जयंती विशेष: जानिए किस तरह पत्रकारिता करते थे शहीद भगत सिंह

शहीद-ए-आजम भगत सिंह एक महान क्रांतिकारी के साथ-साथ महान पत्रकार भी थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
bhagat singh

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

शहीद-ए-आजम भगत सिंह एक महान क्रांतिकारी के साथ-साथ महान पत्रकार भी थे। क्रेडिट लेने की जो होड़ आजकल की पत्रकारिता में नजर आती है, उस दौर में नदारद थी। 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायपुर जिले के बंगा गांव (फिलहाल पाकिस्तान में) में जन्मे भगत सिंह ने अपने ज्वलंत विचारों और सोच को शब्दों में ढालकर लाखों हिन्दुस्तानियों को प्रेरित किया, लेकिन कभी उसका क्रेडिट नहीं लिया। उनके लिए पत्रकारिता एक मिशन थी, वे लेख लिखते थे, ताकि लोगों को जागृत किया जा सके, उन्हें यह बताया जा सके कि अंग्रेजों के खिलाफ यदि संगठित नहीं हुए तो ताउम्र कुचले जाते रहेंगे। शहीद-ए-आजम ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से आजादी की लड़ाई में भाग लिया। एक तरफ जहां वे क्रांतिकारी भावना से ओतप्रोत अपने भाषणों से नौजवानों की रगो में दौड़ रहे खून को खौलने पर विवश किया करते थे। वहीं दूसरी तरफ अलग-अलग नामों से लेख लिखकर अपनी बातों को क्षेत्रीय सीमाओं के बंधन से मुक्त रखते थे।

भगत सिंह को हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और पंजाबी के साथ-साथ बंगाली भाषा का भी ज्ञान था। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने पंजाब में उठे भाषाई विवाद पर झकझोरने वाला लेख लिखा। इस लेख के लिए उन्हें हिंदी साहित्य सम्मेलन ने पचास रुपए का इनाम भी दिया था। कलकत्ता (अब कोलकाता) से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘मतवाला’ ने भी उनके इस लेख को प्रमुखता से छापा था। इस लेख में उन्होंने लिखा था ‘मौजूदा वक्त में पंजाब में उर्दू का जोर है। अदालतों की भाषा भी यही है। यह सब ठीक है परन्तु हमारे सामने इस समय मुख्य प्रश्न भारत को एक राष्ट्र बनाना है। एक राष्ट्र बनाने के लिए एक भाषा होना आवश्यक है। यदि हम अभी भारत की एक भाषा नहीं बना सकते तो कम से कम लिपि तो एक बना देना चाहिए। उर्दू लिपि संपूर्ण नहीं है। उससे भी बड़ी बात तो यह है कि उसका आधार फारसी पर है। काजी नजर-उल-इस्लाम की कविता में तो धूरजटी, विश्वामित्र और दुर्वासा की चर्चा बार-बार है, लेकिन हमारे उर्दू, हिंदी, पंजाबी कवि उस ओर ध्यान तक न दे सके। क्या यह दुःख की बात नहीं? इसका मुख्य कारण कुछ और नहीं बल्कि भारतीय साहित्य से उनकी अनभिज्ञता है। उनमें भारतीयता आ ही नहीं पाती, तो फिर उनके रचे गए साहित्य से हम कहां तक भारतीय बन सकते हैं? उर्दू अपूर्ण है और जब हमारे सामने वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित सर्वांग-संपूर्ण हिंदी लिपि विधमान है, फिर उसे अपने अपनाने में हिचक किस बात की? हिंदी भाषा ही अंत में एक दिन भारत की भाषा बनेगी, परंतु पहले से ही उसका प्रचार करने से बहुत सुविधा होगी’।

