डिजिटल बढ़ रहा है फिर भी क्यों ऐडवरेटाइजर्स की पहली पसंद है टीवी, जानें...

आजकल डिजिटल का जमाना है। पिछले कुछ वर्षों की बात करें तो ऐडवर्टाइजर्स भी इसके

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 September, 2018
Last Modified:
Wednesday, 26 September, 2018
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सोनम सैनी ।।

आजकल डिजिटल का जमाना है। पिछले कुछ वर्षों की बात करें तो ऐडवर्टाइजर्स भी इसके प्रभाव से अछूते नहीं हैं और इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं। जितने भी बड़े ब्रैंड हैं, लगभग सभी ऑनलाइन प्लेटफॉंर्म पर मौजूद हैं और अब हालात ये हैं कि डिजिटल के बिना कोई भी मार्केट स्ट्रैटजी पूरी नहीं मानी जाती है।   

‘केपीएमजी’ की रिपोर्ट 'Media Ecosystem: The wall falls down' के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018 (FY18) में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग के रेवेन्यू में 35 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है और यह 116000 करोड़ रुपए हो गई है। जबकि टेलिविजन की ग्रोथ वित्तीय वर्ष 2018 में इसके मुकाबले कम रही है और यह 9.5 प्रतिशत के हिसाब से बढ़कर 65200 रुपए रही है।

इस बात में कोई शक नहीं है कि आज के समय में ब्रैंड्स के लिए डिजिटल बहुत जरूरी हो गया है, हालांकि ऐडवर्टाइजर्स अभी भी टेलिविजन को प्राथमिकता दे रहे हैं और यह उनकी पहली पसंद बना हुआ है।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या ऐडवर्टाइजर्स और टेलिविजन के बीच का संबंध और मजबूत होता जा रहा है? क्या टेलिविजन आगे भी ऐडवर्टाइजर्स की पहली पसंद बना रहेगा? क्या डिजिटल इस स्थिति को बदल पाएगा?, इन सब बातों को लेकर हमने कुछ विशेषज्ञों से बातचीत की कि आखिर आने वाले समय में क्या हालात रहने वाले हैं?

इस बारे में ‘एचयूएल’ (HUL)  के सीईओ और एमडी संजीव मेहता का कहना है कि टेलिविजन आज भी प्रासंगिक है और आने वाले कई दशकों तक देश में इसका प्रभाव यूं ही बना रहेगा।  

मेहता का कहना है, ‘आज टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि हम डिजिटल कम्युनिकेशंस के साथ अपने टार्गेट को प्लान कर सकते हैं। हालांकि कुछ चीजें कभी नहीं बदलने वाली हैं। मार्केट के फंडामेंटल यानी बेसिक बातें हमेशा यही बने रहेंगे। मार्केटिंग में कंज्यूमर हमेशा ही मुख्य रहेगा। नए जमाने का कंटेंट हमें नए तरीके से स्टोरीटैलिंग की कला सिखाएगा।’

वहीं इस बारे में ‘पारले प्रॉडक्ट्स’ (Parle products) के कैटगरी हेड मयंक शाह का कहना है कि चूंकि टेलिविजन की पहुंच बहुत ज्यादा है, इसलिए यह ब्रैड्स के लिए पसंदीदा माध्यम बना हुआ है। उनका मानना है कि ब्रैंड्स के लिए टेलिविजन पर विज्ञापन करना ज्यादा उचित है क्योंकि टीवी की पहुंच ज्यादा है।  

शाह का कहना है, ‘इस बात में कोई शक नहीं कि डिजिटल काफी तेजी से ग्रोथ कर रहा है और यह काफी महत्वपूर्ण माध्यम भी बना हुआ है। लेकिन जब बात इसकी पहुंच की आती है, खासकर एफएमसीजी और दैनिक जरूरतें की चीजों के ब्रैंड के बारे में तो टीवी का प्रदर्शन बेहतर है।’ उनका कहना है कि टेलिविजन कुछ समय के लिए डिजिटल पर अपनी बढ़त बनाए रखेगा। डिजिटल उन ब्रैंड्स के लिए एक प्लेटफॉर्म है जो आडियंस के खास वर्ग को टार्गेट करना चाहते हैं।  

इस बारे में 'मैडिसन वर्ल्‍ड' (Madison World) के सीओओ (Buying) नील कमल शर्मा का कहना है कि पिछले वर्ष के मुकाबले एक प्रतिशत की गिरावट के बावजूद ऐडवर्टाइजिंग के चार्ट में टेलिविजन अभी भी टॉप पर बना हुआ है।

