हिंदी पत्रकारिता में महिला पत्रकारों की चुनौतियों पर बोलीं चित्रा त्रिपाठी

हिंदी पत्रकारिता में, चाहे वो प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक, दोनों ही क्षेत्रों में पिछले कुछ समय में महिला पत्रकारों की संख्या में इजाफा देख

Last Modified:
Wednesday, 30 May, 2018
Samachar4media

चित्रा त्रिपाठी

टीवी एंकर ।।

हिंदी पत्रकारिता में, चाहे वो प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक, दोनों ही क्षेत्रों में पिछले कुछ समय में महिला पत्रकारों की संख्या में इजाफा देखने को मिला है, हालांकि अब भी दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों के बाहर पत्रकारों की बिरादरी में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है। मीडिया ऐसा क्षेत्र है, जहां आपको वक्त-बेवक्त कभी भी, कहीं भी आने-जाने के लिए तैयार रहना होता है। बड़ी खबरें रात के 12 बजे आए या दो बजे, कवर करना ही होगा। घर और परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए ऐसा कर पाना कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही लड़कियों और महिलाओं की कुछ समस्यायें तो ऐसी होती हैं जो किसी भी दूसरे क्षेत्र में काम करते हुए उन्हें पेश नहीं आती हैं। लेकिन फिर भी मीडिया के क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों का वर्चस्व तोड़ रही हैं। वहीं व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त महिलाओं के काम का दायरा बहुत बढ़ा है, लेकिन कामयाबी के बावजूद कई महिलाओं को परिवार से जो सहयोग मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पाता।

खाना बनाना और बच्चों की देखभाल अभी भी महिलाओं का ही काम माना जाता है। यानी अब महिलाओं को दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। घरेलू महिलाओं की तुलना में कामकाजी महिलाओं पर काम का बोझ ज्यादा है। इन महिलाओं को अपने कार्यक्षेत्र और घर, दोनों को संभालने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है। घर और ऑफिस के बीच सामंजस्य बिठाने में दिक्कत होने पर कई बार महिलाओं को ही ये कहा जाता है कि वो अपनी पेशेवर हसरतों की कुर्बानी दे दें।

एसोचैम का सर्वे कहता है कि मां बनने के बाद 40 फीसदी महिलाओं को नौकरी छोड़ देनी पड़ती है। बहुत सी महिला पत्रकारों के बारे में भी ये बात सच साबित होती है। हिंदी पत्रकारिता और महिला पत्रकारों की चुनौतियों के बीच बदलाव सुखद हो तो आनंद का एहसास किसे नहीं होता। आजकल हाईस्कूल से लेकर आईएएस जैसी परीक्षाओं तक लड़कियां केवल सफलता के झंडे ही नहीं गाड़ रहीं, टॉप कर रही हैं। छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक, कहीं भी आप किसी कोचिंग के बाहर खड़े हो जायें, आपको बड़ी संख्या में लड़कियां आती-जाती मिल जायेंगी, कई जगहों पर तो ये संख्या लड़कों के मुकाबले ज्यादा भी होती है।

बेवजह की दखलंदाजी, टोका-टाकी से मुक्ति पाकर जिस भी लड़की को कुछ अलग करने का मौका मिल रहा है, वो अपनी मेहनत और काबिलियत की छाप छोड़ रही हैं। यही बात पत्रकारिता के क्षेत्र में भी लागू होती है और बेटियां पूरी शिद्दत से इसे निभा भी रही हैं।

हालांकि ऐसा नहीं है कि सब कुछ अच्छा ही है, चुनौतियां खत्म हो गई हैं।  सच्चाई तो यही है कि आज भी एक लड़के के मुकाबले लड़कियों को कहीं ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, उसे कम करके आंका जाता है। बार-बार उसे लड़की होने की दुहाई दी दाती है। लड़कियों के लिए चुनौतियां तो पिता के घर से ही शुरू हो जाती हैं।

