आर्थिक पैकेज का विज्ञापन जगत पर क्या पड़ेगा असर, विशेषज्ञों ने किया आकलन

पीएम मोदी के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज के प्रमुख पहलुओं को साझा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एमएसएमई सेक्टर के लिए सरकार की प्रतिबद्धताओं की बात कही है

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2020
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज के कुछ प्रमुख पहलुओं को साझा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को अपने भाषण में एमएसएमई (MSME) क्षेत्र के लिए सरकार की प्रतिबद्धताओं की बात कही है। भारतीय उद्योग जगत ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने का स्वागत किया है, वहीं विज्ञापन जगत को भी कोरोना संकट के इस दौर में पुनरुद्धार की उम्मीद दिखाई दे रही है।

 इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, इस पैकेज के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की डिमांड और सप्लाई की चेन शुरू होने पर उनके द्वारा विज्ञापन पर खर्च फिर शुरू करने की संभावना है। ‘हवास ग्रुप इंडिया’ (Havas Group India) के सीईओ राणा बरुआ ने वित्तमंत्री के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है, ‘कुल मिलाकर यह काफी सकारात्मक और उत्साहजनक है। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत का जो विजन तैयार किया है, मुझे लगता है कि वित्त मंत्री की घोषणा सही दिशा में है और इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को काफी फायदा होगा और इस चुनौतीपूर्ण समय में सुनिश्चित करना होगा कि कंज्यूमर के हाथ में थोड़े पैसे भी हों।’

‘Gozoop’ के सीईओ और को-फाउंडर अहमद आफताब नकवी का कहना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को अपने टार्गेट ऑडियंस तक पहुंचने के लिए डिजिटल एडवर्टाइजिंग पर पहले के मुकाबले अधिक भरोसा है, ऐसे में डिजिटल मार्केटिंग के आगे बढ़ने की उम्मीद है। ‘लोकल के लिए वोकल’ (Local ke liye vocal) थीम डिजिटल के अलावा किसी अन्य माध्यम के लिए अधिक उपयुक्त नहीं हो सकती है। नकवी का कहना है, ‘देश में डिजिटल की पहुंच और तेजी से बढ़ेगी, जिसका मतलब है कि अधिकांश ब्रैंड्स के इनवेस्टमेंट अब डिजिटल का रुख करेंगे।’

‘Bang In The Middle’ के मैनेजिंग पार्टनर और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर प्रताप सूथान (Prathap Suthan) का कहना है, ‘ब्रैंड्स ज्यादा समय तक एडवर्टाइजिंग से दूर नहीं रह सकते हैं। क्योंकि जब आप (ब्रैंड्स) विज्ञापन पर खर्च नहीं करते हैं तो आप दिखाई नहीं देंगे और फिर दौड़ से बाहर हो जाएंगे। उनका कहना है कि बीटूबी (b2b) ब्रैंड्स एक-दूसरे के संपर्क में रहेंगे और एक साधारण ई-मेल अथवा फोन से उनका बिजनेस दोबारा शुरू हो सकता है, लेकिन बीटूसी (b2c) ब्रैंड्स के लिए यह इतना आसान नहीं होगा। कोविड-19 के बाद विभिन्न मोर्चों पर क्लाइंट्स को आश्वासन देना होगा और उनका भरोसा जीतना होगा। आपको एडवर्टाइज करने की जरूरत है और यह भी नहीं भूलना होगा कि फेस्टिव सीजन भी आने वाला है। इस संकट से बाहर निकलने का यह सही समय है।’

‘Khaitan & Co’ के पार्टनर अतुल पांडे का भी यही मानना है। पांडे का कहना है, ‘कोविड-19 के बाद ‘MSME’ तेजी से आगे बढ़ेगा और उनके मार्केटिंग खर्च में बढ़ोतरी होगी।’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जैसे ही घरेलू खपत बढ़ेगी और नए मार्केट खुलेंगे, ‘MSME’ हर संभव तरीके से बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश करेगा।।

