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राजेश बादल के कीबोर्ड से- हिन्दुस्तानियत का सही सन्देश देता विश्वविद्यालय

Published At: Tuesday, 26 June, 2018 Last Modified: Tuesday, 26 June, 2018

इन दिनों हिन्दुस्तान में मौलिक शोध के लिए रचनात्मक वातावरण कम नजर आता है। शौकिया शोध और अनुसंधान के लिए गुंजाइश कम नजर आती है। यूजीसी ने कॉलेज के प्राध्यापकों की पदोन्नति के लिए पीएचडी जरूरी कर दी है। इसलिए ड्यूटी की तरह शोध करने वालों की फसल कुकुरमुत्ते की तरह उग रही है। अनेक स्थानों पर शोध करने वाले हायर किए जा रहे हैं- ऐसी खबरें हैं।’ अपने एक ब्लॉग के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल का। उनका पूरा ब्लॉग आप यहां पढ़ सकते हैं-

हिन्दुस्तानियत का सही सन्देश देता विश्वविद्यालय 

उत्तरप्रदेश के रामपुर से लौटा हूं। मौलाना मोहम्मद जौहर विवि ने देश भर के छात्रों में से चुने गए छात्रों के लिए शोध फैलोशिप वितरण का समारोह किया था। मैं बतौर मुख्य अतिथि इसमें शामिल हुआ। समारोह ने मुझे संतोष की बौछारों से सराबोर कर दिया। रामपुर के बुद्धिजीवियों ने इस कार्यक्रम के बहाने अच्छी गंभीर बहस में शिरकत की। समारोह में तमिलनाडुतेलंगानागुजरातबंगाल उत्तरप्रदेशअसमत्रिपुरा और अन्य राज्यों के उत्साही नौजवानों को शोध के लिए प्रेरित किया गया।

दरअसल इन दिनों हिन्दुस्तान में मौलिक शोध के लिए रचनात्मक वातावरण कम नजर आता है। शौकिया शोध और अनुसंधान के लिए गुंजाइश कम नजर आती है। यूजीसी ने कॉलेज के प्राध्यापकों की पदोन्नति के लिए पीएचडी जरूरी कर दी है। इसलिए ड्यूटी की तरह शोध करने वालों की फसल कुकुरमुत्ते की तरह उग रही है। अनेक स्थानों पर शोध करने वाले हायर किए जा रहे हैं- ऐसी खबरें हैं। उनकी फीस दे दें तो वो आपका शोध प्रबंध तैयार कर देते हैं। ऐसे में अगर नौजवान आपसे चुने हुए विषयों पर वास्तविक रिसर्च का वादा करें तो जाहिर है अच्छा लगता है।

मैंने भी विवि प्रबंधन से उत्कृष्ट मीडिया शिक्षा पाठ्यक्रम शुरू करने का आग्रह कियाजिसे चांसलर जनाब आजम खान ने सैद्धांतिक तौर पर मान लिया। करीब पांच सौ एकड़ में फैले इस विवि में अद्भुत इमारतें हैं। एक इमारत राष्ट्रपति भवन के नक्शे पर है तो दूसरी संसद भवन जैसी तो तीसरी प्रधानमंत्री कार्यालय जैसी है। केवल पांच-छह साल में इसने अपनी राष्ट्रीय पहचान बनाई है। एक विशाल पुस्तकालय है जिसमें प्राचीन ग्रंथों की दुर्लभ पांडुलिपियां हैं। विवि की अधिकारी एकता कौशिक ने मुझे विवि के मेडिकल कॉलेज के डायलिसिस केंद्र का अवलोकन कराया। अदभुत और शानदार। श्री आजम खान का दावा है कि इससे अच्छा डायलिसिस केंद्र भारत में दूसरा नही है। यात्रा में विपिन गौर और प्रशांत कुमार की संगत ने आनंद बढ़ा दिया। चित्र विवि के इसी समारोह के हैं-







(साभार: फेसबुक वाल से)



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पोल

क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

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