मीडिया में बहुत तेजी से फैल रहा है ये ‘वायरस’: मनोज मनु, ग्रुप एडिटर, सहारा टीवी नेटवर्क

प्रतिष्ठित ‘एक्सफचेंज4मीडिया न्यूसज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के 11वें एडिशन का आयोजन 16 फरवरी को...

Last Modified:
Tuesday, 19 February, 2019
Manoj Manu

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

प्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के 11वें एडिशन का आयोजन 16 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में किया गया। इस मौके पर देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को नई दिशा देने और इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को ‘इनबा अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मीडिया क्षेत्र की हस्तियों ने विभिन्न पैनल डिस्कशन के जरिये अपने विचार व्यक्त किए। समाचार4मीडिया डॉट कॉम के एग्जिक्यूटिव एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने बतौर सेशन चेयर एक पैनल डिस्कशन को मॉडरेट किया।

‘रीजनल मीडिया:खतरा, खबरें और कमाई’ विषय पर हुए इस पैनल डिस्कशन में ‘सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क’ के ग्रुप एडिटर मनोज मनु, ‘नेटवर्क18’ (हिंदी नेटवर्क) के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री और ‘जनतंत्र टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ वाशिंद मिश्र, ‘इंडिया न्यूज’ के चीफ एडिटर (मल्टीमीडिया) अजय शुक्ल, ‘पीटीसी नेटवर्क’ के मैनेजिंग डायरेक्टर- प्रेजिडेंट रबिंद्र नारायण और‘बीबीसी गुजराती’ के एडिटर अंकुर जैन शामिल रहे।

पैनल डिस्कशन के दौरान अभिषेक मेहरोत्रा ने ‘सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क’ के ग्रुप एडिटर मनोज मनु से जानना चाहा कि अक्सर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से पत्रकारों की मौत की खबरें आती हैं। इन क्षेत्रों में खनन माफिया काफी सक्रिय हैं, जिनके ऊपर आरोप लगते रहते हैं कि उन्होंने पत्रकारों पर हमला कराया है। उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिले होने के मामले भी सामने आते हैं। ऐसे में खनन माफिया के खिलाफ खबरें लिखते समय किस तरह की चुनौतियां रहती हैं?

इस बारे में मनोज मनु का कहना था, ‘यह बात सही है कि इन क्षेत्रों में खनन माफिया काफी सक्रिय हैं और आए दिन खनन माफिया द्वारा पत्रकारों पर हमले की खबरें भी आती हैं। पहले भी इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। लेकिन पहले इस तरह की खबरें नहीं आती थीं, यदि आती भी थीं तो अखबारों और टीवी चैनलों में उन्हें इतने दमदार तरीके से नहीं उठाया जाता था। अब चूंकि मीडिया काफी मजबूत हो चुका है तो ऐसे में रीजनल मीडिया के कारण अब कस्बा, ब्लॉक और तहसील स्तर पर इस तरह की खबरों को प्रमुखता मिलती है। हालांकि शुरुआती स्तर पर माफिया को लगता है कि उनके खिलाफ कुछ नहीं होने वाला। यदि किसी घटना को अंजाम दे भी दिया जाए तो चीजें दब जाएंगी, लेकिन ऐसा होता नहीं है। रीजनल मीडिया के प्रभाव के कारण इस तरह की घटनाओं में अब कमी आई है।’

उन्होंने कहा, ‘जहां तक छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों की बात है तो वहां कुछ इस तरह की घटनाएं हुई हैं, जिनकी दस्तक वहां से निकलकर राजधानी दिल्ली तक देखी गई है। लेकिन अब वहां भी इस तरह की घटनाओं में कमी आई है। सरकार ने भी इस तरह के मामलों पर गौर करना शुरू किया है। जहां तक खतरे की बात है तो चाहे राष्ट्रीय मीडिया हो अथवा प्रादेशिक, आजकल सबसे बड़ा खतरा इस बात का है कि पत्रकारिता में विचारधारा का ‘वायरस’ बहुत तेजी से फैल रहा है। ऐसे में मुझे तो समझ में नहीं आता है कि इस वायरस को किस तरह की वैक्सीन से समाप्त किया जाए।’

यह पूछे जाने पर कि रीजनल मीडिया का इंपैक्ट क्या पड़ रहा है। जिस तरह से खबरों को लेकर नेशनल मीडिया इंपैक्ट डालता है और उसके आधार पर कार्रवाई भी होती है, लेकिन रीजनल मीडिया में छोटे-छोटे कस्बों और शहरों समेत दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक से खबरें आती हैं। ऐसे में रीजनल मीडिया के पास खबरों की भरमार होती है, तो कैसे इसकी खबरों का इंपैक्ट पड़ता है? खबर लाने वाले स्ट्रिंगर्स की क्रेडिबिलिटी सवालों के घेर में रहती है, क्यों? 

