डिजिटल बढ़ रहा है फिर भी क्यों ऐडवरेटाइजर्स की पहली पसंद है टीवी, जानें...

आजकल डिजिटल का जमाना है। पिछले कुछ वर्षों की बात करें तो ऐडवर्टाइजर्स भी इसके

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 September, 2018
Last Modified:
Wednesday, 26 September, 2018
adviters

सोनम सैनी ।।

आजकल डिजिटल का जमाना है। पिछले कुछ वर्षों की बात करें तो ऐडवर्टाइजर्स भी इसके प्रभाव से अछूते नहीं हैं और इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं। जितने भी बड़े ब्रैंड हैं, लगभग सभी ऑनलाइन प्लेटफॉंर्म पर मौजूद हैं और अब हालात ये हैं कि डिजिटल के बिना कोई भी मार्केट स्ट्रैटजी पूरी नहीं मानी जाती है।   

‘केपीएमजी’ की रिपोर्ट 'Media Ecosystem: The wall falls down' के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018 (FY18) में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग के रेवेन्यू में 35 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है और यह 116000 करोड़ रुपए हो गई है। जबकि टेलिविजन की ग्रोथ वित्तीय वर्ष 2018 में इसके मुकाबले कम रही है और यह 9.5 प्रतिशत के हिसाब से बढ़कर 65200 रुपए रही है।

इस बात में कोई शक नहीं है कि आज के समय में ब्रैंड्स के लिए डिजिटल बहुत जरूरी हो गया है, हालांकि ऐडवर्टाइजर्स अभी भी टेलिविजन को प्राथमिकता दे रहे हैं और यह उनकी पहली पसंद बना हुआ है।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या ऐडवर्टाइजर्स और टेलिविजन के बीच का संबंध और मजबूत होता जा रहा है? क्या टेलिविजन आगे भी ऐडवर्टाइजर्स की पहली पसंद बना रहेगा? क्या डिजिटल इस स्थिति को बदल पाएगा?, इन सब बातों को लेकर हमने कुछ विशेषज्ञों से बातचीत की कि आखिर आने वाले समय में क्या हालात रहने वाले हैं?

इस बारे में ‘एचयूएल’ (HUL)  के सीईओ और एमडी संजीव मेहता का कहना है कि टेलिविजन आज भी प्रासंगिक है और आने वाले कई दशकों तक देश में इसका प्रभाव यूं ही बना रहेगा।  

मेहता का कहना है, ‘आज टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि हम डिजिटल कम्युनिकेशंस के साथ अपने टार्गेट को प्लान कर सकते हैं। हालांकि कुछ चीजें कभी नहीं बदलने वाली हैं। मार्केट के फंडामेंटल यानी बेसिक बातें हमेशा यही बने रहेंगे। मार्केटिंग में कंज्यूमर हमेशा ही मुख्य रहेगा। नए जमाने का कंटेंट हमें नए तरीके से स्टोरीटैलिंग की कला सिखाएगा।’

वहीं इस बारे में ‘पारले प्रॉडक्ट्स’ (Parle products) के कैटगरी हेड मयंक शाह का कहना है कि चूंकि टेलिविजन की पहुंच बहुत ज्यादा है, इसलिए यह ब्रैड्स के लिए पसंदीदा माध्यम बना हुआ है। उनका मानना है कि ब्रैंड्स के लिए टेलिविजन पर विज्ञापन करना ज्यादा उचित है क्योंकि टीवी की पहुंच ज्यादा है।  

शाह का कहना है, ‘इस बात में कोई शक नहीं कि डिजिटल काफी तेजी से ग्रोथ कर रहा है और यह काफी महत्वपूर्ण माध्यम भी बना हुआ है। लेकिन जब बात इसकी पहुंच की आती है, खासकर एफएमसीजी और दैनिक जरूरतें की चीजों के ब्रैंड के बारे में तो टीवी का प्रदर्शन बेहतर है।’ उनका कहना है कि टेलिविजन कुछ समय के लिए डिजिटल पर अपनी बढ़त बनाए रखेगा। डिजिटल उन ब्रैंड्स के लिए एक प्लेटफॉर्म है जो आडियंस के खास वर्ग को टार्गेट करना चाहते हैं।  

इस बारे में 'मैडिसन वर्ल्‍ड' (Madison World) के सीओओ (Buying) नील कमल शर्मा का कहना है कि पिछले वर्ष के मुकाबले एक प्रतिशत की गिरावट के बावजूद ऐडवर्टाइजिंग के चार्ट में टेलिविजन अभी भी टॉप पर बना हुआ है।

नील कमल शर्मा का कहना है, ‘यह सही है कि देश में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग का रेवेन्यू काफी बढ़ा है और यह ट्रेंड अभी भी जारी है। लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले एक प्रतिशत की गिरावट के बावजूद टेलिविजन का ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू अभी भी सबसे ज्यादा है।’

शर्मा का कहना है, ‘चूंकि कुल ऐडवर्टाइजिंग में 12 प्रतिशत और डिजिटल में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में टीवी और प्रिंट जैसे स्थापित माध्यमों के शेयर में भविष्य में कमी आने की संभावना है। लेकिन टेलिविजन की प्रासंगिकता बनी रहेगी। चूंकि ऐडवर्टाइजिंग कैटेगरी में टीवी सबसे टॉप पर है, इसलिए यह एफएमसीजी प्लेयर्स की पहली पसंद बना हुआ है। इसके अलावा स्मार्ट फोन, ट्रैवल और ओटीटी प्लेटफॉर्म भी अपनी ग्रोथ के लिए टीवी का इस्तेमाल करते हैं।’

