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'मोदी स्वयं राष्ट्रपति बनें तो भारत के भविष्य के लिए अच्छा हो...'

Thursday, 20 July, 2017

पी. के. खुराना

वरिष्ठ पत्रकार ।।

वो सुबह कभी तो आयेगी

यह खबर एकदम चौंकाने वाली थी कि भाजपा ने बिहार के राज्यपाल महामहिम रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए का उम्मीदवार बनाया। विपक्ष को झक मारकर उनके मुकाबले में मीरा कुमार को लाना पड़ा। कोविंद दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए विपक्ष की भी विवशता हो गई कि वह किसी जाने-पहचाने दलित नेता को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाए। मीरा कुमार विपक्ष की इसी विवशता का नतीजा थीं। मोदी ने एक दलित को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर एक बार फिर एक तीर से कई शिकार कर लिए। विपक्ष उनके इस अस्त्र के लिए तैयार नहीं था और मोदी को विपक्ष पर एक निर्णायक बढ़त मिल गई।

मोदी की इस बढ़त के जवाब में विपक्ष ने उपराष्ट्रपति पद के लिए महात्मा गांधी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी को विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार बनाया है जबकि एनडीए की ओर से भाजपा के वरिष्ठ नेता वैंकेया नायडू को उम्मीदवार बनाया गया है। इसी सप्ताह सोमवार को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हुआ। वोट गिनना और परिणाम घोषित करना तो औपचारिकता है। सारा देश जानता है कि केंद्र और अधिकांश राज्यों में बहुमत के कारण इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार को बढ़त हासिल है और वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शीघ्र ही 'भूतपूर्व हो जाएंगे। इसी प्रकार उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाला मतदान भी एक औपचारिकता मात्र है और देश के अगले उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ही होंगे।

राष्ट्रपति चुनाव में चूंकि दोनों उम्मीदवार दलित वर्ग से थे इसलिए मीडिया ने इसे दलित बनाम दलित का मुद्दा बना दिया। विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मीरा कुमार ने कहा भी कि मीडिया सिर्फ इस बात की चर्चा कर रहा है कि राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार दलित वर्ग से हैं लेकिन कोई भी दोनों उम्मीदवारों की योग्यता, उपलब्धियों आदि की चर्चा नहीं कर रहा है। इस जीत से मोदी को होने वाले राजनीतिक लाभ की चर्चा हो रही है लेकिन मुद्दों की बात नहीं की जा रही है। उनके इस बयान के बावजूद मीडिया के रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया और चर्चा दलित बनाम दलित तक ही सीमित रही।

ऐसे में दिव्य हिमाचल के चेयरमैन भानु धमीजा ने एक मतदान से एक दिन पूर्व 16 जुलाई को ट्वीट करके यह कहा कि 'मोदी स्वयं राष्ट्रपति बनें तो भारत के भविष्य के लिए अच्छा हो' और इसके आगे जोड़ा कि 'मोदी देश को वह संविधान दे सकते हैं जैसा हमारे संविधान निर्माता चाहते थे' उनकी वेबसाइट 'प्रेजिडेंशल सिस्टम.ओआरजीपर इसका खुलासा था कि 'मोदी एक ऐसे भारतीय नेता बन सकते हैं जो भारतीय संविधान निर्माताओं की मिश्रित संसदीय-राष्ट्रपति प्रणाली की परिकल्पना को आखिरकार मूर्त रूप दे पायें।

उधर मुंबई से फोरम फार प्रेजि़डेंशल डेमोक्रेसी के सह-संयोजक ओपी मोंगा ने उसी दिन अपनी ट्वीट में कहा कि कल देश एक बार फिर एक शक्तिहीन राष्ट्रपति चुन लेगा, अब समय गया है कि हम राष्ट्रपति प्रणाली अपनाएं ताकि देश में कुछ विवेक का संचार हो सके। यह एक संयोग ही था कि उसी दिन मैंने भी 'वो सुबह कभी तो आयेगी' शीर्षक से ट्वीट करके लिखा कि 'काश हमारे देश में अमरीकी पद्धति की राष्ट्रपति