बताकर उनका नाम भी शामिल किया गया।

बता दें कि इस मामले में उनके अतिरिक्त एक और टीवी पत्रकार महेंद्र महापात्र को भी फरार आरोपी बताया गया है।

उन्होंने कहा, ‘मुझे हैरानी है, क्योंकि पिछले तीन महीने से मैं बड़े ही आराम से बस्तर में घूम रहा हूं और इस दौरान, पुलिस कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए मुझे आमंत्रित भी किया और मैं इन प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद भी रहा हूं।

पिछले दो वर्षों में बस्तर में पुलिस की इस तरह की कार्रवाई के शिकार होने वाले तिवारी पांचवें पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर उन्होंने कई रिपोर्ट प्रकशित की, और शायद इसी वजह से उनका नाम इस मामले में घसीटा गया। उन्होंने बताया कि कुछ वकीलों ने उनसे कहा कि उनका नाम एफआईआर में पिछले हफ्ते तक नहीं था।    

वहीं इस बीच बस्तर प्रेस क्लब ने तिवारी के खिलाफ उठाए गए इस पुलिसिया कदम को एक षड्यंत्रबताया। बस्तर प्रेस क्लब के अध्यक्ष एस. करीमुद्दीन ने कहा, ‘इस मामले को लेकर बस्तर के पत्रकारों में बेहद गुस्सा है। हम इस मामले को वरिष्ठ अधिकारियों और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के समक्ष उठाएंगे।

उधर, बस्तर के पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख ने इस मामले में किसी भी तरह के दबाब से इनकार किया और कहा कि अभी तक इस मामले में किसी की भी चार्ज शीट नहीं बनाई गई है। उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में 22 अभियुक्तों के खिलाफ शिकायत आई थी, जिनमें से अभी तक चार को गिरफ्तार किया गया है और 18 लोगों के खिलाफ आरोपों की जांच की जा रही है। यदि वे दोषी नहीं पाए जाते तो उन्हें छोड़ दिया जाएगा, लेकिन अभी तब तक सभी सिर्फ संदेह के घेरे में हैं।


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