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हेलेन का डांस तो खूब देखा है, पर उनके बारे में ये नहीं जानते होंगे आप...

Published At: Monday, 20 November, 2017 Last Modified: Monday, 20 November, 2017

हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान ने अपने रविवार परिशिष्ट फुसरत में बॉलिवुड अदाकार हेलेन पर एक लेख प्रकाशित किया है। हिन्दुस्तान में कार्यरत सीनियर फीचर एडिटर जयंती रंगनाथन द्वारा लिखा गया ये लेख वाकई हेलेन के बारे में ऐसी कई बातें बताता है, जिससे उनके फैंस अनभिज्ञ हैं, तो पढ़िया उनका लेख यहां...

थिरकते कदमों की बेताज रानी हेलन

पिया तू अब तो आजा...  बिल्लौरी आंखें, निगाहों में चौकन्नापन और कदमों में रवानगी। और कौन? हेलन एन रिचर्डसन, 21 नवंबर को अपनी जिंदगी के अस्सी वें साल में कदम रख रही हैं। उनकी जिंदगी के कुछ अ-जाने पहलुओं को लेकर आई हैं जयंती रंगनाथन अच्छी बात है कि आज की पीढ़ी भी हेलन को जानती है, उनकी इज्जत करती है और उनकी तारीफ करती हैं। बल्कि उस पीढ़ी से अधिक, जिस समय हेलन बॉलिवुड में सक्रिय थीं।

हेलन आज बहुत नफीस और कायदे की हिंदी बोलती हैं। लगता नहीं कि वे फिरंगी हैं। पचास के दशक मेंजब वे हिंदी फिल्मों में कदम रख रही थीं, उनके मन में डर के साथ-साथ भयानक असुरक्षा थी। किसीभी हाल में उन्हें अपने लिए फिल्मों में जगह बनानी थी, इससे बड़ी बात पैसा कमाना था।

आज जब हेलन पीछे मुड़ कर देखती हैं तो उनको लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री और इंडस्ट्री वालों ने उन्हेंजरूरत से ज्यादा ही दिया है। हेलन ने कुछ सालों पहले अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘ मैं अठारह सालकी थी जब मुंबई आई थी, मुझे नौकरी करनी थी। हमारे जानने वाले फिल्म इंडस्ट्री में थे। उन्होंने कहा,फिल्मों में नाच-गाने का काम होता है। करोगी? मैंने हां कह दिया। मैं कुछ सालों तक ग्रुप में नाचाकरती थी। मुझे बहुत अच्छा लगता था अपना काम। खुश थी कि पैसे मिल रहे हैं, घर में सब लोगों कोखाना मिल रहा है। मुझे इससे ज्यादा जिंदगी में कुछ नहीं चाहिए था।

साठ के दशक में हिंदी फिल्मों की दुनिया में एच बॉम्ब के नाम से मशहूर थीं हेलन। उनकी जिंदगी कीदास्तां किसी फिल्म से कम नहीं। मां बर्मा की और पापा एंग्लो इंडियन। जाहिर था, हेलन ने अपनेमाता-पिता का रूप-रंग पाया। द्वितीय विश्व युद्ध उनके परिवार पर आफत बन कर आया। दूसरे कईशरणार्थियों की तरह हेलन भी अपने परिवार के साथ बर्मा से चल कर भारत आर्इं। उन दिनों के बारे मंेवे कहती हैं, ‘युद्ध को मैंने बहुत पास से देखा है, जिया है। मैं मां और भाई-बहन ना जाने रोज कितनेकिलोमीटर चलते थे। हमारे साथ चलने वाले कई लोग रास्ते में गिरते फिर उठ नहीं पाते। हम सबबीमार पड़ गए थे। जब हम सब असम पहुंचे, तो इतने बीमार थे कि लगा नहीं था कि जिंदा रह पाएंगे।हेलन का परिवार बच गया। पर संघर्ष तो बस शुरू ही हुआ था। मां बीमार थीं। घर को चलाने कीजिम्मेदारी हेलन पर आ गई।

मुझे नाचना बहुत अच्छा लगता था, हालांकि कहीं से ट्रेनिंग नहीं ली। मैंने जब सोलो नाचना शुरूकिया, तो एेसे भी कई लोग थे, जो मुझे पर फब्तियां कसते थे, मेरे नाच को अश्लील मानते थे। मुझेबहुत बुरा लगता था, पर मैं कभी किसी के सामने कुछ कहती नहीं थी। लोगों को लगता था, मुझे हिंदीनहीं आती। पर यह काम तो मैंने मुंबई आते ही सीख लिया था। मैंने अपने आपको कभी स्तरहीन होनेनहीं दिया। मुझे अहसास था कि नाच की गरिमा डांसर को ही रखनी होगी।