इस पर मनोज मनु का कहना था, ‘स्ट्रिंगर्स से जब आप बिजनेस भी मंगाएंगे तो कहीं न कहीं गड़बड़ होनी ही है, इसलिए मैंने कार्यभार संभालते ही सबसे पहले यह सुनिश्चित किया कि स्ट्रिंगर्स सिर्फ खबरें करेंगे, बिजनेस के लिए अलग से व्यवस्था होगी। दूसरी बात ये कि हमें यह सोचना होगा कि जो नेशनल हिंदी चैनल होने का दावा कर रहे हैं, क्या वे वास्तव में नेशनल चैनल हैं। आज के समय में हिंदी भाषी रीजनल चैनल के लिए नेशनल चैनल सबसे ज्यादा परेशानी बन रहे हैं, क्योंकि मार्केट बहुत छोटी है और उसी से उनको भी शेयर जा रहा है, ऐसे में रीजनल चैनलों का शेयर कम हो जाता है।’

उन्होंने कहा, ‘नेशनल से अलग हटकर इसलिए रीजनल न्यूज चैनल खुले, क्योंकि उन्हें पलामू की खबर दिखानी है, बस्तर की भी खबर दिखानी है और तमाम छोटे-छोटे इलाकों की खबर भी दिखानी है। कम महत्वपूर्ण खबरों को फास्ट न्यूज में दिखा देते हैं। कहने का मतलब है कि वह जिस राज्य का रीजनल चैनल है, वहां की खबरों को उसमें पूरा महत्व मिलता है। रही बात रेवेन्यू की तो रीजनल में आज भी रेवेन्यू का सबसे बड़ा माध्यम सरकार ही है। यदि सरकार का विज्ञापन नहीं मिलेगा तो रीजनल चैनल को परेशानी होगी। पहले गिने-चुने रीजनल चैनल होते थे, लेकिन अब उनकी संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में सरकार के सामने भी संकट है, लेकिन सरकार यह नहीं कहती है कि आप उसके आगे घुटने टेको। अगर आप खबर दिखा रहे हैं और उसकी सत्यता को सरकार को बता रहे हो तो वो ये कभी नहीं कहती है। इसमें आपको देखना होगा कि आपने अपना आकलन कहां किया है। घुटने टेकने पर या खबर दिखाने पर।’

इसके साथ ही एक सवाल के जवाब में मनोज मनु का यह भी कहना था, ‘देश में बहुत सारी चीजें बंट रही हैं, इसलिए हमें इस सच्चाई को स्वीकार करने में कोई गुरेज नहीं है कि मीडिया भी बंट रहा है। पहले यदि पत्रकार का किसी राजनीतिक दल के नेता से संबंध हुआ करता था तो यह जरूरी नहीं था कि यह संबंध खबरों में भी दिखे, लेकिन पिछले कुछ समय से ऑनस्क्रीन भी ऐसी चीजें दिखाई दे रही हैं। मेरा कहना है कि इस तरह की चीजें ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाली हैं, क्योंकि दर्शक बहुत समझदार हैं और यही कारण है कि कुछ समय पूर्व जब तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आए तो मुझे लगता है कि कई टीवी एंकर्स के चेहरे पर दर्शकों ने यह भाव पढ़ लिए थे। कहने का मतलब है कि आप लंबे समय तक किसी की विचारधारा को प्रभावित नहीं कर सकते हैं। अब सोचना यह है कि विचारधारा का यह ‘वायरस’ कब तक काम करेगा, कभी न कभी तो कोई ‘वैक्सीन’ आएगा, जो इस पर काम करेगा।’

आप ये पूरी चर्चा नीचे विडियो पर क्लिक कर भी देख सकते हैं...

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चुनावी नतीजों का अंग्रेजी-हिंदी में इन बड़े प्लेटफॉर्म पर विश्लेषण करेंगे अभिज्ञान प्रकाश

टीवी न्यूज का बड़ा चेहरा अभिज्ञान प्रकाश एक बार फिर सक्रिय तौर पर चुनावी विश्लेषण करते हुए दिखेंगे

Last Modified:
Wednesday, 22 May, 2019
Abhigyan

 टीवी न्यूज का बड़ा चेहरा अभिज्ञान प्रकाश एक बार फिर सक्रिय तौर पर चुनावी विश्लेषण करते हुए दिखेंगे। एनडीटीवी समूह के साथ दो दशक की लंबी पारी खेलने वाले अभिज्ञान प्रकाश के अप्रैल में समूह को अलविदा कहने के बाद अब वे अंग्रेजी पत्रकारिता में भी सक्रिय हो रहे हैं। वे चुनावी नतीजों के दिन विक्रम चंद्रा के डिजिटल वेंचर एडिटरजी (Editorji) के इलेक्शन शो में इलेक्शन एनालिस्ट के तौर पर शामिल होंगे। 

साथ ही, वे प्रतिष्ठित हिंदी न्यूज चैनल एबीपी न्यूज पर हिंदी चुनावी विश्लेषक के तौर पर दिखेंगे। बताया गया है कि एबीपी न्यूज और एडिटरजी के साथ वे चुनावी नतीजों के बाद होने वाले नए प्रधानमंत्री के शपथ और सरकार गठन तक लगातार जुड़े रहेंगे।, 