 ‘Hyper Connect Asia’ के को-फाउंडर और ग्रोथ लीड अंकुर पुजारी का करना है कि सोशल मीडिया डाटा का इस्तेमाल बाजार के ट्रेंड को समझने के लिए किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर तमाम कैंपेन और विज्ञापन किए जाने की जरूरत है, ताकि कम निवेश में ज्यादा रेवेन्यू जुटाया जा सके। वहीं, ‘Pocket Aces’ के वाइस प्रेजिडेंट (Finance and Operations) कुणाल लखारा का कहना है, ‘MSME के लिए टर्नओवर और निवेश की सीमा बढ़ाकर नए सिरे से इसका गठन करने से हमें सरकारी योजनाओं के तहत कई संस्थाओं में बहुत सारे लाभ दिखाई देंगे और इससे देश को वापस अपने पैर जमाने में और आने वाले समय में काफी ग्रोथ करने में मदद मिलेगी।’

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बिहार चुनाव से पहले डिजिटल प्लेटफॉर्म कुछ यूं बना 'चुनावी रणभूमि'

बिहार विधानसभा चुनाव के शुरू होने में अब महज एक महीने से भी कम का समय बचा है, लिहाजा राजनीतिक प्रचार अब अपने चरम पर है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2020
biharelection2020

बिहार विधानसभा चुनाव के शुरू होने में अब महज एक महीने से भी कम का समय बचा है, लिहाजा राजनीतिक प्रचार अब अपने चरम पर है। कोविड-19 महामारी के दौरान होने वाला यह पहला चुनाव है। इस वजह से डिजिटल प्लेटफॉर्म नई चुनावी रणभूमि बन गई है। बिहार में फेसबुक पर डिजिटल ऐड खर्च करने के मामले में बीजेपी और उसका अलायंस पार्टनर जद (यू) इस दौड़ में सबसे आगे हैं। वहीं प्रशांत किशोर की अगुवाई वाले इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (Indian Political Action Committee) के 'बात बिहार की' (Baat Bihar Ki) पेज दूसरे स्थान पर है।

बिहार में जब विज्ञापन खर्च की बात आती है, तो राजनीतिक विज्ञापनों को अनुमति देने वाला एकमात्र प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लोगों का रुझान बढ़ जाता है। पिछले तीस दिनों में फेसबुक पर सबसे ज्यादा विज्ञापन खर्च के मामले में बिहार चौथे नंबर पर रहा है।

फेसबुक एड लाइब्रेरी (Facebook Ad Library) के अनुसार, 27 अगस्त से 25 सितंबर, 2020 के बीच बिहार के राजनीतिक दलों और उनके सहयोगी पेजेस (allied pages) ने कुल 39,77,153 रुपए खर्च किए गए, जो इस प्लेटफॉर्म पर कुल विज्ञापन खर्च का 95% बिहार से हुआ है। इस अवधि के दौरान जद(यू) के फेसबुक पेजों पर सबसे ज्यादा 504,529 रुपए  खर्च किए गए हैं। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर, इस पेज ने 362 विज्ञापनों पर 784,015 रुपए खर्च किए हैं।

ट्रैकर के अनुसार इस क्षेत्र में राजनीतिक विज्ञापनों पर खर्च करने के मामले में बीजेपी बिहार दूसरे नंबर पर रहा, जिसने पिछले 30 दिनों में 253,316 रुपए खर्च किए। यह राशि 394 विज्ञापनों पर खर्च की गई थी। राजनीतिक विज्ञापनों में खर्च करने वाले तीसरे स्थान पर ‘नीतीश केयर्स’ (Nitish Cares) के नाम वाला पेज रहा, जिसने 160,767 रुपए का विज्ञापन खर्च किया।

इस क्षेत्र के अन्य शीर्ष समर्थकों में जद (यू) और भाजपा के कई अन्य सहयोगी पेज शामिल हैं। उदाहरण के लिए बीजेपी द्वारा बनाए गए ‘द आत्मनिर्भर बिहार’ (The Atmanirbhar Bihar) पेज पर इसी समयावधि के दौरान 152,812 रुपए खर्च हुए।

जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे इन राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों द्वारा बनाए गए कई पेज फेसबुक विज्ञापनों पर अपना खर्च बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के लिए ‘बिहार जदयू’ (Bihar JDU) नाम के पेज ने फरवरी 2019 से कुल 155,053 रुपये खर्च किए हैं, लेकिन पिछले एक महीने में इस पेज ने 133,200 रुपए खर्च किए हैं। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा, यानी 90,610 रुपए की राशि 20 सितंबर से 26 सितंबर, 2020 के बीच खर्च की गई थी।

