Share this Post:
Font Size   16

MP में कांटे की टक्कर, वरिष्ठ पत्रकार आनंद पांडेय ने कुछ बातों से भिड़ाया ज्ञान-गणित

Published At: Saturday, 24 November, 2018 Last Modified: Saturday, 24 November, 2018

आनंद पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार

बेहतर फिनिश... जीत पक्की

मध्य प्रदेश में वोटिंग की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। लेकिन कोई भी नेता, पत्रकार या विश्लेषक दावे के साथ नहीं कह पा रहा है कि यहां क्या होने जा रहा है। पूरे प्रदेश में कोई मुद्दा या लहर नहीं है। हर सौ किलोमीटर पर प्रत्याशी के आधार पर मुद्दा और प्राथमिकताएं बदल रही हैं। मतदाता एकदम मौन साधे है। हां, कुछ बातें अवश्य हैं जिनके आधार पर ज्ञान-गणित भिड़ाया जा सकता है... संभावनाएं जताई जा सकती हैं।

पहली बात तो ये है कि शिवराज से दिग्विजय जैसी नाराजगी नहीं है। इसीलिए बीजेपी का जो भी प्रदर्शन रहेगा उसका यश-अपयश शिवराज के बही में ही दर्ज होगा।

दूसरा- ऐसा महसूस हो रहा है कि गरीब तबका बीजेपी या कहना चाहिए शिवराज के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। फिर उसकी वजह प्रदेश सरकार की लाडली लक्ष्मी योजना हो, संबल योजना हो या केंद्र सरकार की पीएम आवास योजना। वैसे आवास योजना की लोकप्रियता को कतई खारिज नहीं किया जा सकता है।

तीसरा- कांग्रेस बदलाव की बात तो कर रही है लेकिन बदलाव कि कोई ठोस वजह नहीं बता पा रही है। हां, शिवराज से बोर हो गए हैं... ऐसा कहीं-कहीं सुनने को जरूर मिल रहा है। हां, अब इस बोर होने से आम मतदाता का कितना सरोकार है और क्या ये बोर फैक्टर इतना ताकतवर है कि सरकार ही पलट दे- ये देखना दिलचस्प रहेगा।

चौथा- ये चुनाव पूरी तरह जाति और व्यक्ति पर जा खड़े हुए हैं। सपाक्स कोई सीट जीत पाएगी ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता... लेकिन सवर्ण समाज इस मौके को अपनी ताकत और संख्या बल को दिखाने के लिए इस्तेमाल करना चाह रहा है। इसका नफ़ा-नुकसान सीट-टू-सीट अलग अलग दिखेगा। इसी तरह जिस प्रत्याशी का मैनेजमेंट बेहतर होगा उसकी जीत की संभावनाएं भी उतनी ही ज्यादा होंगी।

पांचवां- कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में कोई मुदा इसलिए नहीं दिख रहा है क्यों कि इस बार उसने क्लस्टर बेस्ड रणनीति बनाई थी। यानी पूरे प्रदेश को छोटे-छोटे क्लस्टर में बांट कर चुनाव प्लांनिंग कि गई थी। अगर वाकई ऐसा है तो फिर मानना पड़ेगा की कांग्रेस इस रणनीति में पूरी तरह कामयाब रही है।

छठा- टिकटों का आकलन करने पर साफ कहा जा सकता है की इस मामले में कांग्रेस, बीजेपी से बेहतर रही है। बीजेपी नेता भी ऑफ रिकॉर्ड बातचीत में मान रहे हैं कि अगर 12-15 टिकट और कट जाती तो माहौल पार्टी के ज्यादा अनुकूल हो सकता था।

सातवां- धनबल, संगठन और जमीनी मेहनत के मामले में बीजेपी, कांग्रेस से काफी आगे खड़ी दिखाई दे रही है।

चुनावी इतिहास बताता है कि मैच फिनिश करने के मामले में बीजेपी हमेशा बेहतर परफॉर्मर रही है। लेकिन इस बार कांग्रेस भी पूरी तरह तैयार दिखाई दे रही है। वो कोई चूक नहीं करना चाहती। जमीन पर ऐसा दिखाई भी दे रहा है। माहौल भले ही पूरी तरह कांग्रेस के पक्ष में न हो लेकिन बीजेपी को भी दांतों में पसीना तो आ ही रहा है।



पोल

मीडिया में सर्टिफिकेशन अथॉरिटी को लेकर क्या है आपका मानना?

इस कदम के बाद गुणवत्ता में निश्चित रूप से सुधार आएगा

मीडिया अलग तरह का प्रोफेशन है, इसकी जरूरत नहीं है

Copyright © 2018 samachar4media.com