नील कमल शर्मा का कहना है, ‘यह सही है कि देश में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग का रेवेन्यू काफी बढ़ा है और यह ट्रेंड अभी भी जारी है। लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले एक प्रतिशत की गिरावट के बावजूद टेलिविजन का ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू अभी भी सबसे ज्यादा है।’

शर्मा का कहना है, ‘चूंकि कुल ऐडवर्टाइजिंग में 12 प्रतिशत और डिजिटल में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में टीवी और प्रिंट जैसे स्थापित माध्यमों के शेयर में भविष्य में कमी आने की संभावना है। लेकिन टेलिविजन की प्रासंगिकता बनी रहेगी। चूंकि ऐडवर्टाइजिंग कैटेगरी में टीवी सबसे टॉप पर है, इसलिए यह एफएमसीजी प्लेयर्स की पहली पसंद बना हुआ है। इसके अलावा स्मार्ट फोन, ट्रैवल और ओटीटी प्लेटफॉर्म भी अपनी ग्रोथ के लिए टीवी का इस्तेमाल करते हैं।’

डिजिटल मीडिया की ग्रोथ में एफएमसीजी, टेलिकॉम, बीएफएसआई, रियल एस्टेट और ई-कॉमर्स जैसी कैटेगरी का काफी योगदान है। हालांकि इनमें से कुछ का ट्रेडिशनल मीडिया में भी काफी प्रभाव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर न्यूज, ऐंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स के कंटेंट का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। खासकर, युवा वर्ग इन दिनों ट्रेडिशनल मीडिया से दूर होता जा रहा है और यही कारण है कि एफएमसीजी और टेलिकॉम जैसी कैटेगरी भी बड़े पैमाने पर डिजिटल प्लेटफॉर्मस का इस्तेमाल कर रही हैं।

‘बजाज एलायंज लाइफ इंश्योरेंस’ (Bajaj Allianz Life Insurance) के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर चंद्रमोहन मेहरा का मानना है कि कम से कम तीन से पांच साल तक दोनों माध्यम सह-अस्तित्व में बने रहेंगे।  

मेहरा का कहना है, ‘सबसे पहले मीडिया का सलेक्शन ऑब्जेक्ट के अनुसार करना है, टीवी और डिजिटल का चुनाव आपके काम पर निर्भर करता है। ब्रैंड्स के लिए इंटीग्रेटिड अप्रोच ज्यादा प्रभावी रहती है। टीवी पहुंच बढ़ाने और डिजिटल ब्रैंड को गहराई से जोड़ने के काम आता है।’

‘केपीएमजी’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका जैसे मार्केट में व्यूअर्स टीवी से डिजिटल की ओर इसलिए मुड़ रहे हैं क्योंकि वहां पर डिजिटल का इंफ्रॉस्ट्रक्चर काफी मजबूत है और इसकी कम कीमत भी एक बड़ी वजह है। लेकिन, भारत में ग्रोथ और कीमत के मामले में टीवी काफी मजबूत स्थिति में है। इसके अलावा, डिजिटल का उतना इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं है। ऐसे में, लोगों का टीवी की तरफ झुकाव हो जाता है।

‘वॉयकॉम 18’ (Viacom 18) के रीजनल टीवी नेटवर्क के हेड रवीश कुमार के अनुसार, कंज्यूमर्स तक पहुंच के मामले में टीवी सबसे बड़ा और सस्ता माध्यम है।

उनका कहना है, ‘टीवी के दर्शकों को मापना काफी आसान है जबकि डिजिटल में इसके लिए काफी समय लगता है। हालांकि कंटेंट के मामले में दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं लेकिन दोनों को एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि ब्रैंड्स के लिए टीवी पहली पसंद बना हुआ है।’

‘MullenLowe Lintas’ ग्रुप में ‘पाइंटनाइन लिंटास’ (PointNine Lintas) के नेशनल डॉयरेक्टर विधू सागर का मानना है कि अलग-अलग लोगों के लिए हमेशा अलग स्थिति होती है और सभी प्रकार के ऑडियंस के लिए सामान्य दृष्टिकोण लागू नहीं किया जा सकता है।

 सागर का कहना है, ‘आज मीडिया की जो स्थिति है, उसमें आप पुराने दृष्टिकोण को नहीं अपना सकते हैं, क्योंकि समय के साथ चीजें बदलती रहती हैं। आज के समय में लॉन्च हो रहा कोई भी ब्रैंड टीवी और कई मामलों में प्रिंट के बिना कुछ नहीं कर सकता है।’

सागर का कहना है, ‘आप यदि बड़े पैमाने पर काम करना चाहते हैं तो आपको डिजिटल के साथ टीवी की जरूरत भी पड़ेगी। यदि आप अपने ब्रैंड के साथ कई अन्य पहलू सम्मान और विश्वसनीयता शामिल करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉडकॉस्ट मीडिया के साथ जाना पड़ेगा।’

