मिशन, प्रफेशन और कमीशन वाली मीडिया आज कहां खड़ी है...

मीडिया संस्थानों के छात्रों के सामने डगमगाती हुई मीडिया इंडस्ट्री को जगमगाती हुई मीडिया इंडस्ट्री...

Last Modified:
Tuesday, 18 September, 2018
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अमर आनंद

वरिष्ठ पत्रकार ।।

हताश मत होइए, हल तलाशिए

मीडिया संस्थानों के छात्रों के सामने डगमगाती हुई मीडिया इंडस्ट्री को जगमगाती हुई मीडिया इंडस्ट्री बता कर बड़े-बड़े मीडिया आइकॉन के द्वारा दिया जाने वाला भाषण उस पल के लिए वाकई आह्लादित करता है और ऐसा लगता है कि पत्रकारिता की राह पर कदम रखने वाले हमारे नौनिहाल एक खुशहाल करियर की तरफ बढ़ रहे हैं मगर ये मान लेना हकीकत से मुंह चुराना होगा।

सूरते हाल पर अगर गौर करें तो देश के बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों के छात्र भी नौकरी के लिए दूसरी स्ट्रीम्स के छात्रों की तुलना में कम धक्के नहीं खा रहे हैं। मीडिया इस्टीट्यूट्स के 50 में से 30 छात्र ही समुचित जगह पा रहे हैं। देश के बड़े-बड़े चैनलों और यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई जाने वाली पत्रकारिता के छात्रों की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। आप मीडिया संस्थानों के पत्रकारिता संस्थानों के प्लेसमेंट का रेशियो देखिए आपको खुद पता चल जाएगा। हालांकि इस मामले में कोई उपलब्ध आंकड़ा आपको नहीं मिलेगा, जो भी जानकारी मिलेगी वो अपुष्ट और लोगों से बातचीत पर ही आधारित होगी।

पत्रकारिता में आ रही नई पौध को जॉब सिक्योरिटी के लिहाज से अगर सोचना है तो उन लोगों के उदारहण जरूर ध्यान में रखें, जो बिना किसी वजह के, बिना किसी गलती के सिर्फ इस बात के लिए नौकरी से रुखसत किए जा रहे हैं कि उनकी उम्र चालीस के पार हो चुकी है। अगर वो बॉस के बनाए गए खांचे में किसी तरह फिट होकर परिक्रमा पद्धति के हिसाब से चल पा रहे हैं तो कुछ दिन और चल जाएंगे, लेकिन तब तक जब तक नया बॉस नहीं आता है। मीडिया में बॉस बदलने के बाद 'सारे घर को बदल डालूंगा...' के अंदाज में स्टाफ की छंटनी के कई उदाहरण है।

हाल के दिनों में और इन दिनों भी कुछ चैनलों और मीडिया संस्थानों से आ रही छंटनी की खबरें परेशान करने वाली हैं। खास तौर से उनके लिए जो चालीस के पार हो गए हैं, जिनके बच्चे कॉलेज का रुख करने वाले हैं, जिनकी हर महीने ईएमआई जाती है।

मीडिया की चाल, उसका चरित्र और उसका चेहरा कितना पत्रकारों के मुताबिक है, ये सवाल किसी भी पत्रकार से कीजिए, अगर वो दिल से बोलेगा, तो ये जरूर बोलेगा कि ये दुनिया, ये महफिल मेरे काम की नहीं। अगर दिमाग से बोलेगा तो ये बोलेगा कि बस किसी तरह खींच रहे हैं। जीवन काट रहे हैं।

मिशन, प्रफेशन और कमीशन जैसे अलग-अलग रूप-रंग वाली मीडिया आज कहां खड़ी है ये देश के किसी भी नागरिक से आप जान सकते हैं, जाहिर तौर पर विश्वसनीयता का असर पेशे और इंडस्ट्री पर भी दिखता है। न्यूज बिजनेस के इस दौर में ज्यादातर मीडिया संस्थान इस फलसफे पर काम कर रहे हैं कि 'करहुं कोई उपाय, जेहि विधि रेवेन्यू आए, रेपुटेशन रहे चाहे जाए...।'  अगर फिर भी रेवेन्यू नहीं आ रहा है तो गाज सबसे पहले स्टाफ पर गिरनी तय है।

