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चुनावी नतीजे बीजेपी के लिए खतरे की घंटी, बोले वरिष्ठ पत्रकार निर्मलेंदु

Published At: Tuesday, 11 December, 2018 Last Modified: Tuesday, 11 December, 2018

निर्मलेंदु
वरिष्ठ पत्रकार

मोदी जी, पप्पू से सावधान हो जाएं

इन नतीजों से बीजेपी को यह सीखना होगा कि केवल कोसने से और विपक्ष पर आरोप लगाने से कुछ नहीं होता। अब जनता जागरूक हो गई है। नोटबंदी और जीएसटी का नारा, लगता है काम आ गया।

राहुल गांधी के नेतृत्व ने यह समझा दिया कि पप्पू को अब पप्पू न समझें। मोदी जी को अब पप्पू से सावधान हो जाना चाहिए। कछुए की चाल चलकर राहुल ने मोदी को मात दी। कांग्रेस ने कहा था कि मौसम बदल रहा है। यह सच है कि मौसम बदल रहा था। मोदी की टीम नहीं समझ पाई। चाणक्य ने कहा था कि जो ज्ञानी होता है, उसे समझाया जा सकता है, जो अज्ञानी होता है, उसे भी समझाया जा सकता है, परंतु जो अभिमानी और अहंकारी होता है, उसे कोई नहीं समझा सकता, क्योंकि वह अहंकार के दलदल में फंसकर कभी डूबता, तो कभी तैरता रहता है।

किसानों ने अपनी नाराजगी दिखाई। मोदी जी समझ नहीं पाए। किसान ही नहीं, नौजवानों की नाराजगी भी मोदी जी नहीं समझ पाए। आश्चर्य! शहीदों ने देश के लिए जान दी, उसे भी उन्होंने इग्नोर किया। किसानों को आधा अधूरा मुआवजा मिला, इसलिए किसान नाराज हैं। यह भी मोदी जी समझ नहीं पाए। छत्तीसगढ़ और राजस्थान छिन गया। तेलंगाना और मिजोरम में बीजेपी का सूपड़ा साफ हो गया। मध्यप्रदेश में कांटे की टक्कर रही। कहते हैं कि जिस मनुष्य में धैर्य होता है, वह अपने आप ही महान बन जाता है। अब अर्जुन का उदाहरण ही लें। वह बुद्धिमान, ताकतवर होने के साथ धैर्यवान भी थे। राहुल में भी धैर्य दिखा। उन्होंने देश की जनता को भरोसा दिया कि इस बार कांग्रेस अपना वादा निभाएगी।

ऐसे में यदि यह कहें कि अब पप्पू नहीं रहे राहुल, तो शायद यह गलत नहीं होगा। इस सच्चाई को हमें समझना होगा। जिस तरह से देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई है, जिस तरह से बेरोजगारी बढ़ी है, जिस तरह से नोटबंदी के बाद छोटे-छोटे कल कारखाने बंद हो गए हैं, जिस गति से किसानों ने आत्महत्या की है, जिस गति से देश में मंदिर-मस्जिद के बहाने लोग आपस में लड़ रहे हैं, उसे देखकर यह लगता ही नहीं कि हम किसी विकासशील देश में रह रहे हैं। जिस तरह ताबड़तोड़ रैलियां कर राहुल ने बीजेपी पर निशाना साधा है, वह अकल्पनीय है।

अब आप यह कह सकते हैं कि कांग्रेस ने दी बीजेपी को कांटे की टक्कर। एक वाक्य में यदि यह कहें कि राहुल अब परिपक्व हो गए हैं, तो शायद गलत नहीं होगा। अब यह भी कह सकते हैं कि राहुल की मोदी को दी गई झप्पी काम आ गई। राहुल को अब राजनीति समझ में आ रही है। उन्होंने इन तीन राज्यों में चुनाव कैंपेन में कहा था, ‘दरअसल, जब छत्तीसगढ़ बना, तब आपका सपना था कि यहां की जल, जंगल, जमीन, कोयला, खनिज का फायदा लोगों को मिलेगा, लेकिन 15 सालों में आपने देखा कि राज्य में दो छत्तीसगढ़ बन गए। एक अमीरों का, सूट-बूट वालों का, बड़े-बड़े उद्योगपतियों का और दूसरा आम जनता का, महिलाओं और युवाओं का। हमें दो नहीं एक छत्तीसगढ़ चाहिए, और उसमें न्याय चाहिए।‘ राहुल को छत्तीसगढ़ मिल गया। राहुल ने मनरेगा पर भी सवाल उठाए थे। दरअसल, वह इन दिनों देश हित में लगे हुए हैं।

राहुल ने जिस तरह से बीजेपी पर हमला किया, वह जो करना चाहते हैं, वह जो कहना चाहते हैं, वह अकल्पनीय है। बबुआ नहीं रहे अब राहुल। अब हमें यह समझ में आ गया कि बीजेपी जिस तरह से तिनके का सहारा ले रही है, वह न केवल सोचनीय है, बल्कि चिंताजनक भी है। दरअसल, दूसरों पर जब आप उंगली उठाते हैं, तो एक उंगली आपके काम पर भी उठती है। मोदी और अमित शाह ने जिस तरह से अहंकार भरे स्वर में कांग्रेस मुक्त भारत की बात की थी, उस पर पानी फिर गया। अहंकारियों का अहंकार चूर-चूर होकर बिखर गया। हां, अब मौसम बदल गया है। जनता क्या सोचती है, उसे क्या चाहिए, राहुल गांधी यह धीरे-धीरे समझने लगे हैं।

राहुल को लोग बबुआ के रूप में जानते हैं। लेकिन क्या सचमुच अब वह बबुआ हैं। इस सवाल के जवाब में एक आम व्यक्ति ने कहा था कि राहुल जिस तरह से एंग्री यंग लीडर की भूमिका निभा रहे हैं, वह प्रशंसनीय हैं। दलित नाराज थे, किसान नाराज थे, बिजनेसमैन नाराज थे, बेरोजगारों की तादाद बढ़ रही थी, कल कारखाने बंद हो गए थे। राहुल ने आवाज बुलंद की। लोगों ने सुना, समझा, बुझा, जाना और राहुल पर भरोसा कर लिया। यह बड़ी बात है। मोदी जी ने अपने नाम पर वोट मांगा, तो क्या हम यह कह सकते हैं कि यह मोदी जी की हार है। हालांकि बीजेपी के लोग यह नहीं मानते कि यह मोदी जी की हार है। कहते हैं कि जैसा बोयेंगे, वैसा पाएंगे। गीता की यह वाणी सच साबित हुई। वोटरों ने दिखा दिया कि हम हैं सर्वशक्तिमान। जनता ने कांग्रेस पर भरोसा दिखाया।



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