परंपरागत भारतीय समाज में लड़कों को उनकी इच्छा के मुताबिक पढ़ने, घूमने, करियर के लिए कोई विकल्प चुनने जैसे मामलों में आजादी हासिल होती है जबकि लड़कियों को इनमें से हर एक मामले में कई तरह की दखलंदाजी और पाबंदियों से दो-चार होना पड़ता है। कड़ी मेहनत करने के बाद जब आप एक प्रोफेशनल के तौर पर काम करना शुरू कर देते हैं तब भी मुश्किलें कम नहीं होतीं, हां ये जरूर है कि जीवन के इस पड़ाव पर मुश्किलों के रंग-रूप कुछ बदल जाते हैं। हालांकि महिलाओं की काबिलियत पर सवाल करने का दुस्साहस अब अगर कोई करता है तो उसे जवाब भी उसी अंदाज में बेटियां दे रही हैं, लेकिन कई बार अहम जिम्मेदारियां महिलाओं को देने में संकोच जरूर किया जाता है।

कार्यस्थल पर छेड़छाड़ या अमर्यादित व्यवहार का शिकार भी कई बार लड़कियों को होना पड़ता है हालांकि अब इस तरह की हरकतों के खिलाफ वो मुखर हो रही हैं, अपनी आवाज उठा रही हैं। कुल मिलाकर, समस्याएं कई हैं, लेकिन कोई ऐसी समस्या नहीं होती जिसका समाधान ना हो। और इस ओर रास्ता खुद लड़किया बना रही हैं। हिंदी पत्रकारिता का स्वर्ण युग आना बाकी है लेकिन यकीन मानिए बिना बेटियों के ये असंभव होगा।

 

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भारतीय मुसलमानों को लेकर वरिष्ठ पत्रकार मार्क टुली ने दिया ये बयान

पद्म भूषण से सम्मानित और करीब दो दशक तक ‘बीबीसी’ दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख रहे मार्क टुली ने मैगजीन के लिए लिखे गए लेख में दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र का दिया उदाहरण

Last Modified:
Monday, 23 September, 2019
Mark Tully

जाने-माने पत्रकार मार्क टुली का कहना है कि इस्लामिक देशों के मुकाबले भारत में मुसलमान ‘ज्यादा भाग्यशाली’  हैं, क्योंकि यहां पर वे किसी भी इस्लामिक परंपरा का पालन कर सकते हैं। एक उदाहरण देते हुए पद्म भूषण से सम्मानित और करीब दो दशक तक ‘बीबीसी’ दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख रहे मार्क टुली ने कहा कि दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में, जहां वह रहते हैं, वहां तब्लीगी जमात का मुख्यालय है और वे बेहद ‘सख्त और रूढ़िवादी’  हैं।

उन्होंने कहा कि उसके ठीक बगल में सूफी परंपरा का केंद्र है, जहां लोग निजामुद्दीन औलिया के मकबरे की पूजा करते हैं और कव्वालियां गाते हैं। ‘द इक्वेटर लाइन’ (The Equator Line) मैगजीन के ‘Home and The World’ शीर्षक वाले लेटेस्ट इश्यू में टली के हवाले से लिखा गया है, ‘भारत की सहिष्णुता की भावना उसकी ताकत है, जिससे विभिन्न धर्मों के लिए साथ-साथ मिलजुल कर रहने का माहौल बनता है।’

टुली के अनुसार, ‘भारत काफी अनूठा और सभी धर्मों का घर है, जहां आध्यात्मिकता है। यहां के मुसलमान किसी भी इस्लामिक देश के मुकाबले ज्यादा लकी हैं, क्योंकि वे यहां पर किसी भी इस्लामिक परंपरा का पालन कर सकते हैं।’

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पत्रकार से राजनेता बनीं सुप्रिया श्रीनेत को कांग्रेस ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

करीब छह माह पूर्व टाइम्स नेटवर्क के बिजनेस न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद से दिया था इस्तीफा

