कुछ इस तरह न्‍यूजपेपर इंडस्‍ट्री पर पड़ी दोहरी मार

केंद्र सरकार ने प्रिंट मीडिया में टेंडर नोटिस के अनिवार्य प्रकाशन...

Last Modified:
Wednesday, 21 March, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

केंद्र सरकार ने प्रिंट मीडिया में टेंडर नोटिस के अनिवार्य प्रकाशन की व्‍यवस्‍था से हाथ पीछे खींच लिए हैं। ऐसे में पहले से ही न्‍यूज प्रिंट की बढ़ी कीमतों की मार झेल रही भारतीय न्‍यूजपेपर इंडस्‍ट्री पर दोहरी मार पड़ी है।  

अंग्रेजी वेबसाइट 'द प्रिंटमें छपी एक खबर के मुताबिक, वित्‍त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, अब से सिर्फ टेंडरों के ऑनलाइन एडवर्टाइजमेंट को ही अनुमति दी जाएगी।

जनरल फाइनेंस रूल्‍स (GFR) 2017 का हवाला देते हुए आठ मार्च को जारी इस सूचना में कहा गया है कि निश्चित राशि से ऊपर के सरकारी विज्ञापन को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल के साथ ही मंत्रालयों, विभागों और अन्‍य संगठनों की वेबसाइट पर पोस्‍ट किए जाने चाहिए। इसके पहले (GFR) 2005 के तहत सभी सरकारी टेंडर अनिवार्य रूप से अखबारों और मैगजींस में प्रकाशित किए जाने थे। नए आदेश के अनुसार अब सिर्फ GFR 2017 ही मान्‍य होगा।

सरकार के इस कदम से न्‍यूजपेपर इंडस्‍ट्री को काफी घाटा होगा क्‍योंकि उन्‍हें टेंडरों के विज्ञापन से होने वाली आय रुक जाएगी। हालांकि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं हो सका है कि कितने का नुकसान होगा।  

मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों से वर्षवार अखबारों और मैगजींस को दिए गए टेंडर एडवर्टाइजमेंट पर हुए खर्च का ब्‍योरा भी मांगा गया है। इसके अलावा यह भी जानकारी मांगी गई है कि टेंडरों के कितने विज्ञापन जारी किए गए और कितने विज्ञापन प्रकाशित नहीं हुए।  

इंडस्‍ट्री से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकार का यह आदेश न्‍यूजपेपर्स के लिए काफी बड़ा झटका होगा क्‍योंकि वे पहले से न्‍यूजप्रिंट की बढ़ी हुई कीमतों से जूझ रहे हैं। इसके अलावा उन्‍हें यह भी आशंका सता रही है कि केंद्र सरकार अब राज्‍य सरकारों को भी यही नियम अपनाने के लिए कह सकती है। हालांकि राज्‍य सरकारों के यहां अलग नियम हैं। एक अखबार मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस निर्णय से अखबारों को रेवेन्‍यू का काफी नुकसान होगा। वहीं एक अन्‍य अखबार मालिक का कहना था कि दो साल में न्‍यूजप्रिंट के रेट काफी बढ़ गए हैं, ऐसे में काफी परेशान हो रही है।

 

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इस मामले में कांग्रेस बनी नंबर 1, बीजेपी नंबर 5 की पॉजिशन पर

देश की प्रतिष्ठित प्राइमरी और डाटा एनालिटिक्स कंपनी ‘क्रोम डाटा एनालिटिक्स एंड मीडिया ऑप्टिमल प्लस’ ने इस हफ्ते टॉप पर रहे विज्ञापनों की लिस्ट जारी की है