‘केपीएमजी’ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में डिजिटल ऐडवर्टाइजमेंट मुख्य धारा में आ चुका है। वित्तीय वर्ष 2023 में डिजिटल पर विज्ञापन खर्च 40000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। वर्ष 2017 डिजिटल पर विज्ञापन खर्च का योगदान 86.2 बिलियन रुपए था और वर्ष 2023 तक सीएजीआर (CAGR)  ग्रोथ 30.9 तक बढ़ने का अनुमान है।

सागर का कहना है, ‘डिजिटल में तो काफी तेजी से वृद्धि हुई है लेकिन अधिकतर ऐडवर्टाइजर्स ने इस हिसाब से अपना बजट नहीं बढ़ाया है। इसलिए डिजिटल का रेवेन्यू दूसरे मीडिया से कटकर आ रहा है। यह रेडियो, सिनेमा और प्रिंट को प्रभावित कर रहा है।

मैगजींस लगभग समाप्ति की ओर हैं और कई जगह टेलिविजन भी प्रभावित हो रहा है। लेकिन टीवी की अपनी अलग बात है और कोई भी क्लाइंट अचानक से टीवी से हटकर एकदम से डिजिटल की ओर नहीं जाने वाला है।

इस समय भारतीय ओटीटी इंडस्ट्री ‘AVOD’ अथवा ‘freemium’ मॉडल पर काम कर रही है और ‘SVOD’ अभी आरंभिक अवस्था में है। टेल्को आधारित पेड सबस्क्रिप्शन के साथ 2-2.4 मिलियन सबस्क्राइबर्स सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स सबस्क्राइब कर रहे हैं। हालांकि ऐसे टेल्को आधारित सबस्क्रिप्शन में पिछले साल इजाफा हुआ है, लेकिन सीपीएम (CPM) रेट घटने से ऐडवर्टाइजमेंट रेवेन्यू को काफी चुनौती का सामना करना पड़ा है।

केपीएमजी’ के पार्टनर और हेड गिरीश मेनन का कहना है, ‘इस समय डिजिटल का सीपीएम कम है। इस वजह से भी डिजिटल के समक्ष काफी चुनौतियां हैं। प्रिंट में एक पेज के विज्ञापन के मुकाबले डिजिटल में काफी कम कमाई होती है। इसलिए सीपीएम बढ़ने से पहले आपको आरओआई (ROI) और मीजरमेंट की जरूरत होती है।’

‘केपीएमजी’ की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018 में भले ही टीवी की रफ्तार कम रही हो लेकिन उम्मीद है कि यह फिर वापसी करेगा और पिछले वर्षों की तरह फिर आगे बढ़ेगा।

बढ़ती पहुंच, विज्ञापन की बढ़ती मांग के कारण टीवी की सीएजीआर (CAGR) ग्रोथ 12.6 से होने की उम्मीद है। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में दो क्रिकेट वर्ल्ड कप के साथ ही आम चुनाव भी होने हैं, वहीं डिजिटाइजेशन का भी काफी फायदा मिलेगा।

 

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ASCI के निर्देश के बाद WhiteHat Jr अपने विज्ञापनों को लेगा वापस

एडुटेक कंपनी व्हाइट हैट जूनियर (WhiteHat Jr) ने अपने विज्ञापनों को वापस लेने पर सहमति जता दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Samachar4media

एडुटेक कंपनी व्हाइट हैट जूनियर (WhiteHat Jr) ने अपने विज्ञापनों को वापस लेने पर सहमति जता दी है। दरअसल, भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने एडुटेक कंपनी को ऐसा करने हिदायत दी थी, जिसके बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय विज्ञापन मानक परिषद ने बायजू (Byju's) के स्वामित्व वाली स्टार्ट-अप कंपनी के सात विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों को सही पाया था।

सोशल मीडिया पर यह सुझाव देते हुए कंपनी के विज्ञापनों की आलोचना की गई थी कि कोडिंग ज्ञान ने छोटे बच्चों को ऐसे ऐप विकसित करने में मदद की है जो 'निवेशकों को आकर्षित करेंगे'।

लिहाजा एडुटेक कंपनी ने कहा कि वह उन पांच विज्ञापनों को वापस लेगा, जो बच्चों को कोडिंग करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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जानिए, पिछले तीन महीनों में कैसी रही प्रिंट में विज्ञापनों की 'रफ्तार'

प्रिंट के लिए सबसे खराब समय संभवतः खत्म हो गया है। नवीनतम टैम एडएक्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रतिदिन औसत ऐड वॉल्यूम में इस साल अप्रैल में दर्ज संख्या के मुकाबले अगस्त में वृद्धि देखी गई है