इस तरह के और भी कई और उदाहरण हैं, जो राज्य में चुनावों को लेकर अतिसक्रिय हो रहे हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का पेज भी पिछले एक महीने में सबसे अधिक खर्च करने वालों में से एक है। इस पेज ने पिछले एक महीने में 1.15 लाख रुपए से अधिक खर्च किए हैं, जोकि फेसबुक विज्ञापनों पर अपने वार्षिक खर्च का 93% अधिक है। बिहार में कांग्रेस ने उपरोक्त अवधि के दौरान प्लेटफॉर्म पर 103,741 रुपये खर्च किए हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर भी, बिहार से संबंधित पेजेस फेसबुक विज्ञापनों पर सबसे अधिक खर्च करने वालों में से हैं। प्रशांत किशोर की अगुवाई वाले इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (Indian Political Action Committee) के 'बात बिहार की' (Baat Bihar Ki)  पेज ने पिछले 30 दिनों में 287 विज्ञापनों पर 847,460 रुपए खर्च किए, उसके बाद जद(यू) ने 362 विज्ञापनों पर 784,015 रुपए खर्च किए। 27 अगस्त से 25 सितंबर के बीच फेसबुक पर विज्ञापन देने वाले कुल 20 टॉप एडवर्टाइजर्स में बीजेपी बिहार भी शामिल है और इसने 394 विज्ञापनों पर 253,216 रुपये खर्च किए हैं।

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‘IAA’ के इंडिया चैप्टर में डिस्कवरी की मेघा टाटा निभाएंगी अब ये अहम भूमिका

मेघा टाटा को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करने का 28 साल से ज्यादा का अनुभव है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Megha Tata

‘डिस्कवरी’ (साउथ एशिया) की एमडी मेघा टाटा को ‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ (IAA) के इंडिया चैप्टर का नया प्रेजिडेंट नियुक्त किया गया है। पिछली साल उन्हें वाइस प्रेजिडेंट चुना गया था। मेघा टाटा ने वर्ष 2019 में ‘डिस्कवरी’ जॉइन किया था। इससे पहले वह ‘बिजनेस टेलिविजन इंडिया’ (BTVI) के साथ जुड़ी हुई थीं और भारत में इसके बिजनेस का नेतृत्व कर रही थीं।

मेघा टाटा को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करने का 28 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह ‘एचबीओ’ (HBO), ‘टर्नर इंटरनेशनल’ (Turner International) और ‘स्टार इंडिया’ (Star India) जैसी तमाम बड़ी कंपनियों में प्रमुख पदों पर काम कर चुकी हैं।  

बता दें कि पिछले साल 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका को लगातार दूसरी बार ‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ (IAA) के इंडिया चैप्टर का प्रेजिडेंट चुना गया था, वहीं तब मेघा टाटा को वाइस प्रेजिडेंट के पद पर चुना गया था।

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10+2 ऐड कैप मामले में दिल्ली HC ने इस तारीख तक स्थगित की सुनवाई

10+2 ऐड कैप (10+2 ad cap) मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी सुनवाई को अगली तारीख तक के लिए स्थगित कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Channels

दिल्ली हाई कोर्ट ने 10+2 ऐड कैप (10+2 ad cap) मामले की सुनवाई को 19 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। इस मामले में ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA), ‘बी4यू’, ‘9X मीडिया’, ‘टीवी विजन’, ‘सन टीवी नेटवर्क’, ‘ई24’ और ‘कलिग्नार टीवी’ ने ट्राई द्वारा जारी 10+2 ऐड कैप के खिलाफ याचिका दायर की है। यह मामला करीब सात साल से लंबित है। इसकी शुरुआत मार्च 2013 में हुई थी, जब ‘TRAI’ ने ब्रॉडकास्टर्स के लिए ‘केबल टेलिविजन नेटवर्क रेगुलेशन’ (CTNR) कानून 1995 का हवाला देते हुए ‘क्वालिटी ऑफ सर्विस नॉर्म्स’ (CTNR) को बहाल कर दिया था।

शुरुआती स्तर पर अगस्त 2012 में बतौर कंसल्टेशन पेपर पब्लिश किए गए इन नॉर्म्स के अनुसार, प्रत्येक ब्रॉडकास्टर एक घंटे में सिर्फ 12 मिनट विज्ञापन ही चला सकता है। इसमें 10 मिनट का कॉमर्शियल विज्ञापन और दो मिनट का सेल्फ प्रमोशन शामिल हो सकता है। इस ऐड कैप के नियम का पालन न करने वाले टीवी चैनल्स के सीईओ के खिलाफ भी ‘TRAI’ ने कार्यवाही शुरू की थी

ट्राई के इस कदम का काफी विरोध हुआ था। ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने ट्राई के खिलाफ ‘दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय ट्रिब्यूनल’ (TDSAT) में याचिका दायर की थी। कुछ अन्य ब्रॉडकास्टर्स ने व्यक्तिगत रूप से भी इस कदम का विरोध किया था। उस समय TDSAT ने ऐड कैप पर स्टे दे दिया था और नवंबर में इस केस की सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया था।

हालांकि, इसके बाद ‘TDSAT’ ने ‘NBA’ और अन्य ब्रॉडकास्टर्स द्वारा दायर केस को उस समय खारिज कर दिया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि ‘ट्राई’ की सिफारिशों में हस्तक्षेप करने का ‘TDSAT’ को अधिकार नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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अनुप्रिया आचार्य को मिली AAAI की कमान, एग्जिक्यूटिव कमेटी में शामिल हुए ये नाम

‘Publicis Groupe’ की सीईओ (साउथ एशिया) अनुप्रिया आचार्य को ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) का प्रेजिडेंट चुना गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
Anupriya Acharya

‘Publicis Groupe’ की सीईओ (साउथ एशिया) अनुप्रिया आचार्य को ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) का प्रेजिडेंट चुना गया है। उनका चयन वर्ष 2020-21 के लिए किया गया है। एसोसिएशन की वार्षिक आम सभा की बैठक में यह घोषणा की गई। अब तक इस पद पर रहे आशीष भसीन ने अनुप्रिया आचार्य को चार्ज सौंप दिया है। इसके अलावा ‘ग्रुप एम’ (GroupM) के सीईओ (साउथ एशिया) प्रशांत कुमार को सर्वसम्मति से एसोसिएशन का वाइस प्रेजिडेंट चुना गया है।

 एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव कमेटी में  बतौर मेंबर आनंद भडमकर (Dentsu Aegis Network Marketing Solutions Pvt Ltd), कुणाल ललानी (Crayons Advertising Pvt Ltd), मोहित जोशी (Havas Media India Pvt Ltd), प्रणव प्रेमनारायण (Prem Associates Advertising & Marketing), राणा बरुआ (Havas Worldwide India Pvt Ltd), विवेक श्रीवास्तव (Innocean Worldwide Communications Pvt Ltd) को शामिल किया गया है। आशीष भसीन वर्ष 2020-21 के लिए एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव कमेटी के पदेन सदस्य (ex-officio member) होंगे।

अपनी नियुक्ति के बारे में अनुप्रिया आचार्य का कहना है, ‘इस तरह के प्रतिष्ठित संस्थान के प्रेजिडेंट के तौर पर चुना जाना मेरे लिए मेरे लिए काफी सम्मान की बात है, इसके अलावा यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। सारी दुनिया की तरह हमारी इंडस्ट्री भी महामारी से काफी बुरी तरह प्रभावित हुई है और यह हम सभी के लिए काफी मुश्किल समय है।  मैं एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के हितों को आगे बढ़ाने और AAAI को और अधिक ऊंचाई तक ले जाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास करूंगी।’

वहीं, आशीष भसीन ने कहा, ‘मुझे दो साल बतौर प्रेजिडेंट इस प्रतिष्ठित संस्था के साथ काम करने का मौका मिला। मैं एग्जिक्यूटिव कमेटी के सभी मेंबर्स का उनके सहयोग के लिए धन्यवाद अदा करता हूं। इसके अलावा मैं अनुप्रिया आचार्य को इस संस्था का प्रेजिडेंट चुने जाने पर बधाई देता हूं।’

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ओणम पर ऐडवर्टाइजर्स ने मातृभूमि समूह पर कुछ यूं 'बरसाया प्यार'

समूह की ओर से इन विज्ञापनदाताओं का आभार भी व्यक्त किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
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‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) समूह को इस बार ओणम सीजन (Onam season) के दौरान 1000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापन दिए हैं। बताया जाता है कि इनमें से 200 ऐडवर्टाइजर्स केरल के स्थानीय व्यापारी रहे, जिन्होंने खासतौर पर मातृभूमि समूह को विज्ञापन दिए।

समूह की ओर से इन विज्ञापनदाताओं का आभार भी जताया गया है। इस बारे में ‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘मेरा हमेशा से मानना रहा है कि प्रत्येक संकट में एक अवसर होता है। यह हमारी उत्साही और मेहनती टीम के प्रयासों का नतीजा और ऐडवर्टाइजर्स का हमारे ऊपर भरोसा है, जो हमें इतने विज्ञापन मिले हैं।’

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जानिए, विज्ञापनों के लिहाज से कैसे रहे पिछले दो महीने

पिछले साल जुलाई से अगस्त के बीच की अवधि के मुकाबले इस साल इसी अवधि में विज्ञापनों में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 10 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 10 September, 2020
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पिछले साल जुलाई से अगस्त के बीच की अवधि के मुकाबले इस साल इसी अवधि में विज्ञापनों (Advertising volumes) में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। ‘टैम एडेक्स’ (Tam AdEx) के डाटा के अनुसार, यदि टीवी की बात करें तो इसी अवधि के दौरान इसे मिलने वाले विज्ञापनों में 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पिछले साल जुलाई-अगस्त के मुकाबले इस साल इसी अवधि में 20 से ज्यादा नई कैटेगरी और 1800 से ज्यादा नए एडवर्टाइजर्स सामने आए हैं।    

टीवी पर 370 से ज्यादा कैटेगरीज में 3000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स और 4600 से ज्यादा ब्रैंड्स देखे गए हैं। दैनिक आधार (daily basis) पर विज्ञापनों की संख्या (ad volumes) की बात करें तो अगस्त 2020 में पिछले महीने के मुकाबले इनमें पांच प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इन डाटा से यह भी पता चलता है कि पिछले छह हफ्तों के दौरान विज्ञापनों की संख्या में स्थिरता आई है और 27वें हफ्ते की तुलना में 35वें हफ्ते में 16 प्रतिशत बढ़ोतरी देखी गई है।

इन डाटा के अनुसार, सेक्टर्स को देखें तो पर्सनल केयर/पर्सनल हाइजीन 21 प्रतिशत शेयर के साथ ऐड वॉल्यूम के मामले में टॉप पर हैं और इसके बाद फूड एंड बेवरेज (F&B) का नंबर है। टॉप10 कैटेगरीज में एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर का बोलबाला रहा है। ऐड वॉल्यूम के मामले में टॉप10 एडवर्टाइजर्स का टीवी में शेयर करीब 50 प्रतिशत है। इसमें HUL का अकेले 22 प्रतिशत और Reckitt का 10 प्रतिशत शेयर है।

नए एडवर्टाइजर्स की लिस्ट में Facebook Inc पहले नंबर पर है। top 10 growing Advertisers में ऐड वॉल्यूम में सबसे ज्यादा तीन गुना ग्रोथ कार कैटेगरी में देखी गई है। इसके बाद चॉकलेट्स का नंबर है। कोका कोला इंडिया के ऐड वॉल्यूम में भारी उछाल देखा गया है। ऐड वॉल्यूम के मामले में सबसे आगे न्यूज जॉनर (31%) है। इसके बाद जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (27%) और फिर मूवीज जॉनर (25%) है।

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भ्रामक माने जाएंगे इस तरह के विज्ञापन, इन नियमों का भी करना होगा पालन

झूठे और गुमराह करने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने विज्ञापन निर्माताओं व विज्ञापन एजेंसियों के लिए गाइडलाइंस का मसौदा तैयार किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 07 September, 2020
Last Modified:
Monday, 07 September, 2020
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झूठे और गुमराह करने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए ‘उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय’ (Ministry of Consumer Affairs) ने विज्ञापन निर्माताओं व विज्ञापन एजेंसियों के लिए गाइडलाइंस का मसौदा (draft guidelines) तैयार किया है। इसके अनुसार, ‘डिस्क्लेमर’ (disclaimers) वाले विज्ञापनों में छोटे फॉन्ट्स (small fonts) का इस्तेमाल किए जाने पर उन्हें भ्रामक माना जाएगा। इन दिशा निर्देशों में कहा गया है कि डिस्क्लेमर का फॉन्ट साइज विज्ञापन द्वारा किए गए दावे के समान आकार का होना चाहिए।

इसी तरह से यदि विज्ञापन में डिस्क्लेमर ‘वॉयस ओवर’ (VO) के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तो एडवर्टाइजर द्वारा किए गए दावे को इस वॉयस ओवर के साथ सिंक (sync) किया जाना चाहिए।

ये नए नियम ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ (Consumer Protection Act) 2019 के तहत मंत्रालय द्वारा तैयार मसौदा गाइडलाइंस के एक समूह का हिस्सा हैं। इस मसौदे में ‘वैध विज्ञापन’ (valid advertisement) के तहत ‘दिशानिर्देशों के उल्लंघन’ (contraventions of the guidelines) के लिए 20 नियमों को शामिल किया गया है।

इन ड्राफ्ट गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि विज्ञापनों में सच और ईमानदारी होनी चाहिए और यह किसी भी तरह से कंज्यूमर्स को गुमराह करने वाले नहीं होने चाहिए। इसके अलावा विज्ञापनों को देश में सार्वजनिक शालीनता (public decency) के मानकों का भी पालन करना चाहिए। इनके अनुसार, विज्ञापनों में दूसरों के लेआउट, कॉपी, नारों, दृश्यों, प्रस्तुति, संगीत या ध्वनि प्रभावों की नकल नहीं होनी चाहिए।

विज्ञापनों को लेकर तैयार गाइडलाइंस के मसौदे (Draft Guidelines) को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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विज्ञापन के लिहाज से दैनिक भास्कर के लिए कैसा रहा पिछला महीना, जानें यहां

दैनिक भास्कर ने अगस्त में अपना रिटेल मार्केट एडवर्टाइजिंग बेस करीब 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है। ग्रुप के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में इसका करीब 70 प्रतिशत योगदान है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 04 September, 2020
Last Modified:
Friday, 04 September, 2020
Dainik Bhaskar

‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) के लिए यह काफी अच्छी खबर है। दरअसल, दैनिक भास्कर ने अगस्त में अपना रिटेल मार्केट एडवर्टाइजिंग बेस करीब 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है। ग्रुप के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में इसका करीब 70 प्रतिशत योगदान है। इस बात से स्पष्ट पता चलता है कि नॉन मेट्रो मार्केट में स्थिति सामान्य की ओर लौटने लगी है। ‘E&Y’ की हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार, नॉन मेट्रो मार्केट देश की अर्थव्यवस्था में रिकवरी की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे। दैनिक भास्कर को मिले विज्ञापनों की कैटेगरी की बात करें तो इनमें रियल एस्टेट, ज्वैलरी, ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर, एफएमसीजी और सरकार ने काफी मजबूती के साथ वापसी की है।

बताया जाता है कि अगस्त में दैनिक भास्कर में ऑटोमोबाइल कैटेगरी में नौ प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है। इस बारे में दैनिक भास्कर ग्रुप के प्रेजिडेंट (सेल्स एंड मार्केटिंग) हरीश भाटिया का कहना है, ‘राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात के मार्केट्स ने उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से रिकवरी की है। कुछ खास कैटेगरी जैसे-रियल एस्टेट और ज्वैलरी में मध्य प्रदेश और राजस्थान में हमें ग्रोथ देखने को मिली है। इन मार्केट्स में दैनिक भास्कर की मजबूत स्थिति के कारण हमें ज्यादा मार्केट शेयर हासिल करने में मदद मिल रही है।’

इस बारे में ‘डीबी कॉर्प’ (DB Corp) के चीफ कॉरपोरेट सेल्स और मार्केटिंग ऑफिसर सत्यजीत सेन गुप्ता का कहना है, ‘त्योहारी सीजन नजदीक होने और सरकार द्वारा अनलॉक-4 की घोषणा के कारण हमें पूरा विश्वास है कि कंपनियां अप्रैल, मई और जून में खोई हुई सेल्स को वापस पटरी पर लाने के लिए बाहर आएंगी और इसके लिए विज्ञापन बजट भी बढ़ाया जाएगा।’

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अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी विज्ञापनों की मॉनीटरिंग करेगी ASCI, इस संस्था से मिलाया हाथ

इस पार्टनरशिप के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर संदिग्ध व भ्रामक विज्ञापनों की मॉनीटरिंग की जाएगी।    

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2020
ASCI

'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने राष्ट्रीय विज्ञापन निगरानी सेवा (NAMS) के तहत की जा रही प्रिंट और टेलिविजन मीडिया पर विज्ञापनों की मॉनीटरिंग के साथ इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी शामिल करने के लिए 'टैम मीडिया रिसर्च' (TAM Media Research) के साथ पार्टनरशिप की है। 

इस पार्टनरशिप के तहत 'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंनडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' डिजिटल मीडिया पर फूड और बेवरेज, हेल्थकेयर और एजुकेशन सेक्टर्स से जुड़े विज्ञापनों की जांच करेगी। बताया जाता है कि पिछले साल 'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंचडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' ने इन तीनों सेक्टर्स से जुड़ी सबसे ज्यादा शिकायतों पर कार्रवाई की थी।

इस समय मीडिया पर किए जाने वाले विज्ञापन खर्च में डिजिटल एडवर्टाइजिंग करीब 30 प्रतिशत है और यह तेजी से बढ़ रही है। इस पार्टनरशिप के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर संदिग्ध व भ्रामक विज्ञापनों की मॉनीटरिंग की जाएगी। 

इस बारे में ‘ASCI’ के चेयरमैन रोहित गुप्ता का कहना है, ‘हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो तेजी के साथ दिनोंदिन और ज्यादा डिजिटल होती जा रही है। ऐसे में तमाम मार्केटिंग भी इस तरह के प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्ट हो रही है। एक सेल्फ रेगुलेटरी बॉडी के तहत हमने ऑफलाइन के अलावा ऑनलाइन की मॉनीटरिंग के लिए अपना दायरा बढ़ाया है। मेरा मानना के है कि दुनिया में ‘ASCI’ ही एकमात्र ऐसी स्व: नियामक संस्था (self-regulatory organisation) है, जो विज्ञापनों की इतनी व्यापक मॉनीटरिंग करती है। हमें टैम से बेहतर पार्टनर नहीं मिल सकता, इसकी प्रतिष्ठा और व्यापक अनुभव हमें विज्ञापन में विश्वास बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के अपने मिशन को हासिल करने में मदद करेगा कि हमारे नैतिक मूल्यों का पालन किया जाए।’

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IPL 2020: विज्ञापनों को लेकर स्टार इंडिया ने कुछ यूं ‘कसी कमर’

माना जा रहा है कि इसके बाद भी ब्रैंड्स आईपीएल के लिए विज्ञापन पर खूब खर्च करेंगे और यह लीग एक बार फिर मार्केट में गति लेकर आएगी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 20 August, 2020
Last Modified:
Thursday, 20 August, 2020
Star India

इस साल के सबसे बड़े आयोजन को भुनाने के लिए ‘स्टार इंडिया’ (Star India) पूरी तरह से तैयार है। पहली तिमाही खराब रहने के बाद अब स्टार इंडिया पिछले सत्र के मुकाबले ‘इंडियन प्रीमियर लीग’ (IPL) की विज्ञापन दरों में 20 से 20 प्रतिशत बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, साल 13वें आईपीएल के लिए विज्ञापन दरें 12लाख रुपये प्रति सेकेंड से लेकर 12.5 लाख रुपये प्रति सेकेंड रह सकती हैं।

कोविड-19 से पहले की तुलना में टीवी का उपभोग (TV consumption) 15 प्रतिशत बढ़ा है (source: BARC) और लाइव स्पोर्ट्स को दर्शकों ने काफी मिस किया है। इसके अलावा, आईपीएल के इस सीजन में मैच पहले यानी शाम साढ़े सात बजे शुरू होंगे, जिसके कारण इसके दर्शकों की संख्या 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाएगी।

माना जा रहा है कि इस बार यह सीरीज व्युअरशिप के नए रिकॉर्ड बनाएगी, जिसकी वजह से विभिन्न सेक्टर्स से जुड़े एडवर्टाइजर्स इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में सुस्त अर्थव्यवस्था के बावजूद ब्रॉडकास्टर्स को लग रहा है कि वे ऐड स्लॉट की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। यहां तक कि बढ़ी हुई कीमतों पर भी ब्रैंड्स आईपीएल की विज्ञापन इंवेंट्री पर बड़ा दांव लगा रहे हैं।

‘आईपीजी मीडियाब्रैंड्स इंडिया’ (IPG Mediabrands India) के सीईओ शशि सिन्हा के अनुसार, ‘इस साल कोविड के बाद कंपनियां निश्चित रूप से रिकवरी की ओर देख रही हैं। फेस्टिव सीजन के साथ इस बार आईपीएल भी शुरू हो रहा है। टाइटल स्पॉन्सरशिप से वीवो (Vivo) के हटने के बाद हमने देखा कि तीन बड़े बोलीदाता आगे आए और ब्रैंड्स इस लीग में काफी रुचि दिखा रहे हैं। आईपीएल की लोकप्रियता को देखते हुए उम्मीद है कि यह एडवर्टाइजर्स को आकर्षित करेगी। कुल मिलाकर आईपीएल इस समय बहुत जरूरी पुनर्त्थान का संकेत है।’

सिन्हा का यह भी कहना है, ‘विज्ञापन देने वाले ब्रैंड्स की कैटेगरीज की बात करें तो इनमें मुख्य: ई-कॉमर्स प्लेयर्स, एजुकेशन ऑटो कंपनियां और यहां तक कि बेवरेज कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं, हालांकि उनके लिए यह पीक सीजन नहीं है।’

व्युअरशिप की बात करें तो आईपीएल एक तरह से फैमिली स्पोर्ट्स बन गया है और लीग के 12वें एडिशन को 613 मिलियन व्युअर्स मिले थे (consolidated + PPL + surround)। यही नहीं, यह लीग से ब्रैंड्स को विभिन्न भाषाओं के दर्शकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिलती है। स्टार इंडिया के सूत्रों के अनुसार, आईपीएल के 13वें सीजन के ब्रॉडकास्टर प्रादेशिक भाषाओं में अपना फोकस बनाए जारी रखेगा।  

विशेषज्ञों का अनुमान है कि हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त स्टार स्पोर्ट्स को चार अन्य भाषाओं (तमिल, तेलुगू, बांग्ला और कन्नड़) में व्युअरशिप मिलेगी। इस बारे में वरिष्ठ मीडिया विशेषज्ञ अनीता नैय्यर का कहना है कि वर्तमान में चल रही महामारी की स्थिति के बावजूद दो प्रमुख फैक्टर्स हैं जो चैनल्स को ज्यादा चार्ज करने की अनुमति देंगे।

अनीता नैय्यर के अनुसार, ‘पहली बात तो यह है कि आईपीएल का आयोजन फेस्टिव सीजन के दौरान होगा और कई ब्रैंड्स फेस्टिव एडवर्टाइजिंग के लिए अपने बजट को बढ़ाएंगे। दूसरी बात ये है कि वर्तमान में ऑडियंस क्रिकेट को देखना चाहते हैं। इस साल का पहला बड़ा क्रिकेट आयोजन होने के कारण आईपीएल को सबसे ज्यादा व्युअरशिप मिलनी चाहिए, ऐसे में यह ब्रैंड्स के लिए अच्छा मौका होगा।’

पब्लिशेस ग्रुप के स्वामित्व वाली मीडिया एजेंसी ‘जेनिथ’ (Zenith) के चीफ क्लाइंट ऑफिसर अजीत गुरनानी का कहना है, ‘इस समय तमाम लोग घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) कर रहे हैं। ऐसे में कुछ निश्चित कैटगेरीज की मांग बढ़ रही है और क्रिकेट व आईपीएल इसकी रफ्तार को और गति देंगे। इसके अलावा फिलहाल आईपीएल के कॉम्प्टीशन में कोई नहीं है। इन सबके कारण व्युअरशिप बढ़ना निश्चित है। इससे मार्केट में फिर उछाल आने की उम्मीद है।’

चार घंटे के इस मैच में ब्रैंड्स न सिर्फ ब्रेक्स के दौरान विज्ञापन देंगे, बल्कि मैच के दौरान विकेट गिरने या चौका-छक्का लगने की स्थिति में भी विज्ञापन देंगे। सूत्रों के अनुसार, ऑनलाइन शॉपिंग, होम डेकोर, मोबाइल हैंडसेट, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी, ऑटो जैसी कैटेगरीज में लोग खर्च करेंगे इससे ऐड इन्वेंट्री बढ़ेगी। इसके अलावा, ऐसे तमाम एडवर्टाइजर्स जो पिछले सीजन में अपने निवेश पर अच्छा रिटर्न देख चुके हैं, वे भी विज्ञापन दरों के बढ़ने के बावजूद इस अवसर का फिर फायदा उठाना चाह रहे हैं।

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