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मोदी जी ने उस घटना से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को गिरा दिया...

Published At: Monday, 17 September, 2018 Last Modified: Wednesday, 19 September, 2018

कमल मोरारका

समाजशास्त्री ।।

क्या अटल जी के आचरण का अनुकरण करेंगे मोदी जी

शेख चिल्ली की बातें भारत जैसे देश में नहीं चलती हैं। किसान जानता है कि मेरी इतनी जमीन है, न मैं इसकी उत्पादकता दुगनी कर सकता हूं और न सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य दुगनी करेगी। अगर बहुत अच्छी सरकार आ गई, तो समर्थन मूल्य में दस प्रतिशत का इजाफा कर देगी। भारत में हरेक किसान के पास जानवर होते हैं। वह भी आमदनी का जरिया होते हैं, लेकिन सरकार उनको गाय के नाम पर डरा रही है। ऐसा वातावरण बना दिया है कि कोई संघ का आदमी भगवा कपड़ा पहनकर या अपने आप को कोई बजरंग दल का सदस्य बताकर किसी पर भी हाथ डाल सकता है। पुलिस भी उससे डरती है। ये बहुत खराब वातावरण है। देश का  इससे भला नहीं होगा।

मैं समझता हूं कि वाजपेयी जी का निधन एक मौका है। सरकार को इस बात का आंकलन करना चाहिए कि गलती कहां हुई। कहां से शुरू हुए थे और कहां चले गए। संसद में राहुल गांधी, मोदी जी से गले मिलने आ गए तो मोदी जी सकपका गए कि मैं क्या जवाब दूं। यदि अटल जी होते तो खड़े होकर गले मिलते और बोलते राहुल जी आपने आज बड़ा अच्छा भाषण दिया। इसमें क्या चला जाता भाजपा का? लेकिन मोदी जी में और भाजपा में यह दम नहीं है। उल्टे, कांग्रेस मुक्त भारत, पप्पू, इटालियन आदि बोल कर वैमनस्य पैदा कर दिया है। कुल मिलाकर मोदी जी ने उस घटना से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को गिरा दिया। जवाहरलाल नेहरू जिस कुर्सी पर बैठे थे, उस पर आप बैठे हैं। उसके बीच में बारह प्रधानमंत्री और आए-गए। किसी का तो अनुकरण करिए। अटल जी का ही करिए। कांग्रेस को छोड़िए, नेहरू को छोड़िए। अटल जी जो करते थे, उसका 50 प्रतिशत भी आप कर देंगे तो आपकी पार्टी का भला हो जाएगा। अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है। हार-जीत छोड़ दीजिए। कोई चुनाव अंतिम चुनाव नहीं होता।

भाजपा ने हरिवंश को राज्यसभा का उपसभापति बनाया। हरिवंश बहुत अच्छे आदमी हैं। लेकिन बधाई भाषण में मोदी जी ने ऐसे शब्द कह दिए जिसे रिकॉर्ड से हटाना पड़ा। शालीनता की एक न्यूनतम रेखा तो खींच दीजिए कि इससे नीचे आप नहीं जाएंगे। वेंकैया नायडू में इतनी ताकत नहीं थी कि वे मोदी जी के भाषण के शब्द को रिकॉर्ड से हटा सकें। अमित शाह और अरुण जेटली समझ गए कि जिस बात को रिकॉर्ड से हटा दिया जाता है, उसकी रिपोर्टिंग नहीं होती। अमित शाह और अरुण जेटली समझ गए कि ये तो उल्टा पड़ जाएगा। आजकल तो ट्‌विटर है, टीवी है। हमने पढ़ लिया कि प्रधानमंत्री ने क्या बोला था। इससे संसद की गरिमा कम हुई थी।

नोटबंदी और जीएसटी से अर्थव्यवस्था को जो नुकसान होना था वह हो गया है। अब जनता निर्णय लेगी कि ये कदम सही थे या गलत। आज हर आदमी अपना मन बना चुका है कि किसे वोट देगा। लेकिन, कम से कम मोदी जी अपना आचरण तो ठीक करिए और अटल जी के निधन से अच्छा मौका कोई नहीं है, यह कहने के लिए कि हम उनके आचरण का अनुकरण करेंगे।




पोल

‘नेटफ्लिक्स’ और ‘हॉटस्टार’ जैसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने की मांग को लेकर क्या है आपका मानना?

सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए

इन पर अश्लील कंटेट प्रसारित करने के आरोप सही हैं

आज के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करना बहुत मुश्किल है

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