Last Modified:
Friday, 16 October, 2020
Newspaper

प्रिंट के लिए सबसे खराब समय संभवतः खत्म हो गया है। नवीनतम टैम एडएक्स (TAM AdEx) के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रतिदिन औसत ऐड वॉल्यूम में इस साल अप्रैल में दर्ज संख्या के मुकाबले अगस्त में 5.7 गुना की वृद्धि देखी गई है।

जुलाई और सितंबर के बीच विज्ञापनों की शीर्ष पांच कैटेगरीज में कारें, मल्टीपल कोर्सेज, टू-व्हीलर्स, रियल एस्टेट और ओटीसी प्रॉडक्ट्स की रेंज की कैटेगरीज थीं। जुलाई और सितंबर के बीच इन शीर्ष पांच कैटेगरीज का ऐड वॉल्यूम 33% था, जबकि अप्रैल से जून के बीच यह 21% था।

अप्रैल से जुलाई के बीच कारों और ओटीसी प्रॉडक्ट्स की रेंज के विज्ञापन ही क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर था। जुलाई से सितंबर के बीच भी ये इस कैटेगरीज के विज्ञापन अपनी जगह को पहले की तरह बरकरार रखने में कामयाब रहे। वहीं टू-व्हीलर्स के विज्ञापन की कैटेगरी अप्रैल से जून के बीच नौवें स्थान पर थी, जोकि जुलाई से सितंबर के बीच तीसरे नंबर पर पहुंच गई। ऐसे ही प्रॉपर्टीज/रियल स्टेट के विज्ञापन की कैटेगरी अप्रैल से जून के बीच दर्ज की गई संख्या से चार पायदान ऊपर पहुंच गई और जुलाई से सितंबर के बीच यह चौथे नंबर पर रही।    

इस अवधि के दौरान शीर्ष पांच एडवरटाइजर्स में एसबीएस बायोटेक (SBS Biotech), मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki), हिन्दुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever), हीरो मोटोकॉर्प (Hero Motocorp) और टीवीएस मोटर (TVS Motor) शामिल रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि शीर्ष पांच में से तीन ब्रैंड्स ऑटो सेक्टर से थे। शीर्ष पांच ब्रैंड्स में मारुति कार रेंज (Maruti Car Range), किया सॉनेट (KIA Sonet), जॉली तुलसी 51 ड्रॉप्स (Jolly Tulsi 51 Drops), टीवीएस टू व्हीलर रेंज (TVS Two Wheelers Range) और डॉ. ऑर्थो ऑयल (Dr Ortho Oil) शामिल थे।

अप्रैल से जून की तुलना में जुलाई से सितंबर के दौरान सबसे तेजी से बढ़ने वाली कैटेगरीज में शैम्पू, ईकॉम-फाइनेंशियल सर्विसेज, चॉकलेट्स, इवेंट्स-टेक्सटाइल/ क्लॉथिंग और ब्यूटी ऐसेसरीज/प्रॉडक्ट्स थे।

इस दौरान 74% विज्ञापन अंग्रेजी और हिंदी भाषाई अखबारों के लिए थे, जबकि मराठी पर 7%, कन्नड़ पर 4%, तमिल पर 4% और अन्य पर 11% थे।

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‘इंडियन सोसायटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ में सुशील मैटी को मिली अहम जिम्मेदारी

‘इंडियन सोसायटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) में सुशील मैटी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Last Modified:
Friday, 16 October, 2020
Sushil Matey

एडवर्टाइजर्स की प्रमुख संस्था ‘इंडियन सोसायटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) ने सुशील मैटी (Sushil Matey) को अपना चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त किया है। 

इस बारे में हाल ही में नियुक्त किए गए ‘ISA’ के चेयरमैन और ‘गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स लिमिटेड’ के सीईओ (India and SAARC) सुनील कटारिया का कहना है, ‘सुनील मैटी हमारे विजन को आगे बढ़ाने और इस परिवर्तन की गति को तेज करने में अहम भूमिका निभाएंगे। हम ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (WFA) के साथ मिलकर काम करने और इंडस्ट्री में एक ग्लोबल बेंचमार्क बनाने के लिए तत्पर हैं।’

वहीं, सुशील मैटी का कहना है, ‘इस पद पर नियुक्त किए जाने को लेकर मैं काफी सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मैं सभी हितधारकों और भागीदारों के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हूं।’ बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट सुशील ने आईआईएम कोलकाता से एमबीए (मार्केटिंग और फाइनेंस) की पढ़ाई की है। 

