Share this Post:
Font Size   16

निर्मलेंदु का सवाल- क्या अंग्रेजों के समय से चली आ रही ये प्रथा अब बदलनी नहीं चाहिए?

Wednesday, 16 May, 2018


निर्मलेंदु

एग्जिक्यूटिव एडिटर

राष्ट्रीय उजाला ।। 

कर्नाटक में सरकार पर धीरे-धीरे बढ़ रहा सस्पेंस। अब भी मैजिक नंबर से 7 सीट दूर है बीजेपी। सिद्धारमैय्या सरकार में मंत्री रहे डीके शिवकुमार ने कहा, हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिश जारी है, लेकिन हम अपने विधायकों को सुरक्षित रखेंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी हमेशा से हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल रही है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।

कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन का बड़ा आरोप- बीजेपी विधायक हॉर्स ट्रेडिंग में विश्वास करते हैं। विधायकों की खरीद फरोख्त शुरू हो चुकी है। हालांकि कुमारस्वामी ने कहा कि हमारे विधायक पार्टी के प्रति वफादार हैं। उन्होंने आरोप लगाया, बीजेपी ने जेडीएस विधायकों को 100-100 करोड़ रुपए, कैबिनेट पोस्ट का वादा किया। कुमार स्वामी ने जवाब में यह भी कहा...  वह एक तोड़ेंगे, तो हम दो छीनेंगे।

सवाल यह उठता है कि क्या सरकार यह खरीद-फरोख्त रोक नहीं सकती। हम इस सवाल को इसलिए भी उठा रहे हैं, क्योंकि लोगों ने किसी एक खास पार्टी के किसी एक खास कैंडिडेट को वोट दिया है। ऐसे में यदि वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में सत्ता के लोभ और करोड़ों के ऑफर के कारण जा रहा है, पद पाने के कारण जा रहा है, तो यह लोगों के साथ विश्वासघात है, नाइंसाफी है।

जो नेता आम लोगों की भावनाओं से खेलते हैं, उनके भरोसे को तोड़ते हैं, उन्हें किसी भी पार्टी से बहिष्कार कर देंगे, तो नेताओं को सबक मिलेगा। क्या अंग्रेजों के समय से चली आ रही प्रथा समय के अनुसार हमें नहीं बदलना चाहिए। जनता के पैसे से ये नेता राज कर रहे हैं। क्या इन नेताओं को सबक सिखाने का कोई रास्ता नहीं है? और मेरी समझ से जो लोग ऐसा करते हैं, उन्हें दोबारा किसी भी पार्टी में टिकट न मिले, इस बात का संविधान में प्रावधान होना चाहिए। क्या इस प्रक्रिया को, इस तरह की खरीद फरोख्त को संविधान बनाकर रोक नहीं सकते हम

 


समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी रायसुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं। 



पोल

क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

Copyright © 2018 samachar4media.com