‘प्रसार भारती’ ने भी खोला ‘टैम’ के खिलाफ मोर्चा

<p><strong>समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो</strong></p> <div>&lsquo;एनडीटीवी&rsquo;&nbsp;के द्वारा&nbsp;&ls

Last Modified:
Friday, 01 January, 2016

समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो

‘एनडीटीवी’ के द्वारा ‘टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट’ (टैम) के खिलाफ मुकदमा दायर करने के बाद, अब ‘प्रसार भारती’ भी ‘दूरदर्शन’ और उससे जुड़े चैनलों के लिए ऑडियंस से संबंधित गलत आंकड़ों के लिए, कानूनी कार्यवायी करने की सोच रही है। आज,  को ‘प्रसार भारती’ की बैठक में, इस मुद्दे से संबंधित हर पहलुओं पर चर्चा की जायेगी।
 
इस संबंध में, ‘प्रसार भारती’ के सीईओ, जवाहर सरकार ने कहा, “मैं टैम के खिलाफ कानूनी कार्यवायी करने के पक्ष में हूं। लेकिन अभी तक हम अपने कानूनी सलहाकारों से बात कर रहे हैं। अंतिम निर्णय बोर्ड की मीटिंग में ली जायेगी और हम उसका पालन करेंगे।”
 
‘दूरदर्शन’ के पास, ‘डीडी भारती’, ‘डीडी नेशनल’ सहित 37 चैनल हैं। इसके अलावा, ‘लोकसभा’,‘राज्यसभा’ सहित चार सहयोगी चैनल हैं। ‘दूरदर्शन’ अपने 1415 ट्रांसमीटर्स के द्वारा इस देश की 92 प्रतिशत आबादी तक पहुंच रखती है। और इस तरह से इसके दर्शकों की संख्या 2.25 करोड़ के लगभग हो सकता है। राज्य ब्रॉडकास्टर के भी ‘डीडी डायरेक्ट प्लस’ के 1 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं और इस तरह से कुल 3.5 करोड़ दर्शक हैं।
 
हालांकि, सूत्रों के अनुसार, ‘दूरदर्शन’ की इतनी बड़ी संख्या में दर्शक होने के बावजूद ‘टैम’ के द्वारा व्यूअरशिप रेटिंग को कम करके दिखाया जाता है।
 
सूत्रों के अनुसार, “दूरदर्शन को कभी भी उच्च टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स नहीं दी गई , जिसके कारण वर्षों से दूरदर्शन को राजस्व का काफी नुकसान उठाना पड़ा है। ”
 
‘प्रसार भारती’ का राजस्व, वास्तव में पिछले कुछ सालों से 1,200 से 1,400 करोड़ तक स्थिर है। इसका साफ अर्थ है कि सार्वजनिक क्षेत्र की ब्रॉडकास्टर कंपनी, राजस्व के मामले में लगातार स्थिर है।
 
सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने लगातार इस मुद्दे को सूचना एवं प्रसारण मंत्री एवं संसदीय स्थायी समिति के पास उठाया है। वास्तव में, 2004 में, संसद की स्थायी समिति के सामने पेश होते हुए, निखिल कुमार, ने ‘प्रसार भारती’ के टीआरपी मुद्दे पर कहा कि ना ही ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाता या कॉरपोरेट मीडिया प्लानर्स को भारतीयों के टेलीविजन देखने की आदतों के बारे में सही तथ्य मिल पाते हैं, क्योंकि भारतीय टेलीविजन दर्शकों को मापने के लिए, टेलीविजन व्यूइयिंग प्वाइंट का सही सिस्टम मौजूद नहीं है।
 
उन्होंने कहा, “11 करोड़ 20 लाख टेलीविजन घरों में से 6 करोड़ 20 लाख टेलीविजन घर टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट की पहुंच से बाहर हैं, क्योंकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में हैं।”
 
रिपोर्ट के अनुसार, “प्रसार भारती मानता है कि ‘दूरदर्शन’ के आकार और उसकी व्यापक पहुंच के बावजूद, टैम मीडिया के आंकड़ों की विश्वसनीयता में कमी के अलावा, डाटा के साथ छेड़छाड़ का मुद्दा भी है क्योंकि इसके आंकड़ें को किसी स्वतंत्र एजेंसी के द्वारा जांचा नहीं जाता है।”
 
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