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‘प्रधानमंत्रियों-शिक्षामंत्रियों ने राष्ट्र को नकलचियों की नौटंकी बना दिया’

Published At: Wednesday, 11 July, 2018 Last Modified: Wednesday, 11 July, 2018

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

वरिष्ठ पत्रकार ।।

विश्व गुरु को बना रहे हैं विश्व-चेला

आज दो खबरों ने मेरा ध्यान एक साथ खींचा। एक तो दक्षिण कोरिया के सहयोग से दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल फोन का कारखाना भारत में खुलना और दूसरा देश की छह शिक्षा संस्थाओं को सरकार द्वारा ‘प्रतिष्ठित’ घोषित करना ताकि वे विश्व-स्तर की बन सकें। दोनों खबरें दिल को खुश करती हैं लेकिन उनके अंदर जरा झांककर देखें तो मन खिन्न होने लगता है।

दोनों खबरों की एक-दूसरे से गहरा संबंध है। दोनों शिक्षा से जुड़ी हैं। पांच करोड़ लोगों का यह छोटा-सा देश सवा सौ करोड़ के भारत को मोबाइल बनाना सिखाएगाआप डूब क्यों नहीं मरतेआपको शर्म क्यों नहीं आती? 70 साल आप भाड़ झोंकते रहे। नकल करते रहे। कभी कार की नकल कर लीकभी फोन कीकभी रेल कीकभी जहाज कीकभी रेडियो कीकभी टीवी कीकभी इसकीकभी उसकी!

अरे प्रधानमंत्रियों और शिक्षामंत्रियोंतुमने किया क्याइस महान राष्ट्र कोइस नालंदा और तक्षशिला के राष्ट्र को तुमने नकलचियों की नौटंकी बना दिया। तुम्हारे विश्वविद्यालयों ने कौनसे मौलिक अनुसंधान किए हैंजिन्होंने दुनिया की शक्ल बदली होअब दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में भारत का नाम जुड़वाने के लिए आप इतने बेताब हो रहे हैं कि पांच सरकारी और पांच निजी शिक्षा संस्थानों के माथे पर ‘प्रतिष्ठित’ की चिपकी लगाकर उन्हें रस्सा कुदवाएंगेइसका अर्थ भी आप समझते हैं या नहींक्या इसका अर्थ यह नहीं कि पश्चिम के शिक्षा मानदंडों की नकल आप हमारे विश्वविद्यालयों से करवाएंगेताकि वे उनकी पंगत में बैठने लायक बन सकें। धिक्कार हैऐसी ‘प्रतिष्ठा’ पर! हमारे इन अधपढ़ और अनपढ़ नेताओं को शिक्षा के मामलों की बुनियादी समझ होती तो हम अपनी प्राचीन गुरुकुल पद्धति की नींव पर आधुनिक शिक्षा की ऐसी अट्टालिका खड़ी करते कि दुनिया के वे ‘सर्वश्रेष्ठ’ विवि हमारी नकल करते। हम अध्यात्म और विज्ञानआत्मा और शरीरइहलोक और परलोकअभ्युदय और निःश्रेयसआर्य और अनार्यगांव और शहरगरीब और अमीर-- सबके उत्थान का मार्ग दुनिया को दिखाते। भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने का दम भरनेवाले राष्ट्रवादी लोग उसे भौतिकतावादी दुनिया का चेला बनाने के लिए किस कदर बेताब हो रहे हैंउनकी लीला वे ही जानें।

 

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पोल

क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

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