Share this Post:
Font Size   16

‘पप्पू’ कहे जाने के सवाल पर राहुल के लाजवाब बोल

Published At: Sunday, 04 November, 2018 Last Modified: Sunday, 04 November, 2018

ब्रजेश राजपूत

एबीपी न्यूज

एक अकेले राहुल और हम नब्बे पत्रकार...

एक पत्रकार के तौर पर नेताओं से मिलना-जुलना और उनकी राजनीति को समझना हमेशा अच्छा लगता है। ऐसे में जब कहा गया कि इंदौर में राहुल गांधी पत्रकारों से मिलेंगे तो इंदौर जाने की ललक बढ़ गई थी। इंदौर के रेडिसन ब्लू के बड़े हॉल में करीब नौ बड़ी टेबल लगाकर राहुल से पत्रकारों की चर्चा के इंतजाम किए गए थे। हर टेबल पर करीब आठ से दस पत्रकार थे।

राहुल तय समय से करीब आधे घंटे बाद आए। राहुल का पहनावा वही था जो आमतौर पर सभाओं में दिखता है। बेतरतीबी से पहना हुआ सादा सा सफेद कुर्ता पायजामा और नीले घिसे हुए स्पोर्टस शूज। आते ही देरी से आने के लिए क्षमा मांगी और जिस टेबल पर सीनियर पत्रकारों की भीड़ देखी, वहां जाकर बैठ गए और लगे गुफतगू करने।

जाहिर है चर्चा राजनीति की हो रही थी। वहीं बैठे किसी वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि आप सब कुछ बांटने और किसानों के कर्ज माफी की बातें कर रहे हैं, ये तरीका ठीक लगता है आपको? राहुल ने एक मिनट उनकी ओर देखा और कहा, ‘आप अपनी घड़ी देंगे क्या? ’ सवाल पूछने वाले पत्रकार ने हैरान होकर घड़ी उतारी और राहुल की तरफ बढ़ा दी,  राहुल ने घड़ी उलटी पलटी और वापस करते हुए कहा कि अच्छी घड़ी है, रख लीजिए। टेबल पर बैठे लोग भी हैरान थे कि जवाब देने की जगह राहुल ये घड़ी की बात बीच में क्यों ले आए। सबको हैरान देख राहुल ने कहा ये यही हाल है, आपका पैसा है किसानों का पैसा है और आपको ही वापस कर रहे हैं।

कुछ और हल्के फुल्के सवाल जबाव होते रहे। राहुल जो थोड़ी देर टेबल पर बैठकर छोटे सवालों के लंबे-लंबे जबाव दे रहे थे, जब उनको लगा कि बाकी के लोग अपनी टेबिल पर आने की बारी के इंतजार में बोर हो रहे हैं तो वो अचानक माइक लेकर खड़े हो गए और फिर सबकी तरफ देखकर सवालों के जवाब देने लगे। एमपी की राजनीति पर हुए प्रश्नों पर जब वो उलझ जाते तो कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को पास बुलाकर अपना माइक थमाकर जवाब देने को कहते और उनकी बातों को ध्यान से सुनते। तकरीबन नब्बे पत्रकार और अकेले राहुल मामला दिलचस्प होता जा रहा था, मगर राहुल के बेबाक बेफिक्री भरे अंदाज और हाजिरजवाबी से हॉल के लोग प्रभावित हो रहे थे। कुछ राहुल की फोटो खींच रहे थे तो कुछ वीडियो बना रहे थे।

हालांकि राहुल के सिक्योरिटी और स्टाफ के लोग मोबाइल से वीडियो बनाने को मना कर रहे थे मगर यदि किसी की बात मान गए तो फिर भला कैसे पत्रकार। तमाम मनाही के बावजूद छिपकर फोटो ओर रिकॉर्डिंग जारी थी। इसी बीच में राहुल ने उस सवाल का जवाब दे दिया जो आज सुबह अखबारों की सुर्खियां बना हुआ था।