गौरतलब है कि हाल ही में उन्होंने यूपी चुनाव पर अपनी डिजिटल सीरीज For UP From UP के जरिए सुर्खियां बटोरी थीं। उत्तर प्रदेश की कई महत्वपूर्ण संसदीय सीटों पर दौरा कर उन्होंने वहां से ग्राउंड रिपोर्टिंग कर कई अहम चुनावी मुद्दों को उठाया था। 
 

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कई बार निकली है Exit Poll की हवा, हो सकते है चौंकाने वाले नतीजे

लोकसभा चुनाव के लगभग सभी एग्जिट पोल्स में एनडीए को स्पष्ट बहुमत का अनुमान जताया गया है

Last Modified:
Wednesday, 22 May, 2019
Exit Poll

लोकसभा चुनाव के लगभग सभी एग्जिट पोल्स में एनडीए को स्पष्ट बहुमत का अनुमान जताया गया है। 5 एग्जिट पोल्स कहते हैं कि एनडीए को 300 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। एग्जिट पोल्स सामने आने के बाद भाजपा समर्थकों में ख़ुशी की लहर है, लेकिन परिणाम इस ख़ुशी को काफुर भी कर सकते हैं। क्योंकि एग्जिट पोल्स का इतिहास काफी प्रभावशाली नहीं रहा है। 

यदि पिछले कुछ पोल्स पर नज़र डालें, तो साफ़ हो जाता है कि एग्जिट पोल्स पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता। हालांकि, 2014 के एग्जिट पोल्स कुछ हद तक असल परिणामों के नज़दीक रहे, लेकिन सत्ता तक पहुँचने में यह ‘कुछ’ खेल बना और बिगाड़ दोनों सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव को लेकर अधिकांश एजेंसियों ने एनडीए को 260 से 280 सीटें मिलने की बात कही थी, जबकि यूपीए की अनुमानित सीटों की संख्या 100 के आसपास बताई गई थी। मगर जब परिणाम आये तो हर कोई चौंक गया। एनडीए ने रिकॉर्डतोड़ 336 सीटें हासिल कीं और यूपीए महज 60 पर सिमटकर रह गई। इस लिहाज से देखें तो एग्जिट पोल्स में भाजपा नीत एनडीए की जीत की बात सही साबित हुई, लेकिन अनुमानित और असल सीटों के बीच एक बहुत बड़ा अंतर छूट गया। यदि इस बार भी ऐसा कुछ होता है, तो सियासी उंट किसी भी करवट बैठ सकता है।
  
2014 के एग्जिट पोल्स में इंडिया टुडे ने एनडीए को 261-183, CNN-IBN, CSDS ने 270-282 और इंडिया टीवी-सी वोटर ने 289 सीटें मिलने की बात कही थी। जबकि यूपीए को क्रमश: 110-120, 92-102 और 100 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। इन पोल्स में ममता बनर्जी की टीएमसी और AIADMK के बारे में कहा गया था कि दोनों दलों को 20 से ज्यादा सीटों पर जीत मिल सकती है, लेकिन कितनी ज्यादा इसका कोई जिक्र नहीं था। परिणामों में ममता की पार्टी को 42 में से 34 और AIADMK को 39 में से 37 सीटें मिलीं।

इसी तरह यदि थोड़ा और पीछे चलें तो 2004 में एग्जिट पोल्स बुरी तरह विफल रहे। उस वक्त ज्यादातर पोल्स में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के फिर सत्ता में आने की भविष्यवाणी की गई थी, मगर नतीजे बिल्कुल उलट आए। एनडीए को 189 सीटें मिलीं और कांग्रेस की अगुआई वाले यूपीए को 222 सीटें। 2009 में भी एग्जिट पोल्स फेल रहे। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में यह तो कहा गया कि यूपीए को एनडीए पर बढ़त मिलेगी, लेकिन किसी ने यह अनुमान नहीं लगाया कि कांग्रेस अकेले ही 200 पार पहुंच जाएगी। परिणाम सामने आये तो कांग्रेस को अकेले 206 और यूपीए को 262 सीटें मिलीं। ऐसे ही 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी एग्जिट पोल्स गलत रहे। सभी एग्जिट पोल्स में भाजपा+ को जेडीयू-आरजेडी गठबंधन पर बढ़त दिखाई गई, लेकिन नतीजे इसके विपरीत आये। भाजपा+ 58 सीटों पर सिमट गई और जेडीयू-आरजेडी गठबंधन ने 178 सीटें अपने नाम कीं।

लिहाजा एग्जिट पोल्स पर आँखमूंद के विश्वास करने से बेहतर है चुनाव के परिणामों का इंतजार किया जाए, वैसे भी इसमें अब कुछ घंटे ही शेष हैं।
 

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चीख-चीखकर अर्नब बोले, इसलिए चुनाव फर्जी था

इस पर भी चर्चा हो रही है कि क्या हर बार ईवीएम को कठघरे में खड़ा करना जायज है?

