Share this Post:
Font Size   16

सामने आई बालाकोट हमले की रात मोदी की प्लानिंग की पूरी कहानी

Published At: Friday, 08 March, 2019 Last Modified: Friday, 08 March, 2019

ये नया भारत है

विकास भदौरिया
वरिष्ठ पत्रकार।।

वो एक सामान्य रात थी, सब कुछ सामान्य तौर तरीके पर चल रहा था।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार बैठकें कर रहे थे।सरकारी कामकाज रोजमर्रा की तरह ही निपटाए जा रहे थे। रात के करीब साढ़े ग्यारह बज रहे थे। प्रधानमंत्री सामान्य फोन कॉल भी ले रहे थे और रेक्स फोन पर भी व्यस्त थे, यानी एक फोन पर सामान्य कामकाज निपटा रहे थे और दूसरे फोन पर खुफ़िया मिशन पर लगे हुए थे।

रेक्स फ़ोन वो फोन होते हैं, जिन पर गूढ़ या गोपनीय बातें की जाती हैं। इन फोन को रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता है। ये हॉटलाइन की तरह होते हैं और प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों, बड़े अधिकारियों से रेक्स फोन पर बात करते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इन रेक्स फोन के ज़रिए पूरी रात, कई बार प्रधानमंत्री से बात करते रहे। जब पायलट लड़ाकू जहाज लेकर ग्वालियर, बरेली, भटिंडा और सिरसा से उड़े तो प्रधानमंत्री को इसकी सूचना दी गयी। वो 26 फरवरी की रात थी, किसी को नहीं पता था कि प्रधानमंत्री क्या करने जा रहे हैं।पूरी रात पीएम मोदी ने पलक भी नहीं झपकाई। उनकी आंखों के सामने पुलवामा के शहीद 40 सीआरपीएफ जवानों की सूरत घूम रही थी। उनके घरवालों के रोते-बिलखते चेहरे नाच रहे थे।

सुबह-सुबह पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ था, भारत ने पाकिस्तान के 80 किलोमीटर भीतर घुसकर हमला कर दिया था। सुबह 6 बजे के आसपास पाकिस्तान आर्मी के प्रवक्ता के एक ट्वीट ने भारत में भी हड़कंप मचा दिया। ये हड़कंप पत्रकारों में ज़्यादा था सुबह साढ़े छह बजे से सभी पत्रकारों और अफसरों के फोन घनघना रहे थे। सभी इस खबर की पुष्टि करने चाहते थे  कि क्या भारत ने पाकिस्तान पर हमला कर दिया है। खैर 8 बजे तक पुष्टि हो गयी कि भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैम्प पर मिराज विमानों से हमला कर दिया है।

पूरी दुनिया की नज़रें 14 फरवरी के बाद से भारत पर टिकी हुईं थी। अमेरिका को पता था कि पुलवामा के आतंकी हमले के बाद भारत और मोदी को रोकना नामुमकिन है, इसलिए बालाकोट के हमले से दो दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीनी पत्रकारों से बात करते हुए कह दिया था कि ‘इंडिया इस प्लानिंग बिग’ मतलब भारत कुछ बड़ी योजना बना रहा है। लेकिन ये भी जानना ज़रूरी है कि ये सब हुआ कैसे?

दुनिया भर की यात्रा करने के कारण, देश में विपक्ष की आलोचना झेल रहे मोदी को सभी देश समझ चुके हैं। वे जानते हैं कि नरेंद्र मोदी एक बार ठान लें तो पीछे नहीं हटते हैं और इसलिए जब आतंकवाद की बात हो तो मोदी की जीरो टॉलरेंस की नीति, दुनिया के किसी भी देश के लिए नज़ीर बनती जा रही है।

दुनिया भर में जब 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे मनाया जा रहा था, जैश-ए-मोहम्मद ने नफरत और आतंक का खेल कश्मीर के पुलवामा में खेला। इसके ठीक अगले दिन सुबह प्रधानमंत्री ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट की बैठक के बाद दुनिया को बता दिया था कि ‘पाकिस्तान ने बहुत बड़ी भूल कर दी है और इसकी बड़ी कीमत उसे चुकानी होगी।’ 14 फरवरी के बाद से पाकिस्तान बेहद डरा हुआ है। उसे पता है कि भारत का प्रधानमंत्री बोलने से पहले करने में भरोसा रखता है और अगर आगाह कर दे तब तो बिल्कुल नहीं छोड़ता है।