राहुल ने शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय का नाम पनामा पेपर में होने का बयान झाबुआ की सभा में दिया था, जिसके बाद से शिवराज उबले हुए थे, मानहानि का मुकदमा करने उनके बेटे अदालत जाने वाले थे। ऐसे में राहुल ने कह दिया कि इतने सारे घोटाले बीजेपी राज्यों में होते हैं कि मैं कन्फयूज हो गया। छत्तीसगढ़ में कही जाने वाली बात मध्यप्रदेश में कह दी।

बस फिर क्या था, खबर तो मिल गई थी। हम टीवी के पत्रकार जो एक ही टेबिल पर बिठाए गए थे असमंजस में थे कि इस खबर को कैसे ब्रेक करें करें या ना करें कि ये बातचीत औपचारिक है या अनौपचारिक। मगर खबर तो बड़ी थी। मैंने एक लाइन टाइप कर दफ्तर के वॉट्सऐप ग्रुप पर जैसे ही डाली, अगले ही क्षण धड़ाधड़ फोन आने लगे। फोन पर खबर बताने की फरमाइश शुरू हो गई। उधर हम समझा रहे थे कि ये बेहद सुरक्षा वाला हॉल है, बाहर जाने नहीं देंगे ओर बाहर गए तो अंदर आना मुश्किल होगा, मगर फोनों की फरमाइश को टालना मुश्किल था।

ऐसे में फोन को कान से लगाकर सुरक्षाकर्मी से इमरजेंसी का बहाना कर दरवाजा खोल बाहर हुए और फोन पर इस बड़ी खबर को सबसे पहले ब्रेक किया। लौट कर आए तो देखा कि हमारे सारे साथियों के चेहरों पर तनाव था, क्योंकि अब उनके चैनल से भी खबर को लेकर पूछ परख शुरू हो गई थी।

और ऐसे में ही हो गया वो सवाल जो हमें लंबे समय तक याद रहेगा। इंदौर के एक पत्रकार ने कहा कि राहुल जी आपकी बातें सुन अच्छा लग रहा है, आप बहुत समझदारी वाली बातें कह रहे हैं मगर फिर भी आपको पप्पू कहा जाता है कैसा लगता है ये संबोधन। उफ, राहुल के आसपास खड़े एमपी कांग्रेस के नेता भी अवाक रह गए इस सवाल को सुनकर। माइक रखे राहुल उन पत्रकार के करीब गए। थोड़ा संभले, मुस्कुराए ओर कहा कि भैया मैं तो शिवभक्त हूं और क्या क्या नाम हैं शिवजी के जरा बताइए। जबाव आया भोलेनाथ। राहुल ने कहा भोलेनाथ क्यों इसलिए कि वो भले हैं भोले हैं। तो मैं भी भला हूं मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि कोई मेरे बारे में क्या कह रहा है। मैं तो ये समझने की कोशिश करता हूं कि कोई मुझसे इतनी नफरत क्यों कर रहा है। नफरत नहीं.,प्रेम की राजनीति मुझे करनी है और मैं किए जाउंगा, जिसको जो बोलना हो बोले।

बस फिर क्या था, इस जवाब के बाद राहुल के मीडिया मैनेजरों और नेताओं की जान मे जान आई, मगर हम सब भी ये राहुल के ये जवाब सुनकर मुरीद हो गए राहुल ओर पत्रकार महोदय दोनों के। कठिन सवाल पूछना पत्रकार का हक है और उसके बेहतर जवाब देना नेता के। इस बीच में उनको अपनी किताब ऑफ द स्क्रीन भेंट कर चुका था। किताब का शीर्षक पढ़कर राहुल ने कहा कि आप टीवी पत्रकार बहुत मेहनत करते हो, मैं जानता हूं कि आप मुझसे मिलेंगे तो कुछ और बातें बताउंगा टीवी रिपोर्टिंग की मुश्किलों की और ये कहकर राहुल ने अपना कठोर कसरती हाथ मेरे कंधे पर रख दिया।



पोल

‘नेटफ्लिक्स’ और ‘हॉटस्टार’ जैसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने की मांग को लेकर क्या है आपका मानना?

सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए

इन पर अश्लील कंटेट प्रसारित करने के आरोप सही हैं

आज के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करना बहुत मुश्किल है

Copyright © 2018 samachar4media.com