Last Modified:
Wednesday, 22 May, 2019
ARNAB GOSWAMI

लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल सामने आने के बाद संभावित परिणामों के साथ ही इस पर भी चर्चा हो रही है कि क्या हर बार ईवीएम को कठघरे में खड़ा करना जायज है? अर्नब गोस्वामी के चैनल रिपब्लिक भारत के चर्चित डिबेट शो ‘भारत पूछता है’ में इसी विषय को उठाया गया। डिबेट में खुद अर्नब के साथ-साथ चैनल के अन्य पत्रकार, चुनाव विश्लेषक और सियासी दलों के प्रवक्ता शामिल हुए। इस ख़ास प्रोग्राम के लिए सेट भी बेहद ख़ास बनाया गया था। संसद की तरह दिखने वाले सेट पर चर्चा के लिए कुल 11 लोग उपस्थित थे, लिहाजा चर्चा के दिलचस्प होने की संभावना थी और हुआ भी ऐसा ही। हालांकि, ये बात अलग है कि अर्नब बीच में ज्यादा ही आक्रामक हो गए। वैसे, यह अर्नब गोस्वामी की पहचान है, लेकिन इस बार उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज़ को भी पीछे छोड़ दिया।

नीचे विडियो पर क्लिक कर आप अर्नब का ये आक्रमक रूप देख सकते हैं...

 

‘ईवीएम पर महाभारत’ इस शीर्षक के साथ शो की शुरुआत हुई और विपक्षी दलों पर निशाना साधने के बाद अर्नब एकदम से बसपा के धर्मवीर चौधरी पर हमलावर हो गए। शायद धर्मवीर ने भी नहीं सोचा होगा कि बिना किसी सवाल-जवाब से उन्हें अर्नब से इतना कुछ सुनने को मिलेगा। दरअसल, शो में उपस्थित सभी अतिथियों का परिचय कराने के बाद गोस्वामी ने कहा ‘तो धर्मवीर जी आप लोगों को शर्म नहीं आती है।’ यह शब्द सुनकर धर्मवीर चौधरी अपने हाथ मसलने लगे और इससे पहले कि वो कुछ बोल पाते, अर्नब ने उन्हें दोबारा निशाने पर लिया। उन्होंने कटाक्ष भरे लहजे में कहा ‘नहीं-नहीं मैं पूछ लूं कि पूछना भी आजकल बंद है? पूछने में भी आप मुझे रोकने की कोशिश करेंगे, शर्म नहीं आती है’? इसके बाद अर्नब मुख्य सवाल पर आये और बोले ‘आप चुनाव हार गए हैं या हारने वाले हैं, जो भी है, लेकिन क्या मतलब हुआ कि आप चुनाव हार गए तो आपने लोकतंत्र को फर्जी कहा। इतनी हिम्मत आपकी कैसे हो गई? हारे, तो हार मान लीजिये, लोगों को दोष क्यों दे रहे हैं। जाइये लोगों के पास हाथ जोड़कर माफ़ी मांगिये’?

अर्नब के तीखे शब्द सुनकर धर्मवीर चौधरी भी खुद पर नियंत्रण नहीं रख सके और मीडिया को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा ‘मीडिया को माफ़ी मांगनी चाहिए, ये मीडिया बिका हुआ है। मीडिया हारा हुआ कैसे कह रहा है, जब कि रिजल्ट नहीं आ जाएं।’ 

 

इसके बाद एकदम से बहस ज्यादा तीखे होती चली गई। राजनीति पर बहस वैसे भी तीखी होती है, और जहाँ 11 लोग एकसाथ बैठकर बात कर रहे हों वहां तीखापन कितना होगा अंदाज़ा लगाया जा सकता है। भाजपा और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच काफी देर तक ज़ुबानी जंग चलती रही और इस जंग को अर्नब बीच-बीच में और हवा देते रहे। कुछ देर बाद अर्नब सभी को पीछे छोड़कर कैमरे के ठीक सामने चले गए और कहने लगे ‘आप इन्हें छोडिये मेरी सुनिए...मैं कुछ कह रहा हूँ।’ अपनी बात कहते-कहते वो अचानक पीछे मुड़े और बेहद तेज़ आवाज़ में बोलने लगे कि अरे भाई यदि चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं था, तो क्या लड़े थे आप चुनाव, क्यों लड़े थे’?