Last Modified:
Saturday, 21 September, 2019
Supriya Shrinate

टाइम्स नेटवर्क के बिजनेस न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ (ET NOW) के एग्जिक्यूटिव एडिटर का पद छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वालीं सुप्रिया श्रीनेत को पार्टी ने अब बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। दरअसल, कांग्रेस ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर नियुक्त किया है।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की ओर से शनिवार को एक बयान जारी किया गया है। इसमें बताया गया है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सुप्रिया की नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने इस बार के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की महराजगंज सीट से सुप्रिया श्रीनेत को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद सुप्रिय श्रीनेत ने ‘ईटी नाउ’ से इस्तीफा दे दिया था। वह टाइम्स ग्रुप से करीब दस साल से जुड़ी हुई थीं। हालांकि चुनाव में उन्हें भाजपा के पंकज चौधरी से हार का सामना करना पड़ा था। उनके पिता हर्षवर्धन इसी सीट से दो बार सांसद रहे थे।

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अब विदेशी पत्रकारों से मिलेंगे संघ प्रमुख मोहन भागवत, तय हुई तारीख

अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि इस कार्यक्रम की विडियो कवरेज की अनुमति मिलेगी या नहीं या केवल बंद कमरे में ही चर्चा होगी

Last Modified:
Saturday, 21 September, 2019
Mohan Bhagwat

अगर आप किसी भी विदेशी मीडिया समूह के प्रतिनिधि के तौर पर भारत में पत्रकारिता कर रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए है। दशकों तक मीडिया के लिए पहेली रहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस लगातार समाज के अन्य क्षेत्रों के दिग्गजों ही नहीं, मीडिया के लोगों से भी पिछले कुछ सालों से खुलने में लगा हुआ है और शायद ये पहली बार होगा कि कोई संघ प्रमुख केवल विदेशी पत्रकारों से मिलने के लिए कोई खास कार्यक्रम आयोजित करे।

ये कार्यक्रम 24 सितंबर को दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में होगा। मोहन भागवत ने पिछले साल भी सितंबर में ‘भविष्य का भारत’ नाम से तीन दिन की एक लेक्चर सीरीज शुरू की थी, जिसमें समाज के विभिन्न हिस्सों से लोग आए थे। इसमें अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी थी, क्योंकि वो अपनी फिल्म मंटो का प्रीमियर छोड़कर वहां आए थे।

इस कायर्कम के बारे में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार का कहना है कि, ‘ये कार्यक्रम परस्पर संवाद का है। मोहन भागवतजी इस संवाद में विदेशी मीडिया के पत्रकारों को संघ के कार्य व प्रासंगिक विषयों पर संघ के विचारों से अवगत कराएंगे तथा उनसे इसी संबंध में एक प्रासंगिक चर्चा करेंगे।’ हालांकि अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि  इस कार्यक्रम की विडियो कवरेज की अनुमति मिलेगी या नहीं या केवल बंद कमरे में ही चर्चा होगी। लेकिन इतना तय है कि उसके बाद कुछ बड़ी हेडलाइंस दुनिया भर के अखबारों, टीवी चैनल्स में बनना तय है।

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गूगल को बाय बोल स्टार इंडिया से जुड़े नितिन बवनकुले, मिली बड़ी जिम्मेदारी

पूर्व में कई बड़ी कंपनियों में निभा चुके हैं भूमिका, ‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के कंट्री मैनेजर संजय गुप्ता को रिपोर्ट करेंगे

Last Modified:
Saturday, 21 September, 2019
Nitin-Bawankule

‘स्टार इंडिया’ (Star India) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर है कि  नितिन बवनकुले ने यहां पर हेड (एड सेल्स)  के तौर पर जॉइन किया है। वह एक अक्टूबर से यहां अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे। वह ‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के कंट्री मैनेजर संजय गुप्ता को रिपोर्ट करेंगे।   

बता दें कि बवनकुले ‘गूगल क्लाउड इंडिया’ (Google Cloud India) से यहां आए हैं, जहां पर वे कंट्री डायरेक्टर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। गूगल से वह आठ साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे। बवनकुले ‘स्टार इंडिया’ में अमित चोपड़ा की जगह लेंगे, जिन्होंने इसी साल मई में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।  

बवनकुले को सेल्स और डिजिटल के क्षेत्र में काम करने का करीब 25 साल का अनुभव है। पूर्व में वह ‘डेल’, ‘मोटोरोला’, ‘व्हर्लपूल इंडिया’ और ‘गोदरेज जी अप्लायंसेज’ जैसे संस्थानों में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। बवनकुले ने विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मार्केटिंग और फाइनेंस में एमबीए की पढ़ाई भी की है।   

