Share this Post:
Font Size   16

राधाकृष्णन नायर की दी हुई ये सीख मैं कभी नहीं भूलूंगा: संकेत उपाध्याय

Published At: Tuesday, 27 November, 2018 Last Modified: Tuesday, 27 November, 2018

संकेत उपाध्याय

मैनेजिंग एडिटर,

इंडिया अहेड न्यूज (India Ahead News) ।।

ब्लेस्ड आर द मीक, फ़ॉर दे शैल इन्हेरिट दी अर्थ - मैथ्यूज़ 5:5

मैं अपने पूर्व प्रधान संपादक का इससे अच्छा वर्णन नही सोच सकता हूं। मैंने उनके साथ सिर्फ 2 साल ही काम किया, लेकिन मेरा उनसे नाता सन 2005 से है। सन 2005 में राजदीप ने आईबीएन (IBN) लॉन्च करने की खबर सुनाई। मेरी तरह टीवी की अपनी पहली नौकरी के अभिलाषी सैकड़ों लोगों ने जॉब के लिए अप्लाई किया।

आंखों में राजदीप से मिलने और कार्य करने का स्वप्न था। लेकिन विडियोकॉन टावर के उस ‘नेटवर्क18’ के ऑफिस गेट पर मुझे रिसीव करने एक दुबला-पतला दक्षिण भारतीय आदमी आया। उन्होंने पानी चाय पूछा, आने में कोई दिक्कत हुई या नहीं पूछा, मयूर विहार से झंडेवालान बस कौन सी ली ये पूछा, एक कमरे में बिठा के मुझसे एक पेपर लिखवाया और बाइज्जत गेट पर सी-ऑफ करने भी आया।

मैं आया था राजदीप के लिए, यादें राधा सर की लेकर गया। मुझे तो नौकरी नही मिली, पर मेरी पत्नी पलकी शर्मा उपाध्याय को ‘नेटवर्क18’ में काम करने का सौभाग्य मिला। राधा और राजदीप 2005 से 2016 तक उनके रिपोर्टिंग मैनेजर्स रहे। इस दौरान राधा सिर्फ मेरी पत्नी के सीनियर नही थे, वे हर सोशल गैदरिंग के स्टार थे। हमेशा मेरे करियर ग्रोथ में रुचि दिखाते थे। हम लोगों को पर्सनल फ्रंट पर कोई दिक्कत तो नहीं- उनका ये महज़ पूछ लेना मेरे लिए बहुत मायने रखता था।

मुझे ये यकीन हो गया था कि मेरी और पलकी कि पारिवारिक जरूरतों और मजबूरियों को मेरे रिपोर्टिंग मैनेजर समझें न समझें, राधा सर जरूर समझेंगे। इसलिए, उनकी एब्सेंस में भी वो हमेशा मेरे लिए राधा नहीं, राधासर थे।

2016 में मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला। वो तब मेरे रिपोर्टिंग मैनेजर बन गए थे। उनकी स्टोरी स्लेक्शन यूनीक था। उन्होंने मेरे अंदर अपनी एक आदत डाल दी थी। सोचने पे मजबूर कर दिया था। आप कश्मीर की बिगड़ती हालात से कम, और दिल्ली के प्रदूषण से पहले प्रभावित होंगे। किसी नेता का बेतुका बयान नहीं, स्कूल की बढ़ती फीस लोगों को ज्यादा परेशान करेगी। हिन्दू-मुस्लिम में बंटी राजनीति नही, 10 साल से अटका हुआ बिल्डर से मकान मेरी ज्यादा बड़ी प्राथमिकता है। ये एक सीख है जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा। खास तौर से आज के इस पत्रकारिता के युग में।

राधा सर ने आम आदमी की पत्रकारिता का महत्व हमेशा आगे रखा था। क्योंकि वो एक आम आदमी की तरह सोचते थे, आम आदमी की तरह रहते थे, और अपनी ज़िंदा दिली से हर आम आदमी का दिल जीत लेते थे। मुझे हमेशा ऐसे लोग पसंद आते हैं जो आपके जीवन में आपसे एक सीधा कनेक्ट रखें। सरल स्वभाव के राधा सर जैसे लोगों के लिए ही मैंने शुरुआत में मैथ्यूस 5:5 का ज़िक्र किया।

आप दिलों में जिंदा रहेंगे राधा सर... 



पोल

मीडिया में सर्टिफिकेशन अथॉरिटी को लेकर क्या है आपका मानना?

इस कदम के बाद गुणवत्ता में निश्चित रूप से सुधार आएगा

मीडिया अलग तरह का प्रोफेशन है, इसकी जरूरत नहीं है

Copyright © 2018 samachar4media.com