     
इस गर्मागर्म बहसबाजी के बाद अर्नब अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गए, लेकिन कुर्सी ज्यादा देर तक उन्हें रोक नहीं पाई। ईवीएम पर विपक्ष क्यों हल्ला मचा रहा है यह समझाते-समझाते वो अचानक उठे और यह कहते हुए टेबल के गोल-गोल घूमने लगे कि ‘मैं कह कर रहूँगा...क्योंकि जातिगत वोट अब नहीं चले, इसलिए चुनाव फर्जी था...मैं कहूँगा आज। क्योंकि पश्चिम बंगाल में हिंसा के बाद भी 80 फीसदी लोगों ने वोट दिया इसलिए चुनाव फर्जी था।’ 

इसके बाद वह सीधे विपक्षी दलों के नेताओं के सामने पहुंचे और जोर-जोर से कहने लगे ‘मैं कह रहा हूँ माफ़ी मांगिये लोगों से, माफ़ी मांगिये।’ कुछ देर के लिए लगा कि शायद हंगामे के साथ ही शो समाप्त हो जायेगा, लेकिन अर्नब फिर शांत हुए और कुर्सी पर जाकर बैठ गए। हालांकि, उठने-बैठने का सिलसिला अंत तक चलता रहा।

पूरा विडियो आप यहाँ देख सकते हैं:

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ZEE: VP और हेड ऑफ मार्केटिंग सुजीत मिश्र ने लिया ये बड़ा फैसला

जी मीडिया कोर्प में बतौर वाइस प्रेजिडेंट और हेड ऑफ मार्केटिंग सुजीत मिश्रा ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है

Last Modified:
Wednesday, 22 May, 2019
Sujeet Mishra

Zee समूह से आ रही खबर के मुताबिक जी मीडिया कोर्प में बतौर वाइस प्रेजिडेंट और हेड ऑफ मार्केटिंग सुजीत मिश्र ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने समूह से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यहां पिछली साल सितंबर में जॉइन किया था। बड़ी बात ये है कि सुजीत ने अपनी दो पिछली पारियां बहुत ही छोटी खेली है। 

जी समूह से जुड़ने से पहले वे  अंग्रेजी चैनल 'टाइम्स नाउ' (Times Now) के साथ मार्केटिंग हेड के तौर पर जुड़े थे। गौरतलब है कि 2017 में सुजीत मिश्र ने दिसंबर में 'टाइम्स  नाउ' जॉइन किया था। अपनी नौ महीने की पारी के दौरान मिश्र वहां पर ब्रैंड की स्ट्रेटजिक प्लानिंग और कम्युनिकेशन का नेतृत्व कर रहे थे। इसमें कंज्यूमर रिसर्च, न्यू ब्रैंड इनिशिएटिव, मार्केट डेवलपमेंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का काम भी शामिल था।  

सुजीत मिश्रा को मार्केटिंग और ब्रैंड कम्युनिकेशंस के क्षेत्र में 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह 'एबीपी न्यूबज नेटवर्क' में ग्रुप मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर चुके हैं, जहां उनके पास चार नए ब्रैंड्स की जिम्मेंदारी थी। इसके अलावा उन्हों ने वहां पर स्टार न्यूज से एबीपी न्यूज के परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा सुजी‍त मिश्र 'दैनिक जागरण' और 'ईटीवी नेटवर्क' के साथ भी काम कर चुके हैं..

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नेशनल हेराल्ड पर पिघला अनिल अंबानी का 'दिल'

राफेल लड़ाकू विमान के बारे में प्रकाशित एक लेख के खिलाफ दर्ज कराया गया था पांच हजार करोड़ की मानहानि का दावा

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
National Herald

कांग्रेस नेताओं और नेशनल हेराल्ड  के लिए यह काफी राहत भरी खबर है। खबर ये है कि उद्योगपति अनिल अंबानी का रिलांयस समूह इन दोनों के खिलाफ दर्ज मानहानि का मुकदमा वापस लेने जा रहा है। दरअसल, अनिल अंबानी की रिलायंस समूह की कंपनियों ने अहमदाबाद की एक अदालत में पिछले साल 26 अगस्त को कांग्रेस के स्वामित्व वाले अखबार नेशनल हेराल्ड पर 5,000 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दायर किया था। समूह का दावा था कि राफेल लड़ाकू विमान के बारे में अखबार में छपा एक लेख उसके लिए 'अपमानजनक और मानहानिकारक' है।

रिलायंस डिफेंस, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर ने दीवानी मानहानि का मुकदमा नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड, उसके प्रभारी संपादक जफर आगा और खबर लिखने वाले पत्रकार विश्वदीपक के खिलाफ दायर किया था। ये कंपनियां अनिल अंबानी नीत रिलायंस समूह से जुड़ी हैं। रिलायंस समूह की कंपनियों का आरोप था कि अखबार में 'अनिल अंबानी फ्लोटेड रिलायंस डिफेंस 10 डेज बिफोर मोदी अनाउंस्ड राफेल डील' शीर्षक से प्रकाशित लेख से उसकी 'नकारात्मक छवि' बनी है और रिलायंस समूह और उसके चेयरमैन अंबानी के बारे में जन धारणा पर विपरीत असर पड़ा है। इससे आम जनता में संदेश गया है कि सरकार ने उन्हें कारोबार में गलत ढंग से फायदा पहुंचाने का कार्य किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस के वकील रशेष पारिख ने कहा है कि वो यह मुकदमा वापस लेने जा रहे हैं और इस बारे में उन्होंने नेशनल हेराल्ड के वकील पी एस चंपानेरी को बता दिया है। चंपानेरी ने कहा कि केस को वापस लेने की औपचारिक प्रक्रिया, गर्मी की छुट्टी के बाद अदालत में फिर से शुरू की जाएगी। बता दें कि जिन कांग्रेस नेताओं पर अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली Reliance Group ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था, उनमें रणदीप सिंह सुरजेवाला, सुनील जाखड़,ओमान चेंडी, अशोक चह्वाण, अभिषेक मनु सिंघवी, संजय निरूपम और शक्तिसिंह गोहिल शामिल थे। 