Last Modified:
Thursday, 25 April, 2019
BJP

देश की प्रतिष्ठित प्राइमरी और डाटा एनालिटिक्स कंपनी ‘क्रोम डाटा एनालिटिक्स एंड मीडिया ऑप्टिमल प्लस’ (Chrome Data Analytics And Media Optimal+ ) ने इस हफ्ते टॉप पर रहे विज्ञापनों की लिस्ट जारी की है। 15वें हफ्ते के लिए जारी इस रिपोर्ट में देश भर के 3400 घरों को शामिल किया गया था। इस सर्वे में मुख्यतः तीन कैटेगरी- ‘सबसे ज्यादा देखे गए विज्ञापन’ (Most watched ads), ‘सबसे ज्यादा प्रसारित किए गए विज्ञापन’ (Most aired ads) और ‘सबसे ज्यादा पसंद किए गए विज्ञापन’ (Most liked ads) के तहत विभिन्न ब्रैंड्स के परिणाम जारी किए गए हैं। इस सर्वे में यह भी बताया गया है कि 14वें हफ्ते के मुकाबले ब्रैंड्स का प्रदर्शन कैसा रहा है।

सबसे ज्यादा प्रसारित हुए विज्ञापनः
सबसे ज्यादा प्रसारित हुए विज्ञापनों की बात करें तो लोकसभा चुनावों को देखते हुए इस हफ्ते ‘कांग्रेस’ ने इस लिस्ट में टॉप पर अपनी जगह बनाई है। ‘संतूर सैंदल एंड टरमरिक’ पिछले हफ्ते की तरह इस हफ्ते भी दो नंबर पर काबिज रहा है। वहीं, ‘डिटॉल’ ने इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर अपनी जगह बनाई है। पिछले हफ्ते इस लिस्ट में टॉप पर रही ‘तेलुगुदेशम पार्टी’ इस हफ्ते नीचे खिसककर चौथे स्थान पर आ गई है, जबकि पांचवें नंबर पर ‘बीजेपी’ इस लिस्ट में शामिल है। पिछले हफ्ते इस लिस्ट में शामिल रहे ‘लाइजॉल’, ‘हार्पिक’ और ‘विमल इलायची’ इस हफ्ते इस लिस्ट में शामिल होने में नाकामयाब रहे।

सबसे ज्यादा देखे गए विज्ञापनः
सबसे ज्यादा देखे गए विज्ञापन शो की कैटेगरी में पिछले हफ्ते तीसरे नंबर पर रहा ‘अमेजॉन’ इस हफ्ते पहले नंबर पर पहुंच गया। पिछले हफ्ते की तरह दो नंबर पर इस बार भी ‘फ्रूटी’ ने अपनी जगह कायम रखी। इसके बाद तीसरे नंबर पर इस हफ्ते ‘सेंसोडाइन’ इस लिस्ट में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा। ‘लाइफबॉय’ जहां इस हफ्ते इस लिस्ट में चौथे नंबर पर रहा, वहीं पिछले हफ्ते के मुकाबले एक स्थान खिसककर ‘स्विगी’ इस हफ्ते पांचवे नंबर पर आ गया। 15वें हफ्ते में ‘कोलगेट’ और ‘सर्फ एक्सेल’ इस लिस्ट से बाहर हो गए।

सबसे ज्यादा पसंद किए गए विज्ञापनः
सबसे ज्यादा पसंद किए गए विज्ञापनों की कैटेगरी में ‘फ्रूटी’ ने टॉप पर जगह बनाई है, जबकि ‘बजाज’ को इस लिस्ट में दूसरा स्थान मिला है। ‘रसना देशी मसाला’ और ‘एरियल’ पिछली बार की तरह अपनी पोजीशन पर बरकरार नहीं रह पाए और खिसककर क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर आ गए। वहीं, ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप ‘जोमाटो’ इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर पहुंचने में कामयाब रहा। 14वें हफ्ते में जहां इस लिस्ट में टॉप पर ‘गोइबिबो’, ‘हॉर्लिक्स’ और ‘डॉ. फिक्सिट’ जैसे ब्रैंड शामिल थे, वे 15 हफ्ते में इस लिस्ट में अपनी जगह नहीं बना सके।

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आखिर क्यों 4 पेज में छापना पड़ गया बीजेपी प्रत्याशी का विज्ञापन, ये है बड़ी वजह

देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव की बयार चल रही है। 17वीं लोकसभा के गठन के लिए दो चरणों में फिलहाल मतदान हो चुका है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
BJP

देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव की बयार चल रही है। 17वीं लोकसभा के गठन के लिए दो चरणों में फिलहाल मतदान हो चुका है। चुनाव आयोग भी लगातार इस मामले में अपना सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी सख्ती का परिणाम है कि सभी प्रत्याशियों को अपने खिलाफ दर्ज मामलों का सार्वजनिक ब्योरा देना पड़ रहा है। ऐसे में केरल में पत्तनमतिट्टा से लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी के. सुरेंद्रन का अलग तरह का मामला सामने आया है। सुरेंद्रन के खिलाफ 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 222 मामले तो सिर्फ सबरीमाला आंदोलन से जुड़े हैं। खास बात यह है कि बीजेपी को अपने मुखपत्र 'जन्मभूमि' में इन आपराधिक मामलों के बारे में ब्योरा देने में ही करीब 4 पेज खर्च करने पड़ गए।

उधर, पार्टी के अपने टीवी चैनल 'जनम टीवी' पर सुरेंद्रन के आपराधिक ब्योरों की जानकारी देने में करीब 60 सेकंड लग गए, जबकि अन्य उम्मीदवारों का यह ब्योरा सिर्फ 7 सेकंड में निपट गया। न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर किसी दूसरे न्यूजपेपर में सिर्फ एक एडिशन के लिए भी इनके ब्योरे का विज्ञापन दिया होता तो करीब 60 लाख का खर्च बैठता। वहीं टीवी पर यह रकम और अधिक होती। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों को तीन बार उनके खिलाफ लंबित मामलों के बारे में प्रिंट और टीवी पर विज्ञापन देने का निर्देश दिया है। इसी के तहत के. सुरेंद्रन ने विज्ञापन दिया था। उधर, केरल बीजेपी के प्रवक्ता एमएस कुमार कहते हैं, सबरीमाला मुद्दे को लेकर सुरेंद्रन के खिलाफ दर्ज मामले कानून के दायरे में नहीं आते। इसके अलावा ज्यादातर केस चुनाव से ठीक पहले ही दर्ज हुए हैं, ऐसे में उन्हें इनके खिलाफ लड़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया है।

दरअसल, सबरीमाला आंदोलन को लेकर पिछले वर्ष दिसंबर में सुरेंद्रन करीब 22 दिन जेल में रहे थे। सुरेंद्रन ने 30 मार्च को अपना पर्चा भरा था और बताया था कि उनके खिलाफ 20 मामले दर्ज हैं। हालांकि बाद में राज्य सरकार ने 29 मार्च को हाई कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि उनके खिलाफ 240 से अधिक मामले दर्ज हैं। इसके बाद उन्हें दोबारा नामांकन भरना पड़ा था।

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सर्फ एक्सेल के ऐड को लेकर किए जा रहे ट्वीट पर TOI ने दिया ये स्पष्टीकरण

ये काफी दिलचस्प मामला है और विवादों से भरा हुआ भी। लगातार लोग किसी ना किसी व्यक्ति या नेता को बदनाम...

Last Modified:
Wednesday, 13 March, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।.
ये काफी दिलचस्प मामला है और विवादों से भरा हुआ भी। लगातार लोग किसी ना किसी व्यक्ति या नेता को बदनाम करने के लिए प्रतिष्ठित मीडिया समूह की फेक खबरों को असली कहकर शेयर करते हैं। लेकिन इस बार नेताओं की बजाय एक प्रतिष्ठित कंपनी को निशाना बनाया गया है और फेक ट्वीट इस्तेमाल की गई टाइम्स ऑफ इंडिया की।

टाइम्स प्रबंधन की जानकारी में जैसे ही ये बात आई, वो सकते में आ गए और अपने हर पब्लिकेशन में इस बात पर सफाई दी है और खंडन किया है कि उन्होंने ऐसी कोई खबर नहीं छापी।

