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उत्तराखंड सरकार के मीडिया सलाहाकार बोले, हार में जीत का सबक एक ही है कि....

Published At: Monday, 17 December, 2018 Last Modified: Monday, 17 December, 2018

रमेश भट्ट

मीडिया सलाहाकार, उत्तराखंड सरकार

लोकतंत्र में हार जीत लगी रहती है। किसी को न इसमें अत्यधिक खुशी होनी चाहिए ना मातम का माहौल। सच्चाई यह है कि परिवर्तन अवश्यसंभावी है। वो एक गतिमान प्रक्रिया है। मैं मानता हूं कृष्ण ने गीता में उपदेश दिया, जो हुआ वो अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह भी अच्छा हो रहा है, और जो होगा वह भी अच्छा  होगा। संसार में इससे बड़ा आदर्श वाक्य कोई नहीं।

इसको साबित करने का एक उदाहरण आपको देता हूं। 2003 में बीजेपी ने देश के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में जबरदस्त जीत दर्ज की। यहीं से पार्टी नें 2004 में देश में शाईनिंग इंडिया और फील गुड फैक्टर का ताना बाना बुना। अटली जी की सरकार में कई ऐतिहासिक काम भी हुए। खासकर सर्व शिक्षा अभियान, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना जैसे बड़े सामाजिक कार्यक्रम लागू किए गए। इससे पहले पोखरण में परमाणु विस्फोट कर अटलजी अपनी अटलता का परिचय दे चुके थे। कुल मिलाकर उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर थी। 24 दलों की एक गैर कांग्रेसी गठबंधन सरकार चलाकर उन्होंने साबित कर दिया की वो सबको साथ लेकर चलना जानते हैं।

मगर 2004 के आम चुनावों में होनी को कुछ औऱ मंजूर था। कांग्रेस और बीजेपी के बीच महज 7 सीटों का फर्क था। उसके बाद कांग्रेस ने 10 साल राज किया। जब लाभ के पद को लेकर सोनिया गांधी ने लोकसभा से इस्तीफा दिया, तब टेलिविजन में उनके प्रति दीवानगी देखकर लग रहा था कि क्या कोई इनको कभी हरा पाएगा। मगर कौन जानता था कि मुंबई आतंकी हमले के बावजूद 2009 में कांग्रेस 2004 से भी बेहतर प्रदर्शन करेगी। कौन जानता था कि वही कांग्रेस 2014 में महज 45 सीटों पर सिमट जाएगी।

कौन जानता था गुजरात से निकलकर नरेन्द्र मोदी अपने दम पर भाजपा को सत्ता में लेकर आएंगे। एक बात आईने की तरह साफ है कि अगर आज की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कोई कोई विकल्प नहीं है। लोकप्रियता के मापदंड में उनके आगे कोई नहीं टिकता। वो आज भी भारतीयों की पहली पसंद है। उन पर कोई दाग नहीं है। मेहनत की पराकाष्ठा का वो एक उदाहरण है। साथ ही संगठन में उनके पास अमित शाह हैं जो राजनीति के हर हुनर में पारंगत है।

वहीं कांग्रेस और राहुल गांधी को यह साबित करने में समय लगेगा। मगर उनको कमतर आंकना या मखौल उड़ाना समझदारी नहीं होगी। कुल मिलाकर 2019 के चुनाव के लिए मैदान पूरी तरह खुला है। चुनाव पूर्व गठबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाऐंगे। लेकिन कोई यह मान रहा है कि तीन राज्यों में हार के बाद मोदी 2019 में हार जाएंगे तो वो मुगालते में है। आज भी मोदी देश में पहले विकल्प हैं। मैं व्यक्तित तौर पर शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करना चाहूंगा। 15 साल के एंटी इनकंबेंसी फैक्टर के बाद भी वो जनता के दिलों पर राज करते हैं। उनकी सादगी  उनकी सबसे बड़ी ताकत है। किसानों के लिए शिवराज सरकार ने बहुत कुछ किया। यह बात वोटिंग पैटर्न से भी समझी जा सकती है। एमपी में बीजेपी को करीब 41 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस को 0.1 फीसदी कम वोट मिले हैं, इसके बावजूद सीटों के मामले में कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब रही, लेकिन मध्य प्रदेश की जनता ने कांग्रेस से ज्यादा वोट बीजेपी को दिए। 2019 लोकसभा चुनाव में शिवराज बीजेपी को लिए तुरुप का इक्क साबित हो सकते हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ से बीजेपी को कम उम्मीदें हैं। इन सबके बीच राष्ट्रीय स्तर पर खेती, किसान, रोजगार, महंगाई जैसे मुददों के हल बीजेपी के हर हाल में तलाशने होंगे। सबक एक ही है- कर्मण्ये वाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचना।

 



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