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...चैनल लोगों के मन में यह भ्रांति पैदा करने में सफल हो गये, बोले आशुतोष चतुर्वेदी

Published At: Tuesday, 06 March, 2018 Last Modified: Tuesday, 06 March, 2018

श्रीदेवी की मौत और उसके बाद टीवी चैनलों ने जैसा सनसनीखेज कवरेज किया, उस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिस तरह से उनके निधन के बाद दिन-रात चैनलों ने खबरें चलायीं और किस तरह उनकी मौत को लेकर अटकलों को हवा दी, उस पर सवाल उठना लाजिमी है।ये कहा प्रभात खबर में छपे अपने संपादकीय में प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी ने। उनका पूरा संपादकीय आप यहां पढ़ सकते हैं-

श्रीदेवी की मौत और मीडिया

जानी मानी अभिनेत्री श्रीदेवी की अंतिम यात्रा में लगभग 25 हजार लोग शामिल थे। यह बताता है कि श्रीदेवी लोगों के दिलों में बसी हुईं अभिनेत्री थीं। जानकारों का कहना है कि हाल फिलहाल किसी सिने अभिनेता अथवा अभिनेत्री को अंतिम विदाई देने इतने लोग नहीं जमा हुए। इसमें युवा और वयस्क दोनों वर्ग के लोग शामिल थे। श्रीदेवी को 'इंग्लिश विंग्लिश' जैसी फिल्मों ने युवाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया था। 

'चांदनी' से लेकर 'नगीना' जैसी फिल्मों के कारण लाखों लोग पहले से ही उनकी अदा के दीवाने थे। लेकिन, श्रीदेवी की मौत और उसके बाद टीवी चैनलों ने जैसा सनसनीखेज कवरेज किया, उस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिस तरह से उनके निधन के बाद दिन-रात चैनलों ने खबरें चलायीं और किस तरह उनकी मौत को लेकर अटकलों को हवा दी, उस पर सवाल उठना लाजिमी है। सवाल मीडिया से भी उठ रहे हैं और आम जन भी उठा रहे हैं। सोशल मीडिया में तो हैशटैग- खबर की मौत नाम से चल रहा था। श्रीदेवी की मौत बाथटब में एक हादसे की वजह से डूबने से दुबई में हुई थी। 

यह सही है कि हर शख्स श्रीदेवी के अंतिम पलों के बारे में जानना चाहता था। दुबई के खलीज टाइम्स और गल्फ न्यूज ने बेहद संयम तरीके से खबरें छापीं। अधिकांश चैनलों की खबरों का स्रोत इन अखबारों की वेबसाइट ही थीं। बीच-बीच में वे इन अखबारों के संपादकों और रिपोर्टर से बात कर अपनी खबरों को प्रासंगिक दिखाने की कोशिश करते थे। श्रीदेवी की मौत से पहले के लम्हों के बारे में खलीज टाइम्स ने विस्तृत रिपोर्ट छापी। रिपोर्ट में लिखा है कि बोनी कपूर शनिवार की शाम अपनी पत्नी श्रीदेवी को सरप्राइज डिनर के लिए ले जाने वाले थे। 

लेकिन, जब वह श्रीदेवी के कमरे में पहुंचे तो वह बाथरूम में गिरी हुईं मिलीं। बोनी कपूर ने उन्हें होश में लाने की काफी कोशिश की। लेकिन, वह सफल नहीं हुए। इसके बाद उन्हें दुबई के राशिद अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। श्रीदेवी अपने परिवार के साथ बोनी कपूर के भांजे मोहित मारवाह की शादी में हिस्सा लेने दुबई पहुंची थीं। 

जैसे ही दुबई पुलिस ने अपनी फोरेंसिक रिपोर्ट में कहा कि श्रीदेवी की मौत होटल में बाथटब में दुर्घटनाग्रस्त रूप से डूबने से हुई है, उसके बाद तो टीवी चैनल जितने तरह के षड्यंत्र हो सकते हैं, वह गिनाने लगे।  

उनका इशारा बोनी कपूर की ओर था। टीवी चैनलों के दिल्ली और मुंबई स्थित स्टूडियो जैसे घटना के प्रत्यक्षदर्शी बन गये हों। उस दौरान कैसे बोनी कपूर उस वक्त कमरे में मौजूद थे, यह साबित करने की होड़ चल रही थी। टीवी चैनलों पर मौत का बाथटब से विशेष कार्यक्रम चल रहे थे। एक चैनल ने तो गजब ही कर दिया। उन्होंने अपने एक रिपोर्टर को टब में लिटा दिया और साबित करने की कोशिश की कि जब उनका रिपोर्टर टब में नहीं डूब सकता है तो श्रीदेवी कैसे डूब सकती हैं। 