डिजिटल मीडिया की ग्रोथ में एफएमसीजी, टेलिकॉम, बीएफएसआई, रियल एस्टेट और ई-कॉमर्स जैसी कैटेगरी का काफी योगदान है। हालांकि इनमें से कुछ का ट्रेडिशनल मीडिया में भी काफी प्रभाव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर न्यूज, ऐंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स के कंटेंट का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। खासकर, युवा वर्ग इन दिनों ट्रेडिशनल मीडिया से दूर होता जा रहा है और यही कारण है कि एफएमसीजी और टेलिकॉम जैसी कैटेगरी भी बड़े पैमाने पर डिजिटल प्लेटफॉर्मस का इस्तेमाल कर रही हैं।

‘बजाज एलायंज लाइफ इंश्योरेंस’ (Bajaj Allianz Life Insurance) के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर चंद्रमोहन मेहरा का मानना है कि कम से कम तीन से पांच साल तक दोनों माध्यम सह-अस्तित्व में बने रहेंगे।  

मेहरा का कहना है, ‘सबसे पहले मीडिया का सलेक्शन ऑब्जेक्ट के अनुसार करना है, टीवी और डिजिटल का चुनाव आपके काम पर निर्भर करता है। ब्रैंड्स के लिए इंटीग्रेटिड अप्रोच ज्यादा प्रभावी रहती है। टीवी पहुंच बढ़ाने और डिजिटल ब्रैंड को गहराई से जोड़ने के काम आता है।’

‘केपीएमजी’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका जैसे मार्केट में व्यूअर्स टीवी से डिजिटल की ओर इसलिए मुड़ रहे हैं क्योंकि वहां पर डिजिटल का इंफ्रॉस्ट्रक्चर काफी मजबूत है और इसकी कम कीमत भी एक बड़ी वजह है। लेकिन, भारत में ग्रोथ और कीमत के मामले में टीवी काफी मजबूत स्थिति में है। इसके अलावा, डिजिटल का उतना इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं है। ऐसे में, लोगों का टीवी की तरफ झुकाव हो जाता है।

‘वॉयकॉम 18’ (Viacom 18) के रीजनल टीवी नेटवर्क के हेड रवीश कुमार के अनुसार, कंज्यूमर्स तक पहुंच के मामले में टीवी सबसे बड़ा और सस्ता माध्यम है।

उनका कहना है, ‘टीवी के दर्शकों को मापना काफी आसान है जबकि डिजिटल में इसके लिए काफी समय लगता है। हालांकि कंटेंट के मामले में दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं लेकिन दोनों को एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि ब्रैंड्स के लिए टीवी पहली पसंद बना हुआ है।’

‘MullenLowe Lintas’ ग्रुप में ‘पाइंटनाइन लिंटास’ (PointNine Lintas) के नेशनल डॉयरेक्टर विधू सागर का मानना है कि अलग-अलग लोगों के लिए हमेशा अलग स्थिति होती है और सभी प्रकार के ऑडियंस के लिए सामान्य दृष्टिकोण लागू नहीं किया जा सकता है।

 सागर का कहना है, ‘आज मीडिया की जो स्थिति है, उसमें आप पुराने दृष्टिकोण को नहीं अपना सकते हैं, क्योंकि समय के साथ चीजें बदलती रहती हैं। आज के समय में लॉन्च हो रहा कोई भी ब्रैंड टीवी और कई मामलों में प्रिंट के बिना कुछ नहीं कर सकता है।’

सागर का कहना है, ‘आप यदि बड़े पैमाने पर काम करना चाहते हैं तो आपको डिजिटल के साथ टीवी की जरूरत भी पड़ेगी। यदि आप अपने ब्रैंड के साथ कई अन्य पहलू सम्मान और विश्वसनीयता शामिल करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉडकॉस्ट मीडिया के साथ जाना पड़ेगा।’

‘केपीएमजी’ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में डिजिटल ऐडवर्टाइजमेंट मुख्य धारा में आ चुका है। वित्तीय वर्ष 2023 में डिजिटल पर विज्ञापन खर्च 40000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। वर्ष 2017 डिजिटल पर विज्ञापन खर्च का योगदान 86.2 बिलियन रुपए था और वर्ष 2023 तक सीएजीआर (CAGR)  ग्रोथ 30.9 तक बढ़ने का अनुमान है।

सागर का कहना है, ‘डिजिटल में तो काफी तेजी से वृद्धि हुई है लेकिन अधिकतर ऐडवर्टाइजर्स ने इस हिसाब से अपना बजट नहीं बढ़ाया है। इसलिए डिजिटल का रेवेन्यू दूसरे मीडिया से कटकर आ रहा है। यह रेडियो, सिनेमा और प्रिंट को प्रभावित कर रहा है।

मैगजींस लगभग समाप्ति की ओर हैं और कई जगह टेलिविजन भी प्रभावित हो रहा है। लेकिन टीवी की अपनी अलग बात है और कोई भी क्लाइंट अचानक से टीवी से हटकर एकदम से डिजिटल की ओर नहीं जाने वाला है।