वो वक्त था, जब हेलन के डांस नंबर के होने का मतलब फिल्म का सफल होना माना जाता था। हेलन नेहमेशा बहुत शालीनता से बॉडी सूट पहन कर कैब्रे किया। वे अपने काम से बाहर निकलतीं तो बुर्का पहनकर जातीं। इंडस्ट्री वालों और पार्टियों से दूर रहती। उनके लिए यही तसल्ली की बात थी कि वे अपनेऔर परिवार के लिए अच्छा कमा पा रही हैं और अपना मनपसंद काम कर पा रही हैं।

उन्नीस साल की उम्र में फिल्म हावड़ा ब्रिज के लिए मेरा नाम चिंग चिंग चू गाने में डांस करने के बादहेलन ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। हां, काम में जरूर वे तरक्की करती गईं, उनकी निजी जिंदगीतमाम उतार-चढ़ावों से भरी रही। परिवार में पैसे की खनक आते ही भाई-बहनों ने उड़ाना शुरू कर दिया।एक दौर एेसा भी आया जब हेलन को अपने भाई-बहनों को जायदाद से बेदखल करना पड़ा।

उनकी पहली शादी भी नाकामयाब साबित हुई।  19५६ में फिल्म निर्माता-निर्देशक पीएन अरोड़ा सेउनका विवाह हुआ। शुरुआती कुछ साल ठीक रहे, इसके बाद पति ने भी वही किया जो भाई-बहनों नेकिया था। हेलन को इस बात का अहसास हुआ अपनी तमाम संपत्ति गंवा कर। वे बुरी तरह टूट गईं।पति से अलग होने के बाद उन्हें नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू करनी थी। उम्र ढल रहा था, बैंक खालीथा और अपनों ने साथ छोड़ दिया था।

हेलन के एक मित्र उस समय उनके लिए देवदूत की तरह सामने आए। वैसे तो वह उनको 196२ सेजानती थी। काबली खान फिल्म में वे नायिका थीं और सलीम खान खलनायक। उनके बीच दोस्ती होगई। इसके बाद सलीम अभिनय का ख्याल छोड़ नामी स्क्रिप्ट राइटर बन गए और हेलन बन गई नंबरवन कैब्रे डांसर। सत्तर के दशक में जब हेलन अकेली पड़ गईं, सलीम ने उन्हें काम दिलवाना शुरूकिया। जिन फिल्मों की कहानी और संवाद वो लिखते थे, उसमें हेलन को एक रोल या डांस नंबर जरूरदेते थे। ये दोस्ती आगे चल कर प्रगाढ़ बन गई।

हेलन ने सिर्फ बतौर डांसर नहीं, एक कलाकार के रूप में भी काफी काम किया और आखिरकार उनकोलहू के दो रंग फिल्म में सह नायिका के किरदार के लिए बेस्ट परफॉरमेंस का अवार्ड भी मिला।

सलीम से शादी करना भी एक संयोग ही रहा। आज के सुपर स्टार सलमान खान के अब्बा जान सलीमखान अपने हर रिश्ते को बखूबी निभाते रहे हैं। एक समय उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में हेलन को वो कद औरस्थान नहीं मिल रहा, जिसकी वे हकदार हैं। हेलन खुद भी चाहती थीं कि उन्हें एक परिवार का छतमिले। शुरू में सलीम के परिवार वालों ने उनकी शादी पर आपत्ति की, पर धीरे-धीरे हेलन को पूरे खानपरिवार ने बड़ी मां का दर्जा दे दिया और  भरपूर प्यार और सम्मान दिया।

हेलन मानती हैं कि यह उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा समय है। परिवार का साथ उनके लिए बहुतअहम है। अपने डांसिंग करियर को अलविदा करने के बाद वे कई फिल्मों में छोटी भूमिकाएं करतीनजर आईं जैसे हम दिल दे चुके सनम, मोहब्बतें, हीरोइन। अपनी जिंदगी के बारे में वे कहती हैं, ‘जोमिला, वो बहुत ज्यादा है। बस, मुझे संभाल कर रखना अब आया है।


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