अधिकांश टीवी चैनलों का लब्बोलुआब यह था कि यह सब बोनी कपूर का किया धराया है और रात-दिन दिखा कर चैनल लोगों के मन में यह भ्रांति पैदा करने में सफल हो गये। शुरुआत में उनकी मौत के कारण के पीछे युवा दिखते रहने के लिए करवायी गयी कॉस्मेटिक सर्जरी के प्रभाव को लेकर भी खूब खबरें चलीं। जबकि श्रीदेवी पहले ही कई बार इंटरव्यू में ऐसे किसी भी ऑपरेशन का खंडन कर चुकी थीं। चैनल यहीं तक नहीं रुके, उन्होंने श्रीदेवी की पुरानी निजी जिंदगी की परतें उधेड़नी शुरू कर दीं। उनका किन-किन लोगों से अफेयर था और कैसे उनकी शादी हुई। हमारे देश में दो-तीन राजनेता हैं जिनसे आप किसी विषय पर टिप्पणी ले सकते हैं। 

वे जब भी मुंह खोलते हैं तो कुछ विवादित बात ही बोलते हैं। टीवी चैनलों की तो जैसे मुंह की मुराद पूरी हो जाती है। इनमें से एक महानुभाव ने इसमें दाऊद का एंगल डाल दिया तो दूसरे ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि श्रीदेवी तो शराब पीतीं ही नहीं थीं। टीवी चैनलों को जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी। उन्हें श्रीदेवी की मौत की खबर में जैसे षड्यंत्र का एंगल मिल गया। दरअसल पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया कि जिस समय श्रीदेवी की मौत हुई, उस समय उनके शरीर में शराब के अंश मिले थे। 

टीवी चैनलों पर स्वत: नियंत्रण के लिए चैनलों ने न्यूज ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन गठित की हुई है। इसके प्रभाव को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन, इस पूरे प्रकरण के दौरान कोई चेतावनी जारी नहीं की गयी, किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया गया। टीआरपी की होड़ में टीवी चैनल श्रीदेवी की मौत पर बेरोकटोक खबरें चलाते रहे।

जहां तक श्रीदेवी के फिल्मी करियर का सवाल है, तो उतार-चढ़ाव के बावजूद वह शानदार रहा। श्रीदेवी ने केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि तमिल, मलयालम, तेलुगू और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया था। वह भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार मानी जाती हैं। श्रीदेवी ने अपने फिल्मी करियर में अनेक फिल्में कीं।   

अपने करियर के दौरान उन्होंने कई दमदार रोल किये। श्रीदेवी ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म सोलवां सावन से 1979 में की थी। लेकिन उन्हें बॉलीवुड में पहचान फिल्म हिम्मतवाला से मिली। इस फिल्म के बाद वह हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार अभिनेत्री कहलाने लगीं थीं। मसाला फिल्मों के अलावा उन्होंने कई आर्ट फिल्मों मे भी काम किया। 80 और 90 के दशक में श्रीदेवी का इतना दबदबा था कि वह सबसे अधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्री बन गयी थीं। श्रीदेवी को राष्ट्रीय और कई फिल्म फेयर पुरस्कार मिले थे। 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था।

मेरी जानकारी में एक और दिलचस्प तथ्य आया कि श्रीदेवी पांच भारतीय भाषाएं बोल लेती थीं, लेकिन उनका अंग्रेजी में हाथ तंग था। एक दौर में बॉलीवुड के अंग्रेजीदां तबके में इसको लेकर उनका मजाक भी उड़ाया जाता था। 

इतना मजबूत करियर के होते हुए भी श्रीदेवी अंदर से कहीं कमजोर थीं। उनके साथ तेलुगू फिल्म बना चुके फिल्म निर्माता और निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने एक लंबी पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की है।  

राम गोपाल वर्मा ने लिखा- श्रीदेवी अपने जीवन में कठिन दौर से गुजर चुकी थीं। बाल कलाकार के रूप में करियर की जल्द शुरुआत के कारण जीवन में उन्हें सामान्य गति से बढ़ने का समय कभी नहीं मिला। बाहरी शांति से ज्यादा, उनकी आंतरिक मानसिक स्थिति चिंता का विषय थी। रामगोपाल वर्मा ने फेसबुक पर लिखा कि भविष्य को लेकर अनिश्चितता और उनके निजी जीवन में बेतरतीब बदलाव ने श्रीदेवी के संवेदनशील दिमाग पर गहरे दाग छोड़े, जिससे उन्हें कभी शांति नहीं मिली।

 

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पोल

क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

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