इस समय भारतीय ओटीटी इंडस्ट्री ‘AVOD’ अथवा ‘freemium’ मॉडल पर काम कर रही है और ‘SVOD’ अभी आरंभिक अवस्था में है। टेल्को आधारित पेड सबस्क्रिप्शन के साथ 2-2.4 मिलियन सबस्क्राइबर्स सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स सबस्क्राइब कर रहे हैं। हालांकि ऐसे टेल्को आधारित सबस्क्रिप्शन में पिछले साल इजाफा हुआ है, लेकिन सीपीएम (CPM) रेट घटने से ऐडवर्टाइजमेंट रेवेन्यू को काफी चुनौती का सामना करना पड़ा है।

केपीएमजी’ के पार्टनर और हेड गिरीश मेनन का कहना है, ‘इस समय डिजिटल का सीपीएम कम है। इस वजह से भी डिजिटल के समक्ष काफी चुनौतियां हैं। प्रिंट में एक पेज के विज्ञापन के मुकाबले डिजिटल में काफी कम कमाई होती है। इसलिए सीपीएम बढ़ने से पहले आपको आरओआई (ROI) और मीजरमेंट की जरूरत होती है।’

‘केपीएमजी’ की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018 में भले ही टीवी की रफ्तार कम रही हो लेकिन उम्मीद है कि यह फिर वापसी करेगा और पिछले वर्षों की तरह फिर आगे बढ़ेगा।

बढ़ती पहुंच, विज्ञापन की बढ़ती मांग के कारण टीवी की सीएजीआर (CAGR) ग्रोथ 12.6 से होने की उम्मीद है। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में दो क्रिकेट वर्ल्ड कप के साथ ही आम चुनाव भी होने हैं, वहीं डिजिटाइजेशन का भी काफी फायदा मिलेगा।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इस वजह से 137 ऐडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को लिया वापस

ASCI द्वारा इस बारे में सूचित किए जाने के बाद 137 ऐडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को वापस ले लिया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 20 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 20 February, 2020
ASCI

टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने पिछले साल नवंबर में 408 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों की जांच की। ASCI द्वारा इस बारे में सूचित किए जाने के बाद 137 ऐडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को वापस ले लिया।

इसके बाद ASCI की ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने 271 विज्ञापनों का मूल्यांकन किया और 248 शिकायतों को सही ठहराते हुए जांच के लिए रोक दिया।

इन 248 शिकायतों में 159 एजुकेशन सेक्टर के, 44 हेल्थकयर सेक्टर के, 8 पर्सनल केयर के, 4 फूड व बेवरेज सेक्टर के और 33 अन्य कैटेगरी के विज्ञापन शामिल थे। जबकि इनमें से अधिकांश विज्ञापन भ्रामक दावे कर रहे थे।

इसके अलावा ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण भी कुछ ऐडवरटाइजर्स के खिलाफ शिकायतों को जांच के लिए रोका है। वहीं, मशहूर हस्तियों द्वारा पेश किए जाने वाले कुछ विज्ञापनों को भी भ्रामक यानी गलत दावे पेश करते हुए पाया गया है।  

‘ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया’ (ASCI) की सेक्रेटरी जनरल श्वेता पुरंदरे ने कहा कि उपभोक्ताओं को हर दिन बड़ी संख्या में विज्ञापन दिखाए जाते हैं। विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले सेलिब्रिटीज द्वारा भी युवाओं और बच्चों को काफी ज्यादा प्रभावित किया जाता है। एक सही विज्ञापन का मतलब ये है कि इसमें किसी भी तरह से लापहरवाही को बढ़ावा न दिया जाए और दावे भी झूठे न पेश किए जाएं। इसके अलावा  सेलिब्रिटीज की भी ये जिम्मेदारी है कि वे जो विज्ञापन कर रहे हैं उनके दावों की प्रमाणिकता की जांच करें, ताकि लोग भ्रमित न हो।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया में विज्ञापन खर्च को लेकर सामने आई ये रिपोर्ट

इस रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन खर्च में 36 प्रतिशत शेयर के साथ टीवी सबसे बड़ा माध्यम बना रहेगा, लेकिन इसका ग्रोथ रेट 6.8 प्रतिशत बना रहेगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 13 February, 2020
Advertising

मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को लेकर पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) जारी कर दी गई है। इस रिपोर्ट में विज्ञापन खर्च (Adex) के मामले में पहली छमाही यथावत रहने की भविष्यवाणी की गई है, जबकि दूसरी छमाही खासकर चौथी तिमाही काफी बेहतर रहने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट में वर्ष 2020 के लिए विकास दर 10.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। 7048 करोड़ रुपए के इजाफे के साथ विज्ञापन खर्च 74650 करोड़ रुपए तक बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें डिजिटल का योगदान 4387 करोड़ रुपए अथवा 62 प्रतिशत रहेगा।  

आर्थिक मंदी, ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर को लेकर छायी निराशा और त्योहारों के दौरान कंज्यूमर की उदासीनता की वजह से इंडस्ट्री के लिए पिछला साल काफी चुनौतीपूर्ण था। इस वजह से वर्ष 2019 के लिए अनुमानित विकास दर 13.04 प्रतिशत से गिर गई थी और ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री की ग्रोथ में सिर्फ 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। हालांकि, दूसरी ओर इस अवधि में विज्ञापन खर्च में 6695 करोड़ रुपए का इजाफा दर्ज किया गया था। यह पिछले एक दशक के दौरान सिर्फ एक साल में विज्ञापन खर्च में दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी।  

जैसा कि पिछले कई साल से हो रहा है, वर्ष 2020 में भी डिजिटल मीडियम में सबसे ज्यादा 28.4 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है और वर्ष के अंत में विज्ञापन खर्च में 27 प्रतिशत शेयर के साथ यह लगभग 20,000 करोड़ रुपए हो चुका है।   

