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आसाराम ‘इंडिया न्यूज’ के लिए एक महायुद्द रहा है, बोले मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत

Published At: Thursday, 26 April, 2018 Last Modified: Thursday, 26 April, 2018

आसाराम इंडिया न्यूज के लिए एक महायुद्द रहा है। धौंसधमकीडर के बीच लड़ते रहने के जज्बे वाली पत्रकारिता रही है।’ अपने फेसबुक वाल पर ये पोस्ट लिखी वरिष्ठ टीवी पत्रकार व इंडिया न्यूज के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत का। उनकी ये पूरी पोस्ट आप यहां पढ़ सकते हैं-

30 अगस्त 2013रात करीब 11.50 बज रहे थे। ऑफिस से घर लौट रहा था और कार सोसाइटी के अंदर ले ही जा रहा था कि मोबाइल फोन बजा। दफ्तर से फोन था। मुझे लग भी रहा था कि फोन आ सकता है। हां बोलो- मैंने कहा। सरआसाराम को इंदौर पुलिस ने उठा लिया- उधर से आवाज आई। मैंने गाड़ी बैक की और सीधा दफ्तर लौटा। शाम से आसाराम के इंदौर आश्रम पर उसके हजारों समर्थकों और पुलिस के बीच जोर आजमाइश चल रही थी। आश्रम में आसाराम है या नहींइसपर भी सस्पेंस बना हुआ था। रात में नारायण साईं सामने आया और कहा कि बापू जी अंदर ही हैंलेकिन उनकी तबीयत ठीक नहीं है।

थोड़ी देर बाद पता चला कि आसारामसमर्थकों के बीच प्रवचन कर रहा है। पुलिस बाहर कवायद कर रही थी। मीडिया को दूर रखने की कोशिश आश्रम की तरफ से बार-बार की जा रही थी। मैं जब तक दफ्तर पहुंचाये साफ हो चुका था कि आसाराम को राजस्थान पुलिस जोधपुर ले जाने की तैयारी में है और जो भी पहली फ्लाइट होगी उसे पकड़ेगी। मैं इंदौर और जोधपुर दोनों जगहों के रिपोर्टर के संपर्क में था। पता चला कि आसाराम को जिस फ्लाइट से ले जाया जा रहा हैवह इंदौर से दिल्ली आएगी और फिर यहां से जोधपुर जाएगी।

मैंने असाइनमेंट से कहा किसी भी कीमत पर रिपोर्टर उस फ्लाइट में होना चाहिए। तय हुआ कि रजत राकेश टंडन को भेजा जाए। मैंने रजत से फोन पर कहा- बस एक लाइन सुन लोइस फ्लाइट पर तुम्हें हर कीमत पर सवार होना है। सभी न्यूज चैनलों की तरफ से ऐसी कोशिश हो रही होगीइसका अंदाजा था। रात करीब साढ़े तीन बजे मैं घर लौटा। नींद आ नहीं रही थीलिहाजा कभी असाइमेंट तो कभी आउटपुट को फोन कर जानकारी ले रहा था। सुबह असाइनमेंट पर विवेक प्रकाश थे और रजत एयरपोर्ट पर। करीब साढ़े पांच के आसपास विवेक का फोन आया- रजत कह रहा है कि उस फ्लाइट में एक ही टिकट मिल सकता हैयानी या तो रिपोर्टर या फिर कैमरामैन। मैंने कहा रिपोर्टर। रजत को कैमरे के साथ भेजो। बोलना अकेले ही मैनेज करना होगा। फ्लाइट के अंदर का आसाराम का विडियो होना चाहिए। कोशिश पूरी करेगा कि आसाराम से कुछ पूछे। रजत ने खुद लगकर किसी तरह टिकट बुक करवा लिया और टेक ऑफ से पहले विवेक को कॉल किया- निकल रहा हूं।

मुझे जैसे पता चला लगा चलो अब काम हो गया। जोधपुर उतरते ही रजत ने जब फीड भेजी और इंडिया न्यूज ने चलाना शुरू किया तो खलबली मच गई। पता चला उस विमान पर आसाराम के कई लोग भी सवार थे जो कैमरे खोलने या कुछ भी बोलने या फिर रिकॉर्ड करने से रोक रहे थे। आसाराम आखिरी रो से ठीक पहले वाली रो में बैठा था। उस फ्लाइट में रजत के अलावा एबीपी न्यूज की तरफ से उमेश कुमावत और न्यूज-24 की तरफ से प्रशांत देव -यही दो रिपोर्टर थे।

विमान के अंदर से लेकर एयरपोर्ट पर आसाराम के आसपास रजत ने अपना कैमरा रखा और बेहतरीन रिपोर्टिंग की। इधर आसाराम के समर्थकों ने देशभर में सिर पर आसमान उठा लिया था। चारों तरफ यही चर्चा थी। मैंने यह मान लिया था कि आसाराम मौजूदा वक्त की सबसे बड़ी खबर है। इंडिया न्यूज को रीलॉन्च हुए अभी 6 महीने ही हुए थे और चैनल के लिए एक बड़ी खबर के साथ अपनी पहचान खड़ा करने की जरूरत थी। मैं सबकुछ छोड़कर आसाराम को जानने-समझने में लग गया। एडिटोरियल टीम आसाराम को खंगालने और उसका हर सच निकालने में लग गई। शाहजहांपुर की पीड़ित बच्ची की भी खोज-खबर रखने लगे।

तब किसी और चैनल के लिये आसाराम महज एक खबर-सा था। हमने उसे एक अभियान के तौर पर लिया। अपनी टीम को कहा- अगर किसी आदमी के आश्रमों में हजारों बच्चे-बच्चियां रहते हैं और वे सब उसके शिकंजे में हैं तो फिर लड़ो। अगर करोड़ों लोगों की आस्था को अपने पास गिरवी रखवाकर कोई आसाराम खिलवाड़ कर रहा है तो लड़ो। अगर लोगों के दम पर सत्ता को झुकाकर कोई तथाकथित संत जमीन कब्जाने और संपत्ति हड़पने का काम कर रहा है तो लड़ो।

इंडिया न्यूज की टीम ने फिर टीवी इतिहास में वो अभियान छेड़ा जैसा पहले कभी नहीं चला। इस अभियान को फ्रंट से दीपक ने संभाला और यूं कि वे खुद कई तरह के खतरों से घिर गए। टीम के कई लोग धमकियों और मुकदमों के घेरे में आ गए। कई ऐसे गुमनाम फोन आने लगे, जिनसे चकरा देने वाले राज खुलने लगे।

आसाराम इंडिया न्यूज के लिए एक महायुद्द रहा है। धौंसधमकीडर के बीच लड़ते रहने के जज्बे वाली पत्रकारिता रही है। घटनाओं का अंतहीन सिलसिला रहा है। लिहाजा ये जारी रहेगा।

(साभार: राणा यशवंत की फेसबुक वाल से)



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