आखिर माजरा क्या है? अगर आपको याद हो कि कैसे पहले कुम्भ के रेड लेवल चाय के एड को लेकर और फिर सर्फ एक्सल के होली वाले एड को लेकर एक ही हफ्तेमें हिंदुस्तान यूनीलीवर कंपनी विवादों में आ गई। दवाब में और गलती मानकर कंपनी ने कुम्भ वाला एड तो हटा लिया लेकिन होली के उस एड पर वो बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है, जिसमें एक मुस्लिम बच्चे को मस्जिद तक रंगों से बचाकर पहुंचाने के लिए एक हिंदू लड़की रंग फेंकने वालों बच्चों के साथ एक तरकीब इस्तेमाल करती है। विरोध करने वालों को होली के रंगों को ‘दाग’ कहना, ‘दाग अच्छे हैं’ वाला स्लोगन इस्तेमाल करना भी अच्छा नहीं लगा।

ये अलग बात है कि तमाम लोग इस एड को होली की मूलभावना यानी प्रेम भाव से भी जोड़कर जायज ठहरा रहे हैं और विरोध करने वालों को गलत। ऐसे में कई फेसबुक पेजों पर टाइम्स ऑफ इंडिया की एक ट्वीट का फोटो चिपकाया गया, जिसमें लिखा था, ‘’As a result of massive boycott by the hurt Hindu Community because of a Hindu shaming derogatory ad by Surf Excel, the company has already faced loss amounting close to Rs 10 crores which
is expected to rise further’’। यानी हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड (HUL) को काफी नुकसान इस एड बनाने के बाद हिंदुओं के विरोध के चलते हुआ है।

अब टाइम्स ऑफ इंडिया ने ना केवल ट्वीट करके बाकायदा एक खबर लिखकर इस खबर का खंडन किया है, कि ना तो ये ट्वीट उनके ऑफीशियल एकाउंट से की गई है और ना ही उन्होंने ये खबर ही लिखी है। इस ट्वीट का कलर भी उनके कलर से अलग है, दूसरे टाइम्स ऑफ इंडिया के ट्विटर एकाउंट से कोई भी ट्वीट बिना खबर के लिंक के नहीं लगता है, जबकि इसमें किसी खबर का लिंक नहीं है। टाइम्स ने अपने फैक्ट चैक ट्विटर एकाउंट Times Fact Check से भी इस बारे में लोगों को जानकारी दी है कि ये ट्वीट उनका नहीं है।

आप टाइम्स ग्रुप का ये पूरा स्पष्टीकरण नीचे खबर पर क्लिक कर भी पढ़ सकते हैं

FAKE: Manufactured tweet made to look as if it’s from TOI verified account claims hul faced rs 10 crore loss. 

 

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YouTube के गले में फिर फंसी ये 'फांस', कई बड़ी कंपनियों ने हटाए विज्ञापन

‘यूट्यूब’ (YouTube) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। हालांकि, ‘यूट्यूब’ पर पहले भी इस तरह के आरोप लगते...

Last Modified:
Tuesday, 26 February, 2019
Youtube

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

अनुचित कंटेंट दिखाने को लेकर ‘यूट्यूब’ (YouTube) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। हालांकि, ‘यूट्यूब’ पर पहले भी इस तरह के आरोप लगते रहे हैं और इसे तमाम तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ा है। ताजा मामला एक विडियो को लेकर है, जिसमें एक लोकप्रिय यूट्यूबर ऐसा विडियो दिखा रहा है, जिसमें बच्चों को लेकर आपत्तिजनक कमेंट्स शामिल हैं।   

इस तरह का मामला सामने आते ही कई बड़े एडवर्टाइजर्स ने ‘यूट्यूब’ से दूरी बना ली है और अपने विज्ञापन हटा लिए हैं। इनमें ‘AT&T’ और ‘नेस्ले’ जैसी कंपनियां शामिल हैं। इस बारे में यूट्यूब ने कहा है कि इस बारे में उसने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस तरह के कंटेंट को और कुछ अन्य विडियो को भी हटा दिया है। इसके साथ ही उसने ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटेड चिल्ड्रन’ (National Center for Missing and Exploited Children) से मामले की शिकायत भी की है।

इसके अलावा यूट्यूब ने अपने बड़े एडवर्टाइजिंग पार्टनर्स को बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक नोट भी भेजा है, जिसमें इस मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतने का वादा भी किया है।