इस रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन खर्च में 36 प्रतिशत शेयर के साथ टीवी सबसे बड़ा माध्यम बना रहेगा, लेकिन इसका ग्रोथ रेट 6.8 प्रतिशत रहेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विज्ञापन खर्च में प्रिंट के शेयर में तीन प्रतिशत की कमी देखने को मिलेगी और यह 27 प्रतिशत रह जाएगा। हालांकि इसमें अभी दो प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की जा रही है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

IPL के दौरान देखने को मिलेंगे इन कंपनियों के विज्ञापन

‘इंडियन प्रीमियर लीग’ (आईपीएल) 2020 के 13वें सीजन का आगाज 29 मार्च को होगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 06 February, 2020
Advertising

‘इंडियन प्रीमियर लीग’ (आईपीएल) 2020 के 13वें सीजन का आगाज 29 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में होगा। खबर है कि इस बार आईपीएल मैचों के दौरान नौ एडवर्टाइजर्स के विज्ञापन देखने को मिलेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रायोजकों में शुमार ‘वीवो’ (Vivo), ‘ड्रीम11’ (Dream11) और ‘कोका कोला इंडिया’ (Coca-Cola India) ने मिलाकर 800 से 900 करोड़ रुपए का विज्ञापन स्पेस लिया है। आईपीएल 2020 के मीडिया अधिकार ‘स्टार इंडिया’ (Star India) के पास हैं। बता दें कि ‘आईपीएल’ का पिछला सीजन रोहित शर्मा की कप्तानी में ‘मुंबई इंडियंस’ (Mumbai Indians) की टीम ने जीता था।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इनके सिर सजा e4m Prime Time Awards का ताज, यहां देखें पूरी लिस्ट

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सजचेंज4मीडिया’ समूह के प्राइम टाइम अवॉर्ड्स के छठे एडिशन का आयोजन 31 जनवरी को मुंबई में किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 February, 2020
Last Modified:
Saturday, 01 February, 2020
Prime Time Awards

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह के प्राइम टाइम अवॉर्ड्स (Prime Time Awards) के छठे एडिशन का आयोजन 31 जनवरी को मुंबई में किया गया। मुंबई के ताज सांताक्रूज होटल में आयोजित एक समारोह में विभिन्न कैटेगरी में ये अवॉर्ड्स दिए गए।

एक्सीलेंस अवॉर्ड कैटेगरी में ‘ओगिल्वी एंड माथर’ (Ogilvy & Mather) को एडवर्टाइजिंग एजेंसी ऑफ द ईयर के तहत गोल्ड से नवाजा गया। ‘ओगिल्वी’ की झोली में चार मेडल आए। वहीं, ‘मैडिसन मीडिया’ (Madison Media) और ‘एमजी मोटर’ (MG Motor) ने क्रमश: ‘मीडिया एजेंसी ऑफ द ईयर’ और ‘एडवर्टाइजर ऑफ द ईयर’ के लिए गोल्ड मेडल जीता।

‘वायकॉम18’ (Viacom18) और ‘एशियन पेंट्स’ (Asian Paints) के लिए अपने कामों की वजह से ‘मैडिसन मीडिया’ ने तीन गोल्ड जीते। वहीं, ‘एमजी मोटर’ ने ‘Best Launch/Re-Launch Strategy for a Product/Service’ और ‘Best Integrated TV campaign’ कैटेगरी में दो गोल्ड पर अपना कब्जा जमाया।

कार्यक्रम में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) को ‘Entertainment & Media’ और ‘Best Launch/Re-Launch of a Programme/Channel’ कैटेगरी में दो गोल्ड मिले। उसे यह अवॉर्ड ‘Vivo IPL 2019-Game Banayega Name’ के तहत किए गए काम के लिए दिए गए। इसके अलावा गोल्ड जीतने वालों में ‘ओयो होटल्स एंड होम्स’ (Oyo Hotels & Homes), ‘सोलर सिनेप्लेक्स, नौचंदी मेला-ऑन ग्राउंड’ (Solar Cineplax, Nauchandi Mela-On-ground) और ‘मैन वर्सेज वाइल्ड विद बेयर ग्रिल्स एंड पीएम मोदी’  (Man vs Wild with Bear Grylls and PM Modi) शामिल रहे।  

बता दें कि क्रिएटिव, एडवर्टाइजिंग, ब्रैंड्स और मीडिया एजेंसियों के क्षेत्र में उल्‍लेखनीय कार्य करने वालों को सम्‍मानित करने के लिए एक्‍सचेंज4मीडिया की ओर से ये अवॉर्ड्स दिए जाते हैं। इनके द्वारा एक अक्टूबर 2018 से सितंबर 2019 के बीच में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की समीक्षा के लिए एक जूरी का गठन किया गया था। जूरी के फैसले के आधार पर इन विजेताओं का चुनाव किया गया।