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मीडिया इंडस्ट्री के लिए कैसे फायदे का सौदा होगा ये सरकारी कदम, पढ़ें यहां

एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में कमी का सामना कर रहे अखबार, टीवी और मीडिया के अन्य सेगमेंट्स के लिए यह काफी अच्छी खबर है

Last Modified:
Saturday, 21 September, 2019
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कारोबारियों को राहत देने के उद्देश्य से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कारपोरेट टैक्स में कटौती किए जाने की घोषणा का फायदा मीडिया जगत को भी मिलने वाला है। दरअसल, सरकार ने शुक्रवार को बेसिक कॉरपोरेट 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया है। घरेलू कंपनियों पर बिना किसी छूट के इनकम टैक्स 22 फीसदी होगा, जबकि सरचार्ज और सेस जोड़कर प्रभावी दर 25.17 फीसदी हो जाएगी। मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में कमी का सामना कर रहे अखबार, टीवी और मीडिया के अन्य सेगमेंट्स के लिए यह काफी अच्छी खबर है।

अंग्रेजी वेबसाइट ‘लाइवमिंट’ (Livemint) में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में ‘डेलायट इंडिया’ (Deloitte India) के पार्टनर जेहिल ठक्कर का कहना है, ‘सरकार के इस फैसले से मीडिया इंडस्ट्री को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से फायदा होगा। डायरेक्टली फायदा इस तरह होगा कि टैक्स में कमी आने से संकट के इस दौर में इंडस्ट्री में कैश का ज्यादा फ्लो होगा। इनडायरेक्टली फायदा ये होगा कि नए प्रॉडक्ट लॉन्च हो सकते हैं अथवा नई कंपनी शुरू हो सकती हैं, जो आने वाले समय में विज्ञापन में बढ़ोतरी का कारण बन सकती हैं।’

ऑडिट एवं परामर्श देने वाली कंपनी केपीएमजी (KPMG) ने पिछले दिनों मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (M&E) से जुड़ी जो रिपोर्ट जारी की थी, उसके अनुसार कुल एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में प्रिंट मीडिया का जो शेयर वित्तीय वर्ष 2018 (FY18) में 35 प्रतिशत था, वह वर्ष 2019 में घटकर 32 प्रतिशत रह गया है। वहीं, ‘फिक्की-ईवाई’ (FICCI-EY) की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजपेपर्स का एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू एक प्रतिशत बढ़ा है, जबकि मैगजींस के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में आठ प्रतिशत की गिरावट हुई है।

जनवरी की शुरुआत में, सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्यूनिकेशन द्वारा प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों की दरों में 25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी थी। इसके बाद प्राइवेट टीवी चैनल्स के लिए एडवर्टाइजिंग की दरों में 11 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई थी।   

अब कॉरपोरेट टैक्स में कटौती किए जाने की सरकार की घोषणा के बारे में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Zee Entertainment Enterprises Ltd) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका का कहना है, ‘कॉरपोरेट टैक्स में 25 प्रतिशत की कमी किया जाना वास्तव में काफी अच्छा कदम है। इससे भारतीय कंपनियों को काफी फायदा होगा।’

वहीं, ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘टैक्स में कमी किए जाने से प्रॉफिट बढ़ेगा और बिजनेसमैन के हाथों में पैसा आएगा, जिससे वे आगे निवेश करेंगे। इसका आर्थिक विकास पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।’

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डॉक्टर का यह सवाल सुनते ही रफूचक्कर हुआ अस्पताल में हंगामा कर रहा ‘पत्रकार’

इलाज के लिए राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचा था खुद को पत्रकार बता रहा युवक, धमका रहा था स्टाफ को

Last Modified:
Friday, 20 September, 2019
Journalist

खुद को पत्रकार बताकर अस्पताल कर्मियों को धमका रहा युवक उस समय बैकफुट पर आ गया, जब कार्यवाहक पीएमओ ने उससे पहचान पत्र मांग लिया। पहले तो युवक तमाम बहाने बनाता रहा, फिर मौका देखकर वहां से रफूचक्कर हो गया।

