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'क्या सत्ता जाने का डर इतना बड़ा हो गया कि देश की अस्मिता को ही दांव पर लगा...

Published At: Monday, 12 March, 2018 Last Modified: Saturday, 10 March, 2018

कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार ने गुरुवार को राज्य ध्वज का अनावरण किया। लाल, सफेद और पीले रंग वाले इस आयताकार ध्वज को नाद ध्वजनाम दिया गया है। ध्वज के बीचों-बीच राज्य का प्रतीक दो सिरों वाला पौराणिक पक्षी गंधा भेरुण्डाभी है। इसी के साथ राज्य में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सिद्धारमैया ने कन्नड अस्मिता का बड़ा दांव खेल दिया है। हालांकि केंद्र द्वारा मंजूरी मिलने के बाद ही आधिकारिक रूप से यह कर्नाटक का राजकीय झंडा कहलाएगा। इसी मद्देनजर युवा पत्रकार आशुतोष अग्निहोत्री ने सिद्धारमैया के नाम एक खुला खत लिखा है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं-

फिर तो हर हाथ में होगा झंडा और झंडा 

श्रीमान सिद्दारमैयाजी   

मुख्यमंत्री, कर्नाटक 

नमस्कार 

आपने बचपन की याद दिला दी। वर्ष 1985-86 के आसपास की बात है। स्कूल में जाना भले ही नहीं सीखा था, लेकिन थोड़ी बहुत समझ आ गई थी। उस समय गांव के प्राइमरी स्कूल में बड़े बब्बा (स्व. रामहरी शुक्ल) हेड मास्टर थे। बड़े भइया कक्षा पांच में पढ़ते थे और पंद्रह अगस्त के लिए कविता तैयार कर रहे थे। बब्बा ने बच्चों के लिए एक और प्रतियोगिता रखी थी, उन्होंने बच्चों से कहा था कि सभी अपने अपने घर से झंडा बनाकर लाएंगे, जिसका झंडा सबसे बड़ा होगा उसे इनाम दिया जाएगा। भइया ने अपनी आर्ट की कॉपी का बड़ा सा पन्ना फाड़ा, उसे केसरिया और हरे रंग में रंगा। बीच में अशोक चक्र बनाया और बांस की डंडी में लगाकर झंडा तैयार कर लिया। झंडा मुझे भी बनाना था, लेकिन मेरे पास में न तो आर्ट की कॉपी थी और न ही उसे तिरंगा रंग में रंगने की कला। कुछ देर तक सोचता रहा फिर घर में पड़ी मां की पुरानी धोती का एक बड़ा सा टुकड़ा फाड़ लिया। बांस की डंडी को बीच से फाड़ा और उसमें धोती फंसाकर मैं भी राष्ट्रप्रेम की अलख जगाने निकल पड़ा।

झंडारोहण के बाद जब बब्बा ने मेरा झंडा देखा तो वह सबकी तुलना में काफी बड़ा था, वह पहले देखकर हंसे फिर मेरे सिर पर हाथ फेरा। कहा तुम्हारा कपड़ा बहुत बड़ा है, लेकिन यह देश का झंडा नहीं हो सकता। देश का झंडा तो बस एक ही है। राष्ट्रप्रेम के रंग में रंगा हुआ तिरंगा, जिसके सम्मान में पूरा देश एक साथ सिर झुकाता है और एक साथ खड़ा हो जाता है। इसमें शीर्ष पर केसरिया रंग के रूप में स्वाधीनता संग्राम में शहीद हुए अमर सेनानियों के रक्त की बूंदें हैं। बीच में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सत्य, शांति और अहिंसा से परिपूर्ण सादगी भरी सोच है। सबसे नीचे हरे रंग के रूप में धरती का सीना चीरकर देश की जनता की भूख शांत करने वाले किसानों की गौरवगाथा है। इन तीनों के मिलन से ही तो हमारा हिन्दुस्तान बना है। 

सिद्दारमैया जी मैं तो उस समय मात्र पांच साल का बच्चा था, लेकिन आप। आप तो देश के एक बड़े प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। बड़े नेता हैं, खुद को बुद्धिमान कहते हैं। देश के लिए मर मिटने की बात करते हैं। फिर आपको समझ नहीं आया कि हिन्दुस्तान हमारा गौरव है, और यहां पर केवल और केवल तिरंगे को ही झंडे की मान्यता है। आपने सोच कैसे लिया कि देश की कर्नाटक प्रदेश के लिए अलग झंडा होगा। क्या आप देश को फिर से रियासतों के रूप में बांटना चाहते हैं। अगर हां, तो आपको यह अधिकार किसने दिया। आपने किस हैसियत से देश की सर्वोच्च अदालत में कर्नाटक प्रदेश के लिए अलग झंडे का प्रस्ताव भेजने की बात कही। क्या सत्ता जाने का डर इतना बड़ा हो गया कि उसके आगे आपने देश की अस्मिता को ही दांव पर लगा दिया।  

एक सवाल और। मान लीजिए आप कर्नाटक का अलग से झंडा हो गया तो जम्मू कश्मीर के बाद कर्नाटक देश का दूसरा ऐसा प्रदेश बन जाएगा जिसका झंडा अलग होगा। कश्मीर को धारा 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है, जिसके तहत इस राज्य का झंडा अलग है। इस कांटे को निकालने और समान नागरिक संहिता के लिए पिछले 70 साल से लड़ाई जारी है। और आपने नया राग अलाप दिया। जरा सोचिए... क्या देश के अन्य राज्यों में अपना अपना झंडा बनाने की होड़ नहीं मचेगी। राज्य ही क्यों, फिर तो हर प्रदेश के जिले का अलग-अलग झंडा होगा। जिले में हर तहसील, और तहसील में हर गांव का अपना अपना झंडा होगा। थोड़ा और विस्तार से कहूं तो आने वाले समय में हर आदमी अपने एक हाथ में डंडा और एक हाथ में झंडा लेकर घूमेगा। फिर लोग झंडे के नाम से ही जाने जाएंगे। काला झंडा, नीला झंडा, पीला झंडा, हरा झंडा, जितने रंग, उतने झंडे। रंग कम पड़ जाएंगे, झंडे नहीं। जिसका झंडा चोरी हो जाएगा, उसकी पहचान गुम हो जाएगी। सोचो, क्या होगा हिन्दुस्तानियों का। क्या होगा हिन्दुस्तान का। बस इतना ही कहूंगा, कि कुर्सी के लिए राजनीति का स्तर इतना न गिराओ कि हिन्दुस्तान की पहचान ही संकट में आ जाए। 

जय हिंद 

आशुतोष अग्निहोत्री 

एक भारतीय

 

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पोल

क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

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