इन अवॉर्ड्स के विजेताओं का चयन करने के लिए ‘ग्रुप एम, साउथ एशिया’ (GroupM, South Asia) के सीईओ प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में जूरी मीट का आयोजन भी किया गया था। जूरी के अन्य सम्मानित सदस्यों में ‘Automotive Lubricants, Gulf’ के मार्केटिंग हेड अमित घेजी,’ Rentokil PCI’ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर अनिंदिता चटर्जी, ’ Danone’ की मार्केटिंग डायरेक्टर दीपाली अग्रवाल, ‘Initiative’ के वाइस प्रेजिडेंट धीरेंद्र सिंह, ‘UTI Mutual Funds’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट गौरव सूरी, ‘Honeywell’ की पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर गुरमीत कौर,’ Max’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट जितेन महेंद्रा, ‘TATA AIA Life Assurance’ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मृदुला शेखर, ‘Yash Raj Films’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) मनन मेहता, ’ Kaya Clinic’ की मार्केटिंग हेड पूजा सहगल,‘Samsonite’ की असिस्टेंट डायरेक्टर (मीडिया एंड कम्युनिकेशन) प्रदन्य पोपडे, ‘Muthoot’ के ग्रुप चीफ मार्केटिंग ऑफिसर संजीव शुक्ला,’ Edelweiss’ की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर शबनम पंजवानी,‘ Metro Brands’ की मार्केटिंग हेड श्वेतल बसु, ‘Platinum’ की डायरेक्टर (कंज्यूमर मार्केटिंग) सुजला मार्टिस, ‘IDFC First Bank’ के चीफ मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशन ऑफिसर श्रीपाद शिंदे और ‘Sonata & SF, Titan’ के मार्केटिंग हेड उत्कर्ष ठाकुर शामिल थे।

विजेताओं की पूरी लिस्ट आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया के लिए कुछ यूं फायदे का सौदा साबित हो सकता है दिल्ली चुनाव

वोटर्स को लुभाने के लिए राजनीतिक दल आउटडोर एडवर्टाइजिंग में नए रास्ते तलाश रहे हैं, वहीं नए मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा भी लिया जा रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 11 January, 2020
Last Modified:
Saturday, 11 January, 2020
Advertising

मार्केट में मंदी से उबरने के लिए विज्ञापनों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन चुनाव में मीडिया पर विज्ञापन खर्च के मामले में राजनीतिक दल ज्यादा आगे नहीं बढ़ रहे हैं। आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतक दलों द्वारा विज्ञापनों पर 150 से 200 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान हुए खर्च से अब के खर्च का आकलन किया जा सकता है।

‘एसोचैम’ (ASSOCHAM) की रिपोर्ट के अनुसार,पांच साल पहले राजनीतिक दलों द्वारा सभी तरह के अभियानों पर लगभग 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। पिछली बार के विधानसभा चुनाव के बाद प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यक्तिगत तौर पर उम्मीदवारों के बजाय विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा ज्यादा और एकमुश्त बड़ा खर्चा किया गया। इसमें भी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन पर ज्यादा खर्च किया गया। इस साल 2020 में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है।      

‘मैडिसन मीडिया प्लस’ (Madison Media Plus) के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर राजुल कुलश्रेष्ठ का कहना है, ‘राजनीतिक दल आर्थिक रूप से ज्यादा प्रभावित नहीं होते हैं। इन चुनावों में भी इन दलों को अपनी बात लोगों तक पहुंचानी होगी। उन्हें इस तरह की स्ट्रैटेजी अपनानी होगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुंचाई जा सके। दिल्ली की करीब दो करोड़ जनता तक प्रभावी रूप से अपनी पहुंच बनाने के लिए इन राजनीतिक दलों को मीडिया में भी खर्चा करना होगा।।’

इसके साथ ही कुलश्रेष्ठ का यह भी कहना है, ‘राजनीतिक दलों के अभियानों में जुटे लोगों की संख्या पर मंदी का प्रभाव पडेगा, इसके बावूजद विज्ञापन पर खर्च नहीं रुकेगा। दूसरी तरफ, यही समय है, जब लोग पैसे कमाएंगे।’

आउटडोर एडवर्टाइजिंग ब्रैंड ‘Jcdecaux’ के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन प्रमोद भंडूला के अनुसार, ‘इस दौरान बहुत सारी नई चीजें होंगी। उदाहरण के लिए- आम आदमी पार्टी ने तो अपने वोटर्स से बातचीत भी शुरू कर दी है। अपने पॉलिटिकल कैंपेन के लिए उन्होंने सभी प्रकार के माध्यमों को आधार बनाया है। चाहे प्रिंट हो, टीवी हो, रेडियो हो अथवा आउट ऑफ होम (OOH), वे सभी मोर्चों पर काफी आक्रामक रहे हैं। जब एडवर्टाइजिंग की बात होती है तो राजनीतिक दल कोई भी कसर नहीं छोड़ते हैं।’

विशेषज्ञों का कहना है कि आउटडोर, रेडियो, टीवी और प्रिंट में दिए जाने वाले विज्ञापन खर्च में वर्ष 2015 के मुकाबले 10 से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है। इस बार के विज्ञापन खर्च के मामले में सोशल मीडिया गेम चेंजर साबित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्येक राजनीतिक दल द्वारा सोशल मीडिया पर कुल विज्ञापन खर्च का 25 से 30 प्रतिशत खर्च किया जाएगा। एक मीडिया बायर के अनुसार, सोशल मीडिया पर विज्ञापन खर्च के मामले में राजनीतिक दल काफी उदार हैं और उन्होंने इस माध्यम के लिए अपने बजट में कम से कम 30 प्रतिशत की वृद्धि की है।

‘Posterscope India’ के डायरेक्टर फेबियन कोवान (Fabian Cowan) के अनुसार, विज्ञापन के लिहाज से पांच साल बहुत लंबा समय है और इस समय में तमाम चीजें काफी बदल चुकी हैं। आज के समय में ऑडियंस तक पहुंच बढ़ाने के लिए तमाम नए मीडिया प्लेटफॉर्म्स आ चुके हैं। ऐसे में इन सब के साथ मिलकर चलने की जरूरत होगी। इससे निश्चित रूप से विज्ञापन खर्च बढ़ेगा।