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रवीश बोले- कुछ एंकर्स को मंत्री बना दो, रोहित सरदाना ने याद दिलाया वो 'काला इतिहास'

लोकसभा चुनाव को लेकर मीडिया में दिखाए एग्जिट पोल को लेकर शुरू हो गया है चर्चाओं का दौर

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
Ravish Rohit

लोकसभा चुनाव के लगभग सभी एग्जिट पोल में भाजपा को बहुमत मिलता दिख रहा है। यानी ‘एक बार फिर मोदी सरकार’ और ‘आएगा तो मोदी ही’ जैसे नारे सही साबित होते नज़र आ रहे हैं। परिणामों से पहले के इस ‘परिणाम’ को लेकर मंथन और चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कोई इसे गलत करार दे रहा है, तो कोई जनमत का फैसला।

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर हुए ज्यादा मतदान का हवाला देते हुए एग्जिट पोल को कठघरे में खड़ा किया है। उनका यह ‘प्राइम टाइम’ सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है, इसके अलावा रवीश का एक और विडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। इस विडियो में ‘आजतक’ के एडिटर रोहित सरदाना को रवीश के सवाल का जवाब देते दिखाया गया है। हालांकि, ये सवाल-जवाब आमने-सामने के नहीं हैं।

रवीश ने अपने स्टूडियो में बैठकर भाजपा की इस अनुमानित प्रचंड जीत के लिए मीडिया एवं पत्रकारों पर कटाक्ष किया, जबकि रोहित ने एक अन्य विडियो में इसका जवाब दिया। सोशल मीडिया पर दोनों की विडियो क्लिपिंग को एक रूप देकर चलाया जा रहा है, जिसका शीर्षक है ‘रोहित सरदाना ने रवीश को धो दिया।’

रवीश कुमार पहले से ही मीडिया के एक वर्ग पर हमलावर रहे हैं। उनका मानना है कि कुछ पत्रकार सरकार के कर्ताधर्ताओं से तीखे सवाल पूछने से कतराते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू को लेकर भी उन्होंने संबंधित पत्रकारों पर निशाना साधा था। लोकसभा चुनाव के वक़्त जिस तरह से मोदी मीडिया में छाए रहे, इससे भी रवीश नाराज़ हैं। अपने इस विडियो में रवीश कहते नज़र आ रहे हैं कि ‘यह चुनाव बहुत खतरनाक है। चुनाव आयोग की तो मैं बात करना नहीं चाहता। जिस तरह से मीडिया ने चुनाव में मेहनत की है, मुझे लगता है कि कुछ न्यूज़ एंकर को भी मंत्री बनाना चाहिए...कुछ मालिकों को भी मंत्री बनाना चाहिए। उन्हें कैबिनेट और न्यूज़ एंकर को राज्य मंत्री का दर्जा देना चाहिए।’ रवीश ने भले ही किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा उन्हीं पत्रकारों और न्यूज़ चैनलों की तरफ था जिन्होंने पीएम मोदी को ज्यादा कवरेज दी।

रवीश कुमार का यह विडियो सामने आने के बाद रोहित सरदाना ने भी उन्हें अपने ही अंदाज़ में जवाब दिया। रोहित से फेसबुक चैट के दौरान एक शख्स ने जब पूछा, ‘रोहित भाई आपके एग्जिट पोल से काली स्क्रीन वाले पत्रकार बहुत गुस्से में हैं।‘ इस पर रोहित जवाब देते हैं, ‘भाई साहब ऐसा है कि वो तो हमेशा ही गुस्से में रहते हैं। आज वो कह रहे हैं कि कुछ न्यूज़ एंकर और मीडिया मालिकों को मंत्री बना दिया जाना चाहिए, क्यों? उस दिन तो वो मंत्री नहीं बने थे, जिस दिन अपने स्टूडियो में बैठकर वो मंत्री डिसाइड करते थे।’ इसके बाद रोहित बाकायदा एक्टिंग करते हुए आगे कहते हैं, भाई साहब कुछ लोगों के साथ दिक्कत है, उन पर कमेंट करने का मतलब है कि आप अपना समय व्यर्थ गँवा रहे हैं।’