‘नेस्ले’ और अन्य एडवर्टाइजर्स का कहना है कि उन्होंने ‘यूट्यूब’ पर फिलहाल अपने विज्ञापन रोक दिए हैं, ताकि इन मुद्दों पर कार्रवाई हो सके। वहीं, ‘AT&T’ का कहना है, ‘जब तक हमारे ब्रैंड को किसी भी तरह के अनुचित कंटेंट से पूरी तरह सुरक्षा नहीं मिल जाती, हम यूट्यूब पर अपने विज्ञापन नहीं दिखाएंगे।’

गौरतलब है कि यूट्यूब को इससे पहले भी एडवर्टाइजर्स द्वारा बहिष्कार का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2017 की शुरुआत में भी एडवर्टाइजर्स ने इससे दूरी बना ली थी। इसके बाद से यूट्यूब ने अपनी साइट पर आपत्तिजनक कमेंट्स और विडियो से निपटने के लेकर तमाम कवायद की हैं और ज्यादा से ज्यादा पारदर्शी होने का प्रयास किया है।

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आपको नहीं पसंद टीवी पर कोई विज्ञापन, सरकार ने दी ये 'ताकत'

कई बार टीवी देखते समय ऐसे विज्ञापन आ जाते हैं, जो...

Last Modified:
Saturday, 26 January, 2019
Channel

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

कई बार टीवी देखते समय ऐसे विज्ञापन आ जाते हैं, जो आपत्तिजनक होते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में दर्शक इनकी शिकायत नहीं कर पाते हैं और वे ऐसे विज्ञापनों को देखने के लिए मजबूर होते हैं।

दर्शकों की इसी परेशानी को समझते हुए सरकार ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सभी टीवी चैनलों को स्क्रीन के नीचे एक पट्टी (scroll) चलाने को कहा है, जिसके आधार पर वे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सरकार ने यह दिशा-निर्देश 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) के सेल्फ रेगुलेटरी मैकेनिज्म को बढ़ावा देने के लिए दिए हैं।

इन दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले सभी कार्यक्रमों अथवा विज्ञापनों को केबल टेलिविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) एक्ट 1995 के तहत प्रोग्राम और एडवर्टाइजिंग अधिनियम (Programme and Advertising Codes) का पालन करना अनिवार्य है। सभी टीवी चैनलों को केबल टेलिविजन नेटवर्क्स अधिनियम 1994 के नियम 7(9) के अनुसार ये दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी विज्ञापन को प्रसारित नहीं किया जाएगा।

‘ASCI`  की इस पहल के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने और इस दिशा में तेजी से परिणाम हासिल करने के लिए सभी टीवी चैनलों को स्क्रीन पर एक स्क्रॉल ‘Objectionable ads? Complain to The Advertising Standards Council of lndia (ASCI) Call 7710012345 or ascionline.org’ चलाने की सलाह भी दी गई है।

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न्यूज18 इंडिया ने ऐसे बताया खुद को ‘नंबर 1’

हिंदी टीवी न्यूज में आजकल काफी प्रतिस्पर्धा है और ऐसे माहौल में प्राइम टाइम...

Last Modified:
Monday, 21 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

हिंदी टीवी न्यूज में आजकल काफी प्रतिस्पर्धा है। ऐसे माहौल में प्राइम टाइम में अपनी स्थिति की मजबूती को बयां करने के लिए ‘न्यूज18 इंडिया’ ने एक कैंपेन लॉन्च किया है।

इसका कॉन्सेप्ट ‘आरके स्‍वामी बीबीडीओ’ (RK Swamy BBDO) का है और इसका निर्देशन राजेश साथी ने किया है। इस बारे में ‘नेटवर्क 18’ ग्रुप के ब्रैंड एडवाइजर राहुल कंसल का कहना है कि इस कैंपेन के जरिये ग्रुप ने हल्के-फुल्के अंदाज में अपनी स्थिति को बयां करने का प्रयास किया है।

इस कैंपेन को आप यहां देख सकते हैं-

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ये है मोदी और मनमोहन सरकार के विज्ञापनों की ‘सच्चाई’

हाल ही में सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले सरकारी...