टीवी और अखबारों की बहुतायात वाले मीडिया इंडस्ट्री में राजस्व की कमी भी कॉस्ट कटिंग के नाम पर छंटनी की वजह बनती जा रही है। इश्तेहार से आए राजस्व की कमी से बीसियों चैनल और अखबार दम तोड़ते हुए से नजर आ रहे हैं। अपने मीडिया संस्थान को जमाने के कुछ संस्थान मालिकों के तमाम नुस्खे भी कारगर नहीं हो रहे हैं तो संस्थान पर ताला लगाने की तरफ अग्रसर हो रहे है और उसका असर उस संस्थान में काम करने वाले लोगों की आर्थिक सेहत पर सीधा-सीधा पड़ रहा है।

रोजी रोटी की गाड़ी पटरी से उतर जाने के बाद जीवन के अर्थशास्त्र के साथ समाजशास्त्र भी कितना असंतुलित हो जाता है ये मीडिया वालों से बेहतर भला कौन जानता है। आप ऐसे कई भुक्तभोगियों से पूछिए जो नौकरी में नहीं हैं, ऐसे मुश्किल समय समें उनके कई प्रिय साथी और वैसे लोग जो कभी उनकी मदद से बेहतरी की ओर बढ़े हैं, फोन तक उठाना पसंद नहीं करते।

ये जानकर राहत मिलती है कि मीडिया इंडस्ट्री से मिले संकटों से आगे बढ़कर कुछ लोगों ने अपने लिए नया रास्ता तलाश किया और उस रास्ते पर चलकर सफल भी हुए। मगर ऐसे कितने नाम हैं, कितने लोग हैं जो ये कर पा रहे हैं। आप खुद सोचिए क्या ये आसान है एक इंडस्ट्री में 15 से 20 साल काम करने के बाद आप किसी और इंडस्ट्री में जाते हैं या फिर नया काम शुरू करते हैं तो मुश्किलें एक नहीं कई होती हैं।

पहले आप उस इंडस्ट्री के तौर तरीके समझते हैं और अपनी पुरानी प्रफेशनल लाइफ और आदतों से उसकी तुलना करते हैं। फिर मन बनाते हैं और किसी तरह आगे बढ़ते हैं। आपकी किस्मत है अगर कामयाबी मिल गई तो ठीक है नहीं, तो एक के बाद दूसरा झटका। पहला झटका मीडिया की नौकरी जाने का और दूसरा झटका नया काम नहीं जम पाने का। इस बीच आपके रोजमर्रे की जद्दोजहद भी जारी होती है और काम को परवान चढ़ाने भी कोशिशें भी। आप पूरी शिद्दत से जुटते हैं अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए लेकिन जिस माहौल में, जिन लोगों के साथ आप हैं जरूरी नहीं कि उतनी शिद्दत उनके पास भी हो आपके काम के लिए। ये इम्तिहान का नया दौर होता है अगर आप मीडिया इंडस्ट्री में कदम रख रहे हैं तो आपको इसके लिए तैयार होना पड़ेगा।

सवाल ये है कि क्या हताश हुआ जाए। मैं कहता हूं कि बिल्कुल नहीं। हमें हताशा की तरफ नहीं हल की तरफ बढ़ना है, इस हताशा से बचने के लिए। मीडिया में आना अगर बेहद जरूरी लगे तो घर परिवार से मजबूती और रोजगार का एक विकल्प में हाथ में जरूर होना चाहिए। परिवार में पति और पत्नी दोनों का नौकरी में हों तो ज्यादा बेहतर है और खुद अगर मीडिया में हो तो पत्नी या पति इस इंडस्ट्री से बाहर का हो, ताकि अगर मीडिया की छंटनी का शिकार हों या नौकरी नहीं मिलने से परेशान हों तो कम से कम रोजमर्रे के लिए एक विकल्प आपके पास हों।

एक बात और अगर ये आप ये सोचकर पत्रकारिता की तरफ आगे बढ़ रहे हों कि आप देश, समाज और इंसानियत के लिए कुछ कर पाएंगे तो ये आपकी गलतफहमी होगी क्योंकि पेशेवर वजहों से काफी बदल चुकी मीडिया जिसे अलग-अलग खानों और हिस्सों में बांटकर देखा जाता है, उसमें इस बात की संभावनाएं काफी कम हैं। 

हां, कुछ हद तक अगर आपको व्यक्तिगत स्तर पर मौका मिला तो आप जरूर कर पाएंगे। अगर पत्रकारिता वाकई आपका मिशन है और यही रोजी रोटी भी, तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता लेकिन इसकी चुनौतियों को समझते हुए आगे बढ़ेंगे तो आपकी राह के कांटे थोड़े कम होंगे। 

(लेखक टीवी और प्रिंट की पत्रकारिता के एक लंबे अनुभव के बाद सामाजिक मुद्दों पर ईंवेंट्स और ईवेंट्स पर आधारित टीवी शो करते हैं)

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‘माफ करना नितेश, हम तुम्हें बचा नहीं पाए’

न्यूज 24 के मेकअप आर्टिस्ट नितेश ने कुछ दिन पूर्व कर ली थी आत्महत्या

Last Modified:
Saturday, 20 July, 2019
Nitesh

कहां चले गए नितेश? क्यों चले गए? ऐसा लग रहा है कि मेकअप रूम में कभी भी आ जाओगे और हंसते हुए कोई कहानी-किस्सा सुनाओगे। अपने काम में बेहतरीन थे तुम। उम्दा शख्स, खुशमिजाज, फिर ये क्या कर लिया? मेरा लखनऊ का कॉन्क्लेव याद है न तुम्हें, कहीं पावर प्लग नहीं मिला और तुमने सिर्फ कंघे से मेरे बाल ऐसे सेट किए कि अब तक की सबसे बेहतरीन तस्वीरें इसी हेयर स्टाइल में आई थीं। अब जब ऐसी इमरजेंसी होगी, तुम बहुत याद आओगे। जब भी मेकअप रूम में जाऊंगी, तुम बहुत याद आओगे। जब भी कॉन्क्लेव होगा, तुम बहुत याद आओगे।

मुझे वो घटना याद है, जब योगेश की बुलेट मोटरसाइकिल चोरी हो गई थी और तुमने उसे खुद आधा पैसा देकर दोबारा खरीदवाई। तब मैंने तुम्हे कहा था कि तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है, नहीं पता था कि इतनी पीड़ा उसमें समेट रखी थीं तुमने।

हंसी-मजाक में बात-बात पर शर्त लगाने वाले और हारने पर अपने वादे को पूरा करने वाले नितेश, कुछ कहा क्यों नहीं? जब चार दिन पहले ही मैंने तुमसे पूछा, शांत क्यों हो, चुप क्यों हो, परेशान क्यों हो? तुम एक बार फिर हंसकर चले गए।

मैंने कभी कोई शिकायत कितने भी गुस्से में की, तुमने कभी पलटकर जवाब नहीं दिया, हमेशा हो जाएगा मैम कहकर मान रखा। अपनी बात कभी बताने की जरूरत क्यों नहीं समझी नितेश। दो दिन से ऑफिस में कुछ अच्छा नहीं लग रहा नितेश। छोले-कुलचे खाने के शौकीन थे तुम। अब जब भी उसकी खुशबू आएगी, तुम बहुत याद आओगे नितेश।

भगवान से प्रार्थना है तुम अब कम से कम सुकून में होंगे। वापस मत आना नितेश। ये दुनिया तुम जैसे अच्छे लोगों के लिए बनी ही नहीं है। दो दिन से खुद को कोस रही हूं। काश! मैं उस दिन तुम्हारी मुस्कुराहट के पीछे का दर्द समझ पाती। काश! तुमसे बात करके तुम्हारा दर्द बांट पाती, काश! तुम्हें बता पाती कि जीवन में खुद से ज्यादा कुछ अहमियत नहीं रखनी चाहिए। माफ करना नितेश, हम तुम्हें नहीं बचा पाए।

(वरिष्ठ टीवी पत्रकार साक्षी जोशी की फेसबुक वॉल से)

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दैनिक जागरण के फोटो जर्नलिस्ट के बेटे पर बरपा बदमाशों का कहर, गई जान

परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है

Last Modified:
Saturday, 20 July, 2019
Vinay Sharma

देश में पत्रकारों पर आए दिन हमले हो रहे हैं। कहीं पर पत्रकारों के साथ मारपीट तो कहीं उनकी हत्या के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। सिर्फ पत्रकार ही नहीं, बल्कि उनके परिजनों को भी बदमाश निशाना बना रहे हैं। हरियाणा में फरीदाबाद के इस मामले में बदमाशों ने ‘दैनिक जागरण’ के फोटो जर्नलिस्ट  संजय शर्मा के बेटे विनय शर्मा की चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर हत्या कर दी। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

बताया जाता है कि सोनीपत के मूल निवासी संजय शर्मा फरीदाबाद के सेक्टर तीन स्थित भूदत्त कॉलोनी में परिवार के साथ रहते हैं। विनय उनका इकलौता बेटा था और दसवीं का छात्र था। उनके परिवार में पत्नी व एक बेटी है। 19 वर्षीय विनय शुक्रवार की दोपहर किसी कार्य से घर से स्कूटी लेकर निकला था। सेक्टर 3 में टैगोर स्कूल के पास कुछ युवकों ने उसे रोककर चाकुओं से हमला कर दिया और गंभीर रूप से घायल हालत में छोड़कर फरार हो गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने विनय को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने संजय शर्मा की शिकायत पर भीकम कॉलोनी निवासी अनिकेत नागर, दीपक ठाकुर, हर्ष ठाकुर, शेखर नागर, सुंदर नागर और बूचा नागर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। रिपोर्ट में संजय शर्मा का कहना है कि उनके बेटे ने पहले भी ऐसी शिकायतें की थीं कि आरोपित उसे धमकाते रहते हैं, पर उसने पड़ोस का मामला और बात न बिगड़े इसलिए मामले को तूल देना उचित नहीं समझा और बेटे को समझा-बुझाकर शांत कर दिया था। संजय शर्मा का कहना है कि उन्होंने एक-दो बार थाने में भी शिकायत की, पर दोनों पक्षों को पुलिस ने सामाजिक तौर पर समझा दिया था। फिलहाल, पुलिस ने आरोपितों की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है।

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Zee Media का सांसद पर जवाबी 'हमला'

पिछले कई दिनों से दोनों पक्षों के बीच चल रहा है विवाद

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
Zee Media

‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) और  तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के बीच विवाद गहराता जा रहा है। कुछ दिन पूर्व महुआ मोइत्रा द्वारा ‘जी न्यूज’ (Zee News)  और इसके एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया गया था। अब खबर है कि ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ एक अदालत में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में महुआ मोइत्रा पर न्यूज चैनल को बदनाम करने का आरोप लगाया गया है।

कंपनी की शिकायत पर एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने इस मामले में विचार के लिए एक अगस्त की तारीख रखी है। कंपनी की ओर से दर्ज कराई शिकायत में एडवोकेट विजय अग्रवाल का कहना है, ‘मोइत्रा ने तीन जुलाई को कंपनी के खिलाफ मानहानि पूर्ण बयान दिए थे। मोइत्रा के बयान झूठे और दुर्भावना से प्रेरित थे और कंपनी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाले थे। आरोप है कि मोइत्रा ने खुद पर लगे आरोपों का जवाब देते हुए पत्रकारों के सामने न्यूज चैनल पर जानबूझकर इस तरह के बयान दिए थे।’ इस बीच चौधरी ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट से मांग की कि मोइत्रा द्वारा दायर मानहानि के मामले में कथित रूप से छिपाए गए तथ्यों की जांच कराई जाए।

गौरतलब है कि महुआ मोइत्रा ने संसद में 25 जून को फासीवाद पर एक भाषण दिया था, जिसके बारे में सुधीर चौधरी ने दावा किया था कि मोइत्रा के भाषण के अंश अमेरिकी वेबसाइट से हुबहू चुराये गये हैं। आरोप था कि यह आर्टिकल वाशिंगटन मंथली के Martin Longman ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में लिखा था, जिसमें मोइत्रा ने कुछ अंश हूबहू उठा लिए और राष्ट्रपति का नाम हटा दिया। सुधीर चौधरी ने भाषण के अंशों को अंडरलाइन करके भी दिखाया था। हालांकि सुधीर चौधरी के ट्‌वीट के बाद वाशिंगटन मंथली के Martin Longman ने ट्‌वीट करके महुआ मोइत्रा का पक्ष लिया था।

इसके बाद भड़कीं महुआ मोइत्रा ने सुधीर चौधरी के दावे को गलत बताया था। मोइत्रा का कहना था कि यह भाषण उनका अपना था और अन्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बीजेपी की ‘ट्रोल आर्मी’ की ओर से इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सुधीर चौधरी पर गलत रिपोर्टिंग के आरोप लगाते हुए लोकसभा में जीटीवी और सुधीर चौधरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी पेश कर दिया था। हालांकि, स्पीकर ओम बिरला ने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया था। इसके बाद महुआ मोइत्रा ने सुधीर चौधरी के खिलाफ अदालत में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। बता दें कि पूर्व में इनवेस्टमेंट बैंकर रहीं मोइत्रा पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर सीट से पहली बार सांसद बनी हैं।

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फोटो जर्नलिस्ट महीप कुमार सिंह ने थामा अब इस न्यूज चैनल का दामन

पूर्व में कई न्यूज चैनल्स में जिम्मेदारी निभा चुके हैं महीप कुमार

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
Maheep Kumar

‘भारत समाचार’ चैनल, लखनऊ में बतौर सीनियर कैमरामैन कार्यरत महीप कुमार सिंह ने अब यहां से अलविदा बोल दिया है। यहां वह करीब ढाई साल से अपनी भूमिका निभा रहे थे। महीप कुमार ने अब अपनी नई पारी का आगाज लखनऊ में ‘अपना भारत’ चैनल के साथ किया है। यहां भी उन्हें सीनियर कैमरामैन की जिम्मेदारी दी गई है।

महीप कुमार सिंह को कई न्यूज चैनल्स के साथ काम करने का अनुभव है। पूर्व में वह न्यूज एक्सप्रेस, वॉयस ऑफ इंडिया, नेशनल वॉयस और इंडिया वॉच आदि चैनल्स में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह सूचना और जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि के तौर पर भी लखनऊ में काम कर चुके हैं।

मूलरूप से उत्तर प्रदेश में अंबेडकरनगर जिले के रहने वाले महीप कुमार सिंह ने फैजाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्राफिक डिजायन और विडियो प्रॉडक्शन की पढ़ाई भी की है। वर्ष 2006 में उन्होंने नोएडा के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्टडीज से विडोयोग्राफी में डिप्लोमा किया है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बेस्ट कैमरामैन का अवॉर्ड भी मिल चुका है।

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दैनिक जागरण से हुई बड़ी गलती, अब हो रही किरकिरी!

जरा सी सजगता बरतकर इस तरह की गलती से बचा जा सकता है

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
Dainik Jagran

कहते हैं कि गलती उसी से होती है, जो काम करता है, लेकिन कभी-कभी ऐसी गलतियां हो जाती हैं कि फिर कोई कहावत काम नहीं आती। आज के दैनिक जागरण के दिल्ली एडिशन में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। अखबार के पृष्ठ 13 पर इशरत जहां से जुड़ी एक खबर है। खबर यह है कि हनुमान चालीसा पाठ में भाग लेने के चलते इशरत जहां को धमकियां मिल रही हैं। इस समाचार को तीन कॉलम में दो लाइन की हेडलाइन के साथ लगाया गया है। यहां तक तो सबकुछ ठीक है, लेकिन खबर में इशरत जहां की जिस फोटो का इस्तेमाल किया गया है, वो चर्चा का विषय है।

दरअसल, खबर है तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर सुर्खियों में आईं इशरत जहां की और फोटो लगा है उस इशरत जहां का, जिसे काफी सालों पहले गुजरात पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। इस तरह की गलती वही कर सकता है, जिसे अपने ज्ञान से ज्यादा गूगल के ज्ञान पर भरोसा हो। संभवतः पेज लगवाने वाले ने गूगल में इशरत जहां सर्च किया होगा और जो फोटो पसंद आई, उसे निकालकर लगा लिया होगा। वैसे, गूगल करने पर भी दोनों इशरत जहां की फोटो सामने आती हैं, ऐसे में पत्रकार के नाते यह सवाल तो मन में उठाना ही चाहिए था कि एक नाम के दो व्यक्ति कैसे? यदि यह सवाल उठता तो उसके जवाब से भ्रम की गुंजाइश ही नहीं बचती।

खबर में हुई गलती तो एकबारगी छुप सकती है और लगातार लिखने वाले से गलती होना स्वाभाविक भी है, लेकिन फोटो गलत लगा देना न केवल संबंधित व्यक्ति के कम ज्ञान को दर्शाता है बल्कि अखबार की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। वैसे भी आजकल मीडिया खासकर हिंदी अखबारों की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है। इसलिए यह जरूरी है कि इस तरह की गलती दोबारा न होने पाए। इसमें अकेले गलती पेज लगवाने वाले की ही नहीं है, बल्कि पेज को चेक करने वाला बराबर का जिम्मेदार है। उम्मीद है कि जागरण प्रबंधन ने इस गलती को गंभीरता से लिया होगा।

दैनिक जागरण में छपे इस पेज को आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं- 

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RSTV ने हासिल किया खास मुकाम, जल्द शुरू करेगा ये काम भी

चैनल की उपलब्धि पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ट्वीट कर दी बधाई

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
RSTV

राज्यसभा टीवी (RSTV) के लिए यह काफी अच्छी खबर है। दरअसल, राज्यसभा टीवी के यूट्यूब चैनल के सबस्क्राइबर्स की संख्या तीन मिलियन (तीस लाख) का आंकड़ा पार कर गई है और तमाम चैनल्स को पीछे छोड़ते हुए यह न्यूज के क्षेत्र में यूट्यूव पर तेजी से बढ़ते हुए चैनल्स में शुमार हो गया है। RSTV  के यूट्यूब चैनल के सबस्क्राइबर्स की संख्या में इस साल काफी तेजी से वृद्धि देखने को मिली है। इस साल करीब साढ़े सात महीने में ही राज्यसभा टीवी के यूट्यूब चैनल को 11.75 लाख से ज्यादा आर्गेनिक सबस्क्राइबर्स (organic subscribers) मिले हैं, जबकि वर्ष 2018 में चैनल को 11.96  लाख सबस्क्रिप्शन हासिल हुए थे।

इस बारे में चैनल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘इस साल एक फरवरी से 15 जुलाई तक मात्र साढ़े पांच महीनों में ही हमने अपने साथ 9,99,854 से ज्यादा सबस्क्राइबर्स जोड़े हैं। औसत रूप से देखा जाए तो रोजाना करीब 6060 सबस्क्राइबर्स जुड़ रहे हैं। चैनल ने चार फरवरी 2019 को ही दो मिलियन का आंकड़ा पार कर लिया था।’ चैनल की इस उपलब्धि पर उप राष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन एम. वेंकैया नायडू ने ट्वीट कर खुशी भी जाहिर की है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है, ‘30 लाख यूट्यूब सब्सक्राइबर का लक्ष्य प्राप्त करने पर राज्यसभा टेलीविजन को बधाई। इस उपलब्धि पर चैनल के प्रबंधन, संपादन और तकनीकी दल को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।’

बताया जाता है कि वेंकैया नायडू ने करीब दो साल पहले जब राज्यसभा टीवी के चैयरमैन का कार्यभार संभाला था, तो उस दौरान 10 अगस्त 2017 को राज्यसभा टीवी के यूट्यूब चैनल के सबस्क्राइबर्स की संख्या 4,25,622 थी। दो साल से भी कम समय में अब इसके सबस्क्राइबर्स की संख्या में करीब 25,58,460 का इजाफा हुआ है, जो पहले के मुकाबले करीब 501 प्रतिशत बढ़ी है। इसी अवधि के दौरान चैनल के यूट्यूब व्यूज 8.13 करोड़ से 487 प्रतिशत बढ़कर करीब 46.74 करोड़ हो गए हैं। 

तीन मिलियन से ज्यादा यूट्यूब सबस्क्राइबर्स होने के साथ ही राज्यसभा टीवी इस मामले में अन्य चैनल्स जैसे एनडीटीवी इंडिया (2.8 मिलियन), इंडिया टुडे (1.9 मिलियन), डीडी न्यूज (1.7 मिलियन), टाइम्स नाउ(1.1 मिलियन), रिपब्लिक वर्ल्ड (1.2 मिलियन), सीएनएन न्यूज18 (1 मिलियन), न्यूज नेशन(1.4 मिलियन), सीएनबीसी आवाज (0.84 मिलियन), लोकसभा टीवी (0.53 मिलियन), सीएनबीसी टीवी18 (0.37 मिलियन), न्यूज एक्स (0.34 मिलियन) और विऑन(0.33 मिलियन) से आगे निकल गया है। यूट्यूव चैनल के सबस्क्राबर्स की संख्या के मामले में राज्यसभा टीवी प्रमुख टीवी चैनल्स की लिस्ट में आठवें नंबर पर है। इससे आगे अभी सिर्फ सात चैनल जैसे- आजतक, एबीपी न्यूज, इंडिया टीवी, जी न्यूज, एनडीटीवी, न्यूज18 इंडिया और न्यूज24 हैं। 

बताया जाता है कि राज्यसभा टीवी की व्युअरशिप में यह बढ़ोतरी राज्यसभा टीवी के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन के नेतृत्व में संपादकीय टीम की मेहनत के साथ ही बेहतर कंटेंट और प्रधानमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रमों की कवरेज के अलावा ग्राउंड रिपोर्टिंग की वजह से हुई है। राज्यसभा टीवी की ऑनलाइन पहुंच बढ़ने के कारण ही यूट्यूब चैनल पर राज्यसभा की कार्यवाही देखने वालों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। 23 मई 2019 को जब लोकसभा चुनाव के परिणाम आए थे, उस समय राज्यसभा टीवी के यूट्यूब चैनल के 18.37 लाख से ज्यादा व्यूज थे। पांच जुलाई 2019 को बजट वाले दिन इसके व्यूज 13.30 लाख से ज्यादा थे।  

इस दौरान राज्यसभा टीवी के कई विडियो वायरल हुए हैं. जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण और कार्यक्रम शामिल हैं। जब नरेंद्र मोदी ने इस साल लोकसभा चुनाव में भारी विजय के बाद प्रधानमंत्री के रूप में एक समारोह में शपथ ली थी, तो उस दौरान 24 घंटे से भी कम समय में चैनल को 157000 व्यूज मिले थे। कंटेंट और कवरेज प्लानिंग को और बेहतर बनाने के लिए राज्यसभा टीवी ने ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) को जॉइन कर लिया है ताकि इसके प्रत्येक शो के बारे में व्युअर्स की रिस्पॉन्स जाना जा सके। लोकसभा टीवी की तर्ज पर राज्यसभा टीवी भी जल्द ही सरकारी और निजी उपक्रमों के विज्ञापनों को प्रसारित करना शुरू करेगी।

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टीवी9 भारतवर्ष को मिला नया आउटपुट हेड

विनोद कापड़ी की विदाई के बाद टीवी9 भारतवर्ष में तमाम बदलाव होने शुरू हो गए हैं

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
TV9

टीवी पत्रकार अजय आजाद ने ‘न्यूज 24’ को बाय बोल दिया है। वह यहां आउटपुट डेस्क पर बतौर डिप्टी एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अजय आजाद ने अब अपना नया सफर टीवी9 भारतवर्ष चैनल के साथ किया है। यहां वह आउटपुट हेड के तौर पर काम करेंगे। अजय आजाद न्यूज24 के अलावा ईटीवी, महुआ, जी न्यूज, इंडिया न्यूज चैनल्स में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। मूल रूप से सिवान (बिहार) के रहने वाले अजय आजाद लंबे समय तक राणा यशवंत की महुआ और इंडिया न्यूज टीम का हिस्सा रहे हैं, लेकिन काफी पहले उन्होंने इंडिया न्यूज से विदाई लेकर न्यूज 24 जॉइन कर लिया था।

बता दें कि विनोद कापड़ी की विदाई के बाद ही टीवी9 भारतवर्ष में तमाम बदलाव होने शुरू हो गए थे। मैनेजिंग एडिटर की पोजीशन पर जहां संत प्रसाद को लाया गया, वहीं आउटपुट हेड के पद पर अब अजय आजाद को लाया गया है। अजय आजाद को इस नई जिम्मेदारी के लिए समाचार4मीडिया की तरफ से ढेरों शुभकामनाएं।

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मैनेजमेंट ने बताई ये मजबूरी, बंद किया अखबार

अखबार को बंद करने के बारे में कंपनी की ओर से नोटिस जारी कर दी गई है जानकारी

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
Newspaper

मुंबई से छपने वाला ईवनिंग टैबलॉयड अखबार ‘द ऑफ्टरनून डिस्पैच एंड कोरियर’ (The Afternoon Despatch & Courier) अब कभी पाठकों को पढ़ने को नहीं मिलेगा। हालांकि पब्लिकेशन कंपनी ने 29 दिसंबर 2018 से ही इस अखबार को पब्लिश करना रोक दिया था, लेकिन अब स्थायी रूप से इसे बंद करने का निर्णय लिया गया है। अखबार को स्थायी रूप से बंद करने के बारे में कंपनी की ओर से एक नोटिस भी जारी किया गया है।

इस नोटिस में कहा गया है, ‘अखबार के विज्ञापन और सर्कुलेशन में लगातार कमी होती जा रही थी। हालांकि, मैनेजमेंट ने इसकी सेल्स बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसे में पिछले 12 साल से अखबार काफी घाटे में चल रहा था। इन सबके बावजूद कंपनी ने अखबार को इस उम्मीद पर पब्लिश करना जारी रखा कि शायद सेल्स में कुछ सुधार हो। लेकिन अब मैनेजमेंट की उम्मीदें भी जवाब दे चुकी हैं।’

नोटिस के अनुसार, ‘इन परिस्थितियों में मजबूरीवश प्रबंधन ने 20 जुलाई 2019 से इस अखबार का प्रकाशन पूर्ण रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। ऐसे में यहां पर जो भी स्टाफ अभी काम कर रहा है, उसकी सेवाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। स्टाफ को नियमानुसार बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।’

अखबार को बंद करने के बारे में कंपनी की ओर से नोटिस जारी कर जानकारी दी गई है। इस नोटिस को आप यहां पढ़ सकते हैं-

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इंडिया न्यूज को अलविदा कह नए सफर पर निकलीं पत्रकार गीतम श्रीवास्तव

ग्वालियर से ताल्लुक रखने वाली गीतम श्रीवास्तव लंबे समय से जुड़ी हुई थीं इस चैनल से

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
Geetam-Shrivastava

लंबे समय से ‘इंडिया न्यूज’ चैनल से जुड़ीं गीतम श्रीवास्तव ने अब यहां से अलविदा बोल दिया है। उन्होंने अपनी नई पारी अब ‘एबीपी न्यूज’ की डिजिटल विंग से शुरू की है। ग्वालियर से ताल्लुक रखने वाली गीतम श्रीवास्तव ने दिल्ली यूनीवर्सिटी के जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

गीतम तकरीबन हर बड़ी फिल्मी हस्ती का इंटरव्यू कर चुकी हैं और अक्सर फील्ड से फेसबुक पर भी फिल्मी रिव्यू करती दिखाई देती हैं। ‘इंडिया न्यूज’ में गीतम फिल्मी बीट के अलावा स्पोर्ट्स और मौसम आदि से जुड़ी खबरें भी पब्लिक के साथ लाइव करती दिखती थीं। माना जा रहा है कि एबीपी न्यूज की डिजिटल विंग के लिए भी वह अपनी बीट और रिपोर्टिंग को ही देखेंगी। गीतम को इस नई पारी के लिए समाचार4मीडिया की तरफ से ढेरों शुभकामनाएं।

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न्यूज 24 के मेकअप आर्टिस्ट ने उठाया घातक कदम, साथी हैरान

पिछले कुछ दिनों से पत्नी के साथ रिश्ता खराब चल रहा था

Last Modified:
Thursday, 18 July, 2019
Nitesh Kashyap

'न्यूज 24' के मेकअप आर्टिस्ट नितेश ने एक कड़ा कदम उठाते हुए पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। नितेश ने गाजियाबाद के वैशाली में 17 जुलाई को अपने एक कैमरापर्सन दोस्त के घर पर इस घटना को अंजाम दिया। नितेश के इस कदम से उसे जानने वाले काफी स्तब्ध हैं। वह भरोसा ही नहीं कर पा रहे हैं कि नितेश इस तरह का कदम भी उठा सकता है।

बताते हैं कि नितेश काफी जिंदादिल और खुशमिजाज था। उसने लवमैरिज की थी। दोनों के एक बच्चा भी है। पत्नी और बच्चे के साथ खुशी के पलों की तस्वीरें अक्सर वो फेसबुक पर शेयर करता था। नितेश के दोस्त बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों से उसकी जिंदगी में तनाव आना शुरू हो गया था। उसके दोस्त नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि पत्नी से उसके रिश्ते खराब हो चले थे, जिसके चलते वो अक्सर टेंशन में रहता था। कई दिनों से वो अपने दोस्तों से बहकी-बहकी बातें भी कर रहा था, सब उसको समझाने में भी लगे थे। उसने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है।

सुसाइड नोट में नितेश ने साफ लिखा है कि उसकी मौत के लिए किसी को भी जिम्मेदार न ठहराया जाए और न ही किसी को परेशान किया जाए। उसकी मौत के बाद उसका जो कुछ भी है, उसकी पत्नी औऱ बेटे को दे दिया जाए। नितेश की मौत से उसके जानने वाले पत्रकार दोस्त काफी सकते में हैं और फेसबुक पर उसे श्रद्धांजलि दे रहे हं।

बताते हैं कि अक्सर नितेश कश्यप बड़ी-बड़ी हस्तियों के साथ फोटो शेयर करता था, जिस किसी भी हस्ती का न्यूज 24 की मैनेजिंग एडिटर अनुराधा प्रसाद अपने शो 'आमने सामने' के लिए इंटरव्यू करती थीं, उनके साथ नितेश का फोटो भी होता ही था। अनुराधा प्रसाद का पर्सनल मेकअप तो वो देखता ही था, पूरे न्यूज 24 के मेकअप डिपार्टमेंट का चार्ज भी उसी के पास था। ऐसे में सभी एंकर्स, कैमरापर्सन आदि से उसके अच्छे रिश्ते थे, ऐसे में उसकी सुसाइड की खबर आई तो हर कोई हैरान था।

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