वहीं, ‘Vizeum’ के सीईओ हिमांक दास (Himanka Das) का कहना है कि जब राजनीतिक दलों द्वारा विज्ञापन खर्च में बढ़ोतरी की बात आती है तो यह सोशल मीडिया से भी प्रेरित होती है, जो कि कम्युनिकेशन का प्रमुख टूल बन चुकी है। खास बात यह है कि इसमें फीडबैक तुरंत मिल जाता है, जो राजनीतिक दलों के लिए सुविधाजनक होता है। हालांकि, कैंपेन के लिए अभी भी पारंपरिक मीडिया यानी ट्रेडिशनल मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें इन्वेंट्री नहीं बढ़ती है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में आउट ऑफ होम अभी भी स्थिर बना हुआ है, फिर चाहे वह 2015 हो अथवा 2020। दूसरी तरफ सोशल मीडिया काफी आगे बढ़ रहा है और यह स्थिति न सिर्फ लोगों से ज्यादा बातचीत को लेकर है, बल्कि कंटेंट को लेकर भी है, जो लोगों का ध्यान खींच रहा है और राजनीतिक दलों के संदेश को उन तक पहुंचा रहा है।  

इसके अलावा, यदि रेडियो की बात करें तो 2015 के चुनाव में जहां इसने काफी अहम भूमिका निभाई थी, आज भी उसने अपनी उतनी ही मौजूदगी दर्ज करा रखी है। इस बार यह आंकड़ा कम से कम 10 प्रतिशत ज्यादा है और दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी लीडर अरविंद केजरीवाल के रेडियो जिंगल्स को इस बार भी मिस करना मुश्किल है।

पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी के बारे में इंडिपेंडेंट पॉलिटिकल कम्युनिकेशंस कंसल्टेंट अनूप शर्मा का कहना है कि इस बार आरोप-प्रत्यारोप लगाने में भी विज्ञापन खर्च ज्यादा होगा। वर्ष 2015 की बात अलग थी, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी को अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन करने की चुनौती होगी, वहीं बीजेपी विकास न होने का मुद्दा उठाकर जवाबी हमला करने का प्रयास करेगी।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया में विज्ञापनों पर खर्च का सरकार ने कुछ यूं दिया हिसाब

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मोदी सरकार द्वारा 2014 से लेकर 2019 तक विज्ञापनों पर किए गए खर्च को लेकर किए थे सवाल

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 31 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 31 December, 2019
Advertising

मोदी सरकार ने 2014 से लेकर 2019 तक विज्ञापनों पर कितना खर्चा किया, यह सवाल कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सूचना प्रसारण मंत्रालय से किया था, जिसका उन्हें कोई सीधा जवाब नहीं मिला। हालांकि, ये बात जरूर सामने आई है कि भारत सरकार विदेशों में विज्ञापन पर कोई खर्चा नहीं करती है। मनीष तिवारी ने सरकार से जानना चाहा था कि 26 मई 2014 से लेकर 30 सितंबर 2019 तक सरकार ने प्रिंट, ब्रॉडकास्ट और सोशल मीडिया के साथ ही विदेशी मीडिया में विज्ञापनों पर सालाना कितना खर्च किया। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा था कि देश की टॉप 20 मीडिया कंपनियों के राजस्व में सरकारी विज्ञापनों की हिस्सेदारी कितनी है?

इस संबंध में सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपने जवाब में कहा कि ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन (बीओसी) द्वारा नोटिस, निविदाएं, नीलामी, भर्ती आदि के साथ ही जागरूकता अभियान और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देने वाले विज्ञापन जारी किये जाते हैं। जहां तक कुल खर्चे की बात है तो यह बीओसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है।’

जावड़ेकर के जवाब में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों का प्रति वर्ग सेमी रेट 42.31 रुपए से बढ़कर 62.13 रुपए हो गया है, लेकिन बीओसी द्वारा प्रिंट मीडिया को हर साल दिए जाने वाले विज्ञापनों की संख्या जरूर घटी है। मोदी सरकार के वित्त वर्ष 2014-15 और 2018-19 के बीच यह 10.95 करोड़ वर्ग सेमी रहा, जबकि मनमोहन सरकार में वित्त वर्ष 2009-10 और 2013-14 के बीच 11.88 करोड़ वर्ग सेमी था।

भारतीय मीडिया कंपनियों के राजस्व प्रवाह में हिस्सेदारी के मनीष तिवारी के सवाल के जवाब में जावडेकर ने कहा कि भारत सरकार इस संबंध में कोई विवरण नहीं रखती। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा विदेशी समाचार पत्रों और टीवी चैनलों के लिए विज्ञापन जारी नहीं किये जाते हैं।

मनीष तिवारी ने अपने ट्विटर हैंडल पर इन सवालों के साथ ही मंत्रालय की ओर से मिले जवाबों को भी शेयर किया है। इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

'ब्लूमबर्ग' ने एक महीने में मीडिया को दे दिए इतने विज्ञापन, हो गई बल्ले-बल्ले

अमेरिका में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी के लिए न्यूयॉर्क सिटी के पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने अपनी दावेदारी पेश की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 26 December, 2019
Advertisement

