Harvest TV: लगा शुरुआती झटका, उठे कई सवाल...  

26 जनवरी को लॉन्च हुआ अंग्रेजी न्यूज़ चैनल ‘हार्वेस्ट टीवी’ को शुरूआती झटका लगा है...

Last Modified:
Monday, 11 February, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

26 जनवरी को लॉन्च हुआ अंग्रेजी न्यूज़ चैनल ‘हार्वेस्ट टीवी’ को शुरुआती झटका लगा है। हार्वेस्ट टीवी से बतौर कंसल्टेंट के रूप में जुड़े बरुण दास ने चैनल से दूरी बना ली है। उन्होंने बाकायदा कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को ख़त लिखकर इसकी सूचना दी है। बहुत थोड़े से वक़्त में दास का इस तरह चैनल को छोड़ना दर्शाता है कि वहां कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हार्वेस्ट टीवी से जुड़ने से पहले बरुण दास ‘ज़ी न्यूज़’ के सीईओ रह चुके हैं। हालांकि, उन्होंने अपने वेंचर को आगे बढ़ाने के लिए ‘ज़ी’ में अपनी पारी को विराम दे दिया था। 

बरुण दास पिछले तीन सालों से अपने हेल्थ ऐप और सहारा टीवी जैसे मीडिया संस्थानों को सलाह देने पर केंद्रित थे। जब ‘हार्वेस्ट टीवी’ का सेटअप हुआ, तो वो उसके साथ जुड़ गए। माना जा रहा था कि दास यहाँ लंबी पारी खेल सकते हैं, क्योंकि उनके पास काफी अनुभव है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

हार्वेस्ट टीवी के प्रमोटर्स के तौर पर दीपक चौधरी और कपिल सिब्बल की पत्नी की फर्म है। पर चैनल के शेयरहोल्डर्स इसे विशुद्ध रूप से निष्पक्ष न्यूज़ चैनल बताते है और कहते हैं इसमें कपिल सिब्बल की कोई भूमिका नहीं है। हालांकि बरुण दास अपनी पारी की समाप्ति के लिए पत्र कपिल सिब्बल को ही लिखा है।

जब हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया ने इस बावत दीपक चौधरी से बात की तो उनका कहना है कि बरुण दास ने इस्तीफा हमारे साथ बातचीत करके ही दिया है।

बरुण दास के इस्तीफे के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं- जैसे यदि कपिल सिब्बल का हार्वेस्ट टीवी से कोई लेना देना नहीं होता, तो दास ग्रुप से अलग होने की सूचना सिब्बल को पत्र लिखकर क्यों देते?

‘हार्वेस्ट टीवी’ ने बरुण दास के इस्तीफे की पुष्टि की है। उनके एकदम से इतना बड़ा फैसला लेना निश्चित तौर पर चौंकाने वाला है, लेकिन उन्होंने इसकी वजह अपने पत्र में स्पष्ट कर दी है। बरुण श्रीमती सिब्बल के रुख से नाराज़ और आहात थे, इसीलिए उन्होंने ‘हार्वेस्ट’ को अलविदा कहने का फैसला लिया।

‘जी न्यूज’ से जुड़ने से पहले बरुण दास एमसीसीएस (मीडिया कंटेंट एंड कम्युनिकेशन सर्विस) के साथ एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट जुड़े हुए थे। एमसीसीएस में दास मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, रिसर्च औऱ स्पेशल प्रोजेक्ट्स को हेड कर रहे थे। एमसीसीएस के अपने कार्यकाल में वह स्टार आनंद में बिजनेस हेड की भूमिका में भी थे। बरुण दास कुआललम्पुर और मलेशिया स्थित एस्ट्रो एशिया नेटवर्क में भी बिजनेस डेवेलपमेंट की भूमिका में रह चुके हैं। एस्ट्रो एशिया के दौरान ही उन्होंने एनडीटीवी और एस्ट्रो एशिया का ज्वाइंट बेंचर बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी और इस जॉइंट वेंचर के बैनर में ही मलेशिया में न्यूज चैनल लॉन्च करवाया था। दास आईआईटी मद्रास से बीटेक, आईआईएम कलकत्ता और लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से शिक्षित हैं। वह इंडिया टुडे, एबीपी ग्रुप (पूर्व में एमसीसीएस) और एस्ट्रो ऑल एशिया में की होल्डिंग पोजीशन पर रहे हैं। 

