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वरिष्ठ पत्रकार निर्मलेंदु बोले- अब पप्पू नहीं रहे राहुल गांधी

Saturday, 21 July, 2018

निर्मलेंदु

कार्यकारी संपादक

राष्ट्रीय उजाला ।।

अब पप्पू नहीं रहे राहुल गांधी

शुक्रवार को सदन में राहुल का रौद्र रूप दिखा। शालीनता के साथ अपनी बात कहने का अंदाज अद्भुत और अकल्पनीय है। विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण की खूब और खूब तारीफ हो रही है। आश्चर्य की बात तो यही है कि बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भी खुलकर तारीफ की है। शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की तुलना फ्रांस और क्रोएशिया से की है। शिवसेना ने कहा है कि जिस तरह से क्रोएशिया ने विश्वकप फाइनल हार कर भी दिल जीता था, वैसा ही कल संसद में भी हुआ।

शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि नरेंद्र मोदी का भाषण प्रधानमंत्री का भाषण है। मोदी जी, मोदी जी हैं। आज मोदी जी की तुलना किसी से करना ठीक नहीं है, लेकिन उसी टक्कर में राहुल गांधी के भाषण की भी चर्चा हो रही है। राहुल गांधी का नया अवतार कल सदन में सभी ने देखा। उन्होंने कहा, उन्हें उसका श्रेय देना होगा।

जी हां, राहुल को श्रेय देना होगा। सचमुच राहुल ने लोगों का दिल जीत लिया। अब यदि यह कहें कि राहुल ने अपने भाषण से लोगों का दिल जीत लिया है, तो शायद गलत नहीं होगा। नहीं अब वे पप्पू नहीं रहे। एक नए अवतार के रूप में राहुल का उदय हो रहा है। दरअसल, मोदी की तुलना राहुल से नहीं हो सकती, यह हम सब जानते हैं, लेकिन राहुल ने जिस विश्वास के साथ अपनी बात रखी, वह तारीफ के काबिल है। राहुल को देखकर अब लोग यह नहीं कह सकते कि वह अपरिपक्व हैं। वह पप्पू हैं।

दरअसल, राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 में हुआ है, और ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज में उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की, वहीं पीएम नरेंद्र मोदी का जन्म 19 सितंबर 1950 में हुआ है। पीएम की उम्र 67 साल है, जबकि राहुल की उम्र है 48 साल। मतलब 19 साल का फर्क। इस फर्क को समझने की कोशिश करेंगे, तो हमें यह समझना होगा कि आज राहुल कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए हैं। लेकिन 19 साल पहले मोदी जी को राजनीति में कम ही लोग जानते थे। उनकी वह साख नहीं बन पाई थी, जो आज है, क्योंकि 17 साल पहले यानी 2001 में मोदी जी गुजरात के चीफ मिनिस्टर बन पाए थे। 

भले ही मोदी सरकार के खिलाफ आया अविश्वास प्रस्ताव औंधे मुंह गिर गया हो, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा। एक घंटे लंबे चले भाषण में राहुल ने राफेल डील, किसानों की कर्ज माफी, हिन्दुत्व से लेकर तमाम मुद्दों पर पीएम मोदी को घेरने की कोशिश की, हालांकि देर रात पीएम मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव पर अपने भाषण के दौरान राहुल के एक-एक आरोपों पर पलट कर जवाब भी दिया। अब राहुल गांधी ने दोबारा ट्वीट कर पीएम मोदी को घेरा है।

शुक्रवार को लोकसभा में हुई बहस पर राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, पीएम अपनी सोच बनाने के लिए लोगों के दिल में नफरत, डर और गुस्सा भरते हैं। मगर हम ये साबित करेंगे कि प्यार और भाईचारे भारतीयों के दिल में रहता है और केवल इसी तरह से देश का निर्माण हो सकता है।

एक तरफ राहुल प्यार और भाईचारे की बात करते हैं, तो दूसरी ओर जादू की झप्पी देकर आम जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि हम सच्चे रूप में गांधीवादी हैं। उन्होंने जादू की झप्पी देकर यह अहसास दिलाने की कोशिश की कि गांधी जी हिंसा पर विश्वास नहीं करते थे। मोदी जी हमेशा गांधी को स्मरण करते हैं, लेकिन राहुल स्मरण ही नहीं करते, बल्कि गांधी की तरह ही गाल आगे बढ़ा देते हैं कि आप नफरत बोओ, लेकिन हम तो तमाचा खाने के लिए तैयार हैं। हम हिंसा नहीं फैलाएंगे। शायद वह यही जताना चाहते होंगे कि मानव के अंदर जो कुछ सर्वोत्तम है, उसका विकास प्रशंसा तथा प्रोत्साहन के द्वारा किया जा सकता है, अपमान करके नहीं। किसी को लगातार यदि आप चोर, चोर कहते रहेंगे, तो दूसरे लोग भी उसे चोर ही समझेंगे। यही पीएम मोदी की रणनीति है, जबकि यह गांधी की रणनीति नहीं थी। सच तो यही है कि अपमान करना बहुत आसान काम है, लेकिन किसी की तारीफ करना कठिन काम है, हमें वही काम करना चाहिए। इस संदर्भ में कवि गुरु रबींद्रनाथ टैगोर ने कहा है कि लोहे को कोई नष्ट नहीं कर सकता, हां उसका जंग, उसे नष्ट करता है। इसी तरह आदमी को भी कोई नष्ट नहीं कर सकता, 

केवल उसकी सोच और अहंकार ही उसे नष्ट कर सकता है। जिस तरह से तीन चीजें, सूरज, चंद्रमा और सत्य, ज्यादा देर तक नहीं छुप सकतीं, ठीक उसी तरह जो अपना विकास चाहता है, उसका विकास कोई नहीं रोक सकता। लब्बोलुबाव यही है कि कोई भी व्यक्ति ऊंचे स्थान पर बैठकर ऊंचा नहीं हो जाता, बल्कि हमेशा अपने गुणों से ही ऊंचा उठता है। शालीनता की प्रतिमूर्ति और संस्कारी शब्दों के माध्यम से सामने वाले को मात दिखाने की कला में अब राहुल माहिर हो चुके हैं। नहीं अब वे पप्पू नहीं रहे, एक समझदार और परिपक्व नेता बन चुके हैं। बस घाघ और चतुर बनना बाकी है। जिस दिन वह घाघ और चतुर बन जाएंगे, उन्हें मात देना किसी के वश की बात नहीं होगी। सच तो यही है कि असत्य की उम्र नहीं होती और सत्य का रास्ता बहुत लंबा होता है। 

 



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