सोशल मीडिया पर दोनों पत्रकारों के विडियो को एक रूप देकर वायरल किया जा रहा है। चुनावी मौसम में इस तीखी चुनावी बयानबाजी को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। बाला नामक यूजर ने ट्विटर पर यह विडियो शेयर किया है। अब तक इसे 11 हजार के आसपास लाइक मिले हैं और 5 हजार से ज्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है। इस पोस्ट पर रविश और रोहित के समर्थन और विरोध में 400 से ज्यादा कमेंट भी आ चुके हैं।

इस विडियो को आप यहां देख सकते हैं-

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जानें, क्यों ये साल रहा NDTV समूह के लिए शानदार

ग्रुप की ऑपरेटिंग कॉस्ट में भी पिछले साल के मुकाबले दर्ज की गई है कमी

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
NDTV

‘एनडीटीवी ग्रुप’ (NDTV Group) के लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 (FY 2018-19) काफी फायदेमंद रहा है। ग्रुप ने इस अवधि के लिए 90.2 करोड़ रुपए का टर्नअराउंड घोषित किया है, जबकि 10.2 करोड़ रुपए का प्रॉफिट घोषित किया गया है। इसके अलावा पिछले साल के मुकाबले ग्रुप की परिचालन लागत (operating costs) में भी 113.1 करोड़ रुपए की कमी आई है।

ग्रुप का यह प्रदर्शन अब तक के बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक है। पिछले वित्तीय वर्ष में ग्रुप को 80 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इस बार ग्रुप की ब्रॉडकास्ट कंपनी ‘एनडीटीवी लिमिटेड’ (NDTV Limited) ने 13.3 करोड़ रुपए के प्रॉफिट की घोषणा की है। कंपनी को पिछले 14 सालों में इस बार सबसे ज्यादा प्रॉफिट हुआ है। पिछले साल कंपनी को 61.4 करोड़ रुपए का लॉस हुआ था। वहीं, डिजिटल की बात करें तो ग्रुप की डिजिटल कंपनी ‘एनडीटीवी कंवर्जेंस’ (NDTV Convergence) ने चौथी तिमाही की अब तक की सबसे बेहतरीन कमाई की है।

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अब आपकी टीवी स्क्रीन पर नहीं दिखाई देगा NaMo TV, ये है वजह

31 मार्च को लॉन्चिंग के बाद से ही शुरू हो गया था इस चैनल को लेकर विवाद

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
Namo TV

लोकसभा चुनाव से पहले 31 मार्च को अपनी लॉन्चिंग के साथ ही विवादों में घिरा नमो (नरेंद्र मोदी) टीवी चैनल आखिर बंद हो गया है। जितनी खामोशी के साथ यह चैनल शुरू हुआ था, उतनी ही खामोशी के साथ यह चैनल टीवी स्क्रीन पर दिखाई देना बंद हो गया है। बताया जाता है कि 17 मई से इस चैनल को ऑफ एयर कर दिया गया है। डीटीएच ऑपरेटर्स जैसे कि विडियोकॉन, डिश टीवी और टाटा स्काई  ने इस टीवी चैनल को फ्री टू एयर (FTA) करार दिया था। ऐसे में इस चैनल को देखने के लिए उपभोक्ताओं को पैसा नहीं देना पड़ रहा था। ये चैनल पूरे देश में दिख रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस चैनल को लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के प्रचार अभियान के माध्यम के रूप में शुरू किया गया था। अब चूंकि लोकसभा चुनाव खत्म हो गया है, इसलिए अब जरूरत न होने पर इस चैनल को बंद कर दिया गया है।

गौरतलब है कि इस चैनल पर सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने भाषण और भारतीय जनता पार्टी से संबंधित सामग्री दिखाई जाती थी। इसको लेकर चैनल पर विपक्षा पार्टियों ने कई सवालिया निशान लगाए थे और चुनाव आयोग से शिकायत की थी। इस शिकायत में कहा गया था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान आचार संहिता लागू होने के दौरान एक राजनीतिक दल को कैसे चैनल चलाने की इजाजत दी जा सकती है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि अगर चुनाव आयोग द्वारा चैनल को अनुमति नहीं प्रदान की गई है तो इस पर कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।

विपक्षी पार्टियों द्वारा की गई शिकायत के बाद इसकी लॉन्चिंग को लेकर चुनाव आयोग ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) को पत्र लिखकर जवाब मांगा था। तब सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने चुनाव आयोग को बताया था कि ‘नमो टीवी’ कोई लाइसेंसशुदा चैनल नहीं, बल्कि विज्ञापन प्लेटफॉर्म है, इसलिए इसे किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं है।

इसके बाद चुनाव आयोग ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति द्वारा ‘नमो टीवी’ के कंटेंट को प्रमाणित करने के लिए लिखा था। कहा गया था कि ‘नमो टीवी’ पर आने वाले सभी विज्ञापनों को इस कमेटी से होकर गुजरना होगा। 

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पत्रकार प्रिया रमानी मामले में एमजे अकबर ने कोर्ट में इस बात से किया इनकार