जब हमने दास से इस पत्र के बावत सवाल पूछा तो वो इसे टाल गए। अब चैनल की कमान विष्णु शंकर संभाल रहे हैं, जिन्हें बरुन दास ही लेकर आए थे। बरख दत्त और करण थापर इस चैनल पर अपना-अपना एक शो होस्ट करते हैं।

अब देखने वाली बात ये है कि जब बरुण दास का ये लेटर पब्लिक डोमेन में आ गया है, तो हार्वेस्ट टीवी इस पर किस तरह की प्रतिक्रिया देगा। दूसरा अब बरुण के स्थान पर उन्हे एक नया बिजनेस टैलेंट भी तलाशना है। 

बरुण दास का कपिल सिब्बल को लिखा पत्र आप नीचे पढ़ सकते हैं:

 “Dear Mr. Sibal
Many congratulations. Your channel has gone on air at 6.58 am this morning. 

 Any words of appreciation for the entire team would be inadequate. They all have accomplished something which was considered impossible till this morning. You now have a channel which can potentially emerge as a leader going forward.

Over the past few weeks, an issue has caused some practical inconvenience and some psychological distress for me, personally. Kindly accept this as a humble submission in your interest and pardon me if I convey anything else with my words and expressions

This is about the way Mrs. Sibal has been coming to office and holding her meetings with staff members without involving me. She has mostly been very disdainful, rather disparaging, towards me in front of my team and even outsiders, when I had tried to involve myself in any discussion that she was holding.

 The fact is that her approach is completely contrary to the consultancy contract that she has signed with me. As per the contract, and the authorisation matrix, which is an integral part of the contract, I am supposed to be the one who is in-charge of the entire organisation, barring editorial. All departmental heads report to me. I am answerable to the board on a monthly basis. While the breach of contract is an issue, I could’ve still lived with it.

Then comes the insult and ignominy that I’ve faced because of her disdainful attitude towards me in front of teams and at times, outsiders. That has been a blow to my mental state of being and I strongly feel it is difficult to put up with that.

Most importantly, this has created confusion in the organisation about the chain of command. That is my biggest issue as a professional, as I believe it is not in your or Mrs. Sibal’s interest. You hired a professional and you are paying me for my professional services and I along with the team, have lived up to your expectations in achieving the first goal of launching today against all odds. So, I am wondering why you would not let me function as per the terms of the contract.

Therefore, under the prevailing circumstances, it is extremely uncomfortable for me to attend office. In any case, counting tomorrow, I would have attended office on 22 days in the calendar month of January 2019, as against the committed 18 days as per my contract. 

Hence I would like to proceed on leave from Monday, 28th onward for a week.  In this one week, you could induct a new management team who will take it up from here to carry out the channel’s operations under the leadership of Mrs. Sibal along with able assistants. I hope they would live up to your dreams and make it a force to reckon with in times to come. I would adjust the additional services of 4 days during the month of February or otherwise. However, if required I will be available for any handing over formalities.

I look forward to meeting you or speaking to you, immediately, to negotiate and agree on terms of the premature termination of my contract w.e.f a mutually agreed day. I am sure you would be generous and fair in such a discussion, given your stature and given what I have delivered to you so far. I value my association with you and would love to be around to be a part of any venture where you would see merits in my limited capability and allow me a free hand to perform. 

In case you do not wish to terminate the contract under terms which we would need to arrive at, then we should discuss and deliberate and agree on how we could stick to the terms of my agreement as far as handling operations is concerned going forward. 

Hope the spirit behind this mail would be rightly seen as it is in the best interest of your business and my self-respect.”

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