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भाजपा ने चार साल में एक नया काम किया है, बोले समाजशास्त्री कमल मोरारका

Published At: Thursday, 20 September, 2018 Last Modified: Thursday, 20 September, 2018

कमल मोरारका

समाजशास्त्री ।।

मुझे बड़ी खुशी हुई कि सत्यपाल मलिक को कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। ये तो मुझे कभी उम्मीद ही नहीं थी। मैंने सुना था कि डोभाल साहब या किसी अन्य पुलिस अफसर को   वहां भेज रहे हैं। सत्यपाल मलिक सोशलिस्ट हैं। उन्होंने चौधरी चरण सिंह के साथ काम किया है। मेरठ के किसान हैं। उनको कश्मीर का राज्यपाल बनाए जाने के क्या संकेत हैं, मेरी समझ में नहीं आया, लेकिन मुझे बहुत खुशी है। इसलिए कि वो सुलझे हुए आदमी हैं। क्या कर पाएंगे और क्या नहीं कर पाएंगे, उसे लेकर मेरी आशंका इसलिए हैं क्योंकि कश्मीर की सबसे बड़ी ताकत, सबसे बड़ी पहचान आर्टिकल 370 है। भाजपा हमेशा से कहती रही है कि इसकी समीक्षा हो। लेकिन, महबूबा के साथ सरकार बनाने के बाद वे 370 भूल गए थे। 

अब सत्यपाल मलिक तभी कुछ कर पाएंगे जब मोदी जी उन्हें कुछ करने देंगे। कायदे से कश्मीर असेंबली को मजबूत बनाने की जरूरत है। कश्मीर का खुद का इलेक्शन कमीशन हो, इससे भाजपा को क्या नुकसान है? देश का क्या नुकसान है? यूनियन ऑफ इंडिया में कश्मीर यह प्रस्ताव तो पास नहीं कर सकता है कि उसे पाकिस्तान के साथ जाना है या सीरिया के साथ जाना है। लेकिन, इतने भर से कश्मीरियों को लगेगा कि हमारी सेल्फ-रिस्पेक्ट हमें वापस मिल गई है। चिदंबरम साहब ने एक दिन कह दिया कि कश्मीर के बच्चे आजादी बोलते हैं, तो उसका मतलब आजादी नहीं बल्कि ऑटोनोमी होती है। इस बयान में क्या आपत्तिजनक है? कश्मीर को अगर वापस ऑटोनोमी मिल जाए तो इसमें क्या दिक्कत है?

प्रधानमंत्री ने पिछले साल लाल किले से कहा था कि न गाली से न गोली से, कश्मीर अपना होगा गले मिलने से। तो फिर इसी विचार को लागू करिए। सत्यपाल मलिक को हिदायत दीजिए कि कश्मीरियों को गले लगाएं और कहें कि तुम्हारे अधिकार को कोई नहीं छिनेगा और 370 के एक-एक पॉइंट को डिस्कस करें कि कौन सा हिस्सा कश्मीरियों के लिए कमजोर हुआ है। सारे कश्मीरी यदि सरकार के साथ बात नहीं करते हैं तो उसका कोई मतलब नहीं है। आपने जो  प्रॉमिस किए हैं, उन्हें पूरा करना ही होगा। फिर देखिए कि रातोंरात कैसे कश्मीर की हालत बदलती है। संतोष भारतीय हमारे मित्र हैं, दो साल पहले उनके साथ हम कश्मीर गए थे। गिलानी साहब से, मीरवाइज मौलवी उमर फारूक से, शब्बीर शाह से, यूसुफ तारिगामी से मिले थे। कुल मिला कर बात ये निकली थी कि यह उपद्रव कोई आज की समस्या नहीं है। धीरे-धीरे यहां की हालत इतनी खराब कर दी कि वो बेचारे क्या कर सकते हैं। अगर वो हिन्दुस्तान के पक्ष में कुछ बोलें तो मुश्किल और दूसरे तरफ बोलें तो पाकिस्तानी हैं।

भाजपा ने एक नया काम किया है चार साल में। आज आम जनता के जेहन में पाकिस्तान एक देश नहीं है। पाकिस्तान एक गाली है। कोई भी बात करे तो पाकिस्तान। पाकिस्तान से हमारा क्या लेना-देना है? हमारा आदर्श पाकिस्तान है क्या? हमारा आदर्श भारत है, हमारा आदर्श चार हजार साल की भारतीय संस्कृति है। उसको तो गाली मत दीजिए। उसमें वादाखिलाफी, झूठ बोलना, छल कपट करना नहीं है। डॉ कर्ण सिंह के बाद पहला राजनीतिक व्यक्ति आपने वहां अपॉइंट किया है। इसके लिए मैं आपको बधाई देता हूं। कांग्रेस ने नहीं किया। कांग्रेस ने वहां बुद्धिमान ब्यूरोक्रेट भेजे थे, बीके नेहरू आदि को। लेकिन आपने जो काम किया है वो बहुत अक्ल का काम है। आपने एक पॉलिटिकल आदमी को भेजा है, शायद यह सोच कर कि कश्मीर एक पॉलिटिकल प्रॉब्लम है। कश्मीर में महबूबा सरकार के फाइनेंस मिनिस्टर ने एक बार कहा कि कश्मीर राजनीतिक नहीं सामाजिक समस्या है। महबूबा मुफ्ती ने उन्हें पद से हटा दिया था। बिल्कुल सही किया था। कश्मीर बिल्कुल पॉलिटिकल प्रॉब्लम है।

मोदी जी वहां जाते हैं तो कहते हैं कि नौकरी दूंगा। आप कोई खैरात बांट रहे है क्या? कश्मीरियों का दिल वापस जीतिए और उसके लिए पूरी अथॉरिटी दीजिए सत्यपाल मलिक को। उनसे कहिए कि कश्मीरियों का दिल जीतें। पुलिस अपना काम कर रही है, आर्मी अपना काम कर रही है और वो तो करेगी ही। कश्मीरियों का दिल जितने की जरूरत है। सत्यपाल मलिक में ये सब हुनर है। वे यह काम कर सकते हैं। कश्मीर में एक नया अध्याय फिर से शुरू हो सकता है। फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला सबको बैठाइए और गर्वनर साहब से कहिए कि सबसे सलाह करें। मोदी जी सिर्फ इतना वादा कर दें कि हिन्दुस्तान ने जिस अग्रीमेंट पर दस्तखत किया है, उससे हम मुकरेंगे नहीं। आप देखिए कश्मीर का समाधान कैसे निकल आता है।



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