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IAA में जनक सारदा को फिर मिली यह जिम्मेदारी

उन्हें ‘IAA’ की ग्लोबल एग्जिक्यूटिव कमेटी में डिजिटल इनोवेशन की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 08 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 08 October, 2020
janak Sarda

नासिक (महाराष्ट्र) के ‘देशदूत मीडिया ग्रुप’ (Deshdoot Media Group) के मैनेजिंग डायरेक्टर जनक सारदा को  ‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ (IAA) का दोबारा से वाइस प्रेजिडेंट चुना गया है। इसके साथ ही उन्हें ‘IAA’ की ग्लोबल एग्जिक्यूटिव कमेटी में डिजिटल इनोवेशन (Digital Innovation) की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

दो भारतीय जनका सारदा और प्रदीप द्विवेदी सीईओ (Eros India of Eros STX Global Corporation) जिन्हें वाइस प्रेजिडेंट और एरिया डायरेक्टर (APAC region) चुना गया है, अब ग्लोबल मार्केटिंग और कम्युनिकेशन स्टेज पर जिम्मेदारी संभालेंगे।

बताया जाता है कि डिजिटल बातचीत और बिजनेस प्रोसेस की बढ़ती जरूरतों से डील करने के लिए वाइस प्रेजिडेंट (digital innovations) का पद विशेष रूप से तैयार किया गया है। अपने पिछले कार्यकाल में जनक सारदा वाइस प्रेजिडेंट (Young Professionals) भी थे। इस वर्ष उन्हें इस जिम्मेदारी के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

इस बारे में जनक सारदा का कहना है, ‘ मैं IAA के वर्ल्ड प्रेजिडेंट जोएल नेट्टी (Joel Netty) और सीनियर मैनेजमेंट टीम का धन्यवाद अदा करता हूं, जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया और यह दोहरी जिम्मेदारी सौंपी है।’

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झूठे व भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर ASCI के चेयरमैन ने कही ये बात

टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रामाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' को इस साल जून से जुलाई के बीच 363 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतें मिलीं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2020
ASCI

टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रामाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) को इस साल जून से जुलाई के बीच 363 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतें मिलीं। ‘ASCI’  द्वारा सूचित किए जाने के बाद 76 एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को हटा लिया। ‘एएससीआई’ की ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने शेष बचे 287  विज्ञापनों का मूल्यांकन किया और 257 शिकायतों को सही ठहराते हुए इन विज्ञापनों को जांच के लिए रोका गया।

इन शिकायतों में से 150 हेल्थकेयर सेक्टर, 40 एजुकेशन, 20 फूड और बेवरेज, चार GAMA कंपलेंट्स, 12 पर्सनल केयर और 31 अन्य कैटेगरी से जुड़ी थीं। इस दौरान कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ लगातार जारी रही। इसकी वजह से कोरोनावायरस के इलाज और रोकथाम के झूठे दावों में वृद्धि हुई। आयुष मंत्रालय से हाथ मिलाकर ‘ASCI’ समाज की भलाई के लिए इस तरह के झूठे दावों को खत्म करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। मई-जून में इस तरह के 97 मामलों को नियामक के पास भेजा गया था।

इस बारे में ‘ASCI’ के चेयरमैन सुभाष कामथ का कहना है, ‘इस दौरान कोविड-19 के इलाज और रोकथाम के बारे में संदिग्ध दावों के साथ विज्ञापनों की बाढ़ सी आ गई। खासकर ऐसे समय में जब कंज्यूमर्स वायरस को लेकर काफी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऐसे में हमारे लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम ये सुनिश्चित करें कि इस तरह के विज्ञापन कंज्यूमर्स के डर व चिंता का फायदा न उठाएं। हम जानते हैं कि इस तरह के दावे कंज्यूमर्स को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकते हैं और हम समाज से ऐसे कुप्रथाओं को खत्म करने में मदद करने के लिए आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

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The Advertising Club में इस पद पर फिर चुने गए पार्थो दासगुप्ता

एडवर्टाइजिंग, मार्केटिंग और मीडिया इंडस्ट्री के प्रमुख संगठन ‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ की 66वीं आमसभा में वर्ष 2020-21 के लिए मैनेजिंग कमेटी की घोषणा की गई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2020
TAC

एडवर्टाइजिंग, मार्केटिंग और मीडिया इंडस्ट्री के प्रमुख संगठन ‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ (The Advertising Club) की 66वीं आमसभा में वर्ष 2020-21 के लिए मैनेजिंग कमेटी की घोषणा की गई। पार्थो दासगुप्ता को फिर से संगठन के प्रेजिडेंट पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विक्रम सखूजा मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाना जारी रखेंगे।

‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ के प्रेजिडेंट पद पर दोबारा चुने जाने के बारे में पार्थो दासगुप्ता का कहना था, ‘देश के प्रतिष्ठित विज्ञापन क्लबों में से एक ‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ के अध्यक्ष के रूप में दोबारा चुना जाना मेरे लिए काफी सौभाग्य की बात है। इंडस्ट्री के दिग्गजों और सीनियर्स ने मेरे ऊपर जो भरोसा जताया है, उसके लिए मैं उनका तहेदिल से आभारी हूं। यह साल हम सबके लिए काफी मुश्किल रहा है और मैं आने वाले समय में क्लब की बेहतरी के लिए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए उत्साहित हूं। जैसा कि इस साल की शुरुआत में कहा गया था, कमेटी ने इस साल कुछ नई चीजें करने का प्रयास किया है। नेतृत्व विकास कार्यक्रम जैसी पहल कुछ ऐसी हैं, जिन्हें हम इस वर्ष भी आगे बढ़ाना चाहेंगे।’

वर्ष 2020-21 के लिए चुने गए ‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ के पदाधिकारियों की लिस्ट आप यहां देख सकते हैं।

Partho Dasgupta: President

Partha Sinha: Vice President

Bhaskar Das: Secretary  

Aditya Swamy: Jt. Secretary  

Shashi Sinha: Treasurer

मैनेजमेंट कमेटी में जिन इंडस्ट्री लीडर्स को शामिल किया गया है, उनके नाम आप यहां देख सकते हैं।

Vikas Khanchandani

Pradeep Dwivedi

Sonia Huria

Mitrajit Bhattacharya

Sidharth Rao

Punitha Arumugam

Raj Nayak

‘द एडवर्टाइजिंग क्लब’ में इनकी भी होगी अहम भूमिका

Ajay Kakar

Rana Barua

Sabbas Joseph

Debabrata Mukherjee

Avinash Pant 

Ajay Chandwani

Kartik Sharma

Asha Kharga

Rathi Gangappa

Sapangeet Rajwant

Namrata Tata

Sanjay Adesara

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बिहार चुनाव से पहले डिजिटल प्लेटफॉर्म कुछ यूं बना 'चुनावी रणभूमि'

बिहार विधानसभा चुनाव के शुरू होने में अब महज एक महीने से भी कम का समय बचा है, लिहाजा राजनीतिक प्रचार अब अपने चरम पर है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2020
biharelection2020

बिहार विधानसभा चुनाव के शुरू होने में अब महज एक महीने से भी कम का समय बचा है, लिहाजा राजनीतिक प्रचार अब अपने चरम पर है। कोविड-19 महामारी के दौरान होने वाला यह पहला चुनाव है। इस वजह से डिजिटल प्लेटफॉर्म नई चुनावी रणभूमि बन गई है। बिहार में फेसबुक पर डिजिटल ऐड खर्च करने के मामले में बीजेपी और उसका अलायंस पार्टनर जद (यू) इस दौड़ में सबसे आगे हैं। वहीं प्रशांत किशोर की अगुवाई वाले इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (Indian Political Action Committee) के 'बात बिहार की' (Baat Bihar Ki) पेज दूसरे स्थान पर है।

बिहार में जब विज्ञापन खर्च की बात आती है, तो राजनीतिक विज्ञापनों को अनुमति देने वाला एकमात्र प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लोगों का रुझान बढ़ जाता है। पिछले तीस दिनों में फेसबुक पर सबसे ज्यादा विज्ञापन खर्च के मामले में बिहार चौथे नंबर पर रहा है।

फेसबुक एड लाइब्रेरी (Facebook Ad Library) के अनुसार, 27 अगस्त से 25 सितंबर, 2020 के बीच बिहार के राजनीतिक दलों और उनके सहयोगी पेजेस (allied pages) ने कुल 39,77,153 रुपए खर्च किए गए, जो इस प्लेटफॉर्म पर कुल विज्ञापन खर्च का 95% बिहार से हुआ है। इस अवधि के दौरान जद(यू) के फेसबुक पेजों पर सबसे ज्यादा 504,529 रुपए  खर्च किए गए हैं। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर, इस पेज ने 362 विज्ञापनों पर 784,015 रुपए खर्च किए हैं।

ट्रैकर के अनुसार इस क्षेत्र में राजनीतिक विज्ञापनों पर खर्च करने के मामले में बीजेपी बिहार दूसरे नंबर पर रहा, जिसने पिछले 30 दिनों में 253,316 रुपए खर्च किए। यह राशि 394 विज्ञापनों पर खर्च की गई थी। राजनीतिक विज्ञापनों में खर्च करने वाले तीसरे स्थान पर ‘नीतीश केयर्स’ (Nitish Cares) के नाम वाला पेज रहा, जिसने 160,767 रुपए का विज्ञापन खर्च किया।