भगत सिंह की लेखनशैली कमाल की थी, वे शब्दों का इतना सटीक चयन किया करते थे कि उनके प्रभाव से बच पाना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं था। इतने धारदार लेखन के पीछे भगत सिंह का अध्ययन था, उन्हें बचपन से ही पढ़ने का शौक था और इसीलिए उनके बारे में कहा जाता था कि वो किताबों को पढ़ते नहीं बल्कि निगल जाते हैं। मासिक ‘चांद’ सहित कई पत्र-पत्रिकाओं में भगत सिंह बलवंत सिंह नटवर, कृष्ण मोहन, अज्ञात आदि नामों से लिखते थे। 1925 में लाहौर में जब भगत सिंह के विरुद्ध एक गिरफ्तारी वांरट जारी हुआ, तो वह दिल्ली पहुंच गए। यहां, उनके शिक्षक और क्रांतिकारी दल के निर्देशक प्राध्यापक जयचन्द्र विद्यालंकार ने एक पत्र हिन्दी दैनिक ‘वीर अर्जुन’ के सम्पादक इंद्रजी के नाम दिया। जिसके आधार पर भगत सिंह ने ‘वीर अर्जुन’ के सम्पादकीय विभाग में कुछ दिनों तक काम किया।  

उन दिनों शादी बहुत जल्दी हो जाया करती थी। शादी की उस उम्र को आज बाल विवाह की संज्ञा दी जाती है। भगत सिंह पर भी जब परिवार वालों ने शादी का दबाव डाला, तो वह अपने पिता के नाम एक पत्र छोड़कर कानपुर चले आये और यहीं से उनके एक विशुद्ध पत्रकार बनने की शुरुआत हुई। पिता के नाम अपने पत्र में उन्होंने लिखा था ‘पूज्य पिता जी, नमस्ते! मेरी जिंदगी भारत की आजादी के महान संकल्प के लिए दान कर दी गई है। इसलिए मेरी जिंदगी में आराम और सांसारिक सुखों का कोई आकर्षण नहीं है। उम्मीद है आप मुझे माफ कर देंगे’। प्रसिद्ध क्रांतिकारी शचींद्रनाथ सान्याल की सलाह पर भगत सिंह कानपुर में पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी से मिले। विद्यार्थीजी समाचार पत्र ‘प्रताप’ के संपादक थे। भगत सिंह ने यहां पहले अखबार बेचने का काम किया और बाद में ‘प्रताप’ के सम्पादकीय विभाग का हिस्सा बन गए। ‘प्रताप’ में उनके बलवंत सिंह के नाम से लेख लगातार छपते थे, जो खासतौर पर नौजवानों के बीच खासे लिकप्रिय थे। शुरुआत में गणेश शंकर विद्यार्थी को इस बात का इल्म नहीं था कि बलवंत सिंह कोई और नहीं बल्कि भगत सिंह ही हैं, लेकिन जब उन्हें इसका पता चला तो उन्होंने भगत सिंह को गले लगा लिया। इसके बाद से भगत सिंह ‘प्रताप’ की अहम कड़ी बन गए थे।

गणेश शंकर विद्यार्थी, भगत सिंह के गुरु और एक तरह से बड़े भाई थे, वो उनकी बात कभी नहीं टालते थे। यही वजह थी कि जब विद्यार्थीजी ने भगत सिंह से अपने घर लौटने को कहा तो वो इनकार नहीं कर सके। कुछ वक्त परिवार के साथ बिताने के बाद वह दिल्ली आए और पत्रकार के रूप में एक नई पारी शुरू की। विद्यार्थीजी की संगत में रहकर भगत सिंह ये समझ चुके थे कि पत्रकारिता आजादी की लड़ाई का एक अहम् अंग है और इसमें महारथ हासिल करके ही हवा का रुख मोड़ा जा सकता है। भगत सिंह पंजाबी पत्रिका किरती के लिए भी रिपोर्टिंग और लेखन कर रहे थे। किरती में वे विद्रोही के नाम से लिखते थे। दिल्ली से ही प्रकाशित पत्रिका महारथी में भी वो लगातार लिख रहे। हालांकि, ‘प्रताप’ में भी उनका लेखन जारी रहा। भगत सिंह केवल क्रांति की बात ही नहीं करते थे, बल्कि उन्होंने एक पत्रकार के रूप में समाज की विसंगतियों पर भी प्रहार किया। उन्होंने समाज में बढ़ते भेदभाव पर लिखा था ‘यह भयानक असमानता और जबरदस्ती लादा गया भेदभाव दुनिया को एक बहुत बड़ी उथल-पुथल की ओर लिये जा रहा है। यह स्थिति अधिक दिनों तक कायम नहीं रह सकती’।  यूँ तो वे राष्ट्रवादी लेखकों का सम्मान करते थे, लेकिन मत विभिन्नता की स्थिति में खुलेमन से अपनी बात रखने में बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाते थे। भगत सिंह की ख़ास बात यह थी कि वो प्रश्न की शैली और रूप के अनुसार ही उत्तर दिया करते थे। एक बार मार्डन रिव्यू के  संपादक रामानंद चटर्जी ने अपने पत्र में इंकलाब जिंदाबाद नारे को हिंसावादी करार देते हुए लेख लिखा था, इसका उत्तर भगत सिंह ने अंग्रेजी में ही दिया।

