Share this Post:
Font Size   16

ये हिंदी का विकास नहीं तो क्या है...

Published At: Friday, 14 September, 2018 Last Modified: Friday, 14 September, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

हिंदी दिवस पर हम समीक्षा करते हैं कि हिंदी का कितना विकास हुआ। हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिले करीब 68 साल हो गए। इतने सालों से इसके विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वास्तविकता क्या है। क्या ये सिर्फ गोष्ठी-संगोष्ठी तक तो सिमट कर नहीं रह गई है। ये सवाल जब वरिष्ठ पत्रकार व व्यंग्यकार आलोक पुराणिक से किया गया तो उनका जवाब था कि ये तो आपका देखने का नजरिया है। हिंदी का विकास बिल्कुल हुआ है।

आलोक पुराणिक का मानना है कि हिंदी का लगातार विस्तार हुआ है। हिंदी की पहुंच अब देश के अलावा विदेशों तक हो गई है। विश्व के कई देशों में हिंदी की पढ़ाई शुरू हो गई है। चीन और दक्षिण कोरिया के विश्वविद्यालयों में भी हिंदी की पढ़ाई होती है। देश में हिंदी के अखबारों की संख्या और अंक लगातार बढ़ रहे हैं। हिंदी अखबारों के पाठकों की संख्या बढ़ रही है। हिंदी भाषा में कई चैनलों का प्रसारण हो रहा है। आज देश में विदेशी कंपनियां आ रही हैं। वे अपने कर्मचारियों को हिंदी सिखा रही है। विदेशी कंपनियों में भी कर्मचारी हिंदी में बोल रहे हैं। हिंदी का बाजार बड़ा है इसलिए गूगल और माइक्रोसाफ्ट जैसी कंपनियां भी हिंदी में अपने काम का विस्तार करने जा रही है। ये हिंदी का विकास नहीं तो क्या है।

अगर हिंदी का विकास हो रहा है तो आज हम क्यों चाहते हैं कि हमारा बच्चा अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में ही पढ़े। जब आलोक पुराणिक जी से ये पूछा गया तो उनका कहना था कि अंग्रेजी ग्लोबल भाषा है। वैश्विकरण के बाद पूरी दुनिया एक हो गई है। ऐसे में हर व्यक्ति चाहता है कि उसका बच्चा हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भी सीखे ताकि उसका करियर ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित और व्यापक हो। यही कारण है कि हम अंग्रेजी पर जोर देते हैं। हिंदी के बारे में लोगों का देखने का अपना-अपना नजरिया है।


Tags media


पोल

‘नेटफ्लिक्स’ और ‘हॉटस्टार’ जैसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने की मांग को लेकर क्या है आपका मानना?

सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए

इन पर अश्लील कंटेट प्रसारित करने के आरोप सही हैं

आज के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करना बहुत मुश्किल है

Copyright © 2018 samachar4media.com