इस क्षेत्र के अन्य शीर्ष समर्थकों में जद (यू) और भाजपा के कई अन्य सहयोगी पेज शामिल हैं। उदाहरण के लिए बीजेपी द्वारा बनाए गए ‘द आत्मनिर्भर बिहार’ (The Atmanirbhar Bihar) पेज पर इसी समयावधि के दौरान 152,812 रुपए खर्च हुए।

जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे इन राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों द्वारा बनाए गए कई पेज फेसबुक विज्ञापनों पर अपना खर्च बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के लिए ‘बिहार जदयू’ (Bihar JDU) नाम के पेज ने फरवरी 2019 से कुल 155,053 रुपये खर्च किए हैं, लेकिन पिछले एक महीने में इस पेज ने 133,200 रुपए खर्च किए हैं। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा, यानी 90,610 रुपए की राशि 20 सितंबर से 26 सितंबर, 2020 के बीच खर्च की गई थी।

इस तरह के और भी कई और उदाहरण हैं, जो राज्य में चुनावों को लेकर अतिसक्रिय हो रहे हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का पेज भी पिछले एक महीने में सबसे अधिक खर्च करने वालों में से एक है। इस पेज ने पिछले एक महीने में 1.15 लाख रुपए से अधिक खर्च किए हैं, जोकि फेसबुक विज्ञापनों पर अपने वार्षिक खर्च का 93% अधिक है। बिहार में कांग्रेस ने उपरोक्त अवधि के दौरान प्लेटफॉर्म पर 103,741 रुपये खर्च किए हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर भी, बिहार से संबंधित पेजेस फेसबुक विज्ञापनों पर सबसे अधिक खर्च करने वालों में से हैं। प्रशांत किशोर की अगुवाई वाले इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (Indian Political Action Committee) के 'बात बिहार की' (Baat Bihar Ki)  पेज ने पिछले 30 दिनों में 287 विज्ञापनों पर 847,460 रुपए खर्च किए, उसके बाद जद(यू) ने 362 विज्ञापनों पर 784,015 रुपए खर्च किए। 27 अगस्त से 25 सितंबर के बीच फेसबुक पर विज्ञापन देने वाले कुल 20 टॉप एडवर्टाइजर्स में बीजेपी बिहार भी शामिल है और इसने 394 विज्ञापनों पर 253,216 रुपये खर्च किए हैं।

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‘IAA’ के इंडिया चैप्टर में डिस्कवरी की मेघा टाटा निभाएंगी अब ये अहम भूमिका

मेघा टाटा को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करने का 28 साल से ज्यादा का अनुभव है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Megha Tata

‘डिस्कवरी’ (साउथ एशिया) की एमडी मेघा टाटा को ‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ (IAA) के इंडिया चैप्टर का नया प्रेजिडेंट नियुक्त किया गया है। पिछली साल उन्हें वाइस प्रेजिडेंट चुना गया था। मेघा टाटा ने वर्ष 2019 में ‘डिस्कवरी’ जॉइन किया था। इससे पहले वह ‘बिजनेस टेलिविजन इंडिया’ (BTVI) के साथ जुड़ी हुई थीं और भारत में इसके बिजनेस का नेतृत्व कर रही थीं।

मेघा टाटा को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करने का 28 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह ‘एचबीओ’ (HBO), ‘टर्नर इंटरनेशनल’ (Turner International) और ‘स्टार इंडिया’ (Star India) जैसी तमाम बड़ी कंपनियों में प्रमुख पदों पर काम कर चुकी हैं।  

बता दें कि पिछले साल 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका को लगातार दूसरी बार ‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ (IAA) के इंडिया चैप्टर का प्रेजिडेंट चुना गया था, वहीं तब मेघा टाटा को वाइस प्रेजिडेंट के पद पर चुना गया था।

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10+2 ऐड कैप मामले में दिल्ली HC ने इस तारीख तक स्थगित की सुनवाई

10+2 ऐड कैप (10+2 ad cap) मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी सुनवाई को अगली तारीख तक के लिए स्थगित कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Channels

दिल्ली हाई कोर्ट ने 10+2 ऐड कैप (10+2 ad cap) मामले की सुनवाई को 19 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। इस मामले में ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA), ‘बी4यू’, ‘9X मीडिया’, ‘टीवी विजन’, ‘सन टीवी नेटवर्क’, ‘ई24’ और ‘कलिग्नार टीवी’ ने ट्राई द्वारा जारी 10+2 ऐड कैप के खिलाफ याचिका दायर की है। यह मामला करीब सात साल से लंबित है। इसकी शुरुआत मार्च 2013 में हुई थी, जब ‘TRAI’ ने ब्रॉडकास्टर्स के लिए ‘केबल टेलिविजन नेटवर्क रेगुलेशन’ (CTNR) कानून 1995 का हवाला देते हुए ‘क्वालिटी ऑफ सर्विस नॉर्म्स’ (CTNR) को बहाल कर दिया था।

शुरुआती स्तर पर अगस्त 2012 में बतौर कंसल्टेशन पेपर पब्लिश किए गए इन नॉर्म्स के अनुसार, प्रत्येक ब्रॉडकास्टर एक घंटे में सिर्फ 12 मिनट विज्ञापन ही चला सकता है। इसमें 10 मिनट का कॉमर्शियल विज्ञापन और दो मिनट का सेल्फ प्रमोशन शामिल हो सकता है। इस ऐड कैप के नियम का पालन न करने वाले टीवी चैनल्स के सीईओ के खिलाफ भी ‘TRAI’ ने कार्यवाही शुरू की थी

ट्राई के इस कदम का काफी विरोध हुआ था। ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने ट्राई के खिलाफ ‘दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय ट्रिब्यूनल’ (TDSAT) में याचिका दायर की थी। कुछ अन्य ब्रॉडकास्टर्स ने व्यक्तिगत रूप से भी इस कदम का विरोध किया था। उस समय TDSAT ने ऐड कैप पर स्टे दे दिया था और नवंबर में इस केस की सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया था।

हालांकि, इसके बाद ‘TDSAT’ ने ‘NBA’ और अन्य ब्रॉडकास्टर्स द्वारा दायर केस को उस समय खारिज कर दिया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि ‘ट्राई’ की सिफारिशों में हस्तक्षेप करने का ‘TDSAT’ को अधिकार नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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अनुप्रिया आचार्य को मिली AAAI की कमान, एग्जिक्यूटिव कमेटी में शामिल हुए ये नाम

‘Publicis Groupe’ की सीईओ (साउथ एशिया) अनुप्रिया आचार्य को ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) का प्रेजिडेंट चुना गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
Anupriya Acharya

‘Publicis Groupe’ की सीईओ (साउथ एशिया) अनुप्रिया आचार्य को ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) का प्रेजिडेंट चुना गया है। उनका चयन वर्ष 2020-21 के लिए किया गया है। एसोसिएशन की वार्षिक आम सभा की बैठक में यह घोषणा की गई। अब तक इस पद पर रहे आशीष भसीन ने अनुप्रिया आचार्य को चार्ज सौंप दिया है। इसके अलावा ‘ग्रुप एम’ (GroupM) के सीईओ (साउथ एशिया) प्रशांत कुमार को सर्वसम्मति से एसोसिएशन का वाइस प्रेजिडेंट चुना गया है।

 एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव कमेटी में  बतौर मेंबर आनंद भडमकर (Dentsu Aegis Network Marketing Solutions Pvt Ltd), कुणाल ललानी (Crayons Advertising Pvt Ltd), मोहित जोशी (Havas Media India Pvt Ltd), प्रणव प्रेमनारायण (Prem Associates Advertising & Marketing), राणा बरुआ (Havas Worldwide India Pvt Ltd), विवेक श्रीवास्तव (Innocean Worldwide Communications Pvt Ltd) को शामिल किया गया है। आशीष भसीन वर्ष 2020-21 के लिए एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव कमेटी के पदेन सदस्य (ex-officio member) होंगे।

अपनी नियुक्ति के बारे में अनुप्रिया आचार्य का कहना है, ‘इस तरह के प्रतिष्ठित संस्थान के प्रेजिडेंट के तौर पर चुना जाना मेरे लिए मेरे लिए काफी सम्मान की बात है, इसके अलावा यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। सारी दुनिया की तरह हमारी इंडस्ट्री भी महामारी से काफी बुरी तरह प्रभावित हुई है और यह हम सभी के लिए काफी मुश्किल समय है।  मैं एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के हितों को आगे बढ़ाने और AAAI को और अधिक ऊंचाई तक ले जाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास करूंगी।’

वहीं, आशीष भसीन ने कहा, ‘मुझे दो साल बतौर प्रेजिडेंट इस प्रतिष्ठित संस्था के साथ काम करने का मौका मिला। मैं एग्जिक्यूटिव कमेटी के सभी मेंबर्स का उनके सहयोग के लिए धन्यवाद अदा करता हूं। इसके अलावा मैं अनुप्रिया आचार्य को इस संस्था का प्रेजिडेंट चुने जाने पर बधाई देता हूं।’

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