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शीतल राजपूत की रिपोर्ट के बाद सरकार ने लिया ये 'बड़ा' निर्णय

Published At: Tuesday, 05 March, 2019 Last Modified: Tuesday, 05 March, 2019

शीतल राजपूत
वरिष्ठ पत्रकार।।

आखिरकार, ‘जनतंत्र टीवी’ (Jantantra TV) की मुहिम रंग लाई, क्योंकि जम्मू-कश्मीर सरकार अब पुंछ और राजौरी जिले में भारत-पाकिस्तान की सीमा से सटे गांवों में 400 बंकर बनाएगी। सरकार ने यह निर्णय ‘जनतंत्र टीवी’ की उस स्पेशल कवरेज के बाद लिया है, जिसमें एलओसी से सटे नौशेरा सेक्टर के धींग गांव के ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्या को उठाया गया था।

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच भारी तनाव को देखते हुए हमारी टीम ने सीमा से सटे गांवों में जाकर लोगों की परेशानियों को उठाने का बीड़ा उठाया था। हमारी टीम से बातचीत के दौरान यहां के ग्रामीणों का कहना था कि सरकार के दावे हर बार हवाई साबित होते हैं और उन्हें मजबूरी में तनाव और डर के साये में जीना पड़ता है।

दरअसल, ये गांव भारत और पाकिस्तान की सीमा पर स्थित है और बीच में एक पहाड़ी है, जो दोनों क्षेत्रों को अलग करती है। यह इलाका एक घाटी की तरह है, जिसमें कई गांववाले अपने परिवार के साथ रहते हैं। इनमें कई छोटे बच्चे भी शामिल होते हैं। चूंकि यह इलाका बिल्कुल सीमा पर है, ऐसे में पाकिस्तान की ओर से आए दिन सीज फायर का उल्लंघन कर भारतीय सीमा में फायरिंग की जाती है और गोले बरसाए जाते हैं। हालांकि, भारतीय सैनिकों की ओर से भी उन्हें करारा जवाब दिया जाता है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीमा पर रह रहे लोगों की क्या स्थिति होती है। इसमें कोई शक नहीं है कि खतरों से खेलते हुए यहां के निवासी अपनी जिंदगी बिताते आ रहे हैं।

जब हमारी टीम इस गांव में पहुंची तो पाकिस्तान की ओर से लगातार फायरिंग जारी थी। यह एक दिन की बात नहीं है, आए दिन यहां भीषण गोलीबारी और फायरिंग होती है। ग्रामीणों का कहना था, ‘यहां तैनात सैनिक दिल्ली में बैठे नेताओं से काफी बहादुर हैं, नेता तो सिर्फ बातें करते हैं, लेकिन ये सैनिक वास्तविक स्थिति का सामना करते हुए खतरों के बीच रहते हैं।

गांव के सरपंच रमेश चौधरी का ये भी कहना था कि पुलवामा में शहीद हुए सैनिक भी आम परिवारों के बीच से थे। यदि राजनेताओं के बच्चे सेना में जाएं तो उन्हें पता चले कि फौजी किन हालातों में रहते हैं।‘ यहां के गांववाले समय-समय पर पाकिस्तान द्वारा किए जाने वाले वादों पर यकीन नहीं करते हैं। हाल ही का उदाहरण लें तो भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़े जाने की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमराम खान की घोषणा का भी यहां के लोगों ने शुरू में विश्वास नहीं किया। ये बात अलग है अभिनंदन सकुशल अपने वतन लौटकर आने में कामयाब रहे।

यहां के हालात ऐसे हैं कि दोनों ओर से गोलीबारी के बीच बच्चे भी अपनी जिंदगी बिताने के लिए मजबूर हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए भी काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। गोलीबारी की स्थिति में उनके पास कोई तरीका नहीं होता है, उन्हें अपने घर में छिपकर किसी तरह अपनी जान बचानी पड़ती है। गांववासी लंबे समय से यहां बंकर बनाए जाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया जाता है। हमने जब इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और शीर्ष अधिकारियों को समस्या बताई, तब जाकर सरकार ने उनकी सुध ली है और यहां बंकर बनाए जाने का निर्णय लिया है। सरकार का यह काफी अच्छा कदम है, जिसे बहुत पहले ही उठाया जाना चाहिए था, हालांकि इसे अब यही कहा जाएगा कि देर आए, दुरुस्त आए।

इस रिपोर्ट को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैं-



पोल

पुलवामा में आतंकी हमले के बाद हुई मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर क्या है आपका मानना?

कुछ मीडिया संस्थानों ने मनमानी रिपोर्टिंग कर बेवजह तनाव फैलाने का काम किया

ऐसे माहौल में मीडिया की इस तरह की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है और यह गलत नहीं है

भारतीय मीडिया ने समझदारी का परिचय दिया और इसकी रिपोर्टिंग एकदम संतुलित थी

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