Share this Post:
Font Size   16

‘जिन पत्रकारों के लिए कोई आगे नहीं आता, उनके लिए...’

Published At: Friday, 18 May, 2018 Last Modified: Friday, 18 May, 2018

यहां गुजरात का निकटवर्ती शहर वडोदरा है और वहां की पारुल यूनिवर्सिटी से संबद्ध मेडिकल कॉलेज के डीन, डॉक्टर्स, इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े प्रतिनिधि आए। उन्होंने आसपास के राज्यों के पत्रकारों के लिए इलाज और पढ़ाई के लिए निशुल्क और भारी डिस्काउंट वाली सुविधाओं का ऐलान किया। आम तौर पर एक छोटे शहर के पत्रकार की हालत लाख- पचास हज़ार के टेस्ट में पतली हो जाती है। यूनिवर्सिटी ने यह बोझ अपने सर ले लिया।अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए ये बताया वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने। उनकी पूरी पोस्ट आप यहां पढ़ सकते हैं-

जिनके लिए कोई आगे नहीं आता

एक मुद्दत हुई पत्रकारों के हित में किसी संगठन को लड़ाई छेड़े हुए। अख़बारों में पालेकर, भाचावत, मणीसाना आदि आयोगों की सिफारिशों को लागू कराने के लिए हमलोगों ने कई आंदोलन किए। पत्रकारों को नियुक्तिपत्र, प्रॉविडेंट फंड, ग्रेच्युटी, चिकित्सा आदि सुविधाओं के लिए भी हड़तालें कीं। अभिव्यक्ति की आज़ादी के मसले पर भी संघर्ष किए। राष्ट्रीय और प्रादेशिक संगठनों ने भरपूर योगदान दिया। मगर अनेक वर्षों से लगता है कि राष्ट्रीय संगठन जैसे सुसुप्तावस्था में हैं।

चंद रोज़ पहले मुझे धारणा बदलनी पड़ी। भारतीय पत्रकार संघ के सालाना जलसे में बतौर मुख्य अतिथि शिरक़त करने का अवसर मिला। जलसा गुजरात - मध्य प्रदेश की सीमा से सटे ठेठ आदिवासी ज़िले झाबुआ में था। नए किस्म के संगठन से परिचित हुआ। इस राष्ट्रीय संगठन का मुख्यालय झाबुआ में ही है और क़रीब बीस राज्यों में इसकी सक्रिय शाखाएं हैं। इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रम सेन खुद भी एक आदिवासी कस्बे आलीराजपुर में रहते हैं। जुनूनी विक्रम कोई 25000 से ज़्यादा पत्रकारों से जुड़े हैं। इन पत्रकारों के 56 वॉट्सऐप समूह हैं। इनके ज़रिए पत्रकारों के इलाज़, उनकी सामाजिक समस्याओं, पत्रकारों के बच्चों की पढ़ाई, उनके लिए स्कॉलरशिप और उनके सुख दुख का पूरा ख़्याल यह संगठन रखता है।

सम्मेलन में महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों के दो हज़ार से ज़्यादा पत्रकार मौजूद थे। यहां गुजरात का निकटवर्ती शहर वडोदरा है और वहां की पारुल यूनिवर्सिटी से संबद्ध मेडिकल कॉलेज के डीन, डॉक्टर्स, इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े प्रतिनिधि आए। उन्होंने आसपास के राज्यों के पत्रकारों के लिए इलाज और पढ़ाई के लिए निशुल्क और भारी डिस्काउंट वाली सुविधाओं का ऐलान किया। आम तौर पर एक छोटे शहर के पत्रकार की हालत लाख- पचास हज़ार के टेस्ट में पतली हो जाती है।

यूनिवर्सिटी ने यह बोझ अपने सर ले लिया। विक्रम सेन के मुताबिक़ अन्य राज्यों में भी शिक्षण और चिकित्सा सुविधाओं के लिए ऐसे ही अनुबन्ध हो रहे हैं। मैं आंचलिक पत्रकारों के लिए काम कर रहे इस विराट संगठन के लिए श्रद्धा से नतमस्तक था। विक्रम सेन को सलाम !

ज़ाहिर है यह परंपरा सी बन गई है तो इस मौके पर माणिक चंद्र वाजपेयी राष्ट्रीय अलंकरण मुझे दिया गया। इस मौके पर अपने सैकड़ों पुराने साथियों से भी भेंट हुई। वर्षों बाद पुराने साथी वरिष्ठ पत्रकार भाई विजय दास, प्रकाश हिन्दुस्तानी और कमल दीक्षित जी से पेट भर बातें कीं। छोटे भाई जैसे पुष्पेंद्र वैद्य को मेरे हाथों श्रेष्ठ पत्रकारिता का सम्मान भावविह्वल करने वाला पल था। एक और नए साथी सुरेश पटेल से आत्मीय रिश्ता बना। कुछ चित्र उसी अवसर के हैं।






(साभार: फेसबुक वाल से)



समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी रायसुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं। 

 



पोल

‘नेटफ्लिक्स’ और ‘हॉटस्टार’ जैसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने की मांग को लेकर क्या है आपका मानना?

सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए

इन पर अश्लील कंटेट प्रसारित करने के आरोप सही हैं

आज के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करना बहुत मुश्किल है

Copyright © 2018 samachar4media.com