अमेरिका में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी के लिए न्यूयॉर्क सिटी के पूर्व मेयर और मीडिया कंपनी ‘ब्लूमबर्ग एलपी’ (Bloomberg LP) के सह संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग (Michael Bloomberg) ने पिछले महीने औपचारिक रूप से अपनी दावेदारी पेश कर दी है। माना जा रहा है कि माइकल ब्लूमबर्ग राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) के आधिकारिक प्रत्याशी बनने की होड़ में शामिल होने वाले आखिरी नेता हैं। प्रत्याशी चुनने का काम अगले साल तीन फरवरी से होगा।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 77 वर्षीय ब्लूमबर्ग ने उम्मीदवार की दौड़ में शामिल होने के लिए पिछले महीने के आखिर में जब से अपनी दावेदारी पेश की है, तब से अब तक लगभग एक महीने में ही उन्होंने डिजिटल और टेलिविजन एडवर्टाइजिंग पर 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च कर दिए हैं।

अमेरिका की पॉलिटिकल वेबसाइट ‘पॉलिटिको’ (Politico) के अनुसार, हालांकि ब्लूमबर्ग लगभग सभी अमेरिकी राज्यों में खर्च कर रहे हैं, लेकिन उनका मुख्य फोकस कैलिफोर्निया, टेक्सास और फ्लोरिडा पर है।

‘पॉलिटिको’ के अनुसार, डेमोक्रिटक पार्टी के जितने भी उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी की दौड़ में अपनी दावेदारी पेश की है, उनके इस साल कुल विज्ञापन खर्च की तुलना में ब्लूमबर्ग ने पिछले कुछ समय के दौरान ही विज्ञापनों पर दोगुना से ज्यादा खर्चा किया है।

इस बारे में रिपब्लिकन राजनीतिक रणनीतिकार जिम मैकलॉघलिन (Jim McLaughlin) का कहना है, ‘राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी की दौड़ में हमने कभी भी इतना खर्च होते हुए नहीं देखा है। ब्लूमबर्ग के पास बजट की कोई सीमा ही नहीं है।’ वहीं, एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है, ‘जब आप टीवी पर एक ही विज्ञापन 10 बार देखते हैं, तो उसका ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला नहीं है।’

वहीं, पिछले हफ्ते ‘Quinnipiac University’ की ओर से जारी नेशनल पोल के अनुसार, इस दौड़ में शामिल पूर्व उपराष्ट्रपति जो बिडेन (Joe Biden) के पास करीब 30 प्रतिशत वोटों के साथ डेमोक्रेटिक वोटर्स और इंडिपेंडेंट वोर्टस के बीच मजबूत पकड़ है। वह इस दौड़ में सबसे आगे हैं। इस पोल के अनुसार, बिडेन के बाद 17 प्रतिशत वोटों के साथ सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन (Elizabeth Warren) का नंबर है, जबकि सात प्रतिशत वोटों के साथ ब्लूमबर्ग पांचवे नंबर पर हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

स्कूलों के आसपास विज्ञापनों को लेकर FSSAI ने उठाया ये कदम

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने तैयार किया है मसौदा, अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा स्वास्थ्य मंत्रालय के पास

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 24 December, 2019
FSSAI

स्कूल कैंटीन और स्कूल परिसर के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड के विज्ञापन और बिक्री पर रोक लगाने के लिए ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण’ (FSSAI)  अगले दो महीने में नियमनों को अंतिम रूप दे सकता है।

FSSAI के सीईओ पवन कुमार अग्रवाल ने यह जानकारी दी। बता दें कि नवंबर में 'खाद्य सुरक्षा और मानक (स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और स्वस्थ आहार) नियमन 2019' का मसौदा जारी किया गया था। इस मसौदे पर संबंद्ध पक्षों को 30 दिन के अंदर टिप्पणियां देने के लिए कहा गया था। इस प्रकार के मसौदा नियमों में FSSAI ने कहा था, 'जिन खाद्य पदार्थों में वसा, नमक और चीनी  अधिक मात्रा में होती है, उन्हें स्कूल कैंटीन, स्कूल परिसर, हॉस्टल की रसोई या स्कूल के 50 मीटर के दायरे में बच्चों को नहीं बेचा जा सकता है।'

इस मसौदे में FSSAI ने यह भी प्रस्तावित किया है कि स्कूली बच्चों के बीच सुरक्षित भोजन और स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के लिए स्कूली अधिकारियों को आगे आकर व्यापक कार्यक्रम अपनाना होगा। मसौदे के अनुसार, 'बाजार छोड़कर स्कूलों में स्वास्थप्रद भोजन का समर्थन करने के लिए खाद्य व्यापार परिचालकों (FBO) को लोगो, ब्रैंड नेम, पोस्टर, पाठ्यपुस्तक कवर आदि के माध्यम से स्कूल परिसर में कहीं भी कम पोषण वाले खाद्य पदार्थों को नहीं बेचना है। वहीं, स्कूल परिसर का नियमित रूप से निरीक्षण किया जाना चाहिये, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्रों को स्कूलों में सुरक्षित, स्वस्थ और स्वास्थ्यकर भोजन दिया जाता है।

इस बारे में अग्रवाल का कहना है, 'विभिन्न अंशधारकों से मिले सुझावों को हम एकत्रित कर रहे हैं। एक तकनीकी समिति इन सुझावों पर गौर करेगी। इसके बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।' उन्होंने कहा कि नियमों को अंतिम रूप देने में 1-2 महीने लग सकते हैं। इसके बाद इन्हें अंतिम मंजूरी के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के पास भेजा जाएगा।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया में इस तरह के विज्ञापनों पर HC ने लगाई रोक