दिल्ली की अदालत में पेश हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
Priya-Akbar

पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ दर्ज कराए गए मानहानि के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। सवाल-जवाब के दौरान एमजे अकबर ने इस बात से इनकार किया कि वे वर्ष 1993 में एक नौकरी के इंटरव्यू के सिलसिले में मुंबई के ओबेराय होटल में प्रिया रमानी से मिले थे। इसके अलावा एमजे अकबर ने इस बात से भी इनकार किया कि उन्होंने होटल के कमरे में प्रिया रमानी को शराब ऑफर की थी और उन दोनों के बीच बातचीत प्रोफेशनल से ज्यादा पर्सनल थी। एमजे अकबर का कहना था, ‘जब प्रिया रमानी से उनकी मुलाकात ही नहीं हुई तो यह कहना गलत है कि उन्होंने रमानी से उनके लेखन कौशल, उनके करंट अफेयर्स ज्ञान आदि के बारे में सवाल पूछे थे।’

बचाव पक्ष ने करीब तीन घंटे तक एमजे अकबर से सवाल किए। इस बीच एमजे अकबर की वकील गीता लूथरा व प्रिया रमानी की वकील रेवेका जॉन के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई। इस दौरान कोर्ट रूम में महिला अधिवक्ता समेत बड़ी संख्या में महिला पत्रकार मौजूद थीं। इस मामले में अभी जिरह पूरी नहीं हुई है। कोर्ट ने मामले में अगली तारीख छह जुलाई की दी है।

गौरतलब है कि #MeToo कैंपेन के तहत प्रिया रमानी ने अकबर पर 20 साल पहले उनके साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। हालांकि अकबर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद अकबर ने प्रिया रमानी के खिलाफ दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था। अकबर ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद पिछले वर्ष 17 अक्टूबर को विदेश राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

पिछले दिनों इस मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि के आरोप तय कर दिए थे। वहीं, प्रिया रमानी ने इस मामले में अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि वह सुनवाई का सामना करेंगी। इस मामले में सोमवार को एमजे अकबर से जिरह हुई।

बता दें कि प्रिया रमानी बतौर पत्रकार एमजे अकबर के साथ काम कर चुकी हैं। सोशल मीडिया पर प्रिया रमानी के इस आरोप के बाद तो एमजे अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों की जैसे बाढ़ सी आ गई थी। यह मामला सामने आने के बाद संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर और तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की सदस्यता निलंबित कर दी थी।

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वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बोले, इस 'खेल' में बहुत अमीर होने वाले हैं कुछ लोग

मीडिया में दिखाए गए एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर उठाए कई सवाल

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
Abhisar Sharma

क्या वास्तव में भाजपा को इतनी सीटें मिलने जा रही हैं? क्या नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे? ये कुछ सवाल हैं, जो एग्जिट पोल सामने आने के बाद पूछे जा रहे हैं। लगभग सभी एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए को बहुमत मिलने की बात कही है। लिहाजा, ऐसे में इन पोल का विश्लेषण भी ज़रूरी हो जाता है। वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने यही करने का प्रयास किया है। साथ ही उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया है कि मीडिया संस्थानों पर ‘मनमाफिक’ एग्जिट पोल तैयार करने का कितना दबाव था। यानी एक तरह से अभिसार ने एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं।

यूट्यूब चैनल ‘न्यूज़ क्लिक’ के लिए अपने विडियो में अभिसार ने खुलासा किया कि एग्जिट पोल के सर्वेक्षण के काम में लगीं दो एजेंसियां भाजपा के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करती हैं। इसके अलावा, एक एजेंसी जिसने भाजपा को 300 सीटों पर जीत दिखाई थी, उसके सर्वे में सट्टा बाज़ार का पैसा लगा है। लिहाजा, इन एजेंसियों से निष्पक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इतना ही नहीं, अभिसार ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रत्येक एग्जिट पोल एजेंसी पर दबाव डाला गया कि विपक्ष की सीटों को कम करने दिखाया जाये। यानी विपक्ष कितनी सीटें जीत सकता है, यह आंकड़ा जानबूझकर कम किया जाये।

अभिसार शर्मा के मुताबिक, उन्हें यह भी पता चला है कि एक न्यूज़ चैनल, जिसने भाजपा को एग्जिट पोल में 180 सीटें दी थीं, उस पर इतना दबाव डाला गया कि बाद में उसने सीटें बढ़ाकर 250 कर दीं। अभिसार का तो यहाँ तक कहना है कि एग्जिट पोल का यह खेल सट्टा बाज़ार के लिए रचा गया है। इस खेल में कई लोग बहुत अमीर होने वाले हैं। गौरतलब है कि एग्जिट पोल के नतीजे सामने आने के बाद शेयर बाज़ार में एकदम से उछाल देखने को मिला था।

अभिसार शर्मा का यह विडियो आप यहां देख सकते हैं-

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