यह मामला है राजस्थान में बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल का, जहां गुरुवार सुबर एक युवक इलाज के लिए पहुंचा था। उस दौरान सभी डॉक्टर्स वार्डों में मरीजों को देखने के लिए गए हुए थे। ऐसे में सीट पर डॉक्टरों को न पाकर युवक भड़क गया और खुद को पत्रकार बताते हुए नर्सिंग स्टाफ को धमकाने के साथ ही हंगामा करने लगा।

शोरशराबा सुनकर कार्यवाहक पीएमओ डॉ. सर्वेश बिसारिया मौके पर पहुंचे और हंगामे की वजह पूछी। युवक ने अपना नाम रणजीत सिंह बताते हुए खुद को पत्रकार बताया। इस पर डॉ. सर्वेश ने युवक से पहचान पत्र दिखाने को कहा। पहचान पत्र मांगते ही युवक बैकफुट पर आ गया और खुद को पत्रकार का दोस्त बताने समेत तमाम बहाने करने लगा। इसके बाद वह मौका देखकर वहां से चला गया।

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विधायक के दफ्तर में हुई पत्रकारों की पिटाई, जानें पूरा मामला

किसी मामले में शिकायत करने के लिए अपने साथियों के साथ विधायक के कार्यालय गए थे पत्रकार

Last Modified:
Friday, 20 September, 2019
Attack

पत्रकारों पर हमले का एक और मामला सामने आया है। यह मामला उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के लोनी इलाके का है, जहां पर कुछ लोगों ने बीजेपी विधायक के दफ्तर में घुसकर पत्रकारों की जमकर पिटाई कर दी। मारपीट में घायल एक पत्रकार को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बताया जाता है कि लोनी में बलराम नगर स्थित स्टेट बैंक के पास बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर का ऑफिस है। यहां कुछ पत्रकार एक मामले में शिकायत करने पहुंचे थे। तभी 5-6 बदमाशों ने उनकी जमकर पिटाई कर दी। घटना के बाद पत्रकारों ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। बॉर्डर थाना प्रभारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि पत्रकार सरताज खान ने शिकायत दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

दरअसल, बुधवार को अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के दौरान पत्रकार शौकत अली वहां फोटोग्राफी कर रहे थे। इसी बीच एसडीएम के गनर द्वारा रोके जाने पर उनके साथी पत्रकार सरताज खान का गनर से विवाद हो गया। आरोप है कि इस पर गनर ने सरताज के साथ अभद्रता कर दी।

नाराज दोनों पत्रकार अपने कुछ साथियों के साथ गुरुवार को विधायक के कार्यालय पहुंचे थे। वहां विधायक के प्रतिनिधि ललित शर्मा ने कार्यालय में विधायक के न होने की सूचना दी और इंतजार करने के लिए कहा। आरोप है कि ललित शर्मा के बाहर जाते ही कुछ नकाबपोश बदमाश दफ्तर में घुसे और हॉकी-डंडों से सरताज खान और शौकत अली के साथ मारपीट की। वहीं, इस मामले में विधायक नंद किशोर गुर्जर का कहना है कि अपने दफ्तर में पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना से वह स्तब्ध हैं। उन्होंने आशंका जताई कि शायद पत्रकारों का बाहर विवाद हुआ हो।

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पत्रकारों को लेकर प्रज्ञा ठाकुर के बिगड़े बोल, हो रहा विरोध

बयान से गुस्साए पत्रकारों ने प्रज्ञा ठाकुर से माफी मांगने के साथ ही बीजेपी आलाकमान से उन्हें पार्टी से निकालने की मांग उठाई है

Last Modified:
Thursday, 19 September, 2019
Pragya Thakur

अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वालीं व भोपाल से बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर नए विवाद में फंस गई हैं। अब उन्होंने पत्रकारों को बेईमान बता दिया है। प्रज्ञा ठाकुर के इस बयान पर पत्रकार काफी गुस्सा हैं और उन्होंने प्रज्ञा ठाकुर से माफी की मांग की। इसके साथ ही पत्रकारों ने बीजेपी आलाकमान से प्रज्ञा ठाकुर को पार्टी से निकालने की मांग भी उठाई है।