भगत सिंह ने आखिरी सांस तक अपने अंदर के पत्रकार और लेखक को मरने नहीं दिया। जेल में बैठकर भी वे लगातार लिखते और पढ़ते रहे थे। फांसी दिए जाने से दो घंटे पहले जब उनके वकील प्राण नाथ मेहता उनसे मिलने पहुंचे तो उन्होंने मुस्करा कर मेहता को स्वागत किया और पूछा कि आप मेरी किताब 'रिवॉल्युशनरी लेनिन' लाए हैं? मेहता के किताब देते ही वे पढ़ने बैठ गए। मेहता ने उनसे पूछा कि क्या आप देश को कोई संदेश देना चाहेंगे? भगत सिंह ने किताब से अपना मुंह हटाए बगैर कहा, ‘साम्राज्यवाद मुर्दाबाद और 'इंकलाब जिदाबाद!'

 

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बिहार में इस पॉलिटिकल पार्टी के प्रवक्ता बने पत्रकार असित नाथ

वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर असित नाथ तिवारी ने राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
Asit Nath

वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर असित नाथ तिवारी ने राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्हें बिहार कांग्रेस का प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। इस बात की जानकारी असित नाथ ने खुद अपने फेसबुक पेज पर दी है।

बिहार के बेतिया के रहने वाले असित नाथ तिवारी ने पश्चिम चंपारण में पढ़ाई की है और पत्रकारिता की शुरुआत भी वहीं से की। उन्होंने दैनिक जागरण की मुजफ्फरपुर यूनिट से सम्बद्ध होकर रिपोर्टिंग की शुरुआत की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

टीवी पत्रकारिता में असिता नाथ ने महुआ टीवी से बतौर एंकर शुरुआत की और यह सफर मौर्या टीवी, जी न्यूज हिंदी, के न्यूज इंडिया और समाचार प्लस आदि  तक जारी रहा। असित इन चैनल्स में आउटपुट हेड समेत कई वरिष्ठ पदों पर रहे। पत्रकारिता के साथ साथ कविता और सार्थक लेखन में भी असित की विशेष रुचि है। उन्होंने ‘नदी लौटती भी है’ नाम से कहानी संग्रह भी लिखा है।

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अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने PM मोदी को लिखा लेटर, उठाया ये बड़ा मुद्दा

जिन दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने मोदी को पत्र लिखा है, वे ‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (आईपीआई) और ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (आईएफजे) हैं।

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Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
PM MODI

दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के उत्पीड़न का मामला उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को लिखे गए इस पत्र में इन दोनों प्रेस संस्थाओं ने पीएम से यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने का आग्रह किया है, जिससे पत्रकारों का उत्पीड़न न हो और वे प्रतिशोध के डर के बिना काम कर सकें।

जिन दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं ने मोदी को पत्र लिखा है, वे ऑस्ट्रिया-मुख्यालय स्थित ‘इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट’ (आईपीआई) और बेल्जियम स्थित ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (आईएफजे) हैं। इन दोनों संस्थाओं ने मोदी से राज्य सरकारों को पत्रकारों के खिलाफ देशद्रोह समेत सभी आरोपों को वापस लेने का निर्देश देने के लिए कहा है, जो कर्तव्य पालन के दौरान उन पर लगाए गए हैं।

