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अभिसार बोले, मैं राक्षस नहीं हूं और कोई भी मौकापरस्त सियासी सोच मुझे राक्षस नहीं बना सकती...

Wednesday, 11 April, 2018

बीजेपी, इसके दो मंत्री बेशर्मी से उस मार्च में शरीक हुए जिसमें हत्यारों और बलात्कारियों की जय जयकार हुई! क्योंक्योंकि बलात्कारी हिंदू थेऔर पीड़ित एक मासूम 8 साल की मुस्लिम लड़की?’ ब्लॉग ‘शब्दांकन’ के जरिए ये कहना है कि वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिसार शर्मा का। उनका पूरा ब्लॉग आप यहां पढ़ सकते हैं-


बीजेपी का नारी सम्मान और त्रासदी!

संस्कार और नारी सम्मान को शायद ही किसी पार्टी ने इतना बड़ा मुद्दा बनाया था। मगर आचरण और कथनी का फर्क बहुत हैरतअंगेज है। जम्मू की आठ साल की आसिफा का निरंतर कई दिनों तक बलात्कार। बेहोशी की दवा देकर कई दिनों तक रेप। एक मंदिर जैसी पूजनीय जगह पर रेप। रिश्तेदारों को बुला-बुला कर उस मासूम को छलनी किया गया। मेरी गुड्डीमेरी बिटिया ना जाने किस नर्क से गुजरी तू उन आखिरी लम्हों में। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है (अगर वो है) के तू इस वक्त एक बेहतर माहौल में होगी। सुरक्षित होगी तूमेरी प्यारी गुड़िया। ये राक्षस ही तो थे जिन्होंने इसे अंजाम दिया। कलयुग के राक्षस। हमारे बीच विचरण करते हुए। और जानते होये हमारे कितना करीब थे?


मैंने ख्वाहिश की कि आसिफा एक खुशनुमा माहौल में होगीमगर जानते होवो आज भी तड़प रही है। क्योंक्योंकि पहले तो उसे छलनी किया गया और अब उसके जाने के बाद उसकी आत्मा कोउसकी याद को छलनी किया जा रहा है। आसिफा के पक्ष में आकर खड़ी है इस देश में संस्कारी बर्ताव की विरासत संभालने वाली जम्मू कश्मीर सरकार में भागीदार। बीजेपी, इसके दो मंत्री बेशर्मी से उस मार्च में शरीक हुए जिसमें हत्यारों और बलात्कारियों की जय जयकार हुई! क्योंक्योंकि बलात्कारी हिंदू थेऔर पीड़ित एक मासूम 8 साल की मुस्लिम लड़की?


क्या जानते हो तुमके कितने कम अर्से में इंसान से वहशी हो गए हो तुमतुम क्योंमुझे हम बोलना चाहिए। हम। हम देश चला रहे हैं। बहुमत हैं। है नाहिन्दुत्व और इस नारे के नाम पर तो हम कुछ भी करने को तैयार हैंअपनी आत्माअपनी ईमानदारी अपनी इंसानियत। सब कुछ! कुछ लोग तर्क ये दे रहे हैं के ये हिंदुओं का जम्मू मे गुस्सा था जो सामने उभरा है। सालों का अत्याचारजिसकी प्रतिक्रिया है!

 

बहुत बढ़िया। एक लम्हेंसिर्फ एक लम्हें के लिएअपनी हवसअपनी कायरता पर गौर करना। देखो तुम क्या बन गए हो! और ये किस सियासी सोच के संस्कार हैं। सोचो कुछ देर के लिए यही तर्क निर्भया के गैंग रेप में कोई बदतमीज देतासोचो! कोई सियासी पार्टी बलात्कारियों का धर्म या उनकी जाति देखकर साथ खड़ी होतीसोच कर भी सिहरन पैदा होती है नाऐसे ही राक्षस बनते जा रहे हैं हम!


देखो उत्तर प्रदेश में क्या हो रहा है। और देखो कैसे अब तक विधायक कुलदीप सेंगर से पुलिस ने पूछताछ तक नहीं की। इस लेख के लिखे जाने तक तो बिल्कुल भी नहीं। भेज दिया बीवी को। योगी जी को भी नहीं लगा के विधायक से जवाब तलब होना चाहिए। नहीं! वो मुस्कुरा रहा है। अदालत तक को दखल देना पड़ा। कोई जवाब है इस बात काइतना घमंडइतना हठकोई जवाबदेही नहींराजधर्म कहां है भईजानता हूं के मौजूदा बीजेपी की कमान जिनके हाथों में हैजिनके हाथों में इसका भाग्य हैराजधर्म उनकी कमजोरी रही है। एक पूर्व प्रधानमंत्री ने भी इस बात को महसूस किया था। मगर ये?


मैं चाहूंगा के मोदीजी जब उपवास में होंभावनाओं के उफनते समुद्र में आसिफा की झलक उन्हें दिखाई दे। 2022 तक उत्तर प्रदेश में  रामराज्य लाने का वादा और उसकी बिखरती नीव की चिंता भी जगह पाए। मैं उम्मीद करता हूं। मुश्किल है। मगर आसिफा के बारे में जरूर सोचें और जानें के हम इंसानियत को कितना पीछे छोड़ गए हैं।

 

मैं नहीं भुला पा रहा आसिफा को। मैं उसके हंसते हुए मासूम चेहरे को ही याद रखना चाहूंगाक्योंकि मौत के बाद उसका चेहरा मुझे अपने वहशीपन की याद दिला रहा है। मैं राक्षस नहीं हूं और कोई भी मौकापरस्त सियासी सोच मुझे राक्षस नहीं बना सकती।


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पोल

क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

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