दुनिया भर की नज़र भारत पर लगी थी। दुनिया के ताकतवर देशों के सैटेलाइट भारत की तरफ घूम गए थे। भारत के एक-एक सैन्य मूवमेंट पर नज़र रखी जा रही थी। लेकिन प्रधानमंत्री सामान्य दिनचर्या में व्यस्त दिखाई दे रहे थे। पूरे विदेश मंत्रालय को, पाकिस्तान और जैश-ए-मोहम्मद का पर्दाफाश करने का काम सौंप दिया गया था। 15 फरवरी को तीनों सेनाओं से प्लान मांग लिया गया था और 18 फरवरी को आखिरी 6 टारगेट तय हो गए थे। भारतीय फौज हाई अलर्ट पर थी। भारतीय नेवी और पनडुब्बियों को कराची की तरफ आगे बढ़ा दिया गया था। पाकिस्तान ने कराची पर हमले की आशंका के मद्देनजर रात में ब्लैक आउट करना शुरू कर दिया था। पाकिस्तान को लगा कि भारत समंदर के रास्ते कराची पर और ज़मीन के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करेगा, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। उन्होंने पकिस्तान के बालाकोट पर हवाई हमला करवाया। पाकिस्तान के साथ-साथ दुनिया सन्न रह गई। जब पायलट अपने लड़ाकू जहाज (मिराज और सुखोई) लेकर पाकिस्तान पर हमला करने निकले तो प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सूचना दी, ‘ऑपरेशन इज़ बिगिन।‘

प्रधानमंत्री की तरफ से साफ निर्देश थे कि किसी भी सूरत में पायलट और विमान का नुकसान न हो, अगर खतरा बढ़े तो हमले को टाल दिया जाए, लेकिन पायलट उस दिन ‘सुसाइड मिशन’ पर थे। उनके दिमाग में साफ था कि या तो आतंक का ठिकाना खत्म करेंगे या खुद खत्म हो जायेंगे। जब तक पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम पाकिस्तान की एयरफोर्स को अलर्ट करता। ग्वालियर से उड़े मिराज ने बालाकोट में जैश के ठिकाने को स्पाइस 2000 (इजरायली मिसाइल) से उड़ा दिया था। सभी पायलट सुरक्षित वापस लौट आये। अचानक ग्वालियर एयरबेस पर प्रधानमंत्री का फोन पहुंचा। हमला कर वापस लौटे पायलटों से प्रधानमंत्री ने बात की,सफल हमले के लिए बधाई दी और देश की ओर से उन्हें धन्यवाद दिया।

प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति ऐसी थी कि किसी को अंदाजा नहीं हुआ कि वे क्या करने जा रहे हैं। वे राजनीतिक रैली भी करते रहे और पाकिस्तान को सबक सिखाने की योजना भी बनाते रहे। वे सऊदी अरब के प्रिंस, जो कि पाकिस्तान से होकर आये थे उनके साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करते रहे और पाकिस्तान को घुटनों पर लाने की प्लानिंग भी करते रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण कोरिया जाकर प्रतिष्ठित सियोल शांति पुरस्कार भी लिया और पाकिस्तान में आतंक की कमर तोड़ने की तरकीब भी सोचते रहे।लेकिन इस बीच किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया कि आखिर प्रधानमंत्री अपने साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल क्यों नहीं लेकर गए, वे भारत में क्यों रहे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 फरवरी तक पाकिस्तान को सबक सिखाने के 6 टारगेट तय कर लिए थे, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को इन टारगेट पर काम करने और पूरी रणनीति को अंजाम तक पहुंचाने के लिए नई दिल्ली में ही रहने के निर्देश देकर पीएम मोदी सीमित प्रतिनिधिमंडल के साथ सियोल गए।

26 फरवरी के हमले के बाद जब विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो ये इसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति थी। हमला भारतीय वायुसेना ने किया था इसलिए वायुसेना या रक्षामंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुनिया को जानकारी देने का सुझाव दिया गया, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने कहा प्रेस कॉन्फ्रेंस विदेश मंत्रालय करेगा, वजह साफ थी अगर सेना का अधिकारी या रक्षा मंत्री हमले की जानकारी देते, तो ये सैन्य कार्रवाई के रूप में दुनिया भर में देखा जाता, लेकिन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जब ये कहा कि भारत की कार्रवाई ‘आतंक निवारक गैर सैन्य करवाई है’ तो दुनिया ने इसे आतंक के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर समर्थन दिया। इससे, मोदी की रणनीति यहां भी एक दम सटीक बैठी।