Last Modified:
Wednesday, 09 January, 2019
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समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

हाल ही में सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों की दरों में लगभग 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इससे प्रिंट मीडिया जगत में खुशी की लहर है। सरकार द्वारा प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों की बात करें तो अधिकारियों का दावा है कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की तुलना में प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों पर ज्यादा खर्च किया है।

इस बारे में सरकार की ओर से जारी डाटा के अनुसार, सरकारी विज्ञापनों के लिए यूपीए ने 1,896.73 करोड़ रुपए का भुगतान किया, जबकि एनडीए ने अब तक 2,156.22 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि एनडीए सरकार ने वर्ष 2014-15 और दिसंबर 2018 के बीच प्रिंट मीडिया को 460 मिलियन सेंटीमीटर विज्ञापन दिया है, जबकि यूपीए सरकार ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच 560 मिलियन सेंटीमीटर विज्ञापन दिया था।

नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि यूपीए सरकार द्वारा भले ही विज्ञापन ज्यादा दिया गया, लेकिन इस पर खर्च एनडीए सरकार ने ज्यादा किया, क्योंकि इस दौरान विज्ञापन की दरों में भी काफी बढ़ोतरी हो गई है। अधिकारी का यह भी कहना था कि हालांकि यदि हम यूपीए सरकार द्वारा दिए गए विज्ञापनों को आज के रेट से देखें तो यह रकम लगभग 2,558 करोड़ रुपए बैठती है।

रिपोर्ट के अनुसार, इसमें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का विज्ञापन शामिल नहीं है। यह भी माना जा रहा है कि वर्तमान एनडीए सरकार द्वारा डिजिटल मीडिया पर भी ज्यादा खर्च किया गया है। इसका भी कारण यही है कि पिछले पांच वर्षों में इस मीडिया का काफी विस्तार हो चुका है।

गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में, सूचना-प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने राज्यसभा को बताया था कि प्रिंट मीडिया को सरकारी विज्ञापन उपलब्ध कराने वाली नोडल एजेंसी ‘ब्‍यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्‍युनिकेशन’ (BOC) की ओर से 2015-16 में 60.9442  करोड़ रुपए के 52  विज्ञापन जारी किए गए। इसके अलावा 2016-17 में 83.2686 करोड़ रुपए के 142 विज्ञापन और 2016-17 में 147.9600 करोड़ रुपए के विज्ञापन जारी किए गए। ये विज्ञापन प्रधानंत्री फसल बीमा योजना, स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन और सांसद आदर्श गांव योजना जैसी सरकारी योजनाओं के लिए दिए गए।

संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 और जुलाई 2018 के बीच इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और अन्य मीडिया पर करीब 480 करोड़ रुपए खर्च किए। इनमें 2014-15 में 979.78 करोड़, 2015-16 में 1,160.16 करोड़, 2016-17 में 1,264.26 करोड़ और 2017-18 में 1,313.57 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

नाम न छापने की शर्त पर भाजपा के एक नेता का कहना है कि यूपीए सरकार द्वारा सरकारी योजनाओं के कई विज्ञापनों में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी का फोटो भी इस्तेमाल किया गया था।

वहीं, कांग्रेस ने विज्ञापनों को लेकर किए गए सरकार के दावे को खारिज किया है। पूर्व सूचना-प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी का कहना है, ‘इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है कि एनडीए ने विज्ञापनों पर अपने पूर्ववर्तियों से ज्यादा खर्च किया है।’ उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञापनों पर सोनिया गांधी के फोटो का इस्तेमाल यूपीए सरकार की चेयरपर्सन की हैसियत से किया गया था। उनका कहना है, ‘भाजपा की तरह हम व्यक्ति केंद्रित पार्टी नहीं हैं।’

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Honda का ‘HAPPY 2009’ हुआ हिट, काम कर गई कंपनी की स्ट्रैटेजी

नए साल की पहली सुबह, जिसने भी अख़बार उठाया, कुछ देर के लिए उसकी नज़रें...

