Share this Post:
Font Size   16

मीडिया की ऐसी हरकतों ने दे दिया है ये ‘खतरनाक हथियार’, बोले पूरन डावर

Published At: Friday, 15 February, 2019 Last Modified: Friday, 15 February, 2019

पूरन डावर

प्रखर चिंतक एवं विश्लेषक

हिन्दुस्तान को विदेशी ताकतें कम, देश की राजनीति ज्यादा डुबो रही है। भ्रष्टाचार की काट बन गई है-‘राजनीति में फंसाया गया है’। रंगे हाथों पकड़े जायें तो टेप 'डॉक्टर्ड' है, क्योंकि मीडिया ने ऐसी हरकतें कर हथियार दे दिया है। हर चीज़ की पेशबंदी पहले ही होने लगती है। पहले पेशबंदी, बाद में अंजाम दिया जाता है। हद तो तब हो जाती है, जब आतंकवाद का भी राजनीति से बचाव किया जाता है।

आतंकवाद को जितना बल भारत की राजनीति ने दिया है, शायद पाकिस्तान का भी उतना हाथ नहीं है। कामरेडों ने तो हद ही कर रखी है। उनकी तो राजनीति ही ख़ून खराबा की है और नाम ही वामपंथ, जो करना उसका उलट प्रचारित करना। यह भी सही है। सर्जिकल स्ट्राइक को प्रचारित नहीं किया जाना था, लेकिन उस पर शक करके उसे प्रचारित और सिद्ध करने के लिए मज़बूर कर दिया। इसी तरह राफ़ेल की डील को खोलने का अर्थ है अपनी सारी ख़ुफ़िया जानकारी देना। राफ़ेल को किस-किस तकनीक एवं संयंत्रों से सुसज्जित किया गया है, राहुल यह जानते हैं कि सरकार यह जानकारी दे नहीं सकती, इसलिये क़ीमत पर जनता को गुमराह कर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ जारी है।

देश की सीमा एवं सुरक्षा पर क़तई राजनीति नहीं होनी चाहिये। मीडिया को केवल सेना द्वारा दिया गया अधिकृत बयान ही दिया जाना चाहिए। कई बार पीछे हटकर भी नीति बनानी होती है और कई बार सामर्थ्य की कमी या बड़े जोखिम से बचने के लिए भी विपरीत निर्णय लेने होते हैं। यदि मीडिया संयमित नहीं होगा तो सरकार के निर्णय पैनिक में होंगे। विपक्ष द्वारा बॉर्डर एवं आतंक को राजनीति से दूर ऱखे बिना हल कठिन है और समय आ गया है निर्णायक लड़ाई का या एक सम्यक् हल का।



पोल

पुलवामा में आतंकी हमले के बाद हुई मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर क्या है आपका मानना?

कुछ मीडिया संस्थानों ने मनमानी रिपोर्टिंग कर बेवजह तनाव फैलाने का काम किया

ऐसे माहौल में मीडिया की इस तरह की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है और यह गलत नहीं है

भारतीय मीडिया ने समझदारी का परिचय दिया और इसकी रिपोर्टिंग एकदम संतुलित थी

Copyright © 2019 samachar4media.com