प्रधानमंत्री के करीबी कहते हैं कि मोदी जब कोई भी बड़ी योजना बनाते हैं तो उनका बायां हाथ क्या कर रहा है, इसकी भनक दाएं हाथ को भी नहीं लगने देते हैं। और यही उन्होंने पाकिस्तान को सबक सिखाने की योजना बनाने के दौरान किया। 24 घंटे में से 20 घंटे तक काम करने वाले मोदी ने इतने गोपनीय ढंग से योजना को अंजाम दिया कि दुनिया की बड़ी शक्तियां तक योजना को भांप नहीं पाईं।

पुलवामा के बाद पाकिस्तान को भारत के हमले का डर तो सता ही रहा था,इस मौके पर उसका सबसे बड़ा साथी चीन भी दूर खड़ा रहा, कहा जा रहा है कि पाकिस्तान को चीन ने, भारत की सैन्य गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए सैटेलाइट का डायरेक्ट लिंक तक देने से मना कर दिया। पाकिस्तान के लिए ये बहुत बड़ा झटका था, उसका सबसे बड़ा साझीदार उससे छिटक कर खड़ा हो गया था।

जब विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान के कब्जे में फंस गए तो सऊदी अरब ने 24 घंटे के भीतर उन्हें छोड़ने का फरमान पाकिस्तान को सुना दिया, इस पूरी मुहिम में अमेरिका ने सऊदी अरब के ज़रिए पाकिस्तान को मजबूर कर दिया कि विंग कमांडर अभिनंदन को तुरंत रिहा करे। मोदी की कूटनीति ने ये दूसरा बड़ा झटका पाकिस्तान को दिया।

पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने एक दम नंगा और अलग-थलग करने की जो योजना बना कर मोदी ने काम किया वो इतिहास का हिस्सा बन गई है, लेकिन ये सब एक दिन में नहीं हुआ। पीएम मोदी के विदेश दौरों को कवर करने के दौरान मैंने खुद देखा कि कैसे पिछले पांच साल से मोदी दुनिया भर को आतंकवाद के खिलाफ एक मंच पर लाने के लिए जुटे हुए थे। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जी-20 देशों का पहला शिखर सम्मेलन ब्रिस्बेन में हुआ,वहां पहली बार मोदी ने दुनिया भर में आतंक के खिलाफ प्रस्ताव पास करवाया, उसके बाद ब्रिक्स सम्मेलन, एससीओ सम्मलेन, सार्क सम्मेलन, कॉमनवेल्थ देशों के सम्मेलन सभी जगह प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को ‘आतंक का स्वर्ग’ कह कर संबोधित किया। यहां तक कि इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने भी विशव में आतंकवाद को सबसे बड़ा खतरा बताया।

बड़ी उपलब्धि भारत की ये है, कि प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को ‘आतंक का स्वर्ग’ के रूप में दुनिया के सामने स्थापित कर दिया। आज दुनिया मानती है कि पाकिस्तान आतंक का सबसे बड़ा निर्यातक है। ये आसान काम नहीं था इसके लिए योजनाबद्ध काम हुआ, उसके नतीजे आज मिल रहे हैं, यहां तक कि आतंकवाद के मसले पर चीन भी पाकिस्तान के साथ खड़े होने से कतरा रहा है।

जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर को यूएन में वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव आया है इस बार चीन तो छोड़िए पाकिस्तान भी इस प्रस्ताव का विरोध करने से कतरा रहा है।

ये नया भारत है, ये बदला भी लेगा और घर में घुस कर मारेगा भी। नया भारत आसमान से भी मारेगा, ज़मीन से भी मारेगा, समंदर से भी मारेगा और अगर पाताल में भी आतंकवादी छिपा हो तो उसे भी ढूंढ़कर साफ कर देगा। भारत अब ‘सॉफ्ट स्टेट’ नहीं रह गया है। संदेश साफ है या तो पाकिस्तान खुद आतंकवाद की सफाई करें नहीं तो भारत आतंकवाद के सफाये के लिए अन्तराष्ट्रीय सीमा भी लांघने से हिचकेगा नहीं, और हां, ये आखिरी हमला नहीं था आतंकवाद के सफाये के लिए फिर मौत बनकर बरसेगा भारत।

(साभार-फेसबुक)



पोल

पुलवामा में आतंकी हमले के बाद हुई मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर क्या है आपका मानना?

कुछ मीडिया संस्थानों ने मनमानी रिपोर्टिंग कर बेवजह तनाव फैलाने का काम किया

ऐसे माहौल में मीडिया की इस तरह की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है और यह गलत नहीं है

भारतीय मीडिया ने समझदारी का परिचय दिया और इसकी रिपोर्टिंग एकदम संतुलित थी

Copyright © 2019 samachar4media.com