Last Modified:
Wednesday, 02 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

नए साल की पहली सुबह, जिसने भी अख़बार उठाया, कुछ देर के लिए उसकी नज़रें वहीं थम गईं। फिर चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आई और जुबां से अख़बार की तारीफ में कुछ शब्द निकले। ये शब्द कुछ ऐसे रहे होंगे, ‘अख़बार वाले भी बिना कुछ देखे छाप देते हैं...2019 की जगह 2009 जा रहा है।’

दरअसल, एक जनवरी को अधिकांश अख़बारों के प्रत्येक एडिशन में होंडा कंपनी का विज्ञापन फ्रंट पेज पर था। इस विज्ञापन में बड़े-बड़े शब्दों में लिखा था ‘हैप्पी 2009’। आमतौर पर जब सभी 2019 की शुभकामनाएं दे रहे हैं, 2009 के जिक्र से गफलत पैदा होना लाज़मी था। लिहाजा, कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर अख़बार और कंपनी की इस ‘गलती’ को दर्शाते संदेशों की बाढ़ आ गई। यूजर्स ने अपने-अपने अंदाज़ में दोनों का मजाक उड़ाया, लेकिन किसी ने ‘हैप्पी 2009’ के नीचे लिखे शब्दों को पढ़ने और समझने का प्रयास नहीं किया।

दरअसल, ये कोई गलती नहीं थी, न अख़बार और न ही कंपनी की तरफ से कोई चूक हुई। ये विज्ञापन रणनीति का एक हिस्सा था, जो बेहद कारगर साबित हुआ। होंडा विज्ञापन के माध्यम से यह कहना चाहती थी कि जो काम उसने 2009 में ही कर लिया था, उसे इंडस्ट्री अब अपनाएगी। एक तरह से कंपनी ने अपने प्रतियोगियों पर निशाना साधा था। यहां ‘हैप्पी 2009’ का आशय था कि होंडा दुनिया के साथ 2019 में पहुंच गई है, लेकिन उसके कॉम्पटीटर्स के लिए तकनीक के मामले में यह 2009 की शुरुआत है, इसलिए कंपनी उन्हें 2009 की शुभकामनाएं दे रही थी।

यदि विज्ञापन में सीधे तौर पर ‘हैप्पी 2019’ लिखा होता तो न इतनी चर्चा होती और न ही लोग बार-बार इसे देखते। यानी भारी-भरकम बजट वाला विज्ञापन कुछ ही देर में रद्दी बनकर रह जाता। लेकिन अब यह पूरी तरह वायरल हो चुका है, नए साल की पहली सुबह से अब तक लोग इसकी चर्चा कर रहे हैं।

विज्ञापन की दुनिया में रचनात्मकता बहुत मायने रखती है और होंडा के इस विज्ञापन में रचनात्मकता कूट-कूटकर भरी हुई है। कंपनी ने शुभकामना देने के आम रास्ते पर चलने के बजाय एक अलग रास्ता चुना और यह रास्ता 2019 का सबसे धमाकेदार रास्ता साबित हुआ है। जिन लोगों को ‘हैप्पी 2009’ के पीछे की असल वजह समझ आ रही है, वो अब अपनी नादानी पर हंसने और विज्ञापन की तारीफ करते नहीं थक रहे।

 

 

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देखें कैसे रिपोर्टर के जूते और बैग करते हैं सवाल, ABP का नया कैंपेन

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ ने अपना नया ब्रैंड कैंपेन लॉन्च किया...

Last Modified:
Friday, 07 December, 2018
abp news network

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ ने अपना नया ब्रैंड कैंपेन 'देश को रखे आगे' लॉन्च किया है। यह ब्रैंड कैंपेन एबीपी के रिपोर्टरों की उस कड़ी मेहनत पर केंद्रित है, जिसके दम पर वे हर दिन अत्यधिक जानकारी युक्त़ और जटिल न्यूज कवरेज लेकर आते हैं। इस कैंपेन का प्रसारण छह दिसंबर 2018 को किया गया। इसे ‘लोव लिंटास’ द्वारा तैयार किया गया है।