कई जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने लिया निर्णय, मामले में अगली सुनवाई नौ जनवरी को होगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 24 December, 2019
High Court

‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस’ (एनआरसी) तथा ‘नागरिकता संशोधन कानून’ (सीएए) को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच, इन दोनों मामलों को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कराका झटका दिया है।

दरअसल, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से प्रदेश भर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिए गए सभी विज्ञापनों को हटाने को कहा है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने अगले आदेश तक सरकार पर ऐसा कोई भी विज्ञापन देने पर रोक लगा दी है। सीएए पर जारी कई जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीबी राधाकृष्णनन नैयर और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।

इस मामले में अब अगली सुनवाई नौ जनवरी को होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य के तमाम इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को तत्काल बहाल करने का भी आदेश दिया है। बता दें कि ममता बनर्जी ने टीवी चैनल्स और वेबसाइट्स समेत कई माध्यमों पर नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में विज्ञापन दिया था। इन विज्ञापनों में ममता बनर्जी ने लोगों को भरोसा दिया था कि राज्य में इन दोनों को लागू नहीं किया जाएगा। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें वेबसाइट्स और अन्य जगहों से इस तरह के सभी विज्ञापनों को हटाने की मांग की गई थी।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बंगाल के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था और बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की गई थी। इस पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता सरकार से राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर जिलेवार एक रिपोर्ट तलब की थी। कोर्ट ने बंगाल के अटॉर्नी जनरल से सीएए के खिलाफ दिए गए सरकारी विज्ञापनों पर भी सवाल जवाब किया था।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

नहीं रुका कमलनाथ की फजीहत का सिलसिला, ‘भूल सुधार’ में भी भूल कर गए कांग्रेसी

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के जन्मदिन के मौके पर कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदेश के अधिकांश अखबारों में दिए गए थे विज्ञापन

नीरज नैयर by
Published - Friday, 22 November, 2019
Last Modified:
Friday, 22 November, 2019
Kamalnath

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपना 73वां जन्मदिन हमेशा याद रहेगा। पहले उन्हें मध्यप्रदेश कांग्रेस द्वारा जारी विज्ञापन के लिए फजीहत झेलनी पड़ी, फिर उस विज्ञापन की गलतियों के लिए छपे ‘भूल सुधार’ में उनका नाम ही भुला दिया गया। अब इस ‘भूल’ को वाकई भूल माना जाए या साजिश, इसका फैसला तो कमलनाथ को ही करना है।

दरअसल, 18 नवंबर को कमलनाथ का जन्मदिन था। इस मौके पर कांग्रेस कमेटी की तरफ से प्रदेश के अधिकांश अखबारों में विज्ञापन छापे गए। इन विज्ञापनों का मकसद मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कान खिलाना और जनता को उनके संघर्ष से रूबरू कराना था, लेकिन हुआ इसके एकदम उलट।

कुछ विज्ञापनों में कमलनाथ की तारीफ के साथ-साथ इतिहास का हवाला देकर उन पर तंज भी कसे गए। बात जब आम हुई तो बवाल मच गया। पहले कांग्रेस नेता संबंधित विज्ञापन से पल्ला झाड़ते रहे और दूसरे दिन अखबारों में प्रकाशित ‘भूल सुधार’ के जरिये अपनी भूल सुधारने का प्रयास किया गया, लेकिन फजीहत का सिलसिला यहीं नहीं रुका।

‘भूल सुधार’ में फिर एक ऐसी भूल कर दी गई, जिसे देखकर कमलनाथ का आगबबूला होना लाजमी है। संबंधित अखबारों में ‘भूल सुधार’ की सूचना के तहत विवादस्पद विज्ञापनों को दुरुस्त करके पुन: दूसरे दिन प्रकाशित किया गया। पहली नजर में सबकुछ ठीक नजर आया है, पर जब नजरों पर जोर दिया गया, तो ‘भूल’ में एक और भूल नजर के सामने आ गई।

संशोधित विज्ञापन के पहले पैरा में मुख्यमंत्री का नाम ही बदल दिया गया। उन्हें कमलनाथ से कमलाथ बनाया गया है। ‘सांसद से मुख्यमंत्री तक का सफर’ शीर्षक तले कमलनाथ की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है, जिसकी आखिरी लाइन कहती है, ‘कमलाथ के नेतृत्व में कांग्रेस कमेटी ने मध्यप्रदेश में शानदार विजय हासिल की।’ इसे टाइपिंग त्रुटि कहा जा सकता है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पहली गलती से सबक लिया गया? यदि लिया गया होता तो एक-एक शब्द को ध्यान से पढ़ा जाता और तब शायद कमलनाथ को पुन: अपना सिर नहीं पकड़ना पड़ता।

आमतौर पर कोई विज्ञापन जारी करने से पहले उसकी कई बार प्रूफरीडिंग की जाती है तो फिर मुख्यमंत्री से जुड़े विज्ञापन को पुन: जांचना कांग्रेसियों को क्यों याद नहीं रहा, यह समझ से परे है। बहरहाल यह आपसी साजिश है या भूल, ये कांग्रेस का आंतरिक मामला है, पर इतना तय है कि कमलनाथ ने ऐसा जन्मदिन पहले कभी नहीं मनाया होगा और न ही भविष्य में मनाना चाहेंगे।

विज्ञापन में हुई इस गलती को आप यहां देख सकते हैं- 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए