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राष्ट्र में आजकल राष्ट्रवाद की जंग है, राष्ट्र गया 'तेल' लेने असली राष्ट्रवादी हम हैं

Published At: Sunday, 10 March, 2019 Last Modified: Sunday, 10 March, 2019

प्रमिला दीक्षित

हिंदुस्तान में राष्ट्रवाद उबाल मार रहा है और ‘देश के लिए’ लोग एक दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ रहे। रिपब्लिक भारत लॉन्च ही हुआ तो-राष्ट्र के नाम!, एक और नया चैनल आ रहा है 'भारतवर्ष' के नाम जैसे बाक़ी सब, अब तक चीन की जनता को समर्पित थे। खैर ये टैगलाइन मौक़े की नज़ाकत को भांपते हुए दी गई होगी।

रिपब्लिक भारत टीआरपी में हफ्ते दर हफ्ते छलांग लगाकर सीधा ‘आजतक; को निशाना बनाना चाह रहा है लेकिन बात जब राष्ट्र की है तो ‘ज़ी न्यूज़’ को थोड़ी चुभ गई। अब ‘ज़ी न्यूज़’ राष्ट्रवाद की परिभाषा का प्रोमो लेकर उतरा है। मज़े की बात ये कि राष्ट्रवाद की परिभाषा बिगाड़ने का श्रेय ही लोग ‘ज़ी न्यूज़’ को देते हैं।

राष्ट्र में राष्ट्र के बाद राम मंदिर ही वो मुद्दा है जो ‘ज़ी’ और ‘रिपब्लिक’ को एक सूत में पिरोता है या यूं कहें पटखनी देने का मौक़ा देता है। रिपब्लिक का हर एंकर और रिपोर्टर देश के लिए इतने उत्साह से लबरेज़ है कि मंदिर मुद्दे पर अयोध्या में मौजूद रिपोर्टर ने संतों से बस लिखित में हस्ताक्षर नहीं लिए, मुंहज़बानी दस दफ़ा ताकीद कर ली। पक्का? अगर मस्जिदबनी तो आप आत्मदाह करेंगे? 

‘ज़ी’ ने कहा हम तो कई दफ़ा ‘आपसी बातचीत से बातचीत बने’ इस पर चर्चा करते आए हैं, सुप्रीम कोर्ट तो आज उस मुकाम पर पहुंचा है। हां, रिपोर्टर का ज्ञान मंदिर मसले पर ‘ज़ी’ को ‘रिपब्लिक; से आगे ले गया क्यूंकि विशाल पांडेय इतने  लंबे वक्त से इस मसले को कवर करते आए हैं कि हर पेंच से भी वाक़िक हैं और मामले से जुड़े हर व्यक्ति से भी। रिपब्लिक की अतिउत्साही एंकर की आवाज़ ने महिला दिवस पर महिला को सुनने का धीरज छीन लिया।

रिपब्लिक सीधे कह रहा है कि ‘तक वाले चैनल’ जल्द पीछे रह जाएंगे, लेकिन ‘ज़ी न्यूज़’ को उसका राष्ट्रवादी ताज छिनता दिख रहा है। जब राष्ट्र के नाम पर रिपब्लिक भारत और ज़ी न्यूज़, ‘मेरा राष्ट्रवाद तेरे राष्ट्रवाद से गाढ़ा कैसे?’ किए पड़े हैं, देश के नंबर वन चैनल ‘आजतक’ ने फिर राम मंदिर पर सुनवाई के मसले पर सुबह रोहित सरदाना को आगे कर दिया।  सुप्रीम कोर्ट  में संजय शर्मा मामले और अपने पूरे ज्ञान के साथ मौजूद रहे। ऐसा लगता है राम मंदिर मसले पर  रोहित सरदाना की छठी इन्द्री भी काम करना शुरू कर देती है। इसलिए जब जब राम मंदिर की सुनवाई, ना सुनवाई,अगुवाई, पिछवाई की ख़बर आएगी दर्शक उन्हें उसके इर्द-गिर्द ही पाएंगे।

चैनल टीआरपी के लिए ये कर रहे हैं, वो कर रहे हैं, सब कर रहे हैं। ये तो अब आप हर ज़ुबान पर पाएंगे, लेकिन नज़रेंताक फिर भी न्यूज़ चैनल ही रही होंगी। इस हफ्ते की टीआरपी में साफ हो गया, हर ख़बरिया चैनल तो ख़बर दिखाने का काम कर रहा है, लेकिन दर्शक लगता है ‘आजतक’ की टीआरपी के लिए काम कर रहे हैं।

अभिनंदन का वापसी पर आजतक की टीआरपी ने ना सिर्फ न्यूज़ चैनलों में बाज़ी मारी बल्कि मनोरंजन चैनलों से भी कहीं आगे  निकल गया। ये अच्छी ख़बर इस लिहाज से भी है कि आमतौर पर पुरूषों को बड़ा पॉलिटिक्स विशेषज्ञ माना जाता हैं और औरतों को सास बहू और साज़िश की टारगेट ऑडियंस। लेकिन जब देश पर संकट था और हमारा एक कमांडर दुश्मन की ग़िरफ़्त में, तो हर निग़ाह-चाहे वो आदमी हो या औरत, न्यूज चैनलों पर टिकी थी अभिनंदन के लिए!

टीआरपी की लड़ाई तो हर हफ्ते ऊपर नीचे होती रहेगी, पर असली ‘राष्ट्रवादी कौन’ जंग जारी है !

(ये लेखिका के निजी विचार है और उनकी पिक्चर भी राष्ट्रवादी ही है :))



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