इस कैंपेन को दो दिलचस्प टेलिविजन विज्ञापनों के साथ आगे बढ़ाया गया है, जिसमें एक शू (7 नंबर का जूता) और बैग (पिट्ठू बैग) की कहानी दिखाई गई है। ये किसी भी जर्नलिस्ट के करियर में बेहद जरूरी सामान हैं। ये सामान न सिर्फ रिपोर्टर की शक्ति को पहली बार देखते हैं, बल्कि उसके सफर का एक अभिन्न हिस्सा भी बन जाते हैं।

ब्रैंड कैंपेन को एबीपी न्यूज के सीओओ अविनाश पांडे द्वारा उनके ट्विटर हैंडल https://twitter.com/panavi पर लॉन्च किया गया। ब्रैंड कैंपेन की लॉन्चिंग के मौके पर  अविनाश पांडे ने कहा, ‘मैं अपने रिपोर्टर्स को बधाई देता हूं और उनका शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जो सच्चाई के पहरेदारों के रूप में काम करते हैं। इस कैंपेन का उद्देश्य दर्शकों को देश में निरंतर चल रही घटनाओं के बारे में बताकर नेटवर्क को आगे रखने में मदद करना है।'

वहीं, लोव लिंटास के सीओओ नवीन गौर ने कहा, ’एबीपी न्यूज के साथ हमारा सहयोग काफी लंबा है और यह कैंपेन हमारे पुराने कैंपेन की तरह ही खास है। भारत में अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में यह हमारा कर्तव्य है कि हम एबीपी को एक विशिष्ट पहचान दें।'

यहां देखें कैंपेन-

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सोशल मीडिया के प्लेयर्स ने बढ़ाए दाम, हो रही धन की बरसात...

आजकल डिजिटल का जमाना है। शहरों से लेकर गांवों तक स्मार्टफोन की उपलब्धता...

Last Modified:
Wednesday, 14 November, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

आजकल डिजिटल का जमाना है। शहरों से लेकर गांवों तक स्मार्टफोन की उपलब्धता आसान होने से इंटरनेट यूज करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। सभी तरह का कंटेंट इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है। ऐसे में इन दिनों फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। अपने प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए ये कंपनियां भी अब इस मौके को भुनाने में जुट गई हैँ।

अंग्रेजी अखबार ‘द इकनॉमिक टाइम्स’ में छपी एक खबर के मुताबिक, विडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब ने अपने होमपेज पर दिए जाने वाले एक दिन के विज्ञापन रेट 70 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.4 करोड़ रुपए करने की घोषणा की है।

बताया जाता है कि मंथली एक्टिव यूजर्स (MAUs) की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि के बाद यूट्यूब ने यह कदम उठाया है। आंकड़ों के अनुसार, यूट्यूब के मंथली एक्टिव यूजर्स 250 मिलियन, फेसबुक के 220 मिलियन और इंस्टाग्राम के 68 मिलियन हो चुके हैं, जबकि ट्विटर की बात करें तो यह आंकड़ा 30.4 मिलियन तक पहुंच चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, यूट्यूब के बाद अब फेसबुक और ट्विटर भी अपनी विज्ञापन दरें बढ़ा रहे हैं।

विशेषज्ञों के हवाले से अखबार ने कहा है कि वर्ष 2019 में भी फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम अपनी विज्ञापन दरों में सालाना 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी करना जारी रखेंगे, क्योंकि हर साल इन प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स पहले के मुकाबले ज्यादा समय बिताने लग जाते हैं। हालांकि, फेसबुक ने विज्ञापन की दरों में बढ़ोतरी से इनकार किया है।  

Dentsu Aegis Network-e4m Digital की रिपोर्ट के अनुसार, इस समय ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री 55,960 करोड़ रुपए की इंडस्ट्री बन चुकी है और 32 प्रतिशत ‘compound annual growth rate’ (CAGR)  के साथ वर्ष 2020 तक इसमें 18,986 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

वहीं, केपीएमजी (KPMG) रिपोर्ट के अनुसार, देश की डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष (FY) 2015 में जहां यह 4700 करोड़ रुपए की थी, वह बढ़कर 2018 में 11630 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश की ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में किए जाने वाले कुल खर्च में डिजिटल मीडिया का शेयर 15 प्रतिशत है और वर्ष 2020 तक इसके 24 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।

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