दरअसल, प्रज्ञा ठाकुर ने ये बयान मंगलवार को सीहोर जिले की यात्रा के दौरान दिया। यहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 69वें जन्मदिन पर फलों का वितरण करने आई थीं। पत्रकारों ने मध्य प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुददों पर उनकी टिप्पणी चाही थी। इस पर प्रज्ञा का हंसते हुए कहना था, ‘एक भी ईमानदार नहीं है। हां हम बोल रहे हैं, सुनो तुम्हारी तारीफ, जितने भी सीहोर के मीडियावाले हैं, सब बेईमान हैं।’

प्रज्ञा ठाकुर की इस टिप्पणी पर पत्रकार गुस्सा हो गए। इसके बाद स्थानीय पत्रकारों के एक समूह ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर प्रज्ञा ठाकुर से माफी की मांग की। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कैसे मीडियाकर्मियों को बेईमान बताया, वह आप इस विडियो में देख सकते हैं। 

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वरिष्ठ पत्रकार सायना धेनुगारा ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

‘CNBC-TV18’ की मैनेजिंग एडिटर शीरीन भान के साथ मिलकर किताब भी लिख चुकी हैं सायना धेनुगारा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Published - Wednesday, 18 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 18 September, 2019
Syna

‘सीएनबीसी-टीवी18’ (CNBC-TV18) की फीचर एडिटर सायना धेनुगारा ने अब अपने करियर को नई दिशा दी है। उन्होंने बेंगलुरु के स्टार्ट अप ‘लेट्सवेंचर’ (LetsVenture) में बतौर चीफ ब्रैंड ऑफिसर जॉइन किया है। यह एक इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म है। अपनी नई भूमिका में धेनुगारा ‘लेट्सवेंचर’ के फाउंडर्स शांति मोहन और संजय झा के साथ ही सीनियर लीडरशिप टीम के साथ मिलकर काम करेंगी।   

‘CNBC-TV18’ में रहते हुए धेनुगारा टेक्नोलॉजी, नई अर्थव्यवस्था, पॉलिसी प्रभाव पर काम करने के साथ ही स्टार्ट अप्स व एंटरप्रिन्योरशिप पर बने शो ‘यंग टर्क्स’ को भी संभाल चुकी हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के करियर में वह ‘CNBC-TV18’ की मैनेजिंग एडिटर शीरीन भान के साथ मिलकर ‘Young Turks-Inspiring Stories of Tech Entrepreneurs’ के नाम से किताब भी लिख चुकी हैं। इस किताब में ऊंचा मुकाम पाने वाले 13 एंटरप्रिन्योर की प्रेरक कहानियां हैं।

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लाइव डिबेट में पैनलिस्ट के साथ हुआ कुछ ऐसा, विडियो वायरल

कश्मीर के मुद्दे पर चल रही थी चर्चा, विडियो वायरल होने के साथ ही सोशल मीडिया पर जमकर उड़ाया जा रहा है मजाक

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Published - Wednesday, 18 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 18 September, 2019
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कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के ‘GTV’ टेलिविजन चैनल पर हो रही लाइव डिबेट के दौरान एक पैनलिस्ट अचानक अपनी कुर्सी से लड़खड़ाकर गिर पड़ा। इस घटना से जुड़े विडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों ने इस पैनलिस्ट को निशाने पर ले लिया और जमकर मजाक उड़ाना शुरू कर दिया।

कुछ लोगों ने तो इसकी तुलना कश्मीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने के दौरान पाकिस्तान के रेलमंत्री शेख रशीद को लगे करंट से कर दी। कुछ लोगों ने मजाक में यह भी कहना शुरू कर दिया है कि जरूर इस पैनलिस्ट ने भी मोदी का मजाक उड़ाया होगा।  

पाकिस्तान की पत्रकार @nailainayat (नायला इनायत) ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस विडियो को शेयर किया है। आप भी इस विडियो को यहां देख सकते हैं।

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