इसके साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि महामारी फैलने के बाद पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। पत्र के अनुसार, ‘स्वास्थ्य संकट का उपयोग उन लोगों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है, जिन्होंने सरकार की कमी को उजागर किया है। एक सफल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया के लिए एक स्वतंत्र मीडिया आवश्यक है।’

उन्होंने लिखा है, ‘स्वतंत्र, महत्वपूर्ण पत्रकारों को परेशान करने के लिए राजद्रोह के कानूनों का उपयोग न केवल देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का घोर उल्लंघन है। यह सरकार द्वारा किसी आलोचना को चुप कराने का भी प्रयास है।’

रिपोर्ट्स के अनुसार इन दोनों एसोसिशंस का कहना है, ’भारत में 25 मार्च को जब पहली बार लॉकडाउन लगाया गया था, तब से 31 मई के बीच महामारी को कवर करने के लिए 55 पत्रकारों को निशाना बनाया गया। राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (आरआरएजी) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई।’

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पत्रकार की पिटाई के खिलाफ आगे आया एडिटर्स गिल्ड, उठाई ये मांग

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने दिल्ली में ‘कारवां’ मैगजीन के पत्रकार अहान पेनकर को पुलिस द्वारा पीटे जाने के मामले की कड़ी निंदा की है।

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Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
EGI

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने दिल्ली में ‘कारवां’ (Caravan) मैगजीन के पत्रकार अहान पेनकर को पुलिस द्वारा पीटे जाने के मामले की कड़ी निंदा की है। इस बारे में गिल्ड की ओर से एक स्टेटमेंट भी जारी किया गया है। गिल्ड ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की मांग की है।  

गिल्ड का कहना है कि पेनकर पर पुलिस ने उस समय हमला किया, जब वह बतौर पत्रकार अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे। दिल्ली में पिछले दो महीनों के दौरान कारवां मैगजीन का यह चौथा पत्रकार है, जिस पर हमला किया गया है।

यह भी पढ़ें: पत्रकार ने पुलिस अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, कमिश्नर को दी शिकायत

गिल्ड की ओर से जारी स्टेटमेंट के अनुसार, ‘पिछले दिनों उत्तरी दिल्ली में नाबालिग दलित लड़की के बलात्कार और हत्या की घटना के मामले में कुछ छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता मॉडल टाउन इलाक़े के पुलिस स्टेशन के बाहर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पेनकर इसी मामले की कवरेज कर रहे थे। तभी पुलिस ने उनकी पिटाई कर दी। इस दौरान पेनकर ने अपना प्रेस कार्ड भी दिखाया, लेकिन पुलिस नहीं मानी। पुलिस ने उनका फोन जब्त कर लिया और खींचे गए फोटोग्राफ डिलीट कर दिए।’

इस स्टेटमेंट भी यह भी कहा गया है, ‘कारवां के रिपोर्टर पर हुआ यह हमला संवैधानिक सिद्धांतों और मीडिया के स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने के अधिकार का उल्लंघन है। गिल्ड हमले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस आयुक्त से सख्त कार्रवाई की मांग करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। इसके साथ ही पत्रकार के खिलाफ किसी भी मामले को रोकने का निर्देश देना चाहिए।’

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ZEE में हुए बड़े बदलाव, राहुल जौहरी को मिली ये जिम्मेदारी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की

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Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Zee

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की।

इस पुनर्गठन के तहत पुनीत मिश्रा कंटेंट व इंटरनेशनल मार्केट्स के प्रेजिडेंट की भूमिका निभाएंगे। वहीं अमित गोयनका डिजिटल बिजनेस एंड प्लेटफॉर्म्स के प्रेजिडेंट की जिम्मेदारी संभालेंगे। तरुण कात्याल जो ZEE5 इंडिया के बिजनेस का नेतृत्व कर रहे हैं, वे अमित गोयनका को रिपोर्ट करते रहेंगे।

शरीक पटेल इंटीग्रेटेड मूवीज बिजनेस का काम देखेंगे और अनुराग बेदी म्यूजिक बिजनेस संभालते रहेंगे।

इसके अलावा राहुल जौहरी को प्रेजिडेंट (बिजनेस- साउथ एशिया) के तौर पर नियुक्त किया गया है और वे इंटीग्रेटेड रेवेन्यू और मोनेटाइजिंग टीम का नेतृत्व करेंगे। जौहरी इससे पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पहले सीईओ थे और करीब चार साल तक उन्होंने इस पद पर अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। बीसीसीआई से पहले वे करीब 15 साल तक डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे। करीब 15 साल तक डिस्कवरी से जुड़े रहने के बाद जौहरी ने बीसीसीआई के सीईओ का पदभार संभाला था।

पुनीत मिश्रा, अमित गोयनका, शरीक पटेल, अनुराग बेदी और राहुल जौहरी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका को रिपोर्ट करेंगे। कंपनी में किए गए ये बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

 

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अब इस तरह का कंटेंट प्रोडक्शन हाउसेज से सीधे तैयार करा सकेगा प्रसार भारती

15 अक्टूबर को हुई प्रसार भारती बोर्ड की 163वीं बैठक में इस संबंध में लिया गया निर्णय

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Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Prasar Bharati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’  (Prasar Bharati) प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के विभिन्न प्रावधानों के अनुरूप अब रणनीतिक, राष्ट्रीय व अन्य प्रतिष्ठित महत्व की परियोजनाओं के लिए जाने-माने प्रॉडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स को सीधे कंटेंट का प्रोडक्शन प्रदान कर सकता है।

प्रसार भारती बोर्ड ने इसके लिए दिशा-निर्देशों को अपनी मंजूरी दे दी है। प्रसार भारती बोर्ड की 15 अक्टूबर को हुई 163वीं बोर्ड बैठक में ‘Policy Guidelines for Commissioning of Programmes under DAP (Direct Assignment Process)’ को मंजूरी दे दी गई है। ये गाइडलाइंस सभी पूर्व और वर्तमान नीतियों में ‘DAP’  के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं में लागू होंगी।

इन गाइडलाइंस के अनुसार प्रसार भारती प्रबंधन सीधे असाइमेंट के लिए समय-समय पर रणनीतिक/राष्ट्रीय व प्रतिष्ठित महत्व के टॉपिक्स/सब्जेक्ट/थीम्स को शॉर्टलिस्ट करेगा। जिन प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स को डाइरेक्ट असाइमेंट दिया जाना है, उनकी पहचान प्रसार भारती प्रबंधन करेगा। ‘DAP’ प्रक्रिया शुरू करने से पहले शॉर्टलिस्ट किए गए सभी नामों के बारे में संबंधित बोर्ड समिति को सूचित किया जाएगा।

प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स की ओर से रणनीतिक/राष्ट्रीय व प्रतिष्ठित महत्व के कंटेंट को तैयार करने के लिए मिलने वाले स्वत:प्रस्तावों को भी पहले संबंधित बोर्ड कमेटी के सामने शॉर्टलिस्टिंग के लिए रखना होगा। इसके बाद मूल्यांकन के लिए उन्हें ‘DAP’ की कमेटी के सामने रखा जाएगा।

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनीं TRAI-ब्रॉडकास्टर्स की दलीलें, दिया ये आदेश

बॉम्बे उच्च न्यायलय में चल रही है सुनवाई। कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

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Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
TRAI

बॉम्बे हाई कोर्ट का कहना है कि वर्ष 2020 के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (नियामक ढांचे) को लागू न किए जाने को लेकर ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ जबरन कोई कठोर कदम नहीं उठा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। बताया जाता है कि कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। इसके साथ ही कहा गया है कि जब तक फैसला नहीं आ जाता, ट्राई इस मामले में ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकता है।

इससे पहले एक सुनवाई में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस ए.ए. सैयद और जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की डिवीजन बेंच ने ट्राई से कई सवाल पूछे थे। बता दें कि तमाम ब्रॉडकास्टर्स और आईबीएफ ने ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर (NTO-2) को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

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पत्रकारों की सुरक्षा के लिए इस राज्य में जल्द लागू होगा कानून

लंबे समय से चली आ रही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है।

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Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Journalist Protection Act

झारखंड में जल्द ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ (Journalist Protection Act) लागू होगा। लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने के लिए कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। उसके बाद इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। ।

मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान एसोसिएशन ने दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को मुआवजा देने, गंभीर रूप से बीमार पत्रकारों को आर्थिक सहायता देने और पत्रकार पेंशन योजना में सुधार करने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने जरूरतमंद सभी पत्रकारों को पत्रकार पेंशन योजना का लाभ देने, इसकी खामियों में सुधार करने की बात कही। उन्होंने गंभीर रूप से बीमार 10 पत्रकारों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता देने का निर्देश भी दिया।

मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय महासचिव शाहनवाज हसन, झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, रांची जिला अध्यक्ष आलोक सिन्हा और पत्रकार नईमुल्ला खान आदि शामिल थे।

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यूपी सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने संभाला टीआरपी घोटाले की जांच का जिम्मा

टेलीविजन इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेटिंग घोटाले की जांच का जिम्मा अब सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ में ले लिया है

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Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
CBI

टेलीविजन इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेटिंग घोटाले की जांच का जिम्मा अब सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ में ले लिया है और यूपी में की गई एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है।

इस मामले की जांच में सीबीआई की एंट्री तब हुई, जब मामले की जांच मुंबई पुलिस कर रही है, जिसने रिपब्लिक टीवी सहित तीन चैनलों पर टीआरपी में हेरफेर करने का आरोप लगाया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश पर लखनऊ पुलिस से जांच को अपने हाथ मे लिया और वह भी तब जब यूपी में इससे संबंधित एक मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ पुलिस ने रविवार को विज्ञापन कंपनी ‘गोल्डन रैबिट कम्युनिकेशंस’ कंपनी के सीईओ कमल शर्मा की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की। शिकायत दर्ज होने के बाद, योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीबीआई मामले की सिफारिश की। 24 घंटे के भीतर केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच के लिए यूपी सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

वहीं, रिपब्लिक टीवी ने भी मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। चैनल का कहना था कि सुशांत सिंह राजपूत केस में आवाज उठाने के लिए मुंबई पुलिस उनके पीछे पड़ी है, क्योंकि उन्होंने इस मामले में कवरेज के दौरान मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।

खबरों के मुताबिक, सीबीआई की एक टीम मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाने के लिए लखनऊ पहुंची है। एजेंसी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले के बाद से अब यह दूसरी बार है कि किसी जांच ने मुंबई पुलिस से भाजपा शासित राज्य और फिर सीबीआई तक का रास्ता बनाया है।

इस महीने की शुरुआत में मुंबई पुलिस ने कहा था कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जांच के दौरान न्यूज में हेरफेर और गलत टिप्पणियों के बड़े पैमाने पर विश्लेषण के दौरान टीआरपी रेटिंग घोटाले का खुलासा हुआ था।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह ने कहा कि चुनिंदा घरों में रेटिंग मीटर लगाने वाली एजेंसी हंसा के पूर्व कर्मचारियों ने गोपनीय डेटा को तीन चैनलों के साथ साझा किया था। हंसा के डेटा का उपयोग BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) द्वारा किया जाता है, जो देश भर के चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग के आंकड़े जारी करता है।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह के मुताबिक, सिटी पुलिस टीआरपी के हेरफेर से जुड़े घोटाले की जांच कर रही है। पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी एक विशेष चैनल को चलाने के लिए घरों में रिश्वत दे रहे थे। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से दो मराठी चैनल फक्त मराठी और बॉक्स सिनेमा के मालिक हैं, जबकि तीसरे आरोपी को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है।

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सुधीर चौधरी के इन सवालों पर अमित शाह ने कुछ यूं रखी ‘मन की बात’

जी न्यूज के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी से बातचीत में गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार चुनाव में बीजेपी की स्थिति, सुशांत केस से लेकर टीआरपी घोटाले समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Sudhir Chaudhary Amit Shah

सुशांत सिंह राजपूत केस की रिपोर्टिंग के दौरान ही टीआरपी घोटाला सामने आने के बाद मीडिया की भूमिका को लेकर उठे सवाल के बारे में गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। राजनीति नहीं होनी चाहिए। ‘जी न्यूज’ (Zee News) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के साथ एक बातचीत के दौरान गृहमंत्री ने बिहार चुनाव, कोरोना काल में चीन से तनातनी और टीआरपी घोटाले की आंच में मीडिया की विश्‍वसनीयता समेत तमाम पहलुओं पर अपनी बात रखी।

क्या मीडिया विवाद पर कानून का पालन होना चाहिए था? इस बारे में अमित शाह का कहना था, 'मीडिया संस्थाओं और अदालत को इसे ठीक करना चाहिए'। इन मुद्दों पर मीडिया की आलोचना के बारे में अमित शाह का कहना था कि मीडिया बैलेंस रिपोर्टिंग करे, खबर मार्केटिंग की चीज नहीं है।

बातचीत के दौरान राष्‍ट्रीय सुरक्षा के सवाल पर अमित शाह का कहना था कि भारत की एक इंच की भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं कर पाएगा। ये भारत सरकार का अटल निर्णय है। कोविड-19 से मुकाबले को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा, 'देखिए, बहुत समय से पढ़ाई-लिखाई का समय नहीं मिला था। डेढ़ महीने में मुझे पढ़ाई-लिखाई का समय मिल गया। दूसरी बात, कई सारी चीज़ों को पीछे मुड़कर देखने का, सोचने का समय भी मिला। कई गलतियां मुझसे स्वयं से कहां हुईं, क्या हुईं, इसके बारे में भी सोचा और आगे वो गलती न हों, इसके लिए अपने आपको तैयार भी किया। विशेषकर पढ़ाई-लिखाई पर मेरा ज्यादा ध्यान रहा।

बिहार में सुशांत सिंह राजपूत के चुनावी मुद्दा बन जाने के बारे में अमित शाह का कहना था, 'हो सकता है कि कुछ लोग इस मुद्दे पर भी वोट डालें। मगर दो चीजें एक साथ हुईं। इतना विवाद हुआ कि मुझे आश्चर्य इस बात का था कि महाराष्ट्र सरकार ने क्यों सीबीआई को केस पहले नहीं दे दिया। सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। पहले से ही सीबीआई को केस दे देते, परिवार की मांग है, तो बात खत्म हो जाती। खैर अब मीडिया ने  भी उसको ज्‍यादा तूल भी दिया'।

इस पूरी बातचीत को आप यहां देख सकते हैं—

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मातृभूमि ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन का कद बढ़ा, मिली नई जिम्मेदारी

मातृभूमि (Mathrubhumi) ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन को प्रमोट किए जाने की खबर सामने आई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Naveen

मातृभूमि (Mathrubhumi) ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन को प्रमोट किए जाने की खबर सामने आई है। उन्हें मीडिया सॉल्यूशंस टीआडी (टेलीविजन, रेडियो और डिजिटल) का हेड बनाया गया है। अब मातृभूमि न्यूज टेलीविजन चैनल (Mathrubhumi News Television Channel), कप्पा टीवी (Kappa TV), क्लब एफएम (Club FM) और मातृभूमि डिजिटल (Mathrubhumi Digital) के सेल्स व मार्केटिंग कार्यों की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होगी।

अपनी नई भूमिका पर नवीन श्रीनिवासन ने कहा कि सही कहूं तो मैं इस जिम्मेदारी को लेने के लिए काफी उत्साहित हूं। परिस्थितियां वैसे तो चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हमारे पास एक बेहतरीन टीम है जो कि इसका मुकाबला करने के लिए सक्षम है। इसके अलावा, एक मीडिया समूह के तौर पर हम हमेशा केरल के सामाजिक माहौल के साथ गहराई से जुड़े रहे हैं और मलयाली लोगों ने हम पर पूरा भरोसा जताया है, जिसका हमें काफी फायदा मिला है।

अलग-अलग इंडस्ट्रीज और डोमेन्स में काम करने का अनुभव रखने वाले नवीन आईआईएम लखनऊ के छात्र रह चुके हैं। इससे पहले वे दैनिक ‘मातृभूमि’ के लिए क्लस्टर हेड सेल्स की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्हें कंपनी के लिए नए इनोवेटिव आइडियाज और सेल्स संचालित गतिविधियां बनाने का श्रेय दिया जाता है। फिलहाल वे मातृभूमि ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर एम.वी. श्रेयम्स कुमार को रिपोर्ट करेंगे।

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